Author: bharati

  • मध्य प्रदेश में दशहरे का भव्य उत्सव, 18 मैदानों में जलेगा रावण, 1 लाख वर्गफीट में रंगोली और ड्रोन से होगी पुष्पवर्षा

    मध्य प्रदेश में दशहरे का भव्य उत्सव, 18 मैदानों में जलेगा रावण, 1 लाख वर्गफीट में रंगोली और ड्रोन से होगी पुष्पवर्षा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दशहरे का पर्व आज पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में रावण दहन के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। इंदौर में 121 फीट भोपाल में 105 फीट और उज्जैन में 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। कई शहरों में विशाल पुतलों के साथ आकर्षक आतिशबाजी शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना को देखते हुए आयोजकों ने पुतलों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

    भोपाल में दशहरे के अवसर पर 18 प्रमुख मैदानों में रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित होंगे। कोलार हिंदू उत्सव समिति की ओर से 105 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा। इस पुतले को जयपुर के कलाकारों ने तैयार किया है। रावण मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाने में करीब 20 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा जंबूरी मैदान में 101 फीट और कलियासोत ग्राउंड में 90 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। टीटी नगर दशहरा मैदान में 55 फीट और बिट्टन मार्केट में 53 फीट ऊंचा पुतला जलाया जाएगा। कोलार और छोला में आयोजित कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होने की भी संभावना है।

    छोला दशहरा मैदान में रावण दहन से पहले मारवाड़ी रोड स्थित बांके बिहारी मंदिर से पारंपरिक चल समारोह निकाला जाएगा। इसमें करीब 10 झांकियां बैंड शहनाई पुलिस बैंड दुल-दुल घोड़ी और आदिवासी टोली आकर्षण का केंद्र रहेंगी। चल समारोह विभिन्न रास्तों से होते हुए घोड़ा नक्कास के मार्ग से मैदान पहुंचेगा। यहां रात करीब 9 बजे रावण दहन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। दूसरी ओर राजेंद्र नगर में श्रीराम जानकी हिंदू उत्सव समिति की ओर से 70 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। यहां रामलीला सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले का आयोजन भी होगा। समिति ने रावण दहन के वीडियो पर सबसे ज्यादा व्यूज और लाइक्स लाने वाले इन्फ्लुएंसर को 11 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

    इंदौर में उषागंज छावनी में 121 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। आयोजन के लिए 250 फीट लंबी लंका भी तैयार की गई है। शोभायात्रा के मैदान पहुंचने के बाद रावण दहन होगा और करीब डेढ़ घंटे तक आतिशबाजी की जाएगी। उज्जैन में दशहरा मैदान पर 101 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा। इसके लिए देवास और ग्वालियर से कलाकार बुलाए गए हैं जो करीब 45 मिनट तक आतिशबाजी करेंगे। शहर के कार्तिक मैदान उन्हेल चौराहे और हीरा मिल मैदान में भी रावण दहन के आयोजन होंगे।

    दशहरे पर उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी भी विशेष आकर्षण रहेगी। चांदी की पालकी में सवार होकर बाबा महाकाल दशहरा मैदान पहुंचेंगे जहां शमी वृक्ष का पूजन किया जाएगा। सवारी मार्ग पर करीब एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में रंगोली बनाने की तैयारी है। आयोजन के दौरान ड्रोन के माध्यम से पालकी पर पांच क्विंटल फूल बरसाने की योजना है। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और प्रशासन की ओर से भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

    प्रदेश के दूसरे शहरों में भी बड़े स्तर पर रावण दहन की तैयारी है। ग्वालियर के फूलबाग मैदान में 65 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। यहां राम जुलूस और रामलीला के समापन का कार्यक्रम भी रखा गया है। जबलपुर के ग्वारीघाट में 75 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा जहां शिवकाशी से आए कलाकार आतिशबाजी करेंगे। मंदसौर में 80 फीट ऊंचे पुतले की खासियत यह होगी कि उसकी आंखें झपकेंगी गर्दन घूमेगी और तलवार वाला हाथ भी चलेगा। रायसेन में 35 फीट छिंदवाड़ा और सागर में 51 फीट तथा गुना में 31 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा।

    इसके अलावा देवास आगर-मालवा बैतूल दमोह सेंधवा शाजापुर श्योपुर और आलीराजपुर सहित कई जिलों में भी रावण दहन के कार्यक्रम होंगे। सेंधवा में पहली बार रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी जलाए जाएंगे। शाजापुर में 71 फीट ऊंचे रावण के साथ 25-25 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार किए गए हैं। दशहरे पर पुलिस लाइन मंदिरों सामाजिक संगठनों और अखाड़ों में शस्त्र पूजन भी किया जाएगा। करणी सेना सहित कई संस्थाएं शौर्य प्रदर्शन और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित करेंगी।

    इसी बीच कांग्रेस ने भी दशहरे पर अलग कार्यक्रम की घोषणा की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसार मध्य प्रदेश के सभी जिलों में रावण के स्थान पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया जाएगा। इस तरह प्रदेश में दशहरा धार्मिक आयोजनों के साथ राजनीतिक गतिविधियों के कारण भी चर्चा में रहेगा। बारिश की आशंका के बीच अब आयोजकों की नजर मौसम पर है ताकि रावण दहन और अन्य कार्यक्रम निर्धारित समय पर संपन्न हो सकें।

  • 2 से 20 फीट तक के रावण, कहीं कुंभकरण तो कहीं मेघनाथ, भोपाल में दशहरे के लिए सजा खास बाजार, महंगे हुए पुतले

    2 से 20 फीट तक के रावण, कहीं कुंभकरण तो कहीं मेघनाथ, भोपाल में दशहरे के लिए सजा खास बाजार, महंगे हुए पुतले


    भोपाल । दशहरे के पर्व को लेकर भोपाल में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर में इन दिनों एक अनोखा बाजार लोगों का ध्यान खींच रहा है। यहां कपड़े या घरेलू सामान नहीं बल्कि रावण कुंभकरण और मेघनाथ के रंग-बिरंगे पुतले बिक रहे हैं। लिंक रोड नंबर-2 के आसपास कई जगहों पर सजे इस बाजार में लोग परिवार के साथ पुतले खरीदने पहुंच रहे हैं। बाजार में 2 फीट से लेकर 20 फीट तक ऊंचे पुतले उपलब्ध हैं। वहीं विशेष ऑर्डर पर 40 फीट या उससे अधिक ऊंचाई के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं। इनकी कीमत आकार और बनावट के अनुसार 800 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक बताई जा रही है।

    भोपाल में दशहरे के अवसर पर बड़े स्तर पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शहर में 18 से अधिक स्थानों पर प्रमुख आयोजन होंगे। इसके अलावा गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में भी बड़ी संख्या में रावण दहन किया जाएगा। अनुमान है कि शहर में 7 हजार से ज्यादा जगहों पर पुतले जलाए जाएंगे। इसी मांग को देखते हुए तुलसीनगर लिंक रोड नंबर-2 सेकंड स्टॉफ बांसखेड़ी ईंटखेड़ी और पंचशील नगर सहित कई इलाकों में कारीगर पिछले डेढ़ से दो महीने से पुतले बनाने में जुटे हुए हैं। इस काम में 300 से अधिक कारीगर लगे हैं।

    कारीगरों ने अब तैयार पुतलों को सड़क किनारे बिक्री के लिए सजा दिया है। सोमवार को बाजार में खरीदारों की अच्छी भीड़ दिखाई दी। कई लोगों ने पहले ही अपनी जरूरत के हिसाब से पुतलों की बुकिंग करा दी थी। मंगलवार शाम तक खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है। बड़े पुतलों को बनाने में खास मेहनत और समय लगता है। कारीगरों के मुताबिक एक बड़े पुतले को तैयार करने में करीब एक सप्ताह तक लग सकता है। इसके लिए बांस का ढांचा तैयार किया जाता है और फिर उस पर कपड़ा कागज तथा अन्य सजावटी सामग्री लगाई जाती है।

    इस बार पुतलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाले बांस सूत और कागज के दाम बढ़ने से लागत पर असर पड़ा है। कारीगर राखी पटेल के मुताबिक पहले जो बांस 150 रुपये में मिलता था उसकी कीमत बढ़कर 200 रुपये हो गई है। इसी तरह सूत के दाम 120 रुपये से बढ़कर 180 रुपये तक पहुंच गए हैं। कागज की कीमत भी 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये बताई गई है। सामग्री महंगी होने के कारण ग्राहकों को भी पहले की तुलना में अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

    करोंद से खरीदारी करने पहुंचे अजय सोनी ने बताया कि इस बार पुतलों की कीमतों में करीब 500 से 1000 रुपये तक का अंतर देखने को मिल रहा है। उन्होंने वॉटरप्रूफ पुतला खरीदने की कोशिश की लेकिन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कागज वाला पुतला लेना पड़ा। बारिश की आशंका के चलते इस बार कुछ कारीगरों ने पानी से बचाव के लिए विशेष पुतले भी तैयार किए हैं। हालांकि हर आकार और हर कीमत में ऐसे पुतले उपलब्ध हों यह जरूरी नहीं है।

    रावण के पुतलों के साथ मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले भी खरीदारों को मिल रहे हैं। इनमें आकर्षक वेशभूषा और हथियारों के जरिए इन्हें खास रूप दिया जाता है। सामान्य तौर पर पुतले बिना पटाखों के बनाए जाते हैं। यदि खरीदार पटाखे लगवाना चाहते हैं तो लागत और कीमत बढ़ जाती है। बड़े पुतलों में बांस कपड़ा धागा और कागज अधिक मात्रा में इस्तेमाल होता है। इन्हें बनाने में तीन से चार कारीगरों की मेहनत भी लगती है।

    इस बार कारीगरों के सामने सबसे बड़ी चिंता मौसम को लेकर है। मंगलवार को बारिश की संभावना जताई गई है। इससे पुतलों के भीगने और बिक्री प्रभावित होने का डर बना हुआ है। वर्ष 2022 में दशहरे के दौरान तेज बारिश के कारण कई जगह पुतले भीग गए थे और आयोजनों में परेशानी आई थी। बांसखेड़ी क्षेत्र में कुछ कारीगरों को पुतले बस स्टॉप में रखकर बचाने पड़े थे जिससे नुकसान भी हुआ था। अब तीन साल बाद फिर बारिश की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में कारीगरों को उम्मीद है कि मौसम साथ देगा और दशहरे से पहले अधिक से अधिक पुतलों की बिक्री हो सकेगी।

  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा, अनिल पंडित से कराई थी शूटर की बात, पैसे और विदेश में नौकरी का वादा

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा, अनिल पंडित से कराई थी शूटर की बात, पैसे और विदेश में नौकरी का वादा


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस मामले में हरियाणा पुलिस की मदद से समीर नाम के एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि समीर ने मुख्य आरोपी रेहान उर्फ सुक्का की विदेश में बैठे गैंगस्टर अनिल पंडित से बातचीत कराई थी। पुलिस के मुताबिक रेहान को इस वारदात में शामिल होने के लिए 35 हजार रुपये और विदेश में बसने का लालच दिया गया था। जांच एजेंसियां अब इस मामले में कथित आपराधिक नेटवर्क और दूसरे संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

    पुलिस के अनुसार टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर 18 अक्टूबर को गोलीबारी हुई थी। घटना के बाद मामले की जांच शुरू की गई और कुछ ही समय में तीन आरोपियों रेहान फूल सिंह और रितिक कुमार को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार कर लिया गया। अब समीर की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात की योजना किस तरह बनाई गई और इसमें शामिल लोगों को निर्देश कौन दे रहा था।

    जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक समीर ने रेहान की बातचीत अनिल पंडित से कराई थी। आरोप है कि रेहान को पैसे देने के साथ विदेश में बसने का अवसर देने का वादा किया गया था। रितिक कुमार को भी विदेश में अच्छी नौकरी दिलाकर सेटल करने का लालच दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों के खर्च के लिए विदेश से ऑनलाइन पैसे भेजे जाते थे। इसके बाद वे किसी दुकान के माध्यम से रकम मंगवाकर नकदी हासिल कर लेते थे। जांच एजेंसियां इन लेनदेन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक अनिल पंडित आरोपियों से बातचीत करने के लिए जग्गी नाम के ऐप का इस्तेमाल करता था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि आरोपियों को हथियार किसी व्यक्ति ने सीधे नहीं सौंपे थे। उन्हें संदेश के जरिए एक स्थान की जानकारी दी गई थी जहां कचरा पात्र के पास हथियार रखे होने की बात कही गई थी। पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है कि हथियार कहां से आए और उन्हें वहां किसने रखा था। अधिकारियों को संदेह है कि मुंबई में आरोपियों के कुछ अन्य संपर्क भी हो सकते हैं।

    जांच में रेहान का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार उसके खिलाफ पहले आर्म्स एक्ट और चोरी से जुड़ा मामला दर्ज हो चुका है। रेहान और फूल सिंह पर अमृतसर के एक व्यापारी पर पहले भी फायरिंग की कोशिश करने का आरोप है। बताया गया है कि उस घटना में पिस्टल नहीं चली थी। पुलिस इन घटनाओं के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर सकती है।

    टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग के बाद तीनों आरोपी मुंबई के अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। वहां के सीसीटीवी कैमरों में उनकी मौजूदगी दर्ज होने की बात सामने आई है। उनका कथित इरादा पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस से भागने और आगे नेपाल जाने का था। हालांकि पुलिस ने उन्हें कोटा में पकड़ लिया। तीनों आरोपियों को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद महाराष्ट्र पुलिस उन्हें आगे की पूछताछ के लिए मुंबई ले गई। कोटा पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से हथियार या नकदी बरामद होने की पुष्टि नहीं हुई थी।

    इस बीच रैपिडो कंपनी ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि खबरों में सामने आया संबंधित व्यक्ति 14 अक्टूबर से उसके प्लेटफॉर्म पर ड्राइवर के तौर पर सक्रिय नहीं था। घटना वाले दिन उसने रैपिडो की सेवा का इस्तेमाल ग्राहक के रूप में किया था। कंपनी ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के संपर्क में है और मामले की जांच में पूरा सहयोग कर रही है। अब पुलिस की जांच का मुख्य फोकस फायरिंग की साजिश के पीछे मौजूद लोगों की पहचान करना और कथित आर्थिक लेनदेन तथा हथियारों की व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं का पता लगाना है।

  • निराला एस्पायर सोसाइटी में दबंगई की हदें पार, गरबा में महिलाओं से बदसलूकी का आरोप; बैरियर तोड़कर फरार हुए थार सवार

    निराला एस्पायर सोसाइटी में दबंगई की हदें पार, गरबा में महिलाओं से बदसलूकी का आरोप; बैरियर तोड़कर फरार हुए थार सवार


    नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की निराला एस्पायर सोसाइटी में गरबा कार्यक्रम के दौरान हंगामे का मामला सामने आया है। आरोप है कि बाहर से आए कुछ लोगों ने कार्यक्रम में शामिल महिलाओं के साथ बदसलूकी की और विरोध करने पर सोसाइटी के निवासियों के साथ गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं आरोपियों पर शराब के नशे में तेज रफ्तार से थार गाड़ी दौड़ाकर लोगों को कुचलने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया है। घटना के बाद सोसाइटी में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शिकायत के आधार पर बिसरख थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तीन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया है।

    पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक यह घटना 18 अक्टूबर की रात करीब 11 बजकर 5 मिनट की है। उस समय निराला एस्पायर सोसाइटी में गरबा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था जिसमें सोसाइटी के परिवार और महिलाएं हिस्सा ले रहे थे। इसी दौरान चार गाड़ियों में करीब दस लोग वहां पहुंचे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन लोगों ने अन्य गाड़ियों को भी परिसर में बुला लिया और नो पार्किंग क्षेत्र में जबरन वाहन खड़े कर दिए। इसके बाद कुछ लोग गरबा कार्यक्रम में पहुंचे और वहां मौजूद महिलाओं के साथ बदसलूकी करने लगे।

    सोसाइटी के सिक्योरिटी ऑफिसर विश्वास कुमार सिंह के मुताबिक जब लोगों ने इस व्यवहार का विरोध किया और गाड़ियां हटाने के लिए अनाउंसमेंट कराया गया तो आरोपी भड़क गए। आरोप है कि उन्होंने गाली-गलौज शुरू कर दी और सोसाइटी के निवासियों को जान से मारने की धमकी देने लगे। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ लोग शराब के नशे में थे। घटना के दौरान मौजूद लोगों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की लेकिन विवाद बढ़ता चला गया। इसके बाद आरोपियों को सोसाइटी से बाहर जाने के लिए कहा गया।

    शिकायत के अनुसार गाड़ियों में बैठकर निकलते समय थार सवार लोगों ने तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाया। जब सुरक्षा गार्ड और कुछ निवासियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो आरोप है कि उन्होंने गाड़ी की रफ्तार और बढ़ा दी। इससे वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। बताया गया है कि थार सवार पहले सोसाइटी के मुख्य गेट की तरफ पहुंचे लेकिन वहां रोके जाने की कोशिश के बाद वे गेट नंबर दो की ओर भागे। गेट बंद मिलने पर थार से उतरे एक व्यक्ति ने उसे खोलने का प्रयास किया। गार्ड के रोकने पर आरोपियों ने कथित तौर पर बूम बैरियर तोड़ दिया और गाड़ी समेत मौके से फरार हो गए।

    घटना के दौरान सोसाइटी की ओर से पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल कर मदद मांगी गई थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं। शिकायत में अन्य गाड़ियों और उनमें मौजूद लोगों का भी उल्लेख किया गया है। सोसाइटी के निवासियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो और परिसर में रहने वाले परिवार सुरक्षित महसूस कर सकें।

    वहीं बिसरख थाना पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों के तहत धारा 151 की कार्रवाई भी की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। फिलहाल इस घटना ने सोसाइटी में महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान बाहरी लोगों की आवाजाही पर निगरानी जैसे सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • Netflix की नई रिलीज से सजेगा फेस्टिव वीक, 20 से 23 अक्टूबर तक मिलेगा भरपूर मनोरंजन; जानें किस दिन क्या होगा रिलीज

    Netflix की नई रिलीज से सजेगा फेस्टिव वीक, 20 से 23 अक्टूबर तक मिलेगा भरपूर मनोरंजन; जानें किस दिन क्या होगा रिलीज


    नई दिल्ली। ओटीटी पर फिल्में और वेब सीरीज देखने के शौकीनों के लिए यह सप्ताह खास रहने वाला है। नेटफ्लिक्स पर 20 से 23 अक्टूबर 2026 के बीच सात फिल्मों और सीरीज की रिलीज की जानकारी सामने आई है। इस सूची में श्रीदेवी की चर्चित फिल्म इंग्लिश विंग्लिश से लेकर मनोज बाजपेयी की गजब रात तक शामिल हैं। वहीं हॉरर थ्रिलर क्राइम और रोमांस पसंद करने वाले दर्शकों के लिए भी अलग-अलग तरह का कंटेंट उपलब्ध होगा। त्योहारों के इस मौसम में दर्शक घर बैठे अपनी पसंद की फिल्में और सीरीज देख सकेंगे। आइए जानते हैं इस सप्ताह नेटफ्लिक्स पर क्या खास आने वाला है और किस दिन आप इन्हें देख पाएंगे।

    1. इंग्लिश विंग्लिश

    श्रीदेवी की शानदार अदाकारी वाली फिल्म इंग्लिश विंग्लिश 20 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर आने वाली है। साल 2012 में रिलीज हुई इस फिल्म की कहानी शशि नाम की एक घरेलू महिला के इर्दगिर्द घूमती है। शशि अपने परिवार के बीच सम्मान और अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है। अंग्रेजी भाषा में कमजोर होने के कारण उसे कई बार असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद वह अंग्रेजी सीखने का फैसला करती है और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है। फिल्म रिश्तों आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का खूबसूरत संदेश देती है।

    2. गली बॉय

    रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की फिल्म गली बॉय भी 20 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है। साल 2019 में आई यह फिल्म मुंबई की गलियों से निकलकर रैप की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना देखने वाले एक युवा की कहानी है। फिल्म में संघर्ष गरीबी पारिवारिक दबाव और अपने सपनों को पूरा करने की जिद को दिखाया गया है। संगीत और दमदार अभिनय के कारण यह फिल्म युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रही है।

    3. द लास्ट हाउस ऑन द लेफ्ट

    हॉरर और रिवेंज ड्रामा पसंद करने वालों के लिए द लास्ट हाउस ऑन द लेफ्ट 21 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है। फिल्म की कहानी एक परिवार और उसके साथ घटने वाली भयावह घटनाओं के इर्दगिर्द घूमती है। इसमें बदले और हिंसा की कहानी दिखाई गई है। यह फिल्म उन दर्शकों को पसंद आ सकती है जिन्हें तनाव और रोमांच से भरपूर कहानियां देखना अच्छा लगता है।

    4. नोबडी वांट्स दिस सीजन 3

    रोमांस और रिश्तों पर आधारित सीरीज नोबडी वांट्स दिस का तीसरा सीजन 22 अक्टूबर को आने वाला है। कहानी जोआन और नोआ के रिश्ते को आगे बढ़ाती है। दोनों के साथ रहने और अपने संबंध को मजबूत बनाने की कोशिशों के बीच कई चुनौतियां सामने आती हैं। सीरीज में प्यार के साथ व्यक्तिगत विचारों और रिश्तों की जटिलताओं को भी दिखाया गया है।

    5. सर्वाइविंग हरिकेन ओटिस

    23 अक्टूबर को आने वाली यह स्पेनिश फिल्म वास्तविक घटना पर आधारित है। इसकी कहानी मैक्सिको में आए विनाशकारी हरिकेन ओटिस और उससे प्रभावित लोगों के अनुभवों पर केंद्रित है। प्राकृतिक आपदा के दौरान लोगों के संघर्ष और मुश्किल हालात से उबरने की कोशिशों को इसमें दिखाया गया है। फिल्म डब भाषाओं में भी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

    6. डोरोथी

    तमिल क्राइम थ्रिलर डोरोथी भी 23 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर दस्तक देने वाली है। फिल्म में कीर्ति सुरेश और ऋषिकांत जैसे कलाकार नजर आएंगे। इसकी कहानी बचपन के दो दोस्तों के इर्दगिर्द घूमती है। अपराध और रहस्य से जुड़े घटनाक्रम कहानी को आगे बढ़ाते हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रशंसकों के लिए यह इस सप्ताह का खास विकल्प हो सकती है।

    7. गजब रात

    मनोज बाजपेयी की फिल्म गजब रात 23 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है। इसकी कहानी एक ऐसे पुलिस अधिकारी के इर्दगिर्द बताई गई है जो रिश्वतखोरी के जरिए कमाई करता है। फिल्म में एक रात के दौरान होने वाली घटनाओं और उनके कारण बदलती परिस्थितियों को दिखाया गया है। मनोज बाजपेयी अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं और ऐसे में उनकी इस फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता रह सकती है।

    कुल मिलाकर नेटफ्लिक्स पर इस सप्ताह अलग-अलग पसंद के दर्शकों के लिए मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद होंगे। जहां इंग्लिश विंग्लिश और गली बॉय जैसी फिल्में भावनाओं और संघर्ष की कहानी दिखाएंगी वहीं द लास्ट हाउस ऑन द लेफ्ट और डोरोथी रोमांच पसंद करने वालों को आकर्षित कर सकती हैं। हालांकि रिलीज की तारीखें और उपलब्ध भाषाएं देखने से पहले नेटफ्लिक्स पर संबंधित शीर्षक की जानकारी जरूर जांच लें।

  • रामायण के लिए काउंटडाउन शुरू, दशहरे पर खुलेगी एडवांस बुकिंग; रणबीर-यश की फिल्म 5 नवंबर को मचाएगी धमाल

    रामायण के लिए काउंटडाउन शुरू, दशहरे पर खुलेगी एडवांस बुकिंग; रणबीर-यश की फिल्म 5 नवंबर को मचाएगी धमाल


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल रणबीर कपूर और यश स्टारर रामायण को लेकर दर्शकों का इंतजार अब खत्म होने की ओर है। नितेश तिवारी के निर्देशन में तैयार हो रही इस भव्य फिल्म की एडवांस बुकिंग 20 अक्टूबर 2026 यानी दशहरे के अवसर पर शुरू होने की जानकारी सामने आई है। फिल्म 5 नवंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। भगवान राम की गाथा पर आधारित इस फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। इसकी स्टारकास्ट से लेकर भव्य निर्माण और संगीत तक हर पहलू लगातार चर्चा में बना हुआ है। फिल्म को बड़े पर्दे पर शानदार सिनेमाई अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

    फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभा रही हैं और सनी देओल को भगवान हनुमान के रूप में दिखाया जाएगा। इन बड़े सितारों की मौजूदगी ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। खास बात यह है कि भारतीय पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक और भव्य दृश्यों के माध्यम से प्रस्तुत करने की तैयारी की गई है। दर्शक अब यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि रामायण की इस प्राचीन महागाथा को फिल्म के रूप में किस तरह पेश किया जाएगा।

    एडवांस बुकिंग शुरू होने के साथ ही दर्शकों को फिल्म के लिए अपनी पसंद की सीटें चुनने का अवसर मिलेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 20 अक्टूबर से देशभर के प्रमुख टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर टिकटों की बिक्री शुरू करने की योजना है। फिल्म को आईमैक्स सहित कई प्रीमियम फॉर्मेट में भी रिलीज किया जाएगा। ऐसे में बड़े पर्दे पर भव्य दृश्य और आधुनिक तकनीक का अनुभव लेने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म खास आकर्षण बन सकती है। हालांकि टिकटों की कीमतों और अलग-अलग सिनेमाघरों में शो की उपलब्धता की जानकारी संबंधित बुकिंग प्लेटफॉर्म पर देखनी होगी।

    रामायण के संगीत को भी खास महत्व दिया गया है। फिल्म के संगीत से मशहूर संगीतकार हंस जिमर और ए आर रहमान जुड़े हैं। दोनों की भागीदारी ने फिल्म के संगीत को लेकर भी उत्सुकता बढ़ाई है। भारतीय पौराणिक कथा के साथ भव्य संगीत और आधुनिक सिनेमाई तकनीक का मेल फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश का हिस्सा है। फिल्म हिंदी के अलावा तमिल तेलुगु कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज होने वाली है। इससे देश के अलग-अलग क्षेत्रों के दर्शकों तक कहानी पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

    निर्देशक नितेश तिवारी की इस परियोजना पर लंबे समय से काम किए जाने की चर्चा है। रामायण भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपरा से गहराई से जुड़ी कथा है। ऐसे में फिल्म के निर्माण में कहानी और प्रमुख पात्रों की प्रस्तुति को लेकर विशेष सावधानी बरतने की बात कही जा रही है। निर्माताओं की कोशिश है कि दर्शकों को परिचित कथा के साथ एक भव्य सिनेमाई अनुभव भी मिले। फिल्म के पहले भाग के बाद इसका दूसरा भाग दिवाली 2027 के दौरान रिलीज किए जाने की जानकारी दी गई है।

    फिल्म के बजट को लेकर भी काफी चर्चा है। विभिन्न रिपोर्टों में पूरी परियोजना का बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है। हालांकि इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है। यदि फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है तो यह भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। फिलहाल दर्शकों की निगाहें 20 अक्टूबर से शुरू होने वाली एडवांस बुकिंग और 5 नवंबर को होने वाली विश्वव्यापी रिलीज पर टिकी हैं।

  • टीम इंडिया की चयन समिति में बड़ा फेरबदल, अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को जिम्मेदारी; रमेश पोवार की भी वापसी

    टीम इंडिया की चयन समिति में बड़ा फेरबदल, अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को जिम्मेदारी; रमेश पोवार की भी वापसी


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने पुरुष क्रिकेट टीम की चयन समिति में बड़ा बदलाव करते हुए पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को नया चीफ सेलेक्टर नियुक्त किया है। वह अजीत अगरकर की जगह यह अहम जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही पूर्व भारतीय क्रिकेटर और अनुभवी कोच रमेश पोवार को भी चयन समिति में शामिल किया गया है। नई नियुक्तियों के बाद भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की पांच सदस्यीय चयन समिति का पुनर्गठन पूरा हो गया है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि नई समिति भविष्य की सीरीज और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए टीम इंडिया का चयन किस रणनीति के तहत करती है।

    प्रज्ञान ओझा को चयन समिति का अध्यक्ष बनाने के पीछे उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में टेस्ट मैचों की वरिष्ठता को आधार बताया गया है। बाएं हाथ के पूर्व स्पिन गेंदबाज ओझा ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है और अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई। अब उन्हें खिलाड़ियों के चयन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। चयन समिति का काम केवल टीम में खिलाड़ियों के नाम तय करना नहीं होता बल्कि टीम की जरूरतों घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन खिलाड़ियों की फिटनेस और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर सही संयोजन तैयार करना भी होता है। ऐसे में ओझा के सामने प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को मौका देने और अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखने के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती होगी।

    वहीं रमेश पोवार को चयन समिति में शामिल करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पोवार भारतीय टीम के लिए दो टेस्ट और 31 वनडे मुकाबले खेल चुके हैं। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने कोचिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। वह भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं। इसके अलावा मुंबई और गुजरात की टीमों के साथ भी कोच के रूप में काम कर चुके हैं। बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी संभालने का अनुभव भी उनके पास है। महिला टीम के साथ उनके कार्यकाल में भारत ने एशिया कप का खिताब जीता और कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक हासिल किया। उनके अनुभव से चयन समिति को खिलाड़ियों की तकनीक और प्रदर्शन का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

    रमेश पोवार के नाम की सिफारिश बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति ने की। इस समिति में अशोक मल्होत्रा और जतिन परांजपे शामिल थे। दोनों ने बीसीसीआई मुख्यालय में आवेदकों की स्क्रीनिंग और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पोवार के नाम पर सर्वसम्मति से सहमति जताई। इसके बाद उन्हें चयन समिति में शामिल करने की सिफारिश की गई।

    बीसीसीआई ने पूर्व चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के योगदान की भी जमकर सराहना की है। अगरकर ने जुलाई 2023 में चयन समिति के अध्यक्ष का पद संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने तीन आईसीसी ट्रॉफियां और दो एशिया कप खिताब जीते। इसके अलावा भारत ने लगातार दो एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किए। इन उपलब्धियों के चलते उनके कार्यकाल को भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नई चयन समिति में प्रज्ञान ओझा अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे जबकि शिव सुंदर दास आरपी सिंह अजय रात्रा और रमेश पोवार अन्य सदस्य होंगे। अब इस नई टीम के सामने भारतीय क्रिकेट की मजबूती बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम तैयार करने की जिम्मेदारी होगी।

  • सऊदी में बांग्लादेशी जोड़े की फांसी से मचा अंतरराष्ट्रीय विवाद, ढाका ने मांगा जवाब; सोशल मीडिया पर वायरल दावों की खुली सच्चाई

    सऊदी में बांग्लादेशी जोड़े की फांसी से मचा अंतरराष्ट्रीय विवाद, ढाका ने मांगा जवाब; सोशल मीडिया पर वायरल दावों की खुली सच्चाई


    नई दिल्ली। सऊदी अरब में बांग्लादेश के दो नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने के मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। मक्का क्षेत्र की एक मस्जिद में गंभीर अनैतिक कृत्य करने के आरोप में दोनों को मृत्युदंड दिया गया। इस कार्रवाई के बाद बांग्लादेश ने सऊदी अरब के सामने विरोध दर्ज कराया है और अपने नागरिकों को सजा दिए जाने के मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उस दावे की है जिसमें कहा गया कि एक नवविवाहित जोड़े को मस्जिद में केवल माथा चूमने के कारण मौत की सजा दे दी गई। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि मामला इससे कहीं अधिक गंभीर था।

    सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार बांग्लादेशी नागरिक नजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर और सीती अख्तर को 14 अक्टूबर को मौत की सजा दी गई। सऊदी गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया कि दोनों मस्जिद के भीतर बेहद अनुचित और अश्लील गतिविधियों में शामिल पाए गए थे। अदालत ने इस कृत्य को मस्जिद की पवित्रता और मर्यादा के खिलाफ गंभीर अपराध माना। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में गंभीर आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत मौजूद थे और कानूनी प्रक्रिया के बाद सजा दी गई। हालांकि इस मामले से जुड़े सभी न्यायिक दस्तावेज और विस्तृत साक्ष्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण स्वतंत्र रूप से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करना मुश्किल है।

    इस घटना के सामने आने के बाद बांग्लादेश सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने सऊदी राजदूत से आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण मांगा। ढाका ने इस बात पर आपत्ति जताई कि उसके नागरिकों को सजा दिए जाने से पहले बांग्लादेश को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि सजा की जानकारी और उससे संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बारे में बांग्लादेश को पहले से अवगत क्यों नहीं कराया गया।

    इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो और उससे जुड़ी कहानी ने विवाद को और बढ़ा दिया। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि उमराह के लिए सऊदी अरब पहुंचे एक नवविवाहित जोड़े को एक पाकिस्तानी नागरिक ने मस्जिद में स्नेह जताते हुए रिकॉर्ड किया था और इसी वजह से दोनों को मौत की सजा दे दी गई। लेकिन सऊदी प्रेस एजेंसी ने इस कहानी को भ्रामक और असत्य बताया है। आधिकारिक बयान के मुताबिक दोनों नागरिक सऊदी अरब में रह रहे थे और यह मामला हनीमून पर आए उमराह यात्रियों से संबंधित नहीं था। इसलिए माथा चूमने के कारण मृत्युदंड दिए जाने की बात को प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

    इस मामले ने मानवाधिकार और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों को भी चर्चा में ला दिया है। मानवाधिकार संगठनों की ओर से सऊदी अरब में मृत्युदंड के इस्तेमाल की आलोचना होती रही है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि दूसरे अंतरराष्ट्रीय विवादों पर जोरदार प्रदर्शन करने वाले समूह इस मामले में उतनी मुखर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहे। हालांकि किसी देश में विरोध प्रदर्शन होना या न होना अपने आप में आरोपों की सच्चाई या न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता का प्रमाण नहीं है।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि दोनों नागरिकों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और सुनाई गई सजा से जुड़ी पूरी जानकारी कितनी पारदर्शिता के साथ सामने आती है। बांग्लादेश की आपत्ति और सऊदी अधिकारियों के बयान के बीच यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया मानवाधिकार और राजनयिक संबंधों के नजरिए से देखा जा रहा है।

  • MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे

    MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे


    खंडवा।
    ओंकारेश्वर (Omkareshwar) में सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) की तैयारियों के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट्स से प्रभावित हो रहे स्थानीय लोग अब लामबंद हो गए हैं. जिला प्रशासन से अपनी मांगों पर सहमति नहीं बनने के विरोध में नगरवासियों ने दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का फैसला किया है।

    19 अक्टूबर से बंद के पहले दिन ओंकारेश्वर में लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहीं. यहां तक कि फुटपाथ पर फूल-माला, प्रसाद आदि बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने भी अपना कारोबार बंद (Business Closed) रखा. इधर, प्रशासन ने कहा है कि स्थानीय लोगों से बातचीत चल रही है और उनकी लगभग सभी मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं. इस विस्तारीकरण योजना के तहत सड़कों और रास्तों के किनारे दुकानें, मकान एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने वालों को विस्थापित किया जा रहा है. इसके लिए पूरी कार्ययोजना बनाई गई है.


    प्रशासन के सामने 19 मांगे रखी

    स्थानीय लोगों की समिति ने पिछले महीने जिला प्रशासन के सामने अपनी 19 मांगें रखी थीं. उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, इसलिए दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का निर्णय लिया गया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जिनकी दुकानें, मकान एवं रोजगार से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, उन्हें इसके बदले बेहतर पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए।

    ओंकारेश्वर बंद को स्थानीय लोगों के साथ साधु-संतों का भी समर्थन मिला. उनका कहना है कि पिछले साल भी जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अब वे पक्का और भरोसेमंद आश्वासन चाहते हैं.


    छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद

    ओंकारेश्वर बंद के दौरान छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद रहीं. यहां तक कि होटल और स्थानीय परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं. इस कारण बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी हुई. श्रद्धालुओं का भी कहना है कि स्थानीय लोगों के रोजगार और आजीविका का ध्यान रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

    इधर, जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय लोगों से लगातार बातचीत जारी है. उनकी ओर से रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया है और 19 में से 17 मांगें मानी जा चुकी हैं. पुनर्वास के लिए स्थान तय करने को लेकर थोड़ी दिक्कत आ रही है, जिसे भी जल्द सुलझा लिया जाएगा. जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्थानीय लोगों का बेहतर पुनर्वास किया जाए, ताकि उनकी आजीविका पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

  • आज दशहरे पर देश में इन 7 जगह नहीं होगा रावण दहन…. कहीं दामाद तो कहीं पूर्वज के रूप में पूजे जाएंगे दशानन…

    आज दशहरे पर देश में इन 7 जगह नहीं होगा रावण दहन…. कहीं दामाद तो कहीं पूर्वज के रूप में पूजे जाएंगे दशानन…


    नई दिल्ली।
    आज देशभर में विजयादशमी (Vijayadashami) यानी दशहरा (Dussehra) मनाया जा रहा है. इस दिन देश के विभिन्न हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. लेकिन भारत में कुछ जगह ऐसी भी हैं, जहां रावण दहन (Burning Ravana) नहीं किया जाता, बल्कि दशानन की पूजा (Worship) होती है. इसके पीछे स्थानीय इतिहास, धार्मिक आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताएं हैं. आइए जानते हैं कि रावण की पूजा देश में कहां-कहां होती है।


    1. बिसरख गांव (उत्तर प्रदेश)

    उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित बिसरख गांव का नाम रावण से जोड़ा जाता है. स्थानीय परंपरा के अनुसार, यह रावण के पिता ऋषि विश्रवा से संबंधित स्थान है. इसी वजह से गांव के लोग रावण को विशेष सम्मान देते हैं. यहां दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाने के बजाए उसकी पूजा-अर्चना की जाती है. गांव में रावण का एक मंदिर भी है, जहां श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार पूजा करते हैं।


    2. मंदसौर (मध्य प्रदेश)

    मध्य प्रदेश का मंदसौर भी उन खास जगहों में से एक है, जहां रावण की पूजा होती है.मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी इसी क्षेत्र की रहने वाली थीं. इसी वजह से मंदसौर को रावण का ससुराल कहा जाता है. स्थानीय परंपरा में दामाद को सम्मान देने की वजह से रावण की पूजा होती है. यही कारण है कि यहां के कुछ इलाकों में विजयादशमी पर रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा करते हैं।


    3. रावनग्राम (मध्य प्रदेश)

    मध्य प्रदेश के विदिशा से करीब 50 किलोमीटर दूर रावनग्राम में भी रावण के पुतले का दहन नहीं होता है. यहां भी रावण को पूजने की परंपरा है. स्थानीय लोगों की आस्था में रावण का विशेष स्थान है. इस गांव में उसकी विशाल प्रतिमा स्थापित होने की बात भी कही जाती है. रावनग्राम की परंपरा बताती है कि अलग-अलग क्षेत्रों में रामायण के पात्रों को लेकर धार्मिक मान्यताएं एक जैसी नहीं हैं।


    4. कानपुर (उत्तर प्रदेश)

    उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित दशानन मंदिर रावण की पूजा के लिए प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि इस मंदिर का इतिहास करीब 135 साल पुराना है. यहां मंदिर के कपाट सालभर खुले नहीं रहते, बल्कि दशहरे के दिन श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं. शेष दिनों में रावण की प्रतिमा ढकी रहती है. विजयादशमी पर भक्त मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और तेल के दीपक जलाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु रावण से बुद्धि, ज्ञान और शक्ति की कामना करते हैं।


    5. जोधपुर (राजस्थान)

    राजस्थान के जोधपुर में भी कुछ समुदाय रावण को अपने पूर्वज के रूप में देखते हैं. इनकी मान्यताओं में रावण का संबंध वंश परंपरा से जुड़ा हुआ है. इसी कारण दशहरे के अवसर पर ये लोग रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा करते हैं. यहां रावण को लेकर प्रचलित आस्था मुख्यधारा में दिखाई देने वाली रावण दहन की परंपरा से अलग है. यह स्थानीय समुदायों की धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है।


    6. काकिनाडा (आंध्र प्रदेश)

    आंध्र प्रदेश के काकिनाडा में रावण को समर्पित एक मंदिर है. यहां उसे एक पराक्रमी शासक और भगवान शिव के परम भक्त के रूप में देखा जाता है. मंदिर में रावण के साथ भगवान शिव की पूजा किए जाने की परंपरा भी बताई गई है. स्थानीय मान्यताओं में रावण की शिवभक्ति और उसके सामर्थ्य को महत्व दिया जाता है. इस वजह से यहां रावण को देखने का नजरिया उन स्थानों से अलग है, जहां विजयादशमी पर उसके पुतले का दहन किया जाता है।


    7. कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)

    हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में भी रावण को लेकर अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. यहां कुछ स्थानों पर रावण को भगवान शिव का बड़ा उपासक मानकर सम्मान दिया जाता है. मान्यता है कि रावण ने कठोर तपस्या से शिवजी को प्रसन्न किया था और उनकी कृपा प्राप्त की थी. कुछ स्थानीय परंपराओं में यह भी माना जाता है कि रावण को मोक्ष मिला था. इसी आस्था के चलते यहां कुछ लोग दशहरे पर रावण का दहन करने के बजाय उसकी पूजा-अर्चना करते हैं।