RBI कर रहा खाता जमा बीमा के नियम में बदलाव की तैयारी… जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडल होगा लागू!

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) अप्रैल 2026 से खाता जमा बीमा (Account Deposit Insurance) के लिए एक बड़ा बदलाव लागू करने जा रहा है। अब तक सभी बैंकों से एक समान दर पर वसूला जाने वाला बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) समाप्त होगा और उसकी जगह जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडल लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था में मजबूत और सुरक्षित बैंकों को कम प्रीमियम देना होगा, जबकि जोखिम वाले बैंकों पर अधिक बोझ पड़ेगा।

अब तक भारत में जमा बीमा के लिए समान दर प्रणाली लागू थी, जो 1962 से चला आ रही थी। इसके तहत सभी बैंक अपने जमा पर प्रति 100 रुपये पर 12 पैसे का प्रीमियम जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम को देते थे। बैंक कितना सुरक्षित है या उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है, इसका इस दर पर कोई असर नहीं पड़ता था। आरबीआई का मानना है कि यह व्यवस्था बैंकों को बेहतर जोखिम प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित नहीं करती थी, इसलिए इसमें बदलाव जरूरी था।


क्या है नया जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडल

नए मॉडल के तहत बैंकों को उनकी वित्तीय सेहत और जोखिम प्रोफाइल के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इसके लिए पूंजी पर्याप्तता, एनपीए, लाभप्रदता, तरलता और पर्यवेक्षण रेटिंग जैसे मानकों को आधार बनाया जाएगा। अप्रैल 2026 से बैंकों को ए, बी, सी और डी-चार जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। कम जोखिम वाले सुरक्षित बैंक कम प्रीमियम चुकाएंगे, जबकि अधिक जोखिम वाले बैंकों को ज्यादा प्रीमियम देना होगा।


कितनी होगी प्रीमियम दर

सबसे सुरक्षित बैंकों को अब प्रति 100 रुपये जमा पर सिर्फ आठ पैसे का प्रीमियम देना पड़ सकता है, जो मौजूदा दर से करीब 33 फीसदी कम है। श्रेणी बी के बैंक 10 पैसे, श्रेणी सी के बैंक 11 पैसे और श्रेणी डी (सबसे अधिक जोखिम) के बैंक 12 पैसे प्रीमियम का भुगतान करेंगे। इसका सीधा फायदा मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंकों को मिलेगा, जबकि कमजोर बैंकों पर दबाव बढ़ेगा।


बैंकों के जोखिम का आकलन कैसे होगा

जोखिम आकलन के लिए दो मॉडल अपनाए जाएंगे। टियर-1 मॉडल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) पर लागू होगा, जिसमें पर्यवेक्षी रेटिंग, कैमल्स मानक और जमा बीमा कोष पर संभावित नुकसान को आधार बनाया जाएगा। टियर-2 मॉडल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के लिए होगा, जिसमें मात्रात्मक संकेतकों और संभावित नुकसान पर ध्यान दिया जाएगा।


पुराने और स्थिर बैंकों को अतिरिक्त राहत

आरबीआई ने इस व्यवस्था में एक ‘विंटेज इंसेंटिव’ भी जोड़ा है। जिन बैंकों का रिकॉर्ड लंबे समय तक स्थिर रहा है और जिन पर कोई बड़ा नियामकीय प्रतिबंध या पुनर्गठन नहीं हुआ है, उन्हें अतिरिक्त छूट मिलेगी। यह छूट सालाना एक फीसदी तक हो सकती है और अधिकतम 25 फीसदी तक जा सकती है।


जो बैंक इस ढांचे से बाहर रहेंगे

लोकल एरिया बैंक और पेमेंट्स बैंक जोखिम-आधारित प्रीमियम व्यवस्था से बाहर रहेंगे और पहले की तरह ₹100 जमा पर 12 पैसे की समान दर चुकाते रहेंगे। डेटा सीमाओं के कारण इनके लिए सटीक जोखिम मॉडलिंग संभव नहीं है। कुल प्रीमियम संग्रह में इनका योगदान 1% से भी कम है।


जमाकर्ताओं के लिए क्या बदलेगा?

इस बदलाव से जमाकर्ताओं की जमा सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जमा बीमा कवर की सीमा और भुगतान प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी। यानी बैंक डूबने की स्थिति में जमाकर्ताओं को मिलने वाली बीमा राशि में कोई कटौती नहीं होगी। हालांकि, मजबूत बैंकों के लिए लागत घटने से आगे चलकर इसका अप्रत्यक्ष लाभ ग्राहकों तक पहुंच सकता है।


जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम क्या है

जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम, भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। यह भारत में बैंक जमाकर्ताओं को जमा बीमा सुरक्षा प्रदान करता है, जो वर्तमान में प्रति जमाकर्ता ₹पांच लाख तक है। जमा बीमा योजना आरबीआई द्वारा लाइसेंस प्राप्त सभी बैंकों (वाणिज्यिक और सहकारी) के लिए अनिवार्य है। 31 मार्च, 2025 तक पंजीकृत बीमित बैंकों की संख्या 1,982 थी।

– आपकी जमा पहले की तरह सुरक्षित रहेगी, जमा बीमा कवर में कोई बदलाव नहीं।
– मजबूत बैंकों में भरोसा और बढ़ेगा।
– बैंक लागत घटने से बढ़ा सकते हैं ब्याज दर, यानी बेहतर एफडी दर और लोन पर कम ब्याज दर।
– कमजोर बैंकों पर बढ़ेगा दबाव।
– बैंक चुनते समय सतर्कता बढ़ेगी।
– बैंकिंग सिस्टम ज्यादा सुरक्षित होगा।