Author: bharati

  • यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल

    यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल


    नई दिल्ली ।
    यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत स्थित अल-अलम सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक जवान घायल बताए गए हैं। मृतकों में ज्यादातर नए भर्ती हुए सैनिक शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब देश में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नजिली के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाते हुए तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, उन्होंने हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के दो सैन्य अधिकारियों ने हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक जवानों के घायल होने की जानकारी दी। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी ने भी हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही, लेकिन मृतकों और घायलों की संख्या नहीं बताई।

    अल-अलम सैन्य शिविर शबवा प्रांत की राजधानी अटक के उत्तर में जर्दान जिले में स्थित है। पहले इस शिविर का इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले एक सशस्त्र समूह द्वारा किया जाता था। यह इलाका सरकार के नियंत्रण वाले मारीब प्रांत तक पहुंचने वाले मार्ग पर स्थित है। इस कारण सैन्य और जरूरी आपूर्ति को सरकारी बलों तक पहुंचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, हमले में निशाना बनाए गए जवान रैपिड इंटरवेंशन नाम से गठित नई सुरक्षा इकाई का हिस्सा थे। इस इकाई को क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    यमन में संघर्ष बढ़ने के पीछे कई क्षेत्रीय और आंतरिक कारण बताए जा रहे हैं। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों के बीच पिछले कई महीनों से टकराव तेज हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भी क्षेत्र की परिस्थितियों पर पड़ा है। वर्ष 2022 में हुआ संघर्षविराम यमन के गृहयुद्ध में लड़ाई को काफी हद तक रोकने में सफल रहा था, लेकिन हालिया घटनाओं के बीच उस व्यवस्था की प्रभावशीलता कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

    इस बीच उत्तरी यमन के हूती नियंत्रित सादा प्रांत में रविवार को हवाई हमला हुआ। हूती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। हूतियों ने हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बलों को जिम्मेदार ठहराया है। सप्ताहांत के दौरान हुए कई हमलों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने या घायल होने का दावा भी किया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।

    सऊदी अरब और लाल सागर के आसपास भी तनाव बढ़ने की खबरें हैं। हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर हमले दोबारा शुरू किए हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन कर रहा है। इन हमलों में सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन घटनाओं से हजारों उड़ानें प्रभावित हुई हैं और 19 लोगों की मौत हुई है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर भी हमला किए जाने की बात सामने आई है।

    लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की गतिविधियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और वैश्विक माल परिवहन में इसकी बड़ी भूमिका है। इस रणनीतिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर तनाव के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने सैन्य अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र से हूती विद्रोहियों को पीछे हटाना और वहां दोबारा नियंत्रण स्थापित करना बताया गया है। हालिया मिसाइल हमले ने यमन में संघर्ष के और गंभीर होने की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।

  • दिल्ली विधानसभा में बम धमकियों के बाद सुरक्षा सख्त, आठ वॉच टावर बनेंगे, सीआरपीएफ की गश्त और वाहन जांच व्यवस्था होगी मजबूत

    दिल्ली विधानसभा में बम धमकियों के बाद सुरक्षा सख्त, आठ वॉच टावर बनेंगे, सीआरपीएफ की गश्त और वाहन जांच व्यवस्था होगी मजबूत

    नई दिल्ली । दिल्ली विधानसभा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर नए इंतजाम किए जा रहे हैं। बम धमकियों और सुरक्षा संबंधी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए परिसर में आठ वॉच टावर बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही वाहनों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के लिए अलग गश्ती मार्ग और आगंतुकों की डिजिटल पहचान जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को सुरक्षा मजबूत करने के लिए चल रहे कार्यों की जानकारी दी।

    विधानसभा परिसर के सामने, पीछे और अन्य संवेदनशील स्थानों पर आठ वॉच टावर स्थापित किए जा रहे हैं। इन टावरों पर सीआरपीएफ के जवान तैनात रहेंगे, जिससे परिसर के अलग-अलग हिस्सों पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। अधिकारियों की योजना के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि परिसर की सीमा और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी अधिक प्रभावी हो सके। आठ वॉच टावरों में से एक का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि बाकी टावरों का काम जारी है।

    परिसर की सीमा पर एक छोर से दूसरे छोर तक गश्त करने के लिए सीआरपीएफ के जवानों के वास्ते अलग मार्ग भी बनाया जा रहा है। इस मार्ग का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके तैयार होने से सुरक्षा कर्मियों को परिसर के बाहरी हिस्सों में नियमित गश्त करने के लिए निर्धारित रास्ता मिलेगा। वॉच टावरों और गश्ती मार्ग को सुरक्षा व्यवस्था के नए ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    वाहनों की जांच को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विधानसभा के गेट नंबर दो और पांच पर अंडर व्हीकल सर्विलांस सिस्टम (यूवीएसएस) लगाए गए हैं। इस तकनीक के माध्यम से वाहनों की जांच की जा सकेगी। साथ ही संदिग्ध वाहनों और फर्जी नंबर प्लेट वाले वाहनों की पहचान करने में भी सहायता मिलेगी। इससे विधानसभा परिसर में प्रवेश करने वाले वाहनों की निगरानी को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

    गेट नंबर एक पर फोटो पहचान की सुविधा वाले फ्लैप बैरियर लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक का इस्तेमाल वाहनों की पहचान करने और उनकी आवाजाही का रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाएगा। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य परिसर में आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रखना और प्रवेश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। गेट नंबर एक से पांच तक स्वचालित स्लाइडिंग दरवाजे लगाने का काम भी किया जा रहा है।

    विधानसभा परिसर में फिलहाल करीब 120 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए ऐसे स्थानों की पहचान करने को दिल्ली पुलिस से कहा गया है, जहां अंधेरा रहता है या सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त निगरानी की आवश्यकता है। इन स्थानों की पहचान के बाद वहां सुरक्षा संबंधी जरूरतों के अनुसार कदम उठाए जा सकेंगे।

    आगंतुकों के प्रवेश की प्रक्रिया में भी डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। विधानसभा के रिसेप्शन पर आने वाले लोगों की फोटो पहचान दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही उनकी आवश्यक जानकारी और विधानसभा आने का उद्देश्य भी रिकॉर्ड किया जाएगा। इस तरह सुरक्षा व्यवस्था में प्रवेश से लेकर परिसर के भीतर निगरानी तक कई स्तरों पर बदलाव किए जा रहे हैं। वॉच टावर, वाहन जांच प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे, गश्ती मार्ग और डिजिटल पहचान के जरिए विधानसभा परिसर की सुरक्षा को अधिक मजबूत बनाने की तैयारी है।

  • ग्वालियर में दशहरे पर इन रास्तों से बचकर निकलें, जुलूस के लिए रूट डायवर्ट, रावण दहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था

    ग्वालियर में दशहरे पर इन रास्तों से बचकर निकलें, जुलूस के लिए रूट डायवर्ट, रावण दहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विजयादशमी के अवसर पर दशहरा जुलूस रावण दहन और नवदुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। मंगलवार को शहर में धार्मिक आयोजनों के दौरान लोगों की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और कुछ रास्तों को बंद रखने की व्यवस्था की है। ऐसे में घर से निकलने वाले वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले निर्धारित मार्गों की जानकारी जरूर लें और जरूरत के अनुसार वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।

    दशहरा जुलूस अचलेश्वर मंदिर से शुरू होकर फूलबाग मैदान तक पहुंचेगा। जुलूस के निर्धारित मार्ग में दाल बाजार लोहिया बाजार ऊंट पुल पाटनकर चौराहा दौलतगंज महाराज बाड़ा सराफा बाजार गश्त का ताजिया राम मंदिर छप्परवाला पुल शिंदे की छावनी और गुरुद्वारा शामिल हैं। इन रास्तों से जुलूस गुजरने के दौरान यातायात नियंत्रित रहेगा। इस वजह से संबंधित क्षेत्रों में वाहन चालकों को इंतजार करना पड़ सकता है या उन्हें दूसरे रास्तों से जाना पड़ सकता है। खासकर बाजार और प्रमुख चौराहों के आसपास निकलने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलना चाहिए।

    यातायात व्यवस्था के तहत जलालपुर से सागरताल होते हुए बहोड़ापुर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को रितुराज होटल और मोतीझील वाले रास्ते से जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा चार शहर का नाका से सागरताल रोड और ट्रांसपोर्ट नगर से सागरताल की ओर जाने वाले मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। इन बदलावों का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ वाले इलाकों में यातायात को व्यवस्थित रखना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    दशहरे पर रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के फूलबाग मैदान पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मैदान के आसपास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक रावण दहन में शामिल होने वाले लोगों के लिए मैदान नंबर दो और चिड़ियाघर के सामने पार्किंग की सुविधा रखी गई है। वाहन चालकों को कोशिश करनी चाहिए कि वे निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही वाहन खड़े करें ताकि आयोजन स्थल के आसपास अनावश्यक जाम न लगे और पैदल आने जाने वाले लोगों को परेशानी न हो।

    शहर में दशहरा जुलूस के साथ नवदुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के चलते भी कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में वाहन चालकों को पुलिस के निर्देशों का पालन करना चाहिए और बैरिकेडिंग वाले रास्तों में जबरन प्रवेश करने से बचना चाहिए। जिन लोगों को महाराज बाड़ा दाल बाजार फूलबाग या सागरताल क्षेत्र की ओर जाना है उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग पहले से तय कर लेना चाहिए। आपात स्थिति में पुलिसकर्मियों के निर्देशों के अनुसार रास्ता बदलना भी जरूरी होगा।

    दशहरा शहर में धार्मिक उत्साह और सामूहिक आयोजन का अवसर है लेकिन बड़ी भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में लोगों की सावधानी और प्रशासन के निर्देशों का पालन जाम और अव्यवस्था को कम करने में मदद कर सकता है। घर से निकलने से पहले ट्रैफिक रूट की जानकारी लेना और निर्धारित पार्किंग का इस्तेमाल करना ही बेहतर रहेगा।

  • 15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात

    15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात


    भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सातऊ गांव के शीतला माता मंदिर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले मेले में खिलौनों प्रसाद झूलों और घरेलू सामान की दुकानों पर जमकर खरीदारी होती है। इसी उम्मीद के साथ दूरदराज के जिलों और दूसरे राज्यों से व्यापारी यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 17 अक्टूबर की रात मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर से लोग दुखी हैं और इसका सीधा असर मेले के कारोबार पर पड़ा है। व्यापारियों के मुताबिक दो दिनों में 50 लाख रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है और नवमी से पहले ही करीब 80 प्रतिशत दुकानदार अपनी दुकानें समेटकर लौटने लगे।

    सोमवार को दुर्गा नवमी के दिन मेले का नजारा सामान्य वर्षों से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और दुकानों पर ग्राहकों की चहल पहल रहती थी वहां सन्नाटा पसरा था। कई दुकानदार सामान पैक करते नजर आए तो कुछ आखिरी समय तक ग्राहकों का इंतजार करते रहे। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने नौ दिनों तक चलने वाले मेले के लिए पहले से सामान खरीदा था और दुकान लगाने के लिए किराया तथा परिवहन पर भी खर्च किया था। लेकिन हादसे के बाद लोगों के नहीं पहुंचने से उनकी कमाई की उम्मीद टूट गई। कुछ व्यापारियों के लिए तो दुकान तक सामान लाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद भी मेले में कारोबार की ऐसी स्थिति नहीं देखी थी।

    हर साल अष्टमी और नवमी पर शीतला माता मंदिर में करीब एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी अनुमान के आधार पर छोटे और बड़े व्यापारी अपनी तैयारियां करते हैं। इस बार भी दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद थी लेकिन हादसे के बाद मेले में आने वालों की संख्या बेहद कम रह गई। छतरपुर से परिवार के साथ आईं दर्पण पिछले पांच साल से यहां खिलौनों की दुकान लगाती हैं। उन्हें इस बार भी अच्छी कमाई की उम्मीद थी लेकिन ग्राहकों की कमी ने उन्हें निराश कर दिया। वहीं दतिया से पहली बार दुकान लगाने आईं दामिनी को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि कारोबार नहीं होने से उनका पूरा हिसाब बिगड़ गया है।

    ग्वालियर की मंजिता देवी के मुताबिक उन्होंने करीब एक लाख रुपये का सामान बिक्री के लिए रखा था लेकिन ग्राहकों की कमी के कारण सामान नहीं बिक सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर मार्ग पर बाइक तक जाने में रोक लगाई जाती है तो भारी ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। भितरवार की 80 वर्षीय कस्तूरी देवी भी नुकसान से परेशान हैं। वे हर सोमवार को शीतला माता मंदिर आती हैं और उनके मुताबिक सामान्य सोमवार को भी इस बार की तुलना में ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि उन पर करीब 50 हजार रुपये का कर्ज है और अब कारोबार ठप होने से इसकी भरपाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    मंदिर के महंत कमल सिंह भगत ने भी हादसे पर दुख जताया। उनका कहना है कि मंदिर के सैकड़ों साल के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। उनके मुताबिक नवमी पर इस बार सामान्य दिनों की तुलना में बेहद कम श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर का मजबूत प्रवेश द्वार पहले भी कई लोगों की जान बचाने में मददगार रहा है। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग करेगा।

    इस बीच कुछ दुकानदारों ने स्थानीय लोगों पर दुकान लगाने की जगह के लिए 500 रुपये और बिजली के लिए प्रतिदिन 200 रुपये मांगने के आरोप भी लगाए हैं। कुछ ने धमकी और मारपीट की शिकायतें भी बताई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हादसे के बाद मेले में पसरे सन्नाटे ने व्यापारियों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब उनके सामने बचा हुआ सामान वापस ले जाने और हुए नुकसान की भरपाई करने की चुनौती है। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • कच्चे तेल की कीमतों में 2027 तक बड़ी गिरावट की संभावना, ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान

    कच्चे तेल की कीमतों में 2027 तक बड़ी गिरावट की संभावना, ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच आने वाले समय में बड़ी गिरावट की संभावना जताई गई है। मौजूदा समय में ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जबकि अगले महीने डिलीवरी के लिए निर्धारित डेटेड ब्रेंट की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बताई गई है। हालांकि, अनुमान है कि वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है और ब्रेंट क्रूड का औसत भाव घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यह अनुमान पश्चिम एशिया में तेल की आपूर्ति में संभावित सुधार और वैश्विक बाजार में मांग तथा आपूर्ति के बीच बदलते अंतर पर आधारित है।

    तेल बाजार के विशेषज्ञ डान स्ट्रुवेन और उनकी टीम के आकलन के मुताबिक, दिसंबर 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। यह उनके पहले के 85 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से अधिक है। इसके बावजूद, वर्ष 2027 के लिए औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति पर पड़ा असर धीरे-धीरे कम हो सकता है। यदि आपूर्ति सामान्य होती है और बाजार में पर्याप्त तेल उपलब्ध रहता है, तो कीमतों पर दबाव घट सकता है।

    तेल की कीमतों में संभावित गिरावट की एक प्रमुख वजह फारस की खाड़ी से निर्यात में हुआ सुधार बताया गया है। आकलन के अनुसार, सितंबर के अंत से इस क्षेत्र का तेल निर्यात वर्ष 2025 के औसत स्तर के आसपास बना हुआ है। इसमें प्रतिदिन लगभग 40 लाख बैरल ऐसे तेल का अनुमानित निर्यात भी शामिल है, जिसे ऐसे टैंकरों के जरिए ले जाया जाता है जिनके ट्रांसपोंडर बंद होने के कारण उनकी आवाजाही का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। इस तरह निर्यात में सुधार से वैश्विक बाजार में उपलब्ध तेल की मात्रा बढ़ने की संभावना है।

    वैश्विक तेल बाजार में मांग और आपूर्ति के अंतर में कमी भी कीमतों के अनुमान को प्रभावित कर रही है। आकलन के मुताबिक, मार्च में तेल की मांग आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग 72 लाख बैरल अधिक थी, जबकि सितंबर में यह अंतर घटकर करीब तीन लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। फारस की खाड़ी के बाहर उत्पादन में बढ़ोतरी और कमजोर मांग ने इस अंतर को कम करने में योगदान दिया। अनुमान है कि वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में वैश्विक तेल बाजार अधिशेष की स्थिति में आ सकता है। वर्ष 2027 में भी यह स्थिति बनी रहने की संभावना है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है।

    पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति में आई बाधाओं ने बाजार को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस संकट से जुड़ी मांग में आई भारी कमी वर्ष 2027 की चौथी तिमाही तक काफी हद तक दूर हो सकती है। हालांकि, कीमतों में दोबारा तेजी आने का जोखिम बना हुआ है। यदि क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ता है या आपूर्ति में नई बाधाएं पैदा होती हैं, तो कच्चे तेल के दाम अनुमान से अधिक समय तक ऊंचे रह सकते हैं।

    इसलिए 80 डॉलर प्रति बैरल का स्तर फिलहाल भविष्य के बाजार का अनुमान है, निश्चित कीमत नहीं। आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, तेल निर्यात की रफ्तार, उत्पादन और वैश्विक मांग यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि कीमतें वास्तव में कितनी नीचे आती हैं।

  • महाराष्ट्र के सांगोला गांव में दशहरे पर नहीं जलता रावण, 350 साल से ग्राम देवता मानकर होती है पूजा

    महाराष्ट्र के सांगोला गांव में दशहरे पर नहीं जलता रावण, 350 साल से ग्राम देवता मानकर होती है पूजा


    नई दिल्ली ।
    देशभर में दशहरे के अवसर पर रावण के पुतले का दहन करके बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र के अकोला जिले में स्थित सांगोला गांव की परंपरा इससे बिल्कुल अलग है। यहां विजयादशमी के दिन रावण का पुतला जलाने के बजाय दस सिरों वाले दशानन की पूजा की जाती है। पातुर तहसील के इस गांव में ग्रामीण रावण को अपना ग्राम देवता और रक्षक मानते हैं। उनकी मान्यता है कि रावण की आराधना से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है। करीब 350 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आज भी गांव के लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।

    सांगोला में दशहरे के दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान गांव के लोग एकत्र होकर अपनी पुरानी धार्मिक परंपरा निभाते हैं। यहां रावण की प्रतिमा की पूजा केवल दशहरे तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल नियमित रूप से उसकी आराधना की जाती है। महिलाएं भी इस परंपरा में श्रद्धापूर्वक भाग लेती हैं। देश के कई हिस्सों में जहां दशहरा रावण दहन के साथ मनाया जाता है, वहीं सांगोला में उसकी पूजा गांव की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रावण की पूजा की शुरुआत लगभग 350 साल पहले हुई थी। बताया जाता है कि उस समय गांव में एक ऋषि महाराज रहते थे, जिन्हें ग्रामीण श्रद्धा की दृष्टि से देखते थे। मान्यता है कि अपने अंतिम समय में ऋषि महाराज ने ऐसी प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा जताई थी, जिसमें दस बिंदु या चिह्न हों। हालांकि, प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार ने दस मुखों वाली प्रतिमा तैयार कर दी। यह प्रतिमा रावण के स्वरूप जैसी दिखाई देती थी।

    ग्रामीणों के अनुसार, जब इस प्रतिमा को बैलगाड़ी से गांव लाया जा रहा था, तब बैलगाड़ी गांव की सीमा पार नहीं कर सकी। इस घटना को ग्रामीणों ने दैवी संकेत के रूप में देखा। इसके बाद प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया। इसी घटना को सांगोला में रावण को ग्राम देवता मानकर पूजा करने की परंपरा की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती यह लोकमान्यता आज भी गांव के धार्मिक जीवन का हिस्सा है।

    रावण के भक्त ज्ञानेश्वर महाराज धाकरे के अनुसार, गांव में दशानन की पूजा उसके चरित्र के प्रत्येक पहलू का समर्थन करने के उद्देश्य से नहीं की जाती। उनके मुताबिक, रावण की भगवान शिव के प्रति भक्ति, आराधना और साधना के सम्मान में उसकी पूजा होती है। उनका कहना है कि रावण सोने की लंका का राजा था और गांव के लोग उसकी आराधना करते हुए अपने गांव को भी सुखी तथा समृद्ध मानते हैं। ग्रामीण इस खुशहाली को रावण महाराज की कृपा से जोड़ते हैं।

    सांगोला के निवासियों का विश्वास है कि रावण महाराज की पूजा से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है और संकटों से रक्षा होती है। इसी आस्था के कारण दशहरे पर होने वाला पूजन पूरे गांव के लिए विशेष महत्व रखता है। महिलाओं सहित ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। करीब साढ़े तीन सदियों से चली आ रही यह मान्यता दिखाती है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में दशहरे से जुड़ी धार्मिक परंपराएं स्थानीय इतिहास, लोकविश्वास और समुदाय की आस्था के अनुसार अलग-अलग रूप लेती हैं।

  • आंध्र प्रदेश के मंदिर में महालक्ष्मी का साढ़े चार करोड़ रुपये के नोटों से भव्य शृंगार

    आंध्र प्रदेश के मंदिर में महालक्ष्मी का साढ़े चार करोड़ रुपये के नोटों से भव्य शृंगार


    नई दिल्ली । 
    आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले के अमलापुरम स्थित श्री वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर में शारदीय नवरात्र के अवसर पर देवी महालक्ष्मी का अनोखा शृंगार किया गया। करीब साढ़े चार करोड़ रुपये के करेंसी नोटों से की गई इस विशेष सजावट ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया है। मंदिर में देवी की प्रतिमा को अलग-अलग रंगों के नोटों से बनी आकर्षक मालाओं से सजाया गया। इसके अलावा मंदिर के आसपास के हिस्सों में भी करेंसी नोटों का इस्तेमाल करके विशेष सजावट की गई है। इस अनूठे शृंगार को देखने और देवी के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

    मंदिर में नवरात्र के दौरान की गई यह सजावट अपनी भव्यता और इसे तैयार करने में लगी मेहनत के कारण चर्चा में है। करेंसी नोटों को व्यवस्थित तरीके से सजाकर मालाओं का रूप दिया गया, जिन्हें देवी के शृंगार में शामिल किया गया। अलग-अलग रंगों के नोटों को बारीकी से जोड़कर तैयार की गई इन मालाओं ने मंदिर की सजावट को विशिष्ट रूप दिया। इस आयोजन में श्रद्धालुओं की भागीदारी भी अहम रही, क्योंकि सजावट के लिए इस्तेमाल किए गए नोट भक्तों की ओर से उपलब्ध कराए गए थे।

    मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, करेंसी नोटों से बनी विशेष मालाओं को तैयार करने में लगभग 15 दिन का समय लगा। इस दौरान नोटों को सावधानीपूर्वक व्यवस्थित करके मालाएं बनाई गईं और फिर उनका इस्तेमाल देवी के शृंगार तथा मंदिर परिसर की सजावट के लिए किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में समय और मेहनत लगी। नवरात्र के दौरान मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों के बीच नोटों से किया गया यह विशेष शृंगार आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    इस आयोजन की एक खास बात यह है कि सजावट पूरी होने के बाद करेंसी नोटों को मंदिर में स्थायी रूप से नहीं रखा जाएगा। मंदिर समिति के सदस्यों के मुताबिक, जिन श्रद्धालुओं ने सजावट के लिए नोट दिए हैं, उन्हें नवरात्र के बाद उनकी राशि वापस लौटा दी जाएगी। इस तरह नोटों का इस्तेमाल देवी के विशेष शृंगार के लिए किया गया है और बाद में उन्हें संबंधित श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जाएगा।

    कुछ श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता भी प्रचलित है कि मंदिर में देवी के शृंगार में इस्तेमाल किए गए नोटों को घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में रखने से सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त होती है। उनका विश्वास है कि ऐसे नोट कारोबार में खुशहाली की कामना से जुड़े होते हैं। इसी कारण नोटों से किए गए इस शृंगार को धार्मिक आस्था के साथ आर्थिक समृद्धि की इच्छा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह श्रद्धालुओं की धार्मिक मान्यता है।

    श्री वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर में नवरात्र के दौरान हर साल विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस अवसर पर देवी को विशेष भोग अर्पित किया जाता है, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। मंदिर परिसर में उत्सव के अनुरूप सजावट और तैयारियां भी की जाती हैं। इस बार करीब साढ़े चार करोड़ रुपये के नोटों से किया गया महालक्ष्मी का शृंगार इन आयोजनों का प्रमुख आकर्षण बना है। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन देवी के दर्शन, धार्मिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता का विशेष अवसर है।

  • ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल

    ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने एक और परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 78 वर्षीय मोतीराम प्रजापति ने मंगलवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। करीब 52 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हादसे में एक बेकाबू ट्रक ने दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में कुल 57 लोग प्रभावित हुए थे जिनमें 15 लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी जबकि 41 लोग घायल बताए गए हैं।

    मोतीराम प्रजापति मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास प्रसाद की दुकान लगाते थे। इसी दुकान से होने वाली कमाई के सहारे वे अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। हादसे की रात वे भी ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए लिंक हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। चिकित्सकों के मुताबिक हादसे में लगी चोट के कारण उनकी खून की नली में थक्का जम गया था। इस स्थिति को सुपरफिशियल फीमोरल थ्रोम्बोसिस बताया गया। मोतीराम को वर्ष 2024 में हार्ट अटैक भी आया था जिसके बाद उनके दिल में स्टेंट डाला गया था। तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और सातऊ गांव में शोक की लहर फैल गई।

    हादसे में गंभीर रूप से घायल संजय शर्मा और 19 वर्षीय कल्पना परिहार को बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स भेजा गया है। संजय को सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एयर एम्बुलेंस से शिफ्ट किया गया जबकि कल्पना को मंगलवार सुबह एयर एम्बुलेंस के जरिए भोपाल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले घायलों के उपचार की जानकारी ली थी और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

    संजय शर्मा अपने परिवार के साथ शीतला माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। वे श्योपुर के निवासी हैं और शनिवार को परिवार के साथ एक तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने भाइयों से मिलने सहसराम गांव गए थे। वहां से वे अपने बड़े भाई महेश को साथ लेकर ग्वालियर आए थे। संजय यहां मकान बनवा रहे थे और चाहते थे कि महेश निर्माण कार्य की देखरेख करें। रात करीब डेढ़ बजे हुए हादसे में उनके भाई महेश और मासूम शौर्य की मौत हो गई जबकि संजय गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक धान से भरे दो ओवरलोड ट्रक नो एंट्री वाले रास्ते में करीब सात किलोमीटर तक अंदर आ गए थे। मंदिर के पास संकरे रास्ते और ढलान पर पहुंचने के बाद एक ट्रक रुक गया जबकि दूसरा ट्रक बेकाबू होकर नीचे की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में उसने दुकानों और श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। आखिरकार मंदिर का करीब 200 साल पुराना सीमेंट कंक्रीट का प्रवेश द्वार ट्रक के सामने आ गया और उससे टकराने के बाद वाहन रुक गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यदि ट्रक गेट से नहीं टकराता तो आगे कतार में खड़े अन्य श्रद्धालु भी उसकी चपेट में आ सकते थे।

    हादसे के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नो एंट्री मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है और 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात बताए गए थे। हादसे से करीब 15 मिनट पहले ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह भी मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रित करते दिखाई दिए थे। इसके कुछ ही समय बाद ट्रक के श्रद्धालुओं को कुचलने की सूचना मिली। अब इस दर्दनाक घटना के बाद घायलों के उपचार के साथ यह सवाल भी अहम है कि प्रतिबंधित मार्ग पर ओवरलोड ट्रक कैसे पहुंचा और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

  • सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष

    सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के भाषणों के साथ उनके डांस और भजन की प्रस्तुतियां भी चर्चा का विषय बन रही हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मंत्री कमल पटेल तक के वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक रील सड़क की बदहाली को लेकर चर्चा में आ गई है। इन वीडियो में कहीं मनोरंजन नजर आ रहा है तो कहीं लोग गाने और भजन के बोल के आधार पर सियासी मायने निकाल रहे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोक नगर में युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान एक गाने पर थिरकते नजर आए। उन्होंने अपनी तो जैसे तैसे कोई ऐसे या वैसे कट जाएगी आपका क्या होगा जनाब ए आली गाने पर डांस किया। उनकी इस प्रस्तुति की चर्चा होने लगी। लोगों ने उनके अंदाज को पसंद किया लेकिन गाने के बोल ने भी सियासी गलियारों में चुटकी लेने का मौका दे दिया। अब इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर इस गाने को लेकर लोग क्या संदेश तलाश रहे हैं। हालांकि सिंधिया की ओर से किसी खास राजनीतिक संदेश की बात सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भजन भी चर्चा में है। एक गरबा आयोजन के दौरान वे महाकाल डमरू वाले तू न संभाले तो हमें कौन संभाले भजन गाते नजर आए। विजयवर्गीय के भजन गाने का यह पहला मौका नहीं है लेकिन इस बार इसके बोल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और सत्ता संगठन में कथित उपेक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच लोग इसे अपने अपने अंदाज में देख रहे हैं। हालांकि इसे उनकी निजी आस्था और भक्ति की प्रस्तुति के रूप में भी देखा जा सकता है। इसी बीच उनके पुराने मित्र और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने चुटकी लेते हुए उन्हें इंदौर के पितृ पर्वत स्थित हनुमान मंदिर में बैठने की सलाह दी। उनकी टिप्पणी ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया।

    पूर्व मंत्री कमल पटेल का एक वीडियो भी चर्चा में है। हरदा में आयोजित भजन संध्या के दौरान तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यूं ही मस्त नगमे लुटाता रहूं गाना बजा तो वे खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। कमल पटेल पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। ऐसे में उनके डांस को लेकर भी लोग मजाकिया अंदाज में राजनीतिक संकेत तलाश रहे हैं। कुछ लोग इसे जनता का साथ पाने की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन यह लोगों की अपनी व्याख्या है।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार में भजन सुनते हुए बनाई गई रील भी चर्चा में आ गई। वे कार में बैठकर माता के भजन सुन रहे थे। इसी दौरान वाहन सड़क पर बने गड्ढों से गुजरा तो कार हिचकोले खाने लगी और अध्यक्ष भी झटकों से हिलते नजर आए। इस वीडियो को लेकर लोगों ने सड़क की हालत पर सवाल उठाए। भले ही वीडियो बनाने का उद्देश्य भक्ति का आनंद लेना रहा हो लेकिन उसमें दिखाई देने वाले गड्ढों ने सड़क की बदहाली को भी सामने ला दिया।

    इसी राजनीतिक हलचल के बीच सरकारी विभाग में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर एक मामला भी सामने आया है। खबर के मुताबिक एक विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी ने 25 लोगों की सूची तैयार कर वरिष्ठ अधिकारी को भेजी थी। जांच में पता चला कि सूची में शामिल 15 लोगों को पहले ही अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी थी और वे नौकरी कर रहे थे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी ने सूची तैयार करने वाले अधिकारी को फटकार लगाई। अब बाकी 10 लोगों की नियुक्ति को लेकर आगे क्या निर्णय होता है इस पर नजर रहेगी। इस तरह मध्य प्रदेश में नेताओं के वीडियो से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक कई मुद्दे चर्चा में हैं।

  • MP में दशहरे पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की तैयारी, गांव-गांव बांटे जाएंगे वोट चोरी के पर्चे

    MP में दशहरे पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की तैयारी, गांव-गांव बांटे जाएंगे वोट चोरी के पर्चे


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने अपने आंदोलन को तेज करने की तैयारी कर ली है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी AICC के दो महीने के वोट बचाओ देश बचाओ अभियान के तहत प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी ने दशहरे से लेकर नवंबर के आखिरी सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन जनसंपर्क पदयात्रा और चौपालों का कार्यक्रम तय किया है। इसके जरिए कांग्रेस मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों को जनता तक पहुंचाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा उठाने की कोशिश करेगी।

    कांग्रेस की योजना के मुताबिक दशहरे के अवसर पर मध्य प्रदेश के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। पार्टी कार्यकर्ता सार्वजनिक सभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के दौरान वोट चोरी के आरोपों से संबंधित जानकारी वाले पर्चे बांटेंगे। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर पदयात्रा साइकिल रैली और बाइक रैलियां निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी स्थानीय प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाएगी। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार AICC के परिपत्र में दशहरे पर रावण की जगह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाने का स्पष्ट निर्देश नहीं है। पुतला दहन को ब्लॉक स्तर पर आयोजित मार्च के समापन कार्यक्रम से जोड़ा गया है।

    आंदोलन के अगले चरण में ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा से एसडीएम कार्यालय अथवा स्थानीय प्रशासनिक मुख्यालय तक मार्च निकालेंगी। कार्यक्रम के समापन पर संविधान के अनुच्छेद 326 का पाठ किया जाएगा और राष्ट्रगान गाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। कांग्रेस इन गतिविधियों के माध्यम से मताधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहती है।

    पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक वोट बचाओ देश बचाओ चौपाल अभियान भी चलाएगी। इसकी शुरुआत प्रदेश और जिला मुख्यालयों पर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं तथा जिला अध्यक्षों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से होगी। इसके बाद जिला स्तर पर समन्वय बैठकें और ब्लॉक स्तर पर बूथ लेवल एजेंट यानी BLA के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में मतदाता सूचियों की जांच और सत्यापन पर जोर रहेगा।

    अभियान के तहत बूथ लेवल एजेंट उन मतदाताओं की जानकारी जुटाएंगे जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए हैं या जिनकी प्रविष्टियों में गड़बड़ी की आशंका है। सत्यापन के बाद संबंधित रिकॉर्ड और मतदाता डोजियर ब्लॉक कांग्रेस कार्यालयों में जमा किए जाएंगे। इसके बाद गांव-गांव में चौपाल लगाकर स्थानीय लोगों के साथ चर्चा की जाएगी। इन चौपालों में प्रभावित बताए जा रहे मतदाताओं बुजुर्गों पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य नागरिकों को शामिल करने की योजना है। कांग्रेस कार्यकर्ता पर्चे बांटकर मतदाता सूची से जुड़े मामलों की जानकारी भी साझा करेंगे।

    इस आंदोलन का एक बड़ा चरण 1 नवंबर को प्रस्तावित है। कांग्रेस के कार्यक्रम के मुताबिक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के समन्वय से राष्ट्रीय रैली आयोजित की जाएगी। इसमें सांसदों विधायकों प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों फ्रंटल संगठनों तथा जमीनी कार्यकर्ताओं की भागीदारी का आह्वान किया गया है। इस रैली के जरिए पार्टी मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है।

    नवंबर के अंतिम सप्ताह में कांग्रेस दिल्ली कूच की तैयारी भी कर रही है। 25 और 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर दिल्ली चलो कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। तय रोडमैप के अनुसार मध्य प्रदेश के कार्यकर्ता 25 नवंबर को ग्वालियर में एकत्र होंगे और अगले दिन वाहनों से दिल्ली रवाना होंगे। अन्य राज्यों से भी अलग-अलग मार्गों के जरिए यात्राओं को दिल्ली पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

    आंदोलन के सभी चरणों के लिए प्रदेश जिला और ब्लॉक इकाइयों को वाहनों यात्रियों तथा रूट कैप्टन की जानकारी केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। AICC कनेक्ट सेंटर और केंद्रीय नियंत्रण कक्ष अभियान की निगरानी तथा समीक्षा करेंगे। अब देखना होगा कि कांग्रेस का यह अभियान प्रदेश में कितना व्यापक होता है और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर आगे क्या राजनीतिक तथा प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।