प्रेमानंद महाराज का असली नाम और उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा


नई दिल्ली । प्रेमानंद महाराज का नाम आज के समय में किसी आध्यात्मिक चमत्कार से कम नहीं माना जाता है। उनका जीवन आत्मसमर्पण, भक्ति और अडिग विश्वास का प्रतीक बन चुका है। जहां एक ओर चिकित्सकीय दृष्टिकोण से उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं और वे डायलिसिस पर हैं वहीं दूसरी ओर प्रेमानंद महाराज हर रात 2 बजे उठकर वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और अपने भक्तों को ऊर्जा से भरपूर प्रवचन देते हैं। यह असाधारण साहस और भक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

अनिरुद्ध से प्रेमानंद महाराज तक का सफर

प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के एक छोटे से गाँव सरसौल में हुआ था। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनका पालन-पोषण एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण परिवार में हुआ, जहां भक्ति के संस्कार उन्हें विरासत में मिले थे। उनके दादा एक सन्यासी थे और माता-पिता भी धार्मिक प्रवृत्तियों के अनुयायी थे। बचपन से ही अनिरुद्ध का झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था। वह बाकी बच्चों की तरह खेल-कूद में व्यस्त नहीं रहते थे बल्कि अक्सर ध्यान और मंत्र जाप में लीन रहते थे।13 वर्ष की उम्र में, जब अन्य बच्चे अपने भविष्य के सपनों में खोए रहते हैं, अनिरुद्ध ने घर छोड़कर संन्यास की राह पकड़ ली। इस समय से उनकी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत हुई और उन्होंने नैमिषारण्य में गहरी तपस्या की। यहां उन्हें आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी के नाम से पहचाना गया।

शिव भक्ति से कृष्ण प्रेम तक का सफर

आध्यात्मिकता के प्रति अपनी गहरी निष्ठा के कारण अनिरुद्ध ने भगवान शिव की उपासना की और मोक्ष प्राप्ति के लिए जीवन समर्पित कर दिया। लेकिन एक दिन उन्हें किसी संत के माध्यम से वृंदावन की महिमा और भगवान कृष्ण की रासलीला के बारे में ज्ञात हुआ। इसके बाद उन्होंने महादेव की आज्ञा लेकर वृंदावन की यात्रा की और वहां पहुंचते ही उनका दिल पूरी तरह से बदल गया। वृंदावन की रज में कदम रखते ही उन्होंने राधा वल्लभ संप्रदाय को अपनाया और चैतन्य महाप्रभु की भक्ति पद्धति से प्रभावित हुए। यहीं पर उनकी मुलाकात उनके गुरु गौरांगी शरण महाराज से हुई। गुरु के साथ बिताए गए समय में उन्होंने 10 वर्षों तक सेवा की, और राधा रानी के चरणों में अनन्य भक्ति के कारण उन्हें नया नाम मिला: प्रेमानंद गोविंद शरण, जिसे आज पूरी दुनिया प्रेमानंद महाराज के नाम से जानती है।

किडनियां फेल, फिर भी भक्ति का पावर हाउस

प्रेमानंद महाराज का जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से फेल हो चुकी हैं और वे लंबे समय से डायलिसिस पर हैं। ऐसी स्थिति में किसी सामान्य व्यक्ति के लिए बिस्तर से उठना भी मुश्किल होता, लेकिन प्रेमानंद महाराज की भक्ति और आत्मविश्वास की कोई सीमा नहीं। हर रात 2 बजे उठकर वे वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और घंटों तक अपने भक्तों को ऊर्जावान प्रवचन देते हैं। उनकी भक्ति की शक्ति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी किडनियों का नाम राधा और कृष्ण रखा है। वे अक्सर कहते हैं कि यह शरीर केवल राधा रानी की सेवा का एक साधन है, और जब तक उनकी इच्छा है, यह शरीर कार्य करता रहेगा। प्रेमानंद महाराज की भक्ति का ये अद्वितीय रूप उनके भक्तों के लिए एक निरंतर प्रेरणा स्रोत है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि आत्मविश्वास, भक्ति और विश्वास के बल पर कोई भी कठिनाई अजेय नहीं होती।