बीसीसीआई का वो सख्त नियम क्या है? दरअसल, बीसीसीआई ने साल 2016 में जूनियर क्रिकेट के ढांचे में एक बड़ा बदलाव किया था। इस नियम के तहत कोई भी भारतीय खिलाड़ी अपने करियर में केवल एक ही बार अंडर-19 वर्ल्ड कप में हिस्सा ले सकता है। बोर्ड का मानना है कि ऐसा करने से नए खिलाड़ियों को मौका मिलता है और टैलेंट पूल का दायरा बढ़ता है। यदि किसी खिलाड़ी को एक से ज्यादा बार मौका दिया जाए, तो वह नए टैलेंट का रास्ता रोकता है। यही कारण है कि वैभव सूर्यवंशी अब भविष्य में दोबारा कभी भी भारत की अंडर-19 विश्व कप टीम की जर्सी नहीं पहन पाएंगे।
इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं ये नाम 2016 से पहले नियम अलग थे। उस समय कई खिलाड़ियों ने अपनी उम्र के आधार पर एक से अधिक बार इस टूर्नामेंट में भाग लिया था। भारतीय टीम के मौजूदा सितारे रवींद्र जडेजा, सरफराज खान, आवेश खान, विजय जोल और रिकी भुई ऐसे नाम हैं जिन्होंने एक से ज्यादा बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला है। सरफराज खान ने तो दो वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर काफी सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन वैभव अब इस फेहरिस्त में शामिल नहीं हो सकेंगे।
आगे क्या है वैभव का रास्ता? भले ही वैभव अब अंडर-19 वर्ल्ड कप न खेल पाएं, लेकिन उनकी इस उम्र में ऐसी परिपक्व बल्लेबाजी ने उनके लिए टीम इंडिया के सीनियर स्क्वॉड के दरवाजे खोल दिए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीसीसीआई अब उन्हें सीधे घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) और इंडिया-ए के दौरों पर भेजकर सीनियर टीम के लिए तैयार करेगा। वैभव ने जो तबाही 14 साल की उम्र में मचाई है, उसने साबित कर दिया है कि वह ‘लंबी रेस के घोड़े’ हैं और अब उनका लक्ष्य सीधे नीली जर्सी पहनकर सीनियर वर्ल्ड कप में तिरंगा लहराना होगा।
