Author: bharati

  • गाजा संघर्ष: युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी, मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग की..

    गाजा संघर्ष: युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी, मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग की..


    नई दिल्ली। वाशिंगटन/गाजा। गाजा संघर्ष में हालिया रिपोर्टों ने इजराइल पर कथित रूप से ‘वैक्यूम’ या थर्मोबैरिक बम इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन आरोपों की गंभीरता पर ध्यान देते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार यह हथियार पहले हवा में ज्वलनशील कणों का बादल फैलाते हैं और फिर उसे विस्फोटित करते हैं, जिससे अत्यधिक ताप और दबाव उत्पन्न होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंद या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका असर व्यापक विनाशकारी होता है।

    गाजा की सिविल डिफेंस एजेंसियों के अनुसार कई घटनाओं में शव तक नहीं मिले और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। आधिकारिक युद्धविराम लागू होने के बावजूद हिंसा जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, युद्धविराम के बाद भी सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इस स्थिति ने क्षेत्र में मानवीय संकट और सामाजिक अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।

    मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल हुआ, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से तत्काल जांच की अपील की है। हालांकि इन आरोपों पर इजराइल की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से नहीं आई है।

    संघर्ष के कारण गाजा का बुनियादी ढांचा व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के आकलनों के अनुसार बड़ी आबादी विस्थापन, भोजन और पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि युद्ध की लंबी अवधि का प्रभाव क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर गहरा पड़ेगा।

    इसी बीच अमेरिका और इजराइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, मानवीय सहायता और युद्धविराम को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत भी हुई। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि चर्चा जारी है, लेकिन ठोस प्रगति की अभी पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्रीय स्थिरता, मानवाधिकारों की रक्षा और मानवीय सहायता वितरण इस समय अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

    वैश्विक समुदाय इस पर नजर बनाए हुए है कि क्या गाजा में हथियारों के कथित इस्तेमाल की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा और नागरिक हताहतों की संख्या ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है।

  • इंदौर में सनसनीखेज हत्याकांड: फोटो स्टूडियो कर्मचारी की गला रेतकर हत्या, अवैध संबंधों के शक में तफ्तीश शुरू

    इंदौर में सनसनीखेज हत्याकांड: फोटो स्टूडियो कर्मचारी की गला रेतकर हत्या, अवैध संबंधों के शक में तफ्तीश शुरू

    इंदौर । मध्य प्रदेश स्वच्छता में नंबर वन रहने वाले शहर इंदौर में अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। शहर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में एक युवक की बेरहमी से हत्या का मामला प्रकाश में आया है। हमलावरों ने युवक की गर्दन पर धारदार हथियार से वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया और शव को सुनसान इलाके में फेंक कर फरार हो गए। मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी खोजराम पिता लखन नारंगे के रूप में हुई है, जो इंदौर में एक फोटो स्टूडियो में काम कर अपनी आजीविका चला रहा था।

    वारदात का खुलासा और पुलिस की कार्रवाई घटना की जानकारी तब लगी जब राहगीरों ने बाणगंगा क्षेत्र के एक एकांत स्थान पर लहूलुहान हालत में शव पड़ा देखा। सूचना मिलते ही बाणगंगा थाना पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि युवक की हत्या कहीं और की गई या फिर सुनसान इलाके का फायदा उठाकर उसे वहीं मौत के घाट उतारा गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भिजवा दिया है।

    अवैध संबंधों के एंगल पर टिकी जांच फिलहाल हत्या के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन पुलिस के रडार पर कई संदिग्ध बिंदु हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस तरह से गला रेतकर हत्या की गई है, वह किसी रंजिश या आवेश का परिणाम लग रही है। पुलिस इस मामले में ‘अवैध संबंधों’ के एंगल को प्रमुखता से देख रही है। पुलिस मृतक के मोबाइल कॉल डिटेल्स खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह आखिरी बार किसके संपर्क में था और स्टूडियो से निकलने के बाद वह कहाँ गया था।

    खोजराम मूलतः छत्तीसगढ़ का रहने वाला था, ऐसे में पुलिस उसके साथियों और स्टूडियो के कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि किसी पुरानी दुश्मनी या विवाद का सुराग मिल सके। बाणगंगा थाना पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • विजया एकादशी कब है 2026 : फाल्गुन में पहली एकादशी, शत्रुओं पर विजय और सफलता का उपाय

    विजया एकादशी कब है 2026 : फाल्गुन में पहली एकादशी, शत्रुओं पर विजय और सफलता का उपाय


    नई दिल्ली । विजया एकादशी हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। यह एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है और विशेष रूप से सफलता विजय बाधाओं पर जीत और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए मनाई जाती है। 2026 में विजया एकादशी का धार्मिक महत्व और तारीख सभी भक्तों के लिए निश्चित हो चुकी है जिसे जानकर आप सही विधि और मुहूर्त के अनुसार व्रत रख सकते हैं।

    विजया एकादशी व्रत की सही तारीख और समय

    इस वर्ष विजया एकादशी शुक्रवार 13 फरवरी 2026 को है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी दोपहर 12:22 बजे से शुरू होकर 13 फरवरी दोपहर 02:25 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण द्वादशी को व्रत खोलना 14 फरवरी 2026 शनिवार की सुबह लगभग 07:00 से 09:14 बजे तक किया जाएगा।

    क्यों है यह एकादशी महत्वपूर्ण?
    विजया एकादशी का अर्थ ही विजय होता है। पुराणों के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा से जीवन के हर क्षेत्र में विजय दिलाने वाला माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति जीवन में कठिनाइयों शत्रुओं बाधाओं या नकारात्मक परिस्थितियों का सामना कर रहा है तो इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से सफलता और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। यही कारण है कि यह एकादशी वैदिक परंपरा में विशेष महत्व रखती है।
    व्रत कैसे रखें
    विजया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर व्यक्ति स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि स्वास्थ्य अनुकूल हो तो केवल जल का सेवन कर व्रत रखा जाए; लेकिन अगर स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार भी किया जा सकता है। व्रत के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और भजन-कीर्तन करने से व्रत की सिद्धि और अधिक होती है।
    ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय यह सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र है जिसका जाप श्रद्धा से करने पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

    धार्मिक मान्यता:विजया एकादशी व्रत को श्रीराम ने लंका विजय से पहले किया था इसलिए इसे विजय-दायक व्रत के रूप में अत्यंत फलदायी माना जाता है। भक्तजन इस दिन भगवान विष्णु की पूजा फलाहार व भजन-कीर्तन के साथ व्रत रखते हैं और निरंतर मन में सकारात्मक ऊर्जा और विजय की भावना बनाए रखते हैं।

  • 'रंग में भंग डालने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई', CM योगी का त्योहारों को लेकर सख्त आदेश

    'रंग में भंग डालने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई', CM योगी का त्योहारों को लेकर सख्त आदेश

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को होली, महाशिवरात्रि और रमजान सहित विभिन्न त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्ती से निपटने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने यहां लोक भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक की.

    बैठक में सभी मंडलों, पुलिस जोन, रेंज और जनपदों के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि दो से चार मार्च तक होली का पर्व मनाया जाएगा और ब्रज क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में उत्सव का माहौल रहेगा.

    रंग में भंग डालने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई- सीएम योगी

    उन्होंने निर्देश दिए कि शोभायात्राओं में उपद्रवी तत्वों की घुसपैठ किसी भी स्थिति में न होने पाए और रंग में भंग डालने या उन्माद फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. सीएम योगी ने कहा कि विगत वर्षों की घटनाओं से सीख लेते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सतर्कता, निगरानी और प्रबंधन को और मजबूत किया जाए. उन्होंने कहा कि होलिका दहन केवल परंपरागत स्थलों पर ही कराया जाए और सड़क के बीच किसी भी स्थिति में न किया जाए.

    इसके साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाली पोस्ट पर भी सतत निगरानी रखने के निर्देश दिये गये. मुख्यमंत्री ने महाशिवरात्रि, होली और रमजान के साथ ही माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं, जनगणना और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों को देखते हुए शांति, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए.

    कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित- सीएम योगी

    उन्होंने कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की दुर्घटना रोकने के लिए पुलिस व प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा. पुलिस महानिदेशक ने बताया कि संबंधित दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने वाराणसी, मेरठ, लखीमपुर खीरी और बाराबंकी के जिलाधिकारियों से महाशिवरात्रि की तैयारियों की जानकारी ली.

    उन्होंने कहा कि 14 और 15 फरवरी को प्रमुख शिवधामों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, इसलिए सुगम दर्शन, यातायात, पार्किंग, महिला सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें 24 घंटे सक्रिय रहें. सीएम योगी ने कहा कि मंदिर परिसरों में पर्याप्त महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाए.

    बोर्ड परीक्षाएं नकलविहीन हों- सीएम योगी

    मुख्यमंत्री ने यातायात जाम के स्थायी समाधान, रात्रि 10 बजे के बाद डीजे व तेज ध्वनि उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध के कड़ाई से पालन और धर्मस्थलों के आसपास भिक्षावृत्ति पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि 18 फरवरी से शुरू हो रही 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नकलविहीन हों और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए.

    किसी नई परंपरा की शुरुआत न हो- सीएम योगी

    सीएम योगी ने रमजान और संभावित रूप से 21 मार्च को ईद के मद्देनजर धर्मगुरुओं से संवाद बनाए रखने और किसी नई परंपरा की शुरुआत न होने देने के निर्देश भी दिए. मुख्यमंत्री ने बताया कि 19 मार्च से नवरात्र और इसके बाद रामनवमी का पर्व आएगा तथा इन सभी आयोजनों की तैयारियां समय से पूरी की जाएं व जनगणना के प्रथम चरण के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं.

  • पोस्त भूसी तस्करी मामले में ग्वालियर HC ने उठाया कड़ा कदम, जांच अधिकारियों पर कार्रवाई

    पोस्त भूसी तस्करी मामले में ग्वालियर HC ने उठाया कड़ा कदम, जांच अधिकारियों पर कार्रवाई


    ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट ने शिवपुरी के एक एनडीपीएस मामले में पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद शिवपुरी एसपी अमन सिंह राठौड़ ने तत्काल प्रभाव से देहात थाना प्रभारी समेत पांच अधिकारियों को लाइन अटैच कर दिया। यह मामला 1209 किलो पोस्त भूसी की तस्करी से जुड़ा है जिसमें थाने से 62 सैंपल बैग गायब होने की गंभीर जानकारी सामने आई।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जांच सच्चाई सामने लाने के बजाय उसे छिपाने जैसी प्रतीत हो रही है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कई मामलों में पुलिस केवल ड्राइवर या कैरियर तक कार्रवाई सीमित कर देती है, जबकि तस्करी के मुख्य सरगना तक पहुंचने का प्रयास नहीं किया जाता। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर जांचीय कमी मानते हुए कड़ा रुख अपनाया।

    यह मामला इंदौर से चंडीगढ़ भेजी जा रही 1209 किलो पोस्त भूसी की जब्ती से संबंधित है। अदालत ने पाया कि न तो माल भेजने वालों की समुचित जांच हुई और न ही प्राप्तकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट की गई। सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि जब्त मादक पदार्थ से जुड़े 62 सैंपल बैग थाने से गायब पाए गए। पुलिस ने 17 जनवरी 2025 को सामग्री के निस्तारण का हवाला दिया, जबकि सैंपल बैग उपलब्ध नहीं थे और ट्रायल कोर्ट में जब्त सामग्री प्रस्तुत भी नहीं की गई।

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उस समय पदस्थ थाना प्रभारी और जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की जाए तथा जांच पूरी होने तक उन्हें किसी थाने का प्रभार न दिया जाए। कोर्ट ने तीन माह के भीतर शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी भोपाल और एडीजी नारकोटिक्स इंदौर को यह निर्देश भी दिए गए कि सभी जिलों में एनडीपीएस मामलों में ‘एपेक्स परपेरेटर्स’ की पहचान और कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

    एसपी राठौड़ ने देहात थाना प्रभारी जितेंद्र मावई, उप निरीक्षक राघवेंद्र यादव और हरिशंकर शर्मा को लाइन अटैच किया है। इसके अतिरिक्त बालाघाट में पदस्थ उप निरीक्षक अंकित उपाध्याय और राजगढ़ में पदस्थ निरीक्षक मनीष शर्मा पर भी समान कार्रवाई की गई है। दो संबंधित अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

    इस मामले में विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट, शिवपुरी ने 26 सितंबर 2025 को आरोपी जगशीर को धारा 8/15सी के तहत दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बाद में सजा स्थगन संबंधी अर्जी वापस ले ली गई।

    ग्वालियर हाईकोर्ट की यह कार्रवाई न केवल शिवपुरी पुलिस के लिए चेतावनी है बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में एनडीपीएस मामलों में जांच की गंभीरता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकती है। न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि जांच अधिकारी केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए काम नहीं कर सकते, बल्कि तस्करी के असली सरगनाओं तक पहुंचने का प्रयास करना अनिवार्य है।

  • आर्थिक दबाव और कर्ज के चलते व्यापारी ने किया आत्महत्या का प्रयास, पुलिस जांच में जुटी

    आर्थिक दबाव और कर्ज के चलते व्यापारी ने किया आत्महत्या का प्रयास, पुलिस जांच में जुटी


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के चंदन नगर में एक व्यापारी ने बुधवार रात कथित आर्थिक दबाव और कर्ज की परेशानियों के चलते जहर खा लिया। परिजन उसे तुरंत मालवा अस्पताल ले गए, जहां उसे गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया। व्यापारी ने जहर सेवन से पहले एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें उसने तीन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए।

    घटना से जुड़े अनुसार घायल व्यापारी मोहम्मद मोसीन, पुत्र मोहम्मद अशरफ, चंदन नगर का निवासी है। उसके मोबाइल से प्राप्त वीडियो में उसने बंबई बाजार और कड़ाव घाट क्षेत्र के रहने वाले मुन्ना दूधवाले, अकरम और शकील चौधरी को जिम्मेदार ठहराया। वीडियो में मोसीन ने अपनी जान को खतरे में बताने के साथ आर्थिक दबाव की जानकारी दी।

    मामले की जांच में सामने आया कि मोसीन ने वर्ष 2023-24 के दौरान व्यापारिक जरूरतों के लिए करीब 10 लाख रुपये ब्याज पर लिए थे। वीडियो में उसने दावा किया कि उस पर साप्ताहिक 65 हजार रुपये ब्याज का दबाव बनाया गया और अब तक वह 60 से 70 लाख रुपये चुका चुका है। उसने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लोगों ने उसके मकान की रजिस्ट्री और लगभग 30 चेक अपने पास रखे हैं और उन्हें लौटाने के लिए अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही थी।

    पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचकर सुरक्षा सुनिश्चित की। मोसीन की हालत गंभीर होने के कारण फिलहाल उसका बयान दर्ज नहीं किया जा सका। हालांकि परिजनों से पूछताछ की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि व्यापारी ने छह फरवरी को पंढरीनाथ थाने में लिखित आवेदन देकर लेन-देन और दस्तावेज लौटाने की शिकायत की थी। अब वीडियो की तकनीकी जांच भी कराई जा रही है और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जाएगी।

    कानून विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में जबरन वसूली, धमकी या अवैध ब्याज वसूली के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। प्रशासन ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की आर्थिक प्रताड़ना या दबाव की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने बताया कि व्यापारी की स्थिति स्थिर होने के बाद उसका बयान दर्ज किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय होगी। इसके साथ ही अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त प्रबंध किए हैं। स्थानीय व्यापारिक समुदाय में भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है, और व्यापारियों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की है। घटना ने शहर में कर्ज और आर्थिक दबाव के चलते बढ़ते तनाव की ओर ध्यान खींचा है। पुलिस और प्रशासन दोनों मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुटे हैं।

  • लाडली से लखपति बिटिया: अब नई योजना में दोबारा आवेदन अनिवार्य

    लाडली से लखपति बिटिया: अब नई योजना में दोबारा आवेदन अनिवार्य


    नई दिल्ली । दिल्ली सरकार ने बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। वर्ष 2008 से चल रही लाडली योजना को 31 मार्च 2026 को बंद कर दिया जाएगा और 1 अप्रैल 2026 से उसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना लागू होगी, जिसका उद्देश्य बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता देना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नई योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और इसे पूरी तरह डिजिटल मोड में लागू किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और सहजता बनी रहे।

    नई लखपति बिटिया योजना के तहत सरकार बेटी के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन या डिप्लोमा तक अलग-अलग शैक्षणिक पड़ावों पर कुल 56,000 रुपये जमा करेगी, जो समय के साथ मिलकर ब्याज सहित 1 लाख रुपये से अधिक हो सकते हैं। यह राशि सीधे बेटी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। राशि निकासी की शर्तों के अनुसार, यह 18 वर्ष की आयु पूरी होने और 12वीं पास करने पर या 21 वर्ष की आयु में ग्रेजुएशन/डिप्लोमा पूरा करने के बाद की जा सकेगी।

    इस योजना में राशि चरणबद्ध रूप से दी जाएगी। जन्म के समय 11,000 रुपये, कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश पर 5,000-5,000 रुपये, कक्षा 10 पास करने पर 5,000 रुपये, कक्षा 12 में प्रवेश पर 5,000 रुपये और ग्रेजुएशन या डिप्लोमा के दौरान 20,000 रुपये दिए जाएंगे। कुल मिलाकर 56,000 रुपये की सरकारी सहायता बेटियों के खाते में जमा होगी, जो मैच्योरिटी पर बढ़कर करीब एक लाख रुपये बन सकती है।

    योजना का लाभ केवल उन्हीं बेटियों को मिलेगा जिनका जन्म दिल्ली में हुआ है और जिनका परिवार कम से कम तीन साल से राजधानी में रह रहा है। परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और हर परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही योजना के लिए पात्र होंगी। लाभार्थी को मान्यता प्राप्त संस्थान से पढ़ाई करनी होगी और पूरा टीकाकरण अनिवार्य है। 18 साल से पहले शादी हो जाने पर लाभ निरस्त कर दिया जाएगा; यदि निर्धारित शर्तों पर क्लेम समय पर नहीं किया गया तो राशि सरकार को वापस चली जाएगी।

    सबसे अहम सवाल यह है कि क्या नई योजना में दोबारा आवेदन करना होगा? सरकार ने स्पष्ट कहा है कि लाडली योजना 31 मार्च 2026 को बंद होगी और नई लखपति बिटिया योजना 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, इसलिए पात्र लाभार्थियों को इसके लिए अलग से आवेदन करना होगा। आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे किसी सरकारी दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। नई पात्र बेटियों को तय शर्तों के अनुसार आवेदन करना होगा।

    सरकार ने यह भी बताया है कि लाडली योजना के कई खाते मैच्योरिटी के बाद भी क्लेम नहीं किए गए थे। ऐसे लंबित मामलों में भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बड़ी राशि लाभार्थियों को जारी की जा चुकी है। योजना के लिए शुरुआती तौर पर लगभग 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और लाडली योजना की अप्रयुक्त राशि को भी नई लखपति बिटिया योजना में समायोजित किया जाएगा ताकि बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सहयोग निरंतर जारी रह सके।

  • गुरुवार की शाम में करें ये खास उपाय, मां लक्ष्मी की बरसात होगी आपके घर पर

    गुरुवार की शाम में करें ये खास उपाय, मां लक्ष्मी की बरसात होगी आपके घर पर


    नई दिल्ली । गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है और इस दिन किए गए उपायों का प्रभाव भी जल्दी दिखता है। अगर आप चाहते हैं कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और धन की कमी दूर हो, तो गुरुवार की शाम को प्रदोष काल में कुछ खास उपाय जरूर करें। मान्यता है कि शाम के समय घर में मां लक्ष्मी के आगमन का समय होता है और इस समय दीपक जलाने से वे प्रसन्न होती हैं। इसलिए घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इस उपाय से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए गुरुवार की शाम को ईशान कोण में दीपक जलाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और धन लाभ के योग बनते हैं। खासकर जब यह दीपक प्रदोष काल में जलाया जाए तो इसके प्रभाव और भी बढ़ जाते हैं।

    इसके अलावा, शाम के समय घर के आंगन में दीपक जलाना भी शुभ होता है। पुराने समय में लोग आंगन में दीपक जलाकर अंधेरे को दूर करते थे। आज भी अगर आप अपने आंगन में दीपक जलाते हैं, तो इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए प्रदोष काल में तुलसी के पास दीपक जलाने से धन संबंधी परेशानियां कम होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही, घर के मंदिर में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से विष्णु-लक्ष्मी की कृपा से घर में धन लाभ होता है और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है।

    गुरुवार की शाम को इन उपायों को नियमित रूप से करने से न केवल घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि धन-लाभ के अवसर भी बढ़ते हैं। अगर आप सच्‍चे मन से और श्रद्धा के साथ दीपक जलाएंगे तो माना जाता है कि मां लक्ष्मी आपके घर पर अपनी कृपा बरसाएंगी और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहेगी।

  • 'उन्हें निक संग मेरी शादी टूटने का इंतजार…', बोलीं प्रियंका चोपड़ा, हेटर्स को दिया जवाब

    'उन्हें निक संग मेरी शादी टूटने का इंतजार…', बोलीं प्रियंका चोपड़ा, हेटर्स को दिया जवाब

    नई दिल्ली। ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी इंडियन सिनेमा में कमबैक फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं. उनके इंडियन फैन्स उन्हें फिर से बड़े पर्दे पर इंडियन अवतार में देखने के लिए उत्सुक हैं. हाल ही में प्रियंका ने एक इंटरव्यू में अपनी अपकमिंग फिल्म से लेकर पर्सनल लाइफ से जुड़ी कुछ बातें साझा की हैं.

    निक से शादी के वक्त उठे सवाल?

    प्रियंका चोपड़ा ने वैराइटी इंडिया से अपनी चर्चित शादी को लेकर बात की है. उन्होंने बताया कि कैसे हॉलीवुड के फेमस सिंगर-एक्टर निक जोनस संग शादी को लेकर कई लोगों को आपत्ति थी. एक्ट्रेस ने साथ ही साथ अपनी शादी टूटने की बातों पर भी रिएक्ट किया. प्रियंका ने कहा, ‘हमारी शादी को अब 8 साल हो गए हैं. अगर लोग अभी भी इंतजार कर रहे हैं कि ये रिश्ता कब टूटेगा या बर्बाद होगा, तो वो उनकी मर्जी.’

    ‘मैंने तो अब इसके बारे में सोचना ही छोड़ दिया है. पता नहीं हमने ऐसा क्या किया जो लोगों को हमारा रिश्ता इतना खटकता था. शायद इसलिए क्योंकि हम अलग-अलग देशों से हैं, अलग-अलग धर्म के हैं, और उम्र में भी फर्क है. ये सब सुनकर बहुत दुख होता था.’ प्रियंका बताती हैं कि उन्हें अब अपने रिश्ते को लेकर होने वाली चर्चाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता. वो और निक अब एक-दूसरे में खोए रहते हैं, बाहरी दुनिया से खुद को अलग कर चुके हैं.
    पति निक की तारीफ में क्या बोलीं प्रियंका?

    प्रियंका ने आगे अपने पति निक जोनस के बारे में भी बात की और उनकी तारीफ में भी कुछ बातें कहीं. उन्होंने कहा, ‘हमारी शादी बहुत जल्दी हो गई थी, मिलने के सिर्फ छह महीने में. जब मैंने निक से शादी की, तो मुझे भी लग रहा था कि ये सच में हो रहा है या नहीं. उनका ये वाला हिस्सा… मतलब मुझे लगा कि ये सब नकली है, ये दिखावा है, ये पागलपन है. लेकिन निक में सच्चाई है, पूरी ईमानदारी है. ये बात मुझे हर रोज इंस्पायर करती है.’

    ‘मेरे प्रोफेशन में तो हर बार कुछ ना कुछ बनना पड़ता है, रोल बदलना पड़ता है, जो दिखाना हो वो दिखाना पड़ता है. लेकिन निक दिन भर जो भी बात करते हैं, जिससे भी बात करते हैं, वो हमेशा बिल्कुल सच्चे रहते हैं. वो बहुत छोटी उम्र से काम करने लगे थे. उनके मम्मी-पापा बहुत अच्छे, समझदार और सच्चे इंसान हैं, संत जैसे. तो मुझे पता चल गया कि ये गुण कहां से आए. ये उनकी ऐसी खूबी है जो सबको हैरान कर देती है, कोई बचाव नहीं कर पाता.’

    प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की शादी साल 2018 में हुई थी. दोनों के बीच लगभग 10 साल का अंतर है, जिसपर कई लोगों ने सवाल खड़े किए थे. मगर कपल ने हमेशा उन सभी सवालों का अपनी दमदार केमिस्ट्री से मुंह तोड़ जवाब दिया. अब दोनों एक बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनस के पेरेंट्स भी हैं, जिनका जन्म साल 2022 में हुआ था.

    डिजिटल और प्रिंट जर्नलिज्म में करीब 8 साल से अधिक का अनुभव। मनोरंजन, लाइफ स्टाइल पर काम कर चुकी हूं। कानपुर, मेरठ, रोहतक, जयपुर और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुकी हूं। कानपुर यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया है। साथ ही भारतीय विद्या भवन से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। हिन्दुस्तान लाइव से जुड़ने से पहले हिन्दुस्तान प्रिंट मीडिया, दैनिक भास्कर प्रिंट, राजस्थान पत्रिका डिजिटल, गृहलक्ष्मी, दैनिक जागरण डिजिटल जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। पिछले एक साल से प्रीति कुशवाहा लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़ी हैं और एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं।और पढ़ें

  • जबलपुर में छात्र हॉस्टल से लापता, स्कूल परिसर में मिली सुरक्षा की बड़ी चूक..

    जबलपुर में छात्र हॉस्टल से लापता, स्कूल परिसर में मिली सुरक्षा की बड़ी चूक..


    जबलपुर। माढ़ोताल थाना क्षेत्र के ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल हॉस्टल से दो छात्र अचानक लापता हो गए, जिसके बाद रात भर हड़कंप मच गया। बुधवार रात छात्र हॉस्टल में नहीं लौटे तो स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम रात करीब 12 बजे स्कूल पहुंची और परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। फुटेज में छात्र स्कूल परिसर से बाहर जाते दिखाई नहीं दिए।

    इस पर स्कूल के सभी ब्लॉक्स और कक्षाओं में सघन तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान पता चला कि दोनों छात्र लगभग तीन घंटे तक एक कक्षा की अलमारी में छिपे रहे। पुलिस ने दोनों छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। छात्रों की पहचान सार्थक पटेल और आलोक के रूप में हुई।

    सार्थक ने पुलिस को बताया कि पिछले दो हफ्ते से उसे घर पर माता-पिता से फोन पर बात नहीं कराई जा रही थी। उसने कहा कि रविवार को भी बातचीत नहीं कराई गई, जिससे वह नाराज था। इसी नाराजगी के कारण वह शाम करीब सात बजे अपने साथी आलोक के साथ कक्षा में गया और बाद में अलमारी में छिप गया। छात्र की यह हरकत स्कूल में हड़कंप मचाने के लिए काफी थी।

    सार्थक के पिता सीताराम पटेल ने आरोप लगाया कि स्कूल में अभिभावकों से नियमित बातचीत का नियम होने के बावजूद कई बार कॉल के बावजूद बच्चों से बात नहीं कराई जाती। उन्होंने कहा कि इस बार भी बच्चों को माता-पिता से बात कराने में अनदेखी हुई। उन्होंने प्रबंधन से स्पष्ट व्यवस्था बनाने और नियमित संवाद सुनिश्चित करने की मांग की।

    माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस यह जांच कर रही है कि यह घटना केवल संवाद की कमी का परिणाम थी या बच्चों पर किसी प्रकार का दबाव या प्रताड़ना थी। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सके।

    इस घटना के बाद स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी की समीक्षा शुरू कर दी गई है। अभिभावकों को आश्वस्त किया गया है कि बच्चों के संवाद और सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल स्पष्ट किए जाएंगे। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले ने स्कूलों में हॉस्टल छात्रों की सुरक्षा और अभिभावकों से संवाद की अहमियत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि उनकी शारीरिक सुरक्षा। ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल की यह घटना अन्य स्कूलों के लिए चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।