ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिवार की शाम शनि देव की पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय मानी जाती है। इस दौरान पीपल के वृक्ष के पास दीप प्रज्वलन कर परिक्रमा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है। पीपल को ब्रह्मा विष्णु और महेश का स्वरूप माना गया है और शनि देव का भी इससे विशेष संबंध बताया गया है।
शनि दोष से बचाव के लिए हनुमान जी की उपासना को भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी की भक्ति से शनि देव के कष्टकारी प्रभाव शांत हो जाते हैं। शनिवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से भय बाधा और मानसिक तनाव में कमी आने की मान्यता है। यह उपाय उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है जो लंबे समय से कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
दान को शनि दोष निवारण का अहम हिस्सा माना गया है। शनिवार के दिन जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से कर्म सुधारने का अवसर मिलता है। शास्त्रों में बताया गया है कि शनि देव दान और सेवा से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही शनि मंत्र का नियमित जाप भी लाभकारी माना जाता है। मंत्र जाप से आत्मसंयम धैर्य और सहनशीलता बढ़ती है जो शनि ग्रह के मूल गुण माने जाते हैं।हालांकि शनिवार के दिन कुछ बातों में सावधानी बरतने की सलाह भी दी जाती है। इस दिन जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बचना चाहिए। क्रोध अहंकार और दूसरों को कष्ट पहुंचाने वाले व्यवहार से दूर रहना शुभ माना गया है। सरल जीवनशैली संयमित दिनचर्या और जिम्मेदारीपूर्ण आचरण शनि देव को प्रसन्न करने का आधार माने जाते हैं।
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि शनिवार के उपाय केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। ये उपाय व्यक्ति के जीवन में अनुशासन धैर्य और जिम्मेदारी का भाव विकसित करते हैं। नियमित रूप से इन परंपराओं को अपनाने से मानसिक शांति आत्मविश्वास और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
