Nirmala Sitharaman ने जताया ‘मिथोस AI’ से अभूतपूर्व खतरा, बैंकों को सतर्क रहने की सलाह


नई दिल्ली ।  तेजी से बदलती तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब सिर्फ अवसर ही नहीं, बल्कि बड़े जोखिम भी लेकर आ रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने ‘मिथोस एआई’ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह नया एआई मॉडल बैंकिंग सेक्टर के लिए “अभूतपूर्व खतरा” बन सकता है, इसलिए सभी बैंकों को सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है।
एआई का बढ़ता प्रभाव और खतरे
वित्त मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अमेरिकी कंपनी Anthropic द्वारा विकसित ‘मिथोस एआई’ अपनी उन्नत क्षमताओं के कारण दुनियाभर में चर्चा में है। हालांकि इसकी ताकत जितनी बड़ी है, उससे जुड़े जोखिम भी उतने ही गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के एआई मॉडल साइबर फ्रॉड, डेटा चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामलों को और जटिल बना सकते हैं।
सरकार की नजर, वैश्विक स्तर पर सहयोग
सीतारमण ने स्पष्ट किया कि भारत इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर इस तकनीक के जोखिमों का आकलन कर रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित बना रहे।
बैंकों को चेतावनी: अपडेट करें सुरक्षा ढांचा
उन्होंने कहा कि भारतीय बैंक फिलहाल मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन तेजी से बदलती तकनीक के कारण मौजूदा नियम और सुरक्षा व्यवस्था को अपडेट करना बेहद जरूरी हो गया है। बैंकों को आपसी सहयोग बढ़ाने और नई चुनौतियों से मिलकर निपटने की सलाह दी गई है। इस दिशा में भारतीय बैंक संघ (IBA) को समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।
मजबूत अर्थव्यवस्था दे रही सहारा
इससे पहले भी वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा कि देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और आर्थिक स्थिति स्थिर है, जिससे Reserve Bank of India को नीतिगत फैसले लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता मिलती है।
नीतिगत फैसलों के लिए पर्याप्त गुंजाइश
6 अप्रैल को National Institute of Public Finance and Policy (NIPFP) के कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा था कि भारत के पास सरकारी पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) जारी रखने, जरूरत पड़ने पर ब्याज दरों में कटौती करने और संकटग्रस्त सेक्टर को सहायता देने की पर्याप्त क्षमता है। उन्होंने इसे पिछले एक दशक के वित्तीय अनुशासन का परिणाम बताया।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के इस नए दौर में बैंकों को तकनीकी रूप से और ज्यादा सशक्त होना होगा। साइबर सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और एआई मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना अब समय की मांग बन गया है।