सितंबर में शनि की नजर इन 3 राशियों पर, बढ़ सकती हैं मुश्किलें, धैर्य की होगी परीक्षा


नई दिल्ली। सितंबर का महीना ज्योतिष के लिहाज से कई बदलाव लेकर आ सकता है। कर्म और न्याय के कारक माने जाने वाले शनि देव इस दौरान मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक शनि की दृष्टि इन राशियों के स्वामी ग्रहों पर पड़ रही है, जिसके चलते कामकाज से लेकर निर्णय लेने और आर्थिक मामलों तक में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सितंबर में शनि देव की दृष्टि सिंह राशि के स्वामी सूर्य तथा मिथुन और कन्या राशि के स्वामी बुध पर रहेगी। इसका असर इन तीनों राशियों के जातकों पर अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है। शनि को कर्म प्रधान ग्रह माना जाता है, इसलिए मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी से काम करने वालों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। वहीं आलस्य या बिना मेहनत के सफलता पाने की कोशिश नुकसान पहुंचा सकती है।

मिथुन: फैसलों में जल्दबाजी से बचें

मिथुन राशि के स्वामी बुध पर शनि की दृष्टि होने के कारण सितंबर में मानसिक दबाव और असमंजस की स्थिति बन सकती है। नौकरी या कारोबार में सहकर्मियों और अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान संयम रखना जरूरी होगा। जल्दबाजी में लिया गया कोई कारोबारी फैसला परेशानी बढ़ा सकता है।

क्या करें: अपनी क्षमता पर विश्वास रखें और किसी भी काम में शॉर्टकट लेने से बचें। जितनी मेहनत और प्रयास खुद करेंगे, सफलता उतनी ही टिकाऊ रहने की संभावना है।

सिंह: काम का दबाव बढ़ सकता है

सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं। ज्योतिष में सूर्य और शनि के बीच शत्रुता का संबंध माना जाता है। ऐसे में सिंह राशि वालों के लिए सितंबर का समय धैर्य और संयम की परीक्षा लेने वाला हो सकता है। कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां और काम का बोझ बढ़ सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बनाने में भी अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।

मान-सम्मान से जुड़े मामलों में सतर्क रहना बेहतर होगा।

क्या करें: अहंकार से दूरी बनाकर रखें। मेहनत को प्राथमिकता दें और केवल भाग्य के भरोसे कोई नया जोखिम लेने से बचें।

कन्या: काम में देरी, खर्च पर नियंत्रण जरूरी

कन्या राशि के स्वामी बुध हैं और इस राशि पर भी शनि की दृष्टि का प्रभाव बताया गया है। इसके चलते रोजमर्रा के कामों और बनाई गई योजनाओं में रुकावट या देरी हो सकती है। आर्थिक मामलों में कोई भी निर्णय सोच-समझकर लेना बेहतर रहेगा।

इस दौरान गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखने के साथ सेहत को लेकर भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

क्या करें: आलस्य को हावी न होने दें। शनि का प्रभाव निरंतरता और अनुशासन की परीक्षा लेने वाला माना जा रहा है, इसलिए अपने लक्ष्य पर लगातार काम करते रहें।

शनि के प्रभाव को कम करने के ज्योतिषीय उपाय

शनिवार को दान: हर शनिवार काले तिल, उड़द की दाल या सरसों के तेल का दान करें।

पीपल पूजन: शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

हनुमान जी की उपासना: प्रतिदिन या मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे शनि के कष्टकारी प्रभावों से राहत मिल सकती है।