Author: bharati

  • बिना मेहनत घटता वजन बन सकता है जानलेवा इन लक्षणों को तुरंत पहचानें

    बिना मेहनत घटता वजन बन सकता है जानलेवा इन लक्षणों को तुरंत पहचानें


    नई दिल्ली । आज के समय में जहां लोग वजन कम करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं वहीं अगर बिना किसी डाइटिंग या एक्सरसाइज के वजन तेजी से घटने लगे तो यह चिंता का विषय बन जाता है। मेडिकल भाषा में इसे बिना किसी कारण वज़न कम होना कहा जाता है और इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि 6 से 12 महीनों के भीतर शरीर का 5 प्रतिशत या उससे अधिक वजन बिना किसी कारण के कम हो जाए तो यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

    हमारा शरीर मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन के आधार पर काम करता है। जब शरीर के अंदर कोई गड़बड़ी होती है तो वह ऊर्जा के लिए फैट और मांसपेशियों को तेजी से जलाने लगता है जिससे वजन अचानक कम होने लगता है। इसके पीछे कई गंभीर कारण हो सकते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

    सबसे आम कारणों में से एक है हाइपरथायरायडिज्म। इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है जिससे मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है। व्यक्ति सामान्य से ज्यादा खाना खाने के बावजूद तेजी से दुबला होने लगता है। इसके साथ घबराहट, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

    इसी तरह टाइप 2 मधुमेह भी अचानक वजन घटने का कारण बन सकती है। जब शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता तो कोशिकाएं ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पातीं। ऐसे में शरीर फैट और मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा बनाता है जिससे वजन तेजी से कम होने लगता है। बार बार पेशाब आना और ज्यादा प्यास लगना इसके सामान्य संकेत हैं।

    कई मामलों में यह समस्या कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को तेजी से खर्च करती हैं और शरीर को कमजोर बना देती हैं। भूख कम होना, लगातार थकान और बिना वजह वजन गिरना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।

    मानसिक स्वास्थ्य भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है।अवसाद या अत्यधिक तनाव की स्थिति में व्यक्ति की भूख प्रभावित हो जाती है। शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिससे या तो व्यक्ति खाना छोड़ देता है या शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता और वजन गिरने लगता है।

    इसके अलावा शराब, सिगरेट या नशीले पदार्थों की आदत भी शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है और शरीर बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है जिसके कारण वजन तेजी से घट सकता है।

    अचानक वजन कम होना कभी भी सामान्य बात नहीं होती बल्कि यह शरीर का एक चेतावनी संकेत है। यदि आप भी बिना कारण वजन घटने की समस्या से जूझ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच जैसे ब्लड टेस्ट, थायराइड प्रोफाइल और अन्य जरूरी स्क्रीनिंग करवाना बेहद आवश्यक है। सही समय पर पहचान और इलाज ही आपको बड़ी और गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।

  • दुर्गा सप्तशती का दिव्य कवच हर संकट से रक्षा और हर मनोकामना पूरी करने का रहस्य

    दुर्गा सप्तशती का दिव्य कवच हर संकट से रक्षा और हर मनोकामना पूरी करने का रहस्य


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। यह समय केवल पूजा अर्चना का नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर होता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करते हैं और अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करने का प्रयास करते हैं। इसी दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना गया है जो साधक के जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुर्गा सप्तशती केवल एक ग्रंथ नहीं बल्कि शक्ति का स्रोत है। इसका वर्णन मार्कंडेय पुराण में मिलता है जिसमें देवी की महिमा और उनके चमत्कारी स्वरूपों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसका एक महत्वपूर्ण भाग दुर्गा कवच है जिसे अत्यंत प्रभावशाली और रक्षक माना जाता है। कहा जाता है कि इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं और उसे मानसिक शांति के साथ आत्मविश्वास भी प्राप्त होता है।

    दुर्गा कवच को एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच माना गया है जो साधक के शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा करता है। इसमें बताया गया है कि मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप शरीर के अलग अलग हिस्सों की सुरक्षा करते हैं। यह केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि गहन आध्यात्मिक अर्थ से जुड़ा हुआ है जो यह दर्शाता है कि देवी शक्ति हर दिशा में साधक की रक्षा करती हैं।

    मान्यता है कि चामुंडा देवी सिर की रक्षा करती हैं जिससे व्यक्ति के विचार शुद्ध और सकारात्मक बने रहते हैं। शैलजा आंखों की रक्षा कर सही दृष्टिकोण प्रदान करती हैं जबकि विशालाक्षी कानों की रक्षा कर सही और शुभ बातों को सुनने की शक्ति देती हैं। माहेश्वरी नाक की रक्षा करती हैं जो जीवन में संतुलन का प्रतीक है और महाकाली मुख की रक्षा कर वाणी में शक्ति और सत्य का संचार करती हैं। सरस्वती जीभ की रक्षा कर ज्ञान और विवेक प्रदान करती हैं।

    इसी प्रकार वाराही गर्दन की रक्षा कर जीवन में स्थिरता लाती हैं और अंबिका हृदय की रक्षा कर भावनाओं को संतुलित करती हैं। कौमारी भुजाओं को शक्ति देती हैं जिससे व्यक्ति कर्मशील बनता है और चंडिका हाथों की रक्षा कर हर कार्य में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती हैं। नारायणी उदर की रक्षा कर स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखती हैं जबकि माहेश्वरी कमर की रक्षा कर जीवन में मजबूती देती हैं। महालक्ष्मी जांघों की रक्षा कर समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं और भैरवी घुटनों की रक्षा कर आगे बढ़ने की शक्ति देती हैं। महाकाली पिंडलियों की रक्षा करती हैं और अंत में मां दुर्गा स्वयं पूरे शरीर और पैरों की रक्षा कर साधक को संपूर्ण सुरक्षा प्रदान करती हैं।

    नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती और विशेष रूप से दुर्गा कवच का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भय को समाप्त करता है आत्मबल बढ़ाता है और जीवन को नई दिशा देता है। नवरात्रि के दौरान इसका पाठ करना विशेष रूप से शुभ माना गया है क्योंकि इस समय देवी शक्ति का प्रभाव अत्यधिक प्रबल होता है। सच्चे मन और श्रद्धा से किया गया यह पाठ न केवल कष्टों को दूर करता है बल्कि सुख शांति और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

  • पश्चिम एशिया तनाव के बीच एयर इंडिया ग्रुप आज 30 उड़ानें संचालित करेगा

    पश्चिम एशिया तनाव के बीच एयर इंडिया ग्रुप आज 30 उड़ानें संचालित करेगा


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 23 मार्च को पश्चिम एशिया के लिए कुल 30 उड़ानें संचालित करने का फैसला किया है। एयरलाइन के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह उड़ानें निर्धारित (शिड्यूल्ड) और गैर-निर्धारित (नॉन-शिड्यूल्ड) दोनों श्रेणियों में होंगी।

    एयर इंडिया ग्रुप जेद्दा के लिए कुल 10 उड़ानें संचालित करेगा। इनमें दिल्ली और मुंबई से एयर इंडिया की उड़ानें शामिल हैं, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु, कोझिकोड और मंगलुरु से सेवाएं देगा।

    एयर इंडिया एक्सप्रेस मस्कट के लिए चार और रियाद के लिए चार उड़ानें संचालित करेगा। इसके अलावा, 12 अतिरिक्त गैर-निर्धारित उड़ानें संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के लिए चलाई जाएंगी, जो परिचालन स्थितियों और स्लॉट उपलब्धता पर निर्भर करेंगी।

    यूएई में दुबई, अबू धाबी और शारजाह के लिए विशेष उड़ानें संचालित की जाएंगी। एयर इंडिया दिल्ली-दुबई रूट पर सेवा देगा, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस दिल्ली, मुंबई और मंगलुरु से कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

    हालांकि, दोहा, कुवैत सिटी और तेल अवीव समेत कई गंतव्यों के लिए उड़ानें फिलहाल स्थगित रहेंगी।

    एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों को बिना अतिरिक्त शुल्क के टिकट री-बुकिंग या पूर्ण रिफंड का विकल्प दिया है। साथ ही, व्हाट्सएप और कस्टमर सपोर्ट के जरिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    एयर इंडिया ग्रुप ने कहा कि वह हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो।

  • परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दी गंभीर चेतावनी

    परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दी गंभीर चेतावनी


    जिनेवा।
    अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए हमले से पश्चिम एशिया में संकट की स्थिति बनी हुई है। इस बीच ईरान के परमाणु ठिकानों पर हो रहे हमलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

    डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने बताया कि नतांज एनरिचमेंट कॉम्प्लेक्स और डिमोना जैसे संवेदनशील परमाणु स्थलों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी इन घटनाओं की जांच कर रही है। फिलहाल किसी तरह के रेडिएशन स्तर में वृद्धि के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    टेड्रोस ने चेतावनी दी कि परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर जनस्वास्थ्य संकट और पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है। अगर ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    डब्ल्यूएचओ ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से 13 देशों में अपने स्टाफ और संयुक्त राष्ट्र के कर्मियों को संभावित न्यूक्लियर आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

    डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई में संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और मौजूदा संकट का समाधान केवल शांति और संवाद के जरिए ही संभव है।

  • ढेकियाजुली में भीषण सड़क हादसा, 8 लोगों की मौके पर मौत

    ढेकियाजुली में भीषण सड़क हादसा, 8 लोगों की मौके पर मौत


    शोणितपुर (असम)।
    असम के ढेकियाजुली क्षेत्र में रविवार रात एक भीषण सड़क हादसे में आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा एक एम्बुलेंस और ट्रक के बीच आमने-सामने की टक्कर के कारण हुआ।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, एम्बुलेंस में सवार एक मरीज समेत कुल आठ लोग इस दुर्घटना में मारे गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि सभी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

  • मप्रः आईएएस विकास मिश्रा बने सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल गुना एसपी की कमान

    मप्रः आईएएस विकास मिश्रा बने सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल गुना एसपी की कमान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में प्रशासनिक सख्ती के बीच सरकार ने सीधी और गुना जिलों में बड़े स्तर पर बदलाव किए हैं। सीधी में नए कलेक्टर के रूप में वर्ष 2013 बैच के आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा की पदस्थापना की गई है, जबकि गुना जिले की पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल को सौंपी गई है।

    रविवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त रुख के बाद यह बदलाव किया गया है। दरअसल, मुख्यमंत्री रविवार को मिर्जापुर से सीधे सीधी जिला मुख्यालय पहुंचे थे। यहां स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्हें कई शिकायतें मिलीं। जिसके बाद उन्होंने ये एक्शन लिया।

    मुख्यमंत्री ने सीधी जिले में अचानक पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद कर प्रशासनिक व्यवस्था और योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी ली थी। उन्होंने जनसंवाद के दौरान आमजन और जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर की गई शिकायतों और जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों की कार्य प्रणाली पर विस्तार से समीक्षा एवं फीडबैक लिया था।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री ने प्राप्त शिकायतों के दृष्टिगत सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को तत्काल प्रभाव से हटाने और जिला सहकारी बैंक के महाप्रबधंक पीएस धनवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिये थे। साथ ही गुना जिले में तलाशी के दौरान मिली नगद राशि में हेरफेर के मामले में पुलिस अधीक्षक गुना अंकित सोनी की भूमिका को यथोचित न मानते हुए पुलिस अधीक्षक पद से हटाने के निर्देश भी दिये थे।

    मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य शासन ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए गुना हवालाकांड के बाद एसपी अंकित सोनी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्हें पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। इंदौर में 15वीं बटालियन की कमांडेंट हितिका वसल को उनकी जगह गुना का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल को अब गुना जिले की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    वहीं, सीधी में जनप्रतिनिधियों से मिली शिकायतों के बाद सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में ओएसडी और सह आयुक्त बनाया गया है। उनकी जगह 2013 बैच के विकास मिश्रा को नया कलेक्टर बनाया है। विकास मिश्रा इससे पहले मुख्यमंत्री सचिवालय में अपर सचिव के साथ आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी का दायित्व संभाल रहे थे। अब उन्हें सीधी जिले की कमान सौंपी गई है।

  • मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट, 12 दिन से होटल-रेस्टोरेंट को नहीं मिले सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट, 12 दिन से होटल-रेस्टोरेंट को नहीं मिले सिलेंडर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट बना हुआ है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की कमर तोड़ दी है। लगातार 12 दिन से होटल और रेस्टोरेंट को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई नहीं हुई है।

    इसे लेकर रविवार को नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया मध्य प्रदेश चैप्टर और फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने प्रदेश की खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि शमी से मुलाकात की। मुख्य सचिव शमी ने छुट्टी के दिन होटल संचालकों से बात और ऑयल कंपनियों के साथ बैठक भी की।

    दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण देश में गैस आपूर्ति बाधित हुई है। केंद्र सरकार द्वारा शुरुआत में आपूर्ति बंद करने के बाद इसे 20 प्रतिशत तक बहाल करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर यह राहत अब तक व्यवसायियों तक नहीं पहुंच सकी है। इस कारण प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट पर संकट के बादल छाए हुए हैं। वे बंद होने की कगार पर है।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए मध्य प्रदेश होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने खाद्य आपूर्ति सचिव रश्मि अरुण शमी से बातचीत की। प्रदेश भर के होटल संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र के 20 प्रतिशत आपूर्ति के आदेश के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था ठप पड़ी है।

    सूरी ने कहा कि हमने सरकार के सामने अपनी मांगे रखी हैं और हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द हमें मदद मिलेगी। होटल और रेस्टोरेंट एसोसिशन से लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। सभी के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सुमित सूरी के अनुसार संगठन की प्रमुख मांग है कि वर्तमान 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए, ताकि व्यवसायों का संचालन सुचारू रूप से हो सके। इसके अलावा उन्होंने एक नया प्रस्ताव भी रखा है कि सभी संस्थानों के लिए आपूर्ति का एक समान नियम नहीं होना चाहिए। होटलों की श्रेणी और उनकी मांग के आधार पर गैस का कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए। बड़े संस्थानों को उनकी खपत के अनुसार अधिक और छोटे संस्थानों को उनके अनुपात में गैस उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही पीएनजी सप्लाई को भी मांग के अनुरूप बढ़ाने की मांग रखी गई है।

    इधर, भोपाल होटल एवं रेस्तरां संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने बताया कि कमर्शियल गैस आपूर्ति पर सख्त पाबंदी के कारण होटल व्यवसाय ठप होने की कगार पर है, जिसके समाधान को लेकर अपर मुख्य सचिव से चर्चा कर गैस की निर्बाध आपूर्ति बहाल करने की मांग की और ज्ञापन सौंपा गया है।

    पाली ने बताया कि भोपाल के होटल, रेस्तरा, ढाबों, खान-पान सेवा आदि रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के अभाव में संचालन व्यवस्था में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि भोपाल के पंजीकृत होटलों और रेस्तरांओं को उनकी वास्तविक परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का एक सीमित कोटा आवंटित किया जाए। प्रत्येक प्रतिष्ठान को आवश्यक रसोई संचालन बनाए रखने और खाद्य सेवाओं में व्यवधान से बचने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर प्रदाय किए जाए। भोपाल में 2 हजार होटल और रेस्टोरेंट है। जहां हालात गंभीर हो गए हैं।

    नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधि अभिषेक बाहेती ने बताया कि कमर्शियल गैस नहीं मिलने की बात से मुश्किलें बढ़ गई हैं। गैस के अभाव में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों पर बड़ा संकट खड़ा हुआ है। इसे दूर करने की मांग की गई है।

  • मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद

    मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 (महाकुंभ) से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पद पर दो दावे किए जा रहे हैं। 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।

    दरअसल, उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी पिछले छह महीनों से अध्यक्ष के रूप में उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें शिप्रा नदी प्रोजेक्ट सहित मेले की तैयारियों की जानकारी भी दी, लेकिन अब साधु संतों में दो फाड़ दिखाई दे रही है। देश के 13 अखाड़े में से आठ अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है।

    रविवार को उज्जैन में मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में संत मौजूद रहे। संतों के इस समागम में 13 में से आठ अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव संत रविंद्र पुरी महाराज स्वागत सम्मान हुआ। ढोल-नगाड़ों के बीच संतों में उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में महंत सत्यानंद महाराज (बड़ा उदासीन), महंत मंगलदास जी (नया अखाड़ा), महंत विनीत गिरी (महानिर्वाणी), महंत रामेश्वर दास, भगवान दास और दिग्विजय दास सहित विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत शामिल हुए।

    कार्यक्रम के बाद रविंद्र पुरी महाराज ने मीडिया से कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से आठ अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं। इसीलिए वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 मे सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को लेकर हमारी समय समय पर अधिकारियों से सूक्ष्म चर्चा होती रहती है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे।


    इन अखाड़ों का समर्थन बताया

    देश के 13 अखाड़े में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इन अखाड़ों में 1- महानिर्वाणी अखाड़ा, 2- अटल अखाड़ा, 3-निर्मल अखाड़ा, 4- नया उदासी अखाड़ा, 5- बड़ा उदासीन अखाड़ा, 6-निर्वाणी अणि अखाड़ा, 7- दिगंबर अणि अखाड़ा और 8-निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है। इस प्रकार बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ही होंगे।

    इधर निरंजनी अखाड़े से जुड़े रविंद्र पूरी महाराज ने कहा कि कुम्भ आ रहा है, ऐसे कई संत अपने आप को अध्यक्ष बताएंगे। सर्वसम्मति से मुझे अध्यक्ष बनाया गया था। जब मैंने इस्तीफा दिया नहीं तो महानिर्वाणी वाले रविंद्र पूरी कैसे अध्यक्ष बन सकते है।

  • चैत्र नवरात्रि पर शिवसिटी में निकली एक किलोमीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, विशाल भंडारे का भी आयोजन

    चैत्र नवरात्रि पर शिवसिटी में निकली एक किलोमीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, विशाल भंडारे का भी आयोजन

    भोपाल। राजधानी भोपाल के अरहेड़ी रोड स्थित शिवसिटी कॉलोनी में रविवार को चैत्र नवरात्रि के अवसर पर खेड़ापति हनुमान मंदिर से भव्य चुनरी यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।

    जानकारी के अनुसार, अयोध्या नगर से लगे अरहेड़ी रोड की शिवसिटी कॉलोनी से शुरू हुई करीब एक किलोमीटर लंबी इस यात्रा में श्रद्धालु डीजे, ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ आगे बढ़ते रहे। दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के तहत भगवान शनिदेव की स्थापना भी की गई। इसके बाद चुनरी यात्रा निकाली गई और श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

    इस आयोजन में शिवसिटी के साथ ही शिवालय कॉलोनी और शिवधाम कॉलोनी के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भक्तिमय वातावरण में संपन्न कार्यक्रम के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और धार्मिक उत्सव का आनंद लिया।

  • लेक न्योस का खौफनाक सच 1986 की त्रासदी और दुनिया की सबसे खतरनाक झील

    लेक न्योस का खौफनाक सच 1986 की त्रासदी और दुनिया की सबसे खतरनाक झील

    नई दिल्ली:दुनिया में कई प्राकृतिक स्थल अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां सुंदरता के पीछे खतरनाक रहस्य छिपा होता है कैमरून की लेक न्योस ऐसी ही एक झील है जो देखने में शांत और आकर्षक लगती है लेकिन इसका इतिहास एक भयानक त्रासदी से जुड़ा है

    लेक न्योस कैमरून के ओकू ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित एक क्रेटर झील है जो एक निष्क्रिय ज्वालामुखी के गड्ढे में बनी है वैज्ञानिकों के अनुसार इस झील की गहराई में मौजूद मैग्मा लगातार कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता रहता है यह गैस पानी में घुलकर झील के तल में जमा होती रहती है और जब दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है तो यह गैस अचानक विस्फोट की तरह बाहर निकल सकती है

    इस घटना को लीम्निक विस्फोट कहा जाता है 21 अगस्त 1986 को लेक न्योस से अचानक बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का घातक बादल निकला यह बादल लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आसपास की घाटी में फैल गया इस भयावह घटना में करीब 1800 लोगों की जान चली गई इसके अलावा हजारों मवेशी और कई पक्षी भी इस गैस के कारण मारे गए लोग ज्यादातर अपने घरों में सो रहे थे और उन्हें सांस लेने का मौका तक नहीं मिला

    गैस का यह बादल भारी होने के कारण जमीन के करीब ही फैल गया और इसमें ऑक्सीजन की कमी थी जिससे सांस लेना असंभव हो गया यह घटना इतिहास की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है

    घटना के बाद वैज्ञानिकों ने लेक न्योस के रहस्य को समझने के लिए विस्तृत अध्ययन किया और पाया कि झील के नीचे जमा गैस ही इस त्रासदी का कारण थी इसके बाद इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उपाय किए गए

    साल 2001 में झील में एक डीगैसिंग सिस्टम लगाया गया जिसमें पाइपों के जरिए धीरे धीरे गैस को बाहर निकाला जाने लगा ताकि दबाव खतरनाक स्तर तक न पहुंचे बाद में 2011 में और पाइप लगाए गए जिससे गैस के सुरक्षित निष्कासन को और बेहतर बनाया गया

    इस तकनीक की मदद से अब झील से कार्बन डाइऑक्साइड नियंत्रित तरीके से बाहर निकल रही है और बड़े विस्फोट का खतरा काफी हद तक कम हो गया है वैज्ञानिक अभी भी अन्य अफ्रीकी झीलों जैसे लेक मोनन पर नजर बनाए हुए हैं जहां ऐसी ही खतरनाक स्थिति बन सकती है जो यह याद दिलाती है कि प्रकृति जितनी सुंदर है उतनी ही अनिश्चित और खतरनाक भी हो सकती है