Author: bharati

  • गुनगुने नमक के पानी से गरारे करने पर मिल सकती है राहत, जानिए सही तरीका और किन बातों का रखें ध्यान

    गुनगुने नमक के पानी से गरारे करने पर मिल सकती है राहत, जानिए सही तरीका और किन बातों का रखें ध्यान

    नई दिल्ली । गले में खराश, दर्द या जलन होने पर गुनगुने नमक के पानी से गरारे करना लंबे समय से अपनाया जाने वाला घरेलू उपाय है। मौसम में बदलाव, वायरल संक्रमण, एलर्जी, अधिक बोलने या गले में जलन जैसी स्थितियों में यह उपाय कुछ लोगों को अस्थायी राहत दे सकता है। हालांकि, नमक के पानी से गरारे किसी संक्रमण या बीमारी का इलाज नहीं करते, बल्कि लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

    गुनगुने नमक के पानी से गरारे करने का सबसे प्रमुख फायदा गले की खराश और हल्के दर्द में राहत मिलना माना जाता है। नमक पानी गले के ऊतकों में मौजूद अतिरिक्त तरल पदार्थ को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे सूजन और असहजता कुछ हद तक घट सकती है। इसी कारण हल्के गले के दर्द में इसे सहायक उपाय के तौर पर अपनाया जाता है।

    दूसरा फायदा गले में जमा बलगम से जुड़ा है। सर्दी या वायरल संक्रमण के दौरान गले में म्यूकस जमा होने से बार-बार गला साफ करने की जरूरत महसूस हो सकती है। गरारे करने से जमा बलगम ढीला पड़ सकता है और उसे बाहर निकालना आसान हो सकता है। इससे गले में भारीपन और जलन की अनुभूति कम हो सकती है।

    नमक के पानी से गरारे मुंह और गले की सफाई बनाए रखने में भी मदद कर सकते हैं। नमक वाला पानी मुंह के वातावरण को प्रभावित करता है, जिससे कुछ सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां कम हो सकती हैं। हालांकि, इसे संक्रमण खत्म करने वाली दवा नहीं माना जाना चाहिए। बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण होने पर चिकित्सकीय सलाह की जरूरत पड़ सकती है।

    इस उपाय का एक अन्य लाभ मुंह की दुर्गंध को लेकर हो सकता है। यदि सांसों की बदबू मुंह में जमा बैक्टीरिया या खराब ओरल हाइजीन से जुड़ी है, तो नमक के पानी से कुल्ला या गरारे करने से मुंह की सफाई में कुछ मदद मिल सकती है। लेकिन लगातार बदबू बनी रहने पर इसके पीछे मसूड़ों, दांतों या किसी अन्य समस्या की जांच जरूरी हो सकती है।

    नमक के पानी से गरारे मुंह के छोटे घावों, हल्के छालों या मसूड़ों की मामूली परेशानी में भी कुछ राहत दे सकते हैं। दांत निकलवाने जैसी कुछ परिस्थितियों में भी डॉक्टर कभी-कभी नमक के पानी से कुल्ला करने की सलाह देते हैं। हालांकि, गंभीर घाव, लगातार रक्तस्राव या बढ़ते दर्द की स्थिति में घरेलू उपाय पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

    गरारे करने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में लगभग आधा चम्मच नमक मिलाया जा सकता है। पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए। तैयार घोल को मुंह और गले में करीब 15 से 30 सेकंड तक घुमाकर गरारे करें और फिर उसे थूक दें। नमक का पानी निगलने से बचना चाहिए। जरूरत के अनुसार दिन में दो से तीन बार गरारे किए जा सकते हैं।

    यह भी समझना जरूरी है कि हर तरह की गले की समस्या में केवल नमक का पानी पर्याप्त नहीं होता। तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, निगलने में गंभीर कठिनाई, लगातार बढ़ता दर्द या लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बच्चों को गरारे कराते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि वे पानी निगल सकते हैं।

    कुल मिलाकर, गुनगुने नमक के पानी से गरारे गले की खराश, हल्की सूजन, बलगम और मुंह की कुछ परेशानियों में अस्थायी आराम देने वाला आसान उपाय हो सकते हैं। लेकिन इन्हें चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। लक्षणों की वजह और गंभीरता के अनुसार सही उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

  • रोज खाली पेट एंटासिड खाने की आदत पड़ सकती है भारी, शुरुआत में दिखने वाले इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

    रोज खाली पेट एंटासिड खाने की आदत पड़ सकती है भारी, शुरुआत में दिखने वाले इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

    नई दिल्ली । सुबह उठते ही खाली पेट सीने में जलन, खट्टी डकार या पेट में एसिडिटी महसूस होने पर तुरंत एंटासिड लेना कई लोगों की आदत बन जाती है। कभी-कभार एंटासिड का इस्तेमाल आम तौर पर परेशानी की बात नहीं होता, लेकिन यदि हर दिन इसकी जरूरत पड़ रही है तो इसे सामान्य गैस समझकर लगातार लेते रहना उचित नहीं है। बार-बार एसिडिटी होना किसी अन्य पाचन संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है और ऐसे में केवल लक्षणों को दबाने के बजाय उसके कारण का पता लगाना जरूरी है।

    एंटासिड ऐसी दवाएं हैं जो पेट में मौजूद अतिरिक्त एसिड को निष्क्रिय करके कुछ समय के लिए जलन और असहजता से राहत देती हैं। अलग-अलग एंटासिड में अलग-अलग सक्रिय तत्व मौजूद हो सकते हैं। कैल्शियम या एल्यूमिनियम आधारित दवाओं के अधिक इस्तेमाल से कुछ लोगों को कब्ज की समस्या हो सकती है, जबकि मैग्नीशियम आधारित दवाओं से दस्त हो सकते हैं। लंबे समय तक या जरूरत से अधिक सेवन करने पर कुछ परिस्थितियों में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन और किडनी के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।

    बार-बार एंटासिड या अन्य एसिड कम करने वाली दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों में कुछ पोषक तत्वों के अवशोषण पर भी प्रभाव पड़ सकता है। लंबे समय तक एसिड कम करने वाली दवाओं के इस्तेमाल से कुछ लोगों में विटामिन बी12 या मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि इसका खतरा दवा के प्रकार, मात्रा, इस्तेमाल की अवधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए लंबे समय तक दवा लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    रोज खाली पेट एंटासिड लेने की सबसे महत्वपूर्ण समस्या यह है कि इससे बार-बार होने वाली एसिडिटी के वास्तविक कारण की पहचान में देरी हो सकती है। लगातार सीने में जलन या खट्टी डकार गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज यानी जीईआरडी, गैस्ट्राइटिस या पेप्टिक अल्सर जैसी स्थितियों से जुड़ी हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल एंटासिड लेकर लक्षणों को दबाते रहना समस्या के उचित मूल्यांकन में देरी कर सकता है।

    शुरुआती तौर पर लंबे या बार-बार इस्तेमाल के दौरान कब्ज, दस्त, पेट में असहजता, मतली या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा एंटासिड से होने वाला नुकसान नहीं होता और इनके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसी तरह लगातार एसिडिटी बने रहना भी इस बात का संकेत हो सकता है कि दवा समस्या का पर्याप्त समाधान नहीं कर रही है।

    एसिडिटी से राहत के लिए खान-पान और दिनचर्या में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भोजन कम मात्रा में और नियमित समय पर लेना, बहुत तला-भुना तथा मसालेदार भोजन कम करना, खाने के तुरंत बाद न लेटना और रात में सोने से कुछ घंटे पहले भोजन कर लेना मददगार हो सकता है। अधिक वजन होने की स्थिति में वजन कम करने से भी रिफ्लक्स के लक्षणों में सुधार हो सकता है।

    यदि एसिडिटी लगातार कई सप्ताह से बनी हुई है या बार-बार एंटासिड लेने की जरूरत पड़ती है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। निगलने में कठिनाई, लगातार उल्टी, खून की उल्टी, काला मल, बिना कारण वजन कम होना या तेज सीने का दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। एंटासिड कभी-कभार राहत देने वाली दवा हो सकती है, लेकिन रोज खाली पेट इसकी जरूरत पड़ना समस्या के मूल कारण की जांच कराने का संकेत है।

  • आज का राशिफल 20 अगस्त 2026: किस राशि के सितारे चमकेंगे और किसे मिलेगा सावधानी का संकेत, पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    आज का राशिफल 20 अगस्त 2026: किस राशि के सितारे चमकेंगे और किसे मिलेगा सावधानी का संकेत, पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल


    नई दिल्ली। 20 अगस्त 2026 का दिन ग्रहों की स्थिति के लिहाज से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की चाल का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में नौकरी कारोबार धन परिवार प्रेम और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। किसी राशि के जातकों को काम में नई सफलता मिलने के संकेत हो सकते हैं तो किसी को महत्वपूर्ण फैसले लेते समय धैर्य रखने की जरूरत होगी। आज का दिन कई लोगों के लिए अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने और पुराने काम पूरे करने का अवसर लेकर आ सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन उत्साह से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं लेकिन मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। कारोबार से जुड़े लोगों को कोई अच्छा अवसर मिल सकता है। परिवार में किसी सदस्य से सहयोग प्राप्त होगा। खर्च करते समय बजट का ध्यान रखना बेहतर रहेगा।

    वृषभ राशि के लिए दिन आर्थिक मामलों में राहत देने वाला हो सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम पूरा होने की संभावना है। नौकरी करने वालों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें। परिवार में सुखद माहौल बना रहेगा।

    मिथुन राशि के जातकों को आज अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण रखना चाहिए। किसी से बातचीत के दौरान गलतफहमी पैदा हो सकती है। कार्यक्षेत्र में एक साथ कई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। मेहनत के बल पर सफलता हासिल होगी। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई पर ध्यान देने का अच्छा समय है।

    कर्क राशि के लिए आज का दिन परिवार और रिश्तों के लिहाज से अच्छा रह सकता है। घर में किसी शुभ समाचार से खुशी का माहौल बन सकता है। नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं। धन संबंधी मामलों में लाभ के संकेत हैं लेकिन अनावश्यक खरीदारी से बचना उचित रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों के आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी बात को महत्व मिलेगा। किसी पुराने संपर्क से फायदा हो सकता है। कारोबार में नई योजना पर काम शुरू करने का मौका मिल सकता है। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा।

    कन्या राशि को आज योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत होगी। छोटी सी लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है। नौकरी में काम का दबाव रह सकता है लेकिन मेहनत से स्थिति संभल जाएगी। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखें। स्वास्थ्य को लेकर दिनचर्या पर ध्यान देना लाभकारी रहेगा।

    तुला राशि के लिए दिन सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। नौकरी में तरक्की या नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। कारोबार में लाभ के अवसर बन सकते हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। किसी करीबी व्यक्ति से महत्वपूर्ण सलाह मिल सकती है।

    वृश्चिक राशि के जातकों को आज धैर्य से काम लेना होगा। जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। कार्यक्षेत्र में विरोधियों से सावधान रहें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। परिवार के किसी सदस्य की मदद से समस्या का समाधान मिल सकता है।

    धनु राशि के लिए दिन भाग्य का साथ देने वाला रह सकता है। लंबे समय से रुका काम पूरा हो सकता है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। यात्रा की योजना बन सकती है। धन लाभ के साथ खर्च भी बढ़ सकता है इसलिए संतुलन जरूरी रहेगा।

    मकर राशि के जातकों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारी बढ़ सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए नई योजना बना सकते हैं। परिवार में किसी बात को लेकर तनाव हो तो बातचीत से समाधान निकालें।

    कुंभ राशि के लिए दिन नए अवसरों वाला रह सकता है। नौकरी बदलने या नई परियोजना शुरू करने का विचार आगे बढ़ सकता है। धन से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। दोस्तों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। अपनी योजनाओं को हर किसी के सामने साझा करने से बचें।

    मीन राशि के जातकों के लिए दिन मिलाजुला रहने वाला है। काम में सफलता पाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ सकता है। परिवार में किसी सदस्य की चिंता हो सकती है लेकिन स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी। आर्थिक मामलों में सावधानी रखें और अनावश्यक जोखिम लेने से बचें।

    ज्योतिष में राशिफल को ग्रहों की स्थिति पर आधारित सामान्य अनुमान माना जाता है। इसे निश्चित भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में अपनी परिस्थितियों और उचित सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

  • रसोई में बची ताजी मिर्च से भी तैयार किया जा सकता है पौधा, सही नमी, धूप और देखभाल से अच्छी पैदावार संभव

    रसोई में बची ताजी मिर्च से भी तैयार किया जा सकता है पौधा, सही नमी, धूप और देखभाल से अच्छी पैदावार संभव

    नई दिल्ली । घर की रसोई में रखी हरी मिर्च का इस्तेमाल आमतौर पर सब्जी और चटनी का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन अगर आप चाहें तो इसी मिर्च की मदद से घर में नया पौधा तैयार करने की कोशिश भी कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है कि पूरी तरह बीजरहित मिर्च से सीधे नया पौधा तैयार नहीं किया जा सकता। पौधा विकसित करने के लिए मिर्च के अंदर मौजूद विकसित बीज या किसी उपयुक्त पौधे की कटिंग की जरूरत होती है। इसलिए बाजार से लाई गई मिर्च को इस्तेमाल करने से पहले उसके अंदर मौजूद छोटे बीजों को ध्यान से अलग किया जा सकता है।

    अगर मिर्च में बीज मौजूद हैं तो सबसे पहले उन्हें सावधानी से निकालकर साफ पानी से धो लें। इसके बाद बीजों को कुछ समय के लिए छाया में सुखाना बेहतर रहता है। बीजों में नमी पूरी तरह खत्म होने के बाद इन्हें हल्की और उपजाऊ मिट्टी में लगाया जा सकता है। मिर्च के बीजों को बहुत अधिक गहराई में दबाने की जरूरत नहीं होती। लगभग आधा सेंटीमीटर गहराई पर्याप्त रहती है।

    गमले का चुनाव भी पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। शुरुआत में छोटे गमले या सीडलिंग ट्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें पानी आसानी से निकल सके और वह लंबे समय तक पानी से भरी न रहे। सामान्य गार्डन मिट्टी के साथ जैविक खाद और थोड़ी रेत या अन्य जलनिकासी वाली सामग्री मिलाने से मिट्टी को बेहतर बनाया जा सकता है।

    बीज लगाने के बाद मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है। बहुत ज्यादा पानी देने से बीज सड़ सकते हैं और नई जड़ें विकसित होने में परेशानी हो सकती है। गमले को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी और गर्माहट मिले। मिर्च के पौधे को अच्छी वृद्धि के लिए धूप पसंद होती है, इसलिए पर्याप्त प्रकाश मिलने पर पौधा मजबूत बनने की संभावना बढ़ती है।

    कुछ समय बाद जब छोटे पौधे दिखाई देने लगें और उनमें कई वास्तविक पत्तियां विकसित हो जाएं, तब उन्हें बड़े गमले में स्थानांतरित किया जा सकता है। पौधे को निकालते समय उसकी जड़ों को नुकसान न पहुंचाएं। बड़े गमले में लगाने के बाद मिट्टी को हल्का दबाएं और जरूरत के अनुसार पानी दें।

    मिर्च का पौधा बढ़ने के दौरान नियमित देखभाल मांगता है। जब पौधा पर्याप्त ऊंचाई हासिल कर ले तो उसकी ऊपरी बढ़त को हल्का पिंच करने से शाखाएं ज्यादा निकलने में मदद मिल सकती है। इससे पौधा अधिक घना हो सकता है और आगे चलकर उसमें ज्यादा फूल और मिर्च आने की संभावना बढ़ सकती है।

    फूल आने के समय पौधे को पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ जाती है। इस दौरान अच्छी तरह सड़ी जैविक खाद या उपयुक्त संतुलित खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी में लगातार नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। पौधे पर एफिड, सफेद मक्खी या अन्य छोटे कीट दिखाई दें तो समय रहते उनकी जांच और नियंत्रण करना जरूरी है।

    अच्छी धूप, सही मिट्टी, संतुलित पानी और नियमित देखभाल मिलने पर मिर्च का पौधा कुछ महीनों में फल देना शुरू कर सकता है। लगभग दो महीने में मिर्च आने का दावा परिस्थितियों और पौधे की किस्म पर निर्भर करता है, इसलिए हर पौधे में बिल्कुल इसी समय पर फल लगना जरूरी नहीं है। फल अच्छी लंबाई हासिल कर लें तो उन्हें हरा रहते हुए तोड़ा जा सकता है। नियमित रूप से तैयार मिर्च तोड़ने से पौधे पर नई फलियों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है। इस तरह थोड़ी मेहनत और धैर्य के साथ बालकनी या छत के छोटे से हिस्से में भी घर की ताजी हरी मिर्च उगाई जा सकती है।

  • 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' से छात्रों तक पहुंचेगी मोदी सरकार, हर दिन कैंपस में केंद्रीय मंत्री करेंगे संवाद

    'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' से छात्रों तक पहुंचेगी मोदी सरकार, हर दिन कैंपस में केंद्रीय मंत्री करेंगे संवाद


    नई दिल्ली।
    केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार छात्रों और युवाओं के साथ सीधे संवाद बढ़ाने के लिए एक नई पहल पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ नाम से देशव्यापी कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री किसी विश्वविद्यालय के कैंपस में पहुंचकर छात्रों से आमने-सामने बातचीत कर सकता है।

    सरकार की कोशिश इस पहल के जरिए केवल योजनाओं और नीतियों की जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं, सुझावों और चिंताओं को सीधे सुनना भी है। कैंपस में मंत्री युवाओं से शिक्षा, रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, परीक्षा व्यवस्था और देश से जुड़े दूसरे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

    हर दिन एक यूनिवर्सिटी में पहुंचेगा मंत्री

    प्रस्तावित योजना के तहत अलग-अलग केंद्रीय मंत्रियों को देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार और युवा वर्ग के बीच संवाद को ज्यादा प्रत्यक्ष बनाना है।

    अभी आमतौर पर छात्रों और केंद्र सरकार के बीच संवाद मंत्रालयों, आधिकारिक कार्यक्रमों या डिजिटल माध्यमों तक सीमित रहता है। ऐसे में मंत्रियों के सीधे विश्वविद्यालयों में पहुंचने से छात्रों को अपनी समस्याएं सरकार के प्रतिनिधियों के सामने रखने का अवसर मिल सकता है।

    प्रह्लाद जोशी और मनसुख मांडविया को समन्वय की जिम्मेदारी

    सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को इस प्रस्तावित अभियान के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों मंत्री विश्वविद्यालयों और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों के साथ मिलकर इसकी रूपरेखा तैयार कर सकते हैं।

    बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी चर्चा हुई है। हालांकि, कार्यक्रम के अंतिम स्वरूप और इसे कब से शुरू किया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    परीक्षा विवादों के बीच छात्रों तक पहुंचने की कवायद

    सरकार की यह पहल ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्र संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। NEET समेत कई परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन और राजनीतिक विवाद सामने आए हैं।

    ऐसे माहौल में केंद्रीय मंत्रियों का सीधे विश्वविद्यालय परिसरों में जाकर छात्रों से बातचीत करना सरकार की युवा वर्ग के साथ संवाद बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इससे छात्रों की शिकायतों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का रास्ता भी बन सकता है।

    देशभर के विश्वविद्यालयों तक पहुंचने की तैयारी

    देश में केंद्रीय, राज्य, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों की बड़ी संख्या है। ऐसे में अगर ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में अलग-अलग राज्यों के विश्वविद्यालयों में केंद्रीय मंत्रियों की नियमित यात्राएं देखने को मिल सकती हैं।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अभियान में केवल केंद्रीय विश्वविद्यालयों को शामिल किया जाएगा या निजी और राज्य विश्वविद्यालयों को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा। योजना के अंतिम स्वरूप के सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि सरकार इसे कितने बड़े स्तर पर लागू करती है।

  • रेखा गुप्ता ने रवाना कीं नई ई बसें, दिल्ली करनाल रूट पर पांच एसी इलेक्ट्रिक बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    रेखा गुप्ता ने रवाना कीं नई ई बसें, दिल्ली करनाल रूट पर पांच एसी इलेक्ट्रिक बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    नई दिल्ली ।दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में 200 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो गई हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। नई बसों के साथ राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लगभग 5,000 तक पहुंच गई है। सरकार ने इस अवसर पर महिलाओं और छात्राओं के लिए विशेष बस सेवाओं की भी शुरुआत की है।

    नई व्यवस्था के तहत महिलाओं के लिए 28 अलग अलग रूटों पर 56 डेडिकेटेड लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें दिल्ली परिवहन निगम के अधिक मांग वाले 15 रूटों पर 30 विशेष ट्रिप संचालित होंगी। इन सेवाओं के माध्यम से आवासीय क्षेत्रों को नेहरू प्लेस, एम्स, साउथ एक्सटेंशन, आरके पुरम, कनॉट प्लेस, आईटीओ, दिल्ली सचिवालय, करोल बाग, कश्मीरी गेट और शिवाजी स्टेडियम जैसे प्रमुख इलाकों से जोड़ा जाएगा।

    विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत 13 रूटों पर 26 यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल ट्रिप संचालित की जाएंगी। इन सेवाओं में दिल्ली के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इनमें हिंदू कॉलेज, रामजस कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, हंसराज कॉलेज और श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स जैसे संस्थान शामिल हैं।

    नई बसों के बेड़े में अलग अलग क्षमता और आकार की इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इनमें 12 मीटर लंबी 88 इलेक्ट्रिक बसें और 9 मीटर लंबी 112 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इनके शामिल होने के बाद दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में बसों की कुल संख्या करीब 6,800 तक पहुंचने की बात कही गई है। इसमें लगभग 4,938 इलेक्ट्रिक बसें और करीब 1,750 सीएनजी बसें शामिल हैं।

    सरकार के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाना और यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और आपात स्थिति में सहायता के लिए पैनिक बटन जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। बसों को लो फ्लोर और वातानुकूलित बनाया गया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, छात्रों और अन्य यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है।

    दिल्ली और हरियाणा के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए दिल्ली करनाल अंतरराज्यीय ई बस सेवा भी शुरू की जा रही है। इस मार्ग पर पांच नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें संचालित होंगी। करीब 133 किलोमीटर लंबे इस रूट पर दोनों दिशाओं में प्रतिदिन 10 10 फेरे चलाने की योजना है।

    इस पहल के साथ राजघाट डिपो एक में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की शुरुआत भी की गई है। इससे इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण के साथ साथ स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    महिलाओं और छात्राओं के लिए निर्धारित विशेष सेवाओं से दिल्ली के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और व्यस्त इलाकों तक आवागमन आसान होने की उम्मीद है। वहीं अंतरराज्यीय ई बस सेवा से दिल्ली और करनाल के बीच यात्रियों को एक अतिरिक्त पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा।

  • मध्यप्रदेश में चार IAS अधिकारियों का तबादला, गृह से पर्यटन और खनिज से उच्च शिक्षा विभाग में बदली जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश में चार IAS अधिकारियों का तबादला, गृह से पर्यटन और खनिज से उच्च शिक्षा विभाग में बदली जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: में प्रशासनिक स्तर पर एक बार फिर फेरबदल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 अगस्त 2026 को चार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस बदलाव के तहत अधिकारियों को गृह, उच्च शिक्षा, पर्यटन और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सभी पदस्थापनाएं अस्थाई रूप से स्थानापन्न पद पर की गई हैं और यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

    तबादला आदेश के अनुसार 2012 बैच की IAS अधिकारी भारती जाटव ओगरे को नई जिम्मेदारी दी गई है। वे इससे पहले खनिज साधन विभाग में अपर सचिव के पद पर कार्यरत थीं। अब उन्हें उच्च शिक्षा विभाग में अपर सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी नई पदस्थापना 17 जून 2026 को जारी पुराने आदेश में संशोधन के तहत की गई है।

    2013 बैच की IAS अधिकारी मनीषा सेतिया की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। वे अब तक गृह विभाग में अपर सचिव के रूप में कार्य कर रही थीं। नए आदेश के तहत उन्हें गृह विभाग से हटाकर पर्यटन विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पर्यटन विभाग के प्रशासनिक कामकाज में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

    इसी क्रम में 2016 बैच की IAS अधिकारी शुचिस्मिता सक्सेना को भी नई जिम्मेदारी मिली है। वे पहले लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत थीं। अब उन्हें गृह विभाग में उप सचिव बनाया गया है। गृह विभाग राज्य प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां उनकी नई पदस्थापना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    2017 बैच के IAS अधिकारी विवेक कुमार को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। वे फिलहाल पदस्थापना का इंतजार कर रहे थे। अब उन्हें नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में उप सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी नई पदस्थापना के बाद विभाग से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में उनकी भूमिका तय होगी।

    सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है। आदेश पर मुख्य सचिव अशोक बर्नवाल के हस्ताक्षर हैं। आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों को भेजी गई हैं। इनमें राज्यपाल कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तथा मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली सहित संबंधित विभाग शामिल हैं।

    गृह, उच्च शिक्षा और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। खासतौर पर गृह विभाग में अधिकारी स्तर पर बदलाव होने से विभागीय कामकाज की जिम्मेदारियों का नया वितरण हुआ है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग में नई पदस्थापना से शिक्षा प्रशासन से जुड़े कार्यों में नई भूमिका तय होगी।

    पर्यटन विभाग में मनीषा सेतिया की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब राज्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और विभिन्न पर्यटन स्थलों की सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में विवेक कुमार की नियुक्ति ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    सरकार की ओर से इन तबादलों के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार यह प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की नवीन पदस्थापना है। अब संबंधित अधिकारी अपनी नई जिम्मेदारियों के अनुसार विभागों में कार्यभार संभालेंगे और उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद विभागीय कामकाज में बदलाव दिखाई देगा।

  • गाजा कैपिटल आईपीओ में निवेश से पहले समझें बड़े जोखिम, नकारात्मक कैश फ्लो और प्रमोटर डिफॉल्ट रिकॉर्ड चिंता बढ़ाते हैं

    गाजा कैपिटल आईपीओ में निवेश से पहले समझें बड़े जोखिम, नकारात्मक कैश फ्लो और प्रमोटर डिफॉल्ट रिकॉर्ड चिंता बढ़ाते हैं


    नई दिल्ली । गाजा कैपिटल का आईपीओ रिटेल निवेशकों के लिए खुल चुका है। कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कारोबार और वित्तीय स्थिति से जुड़े कई जोखिमों का उल्लेख किया गया है। इनमें ऑपरेशन से लगातार नकारात्मक कैश फ्लो, कैरिड इंटरेस्ट पर आय की बढ़ती निर्भरता, अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के ऑडिट ट्रेल की एक अवधि में उपलब्ध नहीं रहने और एक प्रमोटर का नाम डिफॉल्ट से संबंधित सूची में शामिल होना प्रमुख है। निवेशकों के लिए इन बिंदुओं को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी ने इन्हें अपने आधिकारिक खुलासों में जोखिम कारकों के तौर पर दर्ज किया है।

    कंपनी के अनुसार उसके ऑपरेशन से मिलने वाला नेट कैश फ्लो हाल के वर्षों में नकारात्मक रहा है। वित्त वर्ष 2025 में ऑपरेशंस से नेट कैश फ्लो माइनस 8.75 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026 में यह आंकड़ा और नीचे जाकर माइनस 14.98 करोड़ रुपये हो गया। लगातार नकारात्मक ऑपरेशनल कैश फ्लो कंपनी की नकदी स्थिति को लेकर निवेशकों के लिए विचार करने योग्य महत्वपूर्ण पहलू है।

    गाजा कैपिटल के ऑडिटर्स ने अकाउंटिंग रिकॉर्ड से संबंधित कुछ टिप्पणियां भी की हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में अपने खातों को बनाए रखने के लिए ऐसे अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया, जिसमें ऑडिट ट्रेल यानी एडिट लॉग रिकॉर्ड करने की सुविधा मौजूद थी। हालांकि, 1 अप्रैल 2025 से 27 अगस्त 2025 तक यह सुविधा सक्रिय नहीं थी।

    ऑडिट ट्रेल का काम अकाउंटिंग रिकॉर्ड में किए गए बदलावों का विवरण सुरक्षित रखना होता है। इसके माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी रिकॉर्ड में कब और किस तरह का बदलाव किया गया। कंपनी के ऑडिटर ने कहा कि ऑडिट के दौरान ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जिसमें ऑडिट ट्रेल सुविधा सक्रिय रहने के दौरान उसके साथ छेड़छाड़ की गई हो।

    कंपनी ने यह भी बताया कि ऑडिट ट्रेल सुविधा दोबारा सक्रिय होने के बाद रिकॉर्ड को संबंधित कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप सुरक्षित रखा गया है। हालांकि, सुविधा के एक निश्चित अवधि तक बंद रहने का उल्लेख कंपनी के आरएचपी में जोखिम और अनुपालन से जुड़े खुलासे के रूप में किया गया है।

    कंपनी की आय में कैरिड इंटरेस्ट का हिस्सा भी एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। गाजा कैपिटल ने बताया कि वित्त वर्ष 2024 में कुल आय में कैरिड इंटरेस्ट की हिस्सेदारी 17.69 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2025 में यह बढ़कर 52.25 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 में 47.79 प्रतिशत हो गई। कंपनी के मुताबिक आय के बड़े हिस्से का कैरिड इंटरेस्ट पर निर्भर होना उसकी कुल आय में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है।

    आरएचपी में प्रमोटर गोपाल जैन से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण खुलासा भी किया गया है। कंपनी ने बताया कि जैन का नाम भारतीय रिजर्व बैंक की एक ऐसी सूची में शामिल है, जिसमें एक करोड़ रुपये से अधिक के डिफॉल्ट वाले ऐसे खाते शामिल हैं, जिनके संबंध में कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।

    कंपनी के अनुसार यह मामला एडुकॉम्प इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड स्कूल मैनेजमेंट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसके बोर्ड में गोपाल जैन पहले नॉमिनी डायरेक्टर रहे थे। गाजा कैपिटल का कहना है कि संबंधित कंपनी के डिफॉल्ट के समय जैन उससे जुड़े नहीं थे।

    कंपनी ने यह भी बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने गोपाल जैन का नाम संबंधित सूची से हटाने के लिए पत्र दिया है। ऐसे में आईपीओ में निवेश करने वालों के लिए कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, आय के स्रोत, ऑडिट संबंधी खुलासों और प्रमोटर से जुड़े जोखिमों का समग्र आकलन करना महत्वपूर्ण है। आईपीओ से जुड़े अंतिम निर्णय से पहले निवेशकों को आरएचपी में दर्ज सभी जोखिम कारकों को ध्यान से समझना चाहिए।

  • रूखे और बेजान बालों को मुलायम बनाने के लिए आजमाएं मेथी का हेयर मास्क, घर पर आसानी से तैयार करें यह उपाय

    रूखे और बेजान बालों को मुलायम बनाने के लिए आजमाएं मेथी का हेयर मास्क, घर पर आसानी से तैयार करें यह उपाय


    नई दिल्ली ।
    रूखे और बेजान बाल अक्सर अपनी प्राकृतिक चमक खो देते हैं और उन्हें संभालना भी मुश्किल हो जाता है। बदलते मौसम, धूल, प्रदूषण, बार बार शैंपू करने और बालों पर अलग अलग तरह के उत्पादों के इस्तेमाल से बालों की नमी कम हो सकती है। ऐसे में घर में आसानी से मिलने वाली मेथी बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पारंपरिक सामग्री है। मेथी के दानों से तैयार हेयर मास्क बालों को मुलायम और बेहतर महसूस कराने में मदद कर सकता है।

    मेथी के बीजों में प्रोटीन और कई अमीनो एसिड पाए जाते हैं। बालों की संरचना मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बनी होती है। हालांकि बालों पर मेथी लगाने से शरीर में प्रोटीन की कमी पूरी नहीं होती, लेकिन इसका पेस्ट बालों की सतह को कंडीशन करने में मदद कर सकता है। इसलिए रूखे बालों की देखभाल के लिए इसे घरेलू हेयर मास्क के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

    मेथी की एक खास विशेषता पानी में भिगोने के बाद दिखाई देती है। इसके दाने फूलने लगते हैं और उनमें मौजूद घुलनशील फाइबर के कारण एक हल्का चिपचिपा पदार्थ बनता है। यही हिस्सा मेथी के पेस्ट को बालों पर फैलने में मदद करता है। बालों पर इसकी एक पतली परत बन सकती है, जिससे बाल कुछ समय के लिए अधिक चिकने और मुलायम महसूस हो सकते हैं।

    मेथी में आयरन, कैल्शियम और कुछ अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। हालांकि इन पोषक तत्वों की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि मेथी का पेस्ट सिर पर लगाने से शरीर में पोषण की कमी दूर हो जाएगी। बालों के स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से आयरन की कमी होने पर केवल बाहरी हेयर मास्क पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

    मेथी का हेयर मास्क बनाने के लिए सबसे पहले एक या दो चम्मच मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोया जा सकता है। सुबह अतिरिक्त पानी निकालकर नरम हुए दानों को पीस लें। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जा सकता है। इस पेस्ट को बाल धोने से पहले बालों की लंबाई पर लगाया जा सकता है।

    पेस्ट को लगभग 20 से 30 मिनट तक बालों पर रखने के बाद सामान्य तरीके से बाल धोए जा सकते हैं। इसे बहुत देर तक सिर पर रखने की जरूरत नहीं है। बालों से पेस्ट निकालते समय अच्छी तरह पानी का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि मेथी के कण बालों में न रह जाएं।

    अगर बाल ज्यादा रूखे हैं तो मेथी के पेस्ट में थोड़ी मात्रा में नारियल तेल मिलाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। नारियल तेल बालों को कंडीशन करने और उन्हें मुलायम महसूस कराने में मदद कर सकता है। हालांकि हर व्यक्ति के बाल और सिर की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे का असर सभी पर एक जैसा होना जरूरी नहीं है।

    मेथी का इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतना भी जरूरी है। पहली बार इसे सिर या बालों पर लगाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर थोड़ी मात्रा लगाकर प्रतिक्रिया देखना बेहतर है। यदि खुजली, जलन, लालिमा या किसी तरह की एलर्जी दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

  • चीन के 60 किलोमीटर घुसने के दावे पर किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखें

    चीन के 60 किलोमीटर घुसने के दावे पर किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखें

    नई दिल्ली ।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन सीमा विवाद, सेना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और संसद में विपक्ष के हंगामे सहित कई मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े वास्तविक मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसे दावे नहीं किए जाने चाहिए जिनसे देश में भ्रम की स्थिति पैदा हो। उन्होंने विशेष रूप से उस दावे को गलत बताया जिसमें चीन के भारत की सीमा में 60 किलोमीटर तक अंदर आने की बात कही गई थी।

    रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि कई इलाकों में अभी स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है। कुछ स्थानों पर सीमा स्तंभ और जमीन पर सीमा की स्पष्ट पहचान भी नहीं है। उनके अनुसार स्थानीय लोगों की ओर से सीमा को लेकर जताई जाने वाली चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन इन परिस्थितियों को चीन के भारतीय क्षेत्र में 60 किलोमीटर तक घुस आने के दावे से जोड़ना सही नहीं है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चीन ने सीमा के अपने हिस्से में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास पहले शुरू कर दिया था। भारत की ओर से भी वर्ष 2014 के बाद सीमावर्ती इलाकों में सड़क, संपर्क और अन्य सुविधाओं के निर्माण को गति दी गई। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त सड़क संपर्क नहीं होने से सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

    रिजिजू ने सीमावर्ती इलाकों में अपने दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सुरक्षा बलों और सेना के जवानों से मुलाकात की है तथा वहां सड़क निर्माण की स्थिति भी देखी है। उन्होंने ताकसिंग तक सड़क संपर्क मजबूत होने का जिक्र करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है।

    लोंगजू और आसपास के क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भारत और चीन के बीच पुराना सीमा विवाद रहा है। उनके अनुसार कुछ क्षेत्रों में चीन की ओर से ढांचे और गांव जैसी इमारतें बनाई गई हैं। रिजिजू ने कहा कि इन परिस्थितियों को सीमा विवाद के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा कर लिया है।

    राहुल गांधी द्वारा चीन की कथित घुसपैठ को लेकर तस्वीरें दिखाए जाने के सवाल पर रिजिजू ने सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेना देश की रक्षा करती है और उसे राजनीतिक बहस का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सेना के अधिकारियों के लिए आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी कांग्रेस नेताओं से गंभीरता से विचार करने को कहा।

    संसद में विपक्ष के हंगामे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी से जुड़े आरोपों पर रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री संसद में मौजूद रहते हैं और कार्यवाही के दौरान अपना समय देते हैं। उन्होंने विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही प्रभावित होती है।

    परिसीमन और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर रिजिजू ने कहा कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान चाहती है। उन्होंने विपक्षी दलों से सहयोग की अपील की। राहुल गांधी की भूमिका पर उन्होंने कहा कि वह विपक्ष के नेता का सम्मान करते हैं, लेकिन कांग्रेस सांसदों की नारेबाजी और हंगामे को रोकने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

    वंदे मातरम को लेकर रिजिजू ने कहा कि यह राष्ट्रीय गीत है और सभी भारतीयों को इसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष की स्थिति पर कहा कि चुनावी असफलता के बाद संसद में हंगामा करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक संसद को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार और विपक्ष दोनों को संवाद और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।