यह कैसे काम करता है
जानें इसके प्रमुख फायदे
क्या है पात्रता

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क्या है पात्रता

NCP गुटों के बीच चर्चाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं

मध्यप्रदेश में भी इस कार्यक्रम को विशेष रूप से आयोजित किया जा रहा है। प्रदेश के सभी शासकीय अशासकीय और शासन से अनुदान प्राप्त विद्यालयों में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा। राज्य स्तरीय कार्यक्रम राजधानी भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में आयोजित किया जाएगा जिसमें विशिष्ट जन वरिष्ठ अधिकारी और अभिभावक विद्यार्थियों के साथ कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह इस अवसर पर नरसिंहपुर जिले के चावरपाठा विकासखंड के ग्राम तेंदूखेड़ा स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच उपस्थित रहेंगे और कार्यक्रम के सजीव प्रसारण में सहभागिता करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2018 से लगातार परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं। यह कार्यक्रम इस वर्ष अपने नौवें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। कार्यक्रम 6 फरवरी को प्रातः 10 बजे नई दिल्ली से आयोजित किया जाएगा। इस दौरान प्रधानमंत्री विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों के उत्तर देंगे और परीक्षा से जुड़े मानसिक दबाव चिंता और तनाव से निपटने के उपाय साझा करेंगे।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों डीडी नेशनल डीडी न्यूज डीडी इंडिया ऑल इंडिया रेडियो के सभी चैनलों पीएमओ वेबसाइट mygov.in यूट्यूब एमओई फेसबुक लाइव स्वयंप्रभा चैनल दीक्षा चैनल के साथ साथ विभिन्न रेडियो चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे नेटफ्लिक्स जियो हॉटस्टार और अमेजन प्राइम वीडियो पर भी किया जाएगा। अन्य निजी चैनलों द्वारा भी कार्यक्रम का प्रसारण किया जाएगा।
प्रदेश में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में सहभागिता के लिए एक दिसंबर से ग्यारह जनवरी तक ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा दी गई थी। इस दौरान मध्यप्रदेश से कक्षा छठवीं से बारहवीं तक के 22 लाख 95 हजार से अधिक विद्यार्थियों 1 लाख 28 हजार से अधिक शिक्षकों और 17 हजार से अधिक अभिभावकों सहित कुल 24 लाख 41 हजार 390 लोगों ने पंजीयन कर सहभागिता दर्ज कराई।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों और प्रदेश के सभी विद्यालयों में कार्यक्रम को समारोहपूर्वक आयोजित किया जाएगा। विद्यालयों में टीवी प्रसारण के साथ साथ इंटरनेट आधारित उपकरणों जैसे कंप्यूटर और लैपटॉप पर भी कार्यक्रम देखने की व्यवस्था की जा रही है। कार्यक्रम के सुचारू आयोजन को लेकर सभी कलेक्टरों और मैदानी अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

कम महंगाई, तेज विकास दर भारत की पहचान

आखिर क्यों बढ़ रहा है लेट मैरिज का चलन
करियर को प्राथमिकता आज के युवा पहले अपनी पढ़ाई नौकरी बिज़नेस या स्टार्टअप में खुद को स्थापित करना चाहते हैं। वे मानते हैं कि मजबूत करियर एक स्थिर पारिवारिक जीवन की नींव है।
आर्थिक स्वतंत्रता की चाह
शादी से पहले आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना अब एक सामान्य सोच बन गई है। युवाओं का मानना है कि वित्तीय स्थिरता रिश्तों में तनाव को कम करती है।
व्यक्तिगत आज़ादी और आत्मनिर्भरता
समाजिक दबाव अब पहले जैसा नहीं रहा। शादी को अब “ज़रूरी कदम” नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत चुनाव के रूप में देखा जाने लगा है।
सही साथी की तलाश
आज की पीढ़ी भावनात्मक समझ मानसिक मेल और समान सोच को रिश्ते की सबसे बड़ी नींव मानती है। जल्दबाज़ी की जगह समझदारी को महत्व दिया जा रहा है।
समाज का बदला नजरिया
जहाँ कभी 25 से 28 की उम्र तक शादी को आदर्श माना जाता था वहीं अब परिवार और माता-पिता भी धीरे-धीरे इस बदलाव को स्वीकार कर रहे हैं। सोशल मीडिया सेलेब्रिटी लाइफस्टाइल और वैश्विक सोच ने इस ट्रेंड को सामान्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
चुनौतियाँ भी हैं लेकिन सोच और मजबूत
लेट मैरिज के साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं जैसे जैविक सीमाएं पारिवारिक दबाव और सामाजिक टिप्पणियां। इसके बावजूद युवा इसे किसी समझौते की बजाय जीवन की प्राथमिकताओं से जुड़ा फैसला मान रहे हैं।लेट मैरिज आज केवल करियर का परिणाम नहीं बल्कि एक जागरूक स्वतंत्र और संतुलित निर्णय बन चुका है। यह दर्शाता है कि आज के युवा अपनी ज़िंदगी में सुकून स्थिरता और समझदारी को सबसे ऊपर रख रहे हैं।

इन तपस्वियों में स्वामी अरसानंद जी महाराज का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो पिछले चार वर्षों से बिना रुके, बारहों महीने बद्रीनाथ धाम में ही निवास कर रहे हैं। भयंकर बर्फबारी और एकांत के बीच उनकी यह निरंतर साधना भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाती है। हालांकि, यह तपस्या केवल आध्यात्मिक इच्छाशक्ति पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का एक व्यवस्थित तंत्र भी काम कर रहा है। ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चन्द्रशेखर वशिष्ठ के अनुसार, शीतकाल में यहाँ रुकने की अनुमति केवल कड़े नियमों और गहन जांच के बाद ही दी जाती है। प्रशासन सुनिश्चित करता है कि इन साधकों के पास पर्याप्त राशन, ईंधन और जरूरी दवाइयां मौजूद हों। साथ ही, सुरक्षा के लिहाज से धाम में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी रहती है।
कठोर प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए इन साधुओं का विशेष मेडिकल परीक्षण भी किया जाता है। डॉ. गौतम भारद्वाज बताते हैं कि हाई एल्टीट्यूड पर रहने के लिए हृदय, फेफड़ों और हड्डियों का मजबूत होना अनिवार्य है। डॉक्टरों की टीम साधकों के ऑक्सीजन लेवल और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करती है। मेडिकल सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही उन्हें तहसील प्रशासन से शीतकालीन प्रवास की अनुमति प्राप्त होती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि साधक का शरीर इस जानलेवा ठंड को सहने के लिए सक्षम है या नहीं।
धार्मिक दृष्टिकोण से बद्रीनाथ की इस भूमि का महत्व अनंत है। पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन उनियाल बताते हैं कि यह तपोभूमि चारों युगों से अस्तित्व में है। सतयुग में ‘मुक्ति प्रदा’ और त्रेता में ‘योग सिद्धिदा’ कहलाने वाला यह क्षेत्र आज भी योग और ध्यान की प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है। पंडित राकेश डिमरी राकुड़ी का मानना है कि कलियुग में हरि नाम और ध्यान ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है, और ये साधु इसी मार्ग पर चलते हुए शून्य से नीचे के तापमान में भी मोक्ष के द्वार पर अडिग खड़े हैं। इन बर्फीली वादियों में गूंजता मौन और साधुओं का यह अखंड ध्यान न केवल श्रद्धा का विषय है, बल्कि यह मनुष्य की असीमित मानसिक शक्ति का प्रमाण भी है।

इस सेवा का सफल ट्रायल पिछले साल 2 दिसंबर को दिल्ली और गुजरात के राजकोट में किया गया था जहाँ यात्रियों और ड्राइवरों दोनों ने इसे हाथों-हाथ लिया। भारत टैक्सी की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘ड्राइवर-मालिक’ कॉन्सेप्ट है जिसके तहत ड्राइवरों को केवल कर्मचारी नहीं बल्कि ‘सारथी’ माना गया है।
आम यात्रियों के लिए भी भारत टैक्सी किसी राहत से कम नहीं होगी क्योंकि इसमें ‘सर्ज प्राइसिंग’ जैसा कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। अक्सर देखा जाता है कि पीक ऑवर्स या खराब मौसम में निजी कंपनियां किराया दोगुना-तिगुना कर देती हैं लेकिन भारत टैक्सी में किराया स्थिर और पारदर्शी रहेगा। लगभग 300 करोड़ रुपये की पूंजी के साथ शुरू हुई ‘सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड’ इसका संचालन करेगी जिसमें सहकारी क्षेत्र के अनुभवी अधिकारी शामिल हैं।

राजयोग का प्रभाव कार्यक्षेत्र, व्यवसाय, निवेश और आर्थिक मामलों में उन्नति के संकेत देता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य गति पकड़ सकते हैं और नई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं।
राशि अनुसार संभावित लाभ
मेष राशि: करियर में बदलाव और उन्नति का समय है। नौकरी में प्रमोशन, नई जिम्मेदारी या व्यवसाय में विस्तार संभव है। स्टार्टअप या निवेश से जुड़े फैसलों में लाभ मिलने की संभावना है।
सिंह राशि: कार्यस्थल पर मान-सम्मान और आर्थिक मजबूती बढ़ सकती है। बड़े व्यावसायिक सौदे फाइनल होने और पैतृक संपत्ति मिलने के योग हैं।
तुला राशि: निवेश और शेयर बाजार, प्रॉपर्टी या साझेदारी व्यवसाय में लाभ की संभावना है। करियर में रुके हुए अवसर फिर से सक्रिय हो सकते हैं।
कुंभ राशि: आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। रचनात्मक क्षेत्रों में पहचान और प्रशंसा मिलने के संकेत हैं। सरकारी परियोजनाओं या अटकी व्यावसायिक योजनाओं में गति आने की संभावना है।
महाशिवरात्रि के उपाय और पूजा
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से राजयोग का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। इसके लिए उपाय इस प्रकार हैं:
शिवलिंग का अभिषेक: गन्ने के रस या शहद से।
स्तोत्र पाठ: शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना गया है।रात्रि जागरण: रातभर भक्ति और ध्यान करना फलदायी है।इन उपायों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव और नए अवसर भी खुल सकते हैं।