Author: bharati

  • PoK में संकट गहराया, भोजन, दवा और ईंधन की भारी कमी, विरोध दबाने के आरोपों के बीच हालात तनावपूर्ण

    PoK में संकट गहराया, भोजन, दवा और ईंधन की भारी कमी, विरोध दबाने के आरोपों के बीच हालात तनावपूर्ण

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात गंभीर हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद पर आरोप है कि उसने विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में भोजन, राशन, दवाओं और ईंधन की आपूर्ति पर रोक जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे कई इलाकों में मानवीय संकट गहरा गया है।

    रिपोर्टों के मुताबिक मुजफ्फरनगर, पुंछ, रावलाकोट, बाग और नीलम घाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों, ट्रक ड्राइवरों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि आवश्यक सामान ले जाने वाले वाहनों को सीमा चौकियों पर रोका जा रहा है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे शटडाउन और विरोध प्रदर्शनों के कारण पहले से ही आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित थी, लेकिन अब इसे और गंभीर बताया जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की नाकेबंदी से इनकार किया है, जबकि BBC उर्दू और डॉन जैसी मीडिया रिपोर्टों में हालात को चिंताजनक बताया गया है।

    सीमा चौकियों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित

    स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में खाद्यान्न और दवाओं की कमी के बाद लोग खैबर पख्तूनख्वा, रावलपिंडी और इस्लामाबाद से सामान लाने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें सीमा चौकियों पर रोका जा रहा है। आजाद पट्टन और फगवारी क्षेत्रों में तैनात पुलिस द्वारा व्यावसायिक और निजी वाहनों की जांच की जा रही है, जिससे कई वाहन लंबे समय से रुके हुए हैं और खराब होने वाला सामान नष्ट हो रहा है।

    स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ीं

    स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्थिति बेहद कठिन हो गई है। एक निवासी नवीद ने बताया कि उन्हें रावलपिंडी से लाया गया भोजन और दवाएं ले जाने से रोका गया और कथित तौर पर सामान फेंकने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति देने की बात कही गई।

    नीलम घाटी के निवासी अलिफ दीन के अनुसार, शटडाउन और आपूर्ति बाधित होने के कारण पिछले कई दिनों से राशन उपलब्ध नहीं है। सरकारी डिपो पर भुगतान के बावजूद लोगों को आटा नहीं मिल पा रहा है और खुले बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

    दवा और ईंधन की गंभीर कमी

    मुजफ्फरनगर के 64 वर्षीय मोहम्मद मकीन ने बताया कि क्षेत्र में दवाओं की भारी कमी है और सभी बड़े मेडिकल स्टोर पिछले दो सप्ताह से बंद पड़े हैं। वहीं पुंछ और मुजफ्फरनगर में पेट्रोल पंप बंद होने से लोग ब्लैक मार्केट से महंगा ईंधन खरीदने को मजबूर हैं।

    आरोप और राजनीतिक बयानबाजी

    पाकिस्तानी अधिकारियों ने नाकेबंदी के आरोपों से इनकार किया है, जबकि मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार बिना सीधे बल प्रयोग के प्रदर्शन समाप्त करने के लिए आपूर्ति लाइन बाधित करने की रणनीति अपना रही है।

    पीओके में जारी विरोध का मुख्य कारण जम्मू-कश्मीर शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटें बताई जा रही हैं। स्थानीय समूहों का आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित की जाती है। इसी मुद्दे पर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में आंदोलन जारी है, जिसके दौरान इंटरनेट सेवाएं भी बाधित की गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, झड़पों में अब तक कम से कम 58 लोगों की मौत का दावा किया गया है।

    पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की पीओके इकाई ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे गंभीर दमन बताया है।

    बड़ा आंदोलन जारी

    रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट के ईदगाह मैदान में चल रहे धरने में पिछले दो हफ्तों में 70,000 से अधिक लोग शामिल हुए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो मुजफ्फरनगर तक 1,00,000 लोगों का बड़ा मार्च निकाला जा सकता है।

  • AI से बढ़ेगा जॉब संकट, 99% कंपनियों के प्रमुखों ने जताई छंटनी की आशंका, युवा कर्मचारियों पर खतरा

    AI से बढ़ेगा जॉब संकट, 99% कंपनियों के प्रमुखों ने जताई छंटनी की आशंका, युवा कर्मचारियों पर खतरा

    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल काम को आसान बनाने वाली तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह रोजगार बाजार की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। एक नई वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो वर्षों में AI के बढ़ते उपयोग के कारण नौकरी कटौती का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सबसे अधिक असर करियर की शुरुआत कर रहे युवा कर्मचारियों पर पड़ने की आशंका है।

    ग्लोबल HR और कंसल्टिंग फर्म मर्सर (Mercer) की ताजा *ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट* में सामने आया है कि 99 प्रतिशत से अधिक बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स का मानना है कि AI के कारण आने वाले दो वर्षों में किसी न किसी स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। इस रिपोर्ट के लिए दुनिया भर के करीब 12 हजार एग्जीक्यूटिव्स, HR लीडर्स और कर्मचारियों से राय ली गई।

    एंट्री-लेवल कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर
    रिपोर्ट के मुताबिक AI का सबसे बड़ा प्रभाव उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। जिन कार्यों के जरिए नए कर्मचारी अनुभव और कौशल हासिल करते थे, उनमें से कई जिम्मेदारियां अब AI आसानी से संभाल सकता है। यही वजह है कि कंपनियां जूनियर स्तर की भर्तियों को लेकर अपनी रणनीति बदल रही हैं।

    पिछले एक वर्ष में उन कंपनियों की संख्या 17 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई है, जिन्होंने जूनियर पदों में कटौती की है। विशेषज्ञों के अनुसार 22 से 27 वर्ष आयु वर्ग के युवा प्रोफेशनल्स इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

    AI अपनाने की दौड़, लेकिन तैयारी अधूरी
    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कंपनियां तेजी से AI को अपने कामकाज में शामिल कर रही हैं, लेकिन अधिकांश संस्थान इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। सर्वे के अनुसार केवल एक-तिहाई कंपनियों को ही विश्वास है कि वे मानव कर्मचारियों और AI के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर पाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि कई संगठन पहले AI लागू कर रहे हैं और बाद में कर्मचारियों की भूमिका तय कर रहे हैं।

    क्या छंटनी से कंपनियों को मिलेगा फायदा?

    विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या घटाने से हमेशा बेहतर परिणाम नहीं मिलते। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि बड़े पैमाने पर छंटनी करने वाली कंपनियों को जरूरी नहीं कि अधिक मुनाफा या बेहतर उत्पादकता हासिल हुई हो। कई मामलों में AI का सबसे प्रभावी उपयोग तब देखा गया, जब इसे कर्मचारियों की जगह लेने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

    AI के कारण बढ़ रही नौकरी कटौती

    रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में AI का असर रोजगार बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अकेले अप्रैल 2026 में अमेरिका में करीब 21,500 नौकरियों की कटौती के पीछे AI एक प्रमुख कारण रहा, जो उस महीने हुई कुल छंटनी का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा था।

    वहीं, वर्ष 2026 में अब तक AI से जुड़ी 49 हजार से अधिक नौकरियां समाप्त हो चुकी हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के कुल स्तर के लगभग बराबर पहुंच चुका है। Meta, Oracle, Salesforce और Block जैसी प्रमुख टेक कंपनियां भी AI आधारित ऑटोमेशन और री-स्ट्रक्चरिंग के तहत कर्मचारियों की संख्या में कमी कर चुकी हैं।

    भविष्य में किन स्किल्स की होगी मांग?
    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन पेशेवरों की मांग बढ़ेगी जो AI के साथ मिलकर काम करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए AI से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसे प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AI अब केवल तकनीकी बदलाव का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह भर्ती, रोजगार, करियर और कार्य संस्कृति को प्रभावित करने वाली एक बड़ी शक्ति बन चुका है। अगले दो वर्ष यह तय करेंगे कि AI कर्मचारियों के लिए चुनौती बनता है या नए अवसरों का रास्ता खोलता है।

  • निर्जला एकादशी से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, श्रीहरि विष्णु की कृपा से बनेंगे सफलता और धन लाभ के योग

    निर्जला एकादशी से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, श्रीहरि विष्णु की कृपा से बनेंगे सफलता और धन लाभ के योग

    नई दिल्ली। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत आज श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इसे सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में से एक माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत को लेकर मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक उपवास और पूजा-अर्चना करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी के प्रभाव से कुछ राशियों के जीवन में शुभ परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। इन राशियों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा रहने के कारण करियर, धन और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं।

    वृषभ राशि

    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय लाभदायक साबित हो सकता है। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने की संभावना है और मेहनत का उचित फल मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में संतुलन और स्थिरता बनी रह सकती है।

    कर्क राशि
    निर्जला एकादशी के बाद कर्क राशि के लोगों को कई मामलों में राहत मिल सकती है। मानसिक तनाव कम होने के साथ पारिवारिक माहौल भी सुखद रह सकता है। कार्यक्षेत्र में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना है। नियमित रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से शुभ फलों में वृद्धि हो सकती है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह अवधि उपलब्धियों से भरी रह सकती है। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होने के योग हैं। आत्मविश्वास और परिश्रम के बल पर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की जा सकती है।

    तुला राशि
    तुला राशि वालों के लिए आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। नौकरी और व्यवसाय से जुड़े नए अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से चली आ रही परेशानियां धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी और भगवान विष्णु की भक्ति इनके लिए विशेष लाभकारी साबित हो सकती है।

    धार्मिक मान्यता
    ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए व्रत, दान और पूजा से शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    भोपाल। मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के 15 जिलों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे आखिर में पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की आशंका है। इसके अलावा नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

    विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, सतना, सीधी, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून

    आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून के आगमन की घोषणा की जा चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों के भीतर मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा।

    इस बार सामान्य से कम बारिश के संकेत

    मौसम केंद्र (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश में औसत 37.3 इंच बारिश के मुकाबले 30 से 32 इंच तक वर्षा दर्ज होने का अनुमान लगाया गया है।

    मानसून की देरी से बारिश में 50 प्रतिशत की कमी

    मानसून के विलंब से पहुंचने के कारण 24 जून तक प्रदेश में सूखे जैसे हालात बने रहे। एक जून से अब तक जहां औसतन 84.8 मिमी (3.6 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 42 मिमी (1.6 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत प्रदेश के 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

  • ममता बनर्जी के नेतृत्व को खुली चुनौती, सांसदों-विधायकों के समर्थन के दावे के बीच TMC पर नियंत्रण की जंग पहुंची निर्णायक मोड़ पर

    ममता बनर्जी के नेतृत्व को खुली चुनौती, सांसदों-विधायकों के समर्थन के दावे के बीच TMC पर नियंत्रण की जंग पहुंची निर्णायक मोड़ पर

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सियासत में लंबे समय से प्रभावशाली रही तृणमूल कांग्रेस इस समय गंभीर संगठनात्मक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां संगठन, राजनीतिक वैधता और चुनाव चिन्ह पर अधिकार की लड़ाई चुनाव आयोग के समक्ष पहुंच चुकी है। इस टकराव ने राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

    पार्टी के भीतर उभरे इस विवाद के चलते तृणमूल कांग्रेस दो स्पष्ट खेमों में बंटती दिखाई दे रही है। एक ओर पार्टी की संस्थापक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गुट है, जबकि दूसरी ओर बागी नेताओं का समूह संगठन पर पूर्ण नियंत्रण का दावा कर रहा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि दोनों पक्षों ने अलग-अलग राष्ट्रीय कार्यसमितियां गठित कर स्वयं को पार्टी का वैध नेतृत्व साबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने हाल ही में अपनी नई संगठनात्मक संरचना के दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपे हैं। इसमें ममता बनर्जी को पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के साथ अन्य प्रमुख पदाधिकारियों की नियुक्ति का भी उल्लेख किया गया है। इस कदम का उद्देश्य संगठनात्मक निरंतरता और वैधता को स्थापित करना माना जा रहा है।

    इसके समानांतर बागी गुट ने भी अपनी अलग बैठक आयोजित कर नई कार्यसमिति का गठन किया और चुनाव आयोग के समक्ष अपना दावा पेश किया। इस गुट ने वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करते हुए यह संकेत दिया है कि वह केवल विरोध तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरी पार्टी की कमान अपने हाथ में लेने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    राजनीतिक समीकरण उस समय और अधिक बदल गए जब लोकसभा में पार्टी के कई सांसदों के समर्थन को लेकर बड़े दावे सामने आए। बागी खेमे का कहना है कि उसे संसद में पर्याप्त समर्थन प्राप्त है, जिससे उसके दावे को मजबूती मिलती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बड़ी संख्या में विधायकों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। यदि यह समर्थन औपचारिक रूप से साबित हो जाता है तो संगठनात्मक और विधायी दोनों स्तरों पर बागी गुट की स्थिति मजबूत हो सकती है।

    इस पूरे विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका चुनाव आयोग की मानी जा रही है। किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल में विभाजन की स्थिति में आयोग ‘इलेक्शन सिंबल्स ऑर्डर, 1968’ के तहत मामले की सुनवाई करता है। आयोग आमतौर पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के समर्थन, संगठनात्मक ढांचे में बहुमत और जमीनी स्तर पर पार्टी संरचना के समर्थन जैसे पहलुओं का परीक्षण करता है। इन्हीं आधारों पर यह तय किया जाता है कि मूल पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह किस गुट को मिलेगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला महाराष्ट्र में हुए शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विभाजन से काफी हद तक मिलता-जुलता दिखाई देता है। वहां भी संगठन और विधायी समर्थन के आधार पर चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण निर्णय दिए थे। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस का यह विवाद भी भविष्य में एक अहम राजनीतिक और कानूनी मिसाल बन सकता है।

    फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति की नजरें चुनाव आयोग की आगामी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। आयोग का फैसला न केवल पार्टी के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की पहचान, नेतृत्व और राजनीतिक दिशा किसके हाथों में रहेगी। इससे राज्य की सत्ता और विपक्ष की रणनीतियों पर भी दूरगामी असर पड़ने की संभावना है।

  • इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील

    इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील


    नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बीते तनाव और संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़े समझौतों की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने और आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। उनके इस बयान को क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत मुस्लिम गठबंधन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक घटनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

    संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास तभी संभव है जब क्षेत्रीय देश आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना से आगे बढ़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम देशों को अपने साझा हितों और जबड़े के प्रति एकजुट होकर काम करना चाहिए।

    पेजेशकियन ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि मुस्लिम अपने समुदायों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होंगे।” उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि ईरान भविष्य में उस सैन्य-सहयोगी मंच के करीब आ सकता है जिसे मीडिया में अक्सर ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जाता है।

    हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि ‘इस्लामिक नाटो’ कोई औपचारिक नाटो जैसी संस्था नहीं है, बल्कि इस्लामिक मिलिट्री काउंटर टेररिज्म कोएलिशन नामक एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधन है, जिसे हासिल सऊदी अरब करता है और जिसमें पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देश शामिल हैं। ईरान वर्तमान में इस गठबंधन का सदस्य नहीं है।

    विश्लेषणों का मानना ​​है कि यदि ईरान और पाकिस्तान के बीच राजनयिक सहयोग बढ़ता है और क्षेत्रीय स्वायत्त अनुकूल रहते हैं, तो मुस्लिम देशों के बीच सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग का नया ढांचा विकसित हो सकता है। हालांकि ईरान के किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ वार्ता के बाद पाकिस्तान पहुंचे पेजेशकियां के इस दौरे को क्षेत्रीय आतंकवाद और मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

  • भारतीय आमों की मिठास से मजबूत होंगे वैश्विक रिश्ते, नितिन नवीन ने 82 देशों के राजनयिकों को भेजे खास उपहार

    भारतीय आमों की मिठास से मजबूत होंगे वैश्विक रिश्ते, नितिन नवीन ने 82 देशों के राजनयिकों को भेजे खास उपहार


    नई दिल्ली। भारतीय आमों की एसोसिएशन अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी नई गर्माहट पैदा हो रही है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने नई दिल्ली में 82 देशों के विशेषज्ञों को भारतीय आमों के विशेष प्रीमियम उपहार बॉक्स वितरित किए हैं। इसका पहला उद्देश्य भारत की समृद्ध कृषि विरासत, सांस्कृतिक पहचान और मेहमाननवाजी की परंपरा को वैश्विक मंच पर और मजबूत बनाना है।

    विशेष रूप से तैयार किए गए इन बॉक्स में देश के चार प्रसिद्ध आम बादाम-केसर आम, दशहरी आम, बंगनपल्ली आम और लंगड़ा आम-शामिल की टोकरी। ये सभी सॉसेज अपने विशिष्ट स्वाद, सुगंध और क्षेत्रीय पहचान के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं।

    आम के साथ भेजे गए अपने व्यक्तिगत संदेश में नितिन नवीन ने भारतीय संस्कृति में आम के महत्व का उल्लेख करते हुए इसमें मित्रता, भाईचारा, मित्रतावादी और समृद्ध कृषि परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह छोटा-सा भारत और विभिन्न देशों के बीच सहयोग और मजबूत बनाने में योगदान देगा।

    सांस्कृतिक अन्वेषण का अनोखा उदाहरण

    विशेषज्ञ इस पहल को ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’ यानी सांस्कृतिक पोर्टफोलियो का प्रभावशाली उदाहरण मान रहे हैं। भारत लंबे समय से योग, आयुर्वेद, संविधान और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से दुनिया से जुड़ा हुआ है। अब हम भी वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय भारतीय फल के माध्यम से सहयोग और सहयोग का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

    भारतीय आमों की खास पहचान

    गिर केसर (गुजरात)
    गिर केसर आम अपने शानदार केसरिया गूदे, स्वादिष्ट स्वाद और अनोखे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। साल इसे 2011 में जीआई टैग मिला था।

    मलिहाबादी दशहरी (उत्तर प्रदेश)

    मलिहाबादी दशहरी आम की सब्जी, बिना रेशम वाले गुड़े और शहद जैसी मिठास के लिए जाना जाता है। इसे 2009 में जीआई टैग प्राप्त हुआ था।

    बंगानगर (आंध्र प्रदेश)

    बंगनापल्ली आम के आकार में बड़ा, गाजर के रंग का और बिना रेशों वाला आम है। इसे 2017 में जीआई टैग मिला।

    बनारसी लंगड़ा (वाराणसी)

    बनारसी लंगड़ा आम का रस बाहर भी हरा रहता है, जबकि अंदर का गूदा रसदार और स्वाद में मीठा-खट्टा होता है। इसे 2023 में जीआई टैग से सम्मानित किया गया। भारत दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादकों में शामिल है और इसके कई साझेदार अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष पहचान रखते हैं। सबसे पहले भारतीय आमों की वैश्विक ब्रांडिंग के साथ-साथ भारत की कृषि शक्ति और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान की उम्मीद है।
  • ईरान के राष्ट्रपति का PM मोदी को न्योता, खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने का आमंत्रण

    ईरान के राष्ट्रपति का PM मोदी को न्योता, खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने का आमंत्रण


    नई दिल्ली ।ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के पूर्व सर्वोच्च नेता और धार्मिक प्रमुख Ali Khamenei के अंतिम संस्कार और राजकीय विदाई समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। खामेनेई की 28 फरवरी को हुए सैन्य हमले में मौत के बाद अब उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

    ईरान सरकार की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार अंतिम संस्कार और दफन समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान Tehran, Qom, Mashhad, Najaf और Karbala में कई धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम होंगे, जिनमें लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

    जानकारी के अनुसार 6 जुलाई को तेहरान में भव्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद 7 जुलाई को क़ोम में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होगा। अंतिम चरण में 9 जुलाई को मशहद स्थित Imam Reza Shrine में खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    भारत सरकार की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi स्वयं शामिल होंगे या भारत की ओर से कोई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा।

    तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व करने वाले खामेनेई को देश की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक व्यवस्था का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। उनके निधन के बाद यह अंतिम विदाई समारोह ईरान के हालिया इतिहास के सबसे बड़े राजकीय आयोजनों में से एक माना जा रहा है।

  • हर बार फीकी या कड़वी बनती है चाय? अपनाएं ये साइंटिफिक तरीका और पाएं होटल जैसी कड़क चाय

    हर बार फीकी या कड़वी बनती है चाय? अपनाएं ये साइंटिफिक तरीका और पाएं होटल जैसी कड़क चाय

    नई दिल्ली ।भारत में चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है। सुबह की शुरुआत से लेकर शाम की थकान मिटाने तक एक कप गर्म चाय लोगों को ताजगी और सुकून देती है। खासतौर पर कड़क चाय के शौकीनों की संख्या काफी ज्यादा है। हालांकि बहुत से लोग यह मानते हैं कि चाय को जितनी देर तक उबाला जाएगा वह उतनी ही कड़क बनेगी। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।

    दरअसल परफेक्ट कड़क चाय का राज उसे देर तक उबालने में नहीं बल्कि सही समय पर सही सामग्री डालने में छिपा होता है। यदि चाय बनाने की प्रक्रिया को सही तरीके से अपनाया जाए तो केवल तीन से चार मिनट में बेहतरीन स्वाद वाली चाय तैयार की जा सकती है।

    क्यों खराब हो जाता है स्वाद?

    कई लोग कड़क चाय बनाने के लिए चायपत्ती को लंबे समय तक उबालते रहते हैं। ऐसा करने से चायपत्ती में मौजूद टैनिन्स अधिक मात्रा में निकलने लगते हैं और धीरे-धीरे जलने लगते हैं। इसका असर चाय के स्वाद पर पड़ता है और चाय कड़वी लगने लगती है। नतीजतन चाय का प्राकृतिक स्वाद और खुशबू दोनों प्रभावित हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चाय को जरूरत से ज्यादा पकाने की बजाय उसे सही समय तक उबालना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    ऐसे बनाएं परफेक्ट कड़क चाय

    सबसे पहले एक बर्तन में आवश्यकतानुसार पानी डालकर गर्म करें। जब पानी में उबाल आने लगे तो उसमें चायपत्ती डालें। इसके बाद चायपत्ती को लगभग तीन मिनट तक पानी में अच्छी तरह उबलने दें। इस दौरान अदरक को कूटकर तैयार कर लें। तीन मिनट पूरे होने के बाद अदरक को चाय में डालें और करीब एक मिनट तक पकने दें।
    इससे अदरक में मौजूद प्राकृतिक तेल और सुगंध पूरी तरह बाहर आ जाते हैं और चाय का स्वाद बेहतर बनता है। इसके बाद दूध मिलाएं और चाहें तो स्वादानुसार चीनी भी डाल सकते हैं। कुछ लोग चाय में बेहद कम मात्रा में नमक डालने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि चुटकी भर से भी कम नमक चाय के स्वाद को नमकीन नहीं बनाता बल्कि अन्य फ्लेवर को उभारने में मदद कर सकता है।

    चाय बनाने के पीछे है स्वाद का विज्ञान

    खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार चाय का स्वाद पूरी तरह संतुलन पर आधारित होता है। यदि चायपत्ती ज्यादा देर तक उबाली जाए तो उसका कड़वापन बढ़ सकता है। वहीं अदरक को शुरुआत में डालने से उसके आवश्यक तेल पूरी तरह रिलीज नहीं हो पाते।

    इसी वजह से चायपत्ती को पहले उबालना और कुछ मिनट बाद अदरक मिलाना अधिक प्रभावी माना जाता है। वहीं अंत में दूध डालने से चाय का रंग स्वाद और सुगंध संतुलित बनी रहती है। यदि आप भी हर बार रेस्टोरेंट या ढाबे जैसी कड़क और स्वादिष्ट चाय बनाना चाहते हैं तो अगली बार चाय को घंटों उबालने की बजाय इस आसान तकनीक को जरूर अपनाएं।

  • ‘गदर’ के पहले ही दिन घबरा गई थीं अमीषा पटेल, अमरीश पुरी के साथ पहला सीन बना यादगार; दिग्गज अभिनेता की सादगी ने जीता दिल

    ‘गदर’ के पहले ही दिन घबरा गई थीं अमीषा पटेल, अमरीश पुरी के साथ पहला सीन बना यादगार; दिग्गज अभिनेता की सादगी ने जीता दिल


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘गदर’ को 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अभिनेत्री अमीषा पटेल ने फिल्म से जुड़ी कई यादगार बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दौर में जब उन्हें दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के साथ काम करने का अवसर मिला, तब वह बेहद घबराई हुई थीं। हालांकि शूटिंग के दौरान अमरीश पुरी के व्यवहार और सहयोगी स्वभाव ने उनकी सारी झिझक दूर कर दी थी।

    अमीषा पटेल ने कहा कि दर्शकों के बीच अमरीश पुरी की पहचान एक सशक्त और प्रभावशाली अभिनेता के रूप में थी। फिल्मों में उनके निभाए गए नकारात्मक किरदारों ने उन्हें एक अलग पहचान दी थी, लेकिन वास्तविक जीवन में उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग था। वह बेहद सरल, सहज और मजाकिया स्वभाव के इंसान थे। उनके साथ काम करने का अनुभव आज भी उनकी सबसे खास यादों में शामिल है।

    अभिनेत्री ने बताया कि ‘गदर’ उनके करियर की शुरुआती फिल्मों में से एक थी। उस समय वह इंडस्ट्री में नई थीं और बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव भी सीमित था। ऐसे में फिल्म के पहले दिन ही उनका महत्वपूर्ण दृश्य अमरीश पुरी के साथ रखा गया था। यह एक भावनात्मक दृश्य था, जिसे फिल्म की कहानी में अहम स्थान प्राप्त था। इतने बड़े कलाकार के साथ पहला ही सीन होने के कारण वह अंदर से काफी घबराई हुई थीं।

    उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने आने से पहले उनके मन में कई तरह के सवाल और आशंकाएं थीं। उन्हें डर था कि कहीं वह दृश्य ठीक तरह से न कर पाएं या किसी तरह की गलती न हो जाए। लेकिन जैसे ही शूटिंग शुरू हुई, अमरीश पुरी ने अपने व्यवहार से माहौल को सहज बना दिया। उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह एक नई कलाकार हैं और उनके सामने इंडस्ट्री के सबसे अनुभवी अभिनेताओं में से एक मौजूद हैं।

    अमीषा ने बताया कि अमरीश पुरी सेट पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा के साथ मौजूद रहते थे। वह कलाकारों और तकनीकी टीम के साथ घुलमिलकर रहते थे तथा माहौल को हल्का बनाए रखते थे। उनकी यही विशेषता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी। एक बड़े अभिनेता होने के बावजूद उनके व्यवहार में किसी प्रकार का अहंकार नहीं था। यही कारण था कि उनके साथ काम करना किसी सीखने की प्रक्रिया से कम नहीं था।

    अभिनेत्री ने यह भी याद किया कि उस समय उनकी पहली फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई थी और दर्शक उन्हें पहचानते भी नहीं थे। बावजूद इसके अमरीश पुरी ने उन्हें पूरा सम्मान दिया और हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया। उनके सहयोग से वह अपने किरदार को बेहतर ढंग से निभाने में सफल रहीं। अमीषा के अनुसार, किसी नए कलाकार के लिए ऐसा समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    ‘गदर’ भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में सनी देओल, अमीषा पटेल और अमरीश पुरी की भूमिकाओं को दर्शकों ने खूब सराहा था। विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी और इसके संवाद व किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।

    फिल्म की सफलता के वर्षों बाद भी कलाकारों द्वारा साझा की गई ऐसी यादें दर्शकों को उस दौर से जोड़ती हैं। अमीषा पटेल के ताजा बयान ने एक बार फिर यह दिखाया है कि बड़े कलाकारों की असली पहचान केवल उनके अभिनय से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और सहयोगी स्वभाव से भी बनती है। अमरीश पुरी की यही विशेषताएं उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करती हैं।