इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को भेजा प्रशंसा पत्र, स्वस्थ होने के बाद यरुशलम आने का दिया न्योता

नई दिल्ली: इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को प्रशंसा पत्र भेजकर उनकी बहादुरी और सूझबूझ के लिए आभार व्यक्त किया है। राष्ट्रपति ने 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई के विमान को सुरक्षित उतारने और उसमें सवार यात्रियों को बड़े खतरे से बचाने के लिए कैप्टन मच्छार की सराहना की। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि गंभीर खतरे के बीच कैप्टन ने जिस साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, वह प्रशंसनीय है। राष्ट्रपति ने उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना भी की। कैप्टन मच्छार को यह पत्र अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ के दौरान मिला। राष्ट्रपति हर्जोग ने उन्हें पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद यरुशलम आने का निमंत्रण दिया है। इस पत्र के जरिए उन्होंने कैप्टन के प्रति इजरायल की कृतज्ञता व्यक्त की और उनकी बहादुरी को भारत तथा इजरायल के बीच ऐतिहासिक संबंधों से भी जोड़ा।

अपने पत्र में राष्ट्रपति हर्जोग ने गंभीर खतरे के समय कैप्टन मच्छार द्वारा बनाए रखे गए संयम की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि दर्द के बावजूद परिस्थितियों का सामना करने, अपने जीवन पर मंडरा रहे तत्काल खतरे से लड़ने और सही निर्णय लेने की क्षमता कैप्टन के मजबूत चरित्र और असाधारण साहस को दर्शाती है। राष्ट्रपति के अनुसार, इस घटना में कैप्टन ने जिस तरह चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में जिम्मेदारी निभाई, वह उनके व्यक्तित्व की मजबूती का प्रमाण है। पत्र में उन्होंने कैप्टन के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए भरोसा जताया कि वह धीरे-धीरे अपनी रिकवरी पूरी करेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि वह उनके पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद यरुशलम में स्वागत करने और इजरायल के लोगों की ओर से आभार तथा सम्मान व्यक्त करने के लिए उत्सुक हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रपति हर्जोग ने एक समारोह के दौरान कैप्टन मच्छार को राष्ट्रपति पुरस्कार देने का इरादा भी जाहिर किया था। यह समारोह उड़ान में सवार छह इजरायली नागरिकों की वीरता को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया गया था। इन नागरिकों को असैन्य वीरता के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर हर्जोग ने घोषणा की कि कैप्टन मच्छार के चोटों से उबरने के बाद उन्हें भी राष्ट्रपति पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। कैप्टन को यह सम्मान देने का निर्णय विमान को सुरक्षित उतारने और यात्रियों को गंभीर खतरे से बचाने में उनकी भूमिका के संदर्भ में लिया गया है। फिलहाल वह अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। राष्ट्रपति का पत्र उन्हें इसी दौरान मिला, जिसमें उनकी बहादुरी की सराहना के साथ जल्द स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दी गई हैं।

राष्ट्रपति हर्जोग ने कैप्टन मच्छार की वीरता को भारत और इजरायल के पुराने संबंधों का हिस्सा बताते हुए एक सदी से अधिक समय पहले पवित्र भूमि में लड़ने वाले भारतीय सैनिकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कैप्टन की बहादुरी उन्हें उन भारतीय सैनिकों की प्रतिष्ठित पंक्ति में शामिल करती है, जिन्होंने एक सौ साल से अधिक समय पहले पवित्र भूमि के शहरों को मुक्त कराने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी। राष्ट्रपति के मुताबिक, उन सैनिकों ने इजरायल के इतिहास में स्थायी स्थान बनाया और कैप्टन मच्छार भी अब दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह घटना भारत गणराज्य और इजरायल के बीच आपसी गर्मजोशी तथा संबंधों को और मजबूत करेगी।

पत्र के अंतिम हिस्से में राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा कि कैप्टन मच्छार संयुक्त अरब अमीरात में अपने मित्रों और साझेदारों की देखरेख में हैं। उन्होंने उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि वह कैप्टन के स्वस्थ होकर ताकत हासिल करने के बाद यरुशलम में उनका स्वागत करना चाहते हैं। राष्ट्रपति ने इसे इजरायल की ओर से आभार और सम्मान व्यक्त करने का अवसर बताया। कैप्टन मच्छार को भेजे गए पत्र और उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा के जरिए इजरायल ने विमान को सुरक्षित उतारने में उनके साहस तथा यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों को सम्मान दिया है।