यह छापेमारी श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स नाम की यूनिट पर की गई, जहां कथित तौर पर पानी, मिल्क पाउडर, कास्टिक सोडा, रिफाइंड पामोलिन तेल, सोयाबीन तेल, डिटर्जेंट पाउडर और यूरिया खाद मिलाकर बड़े पैमाने पर नकली दूध तैयार किया जा रहा था। यह मिलावटी दूध आसपास के कई गांवों में पाउच में पैक कर सप्लाई किया जाता था, जिससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा था।
300 लीटर असली दूध से बनाते थे 1800 लीटर नकली दूध
जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद संगठित तरीके से इस धंधे को चला रहे थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपी रोजाना लगभग 300 लीटर असली दूध का इस्तेमाल करते थे। इसमें विभिन्न केमिकल और पाउडर मिलाकर वे 1,700 से 1,800 लीटर तक नकली दूध तैयार कर लेते थे। यानी कम मात्रा में असली दूध को आधार बनाकर उसकी मात्रा छह गुना तक बढ़ा दी जाती थी। इसके बाद इस दूध को पाउच में पैक कर गांव-गांव पहुंचाया जाता था, जहां आम लोग इसे असली समझकर इस्तेमाल करते थे। इसी तरह मिलावटी छाछ भी तैयार की जाती थी, जिससे यह कारोबार और अधिक फैल गया था।
छापे में मिली खतरनाक सामग्री
लोकल क्राइम ब्रांच, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी FSL और फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर इस फैक्ट्री पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में खतरनाक केमिकल और मिलावट में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया। जब्त किए गए सामान में 450 किलो व्हे पाउडर, 625 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर, 300 किलो प्रीमियम SMP पाउडर, यूरिया खाद, कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर, सोयाबीन तेल और पामोलिन तेल शामिल हैं। इसके अलावा मौके से 1,962 लीटर तैयार मिलावटी दूध और 1,180 लीटर मिलावटी छाछ भी बरामद की गई, जिन्हें बाजार में भेजने की तैयारी थी। अधिकारियों के अनुसार, इन केमिकल्स का इस्तेमाल दूध की मोटाई, झाग और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए किया जाता था, ताकि देखने में यह असली लगे और ग्राहक आसानी से धोखा खा जाएं।
स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक
विशेषज्ञों का मानना है कि डिटर्जेंट, यूरिया और कास्टिक सोडा जैसे तत्वों का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी दूध का सेवन करने से पेट, किडनी और लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है।
पांच साल से चल रहा था गोरखधंधा
जांच में यह भी सामने आया है कि यह फैक्ट्री करीब पांच वर्षों से लगातार चल रही थी। इतने लंबे समय तक इस यूनिट का संचालन होना इस बात का संकेत है कि यह नेटवर्क काफी संगठित और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था। गांवों में इसकी नियमित सप्लाई के कारण इसका दायरा भी काफी बड़ा हो गया था। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से दूध बनाने और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण भी बरामद किए गए। अधिकारियों ने मौके पर ही यूनिट को सील कर दिया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
एक नाबालिग समेत पांच गिरफ्तार
इस मामले में एक नाबालिग सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस धंधे से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे और सप्लाई चेन कितनी दूर तक फैली हुई थी। जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही, जिन इलाकों में यह दूध सप्लाई किया गया, वहां लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मिलावट के खिलाफ सख्ती जारी
फूड एंड ड्रग्स विभाग ने साफ किया है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि आम लोगों की सेहत से कोई समझौता न हो।
