Author: bharati

  • आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी फिर ED के निशाने पर 15 अफसरों की टीम ने खंगाले दस्तावेज कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

    आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी फिर ED के निशाने पर 15 अफसरों की टीम ने खंगाले दस्तावेज कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई


    उत्तर प्रदेश । समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बुधवार सुबह रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी समेत आजम खान और जौहर ट्रस्ट से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई। जानकारी के मुताबिक ED की टीम कई वाहनों से यूनिवर्सिटी पहुंची और वहां मौजूद दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की। छापेमारी के दौरान यूनिवर्सिटी के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। खास बात यह रही कि कार्रवाई के बीच यूनिवर्सिटी में नियमित कक्षाएं भी चलती रहीं और छात्रों को पहचान पत्र की जांच के बाद प्रवेश दिया गया।

    ED की यह कार्रवाई रामपुर तक सीमित नहीं रही। सहारनपुर और दिल्ली समेत कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोगों और परिसरों के अलावा सहारनपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता का कार्यालय और आवास भी शामिल है। ED की टीम इन जगहों पर वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड और अन्य कागजात खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत की जा रही है।

    जांच एजेंसियों के सामने मुख्य सवाल कथित तौर पर सरकारी ठेकों से मिले पैसों के इस्तेमाल को लेकर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी ठेकों से प्राप्त धनराशि किन लोगों या कंपनियों के माध्यम से जौहर यूनिवर्सिटी अथवा उससे जुड़े ट्रस्ट तक पहुंची। आरोपों की जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि इस रकम का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी की संपत्तियां तैयार करने या अन्य गतिविधियों में किस तरह किया गया। हालांकि छापेमारी अभी जांच का हिस्सा है और कार्रवाई पूरी होने के बाद ही ED की ओर से सामने आने वाली जानकारी से तस्वीर और स्पष्ट होगी।

    जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में रही है। 15 जुलाई को रामपुर के जिलाधिकारी ने यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को ढहाने का आदेश दिया था। प्रशासन की ओर से आरोप लगाया गया था कि इन इमारतों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के बिना कराया गया। हालांकि बाद में मुरादाबाद के कमिश्नर आन्जनेय सिंह की अदालत ने जिलाधिकारी के इस आदेश पर रोक लगा दी। इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    ED की कार्रवाई के बीच यूनिवर्सिटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि छापेमारी के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। यूनिवर्सिटी में छात्रों को पहचान पत्र देखकर प्रवेश दिया गया जबकि अभिभावकों को गेट से ही वापस लौटाया गया। दूसरी तरफ आजम खान के आवास पर इस कार्रवाई के दौरान कोई छापेमारी नहीं हुई और वहां सामान्य स्थिति बनी रही।

    आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले भी हो चुकी है। जुलाई 2019 में ED ने यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसरों में तलाशी अभियान चलाया था और दस्तावेज जब्त किए थे। इसके बाद सितंबर 2023 में आयकर विभाग और ED ने आजम खान के आवास तथा जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ठिकानों पर लगातार तीन दिनों तक छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के बाद संदिग्ध बैंक लेनदेन से संबंधित जानकारी सामने आने पर ED की ओर से समन भी जारी किए गए थे।

    आजम खान इस समय रामपुर जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज रहे हैं और उनके वकील के मुताबिक दोहरे पैन कार्ड मामले को छोड़कर अन्य मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है या वे बरी हो चुके हैं। फिलहाल दोहरे पैन कार्ड मामले में अदालत की सजा के बाद वह जेल में हैं और जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की गई है।

    ED की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब आजम खान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज है। हाल ही में शिवपाल यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें गृहमंत्री बनाया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ऐसे में ED की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

    फिलहाल जांच एजेंसी की टीम अलग अलग ठिकानों पर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। छापेमारी से जुड़े पूरे मामले में ED की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि एजेंसी को किन वित्तीय लेनदेन या संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और इस कार्रवाई के बाद आजम खान तथा जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

  • शहजाद पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने की बताई वजह, आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लिया बड़ा फैसला

    शहजाद पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने की बताई वजह, आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लिया बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । बीजेपी के चर्चित प्रवक्ताओं में शामिल रहे शहजाद पूनावाला ने पार्टी की जिम्मेदारी से अलग होने के बाद अपने फैसले की वजह स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि इस्तीफे के पीछे केवल राजनीतिक कारण नहीं थे, बल्कि आर्थिक परिस्थितियों और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे समय तक पार्टी के लिए पूर्णकालिक भूमिका निभाने के कारण उनके लिए आय का कोई दूसरा नियमित माध्यम बनाए रखना मुश्किल हो गया था। अब उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है।

    शहजाद पूनावाला ने बताया कि राजनीति में सक्रिय रहते हुए घर चलाने से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही थीं। किराया, रोजमर्रा के खर्च और परिवार की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए कठिन होता जा रहा था। पार्टी के काम को पूरा समय देने के कारण वह किसी अन्य नौकरी या पेशेवर गतिविधि में नियमित रूप से शामिल नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में बचत के सहारे खर्च चलाया गया, लेकिन समय के साथ बचत भी समाप्त होने लगी।

    परिवार से जुड़ी परिस्थितियों ने भी उनके फैसले को प्रभावित किया। शहजाद पूनावाला के अनुसार, उनकी मां कुछ समय पहले एक दुर्घटना का शिकार हुई थीं। ऐसे समय में उनके साथ रहना और उनकी देखभाल करना उनके लिए प्राथमिकता बन गया। राजनीतिक गतिविधियों में लगातार व्यस्त रहने के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को संतुलित करना मुश्किल हो रहा था। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने 30 जुलाई को अपना इस्तीफा दिया, जिसे बातचीत के बाद पार्टी ने स्वीकार कर लिया।

    पार्टी से अलग होने के बावजूद शहजाद पूनावाला ने स्पष्ट किया कि उनके वैचारिक रुख में बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक बने हुए हैं। उनके मुताबिक, पार्टी की जिम्मेदारी छोड़ना उनके राजनीतिक विचारों से दूरी बनाने का संकेत नहीं है। उन्होंने अपने फैसले को मुख्य रूप से व्यक्तिगत, आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़ा बताया है।

    अब शहजाद पूनावाला निजी क्षेत्र में नौकरी तलाशने की तैयारी कर रहे हैं। वह पहले भी कॉरपोरेट क्षेत्र में काम कर चुके हैं, इसलिए उनका मानना है कि पेशेवर जीवन में वापस लौटना उनके लिए नया अनुभव नहीं होगा। हालांकि उन्होंने अभी किसी विशेष कंपनी या पद को लेकर अंतिम निर्णय नहीं किया है। उनका अगला कदम प्राइवेट सेक्टर में रोजगार हासिल करने की दिशा में होगा।

    बीजेपी की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद शहजाद ने मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की भी बात कही है। उनका कहना है कि पार्टी पद से जुड़े दायित्वों के कारण जिन सीमाओं और जिम्मेदारियों का पालन करना पड़ता था, अब उनमें बदलाव आएगा। वह सार्वजनिक मुद्दों और राजनीतिक विषयों पर अपनी राय पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्रता के साथ रखने की कोशिश करेंगे।

    शहजाद पूनावाला ने बीजेपी को युवाओं से जुड़ने को लेकर भी सुझाव दिया है। उनके अनुसार, बदलते दौर में राजनीतिक दलों को युवाओं की भाषा, उनकी प्राथमिकताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को अधिक गंभीरता से समझना चाहिए। उनका मानना है कि सोशल मीडिया और नए डिजिटल माध्यमों के जरिए युवा वर्ग से संवाद मजबूत किया जा सकता है। बीजेपी से उनकी औपचारिक जिम्मेदारी समाप्त होने के बावजूद पार्टी के प्रति उनका समर्थन कायम रहने की बात उन्होंने दोहराई है। इस्तीफे के बाद उनका फोकस अब आर्थिक स्थिरता, परिवार की जिम्मेदारियों और पेशेवर जीवन में वापसी पर रहेगा।

  • सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सियासी घमासान, केजरीवाल ने बीजेपी पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप

    सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सियासी घमासान, केजरीवाल ने बीजेपी पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ACB की कार्रवाई के बाद राजधानी की राजनीति गरमा गई है। जांच एजेंसी ने आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदित प्रकाश राय भी शामिल हैं। कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि जांच एजेंसी की कार्रवाई टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है।

    मामला दिल्ली जल बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं के विस्तार और सुधार से संबंधित बताया गया है। आरोप है कि इन परियोजनाओं के लिए जारी टेंडर की शर्तों में बदलाव किए गए और निर्धारित नियमों तथा प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इन कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर 11 मई 2024 को मामला दर्ज किया गया था।

    जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों तथा अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी क्रम में ACB ने छह लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की है। सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी ने मामले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है, क्योंकि वह दिल्ली सरकार में मंत्री रह चुके हैं और आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं।

    आम आदमी पार्टी ने गिरफ्तारी की टाइमिंग और मामले में सत्येंद्र जैन की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता अनुराग ढांडा ने कहा कि जिस टेंडर को मामले का आधार बनाया जा रहा है, वह अक्टूबर 2022 में हुआ था। उनका दावा है कि उस समय सत्येंद्र जैन पहले से ही एक अन्य मामले में जेल में थे। इसी आधार पर पार्टी ने जैन की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया है कि सत्येंद्र जैन के खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक दबाव का हिस्सा है। AAP नेताओं का कहना है कि विपक्ष से जुड़े नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाना चाहिए। पार्टी ने मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

    सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जैन को दोबारा गिरफ्तार कराया गया है। केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन से जुड़े पुराने मामले का उल्लेख करते हुए जेल में उनके साथ कथित व्यवहार पर भी सवाल उठाए।

    केजरीवाल ने दावा किया कि जैन के खिलाफ पिछला मामला भी गलत था और मौजूदा मामले में भी जांच आगे बढ़ने के बाद आरोप सही साबित नहीं होंगे। उनके बयान के बाद AAP और बीजेपी के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

    दूसरी ओर, ACB की कार्रवाई का आधार दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर में कथित अनियमितताओं की जांच है। जांच एजेंसी ने जिन आरोपों के आधार पर गिरफ्तारियां की हैं, उनकी पुष्टि आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगी। फिलहाल मामला जांच के स्तर पर है और गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका तथा टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी है।

    इस कार्रवाई ने दिल्ली में सरकारी टेंडर, भ्रष्टाचार के आरोप और जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को फिर सामने ला दिया है। अब मामले में आगे होने वाली जांच और अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि आरोपों से जुड़े तथ्यों और गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका के संबंध में क्या स्थिति सामने आती है।

  • FBI की मोस्ट वांटेड सूची में भारतीय मूल का मेजर सिंह, हथियार और ड्रग्स तस्करी से जुड़े गंभीर आरोपों ने बढ़ाई तलाश

    FBI की मोस्ट वांटेड सूची में भारतीय मूल का मेजर सिंह, हथियार और ड्रग्स तस्करी से जुड़े गंभीर आरोपों ने बढ़ाई तलाश


    नई दिल्ली ।
    भारतीय मूल के कथित गैंगस्टर मेजर सिंह को अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी FBI ने अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया है। एजेंसी के अनुसार मेजर सिंह पर हथियारों के अवैध कारोबार, ड्रग्स की आपूर्ति और तस्करी की साजिश तथा संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। अमेरिका में उसकी तलाश के लिए जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है और उसके बारे में जानकारी रखने वाले लोगों से संपर्क करने की अपील की गई है।

    FBI के मुताबिक मेजर सिंह का संबंध पंजाब से जुड़े जग्गू भगवानपुरिया क्राइम ग्रुप से बताया जाता है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियां केवल भारत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि इसके संपर्क और कथित आपराधिक संचालन अमेरिका के कुछ हिस्सों तक भी पहुंचे। इसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच के दौरान मेजर सिंह का नाम सामने आया है।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मेजर सिंह के खिलाफ कैलिफोर्निया की संघीय अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है। यह वारंट 25 जून 2026 को जारी किया गया था। उस पर Racketeer Influenced and Corrupt Organizations यानी RICO कानून के तहत साजिश से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा बिना लाइसेंस हथियारों के कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोप भी उसके खिलाफ दर्ज हैं।

    जांच एजेंसी ने मेजर सिंह पर ड्रग्स की आपूर्ति और तस्करी से जुड़ी साजिश में शामिल होने का भी आरोप लगाया है। अमेरिका में RICO कानून का इस्तेमाल संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े मामलों में किया जाता है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां किसी व्यक्ति की कथित भूमिका को व्यापक आपराधिक गतिविधियों और नेटवर्क के संदर्भ में देखती हैं। मेजर सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में होना अभी बाकी है और कानूनी प्रक्रिया के दौरान उसके पक्ष को भी सुना जाएगा।

    FBI के अनुसार जिस जग्गू भगवानपुरिया क्राइम ग्रुप से मेजर सिंह का कथित संबंध बताया जा रहा है, उसकी जड़ें पंजाब में हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क की आपराधिक गतिविधियों का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हुआ। हथियारों और मादक पदार्थों की कथित तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर अमेरिकी एजेंसियों की निगरानी ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब अंतरराष्ट्रीय अपराध संगठनों के बीच सीमा पार संपर्क जांच का बड़ा विषय बने हुए हैं।

    मेजर सिंह की तलाश में FBI का लॉस एंजिलिस कार्यालय भी सक्रिय है। एजेंसी ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास मेजर सिंह के ठिकाने, गतिविधियों या उससे संबंधित कोई विश्वसनीय जानकारी है तो वह जांच एजेंसी तक पहुंचाए। मोस्ट वांटेड सूची में नाम शामिल होने के बाद उसकी तलाश को लेकर अमेरिकी एजेंसियों की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।

    मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मेजर सिंह पर लगाए गए आरोप केवल व्यक्तिगत आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कथित संगठित अपराध, हथियार और ड्रग्स तस्करी तथा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब अमेरिकी जांच एजेंसियां उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी हैं। अदालत में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई साबित होती है।

  • गंगा का रौद्र रूप और बारिश का कहर यूपी में बिगड़े हालात सड़कें जलमग्न घाट डूबे कई गांवों पर बाढ़ का खतरा

    गंगा का रौद्र रूप और बारिश का कहर यूपी में बिगड़े हालात सड़कें जलमग्न घाट डूबे कई गांवों पर बाढ़ का खतरा


    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कई इलाकों में सड़कें तथा घर पानी में डूब गए हैं। बिजनौर में गंगा का पानी स्टेट हाईवे तक पहुंच गया है। सड़क पर करीब दो फीट तक पानी बहने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालात ऐसे बने कि लोगों को अपनी कार और बाइक ट्रैक्टर ट्रॉली की मदद से पानी पार करानी पड़ी। वहीं प्रयागराज में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।

    प्रयागराज के करेली इलाके में बारिश का पानी लोगों के घरों के भीतर तक पहुंच गया है। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया है। पानी बढ़ने के कारण घरों में रखा बेड सोफा और दूसरे जरूरी सामान भी प्रभावित हुए हैं। कुछ परिवारों को मजबूरी में घर की पहली मंजिल या छत पर शरण लेनी पड़ी है। लगातार बारिश के कारण इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। वहीं रामबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर भी बारिश का पानी जमा हो गया जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। घाटों के किनारे बने कई मंदिरों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थल भी जलमग्न हो गए हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए घाट के ऊपरी हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा है। नमो घाट की सीढ़ियां भी पानी में डूब गई हैं। गंगा का पानी लगातार बढ़ने के कारण प्रशासन ने लोगों को नदी के किनारे जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती भी अब घाट के ऊपरी हिस्से और छत पर कराई जा रही है।

    गोंडा में घाघरा नदी के उफान ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिले के पांच गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं और नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में मवेशियों के लिए पहुंचाए गए सूखे भूसे को लेकर भी अफरा तफरी का माहौल देखने को मिला। भूसा लेने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। बाद में पुलिस की मौजूदगी में भूसे का वितरण कराया गया ताकि सभी जरूरतमंद लोगों तक चारा पहुंच सके।

    लखनऊ में भी पिछले चार दिनों से बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार सुबह राजधानी के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। इसके अलावा बाराबंकी समेत कई जिलों में बूंदाबांदी दर्ज की गई। आगरा वाराणसी कानपुर समेत प्रदेश के 40 से अधिक शहरों में सुबह बादल छाए रहे हालांकि बाद में कुछ इलाकों में धूप निकल आई। इसके बावजूद मौसम विभाग ने प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है।

    मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रयागराज गोंडा कौशांबी गाजीपुर और भदोही में 12वीं कक्षा तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं जौनपुर सोनभद्र और मिर्जापुर में आठवीं कक्षा तक के स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासन लगातार जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है।

    लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक हवा में कम दबाव का क्षेत्र बनने मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आने के कारण मानसून सक्रिय हुआ है। उनके अनुसार 23 अगस्त तक मानसूनी गतिविधियों में तेजी बनी रह सकती है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव वाले सिस्टम के प्रभाव से बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है। 20 और 21 अगस्त को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।

    ऐसे में अगले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। नदियों का बढ़ता जलस्तर बारिश और जलभराव पहले ही कई जिलों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा चुका है। प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों की नजर अब आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी है क्योंकि लगातार बारिश से हालात और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है।

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापार विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां आने वाले कुछ घंटे दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के साथ समझौते के लिए बुधवार दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक की समयसीमा तय की है। निर्धारित समय तक सहमति नहीं बनने की स्थिति में कनाडा से अमेरिका पहुंचने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापारिक रिश्तों पर दबाव और बढ़ गया है।

    ट्रंप की ओर से रखी गई मांगें केवल टैरिफ व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अधिक अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदे। इसके अलावा कनाडा की अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली में भागीदारी और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों तक अमेरिकी पहुंच भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। रणनीतिक खनिजों को लेकर अमेरिका की चिंता का संबंध चीन पर निर्भरता कम करने की व्यापक नीति से है। ऐसे खनिज आधुनिक रक्षा उपकरणों, ऊर्जा तकनीक और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रंप के बीच पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। कार्नी ने बातचीत को गहन और नाजुक बताया है और संकेत दिया है कि इस स्तर की चर्चा के विवरण को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्ष अंतिम समय तक समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर इतना बड़ा है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा।

    ट्रंप का कनाडा के प्रति मौजूदा रुख पारंपरिक अमेरिकी नीति से काफी अलग दिखाई देता है। उन्होंने कनाडाई उत्पादों पर अलग-अलग स्तर के टैरिफ लगाए हैं और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी टिप्पणियां भी की हैं। इन बयानों और व्यापारिक कदमों से कनाडा में अमेरिका के प्रति असंतोष बढ़ा है। कनाडाई सरकार पर घरेलू स्तर पर यह दबाव भी है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने अपने आर्थिक हितों से समझौता न करे।

    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक मतभेद हालांकि नए नहीं हैं। सॉफ्टवुड लकड़ी, डेयरी बाजार और कई अन्य उत्पादों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहे हैं। मौजूदा टैरिफ संघर्ष ने इन पुराने मतभेदों को और गंभीर बना दिया है। हॉकी स्टिक और टंग डिप्रेशर जैसे उत्पादों पर भी अमेरिकी शुल्क लगाए जाने से विवाद का दायरा स्पष्ट होता है।

    दोनों देशों के बीच करीब 5,525 मील लंबी सीमा है और इस सीमा के जरिए रोजाना लगभग 3.3 लाख लोग तथा करीब 2 अरब डॉलर का सामान आवाजाही करता है। कनाडा के कुल माल निर्यात का लगभग 72 प्रतिशत अमेरिका को जाता है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला व्यापार युद्ध कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी महंगे आयात और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का असर पड़ सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप की तय समयसीमा समाप्त होने से पहले दोनों पक्ष कोई समझौता कर पाएंगे। अंतिम दौर की बातचीत जारी रहने से उम्मीद बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी मांगों और कनाडा की घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के बीच संतुलन बनाना कठिन है। यदि आखिरी समय में समझौता हो जाता है तो दोनों देशों को तत्काल आर्थिक दबाव से राहत मिल सकती है, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो नए और ऊंचे टैरिफ व्यापारिक संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकते हैं।

  • भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव जीतकर नवंबर मुकाबले का रास्ता साफ किया

    भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव जीतकर नवंबर मुकाबले का रास्ता साफ किया


    नई दिल्ली ।
    भारतीय मूल की पिया डांडिया ने अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राथमिक चुनाव जीत लिया है। पूर्व स्कूल प्रिंसिपल डांडिया ने वकील कायसिया अर्ली को हराकर नवंबर में होने वाले आम चुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ कर लिया है। प्राथमिक चुनाव में डांडिया को 68.6 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी अर्ली को 31.4 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।

    डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने प्राथमिक चुनाव में जीत के बाद पिया डांडिया को बधाई दी। पार्टी ने उनके लंबे समय से शिक्षा और समुदाय से जुड़े नेतृत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वह लोगों के लिए नए अवसर बढ़ाने और कामकाजी परिवारों के हितों के लिए काम करने के उद्देश्य से चुनाव मैदान में उतरी हैं।

    अब पिया डांडिया का मुकाबला नवंबर में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार पूर्व नौसैनिक कैसी असकर से होगा। यह चुनाव फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला होगा। इस सीट को चुनावी क्षेत्र के नए परिसीमन के बाद बनाया गया है और प्राथमिक चुनाव के समय यहां कोई मौजूदा सांसद चुनाव मैदान में नहीं था।

    पिया डांडिया इससे पहले फ्लोरिडा के 21वें जिले से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद ब्रायन मास्ट को चुनौती देने की कोशिश कर चुकी हैं। ब्रायन मास्ट विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं। बाद में डांडिया दक्षिण फ्लोरिडा के 22वें जिले में चली गईं और उन्होंने इसी क्षेत्र से डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी की।

    डांडिया की राजनीतिक पृष्ठभूमि से पहले उनका पेशेवर जीवन शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा रहा है। वह अमेरिका में हाई स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। शिक्षा क्षेत्र में काम करने के दौरान छात्रों और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर उनका अनुभव रहा है। इसी पृष्ठभूमि को वह अपने राजनीतिक अभियान में भी प्रमुखता से सामने रख रही हैं।

    पिया डांडिया के माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। भारतीय मूल की पृष्ठभूमि के कारण उनकी राजनीतिक यात्रा अमेरिकी समुदाय के साथ-साथ भारतीय मूल के लोगों के बीच भी रुचि का विषय बनी हुई है। प्राथमिक चुनाव में मिली स्पष्ट जीत ने नवंबर के आम चुनाव के लिए उनकी स्थिति मजबूत की है।

    जीत के बाद डांडिया ने अपने संदेश में अभियान पर भरोसा जताने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह अपने छात्रों, अपने बेटे और जिले में बड़े हो रहे उन बच्चों के लिए चुनाव में उतरी हैं, जो बेहतर भविष्य के हकदार हैं। उन्होंने अपने अभियान को आम परिवारों की आर्थिक चुनौतियों से जोड़ते हुए खर्च कम करने और भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कही।

    डांडिया ने कहा कि उनका उद्देश्य वॉशिंगटन को फिर से आम लोगों के लिए काम करने वाला बनाना है। उनके अभियान में परिवारों के लिए रोजमर्रा के खर्च, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास की लागत जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी इन्हीं मुद्दों को दक्षिण फ्लोरिडा के परिवारों से जोड़ते हुए डांडिया के समर्थन को आगे बढ़ाने की बात कही है।

    नवंबर में होने वाला चुनाव पिया डांडिया के राजनीतिक करियर के लिए अगली बड़ी परीक्षा होगा। प्राथमिक चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के बाद अब उन्हें रिपब्लिकन उम्मीदवार कैसी असकर का सामना करना है। चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि फ्लोरिडा का 22वां कांग्रेस क्षेत्र अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में किस दल का प्रतिनिधित्व करेगा। डांडिया की जीत के साथ भारतीय मूल के उम्मीदवार के रूप में उनकी राजनीतिक यात्रा ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है।

  • मूविंग सीट से लेकर रोलर कोस्टर राइड तक इंदौर जू का 14D थिएटर बना नया आकर्षण पहले दिन सभी शो फुल

    मूविंग सीट से लेकर रोलर कोस्टर राइड तक इंदौर जू का 14D थिएटर बना नया आकर्षण पहले दिन सभी शो फुल


    इंदौर इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में शुरू हुआ 14D थिएटर आम लोगों के लिए खुलते ही शहरवासियों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। मंगलवार को पहले दिन थिएटर के लगभग सभी शो हाउसफुल रहे और बड़ी संख्या में लोग परिवार तथा बच्चों के साथ यहां पहुंचे। सामान्य सिनेमा हॉल से बिल्कुल अलग अनुभव देने वाले इस थिएटर में दर्शकों को मूविंग सीट्स के साथ विजुअल इफेक्ट्स और अलग अलग राइडिंग इफेक्ट्स का अनुभव कराया जा रहा है। यही वजह रही कि पहले ही दिन थिएटर को देखने और इसमें फिल्म का रोमांच महसूस करने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह नजर आया।

    14D थिएटर में फिल्म देखने के दौरान दर्शकों को केवल स्क्रीन पर दृश्य देखने तक सीमित नहीं रहना पड़ता बल्कि स्क्रीन पर दिखाई जा रही गतिविधियों के साथ सीटों की मूवमेंट और अलग अलग इफेक्ट्स का अनुभव भी मिलता है। कभी सीट आगे पीछे होती है तो कभी अचानक ऊपर नीचे की हलचल महसूस होती है। कई दृश्यों में ऐसा अनुभव कराया जाता है जैसे दर्शक खुद उसी घटना का हिस्सा हों। बच्चों के लिए यह अनुभव खास तौर पर रोमांचक रहा। पहले दिन थिएटर पहुंचे परिवारों में महिलाओं और बच्चों की संख्या काफी ज्यादा नजर आई।

    शो खत्म होने के बाद बच्चों में थिएटर के अनुभव को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। कई बच्चों ने बताया कि उन्होंने इससे पहले ऐसा थिएटर नहीं देखा था। उनके लिए सबसे ज्यादा रोमांचक रोलर कोस्टर जैसी राइड रही। सीटों का अचानक हिलना डुलना और स्क्रीन पर चल रहे दृश्यों के साथ शरीर को मिलने वाला मूवमेंट बच्चों को खूब पसंद आया। कुछ बच्चों के लिए यह अनुभव किसी मनोरंजन पार्क की राइड जैसा रहा और उन्होंने इसे दोबारा देखने की इच्छा भी जताई।

    बच्चों के साथ थिएटर पहुंचे अभिभावकों ने भी इसे सामान्य फिल्म देखने से अलग अनुभव बताया। कई माता पिता का कहना था कि बच्चों के साथ समय बिताने और उन्हें कुछ नया अनुभव कराने के लिहाज से यह जगह काफी अच्छी है। दर्शकों ने सीटों की मूवमेंट विजुअल इफेक्ट्स और अलग अलग राइडिंग इफेक्ट्स को थिएटर की सबसे बड़ी खासियत बताया। कुछ लोगों ने इसे पैसा वसूल अनुभव करार दिया। उनका कहना था कि इंदौर आने वाले रिश्तेदारों और बाहर से आने वाले मेहमानों को भी अब इस थिएटर का अनुभव कराया जा सकता है।

    14D थिएटर को लेकर युवाओं में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। युवाओं ने बताया कि शहर में मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद हैं लेकिन इस तरह का अनुभव अलग है। खास तौर पर सीटों की मूवमेंट और स्क्रीन पर दिखाई देने वाले दृश्यों के साथ होने वाले इफेक्ट्स ने उन्हें प्रभावित किया। पहले दिन बड़ी संख्या में युवाओं के पहुंचने से यह भी साफ हुआ कि थिएटर सिर्फ बच्चों तक सीमित आकर्षण नहीं है बल्कि अलग तरह के मनोरंजन की तलाश करने वाले लोगों को भी आकर्षित कर रहा है।

    हालांकि वर्चुअल जंगल सफारी को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। कुछ लोगों को इसका अनुभव अच्छा लगा जबकि कुछ दर्शकों को यह उनकी उम्मीद के मुताबिक प्रभावी नहीं लगा। इसके बावजूद 14D थिएटर के मुख्य अनुभव को लेकर ज्यादातर दर्शकों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही।

    वहीं कुछ अभिभावकों ने छोटे बच्चों के टिकट की कीमत को लेकर भी सुझाव दिया। एक महिला दर्शक ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए टिकट की दर कम होनी चाहिए क्योंकि अचानक होने वाली सीटों की तेज मूवमेंट और इफेक्ट्स से कुछ छोटे बच्चे डर सकते हैं। ऐसी स्थिति में माता पिता को शो बीच में छोड़कर बच्चे को बाहर लाना पड़ सकता है। इसके लिए छोटे बच्चों के टिकट पर अलग दर तय करने की मांग भी सामने आई।

    पहले ही दिन मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद कमला नेहरू जू का 14D थिएटर इंदौर में मनोरंजन के नए आकर्षण के तौर पर उभरता दिखाई दे रहा है। परिवार बच्चों और युवाओं की मौजूदगी ने इसकी लोकप्रियता की शुरुआत को खास बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शुरुआती उत्साह के बाद भी दर्शकों की भीड़ इसी तरह बनी रहती है या नहीं।

  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर संयुक्त अरब अमीरात में भी देखने को मिला। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का पता एयर डिफेंस सिस्टम ने लगाया। इसके बाद दुबई में लोगों के मोबाइल फोन पर पहली बार मिसाइल खतरे को लेकर इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की।

    मिसाइल अलर्ट जारी होने के दौरान दुबई और आसपास के इलाकों में आसमान से तेज आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन आवाजों का संबंध एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई से था। सुरक्षा प्रणाली ने देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का मुकाबला करने और मिसाइलों को हवा में रोकने की कोशिश की।

    यूएई सरकार ने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी। कुछ समय बाद एक दूसरा अलर्ट जारी किया गया, जिसमें बताया गया कि मिसाइल का खतरा समाप्त हो गया है और स्थिति सामान्य हो गई है।

    यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि ईरान की ओर से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। मंत्रालय के अनुसार, इनमें से एक मिसाइल यूएई की समुद्री सीमा से बाहर जाकर गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल देश की सीमा के अंदर गिरी। अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा व्यवस्था लगातार सक्रिय है।

    मिसाइल अलर्ट के बाद यूएई में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई। मोबाइल फोन पर जारी आपात संदेश का उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे के प्रति तत्काल सावधान करना था। प्रशासन की ओर से नागरिकों को अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक निर्देशों पर भरोसा करने की अपील की गई।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने दोनों देशों के बीच तत्काल बातचीत की किसी योजना से भी इनकार किया।

    ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि समुद्री मार्ग जहाजों के लिए खुला है और पानी में बिछाई गई माइंस को हटा दिया गया है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की बात सामने आने के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रभाव पश्चिम एशिया से बाहर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ी है। तेल की कीमतों में लंबे समय तक मजबूती बनी रहने पर कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

    तनाव बढ़ने का असर शेयर बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने से कई बाजारों में दबाव देखने को मिला है। इसके साथ ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज की लागत बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।

    फिलहाल यूएई में मिसाइल खतरा समाप्त होने की घोषणा के बाद स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में दोनों देशों के सैन्य कदम, कूटनीतिक संपर्क और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

  • सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने फिर दिखाया दम ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से हराकर अंकतालिका में मजबूत की बादशाहत

    सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने फिर दिखाया दम ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से हराकर अंकतालिका में मजबूत की बादशाहत


    नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स का शानदार अभियान लगातार जारी है। मंगलवार को अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में किंग्स ने ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से शिकस्त देकर टूर्नामेंट में अपनी आठवीं जीत दर्ज की। इस जीत के साथ सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने अंकतालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। टीम ने अब तक खेले 9 मुकाबलों में 8 जीत हासिल की हैं और वह शीर्ष स्थान पर मजबूती से बनी हुई है। दूसरी ओर ईस्ट दिल्ली राइडर्स के लिए यह मुकाबला बेहद निराशाजनक रहा। सीजन में छठी हार के साथ उसकी खिताबी दौड़ खत्म हो गई है।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने पहले ही ओवर में अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं और महज 14 रन के स्कोर तक किंग्स ने अपना तीसरा विकेट भी खो दिया। शुरुआती झटकों के बाद केशव डबास और जोंटी सिद्धू ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 44 गेंदों में 54 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को संकट से बाहर निकालने का प्रयास किया।

    केशव डबास 18 रन बनाकर आउट हुए जबकि जोंटी सिद्धू ने 28 गेंदों में 41 रन की उपयोगी पारी खेली। दोनों के जाने के बाद एक बार फिर किंग्स की पारी लड़खड़ाती नजर आई। हालांकि आदित्य भंडारी ने जिम्मेदारी संभाली और मनी ग्रेवाल के साथ 38 रन की साझेदारी की। इसके बाद उन्होंने वंश बेदी के साथ भी 32 रन जोड़कर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। मनी ग्रेवाल ने 11 रन जबकि वंश बेदी ने 27 रन बनाए। सेंट्रल दिल्ली किंग्स की पूरी टीम 19.5 ओवर में 179 रन पर सिमट गई।

    ईस्ट दिल्ली राइडर्स की ओर से कप्तान सिमरजीत सिंह और रोहित यादव ने गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन तीन विकेट हासिल किए। आशीष मीणा रौनक वाघले और मयंक रावत को एक एक विकेट मिला। 180 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ईस्ट दिल्ली राइडर्स की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। पारी की पांचवीं गेंद पर वंश मेहरा केवल एक रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद सुजल सिंह और अर्पिण राणा ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 23 गेंदों में 30 रन जोड़े। सुजल 11 गेंदों में 12 रन बनाकर आउट हुए और अगली ही गेंद पर अरुण पुंडीर ने उदय चावला को बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया।

    सिर्फ 32 रन के स्कोर तक ईस्ट दिल्ली राइडर्स अपने तीन विकेट गंवा चुकी थी। यहां से अर्पिण राणा ने पारी को संभाला और मयंक रावत तथा सूर्यांश रैना के साथ उपयोगी साझेदारियां कीं। अर्पिण ने 26 गेंदों में तीन चौकों की मदद से 25 रन बनाए। इसके बाद अंकित कुमार ने मोर्चा संभालते हुए सूर्यांश रैना के साथ छठे विकेट के लिए 23 रन और रौनक वाघले के साथ सातवें विकेट के लिए 20 रन की साझेदारी की। सूर्यांश रैना ने 38 रन का योगदान दिया लेकिन उनकी कोशिशें टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सकीं।

    ईस्ट दिल्ली राइडर्स निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट खोकर 149 रन ही बना सकी और उसे 30 रन से हार का सामना करना पड़ा। सेंट्रल दिल्ली किंग्स की ओर से गवनीश खुराना ने तीन विकेट लेकर शानदार गेंदबाजी की जबकि अरुण पुंडीर ने दो विकेट हासिल किए। इस जीत के साथ किंग्स ने जहां अंकतालिका में अपनी पकड़ मजबूत की वहीं ईस्ट दिल्ली राइडर्स की खिताबी उम्मीदों पर भी विराम लग गया। वहीं न्यू दिल्ली टाइगर्स भी अंतिम चार की दौड़ से बाहर हो गई है। अब टूर्नामेंट के अगले मुकाबलों में प्लेऑफ की तस्वीर और साफ होती जाएगी।