Author: bharati

  • भारत की धरती पर राशिद खान का 50 धमाका, टी-20I में बनाया अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड

    भारत की धरती पर राशिद खान का 50 धमाका, टी-20I में बनाया अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान ने भारतीय सरजमीं पर एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जो अब तक दुनिया का कोई भी गेंदबाज नहीं कर सका था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में दो विकेट झटकते ही राशिद खान भारत में टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 50 विकेट पूरे करने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बन गए। जैसे ही उन्होंने मैच में अपना दूसरा शिकार किया, यह खास उपलब्धि उनके नाम दर्ज हो गई और वे इस फॉर्मेट में भारतीय धरती पर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बनकर उभरे।

    राशिद खान ने भारत में अब तक 24 टी-20I पारियां खेली हैं और इन मुकाबलों में उन्होंने 50 विकेट हासिल किए हैं। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या के लिहाज से ही नहीं, बल्कि उनकी निरंतरता और प्रभावशीलता को भी दर्शाता है। उनकी इकोनॉमी रेट और औसत दोनों ही बेहद प्रभावशाली रहे हैं, जो यह साबित करते हैं कि वे सिर्फ विकेट लेने वाले गेंदबाज नहीं, बल्कि रन रोकने में भी माहिर हैं। भारतीय पिचों पर उनकी तेज रफ्तार लेग स्पिन और सटीक गुगली बल्लेबाजों के लिए लगातार पहेली बनी हुई है।

    इस सूची में दूसरे स्थान पर भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल हैं, जिन्होंने 38 पारियों में 49 विकेट हासिल किए हैं। अक्षर पटेल 48 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 37 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की। अर्शदीप सिंह 27 पारियों में 43 विकेट लेकर चौथे स्थान पर हैं, जबकि हार्दिक पांड्या ने 53 पारियों में 38 विकेट झटके हैं।

    जसप्रीत बुमराह के नाम 35 पारियों में 36 विकेट दर्ज हैं और भुवनेश्वर कुमार ने 33 पारियों में 34 विकेट लिए हैं। वरुण चक्रवर्ती ने मात्र 16 पारियों में 33 विकेट लेकर अपनी प्रभावशीलता दिखाई है। कुलदीप यादव ने 19 पारियों में 27 विकेट और रवि बिश्नोई ने 20 पारियों में 26 विकेट हासिल किए हैं।

    इन सभी भारतीय गेंदबाजों के बीच राशिद खान का शीर्ष पर पहुंचना उनके असाधारण कौशल और भारतीय परिस्थितियों की गहरी समझ को दर्शाता है। आंकड़े साफ बताते हैं कि भारतीय सरजमीं उन्हें खास तौर पर रास आती है। स्पिन के अनुकूल परिस्थितियों में उनकी गेंदबाजी और भी खतरनाक हो जाती है। वे बल्लेबाजों को न तो खुलकर खेलने का मौका देते हैं और न ही आसानी से रन बनाने देते हैं।

    राशिद खान लंबे समय से आईपीएल में खेलते आ रहे हैं, जिससे उन्हें भारतीय पिचों और हालात की गहरी समझ है। यही अनुभव अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भी उनके काम आता है। यही कारण है कि वे भारतीय गेंदबाजों को पीछे छोड़ते हुए इस खास सूची में सबसे ऊपर पहुंच गए हैं।

    भारत की धरती पर 50 टी-20I विकेट का आंकड़ा छूना किसी भी गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन राशिद ने इसे महज 24 पारियों में हासिल कर इस रिकॉर्ड को और भी खास बना दिया है। मौजूदा फॉर्म और निरंतरता को देखते हुए कहा जा सकता है कि वे आने वाले समय में इस रिकॉर्ड को और आगे ले जाएंगे।

  • पारिवारिक अनुशासन और गरुड़ पुराण: पिता के जीवित होने पर पुत्र के इन विशेष कर्तव्यों और वर्जनाओं का क्या है धार्मिक आधार?

    पारिवारिक अनुशासन और गरुड़ पुराण: पिता के जीवित होने पर पुत्र के इन विशेष कर्तव्यों और वर्जनाओं का क्या है धार्मिक आधार?


    नई दिल्ली।हिंदू धर्मग्रंथों की समृद्ध परंपरा में पिता को केवल एक अभिभावक नहींबल्कि परिवार का आधार स्तंभ और आकाश के समान रक्षक माना गया है। शास्त्रों का मत है कि यदि माता हमें इस संसार में लाती है और संस्कारित करती हैतो पिता उस जीवन को दिशासुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करते हैं। विशेष रूप से गरुड़ पुराण मेंजो जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्यों के साथ-साथ लोक-परलोक के कर्तव्यों की व्याख्या करता हैपिता के सम्मान और पारिवारिक मर्यादा को लेकर अत्यंत स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए गए हैं। इन नियमों का ध्येय केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं हैअपनिु परिवार के भीतर एक सुदृढ़ अनुशासनसंतुलन और परस्पर आदर की भावना को अक्षुण्ण बनाए रखना है। जब तक पिता जीवित हैंतब तक पुत्र के लिए कुछ विशेष सीमाओं का निर्धारण किया गया हैताकि पीढ़ीगत पदक्रम और सांस्कृतिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

    गरुड़ पुराण के अनुसारपिता घर के स्वाभाविक और नैसर्गिक मुखिया होते हैं। शास्त्र यह प्रतिपादित करते हैं कि जब तक पिता का साया सिर पर हैतब तक घर के किसी भी प्रमुख निर्णय या धार्मिक अनुष्ठान की अगुवाई उन्हीं के हाथों में होनी चाहिए। पुत्र का परम कर्तव्य है कि वह एक सहायक की भूमिका निभाए और अपनी ऊर्जा व आधुनिक अनुभव को पिता के मार्गदर्शन के साथ जोड़े। यदि पुत्र स्वयं को सर्वाधिकार संपन्न मानकर नेतृत्व की बागडोर छीनने का प्रयास करता हैतो इससे न केवल परिवार का संतुलन बिगड़ता हैबल्कि नैतिक मूल्यों का भी ह्रास होता है। शास्त्र हमें समझाते हैं कि अधिकार प्राप्त करने से पहले कर्तव्य को समझना ही वास्तविक धर्म है।

    इसी क्रम मेंपितृकर्म यानी पूर्वजों के प्रति किए जाने वाले तर्पण और पिंडदान को लेकर भी गरुड़ पुराण में एक विशेष व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पहला अधिकार जीवित पिता का है। जब तक पिता स्वयं सक्षम और जीवित हैंतब तक पुत्र को स्वतंत्र रूप से पितृ तर्पण नहीं करना चाहिए। इसके पीछे का मूल भाव यह है कि वंशावली की कड़ियाँ एक निश्चित क्रम में जुड़ी होती हैं और उस क्रम का उल्लंघन करना प्रकृति के नियमों के विपरीत माना गया है। यह परंपरा परिवार की जड़ों को सींचने और वरिष्ठता का सम्मान करने का एक जीवंत प्रतीक है।

    दान-पुण्य और सामाजिक प्रतिष्ठा के विषय में भी गरुड़ पुराण का मार्गदर्शन अत्यंत व्यावहारिक है। यदि पुत्र अपनी मेहनत की कमाई से कोई दान करता है या पुण्य कर्म करता हैतो उसे पिता का नाम ही प्राथमिकता के साथ आगे रखना चाहिए। यह मात्र एक औपचारिकता नहींबल्कि इस सत्य की स्वीकारोक्ति है कि पुत्र की जो भी पहचान हैउसका मूल स्रोत उसके पिता ही हैं। सार्वजनिक मंचों और निमंत्रण पत्रों पर भी पिता का नाम पहले और पुत्र का नाम बाद में लिखना शिष्टाचार का हिस्सा माना गया है। यह छोटा सा व्यवहारिक नियम इस गहरे सांस्कृतिक अर्थ को स्पष्ट करता है कि परिवार में वरिष्ठता सर्वोपरि है।

    प्राचीन मान्यताओं में कुछ शारीरिक प्रतीकों को भी वंश की गरिमा से जोड़ा गया था। जैसे कि पुराने समय में मूंछ और केश को कुल की मर्यादा का प्रतीक माना जाता था और पिता के जीवित रहते पुत्र के लिए इनके संबंध में कुछ वर्जनाएं थीं। यद्यपि आधुनिक युग में इन प्रतीकों का स्वरूप बदल गया हैपरंतु उनका सार आज भी प्रासंगिक है कि पिता के स्वाभिमान को कभी ठेस नहीं पहुँचनी चाहिए। अंततः, गरुड़ पुराण के ये नियम कोई कठोर बंधन नहीं, बल्कि वे सूत्र हैं जो परिवार को बिखरने से बचाते हैं। जब पुत्र मर्यादा की इन सीमाओं का पालन करता है, तो परिवार में प्रेम, विश्वास और स्थिरता का वास होता है, जो किसी भी समृद्ध समाज की पहली शर्त है।

  • दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत

    दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत


    नई दिल्ली। 12 फरवरी, 2026 को अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाले ICC T20 वर्ल्ड कप मैच के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मेट्रो समय सारिणी में खास बदलाव किया है। मैच के कारण स्टेडियम और आसपास भारी भीड़ के मद्देनजर DMRC ने प्रमुख मेट्रो लाइनों पर आखिरी ट्रेन का समय लगभग 90 मिनट तक बढ़ा दिया है, ताकि दर्शक और सामान्य यात्री आसानी से घर लौट सकें।

    रेड लाइन (लाइन 1) पर शहीद स्थल से रिठाला रूट की आखिरी ट्रेन अब रात 12:10 से 12:15 बजे तक चलेगी। येलो लाइन (लाइन 2) पर समयपुर बादली से गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर तक ट्रेन 12:20 बजे तक उपलब्ध रहेगी। ब्लू लाइन (लाइन 3 और 4) की नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से द्वारका सेक्टर 21 तक की आखिरी ट्रेनें 11:35 और 11:45 बजे तक चलेंगी। ग्रीन लाइन (लाइन 5) की कुछ ट्रेनें 1:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। वायलेट, पिंक, मैजेंटा, ग्रे लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी ट्रेन समय में बदलाव किया गया है।

    DMRC ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल 12 फरवरी के लिए है। 13 फरवरी से मेट्रो टाइमिंग पहले की तरह सामान्य हो जाएगी। इस निर्णय से न केवल मैच देखने वाले दर्शकों को सुविधा मिली है, बल्कि देर रात सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत मिली है।

    DMRC के इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि मैच खत्म होने के बाद भी लोग सुरक्षित और समय पर घर पहुंच सकें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार बनाएं और भीड़भाड़ वाले समय में अतिरिक्त समय रखें।

  • मोबाइल उत्पादन में नोएडा देश में नंबर वन… यहां बन रहे कई नामी कंपनियों के फोन…

    मोबाइल उत्पादन में नोएडा देश में नंबर वन… यहां बन रहे कई नामी कंपनियों के फोन…


    नोएडा।
    यूपी सरकार (UP Government) के बजट में कहा कि देश के 65 प्रतिशत मोबाइल का उत्पादन (Mobile Production) उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में हो रहा है। मोबाइल उत्पादन (Mobile Production) में गौतमबुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) पूरे देश में पहले नंबर पर है। देश के 55 फीसदी से अधिक मोबाइल फोन यहीं बनते हैं।


    इन कंपनियों के फोन नोएडा में बन रहे

    सैमसंग का यहां सबसे बड़ा मोबाइल प्लांट है, जो सालाना 12 करोड़ यूनिट तक उत्पादन क्षमता रखता है। ओप्पो, वीवो, और डिक्सन टेक्नोलॉजीज जैसी अन्य कंपनियां भी यहां पर बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने को जीएसटी से भरने में गौतमबुद्ध नगर जिले का योगदान सबसे अधिक है।


    मेक इन इंडिया का सपना हो रहा साकार

    जानकारी के मुताबिक, सैमसंग के गौतमबुद्ध नगर स्थित संयंत्र में दुनिया के लगभग 25 फीसदी फोन का निर्माण होता है। मोबाइल फोन के निर्माण के साथ ही यहां पर बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं। उत्तर प्रदेश में मोबाइल निर्माण का प्रमुख केंद्र होने के कारण यह क्षेत्र मेक इन इंडिया पहल का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।


    रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

    यमुना सिटी के सेक्टर-24ए में वीवो कंपनी मोबाइल बना रही है। कंपनी को 169 एकड़ भूमि का आंवटन वर्ष 2018 में हुआ था। इसमें 156.32 एकड़ भूमि के लिए चेकलिस्ट जारी की गई थी। प्रथम चरण में कंपनी प्रति वर्ष छह करोड़ स्मार्ट मोबाइल तैयार कर रही है। दो चरणों में कंपनी का निर्माण पूरा होगा। दूसरा चरण पूरा होने के बाद शहर में हर साल करीब 14.40 करोड़ मोबाइल का उत्पादन किया जाएगा। वर्तमान में यहां पर 800 लोग काम कर रहे हैं।

    दूसरा चरण पूरा होने के बाद एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यहां की मोबाइल कंपनियों ने निर्यात का ग्राफ बढ़ाने के साथ जीएसटी चुकाने में भी टॉप रैंक हासिल की है। जीएसटी महकमे ने राज्य जीएसटी देने वाली जिन टॉप 100 कंपनियों की सूची जारी की थी, उसमें सबसे ऊपर ग्रेटर नोएडा की ओप्पो मोबाइल कंपनी का नाम है। वर्ष 2023-24 में ओप्पो मोबाइल इंडिया ने 1945. 87करोड़ रुपये जीएसटी जमा किया था। वर्ष 2024-25 में 1141.47 करोड़ रुपये जीएसटी जमा किया था।

  • IRDA: गलत तरीके, झूठे वायदों के आधार पर बेच रहे बीमा पॉलिसी…कमीशन पर लगाम लगाने की तैयारी

    IRDA: गलत तरीके, झूठे वायदों के आधार पर बेच रहे बीमा पॉलिसी…कमीशन पर लगाम लगाने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    बीमा नियामक इरडा (Insurance Regulator IRDA) ने बीमा कंपनियों (Insurance Companies) के प्रमुखों के सामने गलत तरीके, झूठे वायदों के आधार पर बीमा पॉलिसी बेचने पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, उनकी बैठक में जीवन बीमा कंपनियों ने स्थगित कमीशन भुगतान मॉडल (Commission Payment Model) का सुझाव दिया है। इसमें एजेंट को पूरा कमीशन एक साथ नहीं, बल्कि पॉलिसी की पूरी अवधि के दौरान दिया जाएगा।

    बताया जा रहा है इन सुझावों में कॉरपोरेट एजेंट्स के लिए पांच साल और व्यक्तिगत एजेंट्स के लिए तीन साल का प्रस्ताव दिया गया है। इसका मकसद साफ है, बीमा पॉलिसी के गलत बिक्री रोकना, कंपनियों का खर्च घटाना और ग्राहकों को सस्ता, टिकाऊ बीमा देना। वैसे खास बात यह है कि हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक और आर्थिक सर्वेक्षण में भी ऊंचे कमीशन पर सवाल उठाए गए थे।


    60,800 करोड़ रुपये से अधिक कमीशन भुगतान

    दरअसल, इरडा और बीमा कंपनियों के प्रमुखों की यह मुलाकात बीमा कंपनियों के कमीशन भुगतान से जुड़े बढ़ते खर्चों और नियामिकीय सीमाओं को लेकर हो हुई थी। बताया जा रहा है कि इस बैठक का आधार वित्त वर्ष 2025 में, जीवन बीमा कंपनियों के कमीशन भुगतान 60,800 करोड़ रुपये से अधिक रहना था। जबकि साधारण बीमा कंपनियों के माले में यह भुगतान आंकड़ा 47,000 करोड़ रुपये के पार चला गया।

    इन बढ़ते खर्चों के चलते कई कंपनियां अपने प्रबंधन खर्च की सीमा को पार कर चुकी हैं। इस स्थिति को देखते हुए बीमा नियामक नए नियमों लाने पर विचार कर रहा है। ये नियम अगले कुछ महीनों में जारी किए जा सकते हैं। पिछले एक दशक में पॉलिसी की संख्या में ठहराव के बावजूद खर्चों में लगभग 9.4% सालाना की वृद्धि हुई है। गैर-जीवन बीमा में स्वास्थ्य बीमा सबसे आगे है, जिसका कुल गैर जीवन बीमा प्रीमियम में 41% हिस्सा है।


    बदलाव की जरूरत क्यों पड़ रही

    एजेंट को पहले साल ही बहुत ज्यादा कमीशन मिल जाता है। इसी कारण से कई बार गलत पॉलिसी बेच दी जाती है। इससे बीमा कंपनियों का खर्च भी बढ़ जाता है।कई पॉलिसियां बीच में ही बंद हो जाती हैं। इरडा कमीशन को पॉलिसी की उम्र से जोड़ना चाहता है ताकि एजेंट जिम्मेदार बनें और ग्राहक को सस्ता, टिकाऊ बीमा मिले।


    क्या है स्थगित कमीशन का मतलब

    डिफर्ड कमीशन का मतलब ये है कि बीमा एजेंट को पूरा कमीशन एक साथ नहीं मिलता, कमीशन पॉलिसी के साथ-साथ सालों में किस्तों में दिया जाता है। इससे एजेंट पॉलिसी को चालू रखने और ग्राहक की सेवा करने में ज्यादा रुचि लेता है। पॉलिसी जितने लंबे समय तक चलेगी, एजेंट को उतना ही कमीशन मिलता रहेगा। शुरुआती सालों में थोड़ा ज्यादा और बाद के सालों में थोड़ा कम, लेकिन लगातार मिलता रहेगा।


    कमीशन पर सख्ती के संभावित खतरे

    कमीशन भुगतान में यह अप्रत्याशित उछाल भारतीय बीमा सेक्टर के लिए बड़े जोखिम पैदा कर रहा है। कंपनियों का यह तर्क कि डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल के विकास के लिए उच्च कमीशन आवश्यक है। कमीशन पर कड़े और एकसमान सीमा लगाने से एजेंसी-आधारित नेटवर्क और बैंकएश्योरेंस पार्टनरशिप जैसे स्थापित डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों को गंभीर झटका लग सकता है, जो बाजार तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    इससे वितरकों और बीमाकर्ताओं दोनों के लिए बिजनेस की मात्रा कम हो सकती है, जो बाजार को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, पारंपरिक उत्पादों पर 60-70% तक पहुंचने वाले अग्रिम कमीशन, गलत बिक्री और पॉलिसीधारकों के मूल्य के कमी की चिंताएं बढ़ाते हैं।

  • US से ट्रेड डील से कश्मीर से हिमाचल तक टेंशन में किसान…. 10,000 CR की इंडस्ट्री पर संकट

    US से ट्रेड डील से कश्मीर से हिमाचल तक टेंशन में किसान…. 10,000 CR की इंडस्ट्री पर संकट


    नई दिल्ली।
    भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को लेकर कश्मीर (Kashmir) से लेकर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) तक के सेब किसानों में चिंता बढ़ गई है। किसानों को डर है कि अगर अमेरिकी सेब (American Apple) सस्ते दाम पर भारतीय बाजार में आने लगे, तो स्थानीय सेब की मांग और कीमत दोनों गिर सकती हैं। इस डील के तहत कई देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क कम किया जा रहा है। पहले ज्यादा कीमत होने के कारण विदेशी सेब कम मात्रा में आते थे, लेकिन अब ड्यूटी कम होने से आयात बढ़ने का डर है।

    कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब उद्योग बहुत अहम है। हजारों परिवार सीधे या परोक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। ऐसे में अगर विदेशी सेब ज्यादा आए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर पड़ सकता है। जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के आयात बढ़ा, तो स्थानीय बागवानी उद्योग को नुकसान हो सकता है।


    अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो टेंशन बढ़ेगी

    हालांकि सरकार का कहना है कि अमेरिकी सेब के लिए केवल सीमित (कोटा आधारित) रियायत दी जा रही है और किसानों की सुरक्षा के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) जैसी व्यवस्था रखी गई है, ताकि बहुत सस्ते सेब बाजार में न आ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो घरेलू किसानों पर कीमत का दबाव बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग इसे अवसर भी मानते हैं—कहते हैं कि इससे भारतीय किसान गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दे सकते हैं।


    फल मंडी के नेता क्या कह रहे?

    घाटी के सबसे बड़े फल मार्केट, सोपोर फ्रूट मंडी के प्रेसिडेंट फैयाज अहमद मलिक ने बताया, “यह (इंडिया-US डील) हमारे लिए बहुत बुरा होगा।” वे कहते हैं, “हम US में फल उगाने वालों से मुकाबला नहीं कर सकते। उन्हें खेती के हर स्टेज पर सरकार से मदद मिलती है। उन्हें अच्छी-खासी सब्सिडी और कैश ट्रांसफर मिलते हैं, जबकि हमारे पास फसल बीमा तक नहीं है।” मलिक का कहना है कि इस ट्रेड डील का कश्मीर घाटी की इकॉनमी पर बड़ा असर पड़ेगा। वे कहते हैं, “जब हम अपने सेब बांग्लादेश भेजते हैं, तो हमें 100% से ज़्यादा टैक्स देना पड़ता है। सरकार अमेरिकन सेब पर टैक्स कैसे कम कर सकती है? इससे लोकल इंडस्ट्री और इकॉनमी बर्बाद हो जाएगी।”


    10,000 करोड़ रुपये की है सेब इंडस्ट्री

    बता दें कि सेब इंडस्ट्री जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) की अर्थव्यवस्था, खासकर कश्मीर घाटी की इकॉनमी का आधार और रीढ़ है। घाटी देश के कुल सेब उत्पादन का 75% पैदा करती है। आधिकारिक आंकड़ों के के मुताबिक घाटी में करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा होते हैं और इस सेब इंडस्ट्री की कीमत 10,000 करोड़ रुपये है। अधिकारियों का कहना है कि इस इंडस्ट्री में सीधे या अप्रत्यक्ष करीब 50 लाख लोग जुड़े हुए हैं। फिलहाल किसान संगठन सरकार से सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों ने भारत-US डील में खेती की उपज, खासकर सेब को शामिल करने के खिलाफ 12 फरवरी को बंद और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। कश्मीर के किसान भी अब इसी तरह के प्रदर्शन का प्लान बना रहे हैं।

  • MP: देवास में जज का रास्ता रोकना BJP नेता को पड़ा महंगा, घर-पोल्ट्री फार्म पर चला बुलडोजर… केस भी दर्ज

    MP: देवास में जज का रास्ता रोकना BJP नेता को पड़ा महंगा, घर-पोल्ट्री फार्म पर चला बुलडोजर… केस भी दर्ज


    देवास।
    एमपी (MP) के देवास (Dewas) में एक कथित भाजपा नेता (BJP Leader) को न्यायाधीश (Judge) का रास्ता रोकना काफी महंगा पड़ा। प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है। तीन लोगों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने मिलकर कार्रवाई करते हुए आरोपी के मकान के अवैध हिस्सों और पोल्ट्री फार्म पर बुलडोजर (Bulldozer) चला दिया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर की गई है।


    बुलडोजर ऐक्शन भी हुआ

    देवास में जज प्रसन्न सिंह बेहरावत और भाजपा नेता पंकज धारू के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की है। नगर निगम, तहसीलदार और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्यवाही करते हुए पंकज घारू के उज्जैन रोड बायपास स्थित पोल्ट्री फार्म पर किए गए अवैध निर्माण को हटा दिया। भोपाल रोड स्थित उसके अवैध मकान को भी जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया। इस दौरान मक्सी रोड क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।


    अभद्र भाषा में बातचीत के आरोप

    घटना मंगलवार को देवास के जयश्री नगर क्षेत्र में हुई थी। न्यायाधीश कार से न्यायालय की ओर जा रहे थे। इस दौरान पंकज घारू और उसके 2 से 3 साथियों ने स्कॉर्पियो वाहन सड़क के बीच खड़ा कर रास्ता रोक दिया। न्यायाधीश ने ड्यूटी पर जाने की बात ही और वाहन हटाने का आग्रह किया। इस पर आरोपितों ने अभद्र भाषा में बातचीत की। इस दौरान न्यायाधीश ने मोबाइल से वाहन का फोटो लेने का प्रयास किया तो उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया।


    वायरल हुआ था वीडियो

    इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक युवक न्यायाधीश को कार में बैठने से रोकता हुआ दिखाई दे रहा है। आरोपी जज पर ही FIR की धमकी देता सुनाई दे रहा है। स्थिति बिगड़ती देख न्यायाधीश ने किसी तरह वहां से निकलने की कोशिश की। इसके बाद जब वे वापस अपनी कार में बैठकर आगे बढ़ने लगे तो आरोपितों ने उनका घेराव कर दरवाजा खोलने से रोका और धमकी दी।


    आरोप भी लगाए

    बाद में जज साहब ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को वारदात की जानकारी दी। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। आरोपी पंकज धारू ने कहा कि एक दिन पहले मजिस्ट्रेट की गाड़ी से एक बच्चे को टक्कर लगी थी, जिसमें वह घायल हुआ। बच्चे के इलाज को लेकर चर्चा के दौरान विवाद हुआ। पंकज ने दावा किया कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।


    पहले ही दिए थे नोटिस

    आरोपी पंकज ने यह भी दावा है कि बाद में समझौते के लिए फोन आया, लेकिन उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। तहसीलदार सपना शर्मा ने बताया कि सरकारी जमीन पर लंबे समय से किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। लेकिन पालन नहीं होने पर यह कदम उठाया गया है। बुलडोजर चलाने की कार्रवाई विधिवत की गई है। बाइपास पर पोल्ट्री फार्म करीब सवा से डेढ़ बीघा जमीन पर बनाया गया था।


    कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

    पोल्ट्री फार्म की जमीन की कीमत दो करोड रुपए से अधिक बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल, नगर निगम और राजस्व अमला मौजूद रहा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


    जज साहब ने दर्ज कराई थी शिकायत

    थाना प्रभारी अमित सोलंकी ने बताया कि देवास ग्रीन कॉलोनी क्षेत्र में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रसन्न बहरावत ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गाड़ी निकालने को लेकर भाजपा नेता पंकज धारू और उनके साथियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस शिकायत के आधार पर नाहर दरवाजा थाना पुलिस ने आरोपी पंकज धारू, भीम धारू एवं अन्य के खिलाफ सात से अधिक गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।

  • MP: लाड़ली बहना योजना के पंजीकरण दोबारा शुरू करने की मांग… HC ने खारिज की याचिका

    MP: लाड़ली बहना योजना के पंजीकरण दोबारा शुरू करने की मांग… HC ने खारिज की याचिका


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Scheme) में दोबारा पंजीकरण शुरू करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज (PIL Rejected) कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि किसी योजना का संचालन कैसे करना है ये सरकार के जिम्मे में आता है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की बेंच ने ये फैसला सुनाया। जनहित याचिका रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने दायर की थी।

    सकलेचा ने मांग की थी कि राज्य सरकार द्वारा किए गए वादे के मुताबिक, हर लाभार्थी को 3,000 रुपये प्रति माह दिया जाए, नए लाभार्थियों का दोबारा पंजीयन शुरू करने और न्यूनतम पात्रता उम्र को 21 से घटाकर 18 किया जाए। उन्होंने याचिका में कहा था कि योजना के जारी रहने के बावजूद 20 अगस्त 2023 से नए पंजीकरण पर रोक लगाना मनमाना और भेदभावपूर्ण था। याचिका में कहा गया था कि पंजीयन रोके जाने से 21 वर्ष का उम्र पूरी कर चुकी कई महिलाएं योजना का लाभ नहीं उठा पा रही हैं।


    राज्य सरकार ने दी ये दलील

    वहीं सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि यह एक नीतिगत फैसला था और योजना का लाभ लेने वाली या चाहने वाली किसी भी महिला ने अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील में दम न होने की बात कही और साथ ही ये माना कि राज्या सरकार का फैसला मनमाना और भेदभावपूर्ण नहीं था। कोर्ट ने कहा कि ‘योजना कब शुरू करनी है और इसे कब बंद करना है इसकी तारीख तय करना सरकार का काम है। हम एक ऐसे शख्स (याचिकाकर्ता) के कहने पर इसपर विचार नहीं कर सकते जो कि खुद योजना का लाभार्थी नहीं है।’


    क्या है लाडली बहना योजना?

    लाड़ली बहना योजना बीजेपी सरकार ने 2023 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले शुरू की थी। मौजूदा समय में, मध्य प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को इस योजना के तहत हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं। सरकार का कहना है कि 2028 तक इस राशि को बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया जाएगा।


    बीते महीने ही जारी की गई है 32वीं किस्त

    बीते महीने ही महिलाओं को 1500-1500 रुपये की सौगात दी गई है। आपको बता दें कि इस योजना की किस्त राशि में 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी जो कि नवंबर महीने से लागू है पहले किस्त के रूप में 1250 रुपये दिए जाते थे।

  • ट्रेनों में यात्रियों को अब सीट पर मिलेगा गर्म-ताजा खाना…. नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा शुरू

    ट्रेनों में यात्रियों को अब सीट पर मिलेगा गर्म-ताजा खाना…. नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा शुरू


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने यात्रियों (Passengers) के खाने-पीने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए E-Pantry (ई-पैंट्री) नाम से एक नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा (New Online Food Booking Service) शुरू कर दी है। यह सुविधा 25 Mail और Express ट्रेनों में उपलब्ध कराई गई है, जिससे यात्री अपनी पसंद का भोजन टिकट बुकिंग के समय या बाद में ऑनलाइन ही बुक कर सकते हैं और ट्रेन में बैठे-बिठाए उनकी सीट पर भोजन मिल सकता है। E-Pantry सर्काविस लक्ष्य यात्रा को अधिक सुविधाजनक, साफ-सुथरा बनाना है। पहले यात्रियों को स्टेशन पर उतरकर खाना खरीदना पड़ता था या अनजाने वेंडरों पर निर्भर रहना होता था। लेकिन अब इस नई डिजिटल सेवा से टिकट बुक करते समय या बाद में IRCTC की वेबसाइट/ऐप पर आप भोजन और पानी को पहले से बुक कर सकते हैं और ट्रेन में बैठे-बिठाए वही खाना आपकी सीट तक डिलीवर हो जाएगा।

    बुकिंग के बाद आपको एक Meal Verification Code (MVC) मिलता है, जिसे यात्रा के दिन साझा करने पर भोजन सीधे आपकी सीट पर डिलीवर किया जाता है। यह सेवा उन Mail/Express ट्रेनों के लिए खास है जिनमें टिकट में भोजन शामिल नहीं होता। जिसमें अगर भोजन नहीं मिला तो refund भी मिलता है।


    E-Pantry बुकिंग कैसे करें?

    E-Pantry से भोजन बुक करना बिल्कुल आसान है:
    Step 1: IRCTC वेबसाइट या ऐप पर लॉग-इन करें।
    Step 2: ट्रेन टिकट बुक करते समय (या बाद में “Booked Ticket History” सेक्शन से भी) E-Pantry ऑप्शन चुनें।
    Step 3: अपनी पसंद का डिश/भोजन और Rail Neer का चयन करें।
    Step 4: ऑनलाइन पेमेंट पूरा करें।
    Step 5: आपको एक Meal Verification Code (MVC) SMS/Email के जरिए मिलेगा।
    Step 6: यात्रा के दिन उस MVC को ट्रेन में भोजन देने वाले स्टाफ को दिखाएं और भोजन अपनी सीट पर पाएं।


    E-Pantry सर्विस इन ट्रेनें में शामिल

    E-Pantry सेवा को शुरुआत में 25 प्रमुख Mail और Express ट्रेनों में लाया गया है। इसमें ऐसे लंबे रास्तों वाली ट्रेनें शामिल हैं जिनमें यात्रियों को खाने-पीने की जरूरत अधिक होती है। Vivek Express, Swatantra Senani Express, Swarnajayanti Express, Karnataka Sampark Kranti, Mangaldweep Express, Kalinga Utkal Express, Pushpak Express, Paschim Express, Grand Trunk Express, Poorva Express में यह सर्विस शुरू हो गई है। जल्द ही अन्य ट्रेनों फीडबैक के आधार पर इसे शुरू किया जाएगा।

  • MP: खंडवा में BJP नेता ने जहर खाकर की खुदकुशी…. कांग्रेस नेता पर लगाए प्रताड़ना के आरोप

    MP: खंडवा में BJP नेता ने जहर खाकर की खुदकुशी…. कांग्रेस नेता पर लगाए प्रताड़ना के आरोप

    खंडवा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खंडवा (Khandwa) में कर्ज के बोझ तले दबे एक भाजपा नेता (BJP leader) और पूर्व पार्षद द्वारा कथित तौर पर सल्फास की गोलियां खाकर खुदकुशी करने का मामला सामने आया है। मंगलवार को भाजपा नेता जितेंद्र चौधरी (Jitendra Chaudhary) उर्फ जीतू की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में उन्होंने कांग्रेस नेता गणेश सकरगाये (Congress leader Ganesh Sakargaye) पर कर्ज वसूली को लेकर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रंग ले सकता है। फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


    बेटी का रिश्ता टूट गया था

    भाजपा नेता जीतू चौधरी ने अपने कथित अंतिम वीडियो संदेश में कहा कि वे लंबे समय से आर्थिक दबाव और सामाजिक अपमान का सामना कर रहे थे। उनके अनुसार, गणेश सकरगाये से करीब 50 लाख रुपये का लेन-देन था और वे पिछले पांच वर्षों से ब्याज चुका रहे थे। इसके बावजूद उन पर दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इस विवाद के कारण उनकी बेटी का रिश्ता टूट गया था। चौधरी ने वीडियो में दावा किया कि उन पर कुल मिलाकर लगभग एक करोड़ रुपये का कर्ज था, लेकिन अन्य लेनदारों ने उन्हें इस तरह प्रताड़ित नहीं किया।


    गणेश सकरगाये के घर जाकर खाईं सल्फास की गोलियां

    सूत्रों के मुताबिक, आनंद नगर स्थित लव कुश नगर सेक्टर-3 निवासी जितेंद्र चौधरी मंगलवार सुबह करीब 10 बजे घर से निकले और सीधे गणेश सकरगाये के घर पर पहुंच गए। वहीं उन्होंने सल्फास की गोलियां खा लीं, तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने सकरगाये से अस्पताल ले जाने की बात कही। उन्हें पहले आनंद नगर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। करीब चार घंटे तक चले इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद सकरगाये वहां से चले गए।


    कर्ज के बोझ के चलते पत्नी से भी बढ़ गई थी दूरी

    परिचितों के अनुसार, जितेंद्र चौधरी लंबे समय से भारी कर्ज और पारिवारिक तनाव से जूझ रहे थे। बताया जाता है कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी बहन के घर खाना खा रहे थे। कर्ज के बोझ के चलते पत्नी से भी दूरी बढ़ गई थी। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की सभी एंगल से जांच की जा रही है। वीडियो बयान, कथित लेन-देन, मोबाइल डेटा और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।