Author: bharati

  • गाजा सीजफायर पर ट्रंप का बड़ा दांव: दामाद जेरेड कुशनर ने हमास नेता से मिस्र में की सीधी बातचीत

    गाजा सीजफायर पर ट्रंप का बड़ा दांव: दामाद जेरेड कुशनर ने हमास नेता से मिस्र में की सीधी बातचीत


    नई दिल्ली । गाजा में लंबे समय से अटकी सीजफायर डील को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने अपनी कूटनीतिक कोशिश तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और अमेरिकी वार्ताकार जेरेड कुशनर ने रविवार को मिस्र में हमास के प्रमुख खलील अल हय्या से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक दो घंटे से ज्यादा समय तक चली। बातचीत में मिस्र कतर और तुर्किये के अधिकारी भी मौजूद रहे। इस मुलाकात को गाजा में युद्धविराम की कोशिशों के लिहाज से अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से इजरायल और हमास के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है।

    कुशनर की हमास नेता से मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के 15 सूत्रीय गाजा रोडमैप को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है। इस प्रस्ताव में गाजा में युद्धविराम के साथ हमास के हथियार छोड़ने इजरायली सेना की गाजा से वापसी और युद्ध प्रभावित क्षेत्र के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। हमास ने इस योजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है लेकिन इजरायल ने अब तक इसे स्वीकार नहीं किया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी।

    मिस्र में हुई बातचीत के दौरान हमास ने अपनी शर्त भी स्पष्ट कर दी। हमास का कहना है कि किसी भी योजना को लागू करने से पहले इजरायल को गाजा में सैन्य हमले रोकने होंगे और अपनी सेना को तथाकथित येलो लाइन तक पीछे हटाना होगा। इसके बाद 14 दिनों की बातचीत शुरू हो सकती है जिसमें युद्धविराम योजना को लागू करने की समयसीमा और दूसरे जरूरी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। दूसरी ओर इजरायल की सबसे बड़ी शर्त हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण है। यही मुद्दा दोनों पक्षों के बीच समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ है।

    कुशनर की भूमिका इस समय इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह ट्रंप प्रशासन की ओर से बातचीत को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। हमास के साथ मुलाकात के बाद उनकी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इस बैठक में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस के निदेशक निकोलाय म्लादेनोव भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूद मतभेदों को कम करना और प्रस्तावित रोडमैप को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना है।

    अमेरिकी प्रयासों के बीच कई मुस्लिम और अरब देशों ने भी इजरायल से ट्रंप की योजना को स्वीकार करने की अपील की है। सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात जॉर्डन पाकिस्तान इंडोनेशिया मिस्र कतर और तुर्किये समेत कई देशों ने गाजा में संघर्ष खत्म करने के लिए प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाने की मांग की है।

    हालांकि जमीन पर हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। गाजा के बड़े हिस्से पर इजरायली सेना के नियंत्रण और हमास के हथियार छोड़ने के मुद्दे को लेकर गतिरोध जारी है। ऐसे समय में कुशनर की हमास नेता से सीधी मुलाकात को अमेरिका की ओर से दोनों पक्षों पर दबाव बढ़ाने और बातचीत को किसी संभावित समझौते तक पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब निगाहें कुशनर की नेतन्याहू के साथ होने वाली बातचीत और उसके बाद सामने आने वाले रुख पर टिकी हैं। अगर दोनों पक्ष अपनी प्रमुख शर्तों में कुछ लचीलापन दिखाते हैं तो गाजा में लंबे समय से लंबित सीजफायर समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद बन सकती है।

  • अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे

    अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के एक बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। अन्नामलाई ने दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें दिल्ली बुलाकर पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी संभालने और लंबे समय तक राजधानी में रहने को कहा था। हालांकि उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और तमिलनाडु में रहकर लोगों के बीच काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने कहा कि उनके लिए राज्य में रहकर जनता के मुद्दों पर काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    अन्नामलाई के मुताबिक अमित शाह ने उनसे दिल्ली आकर जिम्मेदारी संभालने और करीब तीन साल से अधिक समय तक वहां रहने को कहा था। उन्होंने अमित शाह से स्पष्ट तौर पर कहा कि यह उनके लिए सही नहीं रहेगा। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु में ही रहकर सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के लिए काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने यह भी कहा कि वह बीजेपी के भीतर रहें या पार्टी से बाहर हों लेकिन जिन सिद्धांतों पर अमित शाह के साथ काम किया है उन्हें हमेशा अपने काम में आगे बढ़ाते रहेंगे।

    उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु बीजेपी में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। अन्नामलाई अब वी द लीडर आंदोलन से भी जुड़े हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तमिलनाडु के लोगों के हितों के लिए काम करना और सामाजिक बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाना है।

    मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर भी अन्नामलाई ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर उन्होंने हमेशा आवाज उठाई है। उनका दावा है कि जब वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे तब भी तमिलनाडु बीजेपी ने मेकेदातु परियोजना का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के लोगों को पीने का पानी मिलना चाहिए लेकिन इसके लिए तमिलनाडु के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    अन्नामलाई ने कहा कि जब किसी परियोजना का असर दो राज्यों पर पड़ता है तो दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह ईमानदार नेता हैं और गलत काम नहीं करते।

    तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधते हुए अन्नामलाई ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम एक साल काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए और उसके बाद उसके प्रदर्शन का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ठीक से काम नहीं करती है तो वह सबसे पहले सवाल उठाएंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में हंगामा करने के बजाय सरकार को काम करने का मौका देने की अपील की।

    हालांकि अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार रोकने के दावों के बावजूद कुछ जगहों पर रिश्वतखोरी फिर शुरू हो गई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मंत्रियों के खिलाफ उनके पास कथित ऑडियो सबूत भी हैं। अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि वह एक साल बाद मुद्दा उठाने से पहले ही सरकार को आगाह कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके मंत्री भी उसी नीति पर चलें।

    अन्नामलाई के बयान ने एक तरफ बीजेपी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ा दी है तो दूसरी तरफ तमिलनाडु की राजनीति में उनके अगले कदम पर भी निगाहें टिक गई हैं। दिल्ली की जिम्मेदारी को ठुकराकर राज्य में सक्रिय रहने का उनका दावा आने वाले समय में उनकी राजनीतिक रणनीति के लिए कितना अहम साबित होगा यह देखना दिलचस्प होगा।

  • सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक

    सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव भक्त व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करके सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस बार 17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार मनाया जाएगा और इसी दिन नाग पंचमी भी पड़ रही है। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम तक रहेगी और उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। इस वजह से सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है।

    इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग भगवान शिव से जुड़े हुए हैं और शिवजी के गले में नाग के विराजमान होने के कारण नाग पंचमी की पूजा का संबंध शिव आराधना से भी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं और बेलपत्र पुष्प अक्षत तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री चढ़ा सकते हैं। नाग देवता की प्रतिमा या शिवलिंग के साथ स्थापित नाग प्रतिमा की भी पूजा की जा सकती है।

    17 अगस्त को शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए अलग अलग पंचांगों में समय में थोड़ा अंतर मिल सकता है। आपके दिए गए पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त बताया गया है। सुबह 9 बजकर 8 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक शुभ उत्तम मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर संभव है इसलिए पूजा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। नाग पंचमी के लिए भी अलग पंचांगों में सुबह के मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर दिया गया है।

    सावन सोमवार की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। श्रद्धा के अनुसार दूध और पंचामृत से अभिषेक भी किया जा सकता है। भगवान शिव को बेलपत्र पुष्प और फल अर्पित करें तथा धूप और दीप जलाकर पूजा करें। इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना और शिव आरती करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या जलाहार कर सकते हैं। कई परंपराओं में सावन सोमवार के व्रत में अनाज और सामान्य नमक से परहेज किया जाता है। हालांकि व्रत के नियम परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों को कठिन या निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    इस दिन नाग पंचमी होने के कारण नाग देवता की प्रतिमा पर भी जल पुष्प और पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है। जीवित सांपों को पकड़कर पूजा करने या उन्हें जबरन दूध पिलाने से बचना चाहिए। धार्मिक आस्था का पालन करते हुए नाग देवता की प्रतिमा का पूजन करना अधिक सुरक्षित तरीका है।

    इस तरह 17 अगस्त का दिन शिव भक्तों के लिए धार्मिक रूप से विशेष माना जा रहा है। सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह मेल श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान शिव और नाग देवता की आराधना का अवसर देगा। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा संयम और सकारात्मक भाव माना जाता है। ज्योतिष से जुड़े शुभ प्रभावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए क्योंकि इनके प्रभावों का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • क्यों खास हैं नाग? कालसर्प दोष, अश्लेषा नक्षत्र और नागयज्ञ से जुड़ी है हजारों साल पुरानी परंपरा

    क्यों खास हैं नाग? कालसर्प दोष, अश्लेषा नक्षत्र और नागयज्ञ से जुड़ी है हजारों साल पुरानी परंपरा


    नई दिल्ली । सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। भारतीय परंपरा में नागों का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि ज्योतिष पौराणिक कथाओं लोकविश्वास और प्रकृति से भी उनका गहरा संबंध बताया गया है। खेतों में फसलों की रक्षा करने वाले सांपों से लेकर भगवान शिव के गले में विराजमान नाग तक भारतीय संस्कृति में सर्प को कई अलग अलग रूपों में देखा गया है। यही वजह है कि नाग पंचमी के अवसर पर नाग पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

    ज्योतिष की बात करें तो सर्पों का संबंध राहु से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार नवग्रहों में राहु के अधिदेवता काल और प्रतिदेवता सर्प माने जाते हैं। इसी कारण राहु से जुड़े दोषों की शांति के लिए सर्प और नाग देवता की पूजा का विधान बताया जाता है। कुंडली में कालसर्प दोष होने की स्थिति में भी ज्योतिषीय परंपराओं में नाग पूजा और उससे जुड़े उपाय बताए जाते हैं। हालांकि कालसर्प दोष को लेकर ज्योतिषियों के बीच अलग अलग मत भी पाए जाते हैं।

    नागों का संबंध केवल ग्रहों तक ही सीमित नहीं है। 27 नक्षत्रों में अश्लेषा नक्षत्र के देवता भी सर्प माने गए हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में अश्लेषा का संबंध नाग शक्ति से जोड़ा जाता है। इसी तरह प्राचीन ज्योतिष परंपराओं में नक्षत्रों के वाहनों और प्राकृतिक घटनाओं के बीच संबंध जोड़कर वर्षा के अनुमान लगाने की परंपरा भी बताई गई है। बारिश के मौसम में आकाशीय घटनाओं को समझने में इन प्रतीकों का उपयोग प्राचीन काल से होता रहा है।

    भारतीय पौराणिक कथाओं में नागों की भूमिका और भी व्यापक है। रामायण में लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार माना जाता है जबकि महाभारत की परंपरा में बलराम का संबंध भी शेषनाग से जोड़ा जाता है। रामायण में मेघनाद की पत्नी सुलोचना को नागकन्या बताया गया है। वहीं सुरसा का उल्लेख नागों की माता के रूप में मिलता है। इन कथाओं में नाग केवल एक जीव के रूप में नहीं बल्कि शक्ति और रहस्य के प्रतीक के तौर पर भी दिखाई देते हैं।

    महाभारत में भी नागों की कहानी बेहद महत्वपूर्ण है। अर्जुन का विवाह नागकन्या उलूपी से हुआ था। आगे चलकर राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से हुई। परीक्षित की मृत्यु से क्रोधित उनके पुत्र जन्मेजय ने नागों के विनाश के लिए नागयज्ञ शुरू कराया। कहा जाता है कि इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग अग्नि में गिरने लगे थे। इसी दौरान ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तीक ने यज्ञ को रुकवाया और नागों की रक्षा की। इस कथा को नाग पंचमी की धार्मिक परंपराओं से भी जोड़ा जाता है।

    नागों का उल्लेख कृष्ण की कथाओं में भी मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन की कथा भारतीय लोकजीवन में बेहद प्रसिद्ध है। वहीं महाभारत में भीम के नागलोक पहुंचने और वहां उन्हें असाधारण शक्ति प्राप्त होने का वर्णन मिलता है। मेघनाद द्वारा राम और लक्ष्मण को नागपाश में बांधने की कथा भी नागों के महत्व को दर्शाती है।

    भारतीय परंपरा में नागों को केवल भय और विष का प्रतीक नहीं माना गया बल्कि उन्हें शक्ति संरक्षण उर्वरता और प्रकृति से जोड़कर भी देखा गया है। कश्मीर का अनंतनाग भी नाग परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नाम है। इतिहास और लोककथाओं में इस क्षेत्र का संबंध नागों से बताया गया है।

    इस तरह कालसर्प दोष की ज्योतिषीय मान्यताओं से लेकर जन्मेजय के नागयज्ञ तक और कृष्ण की कालिया नाग कथा से लेकर शेषनाग की पौराणिक अवधारणा तक नाग भारतीय संस्कृति के अनेक स्तरों पर दिखाई देते हैं। यही वजह है कि नाग पंचमी केवल सांपों की पूजा का पर्व नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति पौराणिक परंपरा और धार्मिक प्रतीकों के बीच गहरे संबंध को समझने का अवसर भी है।

  • राजस्थान की रसोई से ब्रिटिश रॉयल पैलेस तक का सफर: मोतिहारी के नंद किशोर यादव ने रचा नया इतिहास

    राजस्थान की रसोई से ब्रिटिश रॉयल पैलेस तक का सफर: मोतिहारी के नंद किशोर यादव ने रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली । बिहार के मोतिहारी में जन्मे शेफ नंद किशोर यादव ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत से ब्रिटेन तक का उनका करीब ढाई दशक लंबा पाक कला का सफर अब ब्रिटिश शाही परिवार से जुड़ गया है। नंद किशोर यादव को स्कॉटलैंड के एडिनबरा स्थित ऐतिहासिक पैलेस ऑफ होलीरूडहाउस में आयोजित प्रतिष्ठित रॉयल गार्डन पार्टी में शामिल होने का निमंत्रण मिला। इस खास समारोह की मेजबानी ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला ने की। नंद के लिए यह सिर्फ एक समारोह में शामिल होने का अवसर नहीं था बल्कि उनके लंबे संघर्ष और उपलब्धियों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान भी थी।

    रॉयल गार्डन पार्टी ब्रिटिश शाही परिवार के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। गर्मियों के दौरान ब्रिटिश सम्राट एक सप्ताह स्कॉटलैंड में बिताते हैं जिसे होलीरूड वीक या रॉयल वीक के नाम से जाना जाता है। इसी दौरान आयोजित होने वाली गार्डन पार्टी में समाज के अलग अलग क्षेत्रों और समुदायों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को आमंत्रित किया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित आयोजन में नंद किशोर यादव का पहुंचना उनके लिए खास गौरव का विषय रहा।

    नंद किशोर यादव ने इस अनुभव को अपनी जिंदगी के यादगार पलों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि पैलेस ऑफ होलीरूडहाउस में आमंत्रित किया जाना उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। भारत से ब्रिटेन आकर जीवन और करियर बनाने के बाद इस तरह के महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए ऐसी याद है जिसे वह जीवनभर संजोकर रखेंगे। उन्होंने बताया कि पैलेस में खड़े होकर उन्होंने अपने अब तक के पूरे सफर को याद किया और अपनी जड़ों को लेकर गर्व महसूस किया।

    नंद किशोर यादव का जन्म मोतिहारी में हुआ था और उनके पाक कला करियर की शुरुआत वर्ष 1999 में हुई। उन्होंने राजस्थान के लग्जरी होटलों की रसोई से अपने पेशेवर सफर की शुरुआत की और अलग अलग भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में Carnival Cruise पर काम किया जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय शेफ के साथ काम करने और दुनिया भर के व्यंजनों को समझने का मौका मिला। इस अनुभव ने उनके पाक कला के दायरे को और व्यापक बनाया।

    वर्ष 2007 में नंद ब्रिटेन पहुंचे। यहां उन्होंने फाइन डाइनिंग के क्षेत्र में काम किया और ब्रिटिश सेलिब्रिटी शेफ गॉर्डन रामसे के नेतृत्व में भी अनुभव हासिल किया। करीब 25 वर्षों के करियर में उन्होंने भारतीय फ्रेंच इटैलियन मेडिटेरेनियन और साउथ अमेरिकन कुजीन में विशेषज्ञता हासिल की। खास तौर पर फ्यूजन कुजीन के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

    आज नंद किशोर यादव लंदन के पास होलीपोर्ट गांव में लोकप्रिय पब The White Hart से जुड़े हैं। वह पुरस्कार विजेता शेफ और कैटरर के तौर पर भी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि शाही समारोह का निमंत्रण उनकी भारतीय विरासत ब्रिटेन की हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में उनके सफर और समुदाय के लिए किए गए काम का सम्मान है।

    नंद ने अपने पेशे को सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रखा। वह Mission Possible पहल के जरिए The White Hart को समुदाय से जुड़ी जगह के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके अलावा पत्नी और बेटियों के नाम पर शुरू किए गए Ninaya Catering के जरिए दक्षिण पूर्व इंग्लैंड में प्रामाणिक भारतीय व्यंजनों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। मोतिहारी से शुरू हुआ नंद किशोर यादव का सफर अब ब्रिटेन के शाही दरबार तक पहुंच चुका है और उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो हुनर और मेहनत के दम पर दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं।

  • जहां दावत बनी खूनी साजिश और नदी का नाम पड़ा हलाली: जानिए जगदीशपुर किले की 300 साल पुरानी रहस्यमयी कहानी

    जहां दावत बनी खूनी साजिश और नदी का नाम पड़ा हलाली: जानिए जगदीशपुर किले की 300 साल पुरानी रहस्यमयी कहानी


    भोपाल । भोपाल से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित जगदीशपुर का ऐतिहासिक किला मध्यप्रदेश के उन विरासत स्थलों में शामिल है जहां इतिहास की कई परतें आज भी दिखाई देती हैं। कभी जगदीशपुर के नाम से पहचाने जाने वाले इस स्थान ने करीब तीन सौ साल पहले मध्य भारत की राजनीति की दिशा बदल दी थी। इसी किले से दोस्त मोहम्मद खान ने अपनी सत्ता की शुरुआत की थी और आगे चलकर यही सत्ता भोपाल रियासत की नींव बनी। आज सदियां बीत जाने के बाद भी जगदीशपुर एक बार फिर राजनीतिक और ऐतिहासिक चर्चा के केंद्र में है। 19 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में ऐतिहासिक चमन महल में हुई विशेष कैबिनेट बैठक ने इस स्थान को फिर सुर्खियों में ला दिया।

    इतिहास के अनुसार जगदीशपुर किले का निर्माण 17वीं शताब्दी में देवड़ा चौहान राजपूत शासकों ने कराया था। उस समय यह क्षेत्र जगदीशपुर के नाम से जाना जाता था। बैरसिया पर अधिकार जमाने के बाद अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान की नजर जगदीशपुर पर थी। इतिहासकारों के मुताबिक उसने यहां के राजपूत शासक नरसिंह देवड़ा को थाल यानी बाणगंगा नदी के किनारे संधि वार्ता और दावत के लिए बुलाया। दावत के दौरान दोस्त मोहम्मद खान किसी बहाने वहां से बाहर निकला और इसके बाद अचानक हमला कर दिया गया।

    कहा जाता है कि नदी किनारे झाड़ियों में पहले से छिपे सैनिकों ने राजपूतों पर हमला बोल दिया। अचानक हुए इस हमले में बड़ी संख्या में राजपूत सैनिक मारे गए और दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया। इसके बाद उसने इसी स्थान को अपनी पहली राजधानी बनाया और जगदीशपुर का नाम बदलकर इस्लामनगर कर दिया। यही सत्ता आगे चलकर भोपाल रियासत में तब्दील हुई और करीब ढाई सौ वर्षों तक यहां नवाबों और बेगमों का शासन रहा।

    जगदीशपुर की कहानी से एक बेहद चर्चित लोककथा भी जुड़ी है। कहा जाता है कि उस नरसंहार में इतना रक्त बहा कि थाल यानी बाणगंगा नदी का पानी लाल हो गया था। इसी वजह से आगे चलकर इस नदी का नाम हलाली पड़ गया। हालांकि इस प्रसंग को इतिहास और लोकमान्यता के संदर्भ में अलग-अलग तरीके से देखा जाता है लेकिन यह कहानी आज भी जगदीशपुर के इतिहास का एक अहम हिस्सा मानी जाती है।
    जगदीशपुर की कहानी से एक बेहद चर्चित लोककथा भी जुड़ी है। कहा जाता है कि उस नरसंहार में इतना रक्त बहा कि थाल यानी बाणगंगा नदी का पानी लाल हो गया था। इसी वजह से आगे चलकर इस नदी का नाम हलाली पड़ गया। हालांकि इस प्रसंग को इतिहास और लोकमान्यता के संदर्भ में अलग-अलग तरीके से देखा जाता है लेकिन यह कहानी आज भी जगदीशपुर के इतिहास का एक अहम हिस्सा मानी जाती है।

    इस ऐतिहासिक स्थल का संबंध गिन्नौरगढ़ और रानी कमलापति की कहानी से भी जुड़ा है। गिन्नौरगढ़ गोंड साम्राज्य की अंतिम शासक रानी कमलापति की राजधानी थी। पति निजाम शाह की हत्या के बाद रानी ने दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी थी। इसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने दोस्त मोहम्मद खान की ताकत बढ़ाई और जगदीशपुर उसकी सत्ता का प्रमुख केंद्र बन गया।

    समय के साथ इस स्थान का नाम इस्लामनगर हो गया लेकिन वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने इसका मूल नाम जगदीशपुर बहाल कर दिया। यहां मौजूद चमन महल आज भी इस ऐतिहासिक दौर की भव्यता को अपने भीतर समेटे हुए है। मुगल और राजपूत स्थापत्य शैली के मेल से बने इस महल के मेहराबदार बरामदे नक्काशीदार झरोखे खुले आंगन फव्वारे और बाग-बगीचे बीते दौर की शाही विरासत की कहानी कहते हैं। परिसर में रानी महल विशाल परकोटे बुर्ज और पुराने प्रवेश द्वार भी मौजूद हैं जो उस समय की सैन्य व्यवस्था और स्थापत्य कला की झलक देते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस ऐतिहासिक परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित किया है।

    आज जगदीशपुर सिर्फ एक किला नहीं बल्कि भोपाल की सत्ता के उदय राजनीतिक संघर्ष लोककथाओं और स्थापत्य विरासत को अपने भीतर समेटे इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। इसकी दीवारों और खंडहरों में करीब तीन सदियों पुराने सत्ता संघर्ष की गूंज आज भी महसूस की जा सकती है।

  • बीजेपी संगठन में जल्द बड़ा बदलाव, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं-महिलाओं को मिल सकती है जगह

    बीजेपी संगठन में जल्द बड़ा बदलाव, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं-महिलाओं को मिल सकती है जगह


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठनात्मक बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को पार्टी की नई टीम का ऐलान हो सकता है। जनवरी में नितिन नवीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे और अब उनके नेतृत्व में संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक नई टीम में एक कोषाध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 9 राष्ट्रीय महामंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है। इसके अलावा करीब 15 मंत्री भी बनाए जाने की चर्चा है। बीजेपी के संविधान में संशोधन के बाद संगठन में 33 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में नई टीम में महिलाओं और युवाओं को खास प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। प्रत्येक वर्ग में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से कम से कम तीन पदाधिकारी शामिल किए जा सकते हैं।

    पार्ल्यामेंट्री बोर्ड का भी होगा गठन
    बीजेपी की सबसे बड़ी निर्णायक संस्था पार्ल्यामेंट्री बोर्ड का भी नए सिरे से गठन होना है। इसमें अध्यक्ष समेत अधिकतम 11 सदस्य हो सकते हैं। इसके साथ ही केंद्रीय चुनाव समिति का भी गठन किया जाएगा। फिलहाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनाती श्रीनिवासन और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव इसके सदस्य हैं।

    राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी बदलाव
    पार्टी की रणनीति और महत्वपूर्ण फैसलों पर विचार करने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसमें अध्यक्ष के अलावा 120 सदस्य हो सकते हैं। इनमें 40 महिलाओं का होना जरूरी है। वहीं राष्ट्रीय परिषद में राज्य परिषदों के निर्वाचित सदस्य, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष, राज्यों में विधान परिषद और विधानसभा के नेताओं, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा 20 मनोनीत सदस्य शामिल होंगे।

    युवाओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
    नितिन नवीन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उन्होंने अपनी नई टीम तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि उनकी टीम में युवाओं को ज्यादा जिम्मेदारी दी जा सकती है। संगठन में बदलाव के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मौजूदा संगठन में कई बड़े चेहरे
    वर्तमान बीजेपी संगठन में चार सदस्यीय मार्गदर्शक मंडल है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हैं। वहीं संसदीय बोर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा नितिन नवीन, राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा, बीए येदियुरप्पा, सर्वानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष शामिल हैं।

    मौजूदा संगठन में 11 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 7 राष्ट्रीय महासचिव, एक संयुक्त महासचिव, 11 राष्ट्रीय सचिव, सात मोर्चा अध्यक्ष, मीडिया प्रभारी, मीडिया सह-प्रभारी, कोषाध्यक्ष और सह-कोषाध्यक्ष समेत कई पद हैं। नई टीम में इन पदों पर बदलाव के साथ बीजेपी संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की तस्वीर साफ हो सकती है।

  • भोपाल में 17 साल के किशोर की हत्या से सनसनी: दो करोड़ के लालच में वारदात का आरोप, शरीर का हिस्सा गायब

    भोपाल में 17 साल के किशोर की हत्या से सनसनी: दो करोड़ के लालच में वारदात का आरोप, शरीर का हिस्सा गायब


    भोपाल  भोपाल में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले ने सनसनी फैला दी है। पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक किशोर को कथित तौर पर दो करोड़ रुपए कमाने के लालच में निशाना बनाया गया। पुलिस को आशंका है कि हत्या के बाद उसके शरीर के एक हिस्से को अलग कर कहीं भेजने की योजना बनाई गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुलिस स्तर पर जांच और पुष्टि अभी जारी है।

    शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र का रहने वाला किशोर अपने परिवार का इकलौता बेटा था और मोती मस्जिद इकबाल मैदान समेत आसपास के इलाकों में फेरी लगाकर पेन और कॉपी बेचता था। उसकी कमाई से ही परिवार का गुजारा चलता था। छह अगस्त को वह इकबाल मैदान क्षेत्र से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की।

    करीब पांच दिन बाद 11 अगस्त को किशोर का शव छोटे तालाब से बरामद हुआ। शव की स्थिति खराब होने के कारण तत्काल पहचान नहीं हो सकी। बाद में कपड़ों और चप्पलों के आधार पर 14 अगस्त को परिजनों ने उसकी पहचान की। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया।

    जांच के दौरान पुलिस ने रविवार को मुखबिर की सूचना पर एक नाबालिग संदेही को हिरासत में लिया। पूछताछ में कथित तौर पर किशोर की हत्या और उसके शरीर के एक हिस्से को अलग किए जाने से जुड़ी जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने जोहेब नेहा समेत कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। करीब 13 लोगों से पूछताछ की जा रही है जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल बताए जा रहे हैं।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों ने नाबालिगों को कथित तौर पर यह लालच दिया था कि शरीर के एक विशेष अंग को विदेश भेजकर करोड़ों रुपए कमाए जा सकते हैं। इसी लालच में किशोर को मदद करने का भरोसा देकर सुनसान स्थान पर ले जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि हत्या के बाद शरीर के एक हिस्से को अलग किया गया और उसे दिल्ली के रास्ते विदेश भेजने की योजना बनाई गई थी। इस कथित सौदे में शामिल लोगों और इसके पीछे मौजूद नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस पूछताछ कर रही है।

    आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने रविवार रात कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी। छोटे तालाब और आसपास के इलाकों में भी तलाश अभियान चलाया गया लेकिन शव का लापता हिस्सा अभी बरामद नहीं हुआ है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित साजिश के पीछे कौन लोग हैं और क्या वास्तव में किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से इसका संबंध है।

    मामले में उस समय एक नया मोड़ आया जब एक अन्य 17 वर्षीय किशोर अपने परिजनों के साथ थाने पहुंचा। उसने आरोप लगाया कि संदिग्धों ने उसे भी निशाना बनाने की कोशिश की थी। किशोर के मुताबिक आरोपियों ने उसे पकड़कर गला दबाने की कोशिश की और हथियार दिखाए। वह किसी तरह उनके चंगुल से निकलकर भाग गया। उसने यह भी दावा किया कि आरोपी आपस में हत्या के बाद शरीर से संबंधित हिस्सा निकालने की बात कर रहे थे।

    फिलहाल पुलिस दोनों घटनाओं के बीच संबंध की जांच कर रही है। पुलिस का मुख्य फोकस आरोपों की पुष्टि करने के साथ शव के लापता हिस्से की बरामदगी और पूरी साजिश में शामिल लोगों की पहचान पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

  • बालों की देखभाल के लिए घर पर बनाएं चावल, मेथी और लौंग का हेयर रिंस, जानें बनाने और लगाने का आसान तरीका

    बालों की देखभाल के लिए घर पर बनाएं चावल, मेथी और लौंग का हेयर रिंस, जानें बनाने और लगाने का आसान तरीका

    नई दिल्ली । बालों की देखभाल के लिए बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ लोग घर में मौजूद सामान्य सामग्री से तैयार किए गए नुस्खों को भी अपने हेयर केयर रूटीन में शामिल करते हैं। चावल, मेथी और लौंग से तैयार किया जाने वाला हेयर रिंस भी ऐसा ही एक घरेलू विकल्प है, जिसे बनाना आसान है और इसके लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती।

    इस होममेड हेयर रिंस को तैयार करने के लिए चावल, मेथी दाना, लौंग और पानी की जरूरत होती है। इसे बनाने से पहले सभी सामग्रियों को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि किसी भी मिश्रण को बाल झड़ने या स्कैल्प की समस्या का निश्चित इलाज नहीं माना जा सकता।

    रिंस बनाने के लिए सबसे पहले एक कप पानी में करीब चार बड़े चम्मच चावल, एक से दो चम्मच मेथी दाना और कुछ लौंग डालें। इन सभी चीजों को साफ पानी से धोने के बाद एक बर्तन में डालकर करीब छह से आठ घंटे के लिए भिगोकर रखा जा सकता है। इसे रातभर भिगोकर रखने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

    अगले चरण में इसी मिश्रण को धीमी आंच पर करीब 10 से 15 मिनट तक उबालना होता है। उबालने के बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद इसे साफ कपड़े या छन्नी की सहायता से अच्छी तरह छान लें, ताकि पानी में किसी सामग्री के टुकड़े न रह जाएं।

    तैयार किए गए रिंस को साफ स्प्रे बोतल में भरकर रखा जा सकता है। हालांकि इसे तैयार करने और स्टोर करने के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। घर पर बनाए गए किसी भी मिश्रण को लंबे समय तक रखने के बजाय कम मात्रा में तैयार करके ताजा इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

    बाल धोने के बाद इस रिंस को स्कैल्प और बालों की लंबाई पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय बालों पर रहने देने के बाद साफ पानी से धो लें। पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोगों को सीधे ज्यादा मात्रा लगाने के बजाय थोड़ी मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए।

    मेथी, चावल और लौंग जैसे घरेलू ingredients को लेकर अलग-अलग पारंपरिक हेयर केयर तरीके प्रचलित हैं, लेकिन इनके प्रभाव व्यक्ति के बालों और स्कैल्प की स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए इसे बालों की सामान्य देखभाल के विकल्प के तौर पर ही देखना चाहिए।

    अगर इस रिंस के इस्तेमाल के बाद स्कैल्प में खुजली, जलन, लालिमा या किसी अन्य तरह की परेशानी महसूस होती है, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। किसी भी घरेलू मिश्रण को लगाने से पहले संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    बालों का लगातार या सामान्य से काफी अधिक झड़ना किसी अन्य कारण से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय समस्या के कारण का पता लगाना जरूरी है। स्कैल्प से जुड़ी परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

  • बालों की देखभाल के लिए घर पर बनाएं चावल, मेथी और लौंग का हेयर रिंस, जानें बनाने और लगाने का आसान तरीका

    बालों की देखभाल के लिए घर पर बनाएं चावल, मेथी और लौंग का हेयर रिंस, जानें बनाने और लगाने का आसान तरीका

    नई दिल्ली । बालों की देखभाल के लिए बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ लोग घर में मौजूद सामान्य सामग्री से तैयार किए गए नुस्खों को भी अपने हेयर केयर रूटीन में शामिल करते हैं। चावल, मेथी और लौंग से तैयार किया जाने वाला हेयर रिंस भी ऐसा ही एक घरेलू विकल्प है, जिसे बनाना आसान है और इसके लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती।

    इस होममेड हेयर रिंस को तैयार करने के लिए चावल, मेथी दाना, लौंग और पानी की जरूरत होती है। इसे बनाने से पहले सभी सामग्रियों को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि किसी भी मिश्रण को बाल झड़ने या स्कैल्प की समस्या का निश्चित इलाज नहीं माना जा सकता।

    रिंस बनाने के लिए सबसे पहले एक कप पानी में करीब चार बड़े चम्मच चावल, एक से दो चम्मच मेथी दाना और कुछ लौंग डालें। इन सभी चीजों को साफ पानी से धोने के बाद एक बर्तन में डालकर करीब छह से आठ घंटे के लिए भिगोकर रखा जा सकता है। इसे रातभर भिगोकर रखने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

    अगले चरण में इसी मिश्रण को धीमी आंच पर करीब 10 से 15 मिनट तक उबालना होता है। उबालने के बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद इसे साफ कपड़े या छन्नी की सहायता से अच्छी तरह छान लें, ताकि पानी में किसी सामग्री के टुकड़े न रह जाएं।

    तैयार किए गए रिंस को साफ स्प्रे बोतल में भरकर रखा जा सकता है। हालांकि इसे तैयार करने और स्टोर करने के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। घर पर बनाए गए किसी भी मिश्रण को लंबे समय तक रखने के बजाय कम मात्रा में तैयार करके ताजा इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

    बाल धोने के बाद इस रिंस को स्कैल्प और बालों की लंबाई पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय बालों पर रहने देने के बाद साफ पानी से धो लें। पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोगों को सीधे ज्यादा मात्रा लगाने के बजाय थोड़ी मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए।

    मेथी, चावल और लौंग जैसे घरेलू ingredients को लेकर अलग-अलग पारंपरिक हेयर केयर तरीके प्रचलित हैं, लेकिन इनके प्रभाव व्यक्ति के बालों और स्कैल्प की स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए इसे बालों की सामान्य देखभाल के विकल्प के तौर पर ही देखना चाहिए।

    अगर इस रिंस के इस्तेमाल के बाद स्कैल्प में खुजली, जलन, लालिमा या किसी अन्य तरह की परेशानी महसूस होती है, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। किसी भी घरेलू मिश्रण को लगाने से पहले संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    बालों का लगातार या सामान्य से काफी अधिक झड़ना किसी अन्य कारण से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय समस्या के कारण का पता लगाना जरूरी है। स्कैल्प से जुड़ी परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।