रिपोर्ट्स के अनुसार सिंध में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कम संक्रमण वाले मौसम में भी वायरस का सक्रिय रहना बेहद चिंताजनक संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण के लगातार फैलने का संकेत देता है और इसे रोकने के लिए तुरंत सख्त कदम उठाने होंगे।
WHO और यूनिसेफ भी अलर्ट
बैठक में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ़, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन समेत कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधियों ने कहा कि अफ्रीका में सफल रही रणनीतियों को अब पाकिस्तान में भी लागू किया जा रहा है ताकि वायरस के फैलाव को रोका जा सके।
इस साल सामने आए कई मामले
रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू और उत्तरी वजीरिस्तान से पोलियो के नए मामले सामने आए थे। इस साल अब तक पाकिस्तान में पोलियो के कई मामलों की पुष्टि हो चुकी है।विशेषज्ञों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान दुनिया के ऐसे देश हैं जहां अब भी पोलियो वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।
टीकाकरण अभियान के सामने बड़ी चुनौती
पोलियो उन्मूलन अभियान को सुरक्षा और जागरूकता दोनों स्तर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में टीकाकरण टीमों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं।
इसके अलावा टीकों को लेकर फैली गलत जानकारी और अभिभावकों द्वारा पोलियो ड्रॉप्स से इनकार भी बड़ी समस्या बन चुका है। केवल कराची में ही हजारों परिवारों ने बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने से मना कर दिया है, जिससे वायरस के खतरे को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
