स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

नई दिल्ली। आज के दौर में युवाएं फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर घरों की रसोई तक, हर जगह हेल्दी खाने और व्यायाम की चर्चा होने लगी है। लेकिन इसके बावजूद कई महिलाएं हेल्दी डायट लेने के बावजूद वजन घटने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ता देख रही हैं।

मेटाबॉलिज्म और पाचन शक्ति का महत्व

आयुर्वेद के अनुसार शरीर केवल भोजन से नहीं बल्कि ‘अग्नि’ यानी पाचन शक्ति से चलता है। विज्ञान इसे मेटाबॉलिज्म कहता है। अगर यह सिस्टम धीमा या गड़बड़ हो जाए, तो सबसे पौष्टिक खाना भी शरीर में जाकर फैट का रूप ले सकता है। यही कारण है कि हेल्दी खाना और वजन घटाना हमेशा साथ नहीं चलते।

हेल्दी फूड्स की मात्रा का असर

एक आम गलतफहमी यह है कि हेल्दी चीजें जितनी चाहें उतनी खाई जा सकती हैं। ड्राई फ्रूट्स, घी, शहद, मूंगफली का मक्खन या एवोकाडो जैसी चीजें पौष्टिक होते हुए भी भारी होती हैं और शरीर को इन्हें पचाने में ज्यादा समय लगता है। कैलोरी की अधिकता होने पर शरीर अतिरिक्त ऊर्जा फैट के रूप में जमा कर देता है।

छिपी चीनी और प्रोसेस्ड हेल्दी फूड

आज बाजार में मिलने वाले कई ‘हेल्दी’ प्रोडक्ट भी वजन बढ़ाने में योगदान करते हैं। लो-फैट दही, मल्टीग्रेन बिस्कुट और एनर्जी बार में छिपी शुगर इंसुलिन बढ़ाती है, जिससे शरीर फैट स्टोर करने लगता है। आयुर्वेद में अत्यधिक मीठा कफ दोष बढ़ाने वाला माना गया है।

हार्मोन और शारीरिक असंतुलन

कई बार वजन बढ़ने की वजह खाना नहीं बल्कि हार्मोन असंतुलन होता है। थायरॉइड, पीसीओएस या लंबे समय तक तनाव में रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है। आयुर्वेद में इसे दोषों का असंतुलन कहा गया है, खासकर कफ दोष का बढ़ना। ऐसे में शरीर ऊर्जा जलाने के बजाय जमा करने लगता है।

नींद, मानसिक स्थिति और मांसपेशियों का योगदान

अधूरी नींद पाचन शक्ति को कमजोर करती है। विज्ञान के अनुसार, कम सोने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ‘घ्रेलिन’ बढ़ता और पेट भरने वाला हार्मोन ‘लेप्टिन’ घट जाता है। साथ ही उम्र बढ़ने या शारीरिक गतिविधि कम होने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है क्योंकि मांसपेशियों की कमी से कैलोरी बर्न कम होती है।

हेल्दी खाने के बावजूद वजन बढ़ना मेटाबॉलिज्म, हार्मोन असंतुलन, नींद और शारीरिक सक्रियता पर निर्भर करता है, इसलिए सिर्फ डायट से परिणाम नहीं मिलते।