Author: bharati

  • Mahashivratri 2026: दिल्ली का वो चमत्कारी शिवधाम, जहां एक साथ होते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन!

    Mahashivratri 2026: दिल्ली का वो चमत्कारी शिवधाम, जहां एक साथ होते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन!

    दिल्लीः महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अगर आप दिल्ली में रहकर देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना चाहते हैं, तो चांदनी चौक स्थित प्राचीन गौरी शंकर मंदिर आपके लिए सबसे खास जगह बन सकता है. इस ऐतिहासिक शिवालय में श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलता है. महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भक्तों का मेला लगता है. मेट्रो स्टेशन से लेकर मंदिर परिसर तक पैर रखने तक की जगह नहीं होती है. मंदिर को फूलों, बेलपत्र और रोशनी से सजाया जाता है. सुबह से ही जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष आरती का सिलसिला शुरू हो जाता है. देर रात तक ॐ नमः शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा चांदनी चौक इलाका शिवमय हो उठता है.

    एक ही परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन
    मंदिर परिसर में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन विधि-विधान के साथ कराए जाते हैं. खास बात यह है कि हर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी मान्यताओं और कथाओं को भी यहां विस्तार से बताया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक अनुभव और गहरा हो जाता है.

    मंदिर का स्थान और स्थापना
    मंदिर के पुजारी सुशील शुक्ला जी ने बताया कि इस विशेष 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना 27 जुलाई 2024 को की गई थी. उन्होंने बताया कि देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा हर भक्त के लिए संभव नहीं हो पाती, ऐसे में यह मंदिर श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर महादेव के सभी ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का अवसर देता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भारत के विभिन्न ज्योतिर्लिंग स्थलों से लाए गए शिवलिंग विधि-विधान के साथ स्थापित किए गए हैं. जिससे भक्तों को वास्तविक तीर्थ दर्शन जैसा अनुभव मिलता है.इतना ही नहीं है अब मंदिर में 1 जनवरी 2026 से भस्म आरती भी स्टार्ट हो गई है. जहां पर बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती की जाती है, आरती प्रत्येक सोमवार को सुबह 6:00 होती है.

    दर्शन का समय और सुरक्षा व्यवस्था
    गौरी शंकर मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह 4:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और इसके बाद शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं.मंदिर में हर तरफ सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जा रही है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है. दर्शन के लिए बनाए गए बेसमेंट हिस्से में एयर कंडीशनिंग की सुविधा उपलब्ध है, वहीं भव्य झूमरों और आकर्षक सजावट से मंदिर की भव्यता और भी बढ़ जाती है.

  • सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन

    सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन


    नई दिल्ली। कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी घमासान खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया कि कांग्रेस के करीब 80 से 90 विधायक उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। हुसैन ने कहा कि कई विधायक मानते हैं कि शिवकुमार के संघर्ष और मेहनत को सम्मानित करना चाहिए और आने वाले चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी यह सही कदम होगा।

    रामनगर में पत्रकारों से बातचीत में हुसैन ने बताया कि सभी 140 विधायक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं और करीब 80-90 विधायक नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ कौन खड़ा है और शिवकुमार के साथ कौन।

    विदेश यात्रा ने बढ़ाई हलचल
    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले कुछ विधायकों की विदेश यात्रा को गंभीरता से लिया है। पार्टी के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन विधायकों के नाम मांगे हैं जो इस यात्रा में शामिल थे। यह यात्रा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को शांत करने के लिए आयोजित की गई मानी जा रही है।

    राज्य पशुपालन मंत्री के. वेंकटेश ने कहा कि कुछ नेताओं ने उन्हें इस यात्रा में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा उनके मंत्रालय द्वारा आयोजित नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी कहा कि विधायक और एमएलसी अपने खर्च पर विदेश जा रहे हैं।

    दिल्ली में डीके शिवकुमार की बैठक
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर बैठक की, जो नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को और मजबूत करती है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि आगे क्या होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा या राहुल गांधी से मुलाकात की, तो शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की और सभी चर्चा पूरी हो गई।

    शिवकुमार ने यह भी कहा कि वे सड़क पर खड़े होकर राजनीति नहीं कर रहे हैं और सब कुछ पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में हो रहा है।

    आगे क्या होगा
    कर्नाटक कांग्रेस में यह घमासान अभी जारी है। 80-90 विधायक डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और पार्टी हाईकमान की बैठकें और विदेश यात्रा इस सियासी समीकरण को और जटिल बना रही हैं। अब नजर यह है कि नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में अगला कदम कब और कैसे उठाया जाएगा और क्या डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह संकट राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • 17 साल बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान, क्या बदलेंगे देश की राजनीतिक इबारत?

    17 साल बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान, क्या बदलेंगे देश की राजनीतिक इबारत?

    नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर ऐतिहासिक मोड़ पर है। 12 फरवरी को हुए आम चुनाव ने देश की सत्ता की दिशा तय करने का मंच तैयार कर दिया। इस बार अवामी लीग की गैरमौजूदगी ने मुकाबले को पूरी तरह नया रंग दिया है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। पार्टी के चेहरा हैं तारिक रहमान, जिन्होंने 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद लंदन से लौटकर राजनीतिक परिदृश्य में धमाकेदार एंट्री की। उनकी वापसी केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की सियासत के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

    कौन हैं तारिक रहमान
    तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं। उन्हें राजनीतिक विरासत परिवार से मिली और 1990 के दशक में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 2001 से 2007 तक वे बीएनपी में बेहद प्रभावशाली नेता रहे। उस दौर में उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाता था क्योंकि वे पर्दे के पीछे रणनीति बनाने वाले नेता के रूप में जाने जाते थे। संगठन पर उनकी पकड़ मजबूत थी और युवा कार्यकर्ताओं में उनका प्रभाव विशेष रूप से महसूस किया जाता था।

    निर्वासन और कानूनी चुनौतियां
    2007 में सैन्य समर्थित सरकार के दौरान तारिक रहमान पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उन्हें जेल जाना पड़ा। बाद में इलाज के लिए वे लंदन चले गए और वहीं से पार्टी की गतिविधियों का संचालन करते रहे। 2018 और 2021 में उन्हें भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड हमले से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। हाल ही में अदालतों ने कई फैसलों को पलट दिया, जिससे उनके देश लौटने का रास्ता साफ हो गया।

    पत्नी डॉ जुबैदा रहमान
    तारिक रहमान की पत्नी डॉ जुबैदा रहमान पेशे से चिकित्सक हैं और लंदन से उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। उन्होंने सरकारी सेवा में भी शीर्ष स्थान हासिल किया था। हाल ही में राजनीतिक बदलावों के बाद उनके खिलाफ सजा पर रोक लग गई है।

    बेटी जायमा रहमान

    तारिक रहमान की बेटी जायमा रहमान 30 वर्ष की हैं और कानून की पढ़ाई कर चुकी हैं। उन्होंने लंदन से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की और बीएनपी की वर्चुअल बैठकों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं।

    बांग्लादेश का भविष्य
    तारिक रहमान की वापसी ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक संतुलन की वापसी बता रहे हैं, जबकि आलोचक उनके पुराने मामलों को याद दिला रहे हैं। अब यह देखने वाली बात है कि क्या वे चुनावी जीत के साथ सत्ता संभाल पाएंगे और देश की राजनीति को नई दिशा दे पाएंगे। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक धारा तय करने वाला मोड़ भी साबित हो सकता है।

  • UP Medical Negligence: मोतियाबिंद सर्जरी बनी काल! 42 मरीजों में फैला खतरनाक संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने सील किया अस्पताल का ओटी

    UP Medical Negligence: मोतियाबिंद सर्जरी बनी काल! 42 मरीजों में फैला खतरनाक संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने सील किया अस्पताल का ओटी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य मानकों और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में एक और दो फरवरी को मोतियाबिंद की सर्जरी कराने वाले परिवारों के लिए यह ऑपरेशन किसी भयावह दुस्वप्न में बदल गया है। अस्पताल में सर्जरी कराने वाले कुल 42 मरीजों में से 22 की हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें आनन-फानन में दिल्ली के एम्स अस्पताल रेफर करना पड़ा। संक्रमण की तीव्रता इतनी घातक थी कि अब तक चार मरीजों की आंखें सर्जरी कर निकालनी पड़ी हैं, जबकि छह अन्य की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए बुझ चुकी है। यह पूरी घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और संक्रमण नियंत्रण की पोल खोलती नजर आ रही है।

    एम्स के विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहे इस उपचार के दौरान कई दर्दनाक कहानियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि शुरुआत में सात मरीजों को भर्ती कराया गया था, लेकिन संक्रमण की गंभीरता के चलते मंगलवार और बुधवार के बीच 15 और मरीज दिल्ली पहुंच गए। इन सभी की आंखों में संक्रमण फैल चुका है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। जिन 12 मरीजों में संक्रमण की स्थिति बेहद गंभीर थी, उनमें से चार की आंखें निकालनी पड़ीं ताकि संक्रमण दिमाग तक न पहुंचे। तीन अन्य मरीजों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर एक से दो दिन में आगे की सर्जरी या उपचार को लेकर निर्णय लेंगे।

    बेलघाट क्षेत्र की रहने वाली 60 वर्षीय महिला बहाउद्दीन का इलाज एम्स में चल रहा है। उनकी बेटी के अनुसार संक्रमण के कारण उनकी मां की आंखों की रोशनी चली गई। इसी तरह बारी गांव की देवराजी की आंख में संक्रमण इतना बढ़ गया कि मवाद और खून आने लगा। जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि रोशनी पूरी तरह जा चुकी है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आंख निकालनी पड़ी। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया कि देरी होती तो संक्रमण का असर दिमाग तक पहुंच सकता था। इन्नडीह के अर्जुन सिंह और बेलीपार के रामदरश सहित अन्य मरीजों की भी आंखें निकालनी पड़ी हैं या अतिरिक्त सर्जरी की तैयारी चल रही है। इन घटनाओं ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है।

    मामले की जांच के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम ने अस्पताल पहुंचकर ऑपरेशन थियेटर और अन्य स्थानों से 10 से अधिक सैंपल लिए हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह के अनुसार जांच रिपोर्ट गुरुवार तक आने की संभावना है। रिपोर्ट से संक्रमण के असली कारणों का पता चल सकेगा। अस्पताल संचालक राजेश राय का कहना है कि उनके यहां वर्षों से मोतियाबिंद की सर्जरी की जा रही है और पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है।

    एसीएमओ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर सील कर दिया गया है और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। फिलहाल पीड़ित परिवारों की उम्मीद एम्स के डॉक्टरों पर टिकी है।

  • उतरन की तपस्या से बिग बॉस की स्ट्रॉन्ग कंटेस्टेंट तक, रश्मि देसाई का दमदार सफर..

    उतरन की तपस्या से बिग बॉस की स्ट्रॉन्ग कंटेस्टेंट तक, रश्मि देसाई का दमदार सफर..


    नई दिल्ली। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो धीरे धीरे अपनी जगह बनाते हैं और फिर एक दिन दर्शकों के दिलों पर छा जाते हैं। रश्मि देसाई उन्हीं चेहरों में से एक हैं। 13 फरवरी को अपना 40वां जन्मदिन मना रहीं रश्मि का करियर इस बात का सबूत है कि मेहनत और धैर्य के दम पर कोई भी कलाकार अपनी पहचान गढ़ सकता है।

    रश्मि ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत भोजपुरी सिनेमा से की थी। शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्होंने कई कम बजट और बी ग्रेड फिल्मों में भी काम किया। साल 2002 में आई फिल्म कन्यादान से उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही अभिनेत्री आगे चलकर छोटे पर्दे की बड़ी स्टार बनेगी। लेकिन रश्मि ने हर मौके को सीखने और आगे बढ़ने का जरिया बनाया।

    उनके करियर का असली मोड़ साल 2008 में आया जब टीवी शो उतरन शुरू हुआ। इस सीरियल में उन्होंने तपस्या का किरदार निभाया जो ग्रे शेड लिए हुए था। इस भूमिका में निगेटिव और इमोशनल दोनों रंग थे। रश्मि ने इस किरदार को इतनी गहराई से निभाया कि वह घर घर में पहचानी जाने लगीं। उतरन उस समय का बेहद लोकप्रिय शो बना और तपस्या का नाम रश्मि की पहचान बन गया।

    इसके बाद उन्होंने कई टीवी शोज में काम किया। दिल से दिल तक में सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को पसंद आई। शो ने अच्छी टीआरपी हासिल की और रश्मि की लोकप्रियता और बढ़ी। टीवी के साथ साथ उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। दबंग 2 में उनका छोटा सा रोल नजर आया। इसके अलावा ये लम्हे जुदाई के सबनम मौसी और सुपरस्टार जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया। भले ही फिल्मों में उनकी भूमिकाएं सीमित रहीं लेकिन उन्होंने हर मंच पर खुद को साबित करने की कोशिश जारी रखी।

    रश्मि की पर्सनैलिटी का एक अलग पहलू तब सामने आया जब उन्होंने बिग बॉस 13 में हिस्सा लिया। इस रियलिटी शो ने उनकी छवि को नया आयाम दिया। दर्शकों ने उन्हें सिर्फ एक अभिनेत्री के रूप में नहीं बल्कि एक संवेदनशील और मजबूत महिला के रूप में देखा। शो में सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनकी नोकझोंक और बहसें काफी चर्चा में रहीं। दोनों पहले एक साथ काम कर चुके थे और बिग बॉस में उनकी टकराहट ने शो को और दिलचस्प बना दिया।

    बिग बॉस के बाद रश्मि की फैन फॉलोइंग में जबरदस्त इजाफा हुआ। उन्होंने यह साबित किया कि वे केवल एक किरदार तक सीमित नहीं हैं बल्कि असल जिंदगी में भी चुनौतियों का सामना करने का हौसला रखती हैं। 40 की उम्र में भी वे इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और नए प्रोजेक्ट्स के जरिए दर्शकों से जुड़ी हुई हैं। उनका सफर संघर्ष से सफलता तक की ऐसी कहानी है जो यह सिखाती है कि शुरुआत चाहे जहां से हो मंजिल मेहनत से ही तय होती है।

  • अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, BMC को चेतावनी कमिश्नर को घोड़े पर ऑफिस आना पड़ेगा

    अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, BMC को चेतावनी कमिश्नर को घोड़े पर ऑफिस आना पड़ेगा



    नई दिल्ली । मुंबई में सड़क अतिक्रमण की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC ब्रॉम्बे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को कड़ी फटकार लगाई है। पवई के एक स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविंद्र घुघे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि शिकायतों के बावजूद अतिक्रमण हटाने में लापरवाही चिंताजनक है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कमिश्नर को ‘घोड़े पर’ दफ्तर आना पड़ सकता है।

    पवई के हीरानंदानी इलाके की लगभग 90 फीट चौड़ी सड़क पर अतिक्रमण की तस्वीरें कोर्ट में पेश की गईं। अदालत ने देखा कि फुटपाथ पर कई झुग्गियां बन गई हैं जिससे स्कूली बच्चों और आम जनता को चलने-फिरने में भारी परेशानी हो रही है। सड़क की चौड़ाई घटकर लगभग एक लेन रह गई है जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।

    जस्टिस घुघे ने कहा देखा जाए तो इस सड़क से चार कारें एक साथ गुजर सकती हैं लेकिन अब देखिए क्या हाल हो गया है यह घटकर सिर्फ एक लेन की रह गई है। मुझे तो यह सोचकर हैरानी होती है कि आने वाले सालों में क्या होगा लोगों को मोटरसाइकिल छोड़नी पड़ेगी और साइकिल अपनानी होगी या फिर सबसे अच्छा विकल्प घोड़ा है घोड़ा भीड़-भाड़ में भी अच्छी तरह रास्ता निकाल लेता है। कल्पना कीजिए कि आपके BMC के कमिश्नर घोड़े पर बैठकर अपने ऑफिस आ रहे हैं तो वह कैसे लगेंगे।

    उन्होंने आगे कहा मुंबई को आखिर क्या होता जा रहा है? जैसे ही कोई सड़क बनती है लोग वहां आकर कब्जा जमा लेते हैं देखिए आप अपने ही शहर का क्या हाल कर रहे हैं। इतनी खूबसूरत सड़क है और आपने इसका क्या बना दिया है? हम नगर निगम के प्रमुख कमिश्नर या किसी भी अन्य अधिकारी को कोर्ट बुला सकते हैं और उनसे इस पर जवाब मांग सकते हैं।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कई बार शिकायतें और बैठकें की गईं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही कहा गया कि कुछ सिविक अथॉरिटीज अतिक्रमण को टैंकर से पानी सप्लाई और टॉयलेट की सुविधा देकर बढ़ावा दे रहे हैं। क्षेत्र में चार स्कूल होने के कारण माता-पिता के आने-जाने से वाहन अधिक होते हैं और अतिक्रमण के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ जाती है।

    हाईकोर्ट ने BMC की ओर से पेश वकील को निर्देशों के पालन के लिए समय दिया है और कार्रवाई की जानकारी अदालत में देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाया जाए और सड़क को सामान्य रूप से खुला सुनिश्चित किया जाए।

  • CM डॉ. मोहन ने वंदे मातरम प्रोटोकॉल का किया स्वागत, कहा यह हमारी एकता का प्रतीक, MP में भी होगा लागू

    CM डॉ. मोहन ने वंदे मातरम प्रोटोकॉल का किया स्वागत, कहा यह हमारी एकता का प्रतीक, MP में भी होगा लागू


    भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के लिए जारी नए प्रोटोकॉल का मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुले दिल से स्वागत किया है। नए निर्देशों में वंदे मातरम के सभी छह छंदों को पूर्ण सम्मान के साथ गाने और राष्ट्रगान जन गण मन से पहले बजाने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक बताया है और कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय भावना को मजबूत करेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा आज जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हमारे राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के लिए नए प्रोटोकॉल जारी किए हैं जिसमें सभी छह छंदों को पूर्ण सम्मान के साथ गाने और राष्ट्रीय गान से पहले बजाने का प्रावधान है तो मेरा हृदय गर्व से भर उठता है। यह न केवल बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना को सच्ची श्रद्धांजलि है बल्कि हमारी मातृभूमि के प्रति उस अनंत प्रेम और बलिदान की याद दिलाता है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं को प्रेरित किया।

    उन्होंने आगे कहा वन्दे मातरम हमारे दिल की धड़कन है हमारे रक्त की पुकार है यह वह गीत है जो हमें याद दिलाता है कि भारत माता की सेवा में हमारा जीवन समर्पित है। यह राष्ट्रगीत हमारी एकता का प्रतीक है। आइए हम सब मिलकर इस पवित्र गीत के माध्यम से राष्ट्र की सेवा का संकल्प लें जय हिंद जय भारत वन्दे मातरम!

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में इस निर्णय का त्वरित और पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। नए दिशा-निर्देशों के तहत सरकारी कार्यक्रमों स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम के पूरे छह छंद अनिवार्य होंगे और सभी को खड़े होकर सम्मान देना होगा।

  • कर्नाटक में गन कल्चर का 'विवादित' शो: कांग्रेस विधायक का पिस्टल संग वीडियो वायरल, पुलिस ने शुरू की जांच, उठ रहे गंभीर सवाल

    कर्नाटक में गन कल्चर का 'विवादित' शो: कांग्रेस विधायक का पिस्टल संग वीडियो वायरल, पुलिस ने शुरू की जांच, उठ रहे गंभीर सवाल


    नई दिल्ली। डिजिटल युग में ‘रील’ बनाने का शौक अब जनप्रतिनिधियों के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। ताजा मामला कर्नाटक के कलबुर्गी जिले से सामने आया है, जहाँ एक पारिवारिक समारोह के दौरान कांग्रेस विधायक मतीन पटेल का कथित तौर पर हथियार लहराते हुए डांस करने का वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैली इस रील ने न केवल विधायक की कार्यशैली पर उंगलियां उठाई हैं, बल्कि सार्वजनिक आयोजनों में हथियार प्रदर्शन और बढ़ती गन कल्चर पर भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    सामने आई वायरल वीडियो क्लिप किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगती। इसमें विधायक मतीन पटेल एक चमचमाती काली एसयूवी से टशन में उतरते दिखाई देते हैं। इसके बाद वे फिल्म ‘धुरंधर’ के एक लोकप्रिय गाने पर पिस्टल जैसी दिखने वाली वस्तु हाथ में लेकर थिरकते नजर आते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि वीडियो में उनके पीछे खड़े कुछ समर्थक भी हाथों में बंदूक जैसी वस्तुएं थामे हुए हैं। जैसे ही यह क्लिप इंटरनेट पर आई, नेटिजन्स ने इसे गैर-जिम्मेदाराना आचरण करार देते हुए विधायक की जमकर क्लास लगा दी। लोगों का तर्क है कि एक जनप्रतिनिधि, जिसका काम कानून की रक्षा और समाज को सही दिशा देना है, उसका इस तरह हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन करना बेहद खतरनाक संदेश देता है।

    मामला जब सियासी गलियारों में गर्म हुआ और चौतरफा घिरने लगे, तो विधायक मतीन पटेल ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिखाई दे रही वस्तु कोई असली हथियार नहीं, बल्कि एक ‘खिलौना बंदूक’ थी। उनके अनुसार, यह पूरी प्रस्तुति एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम का हिस्सा थी, जहाँ उन्होंने बच्चों की जिद पर फिल्म के एक काल्पनिक किरदार की तरह कपड़े पहने और एक्ट किया था। पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो को गलत संदर्भ में फैलाकर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है और वे इस बारे में पुलिस को अपना पक्ष रख चुके हैं।

    हालांकि, पुलिस इस दलील को आसानी से स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रही है। कलबुर्गी शहर के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस डी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए औपचारिक जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस अब इस बात का वैज्ञानिक सत्यापन कर रही है कि वीडियो में इस्तेमाल हुए हथियार असली थे या वाकई खिलौने। साथ ही, उस स्थान और क्षेत्र की भी शिनाख्त की जा रही है जहाँ यह वीडियो शूट हुआ था।

    पुलिस आयुक्त ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि यदि जांच में हथियार असली पाए जाते हैं, तो उनके लाइसेंस की वैधता और नियमों के उल्लंघन की गहनता से पड़ताल की जाएगी। यदि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों की अनदेखी पाई गई, तो संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई है कि क्या सोशल मीडिया पर चंद लाइक्स और फेम के लिए जनप्रतिनिधियों को अपनी मर्यादा और कानूनी सीमाओं को ताक पर रख देना चाहिए? फिलहाल, सबकी निगाहें पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

  • वंदे मातरम के छह छंद अनिवार्य -जिसने जलाई स्वतंत्रता की ज्वाला, अब उसे मिला औपचारिक सम्मान

    वंदे मातरम के छह छंद अनिवार्य -जिसने जलाई स्वतंत्रता की ज्वाला, अब उसे मिला औपचारिक सम्मान

    नमो मात्रे पृथिव्ये, नमो मात्रे पृथिव्या:।
    माता पृथ्वी (मातृभूमि) को नमस्कार है, मातृभूमि को नमस्कार है।
    भारत की आत्मा में यदि कोई सबसे पवित्र भाव प्रवाहित होता है, तो वह है, मातृभूमि का भाव। यह भाव आज की राजनीति से नहीं, सहस्राब्दियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना से जन्मा है। सिंधु घाटी सभ्यता में मातृदेवी की मूर्तियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे पूर्वज धरती को उर्वरता और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में पूजते थे।अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त (12.1.12) में उद्घोष है , माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। अर्थात-धरती मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूँ। यह केवल मंत्र नहीं, भारतीय अस्मिता का मूल स्वर है। यस्यां वेदाः प्रतिष्ठिताः-जिस भूमि पर ज्ञान और संस्कृति प्रतिष्ठित हुई, वह केवल मिट्टी नहीं, चेतना है।

    भारत की हर परंपरा इस भाव की साक्षी है ,निर्माण से पहले भूमि-पूजन, किसान का बोआई से पहले मिट्टी को प्रणाम, गृहप्रवेश से पूर्व भूमि स्पर्श। यह सब बताता है कि जो हमें अन्न, जल और वायु देती है, वह पूज्य है।
    इसी मातृभाव को शब्द दिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने, अपने उपन्यास आनंदमठ में। वंदे मातरम् कोई कविता नहीं थी, यह राष्ट्रीय पुनर्जागरण का बिगुल था। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह स्वदेशी क्रांति का घोष बना। क्रांतिकारी फाँसी के फंदे पर झूलते हुए यही कहते थे , वंदे मातरम्! अरविंद घोष से लेकर भगत सिंह तक, इस गीत ने अनगिनत हृदयों में ज्वाला जलाई। यह जन-जन के कंठ की आवाज बन गया।
    औपनिवेशिक काल में सांप्रदायिक संवेदनशीलता और राजनीतिक संतुलन के कारण गीत के कुछ अंशों को सीमित किया गया। परंतु प्रश्न आज भी वही है-क्या मातृभूमि की वंदना किसी एक पंथ का विषय है? अनेक देशों के राष्ट्रगानों में भूमि और राष्ट्र की स्तुति है। यदि जन्मदात्री माँ का सम्मान स्वाभाविक है, तो धात्री माँ-जो हमें जीवन देती है-उसका सम्मान विवाद क्यों बने?
    दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था यदि ‘भारत माता’ में से ‘माता’ निकाल दें, तो ‘भारत’ का अर्थ ही नहीं रह जाता। यह कथन आज और भी प्रासंगिक प्रतीत होता है।
    आज की ऐतिहासिक घोषणा
    केंद्र सरकार ने 28 जनवरी 2026 वंदे मातरम् के संबंध में स्पष्ट और औपचारिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान, एकरूपता और गरिमा सुनिश्चित करना बताया गया
    नए दिशा-निर्देश : क्या-क्या अनिवार्य है?
    जब भी राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण का गायन या वादन होगा, सभी उपस्थित व्यक्तियों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा। यदि फिल्म, समाचार-फीचर या वृत्तचित्र के हिस्से के रूप में बजाया जाए, तो खड़े होना अनिवार्य नहीं है।
    अब वंदे मातरम् के सभी छह छंद गाए/बजाए जाएंगे। जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) जो पहले प्रायः केवल पहले दो छंद (लगभग 65 सेकंड) उपयोग में आते थे। यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों हों, तो पहले वंदे मातरम् उसके बाद जन गण मन होगा। वन्दे मातरम का गायन राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर, राष्ट्रपति/राज्यपाल के आगमन-प्रस्थान पर , नागरिक सम्मान समारोह (जैसे पद्म पुरस्कार) , औपचारिक सरकारी कार्यक्रम , विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में और अन्य सार्वजनिक अवसर (सरकार के निर्देशानुसार) पर होगा। विद्यालयों में शुरुआत सामूहिक राष्ट्रगीत से की जा सकती है। इस हेतु ध्वनि-प्रसारण की उचित व्यवस्था हो। गीत के शब्द प्रतिभागियों में वितरित किए जा सकते हैं। गायन सामूहिक और सम्मानपूर्ण हो।
    वंदे मातरम के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी
    वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह मूल रूप से संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया था। बंकिम चंद्र ने यह गीत हुगली नदी के किनारे, चिनसुरा (Chinsurah) में लिखा था, जो वर्तमान पश्चिम बंगाल में स्थित है। यह माना जाता है कि वंदे मातरम् की कल्पना बंकिम चंद्र को लगभग 1876 के आसपास तब हुई, जब वे ब्रिटिश शासन में जिला अधिकारी (डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर) के पद पर कार्यरत थे। यह गीत बंकिम चंद्र के उपन्यास आनंदमठ (प्रकाशित: 1882) से लिया गया है। गीत लिखे जाने के तुरंत बाद जदुनाथ भट्टाचार्य से इसे संगीतबद्ध (धुन तैयार करने) का अनुरोध किया गया। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे जन गण मन (राष्ट्रीय गान) के साथ समान सम्मान प्रदान करते हुए राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया। 1896 में कलकत्ता (कोलकाता) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया। यह प्रस्तुति रवीन्द्रनाथ टैगोर ने दी थी।इसका गद्य रूप में अंग्रेज़ी अनुवाद श्री अरविंद ने 20 नवंबर 1909 को अपनी पत्रिका कर्मयोगिन में प्रकाशित किया।
    1896 – पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी गई 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् को सार्वजनिक रूप से गाया।
    1937 – सीमित उपयोग का निर्णय लिया गया, 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति (कोलकाता/फैजपुर संदर्भ) ने निर्णय लिया कि आधिकारिक कार्यक्रमों में केवल पहले दो छंद गाए जाएँ।
    प्रख्यात शास्त्रीय गायक ओंकारनाथ ठाकुर ने इस सीमित संस्करण का विरोध किया। उन्होंने कांग्रेस अधिवेशन में गाने से इंकार कर दिया, परंतु अपने निजी संगीत समारोहों में पूरा वंदे मातरम् गाना जारी रखा।
    15 अगस्त 1947 – ऐतिहासिक रेडियो प्रसारण इस दिन स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 1947) की सुबह आल इंडिया रेडियो से पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाया।
    प्रसिद्ध गायिका हीराबाई बड़ोदेकर ने इसे राग तिलक कामोद में प्रस्तुत किया (AIR दिल्ली) , दिलीपकुमार रॉय ने इसे ध्रुपद-धमार शैली में गाया। विष्णुपंत पागनीस ने ग्रामोफोन रिकॉर्ड में इसे राग सारंग में प्रस्तुत किया। केशवराव भोले ने इसे राग देशकार में रिकॉर्ड किया।
    वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना का प्रवाह है। नए दिशा-निर्देश इसे संस्थागत सम्मान देने का प्रयास हैं। पर एक मूल प्रश्न भी उठता है क्या अपनी ही धरा-माता के सम्मान के लिए कानून बनाना पड़े? सच यह है कि मातृभूमि का सम्मान हमारा जन्मजात कर्तव्य है। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर तौलना उचित नहीं। स्वतंत्रता का अर्थ अनुशासनहीनता नहीं होता। माँ का सम्मान बहस का विषय नहीं, संस्कार का विषय है।
    वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है। वंदे मातरम् केवल गीत नहीं-भारतीयता का चिरंतन स्पंदन है। सिंधु सभ्यता से वेदों तक, स्वतंत्रता संग्राम से आज तक मातृभूमि का सम्मान हमारी संस्कृति का मूल तत्व रहा है। आज जब छहों अंतरों के साथ इसे औपचारिक सम्मान मिला है, तो यह केवल एक घोषणा नहीं-यह उस ऐतिहासिक ऋण की आंशिक भरपाई है, जो उन शहीदों के प्रति है जिन्होंने इसी गीत के साथ प्राण न्यौछावर किए। जब हम वंदे मातरम् कहते हैं, तो हम राजनीति नहीं करते-हम अपनी माँ को प्रणाम करते हैं। जब यह गीत गूँजे, तो वह केवल औपचारिकता न हो वह हमारे अंतर्मन की श्रद्धा का उद्घोष हो।
    वंदे मातरम्।
  • वैलेंटाइन डे स्पेशल: कपिल शर्मा ने पूछा- क्या आज भी मिलते हैं लड़कियों के मैसेज? शाहिद कपूर के स्मार्ट जवाब ने लूटी महफिल

    वैलेंटाइन डे स्पेशल: कपिल शर्मा ने पूछा- क्या आज भी मिलते हैं लड़कियों के मैसेज? शाहिद कपूर के स्मार्ट जवाब ने लूटी महफिल


    नई दिल्लीबॉलीवुड के चॉकलेटी बॉय शाहिद कपूर और ‘नेशनल क्रश’ तृप्ति डिमरी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘ओ रोमियो’ को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। फिल्म 13 फरवरी को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है और वैलेंटाइन वीक  के इस रोमांटिक माहौल को और अधिक खास बनाने के लिए फिल्म की पूरी टीम ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शर्मा शो’ के मंच पर पहुंची। नेटफ्लिक्स द्वारा जारी किए गए इस एपिसोड के ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर पहले ही धूम मचा दी है जिसमें विशाल भारद्वाज की निर्देशन वाली इस फिल्म की स्टारकास्ट मस्ती के मूड में नजर आ रही है।

    शो के दौरान कॉमेडी किंग कपिल शर्मा ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में शाहिद कपूर की खिंचाई करने की कोशिश की। कपिल ने मुस्कुराते हुए सवाल दागा कि क्या शादीशुदा होने के बावजूद आज भी उन्हें वैलेंटाइन्स डे पर लड़कियों के मैसेज आते हैं? इस गुदगुदाते सवाल पर शाहिद पहले तो थोड़ा हिचकिचाए लेकिन फिर अपनी चतुराई का परिचय देते हुए बोले कि वे अभी बैकस्टेज अपने बच्चों की उम्र पर चर्चा कर रहे थे। जब कपिल ने चुटकी लेते हुए कहा किबच्चों को क्या पता चलेगा वे तो छोटे हैं तब शाहिद ने अपनी पत्नी मीरा राजपूत की ओर इशारा करते हुए बेहद ही शानदार जवाब दिया। उन्होंने हंसते हुए कहाबच्चों की मम्मी को काफी कुछ पता चल जाता है। शाहिद के इस पारिवारिक और मजाकिया जवाब ने दर्शकों को ठहाकों से सराबोर कर दिया।

    हंसी का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। कपिल ने तृप्ति डिमरी की ओर रुख करते हुए उनके कॉलेज के दिनों के प्यार और लव लेटर्स Love Letters पर सवाल किया। तृप्ति ने बेहद मासूमियत और बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कभी लव लेटर लिखे तो नहीं लेकिन पढ़े बहुत सारे हैं। उनकी इस साफगोई पर जज अर्चना पूरन सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। वहीं शो के चहेते कलाकार सुनील ग्रोवर और कीकू शारदा ने रिंकू भाभी और ननद के किरदारों में मेहमानों के साथ ऐसी स्किट पेश की जिसने मनोरंजन के स्तर को दोगुना कर दिया।

    इस खास एपिसोड का एक और बड़ा आकर्षण रहीं दिग्गज अभिनेत्री फरीदा जलाल। फिल्म ‘ओ रोमियो’ के टीजर में उन्हें गाली देते देख हर कोई हैरान था। शो में इस पर से पर्दा उठाते हुए फरीदा जी ने बताया कि जब विशाल भारद्वाज फिल्म का ऑफर लेकर उनके घर पहुंचे तो उन्होंने पहले ही पूछ लिया था कि क्या उन्हें गाली देनी होगी। उन्होंने मुस्कुराते हुए खुलासा किया कि अगर गाली बहुत ज्यादा मर्यादाहीन नहीं होगी तो वे किरदार की मांग पर इसे जरूर निभाएंगी। 13 फरवरी को रिलीज हो रही फिल्म ‘ओ रोमियो’ से पहले यह एपिसोड दर्शकों के लिए रोमांस और हंसी का एक मुकम्मल पैकेज साबित होने वाला है।