पुलिस को देखकर भागने लगा बाइक सवार, POS मशीन ने खोल दी चोरी की गाड़ी की पूरी कहानी, जनवरी 2025 में हुई थी चोरी


भोपाल । मध्य प्रदेश के इंदौर में ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता से चोरी की बाइक लेकर घूम रहे एक युवक का राज खुल गया। अरविंदो हॉस्पिटल के सामने वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों ने बिना नंबर प्लेट की यामाहा बाइक पर सवार युवक को रोकने की कोशिश की। पुलिस को देखते ही युवक ने बाइक लेकर भागने का प्रयास किया लेकिन जवानों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद POS मशीन की मदद से बाइक का चेसिस नंबर स्कैन किया गया। जांच में पता चला कि यह बाइक जनवरी 2025 में तेजाजी नगर थाना क्षेत्र से चोरी हुई थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए बाणगंगा थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया है।

पुलिस के मुताबिक बुधवार को अरविंदो हॉस्पिटल के सामने यातायात व्यवस्था संभालने के लिए एएसआई अवधेश शर्मा आरक्षक विष्णु भदौरिया और सैनिक अजय ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान उनकी नजर बिना नंबर प्लेट वाली यामाहा बाइक पर पड़ी। बाइक चला रहा युवक पुलिसकर्मियों को देखकर घबराया और रुकने के बजाय वहां से निकलने की कोशिश करने लगा। उसकी इस हरकत से जवानों को संदेह हुआ। पुलिसकर्मियों ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और बाइक से संबंधित दस्तावेज मांगे।

बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होने के कारण उसकी पहचान करना आसान नहीं था। ऐसे में पुलिसकर्मियों ने POS मशीन का इस्तेमाल करते हुए बाइक का चेसिस नंबर स्कैन किया। इस तकनीक की मदद से वाहन का वास्तविक रजिस्ट्रेशन नंबर और उसके पंजीकृत मालिक की जानकारी सामने आ गई। इसके बाद पुलिस ने वाहन का रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि संबंधित यामाहा बाइक की चोरी की शिकायत जनवरी 2025 में तेजाजी नगर थाने में दर्ज कराई गई थी। इस जानकारी के सामने आते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बाइक के असली मालिक से संपर्क किया।

पुलिस ने फोन के माध्यम से वाहन मालिक से बातचीत की और बाइक के बारे में जानकारी ली। मालिक ने पुष्टि की कि उसकी यामाहा बाइक चोरी हो गई थी और इस संबंध में उसने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। इस तरह करीब दो साल से चोरी की बाइक इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया। नंबर प्लेट हटाकर बाइक चलाने के कारण अब तक उसकी पहचान नहीं हो पाई थी लेकिन चेसिस नंबर की जांच ने पूरी कहानी सामने ला दी।

पकड़े गए युवक की पहचान ललितपुर निवासी सोनू विश्वकर्मा के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि वह इंदौर के एक कैफे में काम करता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की बाइक उसके पास कैसे पहुंची और उसने इसे किससे खरीदा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बाइक चोरी करने में उसकी कोई भूमिका थी या वह किसी अन्य व्यक्ति से वाहन लेकर इस्तेमाल कर रहा था।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी से पूछताछ में अन्य वाहन चोरी की घटनाओं से जुड़े सुराग भी मिल सकते हैं। फिलहाल उसे आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए बाणगंगा पुलिस के हवाले किया गया है। इस कार्रवाई से एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि वाहन की नंबर प्लेट गायब होने के बावजूद चेसिस नंबर के जरिए उसकी पहचान की जा सकती है। ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता से चोरी का वाहन पकड़ने में सफलता मिली है।