नया रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन के खुले और कलात्मक वातावरण में आयोजित यह महोत्सव अपनी ऐतिहासिकता और आधुनिकता के संगम के कारण पहले ही दिन चर्चा में आ गया है। 23 जनवरी से शुरू होकर 25 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और देश की व्यापक साहित्यिक परंपराओं का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है। आयोजन स्थल की सजावट और साहित्यिक सत्रों की रूपरेखा ने राजधानी के साहित्यिक प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित किया है।
इस तीन दिवसीय उत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देशभर से 120 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिग्गज कवि, मर्मज्ञ लेखक अनुभवी पत्रकार, प्रखर शिक्षाविद और चिंतक सहभागिता कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वक्ताओं ने आदि से अनादि तक विषय की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि साहित्य ही वह सेतु है जो हमारी आदिम जड़ों को अनंत भविष्य से जोड़ता है।
अगले दो दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन के विभिन्न मंचों पर कविता पाठ, कहानी चर्चा, वैचारिक विमर्श छत्तीसगढ़ी साहित्य का भविष्य और पत्रकारिता की चुनौतियों जैसे विषयों पर गहन संवाद होगा। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के मंच न केवल स्थापित लेखकों को जगह देते हैं, बल्कि नए उभरते रचनाकारों को भी एक नई दृष्टि प्रदान करते हैं। वसंत की बयार के बीच शुरू हुए इस उत्सव ने रायपुर को साहित्यिक चेतना से सराबोर कर दिया है।
