अमेरिका ईरान तनाव चरम पर ट्रंप की सख्त चेतावनी दूतावास ने कहा स्ट्रेट पहले से खुला


नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है जहां बयानबाजी के साथ साथ सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं भी तेज हो गई हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं।

ट्रंप ने ईरान को सोमवार तक की मोहलत देते हुए चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोला गया तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेहद सख्त लहजे में लिखा कि ईरान के लिए आने वाला दिन पावर प्लांट और ब्रिज डे जैसा साबित हो सकता है जो अभूतपूर्व होगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि सैन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है।

हालांकि ईरान की ओर से इस पर तुरंत प्रतिक्रिया आई है। फिनलैंड में स्थित ईरानी दूतावास ने ट्रंप के बयान को खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पहले से खुला हुआ है और उसके मित्र देशों के जहाजों के लिए किसी तरह की बाधा नहीं है। दूतावास ने यह भी कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देते समय संयम और तथ्यों का ध्यान रखना जरूरी है।

ईरान की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि वह अमेरिकी आरोपों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और अपने रुख पर कायम है। साथ ही उसने ट्रंप के बयान के लहजे पर भी सवाल उठाते हुए अप्रत्यक्ष रूप से इसे गैर जिम्मेदाराना बताया है।

इस बीच ट्रंप ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में भी अपने सख्त रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान तय समयसीमा तक कदम नहीं उठाता है तो उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान अपने पूरे देश में मौजूद पावर प्लांट्स और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं खो सकता है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं लेकिन नतीजा अभी तक सामने नहीं आया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं लेकिन यदि ईरान ने सहयोग नहीं किया तो अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

कुल मिलाकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है जहां एक ओर कूटनीतिक बातचीत जारी है वहीं दूसरी ओर सैन्य टकराव का खतरा भी मंडरा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में कोई समाधान निकलता है या फिर यह तनाव और ज्यादा गहरा होकर बड़े संघर्ष का रूप ले लेता है।