ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग का तांडव, कोचिंग जा रहे मासूम पर हमला, 10 दिन में 872 लोग डॉग बाइट के शिकार


ग्वालियर । ग्वालियर में शनिवार सुबह कोचिंग जा रहे आठ वर्षीय मासूम अहिम पर अचानक एक स्ट्रीट डॉग ने हमला कर दिया। बच्चे की जांघ को जबड़े में दबाकर कुत्ते ने सड़क पर घसीटना शुरू किया। आसपास के लोग और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे को डॉग के चंगुल से छुड़ाया। घायल मासूम को तुरंत जेएएच अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांघ पर टांके लगाए।

घटना माधौगंज थाना क्षेत्र के लक्कड़खाना नाले के पास हुई। बच्चे के पिता दीन मोहम्मद ने बताया कि हमला करने वाला कुत्ता मानसिक रूप से अस्वस्थ है और लंबे समय से इलाके में घूम रहा है। इसके झुंड ने पहले भी कई लोगों पर हमला किया, लेकिन नगर निगम से शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अहिम पर हमला इतने अचानक हुआ कि बच्चे को कोई तैयारी नहीं थी। कुत्ते ने उसकी जांघ को जबड़े में दबाकर सड़क पर घसीटा। मौके पर पहुंचे लोगों ने कुत्ते को भगाया और बच्चे को सुरक्षित किया। अब अहिम गहरे सदमे और डर में है।

ग्वालियर में डॉग बाइट का डर:
पिछले कुछ दिनों में शहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। सिर्फ 1 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक 872 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी को डॉग बाइट की घटनाओं में शामिल किया गया।

जयारोग्य अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक 18,993, जबकि 2025 में 8,606 डॉग बाइट के मामले सामने आए। इस तरह केवल दो साल में कुल 27,593 लोग कुत्तों के काटने से प्रभावित हुए।

नगर निगम का कहना है कि रोजाना करीब 40 कुत्ते पकड़े जाते हैं और 25 कुत्तों की नसबंदी की जाती है। शहर में केवल एक एबीसी सेंटर है, जो बिरला नगर पुल के नीचे संचालित होता है। इसके बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण से बाहर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरनाक स्थिति है। शहर के गलियों, मोहल्लों और चौराहों तक डॉग बाइट का डर आम हो गया है।

नगर निगम से जनता की मांग है कि आवारा कुत्तों की संख्या कम करने और नसबंदी पर विशेष ध्यान दिया जाए।

ग्वालियर में इस तरह की घटनाएं आवारा कुत्तों के असंगठित झुंडों की वजह से लगातार बढ़ रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर नगर निगम की सुरक्षा व्यवस्था और सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाएगा और शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
यह घटना बच्चों की सुरक्षा, नगर निगम की जवाबदेही और आवारा कुत्तों के नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है। ग्वालियरवासियों की चिंता बढ़ती जा रही है, और समय रहते कदम न उठाए जाने पर हालात और गंभीर हो सकते हैं।