Author: bharati

  • फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर

    फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना अनियमित खानपान कम नींद और लगातार तनाव जैसी आदतें धीरे धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करना ज्यादा जरूरी है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।

    सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन में अलग अलग तरह की सब्जियां फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा और समय का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या बार बार जरूरत से ज्यादा खाने की आदत से बचना चाहिए।

    शरीर को स्वस्थ रखने में पानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। गर्मी या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना स्ट्रेचिंग करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। अगर आपका काम लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर करने वाला है तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी आदत हो सकती है। किसी नई या कठिन एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे धीरे करना बेहतर रहता है।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है। रात में देर तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करने और सोने का नियमित समय तय करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है लेकिन लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव महसूस होने पर काम के बीच आराम लेना परिवार और दोस्तों से बातचीत करना संगीत पढ़ने या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

    इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर आंखों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी बीमारी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की मेहनत से नहीं बल्कि रोज की छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश और समय समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • घर की इन गलतियों से बढ़ सकता है वास्तु दोष, जानें रसोई से लेकर मुख्य द्वार तक किन बातों का रखें खास ध्यान

    घर की इन गलतियों से बढ़ सकता है वास्तु दोष, जानें रसोई से लेकर मुख्य द्वार तक किन बातों का रखें खास ध्यान


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं को लेकर कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं। माना जाता है कि घर का वातावरण केवल साफ सफाई से ही नहीं बल्कि उसकी बनावट और वस्तुओं की सही स्थिति से भी प्रभावित हो सकता है। वास्तु के अनुसार यदि घर में कुछ चीजें गलत दिशा में रखी हों या निर्माण के दौरान दिशाओं का ध्यान नहीं रखा गया हो तो इसे वास्तु दोष से जोड़ा जाता है। हालांकि इन बातों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    वास्तु दोष की चर्चा सबसे पहले घर के मुख्य द्वार से शुरू होती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार घर में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। यदि प्रवेश द्वार के आसपास हमेशा गंदगी रहे या वहां टूटी फूटी वस्तुएं जमा हों तो इसे शुभ नहीं माना जाता। इसलिए मुख्य द्वार को साफ रखना चाहिए और वहां पर्याप्त रोशनी का इंतजाम करना बेहतर माना जाता है। दरवाजे के आसपास कबाड़ या बेकार सामान जमा करने से भी बचने की सलाह दी जाती है।

    घर की रसोई को लेकर भी वास्तु में विशेष नियम बताए गए हैं। रसोई को सामान्य तौर पर अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार रसोई में गैस चूल्हे और पानी से जुड़े स्थानों के बीच उचित संतुलन होना चाहिए। रसोई में गंदगी या लंबे समय तक खराब पड़े सामान को रखना नकारात्मक माना जाता है। इसलिए समय समय पर रसोई की सफाई करना और खराब खाद्य सामग्री को हटाना जरूरी है।

    बेडरूम में भी कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार सोते समय सिर किस दिशा में हो इसका भी महत्व माना जाता है। कमरे में टूटे हुए शीशे खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या लंबे समय से इस्तेमाल में न आने वाली वस्तुओं को जमा करके रखना उचित नहीं माना जाता। माना जाता है कि इससे कमरे का वातावरण भारी हो सकता है।

    घर के उत्तर पूर्व हिस्से को वास्तु में विशेष महत्व दिया जाता है। इसे ईशान कोण कहा जाता है और धार्मिक मान्यताओं में इसे पूजा तथा सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। इस हिस्से में अत्यधिक भारी सामान या अनावश्यक कबाड़ रखने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखना भी शुभ माना जाता है।

    बाथरूम और पानी की निकासी को लेकर भी वास्तु में कई मान्यताएं हैं। घर में कहीं पानी का रिसाव हो तो उसे तुरंत ठीक करवाना चाहिए। लगातार टपकता नल या पाइप से पानी का रिसाव केवल वास्तु की दृष्टि से ही नहीं बल्कि व्यावहारिक रूप से भी नुकसानदायक हो सकता है। पानी की बर्बादी रोकना और घर की स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।

    वास्तु दोष के उपायों में सबसे महत्वपूर्ण उपाय घर को साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना माना जा सकता है। प्राकृतिक रोशनी और हवा का पर्याप्त प्रवेश घर के वातावरण को बेहतर बनाता है। पूजा स्थल की नियमित सफाई करें और घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और संवाद को प्राथमिकता दें। किसी गंभीर निर्माण संबंधी समस्या में बिना तोड़फोड़ किए विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    वास्तु से जुड़ी मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है इसलिए इन्हें निश्चित परिणाम देने वाले उपाय के रूप में नहीं देखना चाहिए। घर की सुरक्षा स्वच्छता रोशनी हवा और सही रखरखाव को हमेशा प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।

  • बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर छिड़कना पड़ सकता है भारी, जानें किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए

    बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर छिड़कना पड़ सकता है भारी, जानें किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए

    नई दिल्ली ।कमरे को खुशबूदार और ताजा रखने के लिए रूम फ्रेशनर, एयर फ्रेशनर और सुगंधित स्प्रे का इस्तेमाल आम हो गया है। घर, कार्यालय और कार में इन उत्पादों का उपयोग खास तौर पर तब बढ़ जाता है, जब बारिश या नमी के कारण कमरे में सीलन और अप्रिय गंध महसूस होने लगती है। हालांकि, लगातार और जरूरत से ज्यादा रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करने से कुछ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

    रूम फ्रेशनर में खुशबू पैदा करने वाले फ्रेगरेंस कंपाउंड, सॉल्वेंट और दूसरे रासायनिक पदार्थ हो सकते हैं। इन पदार्थों का प्रभाव हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। कुछ संवेदनशील लोगों को तेज खुशबू के संपर्क में आने के बाद सिरदर्द, छींक, खांसी, आंखों में जलन या गले में परेशानी महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में सांस लेने में असहजता भी हो सकती है।

    बंद कमरे में लगातार स्प्रे करने से समस्या बढ़ सकती है। कमरे में हवा का पर्याप्त आवागमन नहीं होने पर फ्रेशनर से निकलने वाले रसायनों की मौजूदगी कुछ समय तक हवा में बनी रह सकती है। इसलिए किसी छोटे या पूरी तरह बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल करने के बजाय खिड़की और दरवाजे खोलकर हवा का संचार बनाए रखना बेहतर माना जाता है।

    रूम फ्रेशनर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह आमतौर पर बदबू के वास्तविक स्रोत को खत्म नहीं करता। अगर कमरे में सीलन, गीला कचरा, नमी, गंदे कपड़े या किसी अन्य कारण से दुर्गंध पैदा हो रही है, तो केवल खुशबू वाला स्प्रे उस समस्या को कुछ समय के लिए ढक सकता है। इसलिए दुर्गंध का कारण पता लगाकर उसे दूर करना ज्यादा प्रभावी तरीका है।

    तेज खुशबू के प्रति संवेदनशील लोगों को ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल विशेष सावधानी से करना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के आसपास भी जरूरत से ज्यादा सुगंधित उत्पादों का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। जिन लोगों को फ्रेगरेंस या परफ्यूम से परेशानी होती है, उन्हें हल्की खुशबू या बिना तेज सुगंध वाले विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    अगर रूम फ्रेशनर इस्तेमाल करने के बाद लगातार सिरदर्द, आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर ताजी हवा में जाना चाहिए। लक्षण बने रहने या गंभीर होने की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करना हो तो उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा मात्रा में स्प्रे करने से बचें और इसे चेहरे या शरीर के बेहद करीब से इस्तेमाल न करें। भोजन, खाने के बर्तनों और ऐसी सतहों पर सीधे स्प्रे नहीं करना चाहिए जहां खाद्य सामग्री रखी जाती है।

    एक साथ कई अलग अलग सुगंधित उत्पादों का इस्तेमाल करना भी जरूरी नहीं है। एयर फ्रेशनर के साथ सुगंधित मोमबत्ती, स्प्रे और दूसरे फ्रेगरेंस उत्पाद लगातार इस्तेमाल करने के बजाय सीमित मात्रा में किसी एक विकल्प का इस्तेमाल करना बेहतर है।

    कमरे को वास्तव में साफ और ताजा रखने के लिए नियमित सफाई सबसे महत्वपूर्ण है। कूड़ा समय पर बाहर निकालना, गीली चीजों को कमरे में जमा नहीं होने देना, सीलन और नमी को नियंत्रित करना तथा खिड़की दरवाजे खोलकर पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना ज्यादा उपयोगी उपाय हैं।

    इसलिए रूम फ्रेशनर को कमरे की सफाई का विकल्प नहीं समझना चाहिए। सीमित मात्रा में इस्तेमाल और पर्याप्त हवा का आवागमन रखते हुए इसका उपयोग किया जा सकता है, लेकिन लगातार तेज खुशबू बनाए रखने के लिए बार बार स्प्रे करना उचित नहीं है। साफ हवा, नियमित सफाई और दुर्गंध के वास्तविक कारण को दूर करना कमरे को स्वस्थ और आरामदायक बनाए रखने का बेहतर तरीका है।

  • बारिश से फिर भीगेगा मध्य प्रदेश 20 अगस्त को इन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भोपाल समेत कई जिलों में बढ़ी मौसम की हलचल

    बारिश से फिर भीगेगा मध्य प्रदेश 20 अगस्त को इन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भोपाल समेत कई जिलों में बढ़ी मौसम की हलचल


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है और 20 अगस्त को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है जबकि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां धीरे धीरे मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर बढ़ सकती हैं। ऐसे में लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम के बदलते मिजाज पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    20 अगस्त को टीकमगढ़ और सागर समेत कुछ इलाकों में भारी से बेहद भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा कई जिलों में तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 21 अगस्त को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का असर बना रहेगा। ग्वालियर दतिया और शिवपुरी सहित कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना बताई गई है। इस दौरान गरज चमक और तेज हवाओं का असर भी देखने को मिल सकता है।

    राजधानी भोपाल की बात करें तो 20 अगस्त को मौसम मुख्य रूप से बादलों से घिरा रहने और बारिश के आसार बने रहने की संभावना है। मौसम पूर्वानुमान में दिन का तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। अगले कुछ दिनों में भी भोपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना दिखाई दे रही है।

    प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में नदी नालों और जलाशयों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लगातार बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने और खेतों में पानी जमा होने जैसी स्थिति भी सामने आ सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश की गतिविधि के पीछे सक्रिय मानसूनी सिस्टम का प्रभाव अहम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर रहने के बाद यह गतिविधि मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकती है। ऐसे में इंदौर उज्जैन भोपाल सागर जबलपुर रीवा और ग्वालियर चंबल संभाग के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि किसी एक शहर में बारिश की तीव्रता अलग अलग हो सकती है इसलिए स्थानीय मौसम चेतावनी पर ध्यान देना जरूरी है।

    बारिश के साथ बिजली गिरने और गरज चमक का खतरा भी बना रह सकता है। ऐसे मौसम में खुले मैदान खेत या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सड़क पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचना बेहतर होगा क्योंकि कई बार कम समय में हुई तेज बारिश से पानी तेजी से बढ़ सकता है।

    कुल मिलाकर 20 अगस्त को मध्य प्रदेश में मौसम सक्रिय रहने वाला है। कई जिलों में बारिश का दौर तेज हो सकता है जबकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। आने वाले दिनों में भी प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी रहने के संकेत हैं।

  • निवेशकों के लिए अहम दिन 20 अगस्त को बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी के लिए इन स्तरों पर रहेगी नजर

    निवेशकों के लिए अहम दिन 20 अगस्त को बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी के लिए इन स्तरों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल काफी अहम रहने वाला है। लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सेंसेक्स और निफ्टी में अब रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है। 19 अगस्त को सेंसेक्स 326 अंक गिरकर 76909.68 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 77 अंक फिसलकर 24078.30 पर पहुंच गया। निफ्टी लगातार सातवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ और इस दौरान इसमें करीब 2.1 प्रतिशत की कमजोरी आई।

    बाजार में मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते दिखाई दे रहे हैं।

    इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी भू राजनीतिक तनाव भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस मोर्चे पर तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर तनाव कम होने की कोई सकारात्मक खबर आती है तो बाजार में राहत की खरीदारी देखने को मिल सकती है।

    अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। ऊंची यील्ड की स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए विकसित बाजारों में पैसा लगाना अधिक आकर्षक हो सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सत्रों में बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली हैं।

    19 अगस्त को बाजार में अधिकांश प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। हालांकि आईटी और फार्मा जैसे कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी। ऐसे में 20 अगस्त को निवेशकों की नजर सेक्टर आधारित प्रदर्शन पर भी रहेगी। मजबूत नतीजों और बेहतर कारोबारी संभावनाओं वाले शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर वैश्विक संकेतों वाले क्षेत्रों में दबाव कायम रह सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा दौर में निवेशकों को बाजार में जल्दबाजी से बड़े दांव लगाने के बजाय जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। लगातार गिरावट के बाद कुछ शेयर आकर्षक स्तर पर नजर आ सकते हैं लेकिन बाजार की दिशा पूरी तरह बदल गई है ऐसा मान लेना जल्दबाजी होगी। निफ्टी के 24000 के आसपास के स्तर पर निवेशकों की खास नजर रह सकती है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बाजार में और दबाव बन सकता है जबकि मजबूती की स्थिति में रिकवरी की कोशिश दिखाई दे सकती है।

    कुल मिलाकर 20 अगस्त का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और पश्चिम एशिया से आने वाली खबरें बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की तेजी या गिरावट देखकर घबराहट में फैसला न लें और किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी जोखिम क्षमता तथा वित्तीय सलाह को ध्यान में रखें

  • फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

    फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

    नई दिल्ली ।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी घरेलू बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की कुछ अवधि वाली ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि वाली चुनिंदा बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरें 15 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से कम अवधि वाली बल्क एफडी पर किया गया है, जबकि लंबी अवधि की कई जमाओं की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

    बैंक की ओर से किए गए बदलाव के तहत 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है। इसके अलावा 180 दिन से 210 दिन की अवधि वाली जमा पर ब्याज दर में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। इससे इन अवधि में बड़ी राशि एफडी के रूप में रखने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में कम ब्याज मिलेगा।

    हालांकि 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि वाली 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैंक की नई बल्क एफडी दरें अलग-अलग अवधि के आधार पर 5.25 प्रतिशत से 6.50 प्रतिशत के बीच हैं। इसलिए बड़ी राशि को कम अवधि के लिए एफडी में लगाने वाले निवेशकों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

    बल्क एफडी में किया गया यह बदलाव सामान्य एफडी ग्राहकों पर लागू नहीं होता। 3 करोड़ रुपये से कम की घरेलू जमा राशि पर बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि सामान्य ग्राहक जिनकी एफडी राशि इस सीमा से कम है, उनके मौजूदा ब्याज ढांचे पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

    सामान्य एफडी में आम नागरिकों को अलग-अलग अवधि के आधार पर 3.05 प्रतिशत से 6.40 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दरें सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अवधि के अनुसार 3.55 प्रतिशत से 7.05 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। इस वजह से कम राशि वाली नियमित एफडी करने वाले ग्राहकों के लिए मौजूदा दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट और सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच राशि की सीमा महत्वपूर्ण होती है। बड़ी राशि जमा करने वाले ग्राहकों के लिए बैंक अलग दरें निर्धारित कर सकता है। ऐसे में निवेश से पहले संबंधित अवधि और लागू ब्याज दर को देखना जरूरी होता है। खास तौर पर छोटी अवधि की एफडी में मामूली दर बदलाव भी बड़ी जमा राशि पर मिलने वाले कुल ब्याज को प्रभावित कर सकता है।

    एफडी को आमतौर पर निश्चित रिटर्न वाले निवेश विकल्प के रूप में देखा जाता है। ब्याज दर पहले से तय होने के कारण निवेशक को मैच्योरिटी तक संभावित रिटर्न का अनुमान लगाने में आसानी होती है। हालांकि अलग-अलग अवधि के लिए ब्याज दर अलग होती है और समय से पहले एफडी तोड़ने पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज या जुर्माने में बदलाव हो सकता है।

    SBI की नई दरों का असर मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि को छोटी अवधि की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट में रखने की योजना बना रहे हैं। ऐसे निवेशकों के लिए एफडी बुक करने से पहले नई दरों और अवधि की तुलना करना उपयोगी होगा।

    वहीं सामान्य ग्राहकों और 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि रखने वालों के लिए इस बदलाव से राहत है, क्योंकि उनकी एफडी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी मौजूदा नियमित एफडी दरें जारी हैं। इसलिए निवेशकों को अपनी जमा राशि, निवेश अवधि और लागू ब्याज दर के आधार पर फैसला लेना चाहिए।

  • MP में फिर एक्टिव हुआ मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम, 5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी

    MP में फिर एक्टिव हुआ मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम, 5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। ट्रफ और डिप्रेशन के असर से पूर्वी हिस्से में बारिश का जोर है। मौसम विभाग ने सागर संभाग के टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर और दमोह में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटे में इन जिलों में 8 इंच तक पानी गिर सकता है। दतिया, भिंड, निवाड़ी, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, कटनी, मैहर और सतना में भारी बारिश की चेतावनी है। भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के अनुसार, 18 से 24 अगस्त के बीच प्रदेश में बारिश का मिजाज बदलता रहेगा। 19 अगस्त को विंध्य और महाकौशल में भारी से अति भारी बारिश हुई। अब 20 से 24 अगस्त के दौरान बारिश का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ने के संकेत हैं।

    चित्रकूट में गुप्त गोदावरी उफनी, गुफाएं बंद

    बुधवार को पूर्वी मध्य प्रदेश में हुई भारी बारिश से कई जगह बाढ़ जैसे हालात बने। सतना के तराई क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के बाद चित्रकूट की गुप्त गोदावरी में पानी बढ़ गया। पहाड़ी का पानी गुफाओं के ऊपर से बहने लगा। सुरक्षा को देखते हुए चित्रकूट नगर परिषद ने दोनों गुफाएं बंद कर पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी।

    सतना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के भुमकहर गांव में 55 वर्षीय चरवाहा नाले में बह गया। सूचना मिलने के बाद SDERF की टीम मौके पर पहुंची और उसकी तलाश शुरू की।

    डिंडौरी में नदी-नाले उफने, 12 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूटा

    डिंडौरी में बुधवार सुबह से तेज बारिश जारी है। नदी-नाले उफान पर हैं और 12 से ज्यादा गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। पन्ना के बृजपुर क्षेत्र के कई गांवों में पानी भर गया। सिमरिया के बोदा गांव में भी जलभराव हुआ। घरों में रखा खाद्य सामग्री भी बारिश के पानी से भीग गई।

    उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के तीन गेट 4 मीटर तक खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    MP में अब तक 23 इंच बारिश, फिर भी 12% कम

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में 1 जून से अब तक 583.4 मिमी यानी करीब 23 इंच बारिश हो चुकी है। इस अवधि में सामान्य बारिश 663.7 मिमी यानी 26.1 इंच होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक करीब 3.1 इंच यानी 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 14% और पश्चिमी हिस्से में 10% कम बारिश दर्ज की गई है।

    39 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 19% तक कम बारिश हुई है। 18 जिलों में बारिश 4% से 58% तक कम है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के 21 जिलों में भी सामान्य से 5% से 39% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इसके विपरीत अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।

    जून में कमी, जुलाई में कोटा पूरा; अगस्त में फिर तेज हुआ मानसून

    मौसम विभाग के अनुसार, जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई, लेकिन इसके बाद मानसून दो बार कमजोर पड़ा और कई दिनों तक बारिश थमी रही।

    अगस्त में मानसून ने फिर जोर पकड़ा और महीने के दूसरे हिस्से में स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हुआ। इससे बारिश के आंकड़े में सुधार आया, लेकिन जून की कमी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में औसतन 37.3 इंच बारिश होती है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश करीब 38 से 39 इंच रहती है।

  • बुध का सिंह राशि में गोचर: इन राशियों के लिए धन-करियर में तरक्की, इन्हें रहना होगा सावधान

    बुध का सिंह राशि में गोचर: इन राशियों के लिए धन-करियर में तरक्की, इन्हें रहना होगा सावधान


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह 22 अगस्त 2026 को शाम 7 बजकर 24 मिनट पर कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह सूर्य की राशि है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध के इस गोचर का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग देखने को मिल सकता है। कुछ राशियों के लिए यह समय करियर, धन और शिक्षा के लिहाज से शुभ रह सकता है, जबकि कुछ को खर्च और रिश्तों के मामले में सावधानी बरतनी होगी।

    ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण मिश्र के अनुसार जानते हैं बुध के सिंह राशि में प्रवेश का किस राशि पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।

    मेष: पढ़ाई और करियर में सफलता के योग

    मेष राशि वालों के पांचवें भाव में बुध का गोचर होगा। प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। नई ट्रेनिंग या कुछ नया सीखने वालों को अच्छे परिणाम मिलेंगे। शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा। एआई और नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वालों को भी लाभ मिल सकता है। धन लाभ के योग हैं और संतान पक्ष से भी अच्छी खबर मिल सकती है।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करें और बेसन के लड्डुओं का भोग लगाकर प्रसाद बांटें।

    वृषभ: परिवार में बढ़ेगा सुख-शांति

    वृषभ राशि के चौथे भाव में बुध का गोचर होगा। घर-परिवार में सुख-शांति बढ़ सकती है। प्रॉपर्टी या घर से जुड़ा कोई फैसला परिवार की सहमति से लेना लाभकारी रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। करियर में मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है और सुख-सुविधाओं में वृद्धि के योग हैं।

    उपाय: बुधवार को गाय को चारा खिलाएं।

    मिथुन: मेहनत से बढ़ेगी कमाई

    मिथुन राशि के तीसरे भाव में बुध का गोचर होगा। कार्यक्षमता बढ़ेगी और आप अधिक सक्रिय होकर काम करेंगे। मार्केटिंग, शिक्षण, कानून और मीडिया से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। लंबी दूरी की यात्रा से फायदा होगा और रुके हुए काम पूरे होने के योग हैं। व्यापार में नई तकनीक अपनाने के लिए भी समय अच्छा है।

    उपाय: बुधवार को पक्षियों को दाना खिलाएं।

    कर्क: धन और नौकरी के लिए शुभ समय

    कर्क राशि के दूसरे भाव में बुध का गोचर होगा। सम्मान बढ़ सकता है और धन कमाने के प्रयास सफल हो सकते हैं। बेरोजगार लोगों को नौकरी मिलने के योग हैं। कहीं अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। घर-परिवार में भी सुख-शांति बढ़ेगी।

    सिंह: मजबूत होगी आर्थिक स्थिति

    बुध का गोचर सिंह राशि में ही होगा। इस दौरान आपकी विश्लेषण क्षमता बेहतर हो सकती है। काम को व्यवस्थित तरीके से करने में सफलता मिलेगी। सामाजिक स्थिति मजबूत होगी और धन लाभ के अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में मेहनत बढ़ाने से फायदा मिलेगा। परिवार का सहयोग भी प्राप्त होगा।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश के मंदिर में धूप की माला चढ़ाएं।

    कन्या: विदेश से जुड़े कामों में फायदा

    कन्या राशि के बारहवें भाव में बुध का गोचर होगा। विदेश में नौकरी या कारोबार करने वालों के लिए समय अनुकूल रह सकता है। इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। विदेश यात्रा और वीजा से जुड़े प्रयासों में सफलता के योग हैं। हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट पर नियंत्रण रखें। सेहत को लेकर भी लापरवाही न करें।

    तुला: इनकम बढ़ाने के अवसर

    तुला राशि के ग्यारहवें भाव में बुध का गोचर होगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। इनकम बढ़ाने के लिए समय अनुकूल है। अचानक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों के लिए भी समय अच्छा है। शिक्षक, वकील, मीडिया और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश को बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं और प्रसाद गरीबों में बांटें।

    वृश्चिक: करियर में मिलेगा वरिष्ठों का सहयोग

    वृश्चिक राशि के दसवें भाव में बुध का गोचर होगा। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। व्यापारियों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। रुका हुआ कारोबारी पैसा मिल सकता है। करियर में सफलता के लिए प्रयास बढ़ाने की जरूरत होगी।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश को धूप की माला चढ़ाएं।

    धनु: भाग्य का मिलेगा साथ

    धनु राशि के नौवें भाव में बुध का गोचर होगा। पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी और भाग्य का सहयोग मिल सकता है। धार्मिक यात्रा या पूजा-पाठ के अवसर बन सकते हैं। छात्रों को सफलता मिल सकती है। नौकरी तलाश रहे लोगों को नए सिरे से प्रयास शुरू करना चाहिए। कारोबार में योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर फायदा मिल सकता है।

    उपाय: गणेशजी को बेसन के लड्डुओं का भोग लगाकर 11 गरीबों को प्रसाद बांटें।

    मकर: रिसर्च और विदेश से जुड़े कामों में लाभ

    मकर राशि के आठवें भाव में बुध का गोचर होगा। एमफिल, पीएचडी या रिसर्च से जुड़े लोगों को सफलता मिल सकती है। विदेश में नौकरी के लिए आवेदन करने वालों को अच्छी खबर मिलने के योग हैं। हालांकि किसी भी फैसले में जल्दबाजी से बचें। रिश्तों के मामले में भी संवेदनशीलता बरतने की जरूरत होगी।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश को हरे फल का भोग लगाएं और 11 गरीबों को प्रसाद बांटें।

    कुंभ: नौकरी और रिश्तों में संयम जरूरी

    कुंभ राशि के सातवें भाव में बुध का गोचर होगा। नौकरी में सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद से बचें। जीवनसाथी के साथ भी वैचारिक मतभेद बढ़ने न दें। धैर्य से निर्णय लेने की जरूरत होगी। आर्थिक लिहाज से समय अनुकूल रह सकता है। मेहनत करने पर करियर और कारोबार में सफलता मिल सकती है।

    उपाय: बुधवार को गाय को चारा खिलाएं।

    मीन: इनकम बढ़ेगी, विवाद से बचें

    मीन राशि के छठे भाव में बुध का गोचर होगा। इनकम बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं और प्रतियोगिता में सफलता हासिल हो सकती है। हालांकि बिना जरूरत लोन लेने से बचें। नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों से विवाद न करें। व्यापारियों को भी साझेदारों और कारोबारी लोगों के साथ अनावश्यक बहस से बचना चाहिए।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश को दूब की माला चढ़ाएं, बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं और 11 गरीबों को प्रसाद बांटें।

  • नारायण की कृपा पाने का आसान तरीका, भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये चीजें; पूजा में शामिल करते ही मिलेगा शुभ फल

    नारायण की कृपा पाने का आसान तरीका, भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये चीजें; पूजा में शामिल करते ही मिलेगा शुभ फल


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की पूजाLord Vishnu, Vishnu Puja, Hindu Religion, Lord Vishnu Bhog, Sanatan Dharma श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए भक्त अलग अलग प्रकार की पूजा सामग्री और भोग अर्पित करते हैं। माना जाता है कि नारायण को कुछ विशेष चीजें बेहद प्रिय हैं और पूजा के दौरान इनका इस्तेमाल करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। हालांकि पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज भक्त की श्रद्धा और सच्ची भावना को माना गया है।

    भगवान विष्णु को पीला रंग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। यही वजह है कि उनकी पूजा में पीले फूल पीले वस्त्र और पीले रंग की मिठाई का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही भक्त भगवान को पीले चंदन का तिलक भी लगा सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पीले रंग का संबंध गुरु और ज्ञान से भी है इसलिए विष्णु पूजा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।

    भगवान विष्णु को केले का फल भी प्रिय माना जाता है। पूजा में केले का भोग लगाया जा सकता है। कई स्थानों पर गुरुवार के दिन भगवान विष्णु के साथ केले के पेड़ की भी पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में सुख समृद्धि का वातावरण मजबूत होता है।

    नारायण को पंचामृत का भोग भी अर्पित किया जाता है। दूध दही घी शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में पंचामृत अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी कई घरों में है। इसके अलावा तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। विष्णु पूजा में तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। मान्यता है कि तुलसी के बिना विष्णु पूजा को कई भक्त अधूरा मानते हैं।

    भगवान विष्णु को खीर और पीली मिठाइयों का भोग लगाने की भी परंपरा है। बेसन के लड्डू बूंदी के लड्डू या अन्य सात्विक मिठाइयां श्रद्धा के अनुसार अर्पित की जा सकती हैं। पूजा के बाद इस भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है।

    भगवान विष्णु की पूजा करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को स्वच्छ करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पीले फूल तुलसी दल फल और भोग अर्पित करें। विष्णु मंत्र का जाप करें और भगवान से परिवार की सुख शांति तथा कल्याण की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए दिखावे से ज्यादा जरूरी मन की पवित्रता और सच्ची श्रद्धा है।

  • गुरुवार का व्रत बदल सकता है जीवन की दिशा श्रद्धा से करें पूजा जानें सही विधि पूजा सामग्री और जरूरी नियम

    गुरुवार का व्रत बदल सकता है जीवन की दिशा श्रद्धा से करें पूजा जानें सही विधि पूजा सामग्री और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन व्रत और विधि विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। बृहस्पति ग्रह को ज्ञान विवाह संतान धन और सौभाग्य का कारक माना जाता है। यही वजह है कि कई लोग विवाह में आ रही बाधा दूर करने आर्थिक स्थिति मजबूत करने और परिवार में सुख शांति बनाए रखने के लिए गुरुवार का व्रत रखते हैं। हालांकि व्रत और पूजा से जुड़े ये नियम धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

    गुरुवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के साथ देवगुरु बृहस्पति का ध्यान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय माना जाता है इसलिए पूजा में पीले फूल पीले फल चने की दाल और हल्दी जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है।

    पूजा शुरू करने से पहले श्रद्धालु को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु को जल अर्पित करके पीले फूल चंदन अक्षत और नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। कई जगहों पर केले के पेड़ की भी पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। यदि घर में पूजा की जा रही हो तो केले के पेड़ की उपलब्धता के अनुसार पूजा की जा सकती है।

    गुरुवार व्रत में भगवान विष्णु की पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा बृहस्पति देव की कथा सुनना या पढ़ना भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा के बाद भगवान की आरती करनी चाहिए और परिवार की सुख शांति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को पीले रंग की वस्तु भोजन चने की दाल या अन्य उपयोगी सामग्री का दान भी कर सकते हैं।

    गुरुवार के व्रत में खानपान को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग दिन में एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और क्षमता के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। पूजा और व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और संयम माना जाता है इसलिए किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होने पर कठोर उपवास करने से बचना उचित है।

    गुरुवार के दिन कुछ कार्यों को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कई परंपराओं में इस दिन बाल और नाखून काटने तथा कुछ विशेष घरेलू कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन नियमों को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए व्रत करने वाले व्यक्ति को अपने परिवार की परंपरा और धार्मिक आस्था के अनुसार नियमों का पालन करना चाहिए।

    शाम के समय भगवान विष्णु की दोबारा पूजा करके आरती की जा सकती है। इसके बाद व्रत रखने वाला व्यक्ति फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण कर सकता है। कई श्रद्धालु लगातार कई गुरुवार तक व्रत रखने का संकल्प लेते हैं और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उद्यापन करते हैं। उद्यापन की विधि भी अलग अलग परंपराओं में अलग हो सकती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरुवार का व्रत श्रद्धा संयम और सकारात्मक सोच के साथ किया जाए तो मन को शांति मिलती है। भगवान विष्णु की भक्ति के साथ जरूरतमंदों की सहायता और दान को भी इस दिन विशेष महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि गुरुवार का व्रत केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि सेवा दान और सद्भाव की भावना से जोड़कर भी देखा जाता है।