पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद पर अमित शाह के आरोपों से भड़के केजरीवाल, तीन कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया


नई दिल्ली ।पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। राज्य में नशे के कारोबार, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाए। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पलटवार करते हुए भाजपा पर ही पंजाब में नशा फैलाने और राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में अडानी पोर्ट के रास्ते पंजाब में नशा फैलने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश में नशे की समस्या उन राज्यों में भी गंभीर है, जहां लंबे समय से भाजपा की सरकारें हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों में नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय पंजाब को लेकर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।

केजरीवाल ने अपने बयान में पंजाब में नशे के प्रसार और गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर भाजपा को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच भी राज्य में नशे की समस्या को बढ़ावा मिला था। उन्होंने उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर पुराने राजनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर पंजाब में नशे का कारोबार बढ़ाने का आरोप लगाया। ये आरोप केजरीवाल की ओर से लगाए गए हैं।

अपने पलटवार में केजरीवाल ने पंजाब के पानी, पंजाब विश्वविद्यालय और चंडीगढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नजर राज्य के इन महत्वपूर्ण विषयों पर है। इसी क्रम में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020 में लाए गए तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि भाजपा दोबारा सत्ता में आने पर ऐसे कानूनों को फिर से ला सकती है। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब ऐसा नहीं होने देगा। उनका यह बयान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कृषि कानूनों और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाता है।

दरअसल, अमित शाह ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि राज्य नशे, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। शाह ने सवाल किया कि मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब की जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से नशे के कारोबार और अपराध पर नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर भी सवाल किए।

शाह ने अपने बयान में मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला उठाया। इसके साथ ही उन्होंने दिरबा में एक पिता की मौत से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। शाह के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा के पिता ने आम आदमी पार्टी की सरकार और उसके एक विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इन दोनों घटनाओं को लेकर पंजाब सरकार से जवाब मांगेगा।

शाह ने यह भी कहा कि केजरीवाल और भगवंत मान ने विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा हालात को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर पंजाब को नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित बनाने का संकल्प दोहराया। शाह ने नशे के कारोबार पर कार्रवाई, युवाओं के भविष्य की रक्षा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही।

दोनों नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि पंजाब में नशे का कारोबार, संगठित अपराध और कानून-व्यवस्था आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं। जहां भाजपा राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है, वहीं केजरीवाल ने पलटवार करते हुए भाजपा के शासन और उसके पुराने राजनीतिक फैसलों को बहस के केंद्र में ला दिया है।