कुंभ 2027 का शंखनाद: हरिद्वार में बनेगा भव्य आयोजन का नया रिकॉर्ड, अखाड़ों ने कसी कमर


नई दिल्ली । धर्मनगरी हरिद्वार में होने वाले कुंभ 2027 को लेकर आध्यात्मिक जगत में हलचल तेज हो गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी कुंभ न केवल दिव्य और भव्य होगा, बल्कि यह प्रयागराज के आयोजनों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ने की तैयारी में है। सनातन समाज और संतों के बीच कुंभ को लेकर भारी उत्साह है और अभी से महीनों की गिनती शुरू हो चुकी है।

सभी 13 अखाड़ों का एक सुर में समर्थन आयोजन की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अखाड़ों के बीच का आपसी समन्वय है। महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई बैठक में सभी 13 अखाड़ों ने एक स्वर में कुंभ के मेगा प्लान का समर्थन किया है। किसी भी स्तर पर कोई विरोध नहीं है। निरंजनी अखाड़े में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जहाँ आयोजन की बारीकियों पर चर्चा की जा रही है। इस बार का विशेष आकर्षण निरंजनी अखाड़े द्वारा बनाए गए जापानी महामंडलेश्वर होंगे, जो वैश्विक स्तर पर सनातन धर्म के विस्तार का प्रतीक बनकर उभरेंगे।

प्रयागराज के फैसलों और सुरक्षा पर रुख प्रयागराज कुंभ के दौरान लिए गए कड़े फैसलों और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर बात करते हुए महंत रविंद्र पुरी ने धर्म की शुद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के समय में ‘जूस जिहाद’ और ‘थूक जिहाद’ जैसी घटनाओं ने संतों के मन को विचलित किया है। सनातन धर्म में आहार की शुद्धता सर्वोपरि है, ताकि किसी का धर्म भ्रष्ट न हो।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में हम सबको एक समान दृष्टि से देखते हैं, लेकिन कुंभ की मर्यादा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। 2027 के कुंभ के लिए कौन से नियम और कड़े फैसले लागू होंगे, इसका अंतिम निर्णय सभी 13 अखाड़े सामूहिक बैठक में चर्चा के बाद लेंगे। उचित और अनुचित का विचार कर ही अंतिम गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

भव्यता और प्रबंधन की नई मिसाल कुंभ 2027 को लेकर शासन और प्रशासन के साथ मिलकर एक ऐसी रूपरेखा तैयार की जा रही है जिससे श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित अनुभव मिल सके। हरिद्वार कुंभ को एक उत्सव के रूप में पेश करने की तैयारी है, जहाँ आस्था के साथ-साथ आधुनिक प्रबंधन का भी संगम देखने को मिलेगा।