Author: bharati

  • अहमदाबाद में नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं गरबा, 200 साल पुरानी परंपरा के पीछे है साडू माता के बलिदान की कहानी

    अहमदाबाद में नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं गरबा, 200 साल पुरानी परंपरा के पीछे है साडू माता के बलिदान की कहानी

    नई दिल्ली । गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा और देवी की आराधना का विशेष महत्व है। इस उत्सव के बीच अहमदाबाद के शाहपुर इलाके में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो अपनी अनूठी पहचान के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। यहां नवरात्रि की आठवीं रात बारोट समुदाय के पुरुष साड़ी पहनकर गरबा करते हैं। माथे पर सिंदूर की बिंदी लगाकर होने वाला यह आयोजन करीब 200 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस रस्म का संबंध साडू माता के बलिदान और उनकी रक्षा नहीं कर पाने के बाद समुदाय द्वारा किए गए प्रायश्चित से है।

    शाहपुर की साडू माता नी पोल में हर साल नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष एकत्र होते हैं और पारंपरिक तरीके से गरबा करते हैं। इस आयोजन में बारोट समुदाय के लोगों के साथ दूसरे समुदायों के लोग भी भाग लेते हैं। इस वर्ष भी कम से कम 40 पुरुष इस परंपरा में शामिल हुए। इनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौजूद थे। यह आयोजन अलग-अलग समुदायों की भागीदारी के साथ परंपरा के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाता है।

    60 वर्षीय सतीश बारोट ने बताया कि वह 40 साल से अधिक समय से इस रस्म का हिस्सा बनते आ रहे हैं। वहीं, सुरेंद्रनगर से पिंटू बारोट अपने परिवार के साथ इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे। उनके 10 वर्षीय बेटे, भाई और भतीजे ने पहली बार इस परंपरा में भाग लिया। इस तरह परिवार की नई पीढ़ी भी इस पुरानी रस्म से जुड़ रही है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस परंपरा की शुरुआत लगभग 200 साल पहले हुई एक घटना से जुड़ी है। मान्यता है कि बारोट समुदाय की साडू माता अपनी असाधारण सुंदरता के लिए जानी जाती थीं। उस समय के शासक ने उन्हें दरबार में पेश करने का आदेश दिया था। इस आदेश को पूरा कराने के लिए सैनिकों की एक टुकड़ी भेजी गई थी।

    स्थानीय मान्यता के अनुसार, समुदाय के लोगों ने साडू माता को उनकी इच्छा के विरुद्ध दरबार ले जाने का विरोध किया। इस दौरान सैनिकों और समुदाय के लोगों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। बताया जाता है कि खतरा बढ़ने पर साडू माता ने पहले अपनी बेटी अजूबा की जान ले ली। इसके बाद उन्होंने अपने पति हाथीसिंह बारोट से कहा कि उन्हें शाही दरबार में ले जाने देने के बजाय तलवार के एक वार से उनकी जान ले लें। मान्यता के अनुसार, इसके बाद साडू माता की मृत्यु हो गई।

    इस घटना के बाद समुदाय के लोगों को गहरा पछतावा हुआ कि वे साडू माता की रक्षा नहीं कर सके। स्थानीय विश्वास के मुताबिक, उनकी मृत्यु के बाद समुदाय के परिवारों पर श्राप लगने की आशंका जताई जाने लगी। लोगों का दावा था कि परिवारों में पुरुषों की मौतें होने लगीं और वंश को आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आने लगीं।

    इसके बाद समुदाय के लोग साडू माता के स्मारक पर एकत्र हुए। उन्होंने अपनी गलती के लिए प्रायश्चित किया और परिवारों की खुशहाली तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रार्थना की। इसी दौरान पुरुषों ने साडू माता से जुड़े वस्त्र पहनने का संकल्प लिया। समुदाय का विश्वास है कि प्रार्थनाओं के बाद परिवारों की वंश-परंपरा फिर आगे बढ़ने लगी। समय के साथ साड़ी पहनकर गरबा करने की यह रस्म नवरात्रि की आठवीं रात की स्थायी परंपरा बन गई।

    आज इस आयोजन में शामिल होने वाले पुरुष इसे केवल नृत्य या धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, कृतज्ञता और सामूहिक प्रायश्चित के प्रतीक के रूप में देखते हैं। अहमदाबाद के शाहपुर में निभाई जाने वाली यह परंपरा गुजरात के नवरात्रि उत्सव की विविधता और स्थानीय लोकविश्वासों से जुड़ी पुरानी स्मृतियों को सामने लाती है।

  • महाराष्ट्र के लातूर में युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा, निजी अंगों पर पेट्रोल डालने के आरोप से मचा हड़कंप

    महाराष्ट्र के लातूर में युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा, निजी अंगों पर पेट्रोल डालने के आरोप से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के लातूर में एक युवक के साथ बर्बरता से मारपीट करने का मामला सामने आया है। युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा गया और उसके निजी अंगों पर पेट्रोल डालकर हमला किया गया। घटना का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह घटना करीब दो महीने पुरानी है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ लोग एक युवक को घेरकर उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में युवक के कपड़े उतारकर उसे बेल्ट से पीटते हुए देखा जा सकता है। हमलावर उस पर लात-घूंसे भी बरसाते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि मारपीट के दौरान युवक के निजी अंगों पर पेट्रोल भी डाला गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वीडियो सामने आने के बाद मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि हमलावरों ने मारपीट की पूरी घटना को मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया समूहों में साझा कर दिया गया, जहां से यह फैलता हुआ लोगों तक पहुंचा। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस का ध्यान इस घटना की ओर गया और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवक के साथ हुई यह घटना लगभग दो महीने पहले की है। मारपीट और हमले के बाद पीड़ित युवक कथित तौर पर उस जगह को छोड़कर चला गया था। घटना के बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। अब वीडियो सामने आने के बाद पुलिस उसकी पहचान कर उससे संपर्क करने की कोशिश कर रही है, ताकि मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सके।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी ने बताया कि पीड़ित युवक की पहचान कर ली गई है और उसे अपना बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन आने को कहा गया है। पुलिस का मानना है कि पीड़ित का बयान दर्ज होने के बाद घटना से जुड़ी परिस्थितियों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी।

    फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि युवक पर हमला किस वजह से किया गया था। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कथित तौर पर मारपीट में शामिल थे। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना का वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में किन लोगों की भूमिका रही।

    इस मामले में अभी तक पीड़ित की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। ऐसे में पुलिस की जांच में उसका बयान अहम माना जा रहा है। बयान दर्ज होने के बाद ही हमले की वजह, घटनाक्रम और इसमें शामिल लोगों के संबंध में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और उपलब्ध शुरुआती जानकारी के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

  • भोपाल की झुग्गी से अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप तक पहुंचने का सपना, 22 साल की प्रीति प्रजापति के लिए बहन ने सिले कपड़े, पिता बने ताकत

    भोपाल की झुग्गी से अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप तक पहुंचने का सपना, 22 साल की प्रीति प्रजापति के लिए बहन ने सिले कपड़े, पिता बने ताकत

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल की एक झुग्गी बस्ती से निकलकर मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहीं 22 वर्षीय प्रीति प्रजापति की कहानी मेहनत, पारिवारिक सहयोग और बड़े सपने देखने के हौसले की मिसाल है। लहारपुर के रामेश्वरम एक्सटेंशन की तंग गलियों में रहने वाली प्रीति के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। उनके पिता मिस्त्री का काम करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। इसके बावजूद परिवार ने प्रीति के सपनों को आगे बढ़ने से नहीं रोका। आज वह मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप पर अपनी प्रतिभा दिखाने का सपना देख रही हैं।

    प्रीति के पास शुरुआत में न तो मॉडलिंग के लिए कोई बड़ा स्टूडियो था और न ही महंगे डिजाइनर कपड़े खरीदने के पर्याप्त संसाधन। ऐसे में उन्होंने अपने घर के सामने की गली को ही अभ्यास का स्थान बना लिया। वहीं रैंप वॉक की तैयारी की और अपने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने शुरू किए। धीरे-धीरे उनके वीडियो लोगों तक पहुंचने लगे और उनकी मेहनत को पहचान मिलने लगी। जिस गली में उन्होंने अपने मॉडलिंग सफर की शुरुआत की थी, वहां से आगे बढ़कर अब वह बड़े रैंप वॉक कार्यक्रमों में भी नजर आने लगी हैं।

    बहन ने अपने हुनर से पूरा किया बहन का सपना

    प्रीति की इस यात्रा में उनकी बहन रेखा प्रजापति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मॉडलिंग के लिए महंगे कपड़े खरीदना परिवार के लिए आसान नहीं था। ऐसे में रेखा ने अपनी सिलाई के हुनर का इस्तेमाल करते हुए प्रीति के लिए कपड़े तैयार किए। इससे प्रीति को अपने अभ्यास और कार्यक्रमों के लिए जरूरी परिधान मिल सके।

    रेखा का भी फैशन की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना है। वह फैशन डिजाइनर बनना चाहती हैं। इस तरह दोनों बहनें अपने-अपने हुनर के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं। एक बहन मॉडलिंग में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत कर रही है, जबकि दूसरी कपड़े सिलने की कला को फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र तक ले जाना चाहती है। उनका साथ दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार के भीतर मौजूद प्रतिभा और सहयोग बड़े सपनों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    मिस्त्री पिता और गृहिणी मां ने बढ़ाया हौसला

    प्रीति के पिता मोतीलाल प्रजापति मिस्त्री का काम करते हैं और उनकी मां कलिंदा प्रजापति गृहिणी हैं। परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं। सभी तीन कमरों के छोटे से मकान में रहते हैं। आर्थिक परिस्थितियां सामान्य होने के बावजूद माता-पिता ने प्रीति की महत्वाकांक्षाओं पर पाबंदी नहीं लगाई।

    प्रीति की मां अपनी बेटी को आगे बढ़ते देखकर खुश हैं। वहीं पिता भी उसका पूरा सहयोग करते हैं और चाहते हैं कि वह अपनी मेहनत से परिवार का नाम रोशन करे। परिवार का यह समर्थन प्रीति के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा बना हुआ है।

    गली में अभ्यास से बड़े रैंप तक का सफर

    जब प्रीति घर के सामने की गली में रैंप वॉक का अभ्यास करती थीं, तब आसपास के लोग उनसे पूछते थे कि वह ऐसा क्यों कर रही हैं। उस समय उनके मॉडलिंग के सपने को लेकर लोगों के मन में सवाल थे। हालांकि, प्रीति ने अभ्यास जारी रखा और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ती रहीं। अब उनके प्रयासों को देखकर पड़ोसी भी उनकी तारीफ करते हैं।

    प्रीति ने पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। कोरोना काल में पढ़ाई प्रभावित होने के बाद उन्होंने मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों पर रैंप वॉक करना और अपनी प्रतिभा को व्यापक पहचान दिलाना है।

    प्रीति के लिए यह सफर केवल मॉडल बनने तक सीमित नहीं है। वह अपने परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपने सपनों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

  • छतरपुर में मिला 8 फीट लंबा दुर्लभ सफेद अजगर, पहली बार ऐसा सांप देखकर सर्प विशेषज्ञ भी रह गए हैरान

    छतरपुर में मिला 8 फीट लंबा दुर्लभ सफेद अजगर, पहली बार ऐसा सांप देखकर सर्प विशेषज्ञ भी रह गए हैरान


    मध्य प्रदेश:  के छतरपुर जिले में एक दुर्लभ सफेद अजगर दिखाई देने से इलाके में लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के अंतिम दिन सामने आए इस नजारे ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। करीब 8 फीट लंबे इस सफेद अजगर को देखकर लोग हैरान रह गए। इसकी असामान्य रंगत के कारण इसे अल्बिनो अजगर बताया जा रहा है। सांप को देखने के बाद स्थानीय लोगों ने सर्प पकड़ने वाले विशेषज्ञों को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने काफी मशक्कत करते हुए उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया।

    रथयात्रा के समापन से जुड़े आयोजनों के बीच इस दुर्लभ सांप का दिखाई देना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। सफेद रंग और लगभग 8 फीट लंबाई वाले इस अजगर को देखकर मौके पर मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए। सूचना मिलने के बाद सर्प रेस्क्यू टीम ने स्थिति को संभाला और भीड़ के बीच सावधानीपूर्वक अजगर को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की।

    कड़ी मशक्कत के बाद किया गया सुरक्षित रेस्क्यू
    स्थानीय लोगों ने विशालकाय सफेद अजगर को देखने के बाद तुरंत सर्प पकड़ने वाले विशेषज्ञों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। अजगर की लंबाई और आसपास मौजूद लोगों की भीड़ को देखते हुए उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए सावधानी बरती गई। काफी मशक्कत के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे अजगर का रेस्क्यू कर लिया।इस दौरान अजगर के असामान्य सफेद रंग ने लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी। रेस्क्यू करने वाले विशेषज्ञ ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इस तरह का पूरी तरह सफेद अजगर देखा है। उनके लिए भी यह अनुभव असामान्य था। घटना के बाद इलाके में इस दुर्लभ सांप को लेकर चर्चा होने लगी।

    क्या होता है अल्बिनो जीव?

    अल्बिनो ऐसे जीवों को कहा जाता है, जिनके शरीर में मेलेनिन नामक रंगद्रव्य की प्राकृतिक रूप से कमी होती है। मेलेनिन त्वचा, बालों और कई जीवों के शरीर के बाहरी हिस्सों में रंग निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब इसकी मात्रा बहुत कम होती है, तो त्वचा या शरीर का रंग सामान्य से काफी हल्का दिखाई दे सकता है।सांपों में भी रंगद्रव्य की कमी के कारण उनका रंग सामान्य प्रजाति के दूसरे सांपों से अलग नजर आ सकता है। ऐसे जीवों का रंग सफेद या बहुत हल्का दिखाई दे सकता है। हालांकि, केवल रंग के आधार पर किसी जीव को निश्चित रूप से अल्बिनो घोषित नहीं किया जा सकता। छतरपुर में मिले अजगर के अल्बिनो होने की आधिकारिक पुष्टि के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों की जांच जरूरी है। फिलहाल इसे असामान्य सफेद रंग वाला दुर्लभ अजगर बताया जा रहा है।

    सांप दिखाई देने पर क्या करें?
    इस घटना के बाद लोगों से वन्यजीवों के प्रति सावधानी बरतने की अपील की गई है। जंगल, खेत या रिहायशी इलाके के आसपास सांप दिखाई देने पर घबराकर उसके पास जाने या उसे पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांप को छेड़ने, नुकसान पहुंचाने या उसके साथ किसी तरह का प्रयोग करने से इंसानों और वन्यजीवों दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।ऐसी स्थिति में वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना देना उचित है। विशेषज्ञ आवश्यक सावधानियों के साथ सांप को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाते हैं। छतरपुर में मिले सफेद अजगर की घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के संरक्षण और उनके साथ सुरक्षित व्यवहार के महत्व को सामने रखा है।

  • संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी में किसे मिलेगी ओपनिंग की जिम्मेदारी? चेतेश्वर पुजारा ने बताई प्लेइंग-11 की चुनौती

    संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी में किसे मिलेगी ओपनिंग की जिम्मेदारी? चेतेश्वर पुजारा ने बताई प्लेइंग-11 की चुनौती

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग-11 में मौका मिलने का इंतजार करना पड़ सकता है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज से पहले टीम के संयोजन को लेकर चर्चा तेज है। पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का मानना है कि न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में वैभव के लिए अंतिम ग्यारह में जगह बनाना आसान नहीं होगा। उन्होंने इसकी वजह टीम का संतुलन, ऑलराउंडर्स की जरूरत और शीर्ष क्रम में पहले से मौजूद बल्लेबाजों को बताया है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज का आगाज 22 अक्टूबर से क्राइस्टचर्च में होना है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि टीम प्रबंधन वैभव सूर्यवंशी को शुरुआती मुकाबलों में मौका देता है या उन्हें बेंच पर इंतजार करना पड़ता है। युवा बल्लेबाज को लेकर चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि टीम में पहले से ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं, जो ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

    न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में टीम संतुलन अहम

    चेतेश्वर पुजारा के अनुसार, न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में टीम का संतुलन काफी मायने रखेगा। ऐसी परिस्थितियों में टीम को अधिक ऑलराउंडर्स की जरूरत पड़ सकती है, जिससे प्लेइंग-11 में बल्लेबाजों के लिए उपलब्ध जगह सीमित हो जाती है। इसी कारण शीर्ष क्रम में कई बल्लेबाजों को एक साथ शामिल करना टीम प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकता है।

    पुजारा ने संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी के विकल्प पर बात करते हुए कहा कि दोनों में से किसी एक को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनके मुताबिक, न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में दोनों खिलाड़ियों को एक साथ प्लेइंग-11 में शामिल करना मुश्किल नजर आता है। ऐसे में वैभव को अवसर के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि युवा बल्लेबाज को आगे मौके जरूर मिलेंगे।

    अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन पर भरोसा

    टीम में ओपनिंग के विकल्पों को देखते हुए अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कप्तान श्रेयस अय्यर पहले ही इन दोनों बल्लेबाजों की अहमियत का जिक्र कर चुके हैं। दोनों खिलाड़ियों ने टीम के लिए उपयोगी प्रदर्शन किया है और उनकी मौजूदगी शीर्ष क्रम में प्रतिस्पर्धा बढ़ाती है।

    लगातार रन बनाने वाले बल्लेबाजों को टीम से बाहर करना आसान फैसला नहीं होता। यही वजह है कि वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के लिए टीम प्रबंधन को बल्लेबाजी क्रम और अन्य खिलाड़ियों की भूमिकाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। हालांकि, खिलाड़ियों की फिटनेस या टीम की जरूरतों के अनुसार परिस्थितियां बदलने पर वैभव के लिए प्लेइंग-11 में जगह बन सकती है।

    संजू सैमसन की फॉर्म पर पुजारा ने क्या कहा?
    चेतेश्वर पुजारा ने संजू सैमसन के हालिया प्रदर्शन में आए उतार-चढ़ाव पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने संजू का बचाव करते हुए कहा कि टी20 क्रिकेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों से निरंतरता की उम्मीद को लेकर लोगों की धारणा हमेशा सही नहीं होती। इस प्रारूप में प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आना सामान्य बात है।

    पुजारा के मुताबिक, संजू सैमसन को पूरी तरह आउट ऑफ फॉर्म मानना उचित नहीं है। टी20 क्रिकेट में कई बार बल्लेबाज को अपनी लय हासिल करने के लिए एक अच्छी पारी की जरूरत होती है। उनका मानना है कि संजू एक अच्छी पारी खेलकर दोबारा फॉर्म में लौट सकते हैं।

    इस तरह न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज में भारतीय टीम का संयोजन चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। एक ओर संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे स्थापित विकल्प हैं, तो दूसरी ओर वैभव सूर्यवंशी को अवसर मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि टीम प्रबंधन परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किस संयोजन के साथ मैदान पर उतरता है।

  • गुजरात के राजकोट में अहीर गरबा महोत्सव की भव्यता, सोने के आभूषण पहनकर हजारों महिलाओं ने किया पारंपरिक रास-गरबा

    गुजरात के राजकोट में अहीर गरबा महोत्सव की भव्यता, सोने के आभूषण पहनकर हजारों महिलाओं ने किया पारंपरिक रास-गरबा


    नई दिल्ली ।
    गुजरात में शारदीय नवरात्र के दौरान भक्ति, शक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं पारंपरिक गरबा लोगों को आकर्षित कर रहा है, तो कहीं समाज की पुरानी परंपराएं विशेष आयोजनों के माध्यम से जीवंत नजर आ रही हैं। इसी बीच राजकोट में आयोजित अहीर गरबा महोत्सव ने अपने भव्य आयोजन और पारंपरिक अंदाज के कारण लोगों का ध्यान खींचा। यहां 15 हजार से ज्यादा महिलाओं ने करीब 900 किलो सोने के आभूषण पहनकर पारंपरिक रास-गरबा में हिस्सा लिया। इन आभूषणों की अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से भी अधिक बताई गई है।

    सोने के आभूषणों से सजी महिलाओं की बड़ी संख्या और पारंपरिक नृत्य ने गरबा मैदान को विशेष रूप दे दिया। इस आयोजन में महिलाओं ने अपने पारंपरिक परिधानों के साथ सोने के हार, कंगन और अन्य आभूषण पहने। एक साथ बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने अहीर समाज की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक उत्सव की भव्यता को प्रदर्शित किया।

    राजकोट में अहीर गरबा महोत्सव का आयोजन
    राजकोट में अहीर सेना की ओर से अहीर गरबा महोत्सव आयोजित किया गया है। इस महोत्सव में अहीर समाज के भाई-बहन लगातार नौ दिनों तक पारंपरिक अंदाज में गरबा कर रहे हैं। नवरात्र के दौरान अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान को उत्सव के माध्यम से प्रदर्शित करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। इसी वजह से महोत्सव में समाज के लोगों का खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

    आयोजन में पारंपरिक रास-गरबा के साथ अहीर समाज की सांस्कृतिक विरासत को भी प्रमुखता दी गई। नवरात्र के सातवें दिन बड़ी संख्या में महिलाएं अपने पारंपरिक परिधानों और सोने के आभूषणों से सजकर गरबा मैदान में पहुंचीं। इसके बाद सामूहिक रूप से पारंपरिक रास-गरबा किया गया। हजारों महिलाओं की एक साथ भागीदारी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही।

    900 किलो सोने के आभूषणों ने खींचा ध्यान
    इस महोत्सव की सबसे खास बात महिलाओं द्वारा पहने गए सोने के आभूषण रहे। करीब 900 किलो सोने के गहनों की अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों के साथ सोने के हार, कंगन और अन्य आभूषण पहने, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।

    करीब 15 हजार अहीराणियों की एक साथ मौजूदगी ने इस सांस्कृतिक आयोजन को विशेष पहचान दी। आभूषणों की चमक के साथ पारंपरिक वेशभूषा ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस आयोजन में सोने के गहने केवल सजावट का हिस्सा नहीं रहे, बल्कि अहीर समाज की पारंपरिक संस्कृति और उत्सव की विशिष्टता को प्रदर्शित करने का माध्यम भी बने।

    सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना गरबा
    अहीर गरबा महोत्सव में पारंपरिक रास खेलने की शैली भी आकर्षण का केंद्र रही। यहां गरबा केवल नृत्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज की एकता, सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से जुड़े रहने का प्रतीक बनकर सामने आया। नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में समाज के भाई-बहन पारंपरिक तरीके से भाग ले रहे हैं।

    शारदीय नवरात्र के दौरान आयोजित यह महोत्सव गुजरात की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक उत्सवों की विशेषता को सामने लाता है। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी, पारंपरिक परिधान, सोने के आभूषण और सामूहिक रास-गरबा ने राजकोट के इस आयोजन को खास बना दिया।

  • मां दुर्गा की बिंदी के नीचे क्यों बनाई जाती है मकड़ी और उसका जाल? जानिए महामाया, मोह-माया और इस अनोखी परंपरा का धार्मिक रहस्य

    मां दुर्गा की बिंदी के नीचे क्यों बनाई जाती है मकड़ी और उसका जाल? जानिए महामाया, मोह-माया और इस अनोखी परंपरा का धार्मिक रहस्य


    नई दिल्ली ।
    शारदीय नवरात्र का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने के बाद विजयादशमी के दिन देवी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु भावुक मन से मां को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की प्रार्थना करते हैं। इस साल मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन 20 अक्टूबर को किया जाएगा। देश के विभिन्न हिस्सों में इस परंपरा को धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाया जाता है।

    मां दुर्गा की प्रतिमाओं में कई ऐसी विशेषताएं होती हैं, जिनका संबंध धार्मिक मान्यताओं और प्रतीकों से माना जाता है। इन्हीं में से एक है देवी के माथे पर बिंदी के ठीक नीचे दिखाई देने वाली मकड़ी और उसका जाल। कुछ पारंपरिक प्रतिमाओं में नजर आने वाली यह आकृति सामान्य सजावट भर नहीं मानी जाती, बल्कि इसके पीछे एक विशेष धार्मिक अर्थ जुड़ा हुआ है। यह परंपरा डाकर साज से जुड़ी प्रतिमाओं की सजावट में देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकड़ी का जाल देवी की महामाया शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

    महामाया का अर्थ उस दिव्य शक्ति से लगाया जाता है, जो अपनी माया के माध्यम से संसार का संचालन करती है। इस मान्यता में मकड़ी और उसके जाल को जीवन तथा संसार की जटिलताओं को समझाने वाले प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    मकड़ी को महामाया से क्यों जोड़ते हैं?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकड़ी अपने भीतर से जाल बनाती है और फिर उसी जाल के बीच रहती है। इसी उदाहरण के माध्यम से मनुष्य के जीवन को समझने का प्रयास किया जाता है। इंसान भी अपने जीवन में परिवार, रिश्तों, इच्छाओं और जिम्मेदारियों के बीच एक व्यवस्था बनाता है। समय बीतने के साथ वह इन्हीं संबंधों और इच्छाओं में इस तरह उलझ सकता है कि उसके लिए उनसे अलग होकर सोचना मुश्किल हो जाता है।

    मकड़ी के जाल को इसी सांसारिक उलझन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जिस प्रकार मकड़ी जाल का निर्माण करती है, उसी तरह देवी की शक्ति से इस संसार की माया का संचालन होता है। इसलिए मकड़ी और उसके जाल को मां दुर्गा की महामाया शक्ति से जोड़कर देखा जाता है। प्रतिमा में यह प्रतीक मनुष्य को संसार की प्रकृति और मोह-माया के प्रभाव की याद दिलाता है।

    अपने जाल में कभी नहीं फंसती मकड़ी
    मकड़ी से जुड़ी इस धार्मिक व्याख्या का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वह अपना जाल बनाती है, लेकिन सामान्यतः उसमें स्वयं नहीं फंसती। इसी उदाहरण के माध्यम से मनुष्य को मोह-माया से बचने का संदेश दिया जाता है। पैसा, परिवार, रिश्ते और जिम्मेदारियां जीवन के आवश्यक हिस्से हैं, लेकिन इनके प्रति अत्यधिक मोह व्यक्ति को मानसिक रूप से उलझा सकता है।

    इस मान्यता के अनुसार, मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीवन में संतुलन बनाए रखना चाहिए। सांसारिक जिम्मेदारियों को निभाना जरूरी है, लेकिन उनमें इतना नहीं उलझना चाहिए कि व्यक्ति स्वयं को ही भूल जाए। इस प्रकार मकड़ी का प्रतीक जीवन में संतुलन, विवेक और मोह से दूरी बनाए रखने की सीख से जुड़ता है।

    दुर्गा विसर्जन कब और किस मुहूर्त में होगा?
    पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। इस अवधि में विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा और मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन की परंपरा निभाई जाएगी।

    बताए गए शुभ मुहूर्त के अनुसार, 20 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक दुर्गा विसर्जन किया जा सकेगा। इस अवधि में श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार किसी भी समय देवी की प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं। विसर्जन के दौरान भक्त मां दुर्गा को भावपूर्ण विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की कामना करते हैं।

  • सनी देओल के 69वें जन्मदिन पर जानिए अनसुने किस्से, शाहरुख से नाराजगी में फाड़ी जींस, बॉबी को लेकर निर्देशक से हुआ विवाद

    सनी देओल के 69वें जन्मदिन पर जानिए अनसुने किस्से, शाहरुख से नाराजगी में फाड़ी जींस, बॉबी को लेकर निर्देशक से हुआ विवाद

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दमदार अभिनेताओं में शामिल सनी देओल 19 अक्टूबर को अपना 69वां जन्मदिन मना रहे हैं। अभिनेता धर्मेंद्र के बेटे होने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, अभिनय और दमदार संवाद अदायगी के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई। रोमांटिक फिल्म से करियर शुरू करने वाले सनी आगे चलकर एक्शन हीरो के रूप में लोकप्रिय हुए। उनके करियर में कई बड़ी सफलताएं आईं, तो कुछ दौर ऐसे भी रहे, जब उन्हें लगातार असफल फिल्मों का सामना करना पड़ा। उनके जन्मदिन पर उनके करियर, निजी जीवन और फिल्मी दुनिया से जुड़े कुछ चर्चित किस्से फिर चर्चा में हैं।

    सनी देओल का असली नाम अजय सिंह देओल है। उनका जन्म पंजाब के साहनेवाल में हुआ था। परिवार में उन्हें सनी नाम से पुकारा जाता था और फिल्मों में आने के बाद उन्होंने इसी नाम को अपना लिया। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने ब्रिटेन के बर्मिंघम स्थित ओल्ड रिप थिएटर में प्रशिक्षण लिया। एक बातचीत में उन्होंने बताया था कि विदेश जाकर सीखने का एक उद्देश्य यह भी था कि लोग उन्हें धर्मेंद्र के बेटे के बजाय एक सामान्य विद्यार्थी के रूप में देखें। वह स्वभाव से संकोची थे और अभिनय की बुनियादी बातें सीखना चाहते थे। शशि कपूर की मदद से उन्हें वहां दाखिला मिला था।

    1983 में फिल्म ‘बेताब’ से सनी देओल ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इस फिल्म का निर्माण उनके पिता धर्मेंद्र ने किया था और निर्देशन राहुल रवैल ने किया था। फिल्म में अमृता सिंह उनके साथ मुख्य भूमिका में थीं। युवा प्रेम, पारिवारिक बंदिशों और भावनात्मक टकराव पर आधारित इस रोमांटिक ड्रामा को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला। हालांकि, सनी की पहचान बाद में एक्शन फिल्मों से अधिक मजबूत हुई। ‘अर्जुन’, ‘डकैत’, ‘पाप की दुनिया’, ‘यतीम’, ‘वर्दी’, ‘त्रिदेव’ और ‘चालबाज’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक्शन हीरो के रूप में स्थापित करने में भूमिका निभाई।

    सनी देओल के करियर में 1990 में आई ‘घायल’ महत्वपूर्ण साबित हुई। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने बॉक्सर अजय मेहरा का किरदार निभाया था। सनी ने बताया था कि उस समय कई लोग फिल्म के निर्माण के लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि बाजार में रोमांटिक फिल्मों का बोलबाला था और कुछ लोगों को इसमें जरूरत से ज्यादा एक्शन दिखाई देता था। आखिरकार फिल्म के निर्माण की जिम्मेदारी उनके परिवार ने संभाली और धर्मेंद्र निर्माता बने। इसके बाद ‘दामिनी’, ‘घातक’, ‘जिद्दी’ और ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया।

    हालांकि, 2000 के शुरुआती वर्षों में सनी देओल को करियर में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ‘फर्ज’, ‘चैंपियन’ और ‘इंडियन’ जैसी फिल्मों के बावजूद वह लगातार बड़ी सफलताएं हासिल नहीं कर सके। वर्ष 2001 में आई ‘गदर’ ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी, लेकिन इसके बाद भी उनकी सभी फिल्में सफल नहीं रहीं। फिर लगभग 22 साल बाद ‘गदर 2’ रिलीज हुई और ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस सफलता ने उनके करियर की दूसरी पारी को नई मजबूती दी। इसके बाद वह ‘जाट’, ‘बॉर्डर 2’ और ‘बंटवारा 1947’ जैसी परियोजनाओं से जुड़े। उन्होंने ओटीटी पर ‘इक्का’ के जरिए भी कदम रखा। आने वाली फिल्म ‘रामायण’ में वह हनुमान की भूमिका निभाते नजर आएंगे।

    सनी देओल की निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से भी चर्चित रहे हैं। उन्होंने 1984 में लिंडा से शादी की थी, जिन्होंने बाद में पूजा देओल नाम अपनाया। ‘बेताब’ की शूटिंग के दौरान अमृता सिंह उन्हें पसंद करने लगी थीं, लेकिन सनी के शादीशुदा होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दूरी बना ली। सनी यश चोपड़ा की फिल्म ‘मशाल’ में काम करने वाले थे, लेकिन धर्मेंद्र की सलाह पर उन्होंने यह फिल्म नहीं की। डिंपल कपाड़िया के साथ उनकी नजदीकियों को लेकर भी लंबे समय तक चर्चाएं होती रहीं।

    1993 में फिल्म ‘डर’ की शूटिंग के दौरान सनी देओल और शाहरुख खान के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं। सनी अपने किरदार को कमजोर दिखाए जाने और शाहरुख को अधिक महत्व दिए जाने से नाराज बताए गए। एक चर्चित किस्से के अनुसार, सेट पर गुस्से में उन्होंने अपनी जींस तक फाड़ दी थी। दोनों के बीच लंबे समय तक दूरी बनी रही, हालांकि ‘गदर 2’ की रिलीज के बाद रिश्तों में सुधार की चर्चा हुई।

    निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ भी सनी के मतभेद हुए थे। भगत सिंह पर फिल्म बनाने और बॉबी देओल को भूमिका नहीं दिए जाने को लेकर दोनों के बीच विवाद बताया गया। इसके बाद संतोषी ने अजय देवगन के साथ ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ बनाई, जबकि सनी देओल ने अपने भाई बॉबी के साथ ‘23 मार्च 1931: शहीद’ बनाई। दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज हुई थीं। बाद में सनी और संतोषी ने मतभेद भुलाकर ‘बंटवारा 1947’ में साथ काम किया।

    सनी देओल ने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई। अप्रैल 2019 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और गुरदासपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ को हराया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने दोबारा चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई और राजनीति को अपने लिए उपयुक्त क्षेत्र नहीं बताया। इसके बाद उनका ध्यान फिर फिल्मों पर केंद्रित हो गया।

  • बाबर आजम का वर्ल्ड रिकॉर्ड, 141 वनडे पारियों में बनाए 6671 रन; हाशिम अमला को पछाड़ा, विराट कोहली तीसरे नंबर पर

    बाबर आजम का वर्ल्ड रिकॉर्ड, 141 वनडे पारियों में बनाए 6671 रन; हाशिम अमला को पछाड़ा, विराट कोहली तीसरे नंबर पर

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम ने वनडे क्रिकेट में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अपने वनडे करियर की 141 पारियों में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। श्रीलंका के खिलाफ ट्राई सीरीज के पहले मुकाबले में 45 रनों की पारी खेलने के दौरान बाबर ने यह उपलब्धि हासिल की। इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के पूर्व सलामी बल्लेबाज हाशिम अमला को पीछे छोड़ दिया, जबकि भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली इस सूची में तीसरे स्थान पर खिसक गए हैं।

    बाबर आजम ने वनडे क्रिकेट में अब तक 141 पारियों में 6671 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 53.37 का रहा है। उनके नाम इस प्रारूप में 20 शतक और 38 अर्धशतक दर्ज हैं। श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में वह अपना अर्धशतक पूरा नहीं कर सके, लेकिन 45 रनों की पारी ने उनके रिकॉर्ड में एक नया अध्याय जोड़ दिया। इसी मैच के दौरान बाबर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 16000 रन भी पूरे किए। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पाकिस्तान के पांचवें बल्लेबाज बने।

    हाशिम अमला का रिकॉर्ड टूटा

    बाबर आजम से पहले वनडे क्रिकेट की 141 पारियों में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के पूर्व सलामी बल्लेबाज हाशिम अमला के नाम था। अमला ने अपनी शुरुआती 141 वनडे पारियों में 6626 रन बनाए थे। बाबर ने 6671 रन के साथ उन्हें पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया। दोनों बल्लेबाजों के बीच इस सूची में 45 रनों का अंतर है।

    हाशिम अमला अपने वनडे करियर में तेजी से रन बनाने और विभिन्न व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करने के लिए जाने जाते रहे हैं। कई प्रमुख रन संबंधी पड़ावों पर उन्होंने विराट कोहली से भी पहले उपलब्धियां दर्ज की थीं। हालांकि, 141 पारियों के बाद सर्वाधिक रन बनाने के मामले में अब बाबर आजम उनसे आगे निकल गए हैं।

    विराट कोहली तीसरे स्थान पर

    इस सूची में भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने वनडे करियर की शुरुआती 141 पारियों में 6224 रन बनाए थे। बाबर आजम और हाशिम अमला के मुकाबले इस आंकड़े के आधार पर कोहली तीसरे पायदान पर हैं। हालांकि, वनडे क्रिकेट में कुल रनों के मामले में विराट कोहली अब भी दुनिया के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल हैं।

    कोहली ने वनडे क्रिकेट में 305 पारियों में 15109 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 58.78 रहा है। उनके नाम वनडे प्रारूप में 55 शतक दर्ज हैं, जो इस प्रारूप में सबसे अधिक शतकों का रिकॉर्ड है। इस तरह शुरुआती 141 पारियों में रनों की सूची और पूरे वनडे करियर के कुल रनों की सूची में बल्लेबाजों की स्थिति अलग-अलग है।

    141 पारियों के बाद सबसे ज्यादा वनडे रन
    बाबर आजम इस सूची में 6671 रनों के साथ पहले स्थान पर हैं। हाशिम अमला ने 6626 रन बनाकर दूसरा स्थान हासिल किया था, जबकि विराट कोहली की शुरुआती 141 पारियों में 6224 रन रहे। इन आंकड़ों के आधार पर बाबर ने दोनों दिग्गज बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। यह रिकॉर्ड उनके वनडे करियर में लगातार रन बनाने की क्षमता को दर्शाता है।

    पाकिस्तान ने श्रीलंका को 37 रन से हराया
    पाकिस्तान, श्रीलंका और इंग्लैंड के बीच ट्राई सीरीज पाकिस्तान में खेली जा रही है। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में मेजबान पाकिस्तान ने श्रीलंका को 37 रनों से हराकर जीत के साथ शुरुआत की। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 306 रनों का लक्ष्य रखा। टीम की ओर से सलमान आगा ने शानदार शतक लगाया। उन्होंने 90 गेंदों में 10 चौकों और एक छक्के की मदद से 107 रन बनाए। उनके अलावा पाकिस्तान का कोई अन्य बल्लेबाज 50 रनों का आंकड़ा नहीं छू सका।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम 268 रन पर सिमट गई। शाहीन अफरीदी की अगुवाई में पाकिस्तान के गेंदबाजों ने प्रभावी प्रदर्शन किया और टीम को 37 रनों से जीत दिलाई। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने ट्राई सीरीज में अपना अभियान शुरू किया। बाबर आजम की व्यक्तिगत उपलब्धि और टीम की जीत ने इस मुकाबले को पाकिस्तान क्रिकेट के लिए खास बना दिया।

  • टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग से मचा हड़कंप, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी, अभिजीत दीपके बोले- पुलिस असली अपराधियों पर ध्यान दे..

    टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग से मचा हड़कंप, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी, अभिजीत दीपके बोले- पुलिस असली अपराधियों पर ध्यान दे..

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग की घटना के बाद मामला चर्चा में है। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित और हरमन संधू ने लेने का दावा किया है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय असली अपराधियों पर ध्यान देना चाहिए। इस मामले में पुलिस की जांच जारी है।

    दीपके ने अपने बयान में कहा कि छात्रों और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस को वास्तविक अपराधियों के खिलाफ कदम उठाने चाहिए। उनके मुताबिक, जब सरकार और पुलिस की प्राथमिकताएं सही तरीके से तय नहीं होतीं, तो ऐसी परिस्थितियां पैदा होती हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी अपने नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास को हिरासत में लिए जाने का विरोध कर रही है।

    जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग

    यह घटना रविवार शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई। जानकारी के मुताबिक, दो अज्ञात हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ की कार पर चार से पांच राउंड गोलियां चलाईं। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर फिरदौस और वहां से गुजर रहे ऑटो रिक्शा चालक केवल चौहान घायल हो गए। दोनों को गोलीबारी के दौरान चोटें आईं। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा और जांच से जुड़ी गतिविधियां तेज कर दी गईं।

    हमले के तुरंत बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित और हरमन संधू ने कथित तौर पर इसकी जिम्मेदारी ली। उनके नाम से सामने आए संदेश में धमकी दी गई कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में जो लोग उनकी बात नहीं मानेंगे या सलमान खान के साथ काम करेंगे, वे भी निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि, इस मामले में हमले के पीछे की परिस्थितियों और आरोपों की जांच की जा रही है।

    हमलावरों की तलाश में मुंबई पुलिस की 15 टीमें
    घटना के बाद मुंबई पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए 15 टीमें गठित की हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है, ताकि हमलावरों और वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक की पहचान की जा सके। कई स्थानों पर नाकेबंदी की गई है और फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू की है। वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है, जिसमें एक अज्ञात हमलावर को टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलाते देखा जा सकता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार रात अभिनेता से बातचीत कर उनका हाल जाना और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

    अनिल पंडित और हरमन संधू की भूमिका की जांच

    पुलिस के अनुसार, हरियाणा के पानीपत का रहने वाला अनिल पंडित लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़ा शूटर और विदेश में सक्रिय नेटवर्क का संचालक बताया जाता है। उसे लॉरेंस के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई का करीबी भी बताया गया है। हरमन संधू के बारे में जानकारी दी गई है कि वह लंबे समय से विदेश में छिपा हुआ है और गिरोह के शूटरों को निशाने से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने का काम करता है। इस मामले में दोनों के कथित दावों और उनकी भूमिका की जांच महत्वपूर्ण है।

    CJP नेताओं की हिरासत पर भी विवाद
    इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अभिजीत दीपके का आरोप है कि दोनों को जेल में रखने के लिए अनावश्यक देरी की जा रही है और हिरासत जारी रखने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस और राज्य के अधिकारियों पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने होने वाली कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

    सिंह के मुताबिक, लगातार चार दिन तक पेश नहीं होने वाले सरकारी अभियोजक बाद में कार्यवाही में शामिल हुए और कथित धमकी भरे संदेश का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी को धमकी मिली है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और आदेश में उसका विवरण दर्ज होना चाहिए। टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की जांच के बीच यह मामला पुलिस की कार्रवाई, सुरक्षा और कानून के पालन को लेकर अलग-अलग सवालों के कारण चर्चा में बना हुआ है।