Author: bharati

  • टीम इंडिया के लिए करो या मरो का मुकाबला, लेकिन बेंगलुरु में बारिश बिगाड़ सकती है खेल, जानें मौसम का ताजा अनुमान

    टीम इंडिया के लिए करो या मरो का मुकाबला, लेकिन बेंगलुरु में बारिश बिगाड़ सकती है खेल, जानें मौसम का ताजा अनुमान


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज का आखिरी मुकाबला शनिवार 17 अक्टूबर को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है। सीरीज 2-2 से बराबर होने के कारण इस मुकाबले का महत्व काफी बढ़ गया है। दोनों टीमें जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करना चाहेंगी लेकिन निर्णायक मैच से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। बेंगलुरु में भारी बारिश की आशंका जताई गई है जिससे मुकाबले में रुकावट आ सकती है। अगर बारिश के कारण मैच प्रभावित होता है तो दोनों टीमों की सीरीज जीतने की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है।
    एक्यूवेदर की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को बेंगलुरु में बारिश होने की 90 प्रतिशत संभावना जताई गई है। खासतौर पर शाम के समय तेज बारिश होने का अनुमान है। मौसम में बदलाव के चलते आसमान में घने बादल छाए रहने की भी संभावना है। ऐसे में मैच शुरू होने से लेकर खेल के दौरान तक बारिश खलल डाल सकती है। क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि पांचवें टी20 से ही सीरीज का अंतिम नतीजा निकलना है। हालांकि मौसम का पूर्वानुमान संभावनाओं पर आधारित होता है और वास्तविक स्थिति में बदलाव भी हो सकता है।
    बारिश की आशंका के बावजूद चिन्नास्वामी स्टेडियम का बेहतर ड्रेनेज सिस्टम उम्मीद की किरण बना हुआ है। मैदान से पानी निकालने और खेल के लिए सतह को जल्द तैयार करने की व्यवस्था अच्छी मानी जाती है। ऐसे में यदि बारिश कुछ समय के लिए रुकती है तो मैदान को दोबारा खेलने लायक बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि लगातार या भारी बारिश होने पर मैच के ओवर कम करने पड़ सकते हैं। मुकाबला कितने समय तक प्रभावित होगा और कितने ओवर का खेल संभव हो पाएगा यह पूरी तरह बारिश की अवधि और मैदान की स्थिति पर निर्भर करेगा।
    सीरीज के चौथे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने दमदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम को 24 रन से हराया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए कैरेबियाई टीम ने 20 ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर 247 रन बनाए थे। कप्तान शाई होप ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन की शतकीय पारी खेली थी। वहीं शेरफेन रदरफोर्ड ने महज 26 गेंदों में 49 रन बनाकर टीम के स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया। भारतीय गेंदबाज इस मुकाबले में विपक्षी बल्लेबाजों को रोकने में नाकाम रहे थे। अर्शदीप सिंह और मयंक यादव ने अपने चार-चार ओवर में 52-52 रन खर्च किए थे।
    248 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने आक्रामक बल्लेबाजी की लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकी। टीम ने 20 ओवर में नौ विकेट गंवाकर 223 रन बनाए। संजू सैमसन ने 23 गेंदों पर 56 रन की तेज पारी खेली जबकि तिलक वर्मा ने 25 गेंदों पर 43 रन बनाए। नीतीश कुमार रेड्डी ने भी 20 गेंदों में 41 रन का योगदान दिया। इसके बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य से 24 रन दूर रह गई। अब आखिरी मुकाबले में टीम इंडिया पिछली हार का बदला लेकर सीरीज जीतना चाहेगी।
    इस निर्णायक मुकाबले में मौसम की भूमिका बेहद अहम हो सकती है। यदि बारिश के कारण मैच पूरा नहीं हो पाता तो सीरीज का फैसला प्रभावित हो सकता है। वहीं खेल होने की स्थिति में दोनों टीमों के बल्लेबाजों और गेंदबाजों पर दबाव रहेगा। भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के बड़े स्कोर बनाने की क्षमता पर अंकुश लगाना होगा जबकि कैरेबियाई टीम पिछली जीत के आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेगी। अब सभी की निगाहें बेंगलुरु के मौसम और मैच की शुरुआत पर टिकी हैं।

  • 26/11 आतंकी हमले के दोषी कसाब ने अदालत में क्यों लिया बॉलीवुड फिल्मों का नाम, उज्ज्वल निकम ने सुनाया मुकदमे से जुड़ा चौंकाने वाला किस्सा

    26/11 आतंकी हमले के दोषी कसाब ने अदालत में क्यों लिया बॉलीवुड फिल्मों का नाम, उज्ज्वल निकम ने सुनाया मुकदमे से जुड़ा चौंकाने वाला किस्सा


    नई दिल्ली । वर्ष 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले और उससे जुड़े मुकदमे को लेकर विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कई अहम घटनाओं का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि हमले के दोषी अजमल कसाब ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार करने के बावजूद अपनी भूमिका को सीमित बताने की कोशिश की थी। कसाब ने दावा किया था कि वह मुंबई बॉलीवुड फिल्में देखने के शौक के कारण आया था। निकम के मुताबिक, आरोपी ने हत्याओं की जिम्मेदारी अपने साथी अबू इस्माइल पर डालने का प्रयास भी किया था।

    निकम ने बताया कि कसाब ने अदालत में कहा था कि वह मुंबई आया जरूर था, लेकिन लोगों की हत्या उसने नहीं की। उसके अनुसार, उसके साथ मौजूद अबू इस्माइल ने हत्याएं की थीं। उसने बॉलीवुड फिल्मों के प्रति अपने शौक को भी मुंबई आने की वजह बताया। निकम ने कसाब की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और उसके खिलाफ उपलब्ध सबूत अदालत में पेश करने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि आरोपी अपनी पूरी भूमिका स्वीकार नहीं कर रहा था और केवल अपने बयान के आधार पर उसे जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जा सकता था।

    कसाब से जुड़ा यह दावा पहले भी चर्चा में आया था। निकम ने एक अन्य कार्यक्रम में बताया था कि कसाब ने हिंदी फिल्मों का प्रशंसक होने और अमिताभ बच्चन के घर जाने की इच्छा का भी उल्लेख किया था। हालांकि, मुकदमे के दौरान उसके खिलाफ पेश किए गए सबूतों और घटनाओं के क्रम ने मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    निकम ने 26/11 हमले के दौरान ताज महल पैलेस होटल में आतंकवादियों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, फोन पर हुई बातचीत को पकड़े जाने से जांचकर्ताओं को हमले के दौरान आतंकवादियों की गतिविधियों और उन्हें दिए जा रहे निर्देशों को समझने में मदद मिली। इस बातचीत को अभियोजन पक्ष ने सबूत के रूप में इस्तेमाल किया था।

    उन्होंने होटल में बंधक बनाए गए लोगों से जुड़ी एक घटना का उदाहरण दिया। निकम के मुताबिक, आतंकवादियों ने अपने हैंडलर्स को बताया था कि उनके कब्जे में तीन लोग हैं। इनमें एक क्लर्क, एक वेटर और एक शिक्षक बताया गया था। इसके बाद हैंडलर ने कथित शिक्षक से उसके स्कूल के बारे में पूछताछ करने और बंधकों के कपड़े उतरवाकर उन्हें केवल अंडरवियर में रखने का निर्देश दिया।

    निकम ने बताया कि हैंडलर को उस व्यक्ति के शिक्षक होने के दावे पर संदेह था। उसने हमलावर को उससे पूछताछ करने और मारपीट करने के लिए कहा। इसके बाद बंधक व्यक्ति ने अपनी वास्तविक पहचान बैंक के चेयरमैन के रूप में बताई। निकम के अनुसार, बाद में उन्होंने उस बैंक चेयरमैन का बयान दर्ज किया, लेकिन अदालत में गवाही देने के समय वह काफी डरे हुए थे।

    निकम ने बताया कि गवाह को भरोसा दिलाया गया कि उसके बयान के समर्थन में आतंकवादियों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है। उन्होंने गवाही देने की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि संबंधित व्यक्ति ने कोई गलत काम नहीं किया था और उसकी गवाही मामले में महत्वपूर्ण हो सकती थी।

    इसी कानूनी लड़ाई और निकम के पेशेवर जीवन को फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ में दिखाया गया है। फिल्म में राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की भूमिका निभाई है, जबकि ललित प्रभाकर अजमल कसाब के किरदार में हैं। अविनाश अरुण ने फिल्म का निर्देशन किया है और वामिका गब्बी निकम की पत्नी ज्योति की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में उस मुकदमे और कानूनी संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है, जिसने निकम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

    नवंबर 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों में 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। कसाब इस हमले में पकड़ा गया एकमात्र जीवित आतंकवादी था। मुकदमे में दोषी ठहराए जाने के बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई, जिसे वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। यह मामला भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मुकदमों में शामिल रहा है।

  • भारत-वेस्टइंडीज सीरीज 2-2 से बराबर, चिन्नास्वामी में होगा आखिरी मुकाबला, क्या टीम इंडिया पलटेगी बाजी?

    भारत-वेस्टइंडीज सीरीज 2-2 से बराबर, चिन्नास्वामी में होगा आखिरी मुकाबला, क्या टीम इंडिया पलटेगी बाजी?


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज का रोमांच निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार 17 अक्टूबर को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम में दोनों टीमें पांचवें और आखिरी मुकाबले में आमने-सामने होंगी। सीरीज फिलहाल 2-2 से बराबर है और ऐसे में दोनों टीमों के पास सीरीज अपने नाम करने का मौका है। भारतीय टीम घरेलू मैदान पर जीत दर्ज कर सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी जबकि वेस्टइंडीज की नजर पिछले मुकाबले में मिली शानदार जीत के प्रदर्शन को दोहराने पर होगी। इस अहम मुकाबले से पहले चिन्नास्वामी स्टेडियम में भारतीय टीम के टी20 इंटरनेशनल रिकॉर्ड की भी चर्चा हो रही है।
    बेंगलुरु के इस मैदान पर भारतीय टीम अब तक आठ टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुकी है। इनमें से चार मैचों में टीम इंडिया को जीत मिली है जबकि तीन मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है। एक मैच का कोई नतीजा नहीं निकल सका। आंकड़ों के मुताबिक इस मैदान पर भारतीय टीम का जीत का प्रतिशत 50 रहा है। हालांकि क्रिकेट के छोटे प्रारूप में पुराने रिकॉर्ड से ज्यादा मौजूदा फॉर्म और दबाव में प्रदर्शन मायने रखता है। पांचवें टी20 में भारतीय खिलाड़ियों को बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में बेहतर तालमेल दिखाना होगा ताकि निर्णायक मुकाबले में जीत हासिल की जा सके।
    चिन्नास्वामी स्टेडियम में भारतीय टीम ने अपना पिछला टी20 इंटरनेशनल मुकाबला वर्ष 2024 में अफगानिस्तान के खिलाफ खेला था। यह मैच बेहद रोमांचक रहा था और इसका फैसला निकालने के लिए दो सुपर ओवर खेलने पड़े थे। आखिरकार भारतीय टीम ने मुकाबला अपने नाम किया था। उस मैच ने दिखाया था कि बेंगलुरु के मैदान पर दर्शकों को आखिरी गेंद तक रोमांच देखने को मिल सकता है। अब भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले निर्णायक मुकाबले में भी प्रशंसकों को बड़े स्कोर और कड़े संघर्ष की उम्मीद है।
    सीरीज के चौथे टी20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारत को 24 रन से हराया था। पहले बल्लेबाजी करने उतरी कैरेबियाई टीम ने निर्धारित 20 ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर 247 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। कप्तान शाई होप ने बेहतरीन शतकीय पारी खेलते हुए 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। वेस्टइंडीज के अन्य बल्लेबाजों ने भी तेजी से रन बनाए और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने संघर्ष जरूर किया लेकिन निर्धारित 20 ओवर में नौ विकेट खोकर 223 रन ही बना सकी।
    भारत की ओर से संजू सैमसन ने सर्वाधिक 56 रन बनाए। तिलक वर्मा ने 43 जबकि नीतीश कुमार रेड्डी ने 41 रन का योगदान दिया। हालांकि इन पारियों के बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। वेस्टइंडीज के गेंदबाज कीमो पॉल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार ओवर में 41 रन देकर पांच विकेट झटके। उनकी गेंदबाजी ने भारतीय पारी को बड़ा झटका दिया और मुकाबले का रुख कैरेबियाई टीम की ओर मोड़ दिया।
    अब पांचवें टी20 में भारतीय टीम के सामने पिछली हार से उबरने और सीरीज जीतने की चुनौती होगी। वेस्टइंडीज की टीम भी पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेगी। कैरेबियाई टीम ने आखिरी बार 2023 में भारत के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज 3-2 से जीती थी। ऐसे में भारतीय टीम के पास घरेलू मैदान पर सीरीज अपने नाम करने का मौका है। चिन्नास्वामी में बल्लेबाजों के प्रदर्शन के साथ गेंदबाजों की भूमिका भी निर्णायक साबित हो सकती है। दोनों टीमों के बीच होने वाला यह मुकाबला तय करेगा कि सीरीज की ट्रॉफी किसके हाथ लगेगी।
  • रामायण की नई झलक में सीता की तलवारबाजी, मिथिला में शस्त्र विद्या और रावण के शिव तांडव के अनदेखे दृश्य आए सामने

    रामायण की नई झलक में सीता की तलवारबाजी, मिथिला में शस्त्र विद्या और रावण के शिव तांडव के अनदेखे दृश्य आए सामने


    नई दिल्ली । फिल्म रामायण की नई झलक में इस बार माता सीता के ऐसे रूप को दिखाया गया है, जो पहले सामने आए दृश्यों से अलग है। नए वीडियो में सीता को युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते और मिथिला में छोटी बच्चियों को शस्त्र विद्या सिखाते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही भगवान राम के युद्ध से जुड़े दृश्य, रावण का शिव तांडव और कुबेर की नगरी में उसके युद्ध की झलक भी दिखाई गई है। फिल्म से जुड़े इन नए दृश्यों ने इसकी कहानी, भव्यता और पात्रों के अलग-अलग रूपों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।

    नई झलक में फिल्म के कुछ ऐसे दृश्य भी शामिल किए गए हैं, जो इससे पहले जारी किए गए ट्रेलर में देखने को नहीं मिले थे। इनमें माता सीता की युद्ध में भागीदारी का दृश्य खास है। कहानी के अनुसार, 14 हजार राक्षसों के साथ भगवान राम के युद्ध का उल्लेख मिलता है और नई झलक में सीता के भी इस संघर्ष से जुड़े होने की तस्वीर दिखाई गई है। इसके अलावा मिथिला में छोटी बच्चियों को शस्त्र विद्या सिखाती सीता का दृश्य उनके व्यक्तित्व के एक अलग पक्ष को सामने लाता है।

    वीडियो में भगवान राम से जुड़े कुछ नए दृश्य भी देखने को मिलते हैं। फिल्म के पहले टीजर में दिखाए गए एक राक्षस के रूप को लेकर दर्शकों की ओर से सवाल उठाए गए थे। नई झलक में उस दृश्य को बदले हुए रूप में पेश किया गया है। इसके साथ ही रावण के युद्ध और भगवान शिव के प्रति उसकी भक्ति को दर्शाने वाले शिव तांडव के दृश्य भी शामिल किए गए हैं। इन झलकियों में युद्ध, भक्ति और पौराणिक कथा से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को दिखाने की कोशिश की गई है।
    वीडियो में फिल्म के प्रमुख कलाकार रणबीर कपूर, निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी भी नजर आते हैं। तीनों फिल्म की कहानी, उसके वैश्विक स्तर और निर्माण से जुड़े अपने विचार साझा करते हैं। रणबीर कपूर का कहना है कि रामायण की कहानी को अधिक से अधिक सही और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इस कथा को दर्शकों तक पहुंचाने में उसकी मूल भावना और प्रस्तुति की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है।

    निर्माता नमित मल्होत्रा ने रामायण की कहानी को ऐसी कथा बताया, जिसमें इसे भव्य बनाने वाले कई तत्व मौजूद हैं और जो अलग-अलग तरह के दर्शकों से जुड़ सकती है। निर्देशक नितेश तिवारी भी इस विचार से सहमत दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि रामायण की कहानी दुनिया के हर हिस्से के लोगों से जुड़ने की क्षमता रखती है। इसमें पिता और पुत्र के प्रेम, एक सुंदर प्रेम कहानी और विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने वाले पात्र की कथा जैसे पहलू शामिल हैं।

    इस परियोजना के निर्माण के बारे में बात करते हुए नमित मल्होत्रा ने बताया कि जब उन्हें रामायण बनाने का अवसर मिला, तो उन्हें लगा कि इस कहानी को बड़े स्तर पर पर्दे पर लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ फिल्में केवल योजना बनाकर नहीं बनाई जातीं, बल्कि परिस्थितियां उन्हें आकार देती हैं। रणबीर कपूर ने भी नमित के प्रयासों की सराहना की। उनके अनुसार, निर्माता ने भारतीय फिल्म उद्योग में बड़े स्तर की तकनीक, संसाधनों और प्रतिभाओं को साथ लाने का काम किया है।

    नमित मल्होत्रा के मुताबिक, फिल्म के निर्माण में दुनियाभर के करीब 10 हजार लोग काम कर रहे हैं। नितेश तिवारी ने बड़े स्तर पर फिल्म बनाने की क्षमता को लेकर नमित की कंपनी डीएनईजी पर भरोसा जताया। नमित ने यह भी बताया कि उन्होंने करीब 30 साल पहले अपनी कंपनी की शुरुआत एक गैरेज से की थी। आठ बार ऑस्कर जीतने के बाद वह रामायण जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने के अवसर का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने फिल्म से जुड़े विभिन्न प्रतिभाशाली लोगों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    फिल्म रामायण को दुनियाभर में 5 नवंबर को रिलीज करने की तैयारी है। नई झलक में सीता के युद्ध कौशल, राम के संघर्ष और रावण की भक्ति से जुड़े दृश्यों को शामिल करके कहानी के कई पहलुओं की झलक दिखाई गई है। अब दर्शकों की नजर फिल्म की रिलीज पर है, जहां इन पात्रों और घटनाओं को बड़े पर्दे पर विस्तार से देखने का अवसर मिलेगा।

  • 27% OBC आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति, कांग्रेस ने उठाए कानूनी पैरवी पर सवाल, भाजपा ने पुराने फैसले को ठहराया जिम्मेदार

    27% OBC आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति, कांग्रेस ने उठाए कानूनी पैरवी पर सवाल, भाजपा ने पुराने फैसले को ठहराया जिम्मेदार


    जबलपुर। मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। आरक्षण को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने राज्य सरकार की कानूनी पैरवी पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाईकोर्ट में आरक्षण के समर्थन में जरूरी आंकड़े और तथ्य मजबूती से पेश नहीं किए गए। वहीं प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने ओबीसी आरक्षण के मामले में लोगों के साथ धोखा किया। दोनों नेताओं के बयानों के बाद प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।
    शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर जबलपुर पहुंचे विवेक तन्खा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अध्यादेश के माध्यम से ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। हालांकि बाद में सरकार बदल गई और भाजपा सत्ता में आ गई। ऐसे में अध्यादेश और आरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों का बचाव करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी। तन्खा के मुताबिक किसी भी आरक्षण व्यवस्था को अदालत में मजबूती से साबित करने के लिए केवल राजनीतिक दावे पर्याप्त नहीं होते बल्कि उसके समर्थन में ठोस तथ्य और आंकड़े प्रस्तुत करना भी जरूरी है।
    तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि नौ न्यायाधीशों की पीठ ने सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत रखने का सिद्धांत स्थापित किया था। इससे अधिक आरक्षण देने के लिए असाधारण परिस्थितियों को प्रमाणित करना आवश्यक होता है। इसके लिए सरकार को मात्रात्मक आंकड़े यानी क्वांटिफायबल डेटा प्रस्तुत करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार जरूरी आंकड़े प्रभावी ढंग से पेश नहीं कर पाई। यदि पर्याप्त तथ्य और आंकड़े अदालत के सामने रखे जाते तो संभव है कि मामले में अलग परिणाम सामने आता।
    वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि अब राज्य सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने का विकल्प मौजूद है। यदि सरकार ने विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी दायर की है तो यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। उनके अनुसार आरक्षण के पक्ष में कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को ठोस तथ्यों के साथ अदालत में पैरवी करनी चाहिए। तन्खा ने यह भी कहा कि अध्यादेश का बचाव करने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की होती है क्योंकि संबंधित विभागों के पास ही जरूरी आंकड़े और प्रशासनिक जानकारी उपलब्ध रहती है। राजनीतिक दल इस कानूनी प्रक्रिया में अपना पक्ष रख सकते हैं और सहयोग कर सकते हैं लेकिन सरकार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
    दूसरी ओर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आरक्षण के मामले में जल्दबाजी की और पर्याप्त तैयारी के बिना विधेयक लाया। मंत्री के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश में विधेयक से जुड़ी कमियों का उल्लेख किया गया है और इसी वजह से मौजूदा स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी वर्गों के साथ न्याय हो और आरक्षण से जुड़े मामले का कानूनी समाधान निकाला जाए।
    ओबीसी आरक्षण को लेकर दोनों पक्षों के बयानों से साफ है कि यह मुद्दा आने वाले समय में भी प्रदेश की राजनीति में अहम बना रहेगा। एक तरफ कांग्रेस सरकार की कानूनी पैरवी और आंकड़ों को लेकर सवाल उठा रही है तो दूसरी तरफ भाजपा आरक्षण से जुड़े पुराने फैसलों और विधायी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगे की कानूनी कार्रवाई पर रहेगी। अदालत में पेश किए जाने वाले तथ्य और आंकड़े ही इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • स्कूल में छात्र बनकर पहुंचे कमिश्नर धनंजय सिंह, पढ़ाई में मिली लापरवाही, कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

    स्कूल में छात्र बनकर पहुंचे कमिश्नर धनंजय सिंह, पढ़ाई में मिली लापरवाही, कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में प्रशासनिक व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए संभागायुक्त धनंजय सिंह ने शुक्रवार को अचानक मझौली तहसील का दौरा किया। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत किए गए इस निरीक्षण में उन्होंने स्कूल से लेकर स्वास्थ्य केंद्र और आंगनवाड़ी तक विभिन्न सरकारी संस्थाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सबसे ज्यादा चर्चा पौंडा गांव के शासकीय स्कूल के निरीक्षण की रही जहां कमिश्नर खुद छात्र बनकर बेंच पर बैठ गए और शिक्षकों से पढ़ाई की स्थिति जानी। जब उन्हें अध्यापन का स्तर अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिला तो उन्होंने शिक्षकों को फटकार लगाई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कई अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार की जरूरत सामने आई।
    पौंडा गांव के शासकीय स्कूल में संभागायुक्त ने विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई और रोजाना होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि बच्चों को कक्षा में किस तरह पढ़ाया जाता है और उनके भविष्य को लेकर करियर काउंसलिंग की क्या व्यवस्था है। निरीक्षण के दौरान अध्यापन कार्य संतोषजनक नहीं मिलने पर उन्होंने शिक्षकों को अपनी कार्यशैली सुधारने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी यानी बीईओ और विकासखंड स्रोत समन्वयक यानी बीआरसी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा। इस निरीक्षण का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को परखना था।
    इसके बाद संभागायुक्त ने पौंडा स्थित सहकारी संस्था का निरीक्षण किया और खाद वितरण की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों को खाद की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया की स्थिति जानने के साथ संयुक्त आयुक्त सहकारिता को वितरण का सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। खाद वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
    स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जानने के लिए धनंजय सिंह ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने चिकित्सकीय स्टाफ और मरीजों से बातचीत कर उपचार की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने आवश्यक दवाओं की उपलब्धता एएनसी पंजीयन और मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण की स्थिति की समीक्षा की। इसके अलावा ओपीडी पंजी का निरीक्षण कर टीकाकरण जननी सुरक्षा योजना और प्रसूति सहायता योजना से जुड़े मामलों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाओं को निर्देश दिए कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले और जरूरी दवाओं की उपलब्धता लगातार बनी रहे। गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया।
    संभागायुक्त ने आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचकर बच्चों के पोषण वजन खेलकूद और शैक्षणिक गतिविधियों का जायजा लिया। केंद्र के संचालन की पर्याप्त निगरानी नहीं होने पर उन्होंने संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी यानी सीडीपीओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने गौशाला का निरीक्षण कर संचालकों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जल जीवन मिशन के तहत गांव में चल रही एकल नलजल योजना की भी समीक्षा की गई। काम समयसीमा में पूरा नहीं होने और उचित मॉनिटरिंग की कमी के मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यंत्री के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
    दौरे के दौरान संभागायुक्त ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर पेयजल खाद और राशन की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को जनहित से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। इस निरीक्षण के जरिए प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी संस्थाओं में लापरवाही और निगरानी की कमी को गंभीरता से लिया जाएगा। अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि वे कमियों को दूर करें और शिक्षा स्वास्थ्य पोषण तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाएं।
  • ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा

    ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा


    ग्वालियर। ग्वालियर में बदहाल सड़कों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए नगर निगम ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। शहर के प्रमुख मार्गों का निर्माण और चौड़ीकरण करने के लिए 108 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत कुल 28 सड़कों को विकसित करने की तैयारी है। हालांकि शहर में सड़क सुधार की नई योजना के बीच निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कई इलाकों में सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं तो कुछ स्थानों पर निर्माण के बाद सड़कें दोबारा धंसने की शिकायतें सामने आई हैं। सड़क सुधार का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद अब नगर निगम की कार्ययोजना और उसके क्रियान्वयन पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
    नगर निगम की प्रस्तावित योजना में शहर के कई महत्वपूर्ण मार्गों को शामिल किया गया है। इनमें एजी ऑफिस से सिल्वर एस्टेट तक का मार्ग होटल सनबीम से मानसिंह चौराहे तक की सड़क टाइगर चौक से दाने बाबा चौराहा भिंड रोड से सेंट्रल एकेडमी हजीरा चौराहे से बिरला नगर पुल और चार शहर का नाका लधेड़ी से जलालपुर तथा कम्पू थाना से गुड़ी-गुड़ी का नाका तक के मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा माधोगंज थाना से हेमसिंह की परेड और महाराज बाड़ा से गश्त का ताजिया तक की सड़क का भी विकास किया जाना है। सहायक नगर निवेशक अमित गुप्ता के अनुसार नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के प्रयासों से प्रदेश सरकार की द्वारका योजना के तहत इन मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार की गई है। योजना का उद्देश्य शहर में आवागमन को बेहतर बनाना और लोगों को खराब सड़कों से राहत दिलाना है।
    शहर में सड़क निर्माण की जरूरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गोले का मंदिर चेतकपुरी शताब्दीपुरम और दीनदयाल नगर जैसे इलाकों में लोग लंबे समय से सड़क संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है वहीं वाहनों के गुजरने से उड़ने वाली धूल राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाती है। सिटी सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्र की सड़कें भी इन समस्याओं से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। सड़क बनने के कुछ समय बाद ही उसके धंसने की शिकायतें निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के बीच सड़कों की जिम्मेदारी को लेकर भी खींचतान की स्थिति सामने आती रही है।
    ग्वालियर में इससे पहले भी धूल से राहत दिलाने के लिए डस्ट फ्री रोड योजना घोषित की गई थी। इस योजना के तहत करीब 40 किलोमीटर लंबाई की 18 सड़कों को धूल मुक्त बनाने के साथ पानी का छिड़काव करने और एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि इस योजना के परिणामों को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में नई सड़क विकास योजना को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। वहीं फूलबाग से गिरवाई तक प्रस्तावित 926 करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना के निर्माण से भी शहर में धूल बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं।
    अब नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नई सड़कें बनाना नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। सड़क निर्माण में मानकों का पालन समय पर मरम्मत और काम की नियमित निगरानी जरूरी होगी। यदि नई सड़कें कुछ ही समय में खराब होने लगती हैं तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को स्थायी राहत नहीं मिल पाएगी। शहरवासियों को उम्मीद है कि 108 करोड़ रुपये की इस कार्ययोजना से आवागमन सुगम होगा और गड्ढों तथा धूल की समस्या कम होगी। अब देखना होगा कि योजना जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और ग्वालियर की सड़कों की स्थिति में वास्तव में कितना सुधार आता है।

  • ग्वालियर में बादलों का डेरा, सुबह हुई बूंदाबांदी, अगले दो दिन बारिश और तेज हवाओं से बदलेगा मौसम

    ग्वालियर में बादलों का डेरा, सुबह हुई बूंदाबांदी, अगले दो दिन बारिश और तेज हवाओं से बदलेगा मौसम


    ग्वालियर। ग्वालियर में शनिवार सुबह मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच हुई हल्की बूंदाबांदी ने वातावरण में ठंडक घोल दी। पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और गर्मी का सामना कर रहे लोगों को सुबह के समय राहत महसूस हुई। ठंडी हवाओं और बढ़ी हुई नमी के कारण मौसम सुहावना बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 48 घंटों के दौरान ग्वालियर और आसपास के इलाकों में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में अगले दो दिन शहर के मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
    शनिवार सुबह दर्ज किए गए मौसम के आंकड़ों के मुताबिक ग्वालियर का न्यूनतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक था। सुबह 5:30 बजे तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि सुबह 8:30 बजे यह बढ़कर 23.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 93 प्रतिशत रही जो सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक थी। वातावरण में नमी बढ़ने और बादल छाए रहने के कारण सुबह मौसम में ठंडक महसूस हुई। इस दौरान शहर में 0.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
    पिछले कुछ दिनों के तापमान पर नजर डालें तो ग्वालियर में मौसम लगातार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मानसून की विदाई के बाद शहर में तेज धूप के कारण अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा था। इससे लोगों को दिन के समय गर्मी का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि पिछले दो दिनों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 34.7 डिग्री सेल्सियस था जबकि शुक्रवार को यह घटकर 30.3 डिग्री सेल्सियस रह गया। यानी एक ही दिन में अधिकतम तापमान में 4.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। इस बदलाव के बाद शनिवार सुबह हुई बूंदाबांदी ने मौसम में ठंडक बढ़ने के संकेत दिए।
    मौसम में आए इस बदलाव के पीछे बादलों की सक्रियता और हवाओं की दिशा में परिवर्तन को प्रमुख वजह माना जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसमी गतिविधियां बनी हुई हैं। इसका असर ग्वालियर चंबल संभाग के मौसम पर भी दिखाई दे रहा है। बादलों की आवाजाही के कारण धूप का असर कम हो रहा है और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की स्थिति बन रही है। हालांकि दिन के समय बादल छंटने और धूप निकलने पर तापमान में बढ़ोतरी भी हो सकती है। इसलिए पूरे दिन मौसम एक जैसा रहने की संभावना नहीं है।
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटों में ग्वालियर सहित आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। बारिश और हवाओं के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लोगों को बदलते मौसम के बीच स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। फिलहाल शनिवार सुबह हुई बूंदाबांदी ने गर्मी से कुछ राहत जरूर दी है। अब आने वाले दो दिनों में बादलों की सक्रियता और बारिश की स्थिति तय करेगी कि ग्वालियर में ठंडक कितनी बढ़ती है और दिन के तापमान पर इसका कितना असर पड़ता है।

  • 20% ब्याज और बेइज्जती से परेशान चार लोगों ने रची खूनी साजिश, गर्दन पर 5 और सिर पर 2 वार कर सूदखोर को मार डाला

    20% ब्याज और बेइज्जती से परेशान चार लोगों ने रची खूनी साजिश, गर्दन पर 5 और सिर पर 2 वार कर सूदखोर को मार डाला


    ग्वालियर। ग्वालियर में ब्याज पर पैसे देने वाले एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सूदखोरी और कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान चार लोगों पर हत्या की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने मृतक पुरुषोत्तम गुर्जर की गर्दन पर कुल्हाड़ी से पांच और सिर पर दो वार किए थे। इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में घटनास्थल पर मिले गेंदे के फूलों ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने मामले में मृतक के ही गांव के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
    यह वारदात 14 अक्टूबर को ग्वालियर के झांसी रोड थाना क्षेत्र के केदारपुर के पास छोटी मढ़ैया गांव में हुई थी। सुबह भागीरथ गुर्जर के खेत में 35 वर्षीय पुरुषोत्तम गुर्जर का खून से लथपथ शव मिला था। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान मृतक की गर्दन और सिर पर कुल्हाड़ी से किए गए हमले के निशान मिले। शुरुआती पड़ताल में ही साफ हो गया था कि हत्या बेहद बेरहमी से की गई है। मृतक की जेब से लेनदेन से जुड़ी एक पर्ची भी मिली जिसके बाद पुलिस ने आर्थिक विवाद के पहलू पर जांच शुरू की।
    पुलिस की जांच में सामने आया कि छोटी मढ़ैया गांव के रहने वाले रमन गुर्जर राधाकृष्ण गुर्जर छोटू उर्फ राहुल और विजय उर्फ खैरी ने पुरुषोत्तम से कथित तौर पर 20 प्रतिशत ब्याज पर करीब 10 लाख रुपये उधार लिए थे। पुलिस के अनुसार पुरुषोत्तम उनसे लगातार पैसों की मांग करता था। आरोपियों का कहना था कि ब्याज चुकाने के लिए बनाए जा रहे दबाव और गांव में कथित रूप से बेइज्जती किए जाने से वे परेशान थे। इसी नाराजगी के चलते चारों ने हत्या की योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक वारदात से करीब तीन दिन पहले गांव के एक चबूतरे पर बैठकर उन्होंने इस साजिश को अंतिम रूप दिया था।
    जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने हत्या से पहले शीतला माता मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की और वारदात को अंजाम देने का प्रण लिया। इसके बाद वे माला पहनकर घटनास्थल की ओर पहुंचे। घटनास्थल के पास एक चबूतरे पर मिले गेंदे के फूलों ने पुलिस का ध्यान खींचा। जांच के दौरान मंदिर जाने और माला पहनने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई। इसी सुराग ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद की और पूछताछ के दौरान कथित साजिश की परतें खुलती चली गईं।
    पुलिस के अनुसार 13 अक्टूबर की रात पुरुषोत्तम की पत्नी अपने भाई के एक्सीडेंट की सूचना मिलने पर मायके पृथ्वीपुरा गई हुई थी। पुरुषोत्तम घर पर अकेला था और बाहर सो रहा था। इसी दौरान रात करीब 11 बजे आरोपी रमन गुर्जर उसे ब्याज के पैसों का हिसाब करने और रकम देने की बात कहकर अपने साथ ले गया। इसके बाद पुरुषोत्तम घर के पास स्थित भागीरथ के खेत में पहुंचा जहां चारों ने कथित तौर पर उस पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में उसकी मौत हो गई।
    ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह के मुताबिक मामले का खुलासा करने के लिए एएसपी डॉ. शिवेश सिंह बघेल के निर्देशन में सीएसपी रवि भदौरिया की पांच टीमों ने काम किया। पुलिस ने करीब 72 घंटे के भीतर तकनीकी साक्ष्य और दूसरे सुराग जुटाकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल यह मामला कथित सूदखोरी और आर्थिक विवाद से शुरू होकर हत्या तक पहुंचने की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

  • ग्वालियर में पुलिस की बड़ी लापरवाही, हथकड़ी सहित भागा चोरी का आरोपी, होटल में खाना खिलाने के बाद फ्लैट पर सो गए जवान

    ग्वालियर में पुलिस की बड़ी लापरवाही, हथकड़ी सहित भागा चोरी का आरोपी, होटल में खाना खिलाने के बाद फ्लैट पर सो गए जवान


    ग्वालियर । ग्वालियर में पुलिस की लापरवाही का एक मामला सामने आया है जहां चोरी के आरोप में पकड़ा गया एक बंदी हथकड़ी सहित पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। आरोपी को हाथ में चोट लगने के बाद इलाज कराने के लिए छतरपुर से ग्वालियर लाया गया था। लेकिन अस्पताल में उपचार नहीं मिलने पर पुलिसकर्मियों ने उसे थाने में सुरक्षित रखने के बजाय अपने एक रिश्तेदार के फ्लैट पर ले जाने का फैसला किया। आरोप है कि रात में पुलिसकर्मी बंदी को होटल भी लेकर गए जहां उसने खाना खाया। इसके बाद सभी विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित लोटस विला के एक फ्लैट पर पहुंचे और सो गए। सुबह जब पुलिसकर्मियों की नींद खुली तो आरोपी वहां से गायब था जबकि उसकी हथकड़ी मौके पर ही पड़ी मिली। घटना के बाद पुलिस विभाग में सुरक्षा व्यवस्था और ड्यूटी के दौरान बरती गई सावधानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    सीएसपी विश्वविद्यालय रवि भदौरिया के मुताबिक छतरपुर पुलिस में पदस्थ आरक्षक विजय यादव शुभम शर्मा और संदीप चोरी के आरोप में पकड़े गए बंदी सन्नी पाल को इलाज के लिए ग्वालियर लेकर आए थे। करीब 30 वर्षीय सन्नी पाल उत्तराखंड का निवासी बताया जा रहा है। उसके हाथ में चोट लगी थी जिसके उपचार के लिए पुलिसकर्मी उसे तड़के करीब चार बजे ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे सुबह आने की सलाह दी गई। इसके बाद पुलिसकर्मियों के सामने बंदी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि उन्होंने उसे किसी नजदीकी थाने में रखने के बजाय आरक्षक शुभम शर्मा के भाई गौरव शर्मा के फ्लैट पर ले जाने का निर्णय लिया। यह फ्लैट विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के लोटस विला में स्थित है।
    मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार पुलिसकर्मी बंदी को फ्लैट पर ले जाने से पहले एक होटल में भी पहुंचे थे। वहां बंदी को खाना खिलाया गया। घटना से संबंधित एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें आरोपी होटल में खाना खाता दिखाई दे रहा है। इसके बाद पुलिसकर्मी बंदी को लेकर फ्लैट पर पहुंचे। आरोप है कि रात में सभी वहीं रुक गए और सो गए। इस दौरान बंदी की निगरानी में लापरवाही हुई जिसका फायदा उठाकर वह मौके से भाग निकला। सुबह करीब सात बजे जब पुलिसकर्मियों की नींद खुली तो सन्नी पाल वहां मौजूद नहीं था। उसकी हथकड़ी मौके पर पड़ी हुई थी। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका।
    आरोपी के फरार होने के बाद पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी और विश्वविद्यालय थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार बंदी की तलाश शुरू कर दी है। उसकी तलाश के लिए संभावित ठिकानों और आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपी किस रास्ते से फरार हुआ और घटना के समय उसकी निगरानी में किस स्तर पर चूक हुई इसकी भी जांच की जा सकती है।
    इस घटना ने बंदियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस हिरासत में रखे गए किसी भी आरोपी की निगरानी और उसकी सुरक्षित अभिरक्षा संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बंदी को अस्पताल से थाने ले जाने के बजाय निजी फ्लैट पर ठहराने के आरोप गंभीर माने जा रहे हैं। ड्यूटी के दौरान हुई इस लापरवाही को लेकर संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार सन्नी पाल को पकड़ना और पूरे घटनाक्रम की जांच करना है।