श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का अभिषेक एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ विधिवत रूप से किया गया। अभिषेक में भक्तों की आस्था के अनुसार विशेष विधियों का पालन किया गया और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता बनी रही।
दोपहर तीन बजे के बाद संध्या पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान को नवीन वस्त्रों से सजा कर मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही भांग, चंदन और सूखे मेवों से दिव्य श्रृंगार कर भगवान को नारंगी माला और मुंड-माला अर्पित की गई। भगवान महाकाल का यह श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र बना।
शिवनवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। हर समय भक्तों का उत्साह देखने लायक है और लोग भगवान के दर्शन के लिए कतार में लगे रहते हैं। मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन-पूजन का अवसर मिल सके।
विशेष रूप से यह बताया गया है कि भगवान श्री महाकालेश्वर 15 फरवरी तक प्रतिदिन सायंकाल अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। शिवनवरात्रि के इन दिनों में महाकालेश्वर का श्रृंगार और विशेष पूजा-आराधना का क्रम जारी रहेगा, जिससे भक्तों को भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
शिवनवरात्रि उत्सव का यह दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से यादगार रहा। मंदिर के पवित्र वातावरण में सुबह से शाम तक चलने वाले अनुष्ठान और श्रृंगार ने भक्तों के मन में एक अलग ही ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया।
