सोने की कीमतों में स्थिरता, US-Iran तनाव और ऊर्जा संकट से बाजार सतर्क..

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय सोने की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद सोने में किसी तरह की बड़ी तेजी या गिरावट देखने को नहीं मिली है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

सोने का कारोबार एक सीमित दायरे में घूम रहा है, जहां न तो मजबूत खरीदारी का दबाव दिख रहा है और न ही भारी बिकवाली का। बाजार में हलचल जरूर है, लेकिन घबराहट वाली स्थिति नहीं बनी है। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाक्रमों के स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा ध्यान इस समय होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी स्थिति पर है, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद अहम रास्ता माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है, इसलिए बाजार इसे गंभीरता से देख रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी वजह से केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। आम तौर पर जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं या कटौती की संभावना कम होती है, तो सोने पर दबाव देखा जाता है, क्योंकि यह कोई रिटर्न देने वाला निवेश नहीं होता।

इसके बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों का भरोसा सोने पर कायम है। वैश्विक स्तर पर कई केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीद कर रहे हैं, जिससे बाजार को सपोर्ट मिल रहा है। वहीं निजी निवेशक भी धीरे-धीरे सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

चांदी और अन्य कीमती धातुओं में हल्की तेजी देखने को मिल रही है, जबकि डॉलर इंडेक्स में मामूली कमजोरी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की नीति और वैश्विक राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी।

मौजूदा समय में सोना स्थिर स्थिति में बना हुआ है और बाजार में कोई बड़ा ट्रेंड फिलहाल देखने को नहीं मिल रहा है। निवेशक अभी भी वैश्विक तनाव और ऊर्जा बाजार की दिशा साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।