Author: bharati

  • बुध अस्त होते ही चमकेगी किस्मत, मिथुन से मीन तक इन राशियों को मिलेंगे आर्थिक लाभ के संकेत

    बुध अस्त होते ही चमकेगी किस्मत, मिथुन से मीन तक इन राशियों को मिलेंगे आर्थिक लाभ के संकेत


    नई दिल्ली। ग्रहों की चाल का ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व माना जाता है। इसी क्रम में ग्रहों के राजकुमार कहे जाने वाले बुध 18 अगस्त 2026 से अस्त अवस्था में जा रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार बुध 18 सितंबर तक अस्त रहेंगे। बुध के अस्त होने की स्थिति तब बनती है जब वह सूर्य के बेहद करीब आ जाते हैं। इस अवधि को सभी राशियों के लिए एक जैसा नहीं माना जाता है। कुछ राशियों को इस दौरान सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है जबकि कुछ जातकों के लिए आर्थिक और करियर से जुड़े मामलों में अच्छे अवसर बनने के संकेत मिल सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध बुद्धि संवाद व्यापार गणना और तर्क क्षमता से जुड़े ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में बुध की स्थिति का प्रभाव कारोबार नौकरी शिक्षा और आर्थिक फैसलों पर देखा जाता है। 18 अगस्त से 18 सितंबर तक की अवधि में चार राशियों के लिए विशेष लाभ के संकेत बताए गए हैं। हालांकि राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित होते हैं और इन्हें निश्चित आर्थिक भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

    मिथुन राशि

    बुध के अस्त होने की अवधि मिथुन राशि के जातकों के लिए कई मामलों में सकारात्मक रह सकती है। संवाद और संपर्क से जुड़े कामों में प्रगति के अवसर बन सकते हैं। कारोबार करने वाले लोगों को अपनी समझदारी और रणनीति के दम पर फायदा मिल सकता है। आय बढ़ाने के नए रास्ते सामने आने की संभावना है। भाई बहनों के साथ रिश्तों में भी सुधार हो सकता है। किसी छोटी यात्रा या नई योजना की तैयारी भविष्य में लाभकारी साबित हो सकती है।

    सिंह राशि

    सिंह राशि वालों के लिए यह अवधि करियर और आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण हो सकती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान नेतृत्व क्षमता का प्रभाव बढ़ सकता है और कार्यक्षेत्र में अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखने का लाभ मिल सकता है। कारोबार में नई योजनाओं पर काम करने का मौका मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि रुका हुआ धन वापस मिलने के संकेत बताए गए हैं। महत्वपूर्ण आर्थिक या व्यावसायिक फैसले लेते समय जल्दबाजी से बचना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों के लिए बुध का अस्त होना आय और लाभ से जुड़े मामलों में नए अवसर लेकर आ सकता है। पुराने निवेश से फायदा मिलने की संभावना जताई गई है। लंबे समय से अटके कामों को पुराने संपर्कों की मदद से आगे बढ़ाया जा सकता है। दोस्तों और सहकर्मियों का सहयोग भी आपके लिए उपयोगी साबित होगा। यदि आप आर्थिक मामलों में सही रणनीति बनाकर आगे बढ़ते हैं तो लाभ की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को भी नए अवसरों पर नजर रखनी चाहिए।

    मीन राशि

    मीन राशि वालों के लिए यह अवधि मेहनत और समझदारी के जरिए बेहतर परिणाम पाने वाली हो सकती है। कामकाज में बनाई गई योजनाओं का फायदा मिल सकता है। प्रतियोगिता से जुड़े मामलों में लगातार मेहनत करने से स्थिति मजबूत हो सकती है। उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी अपनी रणनीति बेहतर करने का अवसर मिलेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दौरान आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। हालांकि किसी भी बड़े निवेश या आर्थिक फैसले में व्यावहारिक सोच और जरूरी जांच पड़ताल को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।

    कुल मिलाकर 18 अगस्त से 18 सितंबर तक बुध के अस्त रहने की अवधि को ज्योतिषीय दृष्टि से इन चार राशियों के लिए अपेक्षाकृत शुभ बताया जा रहा है। मिथुन राशि को आय और संपर्क से लाभ सिंह राशि को रुका धन मिलने के संकेत तुला राशि को पुराने निवेश और नए अवसरों से फायदा तथा मीन राशि को कामकाज और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। फिर भी धन से जुड़े किसी फैसले को केवल राशिफल के आधार पर लेने के बजाय अपनी आर्थिक स्थिति जोखिम और परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    नई दिल्ली ।दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने भारतीय शेयर बाजार के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख जताया है। उनका मानना है कि अगले पांच वर्षों में भारतीय शेयरों से सालाना करीब 15 प्रतिशत रिटर्न मिल सकता है। इस तरह के रिटर्न से लंबी अवधि में निवेशकों का पोर्टफोलियो लगभग दोगुना होने की संभावना बनती है।

    अग्रवाल के अनुमान का आधार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि और कंपनियों की कमाई में संभावित बढ़ोतरी है। उनके मुताबिक आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 7.5 से 8.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जबकि कॉर्पोरेट मुनाफे में लगभग 13 से 14 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में प्रमुख बाजार सूचकांकों के रिटर्न के लिए भी सकारात्मक संभावना बनती है।

    हालांकि उन्होंने निकट अवधि के बाजार को लेकर बहुत तेज बढ़त की उम्मीद नहीं जताई। उनके मुताबिक लगभग दो साल की सुस्ती के बाद भारतीय शेयर बाजार अगले विकास चरण में प्रवेश करने से पहले कुछ समय तक सीमित दायरे में रह सकता है। एक और साल तक बाजार में इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया।

    मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर भी अग्रवाल ने कमाई की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। निफ्टी की कमाई के मुकाबले ऊंचे मूल्यांकन के बीच यदि कंपनियों की कमाई में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो बाजार की वैल्यूएशन अपेक्षाकृत कम हो सकती है। उनका अनुमान है कि इस स्थिति में बाजार में आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी रह सकती है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई के भारत में सीमित रुझान को लेकर अग्रवाल ने वैश्विक बाजारों की स्थिति का उल्लेख किया। उनके मुताबिक अमेरिका के अलावा कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में मजबूत तेजी और कमाई की संभावनाओं के कारण विदेशी निवेशकों का ध्यान वहां अधिक गया है। वैश्विक पूंजी के लिए अमेरिकी बाजार से मुकाबला करना भी भारतीय बाजारों के लिए चुनौती बना हुआ है।

    अग्रवाल ने कहा कि भारत कुछ ऐसे उभरते बाजारों के लिए पूंजी का स्रोत भी बन रहा है, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश रुझान से फायदा मिल रहा है। हालांकि उन्हें एफआईआई की लगातार बिकवाली में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता है तो भारतीय बाजार के लिए यह महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक साबित हो सकता है।

    विदेशी निवेशकों के लिए भारत की कर व्यवस्था पर भी अग्रवाल ने अपनी राय रखी। उन्होंने कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए कुछ हद तक चुनौतीपूर्ण बताया, लेकिन इसे भारत से निवेश कम होने का सबसे बड़ा कारण नहीं माना। उनके अनुसार मुद्रा विनिमय में होने वाला बदलाव विदेशी निवेशकों के लिए अधिक महत्वपूर्ण चिंता हो सकता है।

    विदेशी निवेशक भारत में डॉलर के माध्यम से पूंजी लगाते हैं, जबकि कैपिटल गेन्स की गणना रुपये में होती है। ऐसे में रुपये की कमजोरी के कारण डॉलर में वास्तविक रिटर्न कम होने के बावजूद निवेशक को रुपये में बने लाभ पर कर देना पड़ सकता है। अग्रवाल के अनुसार विदेशी निवेशकों के लिए लंबे समय तक आकर्षक माहौल बनाए रखने के लिए कर व्यवस्था को दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रखना जरूरी है।

    नई पीढ़ी की कंपनियों और स्टार्टअप को लेकर भी अग्रवाल ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उनका कहना है कि किसी कंपनी को सार्वजनिक बाजार में आने से पहले या तो मुनाफे में होना चाहिए या उसके पास मुनाफे तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता होना चाहिए। सार्वजनिक बाजार निवेशक कंपनियों की कमाई और तिमाही प्रदर्शन को काफी महत्व देते हैं।

    जेप्टो में अपने निवेश का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने कहा कि किसी निवेश की सफलता या विफलता का फैसला तुरंत नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक उनके निवेश का अंतिम आकलन 10 साल बाद ही किया जा सकेगा। इससे उनका जोर स्पष्ट होता है कि शेयर बाजार में लंबी अवधि का नजरिया तत्काल उतार-चढ़ाव से अधिक महत्वपूर्ण है।

  • बल्ले और गेंद से जडेजा का ऐतिहासिक कमाल! 350 विकेट पूरे कर रचा नया रिकॉर्ड, दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडर्स में शामिल

    बल्ले और गेंद से जडेजा का ऐतिहासिक कमाल! 350 विकेट पूरे कर रचा नया रिकॉर्ड, दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडर्स में शामिल


    नई दिल्ली। रवींद्र जडेजा ने गॉल टेस्ट में अपने करियर की एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के चुनिंदा महान ऑलराउंडर्स की कतार में खड़ा कर दिया है। श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में 350 विकेट पूरे किए और इसके साथ ही उन्होंने 4000 से ज्यादा रन तथा 350 से ज्यादा विकेट लेने का ऐतिहासिक डबल भी पूरा कर लिया। जडेजा यह कारनामा करने वाले दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं और भारत की ओर से इस खास क्लब में जगह बनाने वाले सिर्फ दूसरे क्रिकेटर हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि महान ऑलराउंडर कपिल देव ने हासिल की थी।

    जडेजा ने गॉल टेस्ट की तीसरी पारी में श्रीलंका के बल्लेबाजों को अपनी स्पिन से परेशान किया और तीन विकेट हासिल किए। उनके 350 विकेट पूरे होते ही टेस्ट क्रिकेट में उनका नाम भारत के उन गेंदबाजों की सूची में शामिल हो गया जिन्होंने इस फॉर्मेट में 350 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं। इससे पहले अनिल कुंबले 619 विकेट के साथ भारत के सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज हैं। रविचंद्रन अश्विन ने 537 विकेट लिए हैं जबकि कपिल देव के नाम 434 और हरभजन सिंह के नाम 417 टेस्ट विकेट हैं। अब जडेजा 351 विकेट के साथ इस प्रतिष्ठित सूची में पांचवें स्थान पर हैं।

    हालांकि जडेजा की उपलब्धि सिर्फ विकेटों तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्ले से भी लगातार अहम योगदान देखने को मिला है। जडेजा के नाम 4000 से ज्यादा टेस्ट रन हैं और यही वजह है कि 350 से अधिक विकेट के साथ 4000 से अधिक रन का डबल उन्हें और खास बनाता है। इस आंकड़े तक पहुंचने वाले दुनिया के खिलाड़ियों में कपिल देव के अलावा इंग्लैंड के इयान बॉथम और न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी भी शामिल हैं। कपिल देव ने टेस्ट में 5248 रन और 434 विकेट लिए। बॉथम के नाम 5200 रन और 383 विकेट हैं जबकि विटोरी ने 4531 रन के साथ 362 विकेट हासिल किए। अब इस क्लब में 4108 रन और 351 विकेट के आंकड़े के साथ जडेजा का नाम भी जुड़ गया है।

    जडेजा ने इस उपलब्धि के साथ टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों की सूची में भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। श्रीलंका के रंगना हेराथ 433 विकेट के साथ इस सूची में सबसे आगे हैं। डेनियल विटोरी के नाम 362 विकेट हैं जबकि जडेजा 351 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच चुके हैं। अब विटोरी को पीछे छोड़ने के लिए जडेजा को केवल 12 और विकेट की जरूरत है। अगर वह यह मुकाम हासिल कर लेते हैं तो टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों में दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे।

    जडेजा की गेंदबाजी की खासियत सिर्फ विकेटों की संख्या नहीं बल्कि उनकी विकेट लेने की क्षमता भी है। कम से कम 125 टेस्ट विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों में जडेजा का स्ट्राइक रेट 58 के आसपास है। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के केशव महाराज उनसे आगे हैं। इससे पता चलता है कि जडेजा लंबे स्पेल में दबाव बनाने के साथ जरूरत पड़ने पर तेजी से विकेट निकालने की क्षमता भी रखते हैं।

    गॉल टेस्ट में श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समाप्त हुई और भारत को 178 रनों की बढ़त मिली। जडेजा ने 21 ओवर में पांच मेडन डालते हुए 57 रन देकर तीन विकेट लिए। मानव सुथार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट अपने नाम किए। उन्होंने 21.4 ओवर में एक मेडन के साथ 76 रन देकर चार विकेट हासिल किए।

    जडेजा की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह सिर्फ गेंदबाज नहीं बल्कि मैच का रुख बदलने वाले ऑलराउंडर हैं। बल्ले से उपयोगी रन बनाने के साथ गेंद से लगातार विकेट निकालना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। कपिल देव के साथ इस ऐतिहासिक क्लब में शामिल होना उनके टेस्ट करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। अलग-अलग दौर और अलग-अलग गेंदबाजी शैली के बावजूद जडेजा और कपिल ने साबित किया है कि टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने वाला ऑलराउंडर टीम के लिए कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।

  • एक कैच छूटा और बदल गया पूरा मैच! डिकवेला-दिनुषा ने श्रीलंका को संकट से निकाला, भारत के सामने नई चुनौती

    एक कैच छूटा और बदल गया पूरा मैच! डिकवेला-दिनुषा ने श्रीलंका को संकट से निकाला, भारत के सामने नई चुनौती


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक टीम इंडिया मजबूत स्थिति में जरूर नजर आई लेकिन मैदान पर हुई एक छोटी सी गलती ने मैच का समीकरण काफी हद तक बदल दिया। भारतीय टीम के पास श्रीलंका को 200 रन के भीतर समेटकर फॉलोऑन देने का शानदार मौका था। श्रीलंका ने एक समय केवल 90 रन पर अपने पांच विकेट गंवा दिए थे और ऐसा लग रहा था कि भारतीय गेंदबाज जल्द ही पूरी पारी समेट देंगे। लेकिन इसके बाद एक कैच छूटना मेजबान टीम के लिए बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

    श्रीलंका की पारी के 36वें ओवर में मानव सुथार ने निरोशन डिकवेला को अपनी गेंद से परेशान किया। फ्लाइटेड गेंद पर डिकवेला के बल्ले का बाहरी किनारा लगा और गेंद स्लिप में खड़े केएल राहुल की तरफ तेजी से गई। राहुल ने दाईं ओर डाइव लगाकर कैच पकड़ने की कोशिश की लेकिन गेंद उनके हाथों से निकल गई। उस समय डिकवेला केवल 20 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे। भारतीय टीम के लिए यह मौका बेहद अहम था क्योंकि श्रीलंका पहले ही दबाव में थी और एक और विकेट गिरने से उसकी पारी जल्दी खत्म हो सकती थी।

    लेकिन कैच छूटने के बाद डिकवेला ने भारतीय गेंदबाजों को जमकर परेशान किया। उन्होंने सोनल दिनुषा के साथ मिलकर श्रीलंका की पारी को संभाल लिया। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 146 रनों की बड़ी साझेदारी की। डिकवेला ने मिले जीवनदान का पूरा फायदा उठाया और 115 गेंदों पर 80 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। वहीं सोनल दिनुषा ने करीब साढ़े चार घंटे तक क्रीज पर टिककर शानदार शतक जमाया और भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया।

    इस साझेदारी ने मैच का पूरा माहौल बदल दिया। जिस श्रीलंकाई टीम के पांच विकेट सिर्फ 90 रन पर गिर चुके थे वह देखते ही देखते 284 रन तक पहुंच गई। भारत को फॉलोऑन देने के लिए श्रीलंका को 263 रन के आंकड़े तक पहुंचने से रोकना जरूरी था लेकिन डिकवेला और दिनुषा की साझेदारी ने भारतीय टीम की यह उम्मीद खत्म कर दी। श्रीलंका ने 284 रन बनाकर खुद को फॉलोऑन की स्थिति से बाहर निकाल लिया।

    भारतीय गेंदबाजों की बात करें तो मानव सुथार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए। रवींद्र जडेजा ने तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा जबकि प्रसिद्ध कृष्णा मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव को एक एक सफलता मिली। भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका के शीर्ष क्रम को लगातार दबाव में रखा लेकिन निचले क्रम में डिकवेला और दिनुषा की साझेदारी ने टीम इंडिया की मेहनत पर पानी फेर दिया।

    श्रीलंका की पहली पारी समाप्त होने के बाद बारिश ने भी खेल में खलल डाला। बारिश शुरू होने के कारण अंपायरों ने समय से पहले तीसरे दिन के खेल को समाप्त करने का फैसला किया। हालांकि भारत के पास अब भी 178 रनों की बढ़त मौजूद है और चौथे दिन टीम इंडिया अपनी दूसरी पारी में इसी बढ़त के साथ आगे बढ़ेगी। भारत के पास मैच पर पकड़ मजबूत करने का मौका अभी भी है लेकिन श्रीलंका को फॉलोऑन से बचने का मौका देने के बाद मुकाबला पहले की तुलना में थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    इस मुकाबले में केएल राहुल के कैच को लेकर भी चर्चा तेज है। अगर डिकवेला का वह कैच पकड़ लिया जाता तो श्रीलंका का स्कोर और पारी का नतीजा पूरी तरह अलग हो सकता था। हालांकि क्रिकेट में एक कैच से मैच खत्म नहीं होता और भारत के पास अभी बढ़त मौजूद है लेकिन टेस्ट क्रिकेट में ऐसे छोटे मौके अक्सर बड़े अंतर में बदल जाते हैं। अब टीम इंडिया की नजर चौथे दिन बल्लेबाजी पर होगी जहां वह बड़ी बढ़त हासिल कर श्रीलंका के सामने मजबूत लक्ष्य रखने की कोशिश करेगी।

    भारतीय टीम के नए फील्डिंग कोच सुभदीप घोष के लिए भी यह दौरा चुनौतीपूर्ण है। टीम इंडिया को आगे ऐसे मौकों को भुनाने पर ध्यान देना होगा क्योंकि लंबे टेस्ट मैचों में एक कैच या एक साझेदारी कई बार पूरे मुकाबले की दिशा बदल देती है। गॉल टेस्ट में अब भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि तीसरे दिन की चूक से सबक लेते हुए चौथे दिन मैच पर अपनी पकड़ और मजबूत की जाए।

  • पानी पीने के बाद भी बार-बार लगती है प्यास तो इन स्वास्थ्य समस्याओं का हो सकता है संकेत, जानें कब सावधान हों

    पानी पीने के बाद भी बार-बार लगती है प्यास तो इन स्वास्थ्य समस्याओं का हो सकता है संकेत, जानें कब सावधान हों

    नई दिल्ली । गर्मी, ज्यादा पसीना आने, शारीरिक मेहनत करने या पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने पर बार-बार प्यास लगना सामान्य स्थिति हो सकती है। हालांकि, अगर पानी पीने के बाद भी प्यास जल्दी बुझती नहीं है और यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे केवल सामान्य प्यास मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार और असामान्य प्यास शरीर में पानी या इलेक्ट्रोलाइट संतुलन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है।

    बार-बार प्यास लगने की सबसे आम वजह डिहाइड्रेशन हो सकती है। तेज गर्मी में रहने, व्यायाम करने या अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है। अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ खाने से भी प्यास बढ़ सकती है। कैफीन युक्त पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में पेशाब बढ़ाकर शरीर के तरल संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

    लगातार अत्यधिक प्यास डायबिटीज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण लक्षण भी हो सकती है। जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक बढ़ जाता है, तो शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में शरीर से अधिक मात्रा में पानी निकल सकता है और व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने के साथ ज्यादा प्यास महसूस हो सकती है। इसके साथ थकान, वजन में बदलाव या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

    किडनी शरीर में पानी, नमक और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किडनी के कामकाज में समस्या होने पर शरीर के तरल संतुलन में बदलाव आ सकता है। हालांकि केवल ज्यादा प्यास लगने के आधार पर किडनी की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यदि इसके साथ पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब में बदलाव या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    बार-बार प्यास लगने की एक अपेक्षाकृत कम सामान्य वजह डायबिटीज इन्सिपिडस भी हो सकती है। यह डायबिटीज मेलिटस से अलग स्थिति है और इसमें शरीर के पानी के संतुलन को नियंत्रित करने वाली हार्मोनल व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके कारण बहुत अधिक मात्रा में पतला पेशाब आ सकता है और उसके बाद अत्यधिक प्यास महसूस हो सकती है।

    कई बार व्यक्ति को वास्तविक रूप से शरीर में पानी की कमी न होने के बावजूद मुंह सूखने के कारण प्यास जैसा महसूस होता है। इसे ड्राई माउथ कहा जाता है। इसमें मुंह और जीभ में सूखापन, चिपचिपापन या होंठों के सूखने जैसी शिकायत हो सकती है। कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, तनाव और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी मुंह सूखने की वजह बन सकती हैं।

    इसलिए केवल प्यास लगने के आधार पर किसी बीमारी की पहचान करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। समस्या लगातार बनी रहे, बहुत ज्यादा पेशाब आए, रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़े, असामान्य कमजोरी महसूस हो या वजन में बिना वजह बदलाव आए तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर रक्त शर्करा, किडनी की कार्यक्षमता, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

    बच्चों और बुजुर्गों में शरीर में पानी की कमी तेजी से गंभीर हो सकती है। अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, भ्रम, बेहोशी या पानी न पी पाने जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता जरूरी हो सकती है। लगातार प्यास को समझने का सबसे सही तरीका इसके साथ मौजूद दूसरे लक्षणों और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को देखना है।

  • ‘आवारापन 2’ की सफलता के बाद इमरान हाशमी की चार बड़ी फिल्में तैयार, एक्शन से हॉरर तक दिखेगा नया अंदाज

    ‘आवारापन 2’ की सफलता के बाद इमरान हाशमी की चार बड़ी फिल्में तैयार, एक्शन से हॉरर तक दिखेगा नया अंदाज

    नई दिल्ली ।इमरान हाशमी इन दिनों अपनी हालिया फिल्म ‘आवारापन 2’ की सफलता को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने के बाद अभिनेता के आने वाले प्रोजेक्ट्स पर भी नजरें टिक गई हैं। एक्शन, स्पाई थ्रिलर और हॉरर जैसे अलग-अलग जॉनर की फिल्मों में इमरान दिखाई देने वाले हैं, जिससे उनके प्रशंसकों के बीच उनकी आगामी फिल्मों को लेकर उत्सुकता बढ़ी है।

    ‘आवारापन 2’ की सफलता के बाद इमरान हाशमी से जुड़ी सबसे चर्चित खबर ‘जन्नत 3’ को लेकर है। इस फ्रैंचाइजी की पहली फिल्म ‘जन्नत’ 2008 में रिलीज हुई थी, जबकि इसका दूसरा भाग ‘जन्नत 2’ 2012 में आया था। दोनों फिल्मों में इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में नजर आए थे और फ्रैंचाइजी को दर्शकों के बीच खास पहचान मिली थी।

    निर्माता विशेष भट्ट ने ‘जन्नत 3’ को लेकर जानकारी दी है कि फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम शुरू हो चुका है। ‘आवारापन 2’ के बाद इस फ्रैंचाइजी की अगली फिल्म की योजना बनाई जा रही है। इमरान हाशमी के पिछले दोनों फिल्मों से जुड़े होने के कारण तीसरे भाग में उनके लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि फिल्म की कहानी, शूटिंग और रिलीज को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

    इमरान की अगली फिल्मों में ‘गनमास्टर G9’ भी अहम है। यह एक्शन रोमांस फिल्म है, जिसमें इमरान हाशमी के साथ जेनेलिया डिसूजा और आपारशक्ति खुराना भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन आदित्य दत्त ने किया है। इसका निर्माण दीपक मुकुट, हुनर मुकुट और संगीता अहीर ने किया है।

    ‘गनमास्टर G9’ की रिलीज डेट भी घोषित की जा चुकी है। फिल्म 27 नवंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इस प्रोजेक्ट के जरिए इमरान एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक्शन से भरपूर भूमिका में दिखाई देंगे। फिल्म की रिलीज को लेकर अभिनेता के प्रशंसकों के बीच खास उत्सुकता है।

    इमरान हाशमी की आगामी फिल्मों में ‘जी 2’ भी शामिल है। यह तेलुगु स्पाई-एक्शन थ्रिलर ‘गुडाचारी’ का सीक्वल है। फिल्म में अदीवि शेष और इमरान हाशमी अहम भूमिकाओं में हैं। कहानी एक हाई-ऑक्टेन इंटरनेशनल मिशन के इर्द-गिर्द आगे बढ़ने वाली है। फिल्म का निर्देशन विनय कुमार सिरिगिनीडी कर रहे हैं। इसकी रिलीज डेट अभी घोषित नहीं की गई है।

    इसके अलावा इमरान हाशमी ‘रूह’ के जरिए हॉरर जॉनर में वापसी करने वाले हैं। इस हाई-कॉन्सेप्ट म्यूजिकल हॉरर फिल्म का निर्देशन मयंक शर्मा कर रहे हैं। फिल्म को हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज किए जाने की योजना है और इसे 2027 में सिनेमाघरों में लाने की तैयारी है।

    इस तरह ‘आवारापन 2’ के बाद इमरान हाशमी के पास अलग-अलग शैलियों की कई फिल्में हैं। एक तरफ ‘जन्नत 3’ जैसी चर्चित फ्रैंचाइजी है, वहीं दूसरी ओर ‘गनमास्टर G9’ और ‘जी 2’ जैसी एक्शन फिल्मों के साथ ‘रूह’ में हॉरर का अलग अनुभव देखने को मिलेगा। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए अभिनेता आने वाले समय में अपनी स्क्रीन इमेज के अलग-अलग पहलुओं को दर्शकों के सामने पेश कर सकते हैं।

  • स्किन केयर रूटीन में शामिल करें एलोवेरा जेल! जानें चेहरे पर लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    स्किन केयर रूटीन में शामिल करें एलोवेरा जेल! जानें चेहरे पर लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । स्किन केयर की बात आती है तो एलोवेरा को लंबे समय से त्वचा के लिए उपयोगी माना जाता है। एलोवेरा जेल अपनी ठंडी और soothing प्रकृति के कारण त्वचा को शांत महसूस कराने में मदद कर सकता है। खासतौर पर गर्मी और धूप के कारण त्वचा में होने वाली जलन या रूखेपन के समय एलोवेरा का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले सावधानी रखना जरूरी है।

    चेहरे की देखभाल के लिए सबसे पहले साफ और ताजा एलोवेरा जेल लिया जा सकता है। यदि पौधे से जेल निकाल रहे हैं तो पत्ते को अच्छी तरह धोकर उसमें मौजूद पीले रंग का लेटेक्स अलग कर दें। इसके बाद पारदर्शी जेल को निकालकर चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। इसे कुछ देर त्वचा पर रहने देने के बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। पहली बार इस्तेमाल करने वालों को पूरे चेहरे पर लगाने के बजाय त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है।

    एलोवेरा जेल त्वचा को नमी देने में मदद कर सकता है। जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है वे अपने स्किन केयर रूटीन में एलोवेरा को शामिल कर सकते हैं। इसे अकेले इस्तेमाल करने के अलावा अपनी त्वचा के अनुसार किसी उपयुक्त moisturizer के साथ भी रूटीन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि एलोवेरा को किसी भी सामग्री के साथ मिलाकर लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह आपकी त्वचा के लिए सुरक्षित है या नहीं।

    धूप में ज्यादा समय बिताने के बाद त्वचा गर्म और संवेदनशील महसूस हो सकती है। ऐसे समय एलोवेरा जेल त्वचा को ठंडक देने वाला एहसास दे सकता है। लेकिन अगर त्वचा पर गंभीर जलन छाले या तेज दर्द हो तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    ऑयली स्किन वाले लोग भी एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि एलोवेरा को मुंहासों का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर चेहरे पर लगातार पिंपल्स निकल रहे हैं तो समस्या के कारण को समझना जरूरी है। बिना सलाह के नींबू बेकिंग सोडा या अन्य तेज सामग्री के साथ एलोवेरा मिलाकर लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा में जलन या irritation बढ़ सकती है।

    एलोवेरा इस्तेमाल करते समय एक और जरूरी बात इसकी शुद्धता है। बाजार में मिलने वाले हर एलोवेरा जेल की गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती। इसलिए उत्पाद खरीदते समय उसके ingredients और इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी जरूर पढ़ें। खुशबू या अन्य additives वाले उत्पाद संवेदनशील त्वचा पर परेशानी पैदा कर सकते हैं।

    स्किन केयर में एलोवेरा को किसी जादुई उपाय की तरह देखने के बजाय एक सामान्य soothing और moisturizing ingredient के रूप में इस्तेमाल करना बेहतर है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और रोजाना उपयुक्त sunscreen का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। अगर एलोवेरा लगाने के बाद लालिमा खुजली या जलन महसूस हो तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।

  • 18 अगस्त 2026 करियर राशिफल: चंद्रमा तुला राशि में, नौकरी और कारोबार में मिलेंगे नए अवसर, धन संबंधी फैसलों में बरतें सावधानी

    18 अगस्त 2026 करियर राशिफल: चंद्रमा तुला राशि में, नौकरी और कारोबार में मिलेंगे नए अवसर, धन संबंधी फैसलों में बरतें सावधानी

    नई दिल्ली । 18 अगस्त 2026 का दिन करियर और आर्थिक मामलों में संतुलन बनाकर चलने का संकेत दे रहा है। तुला राशि में चंद्रमा का प्रभाव बातचीत, साझेदारी और टीमवर्क को मजबूत कर सकता है। वहीं सिंह राशि में सूर्य आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने वाला रहेगा। मिथुन राशि में मंगल सक्रियता बढ़ाएगा, लेकिन जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी होगा। कर्क राशि में बुध और गुरु की स्थिति बचत तथा पारिवारिक वित्तीय योजना पर ध्यान देने का संकेत दे रही है। कन्या राशि वालों को फिजूलखर्ची से बचना होगा, जबकि मीन राशि वालों के लिए धैर्य और अनुशासन महत्वपूर्ण रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज बातचीत के जरिए काम आसान होने के योग हैं। अटका हुआ धन शांतिपूर्वक बातचीत करने से वापस मिलने की संभावना बन सकती है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी लेने का अवसर मिलेगा और सहकर्मियों के साथ नरमी से पेश आना लाभ देगा। वृष राशि वालों को बचत पर ध्यान देना चाहिए। दफ्तर में अनुभवी अधिकारियों से बातचीत अच्छी रह सकती है और आपके काम की सराहना हो सकती है। नौकरी बदलने का विचार है तो जल्दबाजी के बजाय सभी पहलुओं की जांच करें।

    मिथुन राशि के लिए आज बातचीत और संपर्क महत्वपूर्ण रहेंगे। मीटिंग, लेखन और नए लोगों से जुड़ने वाले कामों में सफलता मिल सकती है। हालांकि निवेश या किसी को पैसा देने से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है। कर्क राशि वालों की आर्थिक योजना मजबूत रह सकती है। परिवार और भविष्य से जुड़े खर्चों पर ध्यान रहेगा। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा और लगातार मेहनत का सकारात्मक परिणाम सामने आ सकता है।

    सिंह राशि वालों में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ेगा। कार्यस्थल पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन केवल अपनी बात मनवाने के बजाय दूसरों की राय सुनना बेहतर रहेगा। धन के मामले में दिखावे पर खर्च करने से बचें। कन्या राशि वालों को बजट पर विशेष नजर रखनी होगी। सुख-सुविधाओं से जुड़ी खरीदारी का मन बन सकता है, लेकिन आज बचत करना अधिक उपयोगी रहेगा। कार्यक्षेत्र में छोटी गलतियां पकड़ने की क्षमता मजबूत रहेगी, फिर भी दूसरों की कमियां निकालने के बजाय समाधान पर ध्यान दें।

    तुला राशि वालों के लिए दिन संतुलित फैसलों और टीम के साथ बेहतर तालमेल का रहेगा। पैसों से जुड़े निर्णयों में किसी भरोसेमंद व्यक्ति की सलाह उपयोगी हो सकती है। कार्यस्थल पर मतभेद होने की स्थिति में आपकी समझदारी समस्या को सुलझाने में मदद करेगी। वृश्चिक राशि वालों को अपनी आर्थिक योजनाओं को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। अनावश्यक खर्च से बचें और किसी बड़े वादे से पहले सभी तथ्यों की जांच करें। काम में एकाग्रता बनाए रखने से लाभ होगा।

    धनु राशि वालों के लिए नए विचार कमाई के अवसर खोल सकते हैं, लेकिन हर प्रस्ताव में निवेश करना उचित नहीं होगा। नेटवर्किंग और नए लोगों से संपर्क करियर में मददगार साबित हो सकता है। मकर राशि वालों को पुरानी योजनाओं और जिम्मेदारियों की समीक्षा करनी चाहिए। कोई रुका हुआ काम सुधार के बाद आगे बढ़ सकता है। कुंभ राशि वालों की अलग सोच कार्यक्षेत्र में ध्यान आकर्षित करेगी, लेकिन नए विचारों को लागू करने से पहले बजट और जोखिम की जांच जरूरी है।

    मीन राशि वालों के लिए दिन धैर्य और लगातार प्रयास का संदेश दे रहा है। रुका हुआ आर्थिक मामला धीरे-धीरे सुलझ सकता है। कार्यक्षेत्र में गति अपेक्षाकृत धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन मेहनत बेकार नहीं जाएगी। अपनी कुशलता बढ़ाने और अधूरे काम पूरे करने पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। कुल मिलाकर 18 अगस्त का दिन करियर में संवाद, सहयोग और संतुलन को महत्व देने वाला है। आर्थिक मामलों में भावनात्मक फैसलों से बचकर योजना के अनुसार आगे बढ़ने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहेगी।

  • पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत

    पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत


    इंदौर इंदौर के कनाड़िया इलाके में सोमवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। झलारिया गांव में रहने वाले 37 वर्षीय ड्राइवर सुनील चौहान पर अपनी पत्नी की हत्या करने और इसके बाद दोनों बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप है। घटना के बाद 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह तालाब से बाहर निकलने में सफल रहा। बाहर आने के बाद बच्चे ने वहां से गुजर रही पुलिस की एफआरवी टीम को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर उसे हिरासत में ले लिया।

    पुलिस के अनुसार सुनील अपनी पत्नी अनीता बाई के साथ झलारिया गांव में किराए के मकान में रहता था। सोमवार रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। शुरुआती जांच में पुलिस को दंपती के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक पत्नी के अन्य लोगों से बातचीत करने को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था इसकी पुष्टि विस्तृत जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस का कहना है कि विवाद के बाद आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी पर चाकू से हमला किया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर हिंगोनिया गांव के पास स्थित एक तालाब पर पहुंचा। आरोप है कि उसने दोनों बच्चों को तालाब में फेंक दिया। इस दौरान 8 वर्षीय अजय किसी तरह पानी से बाहर निकल आया और अपनी जान बचाई। इसके बाद उसने आसपास मौजूद लोगों और पुलिस टीम को घटना की जानकारी दी। बच्चे से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

    जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम झलारिया गांव पहुंची लेकिन आरोपी वहां मौजूद नहीं था। पुलिस के मुताबिक वह रात में इलाके से निकलने की तैयारी में था। उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम बनाई गई। इसी दौरान पुलिस को वह आसपास घूमता हुआ मिला और उसे हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पत्नी पर हमला करने और बच्चों को तालाब में ले जाने से जुड़ी जानकारी पुलिस को दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने महिला का शव बरामद किया।

    दूसरी ओर तालाब में बच्ची की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। रात करीब ढाई बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद 10 वर्षीय माही का शव तालाब से बरामद किया गया। शुरुआती तौर पर बच्ची की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

    महिला के शरीर पर भी चाकू के निशान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस गला दबाने के आरोप की भी जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित कर एफएसएल टीम की मदद से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात किस क्रम में हुई और घटना के पीछे आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी।

    पूरे घटनाक्रम के दौरान एसीपी खजराना थाना प्रभारी कनाड़िया सहित पुलिस टीम एफएसएल और एसडीआरएफ के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। मृतका और बच्ची के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी से पूछताछ के साथ घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

    बताया गया है कि सुनील पेशे से ड्राइवर था और कुछ समय पहले ही परिवार के साथ बापू गांधी नगर इलाके से झलारिया में किराए के मकान में रहने आया था। उसके माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य लसूड़िया क्षेत्र के बापू गांधी नगर में रहते हैं। अनीता मूल रूप से देवास जिले के कांटाफोड़ की रहने वाली थी। सुनील का परिवार भी कांटाफोड़ से जुड़ा बताया गया है और करीब 17 से 18 वर्षों से इंदौर में रह रहा है। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए

    बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए


    भोपाल । भोपाल में बारिश के साथ जलभराव की पुरानी समस्या एक बार फिर सामने आ गई है। पिछले साल ट्रैफिक पुलिस ने शहर में जलभराव वाले 35 स्थानों को चिह्नित कर नगर निगम पीडब्ल्यूडी और दूसरी संबंधित एजेंसियों को इनकी सूची भेजी थी। इन जगहों पर जलभराव की वजह तलाशने के साथ जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने 17 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने का दावा किया। कहीं नालों की सफाई और मरम्मत कराई गई तो कहीं सड़क का लेवल ठीक किया गया। कुछ स्थानों पर गड्ढे भरने और सीसी रोड बनाने का काम भी किया गया। लेकिन इस बार बारिश ने इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला दी है।

    बारिश के दौरान जिन जगहों पर सुधार किए जाने की बात कही गई थी उनमें से कई स्थानों पर फिर पानी जमा हो गया। हालात इतने खराब हुए कि कुछ जगहों पर सड़क तक बंद करनी पड़ी। 11 अगस्त को हुई बारिश में भी शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव देखने को मिला था। अब समस्या सिर्फ पुराने स्थानों तक सीमित नहीं रही है। इस मानसून के दौरान शहर में जलभराव के 8 नए स्थान भी सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस इन नए स्पॉट की सूची तैयार कर संबंधित एजेंसियों को भेजने की तैयारी कर रही है।

    इस बार किलोल पार्क डिपो चौराहा आरआरएल से एम्स रोड बाणगंगा रानी कमलापति बंसल प्लाजा वीआईपी रोड पर सेल्फी पार्क से पहले और लालघाटी से बैरागढ़ लेफ्ट टर्न तक के क्षेत्र नए जलभराव वाले स्थान के रूप में सामने आए हैं। इन जगहों पर बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    पुराने जलभराव वाले स्थानों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। गणेश मंदिर तिराहे पर जलभराव रोकने के लिए साइड वर्ज हटाकर पानी की निकासी का रास्ता बनाने की कोशिश की गई थी। इसके बावजूद बारिश के दौरान यहां रास्ता बाधित होने की स्थिति बन गई। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से निकासी व्यवस्था को और बेहतर करने का काम किया जा रहा है।

    ओल्ड केम्पियन तिराहे पर सड़क का लेवल सुधारने के लिए उसे ऊंचा किया गया और सीसी रोड भी बनाई गई। इसके बावजूद बारिश में यहां पानी जमा हो गया। खटलापुरा मंदिर क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए सड़क का समतलीकरण कराया गया था लेकिन बारिश के बाद यहां भी पानी रुकने की समस्या सामने आई। नर्मदापुरम रोड की सर्विस रोड पर गड्ढे भरने सहित कई सुधार कार्य किए गए थे लेकिन बारिश के दौरान यहां भी पानी की निकासी ठीक नहीं रही।

    बैरागढ़ क्षेत्र की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। ईसाइ कब्रिस्तान से सीहोर नाके तक सड़क के दोनों तरफ 150 से अधिक बड़े गड्ढे होने की बात सामने आई है। इन गड्ढों को भरने का दावा भी किया गया था लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया। जलभराव के साथ सड़क पर गड्ढे होने से वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।

    ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि पिछले साल चिह्नित किए गए 35 स्थानों की सूची संबंधित एजेंसियों को दी गई थी और इनमें अधिकांश जगहों पर सुधार कार्य किए गए हैं। इस बारिश में सामने आए 8 नए स्थानों की सूची भी संबंधित विभागों को भेजी जाएगी। वहीं नगर निगम का कहना है कि इन स्थानों पर जलभराव के बजाय जल रुकाव की समस्या है और इसका समाधान किया जा रहा है। विभाग से जुड़े स्थानों पर सुधार कार्य किए जाने की बात भी कही गई है।

    हालांकि लगातार सामने आ रही तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि अगर सुधार कार्य किए जा चुके हैं तो मामूली बारिश में कई स्थानों पर दोबारा पानी क्यों भर रहा है। भोपाल जैसे बड़े शहर में जलभराव सिर्फ यातायात की समस्या नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं से भी जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में नए स्पॉट के साथ पुराने स्थानों की निकासी व्यवस्था की भी दोबारा जांच जरूरी हो गई है ताकि हर बारिश में वही समस्या दोबारा खड़ी न हो।