Author: bharati

  • दूध उबालते समय करें बस ये एक काम, मलाई देखकर रह जाएंगे हैरान

    दूध उबालते समय करें बस ये एक काम, मलाई देखकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली । घरों में दूध की मलाई जमा करके घी और मक्खन बनाना एक पुरानी परंपरा रही है। कई लोग रोजाना दूध की मलाई इकट्ठा करते हैं ताकि बाद में उससे शुद्ध देसी घी तैयार किया जा सके। हालांकि अक्सर शिकायत रहती है कि दूध से पर्याप्त मात्रा में मलाई नहीं निकलती। खासकर जब दूध कम मात्रा में हो या उसमें फैट कम हो तो मलाई की परत पतली रह जाती है। लेकिन कुछ आसान किचन टिप्स अपनाकर कम दूध से भी भरपूर और मोटी मलाई प्राप्त की जा सकती है।दरअसल मलाई की मात्रा केवल दूध की गुणवत्ता पर ही निर्भर नहीं करती बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि दूध को किस तरह उबाला और ठंडा किया गया है। यदि सही प्रक्रिया अपनाई जाए तो एक लीटर दूध से भी काफी अधिक मात्रा में मलाई जमा की जा सकती है।

    दूध उबालते समय रखें ये ध्यान

    मलाई की मोटी परत जमाने के लिए सबसे पहले दूध को सही तरीके से उबालना जरूरी है। इसके लिए बर्तन में थोड़ा सा पानी डालें और फिर दूध डालकर गैस पर रखें। दूध गर्म होने के दौरान उसे बीच-बीच में चलाते रहें। इससे दूध तले में नहीं लगेगा और उसका स्वाद भी बेहतर बना रहेगा। यदि आप नियमित रूप से घी या मक्खन बनाते हैं तो फुल क्रीम दूध का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसमें फैट की मात्रा अधिक होने के कारण मलाई भी ज्यादा निकलती है।

    उबाल आने के बाद तुरंत गैस बंद न करें

    ज्यादातर लोग दूध में उबाल आते ही गैस बंद कर देते हैं लेकिन यही सबसे बड़ी गलती होती है। जब दूध में पहला उबाल आ जाए तो उसे धीमी आंच पर तीन से चार मिनट तक और पकने दें। इस दौरान दूध को बिल्कुल न चलाएं। धीमी आंच पर पकाने से दूध में मौजूद फैट ऊपर की सतह पर इकट्ठा होने लगता है और मलाई की मोटी परत बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। कुछ ही मिनटों में आप देखेंगे कि दूध के ऊपर मलाई जमने लगी है। इसके बाद गैस बंद कर दें।

    दूध को सही तरीके से ठंडा करें

    दूध उबलने के बाद उसे पूरी तरह बंद ढक्कन से न ढकें। इसकी जगह किसी जाली या छलनी से ढककर रखें ताकि धूल या अन्य चीजें दूध में न जाएं। पूरी तरह ढक देने से भाप अंदर ही रहती है और मलाई अच्छी तरह नहीं जम पाती। दूध को सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें। जब दूध पूरी तरह ठंडा हो जाए तब उसे फ्रिज में रख दें।

    रातभर फ्रिज में रखें

    मलाई को अच्छी तरह जमाने के लिए दूध को कम से कम आठ घंटे या पूरी रात फ्रिज में रखना चाहिए। ठंडे तापमान में दूध के ऊपर मोटी और सख्त मलाई की परत बन जाती है। सुबह किसी चाकू या चम्मच की सहायता से बर्तन के किनारों से मलाई को धीरे-धीरे निकाल लें। सही तरीके से तैयार की गई मलाई इतनी मोटी होगी कि वह रोटी या पराठे जैसी परत का अहसास दे सकती है।

    मलाई का करें कई तरह से उपयोग

    इस मलाई से घर पर शुद्ध देसी घी और मक्खन तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा इसे पराठों पर लगाकर खाया जा सकता है या फिर कई मिठाइयों और स्वादिष्ट व्यंजनों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • ‘खुद को थप्पड़ मारने का मन करता था’, अक्षय कुमार ने सुनाया संघर्ष और बदलाव का किस्सा, बोले- आखिरी सांस तक कैमरे के सामने रहना चाहता हूं

    ‘खुद को थप्पड़ मारने का मन करता था’, अक्षय कुमार ने सुनाया संघर्ष और बदलाव का किस्सा, बोले- आखिरी सांस तक कैमरे के सामने रहना चाहता हूं

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सबसे सक्रिय और सफल अभिनेताओं में शामिल अक्षय कुमार ने अपने लंबे फिल्मी सफर, करियर के उतार-चढ़ाव और खुद को लगातार बदलते रहने की प्रक्रिया पर खुलकर बात की है। करीब साढ़े तीन दशक से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय अभिनेता ने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अपनी ही फिल्मों को देखकर निराशा होती थी और महसूस होता था कि यदि उन्होंने अपने अभिनय और किरदारों में बदलाव नहीं किया तो उनका करियर एक सीमित दायरे में सिमट सकता है।

    अक्षय कुमार ने कहा कि फिल्म उद्योग में 35 वर्षों का सफर तय करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी वह इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ काम करते रहेंगे। अभिनेता ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि जीवन के अंतिम क्षणों तक वह कैमरे के सामने सक्रिय रहें और अभिनय करते रहें। उनके अनुसार काम ही उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है और वही उन्हें आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है।

    अपने शुरुआती करियर को याद करते हुए अक्षय ने बताया कि जब उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था तब उनका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से सफल होना था। शुरुआती वर्षों में उन्होंने लगातार एक्शन फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे उनकी पहचान एक एक्शन स्टार के रूप में बन गई। हालांकि समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि एक ही तरह की भूमिकाएं निभाने से उनकी रचनात्मक संभावनाएं सीमित हो रही हैं।

    अभिनेता ने कहा कि करियर के लगभग एक दशक बाद जब उन्होंने अपनी पुरानी फिल्मों को दोबारा देखा तो उन्हें लगा कि वह खुद को दोहराने लगे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्हें अपनी छवि बदलने की जरूरत महसूस हुई। यही वह समय था जब उन्होंने नए प्रयोग करने का निर्णय लिया और पारंपरिक एक्शन फिल्मों से आगे बढ़कर अलग-अलग विधाओं में काम शुरू किया।

    अक्षय कुमार के अनुसार यह बदलाव आसान नहीं था क्योंकि इंडस्ट्री और दर्शकों की नजर में उनकी छवि एक्शन हीरो की बन चुकी थी। बावजूद इसके उन्होंने जोखिम उठाया और कॉमेडी, रोमांस, सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों तथा विभिन्न प्रकार के किरदारों को अपनाया। उन्होंने माना कि यही निर्णय उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और इससे उन्हें एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में पहचान मिली।

    फिल्मी जानकारों का भी मानना है कि अक्षय कुमार ने समय-समय पर अपने अभिनय और फिल्मों के चयन में बदलाव कर खुद को प्रासंगिक बनाए रखा है। एक्शन फिल्मों से शुरुआत करने वाले अभिनेता ने बाद में कॉमेडी, पारिवारिक, सामाजिक और प्रेरणादायक विषयों पर आधारित फिल्मों में भी सफलता हासिल की। यही कारण है कि वह लंबे समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बने रहे।

    वर्तमान में भी अक्षय कुमार कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। अभिनेता का कहना है कि आज भी वह हर नए किरदार को सीखने और बेहतर बनने के अवसर के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार कलाकार के लिए सबसे जरूरी चीज लगातार सीखते रहना और खुद को समय के अनुसार विकसित करना है।

    अक्षय कुमार की यह सोच उनके लंबे करियर की सफलता का महत्वपूर्ण कारण मानी जाती है। उन्होंने यह साबित किया है कि फिल्म उद्योग में केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि निरंतर बदलाव और मेहनत भी लंबे समय तक टिके रहने के लिए जरूरी है। यही वजह है कि तीन दशक से अधिक समय बाद भी वह हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त और चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं।

  • मुख्यमंत्री विजय के बर्थडे सेलिब्रेशन की तस्वीर आई सामने, तृषा कृष्णन के भावुक संदेश ने अफवाहों के बाजार को किया शांत

    मुख्यमंत्री विजय के बर्थडे सेलिब्रेशन की तस्वीर आई सामने, तृषा कृष्णन के भावुक संदेश ने अफवाहों के बाजार को किया शांत

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म उद्योग और राजनीति से जुड़े चर्चित चेहरों में शामिल विजय और अभिनेत्री तृषा कृष्णन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा की वजह कोई नई फिल्म या राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक सोशल मीडिया पोस्ट है जिसने बीते कुछ दिनों से चल रही तमाम अटकलों को नया मोड़ दे दिया है। मुख्यमंत्री विजय के जन्मदिन के अवसर पर तृषा कृष्णन द्वारा साझा की गई एक तस्वीर और भावनात्मक संदेश ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

    दरअसल, विजय के जन्मदिन पर तृषा की ओर से शुरुआती घंटों में कोई सार्वजनिक शुभकामना संदेश सामने नहीं आया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। कुछ लोगों ने दोनों के रिश्तों में दूरी आने की संभावना जताई, जबकि कई यूजर्स ने यह अनुमान लगाया कि शायद दोनों के बीच पहले जैसी नजदीकियां नहीं रहीं। इन चर्चाओं के बीच तृषा की ओर से साझा किया गया पोस्ट चर्चा का केंद्र बन गया।

    तस्वीर में विजय और तृषा एक साथ नजर आ रहे हैं। फोटो में विजय के सामने जन्मदिन के कई केक रखे हुए दिखाई देते हैं, जबकि तृषा उनकी ओर देखती हुई नजर आती हैं। तस्वीर का सहज और निजी अंदाज लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इसके साथ साझा किए गए संदेश में तृषा ने विजय को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया जिसकी वजह से कई चीजें खास महसूस होती हैं। इस भावनात्मक संदेश को सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया गया और इसे दोनों के बीच अच्छे संबंधों का संकेत माना जाने लगा।

    पोस्ट सामने आने के बाद प्रशंसकों की प्रतिक्रियाएं भी बड़ी संख्या में देखने को मिलीं। कई लोगों ने कहा कि वे इसी पोस्ट का इंतजार कर रहे थे, जबकि कुछ ने इसे उन तमाम अफवाहों का जवाब बताया जो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही थीं। प्रशंसकों का मानना है कि तस्वीर और संदेश ने रिश्तों को लेकर उठ रहे सवालों को काफी हद तक शांत कर दिया है।

    विजय और तृषा को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। दोनों ने कई सफल फिल्मों में साथ काम किया है और उनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने हमेशा पसंद किया है। समय-समय पर दोनों की तस्वीरें और सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूदगी भी सुर्खियां बटोरती रही है। हालांकि दोनों ने निजी संबंधों को लेकर कभी खुलकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

    इधर, विजय के निजी जीवन को लेकर भी पिछले कुछ समय से चर्चाओं का दौर जारी है। उनकी पारिवारिक स्थिति और निजी रिश्तों को लेकर विभिन्न तरह की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश बातों पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामने आने वाली तस्वीरें और पोस्ट ही लोगों के बीच चर्चा का प्रमुख आधार बन जाती हैं।

    राजनीति और मनोरंजन जगत के संगम का प्रतीक बन चुके विजय के सार्वजनिक जीवन पर लोगों की लगातार नजर रहती है। वहीं तृषा कृष्णन भी दक्षिण भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। ऐसे में दोनों से जुड़ी छोटी से छोटी गतिविधि भी सुर्खियां बन जाती है। विजय के जन्मदिन पर साझा की गई यह तस्वीर भी इसी वजह से चर्चा का विषय बनी हुई है और प्रशंसकों के बीच लगातार वायरल हो रही है।

  • हर वॉश के बाद चमकेंगे बाल, दही और चावल का यह आसान हेयर मास्क करेगा कमाल

    हर वॉश के बाद चमकेंगे बाल, दही और चावल का यह आसान हेयर मास्क करेगा कमाल


    नई दिल्ली ।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बालों की देखभाल करना आसान नहीं रह गया है। बढ़ता प्रदूषण धूल मिट्टी अनियमित खानपान और बार-बार हेयर स्टाइलिंग टूल्स का इस्तेमाल बालों की सेहत पर बुरा असर डालता है। इसका नतीजा यह होता है कि बाल धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगते हैं और रूखे बेजान व कमजोर नजर आने लगते हैं। ऐसे में लोग महंगे हेयर ट्रीटमेंट और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं लेकिन कई बार घरेलू नुस्खे भी शानदार परिणाम दे सकते हैं।

    दही और चावल से तैयार किया गया हेयर मास्क ऐसा ही एक आसान और असरदार घरेलू उपाय है जो बालों को गहराई से पोषण देने का काम करता है। यह मास्क बालों में नमी बनाए रखने के साथ उन्हें मुलायम चमकदार और मजबूत बनाने में मदद करता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए किसी महंगे प्रोडक्ट की जरूरत नहीं होती और घर में मौजूद सामान्य सामग्री से इसे आसानी से बनाया जा सकता है।

    दही को बालों के लिए प्राकृतिक कंडीशनर माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व बालों की जड़ों को मजबूती प्रदान करते हैं। दही स्कैल्प को हाइड्रेट रखने में मदद करता है और रूखेपन को कम करता है। नियमित रूप से दही का उपयोग करने से बाल अधिक मुलायम और स्वस्थ दिखाई देते हैं।

    वहीं चावल भी बालों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। चावल में मौजूद पोषक तत्व बालों की बनावट सुधारने और उन्हें मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। चावल का पेस्ट बालों पर एक हल्की परत बनाता है जिससे बाल कम उलझते हैं और उनमें प्राकृतिक चमक बढ़ती है।

    इस हेयर मास्क को बनाने के लिए एक कटोरी उबले हुए चावल आधी कटोरी दही दो चम्मच एलोवेरा जेल और एक चम्मच नारियल तेल की आवश्यकता होगी। इन सभी सामग्रियों को मिक्सर में डालकर अच्छी तरह पीस लें और एक मुलायम पेस्ट तैयार कर लें।

    मास्क लगाने से पहले बालों को अच्छी तरह सुलझा लें। इसके बाद तैयार पेस्ट को बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक समान रूप से लगाएं। ध्यान रखें कि मास्क पूरे बालों पर अच्छी तरह फैल जाए। अब बालों को हल्के से बांध लें और लगभग 40 से 45 मिनट तक इसे लगा रहने दें। तय समय के बाद सामान्य पानी से बाल धो लें और फिर हल्के शैंपू का इस्तेमाल करें।

    इस मास्क के नियमित उपयोग से बालों का रूखापन कम हो सकता है। यह बालों को मुलायम बनाने के साथ उनकी प्राकृतिक चमक बढ़ाने में मदद करता है। कमजोर और टूटते बालों को पोषण मिल सकता है तथा उलझने की समस्या भी कम हो सकती है। बाल अधिक स्मूद और मैनेजेबल महसूस होते हैं।

    हालांकि इस मास्क का इस्तेमाल सप्ताह में एक या दो बार से अधिक नहीं करना चाहिए। यदि स्कैल्प पर किसी प्रकार की एलर्जी संक्रमण या अन्य समस्या है तो पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा। साथ ही बाल धोते समय बहुत गर्म पानी का उपयोग करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बालों का रूखापन बढ़ सकता है।

  • पद्म पुरस्कार समारोह में चमके सिनेमा और संगीत जगत के सितारे, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित, आर माधवन और अल्का याग्निक रहे चर्चा के केंद्र में

    पद्म पुरस्कार समारोह में चमके सिनेमा और संगीत जगत के सितारे, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित, आर माधवन और अल्का याग्निक रहे चर्चा के केंद्र में

    नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों के वितरण समारोह में कला, संस्कृति, सिनेमा और संगीत जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को पद्म सम्मान प्रदान किए। समारोह के दौरान कई ऐसे क्षण देखने को मिले, जिन्होंने उपस्थित लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा का विषय बने।

    फिल्म अभिनेता आर माधवन को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। सम्मान ग्रहण करने के दौरान उन्होंने विनम्रता और गरिमा का परिचय देते हुए मंच पर पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन किया और सम्मान प्राप्त करने के बाद राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। समारोह में उनकी सादगी और संयमित व्यवहार की काफी सराहना हुई। लंबे समय से भारतीय सिनेमा में सक्रिय आर माधवन ने हिंदी, तमिल और अन्य भाषाओं की फिल्मों में अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई है। मनोरंजन जगत में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।

    प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अल्का याग्निक को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। भारतीय संगीत जगत में कई दशकों से सक्रिय अल्का याग्निक ने हजारों गीतों को अपनी आवाज दी है और उनकी गायकी कई पीढ़ियों की पसंद बनी हुई है। सम्मान समारोह में उनकी उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। राष्ट्रीय स्तर पर संगीत क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक से सम्मानित किया गया।

    समारोह के दौरान कला और संस्कृति से जुड़े कई अन्य प्रतिष्ठित नामों को भी पद्म सम्मान प्रदान किए गए। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकारों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक हस्तियों को सम्मानित कर उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी गई। पद्म पुरस्कारों का उद्देश्य उन व्यक्तियों को सम्मान देना है जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    इस अवसर पर सम्मानित होने वाले कलाकारों और उनके परिवारों के लिए यह एक यादगार पल रहा। समारोह में मौजूद अतिथियों ने सम्मान प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तित्वों को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की। कई कलाकारों ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक क्षण बताया। उनका कहना था कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के स्नेह और समर्थन का परिणाम है जिन्होंने वर्षों तक उनके कार्य को सराहा।

    पद्म पुरस्कारों को देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में गिना जाता है। हर वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों का चयन कर उन्हें सम्मानित किया जाता है। यह सम्मान न केवल उपलब्धियों की पहचान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उत्कृष्टता और समर्पण के लिए प्रेरित करने का माध्यम भी माना जाता है।

    राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस वर्ष का समारोह भी इसी भावना का प्रतीक बना, जहां देश ने अपने उन प्रतिभाशाली नागरिकों का सम्मान किया जिन्होंने अपने कार्यों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पद्म पुरस्कार समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि समर्पण, प्रतिभा और निरंतर प्रयासों को देश सर्वोच्च सम्मान के साथ स्वीकार करता है।

  • जब एक ही दिन में हाथ से निकल गए तीन बड़े प्रोजेक्ट, संघर्ष के दौर में मनोज बाजपेयी से दोस्त ने पूछा था- कहीं कोई गलत कदम तो नहीं उठाओगे?

    जब एक ही दिन में हाथ से निकल गए तीन बड़े प्रोजेक्ट, संघर्ष के दौर में मनोज बाजपेयी से दोस्त ने पूछा था- कहीं कोई गलत कदम तो नहीं उठाओगे?

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रतिभाशाली अभिनेताओं में शामिल मनोज बाजपेयी आज अभिनय की दुनिया में एक स्थापित नाम हैं। अपने दमदार अभिनय, अलग किरदारों और गंभीर भूमिकाओं के लिए पहचान बना चुके मनोज बाजपेयी की सफलता की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उसका संघर्ष उतना ही कठिन रहा है। आज करोड़ों दर्शकों के पसंदीदा अभिनेता बनने से पहले उन्होंने लंबे समय तक असफलताओं, अस्वीकार किए जाने और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया था।

    मनोज बाजपेयी ने कई मंचों पर अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया है कि मुंबई में शुरुआती दौर उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। अभिनय के क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए वह लगातार ऑडिशन देते थे और छोटे-बड़े अवसरों की तलाश में रहते थे। हालांकि कई बार उन्हें सफलता के बजाय निराशा ही हाथ लगी। ऐसे ही एक कठिन अनुभव का जिक्र उन्होंने एक बातचीत के दौरान किया था, जिसने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

    अभिनेता के अनुसार एक समय ऐसा आया जब उनके पास एक साथ तीन अलग-अलग प्रोजेक्ट थे। इनमें एक टेलीविजन धारावाहिक में मुख्य भूमिका, एक कॉर्पोरेट फिल्म में प्रमुख किरदार और एक नए सीरियल में महत्वपूर्ण भूमिका शामिल थी। उन्हें लगने लगा था कि अब करियर धीरे-धीरे पटरी पर आने लगा है। लेकिन परिस्थितियां अचानक इस तरह बदलीं कि एक ही दिन में तीनों अवसर उनके हाथ से निकल गए।

    उन्होंने बताया कि एक प्रोजेक्ट की शूटिंग के दौरान पहला दृश्य फिल्माए जाने के बाद उन्हें अलग बुलाया गया। कुछ देर की चर्चा के बाद यूनिट की ओर से उन्हें सूचित किया गया कि निर्माता और निर्देशक को उनकी भूमिका को लेकर कुछ संदेह है और फिलहाल उन्हें आगे काम नहीं करना होगा। यह सूचना उनके लिए बेहद अप्रत्याशित थी। सेट पर मौजूद अन्य लोगों के बीच इस तरह काम से हटाए जाने से उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा।

    उस समय की स्थिति को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सबसे अधिक कठिनाई इस बात की थी कि उनके सामने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। जिस काम को लेकर उम्मीदें थीं, वह अचानक समाप्त हो गया था। इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रोजेक्ट की जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन वहां भी उन्हें पता चला कि उनकी जगह किसी अन्य कलाकार को चुन लिया गया है। इससे उनका मनोबल और अधिक प्रभावित हुआ।

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब तीसरे प्रोजेक्ट से भी उनके बाहर होने की सूचना मिली। एक ही दिन में लगातार तीन झटके मिलने के बाद वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गए थे। संघर्ष के उन दिनों में आर्थिक असुरक्षा और भविष्य की चिंता भी लगातार उनके साथ थी। ऐसे समय में उनके करीबी मित्रों ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें निराशा से बाहर निकलने की कोशिश की।

    मनोज बाजपेयी ने स्वीकार किया कि कलाकारों के जीवन में असफलता और अस्वीकृति सामान्य बात होती है, लेकिन शुरुआती दौर में इन्हें स्वीकार करना आसान नहीं होता। उन्होंने बताया कि उस दौर ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया और परिस्थितियों से लड़ना सिखाया। लगातार मिल रही निराशाओं के बावजूद उन्होंने अभिनय का सपना नहीं छोड़ा और अपने लक्ष्य पर डटे रहे।

    समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें ऐसे अवसर मिले जिन्होंने उनके करियर की दिशा बदल दी। बाद में उन्होंने कई यादगार फिल्मों और वेब सीरीज में शानदार अभिनय कर अपनी अलग पहचान बनाई। आज उनका नाम उन कलाकारों में लिया जाता है जिन्होंने प्रतिभा और मेहनत के बल पर फिल्म उद्योग में विशेष स्थान हासिल किया।

    मनोज बाजपेयी की यह कहानी केवल एक अभिनेता के संघर्ष की दास्तान नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा भी है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि असफलताएं स्थायी नहीं होतीं और लगातार प्रयास करने वाले लोगों के लिए सफलता का रास्ता अंततः खुल ही जाता है।

  • ‘मुंगड़ा-मुंगड़ा’ का असली मतलब जानकर चौंक जाएंगे आप, दशकों से गुनगुनाए जा रहे इस सुपरहिट गाने के पीछे छिपा है दिलचस्प अर्थ

    ‘मुंगड़ा-मुंगड़ा’ का असली मतलब जानकर चौंक जाएंगे आप, दशकों से गुनगुनाए जा रहे इस सुपरहिट गाने के पीछे छिपा है दिलचस्प अर्थ

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे हैं जो समय की सीमाओं को पार कर पीढ़ियों तक लोकप्रिय बने रहते हैं। वर्ष 1977 में रिलीज हुई फिल्म ‘इंकार’ का गीत ‘मुंगड़ा-मुंगड़ा, मैं गुड़ की डली’ भी ऐसे ही सदाबहार गीतों में शामिल है। यह गाना आज भी शादियों, समारोहों और सांस्कृतिक आयोजनों में उतनी ही ऊर्जा और उत्साह के साथ सुना जाता है, जितना अपने दौर में सुना जाता था। हालांकि इस गीत को गुनगुनाने वाले अधिकांश लोग इसके वास्तविक अर्थ से अनजान रहते हैं।

    यह गीत अपने संगीत, लय और हेलेन के आकर्षक प्रदर्शन के कारण बेहद लोकप्रिय हुआ था। फिल्म में हेलेन ने मराठी लोक संस्कृति से प्रेरित लावणी शैली में प्रस्तुति दी थी, जिसने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। यही वजह है कि कई लोगों ने समय के साथ ‘मुंगड़ा’ शब्द को लावणी नृत्य या किसी विशेष शैली से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। जबकि वास्तविकता इससे अलग है।

    गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे, जबकि संगीतकार राजेश रोशन थे। इस गीत को स्वर दिया था ऊषा मंगेशकर ने। इन सभी की रचनात्मक प्रतिभा ने मिलकर एक ऐसा गीत तैयार किया, जो लगभग पांच दशकों बाद भी लोकप्रियता बनाए हुए है। लेकिन इसकी सबसे खास बात इसके शब्दों में छिपा सांकेतिक अर्थ माना जाता है।

    भाषाई और सांस्कृतिक संदर्भों के अनुसार ‘मुंगड़ा’ शब्द का संबंध मराठी बोलचाल से माना जाता है। स्थानीय प्रयोग में इसका अर्थ बड़े चींटे या नर चींटे से जोड़ा जाता है। मराठी में चींटी के लिए ‘मुंगी’ और कुछ क्षेत्रों में बड़े चींटे के लिए ‘मुंगला’ या ‘मुंगड़ा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। यही संदर्भ इस गीत के अर्थ को समझने की कुंजी माना जाता है।

    गीत के मुखड़े में नायिका स्वयं को ‘गुड़ की डली’ कहती है और सामने वाले को ‘मुंगड़ा’ संबोधित करती है। यदि इस रूपक को समझा जाए तो गीत में एक रोचक तुलना दिखाई देती है। जिस प्रकार गुड़ की मिठास चींटियों को अपनी ओर आकर्षित करती है, उसी प्रकार गीत की नायिका अपने प्रशंसकों या चाहने वालों को संबोधित करते हुए स्वयं को आकर्षण का केंद्र बताती है। वह संकेत देती है कि यदि प्रेम या स्नेह चाहिए तो आगे बढ़ो, अन्यथा अवसर निकल जाएगा।

    यही कारण है कि इस गीत के शब्द पहली नजर में जितने सरल दिखाई देते हैं, उनके भीतर उतनी ही रचनात्मक कल्पना और सांस्कृतिक गहराई छिपी हुई है। गीतकार ने एक सामान्य ग्रामीण और लोक जीवन से जुड़े प्रतीक का उपयोग कर प्रेम और आकर्षण की भावना को बेहद सहज ढंग से व्यक्त किया है। यही विशेषता मजरूह सुल्तानपुरी की लेखनी को अलग पहचान देती है।

    फिल्म ‘इंकार’ में शामिल होने के बाद यह गीत तेजी से लोकप्रिय हुआ और बाद के वर्षों में कई फिल्मों तथा मंचीय प्रस्तुतियों में इसका पुनः उपयोग किया गया। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नई पीढ़ी के दर्शक भी इस गीत को उतनी ही रुचि से सुनते हैं। कई फिल्मों में इसके नए संस्करण बनाए गए, जिससे यह गीत लगातार चर्चा में बना रहा।

    संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि किसी गीत की दीर्घकालिक सफलता केवल उसके संगीत पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके शब्दों की गहराई और सांस्कृतिक जुड़ाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘मुंगड़ा-मुंगड़ा’ इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। वर्षों से लोगों को झूमने पर मजबूर करने वाला यह गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय लोक अभिव्यक्तियों और रचनात्मक प्रतीकों का भी एक दिलचस्प दस्तावेज है।

  • फर्जी वोटर आईडी मामले में अभिनेता प्रकाश राज की बढ़ीं मुश्किलें, अदालत में पेश नहीं होने पर जारी हुआ गैर-जमानती वारंट

    फर्जी वोटर आईडी मामले में अभिनेता प्रकाश राज की बढ़ीं मुश्किलें, अदालत में पेश नहीं होने पर जारी हुआ गैर-जमानती वारंट

    नई दिल्ली । फिल्म जगत के चर्चित अभिनेता और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए पहचाने जाने वाले प्रकाश राज एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या सार्वजनिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक कानूनी मामला है। वोटर पहचान पत्र से जुड़े एक पुराने प्रकरण में अदालत द्वारा उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। न्यायालय के इस कदम ने अभिनेता की कानूनी चुनौतियों को बढ़ा दिया है और अब आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    जानकारी के अनुसार मामला कई वर्ष पुरानी शिकायत से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अभिनेता के नाम पर विभिन्न राज्यों में मतदाता पहचान पत्र दर्ज हैं। भारतीय चुनावी नियमों के अनुसार किसी भी नागरिक का नाम केवल एक ही निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के नाम पर एक से अधिक स्थानों पर मतदाता पंजीकरण पाया जाता है तो यह चुनावी नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

    इस मामले में एक शिकायतकर्ता ने संबंधित पुलिस थाने में आवेदन देकर जांच की मांग की थी। शिकायत में दावा किया गया था कि अभिनेता के पास एक से अधिक राज्यों से जुड़े मतदाता पहचान पत्र मौजूद हैं। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और संबंधित दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। प्रारंभिक स्तर पर उठे सवालों ने मामले को कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ा दिया।

    प्रकरण न्यायालय तक पहुंचने के बाद समय-समय पर सुनवाई होती रही। हालांकि हालिया घटनाक्रम में अदालत ने अभिनेता की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार जब किसी मामले में आरोपी को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने के निर्देश दिए जाते हैं और पर्याप्त कारण के बिना वह उपस्थित नहीं होता, तब अदालत इस प्रकार की कार्रवाई कर सकती है। गैर-जमानती वारंट का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति की न्यायिक प्रक्रिया में उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है।

    मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। चुनावी पहचान और मतदाता पंजीकरण से जुड़े मामलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियां दस्तावेजों की सत्यता और नियमों के अनुपालन की विस्तृत जांच करती हैं। यदि किसी व्यक्ति के नाम पर विभिन्न स्थानों पर पंजीकरण पाया जाता है तो संबंधित रिकॉर्ड को सत्यापित करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

    प्रकाश राज लंबे समय से दक्षिण भारतीय और हिंदी फिल्म उद्योग का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने कई भाषाओं की फिल्मों में अभिनय किया है और खलनायक से लेकर चरित्र अभिनेता तक विभिन्न भूमिकाओं में अपनी पहचान बनाई है। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता भी उन्हें अक्सर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में रखती है। ऐसे में उनके खिलाफ हुई यह कानूनी कार्रवाई स्वाभाविक रूप से व्यापक ध्यान आकर्षित कर रही है।

    कानूनी जानकारों का कहना है कि गैर-जमानती वारंट जारी होना अंतिम निर्णय नहीं माना जाता, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा होता है। संबंधित व्यक्ति अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकता है और कानून के तहत उपलब्ध उपायों का उपयोग कर सकता है। मामले के तथ्यों, दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।

    फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत के आदेश के बाद आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और संबंधित पक्ष अपनी प्रतिक्रिया किस प्रकार प्रस्तुत करता है। चुनावी दस्तावेजों से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर मतदाता पंजीकरण प्रणाली की पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन को लेकर चर्चा को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।

  • ज्योतिष में क्यों खास माना जाता है हरा कलावा? बुध ग्रह से जुड़ी मान्यताओं के बीच जानिए इसे धारण करने के बताए जाने वाले लाभ

    ज्योतिष में क्यों खास माना जाता है हरा कलावा? बुध ग्रह से जुड़ी मान्यताओं के बीच जानिए इसे धारण करने के बताए जाने वाले लाभ

    नई दिल्ली । भारतीय धार्मिक परंपराओं में कलावा का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ कार्यों के दौरान आमतौर पर लाल या पीले रंग का कलावा बांधा जाता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र में विभिन्न रंगों के कलावों का भी उल्लेख मिलता है, जिनका संबंध अलग-अलग ग्रहों और उनके प्रभावों से जोड़ा जाता है। इन्हीं में से एक हरा कलावा भी है, जिसे विशेष परिस्थितियों में धारण करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि यह कलावा बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है और इसे पहनने से व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, तर्क क्षमता, संवाद कौशल, शिक्षा और व्यापार का कारक माना जाता है। इसी कारण हरे रंग को बुध ग्रह का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर स्थिति में होता है या जो अपनी संवाद क्षमता, अध्ययन और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाना चाहते हैं, उन्हें ज्योतिषीय सलाह के आधार पर हरा कलावा धारण करने की सलाह दी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरा कलावा आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक माना जाता है। कहा जाता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति की अभिव्यक्ति क्षमता बेहतर हो सकती है और वह अपने विचारों को अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर पाता है। विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए इसे लाभकारी बताया जाता है जो सार्वजनिक संवाद, व्यापार, शिक्षा या प्रबंधन जैसे क्षेत्रों से जुड़े होते हैं। मान्यता है कि बुध ग्रह के सकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति का आत्मबल मजबूत होता है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आता है।

    हरे कलावे को मानसिक शांति और एकाग्रता से भी जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह मन को स्थिर रखने और अनावश्यक चिंताओं को कम करने में सहायक माना जाता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए इसे शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि एकाग्रता बढ़ने से अध्ययन में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिल सकती है और व्यक्ति अपने लक्ष्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाता है।

    करियर और व्यवसाय के क्षेत्र में भी हरे कलावे का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार बुध ग्रह व्यापार, लेखन, संचार, मार्केटिंग और वित्तीय गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में हरा कलावा धारण करने को व्यावसायिक प्रगति और नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति की सोच अधिक व्यवस्थित होती है और वह कार्यक्षेत्र में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनता है।

    हरा कलावा धारण करने के लिए बुधवार का दिन सबसे उपयुक्त माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन बुध ग्रह और भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। परंपरागत मान्यता है कि बुधवार को स्नान के बाद भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ हरा कलावा धारण किया जाए तो इसका शुभ प्रभाव अधिक माना जाता है।

    ज्योतिषीय परंपराओं में इसे बांधने के कुछ नियम भी बताए गए हैं। मान्यता है कि कलावा तीन गांठों के साथ बांधा जाना चाहिए। पुरुषों के लिए दाहिने हाथ और महिलाओं के लिए बाएं हाथ में इसे धारण करने की परंपरा बताई जाती है। हालांकि ज्योतिषीय उपायों और धार्मिक मान्यताओं को व्यक्तिगत आस्था का विषय माना जाता है और इनके प्रभाव को लेकर अलग-अलग लोगों की मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय उपायों का उद्देश्य व्यक्ति में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को बढ़ावा देना भी होता है। हरा कलावा भी ऐसी ही मान्यताओं का हिस्सा है, जिसे बुध ग्रह की शुभता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

  • सिर्फ शुभ मुहूर्त नहीं ग्रहों की चाल भी है जरूरी, जानिए कब करें नए काम की शुरुआत

    सिर्फ शुभ मुहूर्त नहीं ग्रहों की चाल भी है जरूरी, जानिए कब करें नए काम की शुरुआत


    नई दिल्ली । जीवन में नई नौकरी जॉइन करना नया व्यापार शुरू करना या किसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत करना हर व्यक्ति के लिए एक बड़ा कदम होता है। भारतीय सनातन परंपरा में ऐसे कार्यों से पहले शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि सही समय पर शुरू किया गया कार्य सफलता के द्वार खोल सकता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र केवल मुहूर्त देखने तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रहों की स्थिति दशा और गोचर को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है।

    ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले व्यक्ति को अपनी ग्रह दशाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। कई बार शुभ मुहूर्त होने के बावजूद ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति कार्य में बाधाएं उत्पन्न कर सकती है। वहीं अनुकूल ग्रह दशाएं व्यक्ति को नए अवसरों और सफलता की ओर तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करती हैं।

    ज्योतिष के अनुसार जब कुंडली में बृहस्पति या शुक्र की महादशा अथवा अंतरदशा चल रही हो तब नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय बेहद अनुकूल माना जाता है। ये दोनों ग्रह समृद्धि प्रगति और सकारात्मक अवसरों के कारक माने जाते हैं। इसी प्रकार यदि गोचर में गुरु और शनि अनुकूल स्थिति में हों तो करियर व्यवसाय और आर्थिक मामलों में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

    इसके अलावा साढ़ेसाती या ढैया जैसी चुनौतीपूर्ण अवधियों के समाप्त होने के बाद भी जीवन में नए अध्याय शुरू करने के योग बनते हैं। ऐसे समय में व्यक्ति को नई नौकरी व्यापार विस्तार या निवेश जैसे फैसले लेने का अवसर मिल सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भाग्य स्थान के स्वामी यानी भाग्येश तथा सप्तम भाव के स्वामी सप्तमेश की दशा भी जीवन में नए अवसर लेकर आती है। इन ग्रहों की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को नई जिम्मेदारियां प्रतिष्ठा और उन्नति के अवसर प्रदान कर सकती है। इसलिए किसी बड़े निर्णय से पहले कुंडली का विश्लेषण कराना लाभकारी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नए कार्य की शुरुआत करते समय केवल दिन नहीं बल्कि समय और स्थान का चयन भी महत्वपूर्ण होता है। चंद्रबल और ताराबल मजबूत होने पर कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही कार्य के अनुरूप नक्षत्र का चयन और राशि के अनुसार शुभ दिन का चुनाव भी सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में राशि अनुसार कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन करके नए कार्य की शुरुआत करना शुभ माना गया है। मेष राशि के लोग गुरुवार को पीली सरसों ग्रहण कर सकते हैं। वृष और कुंभ राशि वालों के लिए घी शुभ माना गया है। मिथुन तुला और मकर राशि के जातक दही या दही चीनी खाकर शुरुआत कर सकते हैं। कर्क राशि वालों को गुड़ जबकि सिंह और वृश्चिक राशि वालों को पान का सेवन शुभ माना गया है। कन्या और मीन राशि के लोग हरा धनिया खाकर नया कार्य शुरू कर सकते हैं। वहीं धनु राशि वालों के लिए पीली मिठाई शुभ फलदायी मानी गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सही समय सही ग्रह दशा और सकारात्मक संकल्प के साथ शुरू किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को और मजबूत बना सकता है।