मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स दो हजार अंकों से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी ने ढाई प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती दर्ज की। यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप सभी श्रेणियों में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। बाजार की इस मजबूती को भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ने बाजार को ऊपर खींचने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, एनर्जी, ऑटो और मेटल सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार की मजबूती व्यापक आधार पर बनी हुई है।मुख्य सूचकांकों में शामिल अधिकांश शेयर हरे निशान में बंद हुए। बैंकिंग, पावर, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। हालांकि, कुछ आईटी और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में हल्का दबाव देखा गया, जिससे साफ है कि निवेशक सेक्टर चयन को लेकर सतर्क भी बने हुए हैं।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी का रुझान बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब तीन प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की चौड़ाई मजबूत रहने से निवेशकों के भरोसे को बल मिला है।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यापार समझौते से निर्यात आधारित उद्योगों को लंबी अवधि में लाभ मिल सकता है। खासतौर पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट और आईटी सर्विसेज से जुड़े क्षेत्रों में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की स्थिति मजबूत होने से ऑर्डर और राजस्व में इजाफा हो सकता है।
हालांकि जानकारों की राय है कि तेजी के माहौल में भी निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। वैश्विक बाजारों के संकेत, ब्याज दरों में बदलाव और कच्चे तेल की कीमतों जैसे कारकों पर नजर रखना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, मौजूदा संकेत यही बताते हैं कि भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते का असर फिलहाल बाजार में बना रह सकता है।
