Author: bharati

  • जन्मदिन के मौके पर सामने आई उनकी भविष्य की योजनाएं; क्या शिक्षा को ही बनाएंगी अपनी असली ताकत?

    जन्मदिन के मौके पर सामने आई उनकी भविष्य की योजनाएं; क्या शिक्षा को ही बनाएंगी अपनी असली ताकत?


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के लोकप्रिय और प्रतिष्ठित परिवारों में शामिल अजय देवगन और काजोल की बेटी नीसा देवगन एक बार फिर अपने जन्मदिन के मौके पर चर्चा का केंद्र बन गई हैं। 20 अप्रैल को उन्होंने अपना 23वां जन्मदिन मनाया, जिसके बाद उनके जीवन, शिक्षा और भविष्य की योजनाओं को लेकर लोगों की रुचि और अधिक बढ़ गई है। इस अवसर पर परिवार की ओर से उनके बचपन से जुड़ी कुछ पुरानी यादें साझा की गईं, जिनमें उनकी मासूमियत और पारिवारिक जुड़ाव साफ झलकता है। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया और नीसा की सादगी और सहज व्यक्तित्व की सराहना की जाने लगी।

    नीसा देवगन का नाम हमेशा से ही स्टार किड्स की चर्चा में शामिल रहा है, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को काफी हद तक निजी रखने की कोशिश की है। एक बड़े फिल्मी परिवार से होने के बावजूद उन्होंने ग्लैमर की दुनिया से दूरी बनाकर अपनी पढ़ाई और व्यक्तिगत विकास पर अधिक ध्यान दिया है। बचपन से ही उनकी परवरिश एक संतुलित माहौल में हुई है, जहां उन्हें सामान्य जीवन जीने और अपनी पहचान खुद बनाने की सीख दी गई है। उनके माता पिता ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वे अपने बच्चों को किसी भी तरह के दबाव में नहीं रखना चाहते और उन्हें अपने फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता देते हैं।

    नीसा की शिक्षा का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के एक प्रतिष्ठित स्कूल से प्राप्त की, जहां उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चली गईं, जहां उन्होंने सिंगापुर में एक अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वहां उन्होंने विविध सांस्कृतिक माहौल में रहकर सीखने का अनुभव हासिल किया। इसके बाद उन्होंने स्विट्जरलैंड में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की, जिसमें उनका मुख्य फोकस लग्जरी ब्रांड मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजी पर रहा। इस तरह उनकी शिक्षा ने उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण और आधुनिक बिजनेस समझ विकसित करने में मदद की।

    साल 2025 में नीसा ने अपनी पढ़ाई पूरी की और इसके बाद से ही उनके करियर को लेकर तरह तरह की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि अब तक उन्होंने किसी भी पेशेवर क्षेत्र में औपचारिक रूप से कदम नहीं रखा है। फिल्म इंडस्ट्री में आने को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन परिवार की ओर से यह साफ किया गया है कि फिलहाल उनका फिल्मी दुनिया में कदम रखने का कोई इरादा नहीं है। वे अपने भविष्य को लेकर सोच समझकर आगे बढ़ने में विश्वास रखती हैं और अभी अपने व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दे रही हैं।

    नीसा देवगन अक्सर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन वे मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं से दूरी बनाए रखने की कोशिश करती हैं। उनकी जीवनशैली और सोच उन्हें अपने समकालीन युवाओं से अलग बनाती है। परिवार का भी यह मानना है कि उन्हें अपने तरीके से जीवन जीने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। वर्तमान में नीसा अपने भविष्य की दिशा तय करने की प्रक्रिया में हैं और अपने अनुभवों के आधार पर आगे के फैसले लेने की तैयारी कर रही हैं।

  • ग्रामीण धरोहरों को विकास का आधार बनाने के लिए विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र!

    ग्रामीण धरोहरों को विकास का आधार बनाने के लिए विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र!

    नई दिल्ली। वर्ल्ड हेरिटेज डे के अवसर पर नई दिल्ली में ग्रामीण धरोहर संरक्षण और सतत विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें देश की सांस्कृतिक और ग्रामीण विरासत को बचाने और उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर यह विचार प्रमुख रूप से सामने आया कि धरोहर केवल ऐतिहासिक पहचान नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का एक मजबूत आधार भी हो सकती है। कार्यक्रम में पिछले कई वर्षों में किए गए प्रयासों और ग्रामीण क्षेत्रों में धरोहर संरक्षण से जुड़े कार्यों की समीक्षा भी की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते समय में धरोहर संरक्षण को नई चुनौतियों के अनुरूप ढालना आवश्यक है ताकि इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में धरोहर संरक्षण के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान मौजूद हैं लेकिन असली चुनौती उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर जागरूकता की कमी और संवेदनशीलता का अभाव देखा जाता है जिससे ऐतिहासिक स्थलों और ग्रामीण विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वहां धरोहर को संरक्षित करने के लिए अधिक सक्रिय प्रयासों की आवश्यकता है ताकि स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

    संस्था के अध्यक्ष ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ग्रामीण धरोहर को केवल संरक्षण की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसे स्थानीय विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने बताया कि संस्था पिछले कई वर्षों से उपेक्षित धरोहर स्थलों को पुनर्जीवित करने और उन्हें स्थानीय समुदायों के साथ जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। उनका मानना है कि जब स्थानीय लोग अपनी विरासत से जुड़ते हैं तो उसका संरक्षण स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है और यह क्षेत्रीय विकास में भी योगदान देता है।

    कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भी साझा किया गया जिसमें बताया गया कि कई देशों में धरोहर संरक्षण में समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह देखा गया कि जब लोग अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं तो धरोहर अधिक सुरक्षित रहती है और पीढ़ियों तक आगे बढ़ती है। इस दौरान यह भी कहा गया कि धरोहर केवल भौतिक संरचनाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें ज्ञान परंपराएं, सामाजिक मूल्य और सांस्कृतिक भावनाएं भी शामिल हैं जिन्हें संरक्षित करना आवश्यक है।

    चर्चा में यह बात भी सामने आई कि भारत की ग्रामीण धरोहर जिसमें पारंपरिक खेती, हस्तशिल्प, लोक कलाएं और स्थानीय भाषाएं शामिल हैं अभी भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाई हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यदि इन संसाधनों को आर्थिक अवसरों से जोड़ा जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की बड़ी ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखते हुए धरोहर आधारित विकास मॉडल अपनाना समय की आवश्यकता है।

    कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया और कहा गया कि नई पीढ़ी को धरोहर से जोड़ना और उनके भीतर सांस्कृतिक जागरूकता विकसित करना भविष्य के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर यह भी कहा गया कि धरोहर संरक्षण केवल सरकारी या संस्थागत जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।

  • हॉर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सतर्क, नौसेना की एडवाइजरी, ‘हमारी बिना अनुमति के न गुजरें’

    हॉर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सतर्क, नौसेना की एडवाइजरी, ‘हमारी बिना अनुमति के न गुजरें’


    नई दिल्ली। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना के बाद भारत ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। 18 अप्रैल को भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी में संचालित भारतीय जहाजों के लिए नई एडवाइजरी जारी की जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे केवल नेवी के आदेश मिलने पर ही इस संवेदनशील मार्ग से गुजरें।

    नेवी की निगरानी में ही होगा जहाजों का मूवमेंट

    सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना ने हॉर्मुज पार करने वाले सभी भारतीय जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। अब तक 11 जहाज इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। हालांकि हाल ही में दो भारतीय जहाजों जग अर्नव और सनमार हेराल्ड पर गोलीबारी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा था।

    देश गरिमा को मिल रही नौसेना की सुरक्षा

    भारतीय टैंकर देश गरिमा 18 अप्रैल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। फिलहाल इसे अरब सागर में भारतीय नौसेना की सुरक्षा मिल रही है और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की संभावना है।

    लारक द्वीप के आसपास बढ़ाई गई सतर्कता
    एडवाइजरी में खासतौर पर जहाजों को लारक द्वीप से दूर रहने को कहा गया है। यह द्वीप हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में स्थित है और ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम केंद्र माना जाता है। इसी कारण यहां सुरक्षा बेहद कड़ी रहती है और हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।

    वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग

    हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है जहां से पहले वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता रहा है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    भारतीय नौसेना की मजबूत तैनाती
    फिलहाल फारस की खाड़ी में 14 भारतीय जहाज मौजूद हैं जो हॉर्मुज पार करने का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय नौसेना इन सभी जहाजों के संपर्क में है और उन्हें अनुमति मिलने के बाद ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। इसके अलावा क्षेत्र में भारतीय नौसेना के 7 युद्धपोत तैनात किए गए हैं जो जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेंगे।

  • भोपाल और जबलपुर जेल में दो बंदियों ने फांसी लगाई सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    भोपाल और जबलपुर जेल में दो बंदियों ने फांसी लगाई सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की दो प्रमुख सेंट्रल जेलों में कैदियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने जेल प्रशासन की व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक घटना भोपाल केंद्रीय जेल की है और दूसरी जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल की है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    भोपाल सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी ने आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गुड्डू आदिवासी के रूप में हुई है जो रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र का रहने वाला था। वह वर्ष 2017 से जेल में बंद था और जेल परिसर की गौशाला में गौसेवक के रूप में कार्य कर रहा था। जानकारी के अनुसार उसने जेल परिसर में स्थित गौशाला क्षेत्र में पेड़ पर रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में भेजा गया है। गांधीनगर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।

    दूसरी घटना जबलपुर केंद्रीय जेल की है जहां एक विचाराधीन बंदी ने अस्पताल वार्ड के शौचालय में तौलिये से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गुड्डू उर्फ राजा विश्वकर्मा के रूप में हुई है जो संजीवनी नगर क्षेत्र का निवासी था। उसे वर्ष 2024 में विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया था। जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से शुगर और अन्य बीमारियों से भी पीड़ित था। घटना के समय वह जेल के अस्पताल खंड में भर्ती था और वहीं उसने यह कदम उठाया। जेल स्टाफ ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया लेकिन जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया।

    घटना के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित थाने को सूचना दी और सिविल लाइन थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। उप जेलर के अनुसार बंदी की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही थी लेकिन अचानक हुई इस घटना ने सभी को चौंका दिया।

    दोनों मामलों में आत्महत्या के पीछे के कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस और जेल प्रशासन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं जिनमें मानसिक स्थिति स्वास्थ्य समस्याएं और जेल के भीतर की परिस्थितियां शामिल हैं। लगातार दो जेलों में ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी प्रणाली पर गंभीर बहस शुरू हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और नियमित काउंसलिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना ने की ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी, बनाया ये प्लान..

    ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना ने की ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी, बनाया ये प्लान..

    नई दिल्ली। ईरान में जारी तनाव और संभावित तेल-गैस संकट के बीच भारतीय सेना ने ऊर्जा खपत को कम करने और वैकल्पिक संसाधनों को अपनाने के लिए बड़ा रणनीतिक प्लान तैयार किया है। सेना अब एलपीजी और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाकर बायोगैस, सोलर और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रही है। यह योजना अगले महीने से मिशन मोड में लागू की जाएगी।

    फ्यूल बचाने के लिए नई रणनीति तैयार
    रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना ने बायोगैस स्टोव्स की खरीद का ऑर्डर जारी कर दिया है। इसके साथ ही जवानों की मूवमेंट को 400 किलोमीटर के दायरे तक सीमित करने की योजना बनाई गई है, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव बिना किसी ऑपरेशनल क्षमता को प्रभावित किए लागू किया जाएगा।

    वाहनों की पूलिंग और इलेक्ट्रिक विकल्पों पर जोर
    सेना अब वाहनों की पूलिंग सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, यानी एक साथ कई कार्यों को एक यात्रा में पूरा करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों और सीएनजी के उपयोग को भी बढ़ाने की योजना है। कुछ नियम पहले ही लागू हो चुके हैं, जबकि बाकी अगले एक-दो हफ्तों में लागू किए जाएंगे।

    हवाई गतिविधियों में भी कटौती
    फ्यूल बचाने के लिए सेना से जुड़ी कुछ उड़ानों को भी सीमित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह कदम रणनीतिक जरूरतों को प्रभावित किए बिना ईंधन खपत कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

    सौर और पवन ऊर्जा पर बड़ा फोक
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    सेना की योजना आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर सोलर प्लांट और पवन चक्कियों की स्थापना करने की है। अनुमान के मुताबिक, सेना में रोजाना लगभग 1,56,000 किलो कुकिंग गैस की खपत होती है, जिसमें बायोगैस के इस्तेमाल से लगभग 20% तक बचत संभव है। वहीं, करीब 2 लाख वाहनों के चलते बड़ी मात्रा में ईंधन खर्च होता है।

    पांच साल का हरित ऊर्जा मिशन
    सेना का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में खाली और उपयोग न हो रहे क्षेत्रों में सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाए जाएं, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटे।

    होर्मुज जलमार्ग से गुजरता भारतीय टैंकर सुरक्षित

    इसी बीच एक अहम घटनाक्रम में भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर मुंबई की ओर बढ़ रहा है। यह वही संवेदनशील जलमार्ग है, जहां हाल ही में तनाव की स्थिति देखने को मिली थी। इस टैंकर पर 31 भारतीय नाविक सवार हैं और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।

  • बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..

    बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में अब कुछ ही दिन शेष हैं। 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है, जबकि दूसरे चरण के लिए 29 तारीख तय की गई है। इसके साथ ही तमिलनाडु में भी 23 को एक ही चरण में मतदान होगा। वहीं 4 मई को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    बंगाल में बनेगी भाजपा सरकार- हिमंत बिस्वा सरमा
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का बड़ा दावा किया है। पश्चिम बर्धमान जिले के गौरबाजार में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में भाजपा की सरकार बनना 100 प्रतिशत तय है। उन्होंने पार्टी की संभावनाओं को लेकर पूरा भरोसा जताया।

    चुनावी मंच से दी सख्त चेतावनी
    पांडुआ में जनसभा को संबोधित करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा बयान दिया। उन्होंने टीएमसी के कथित सिंडिकेट पर निशाना साधते हुए कहा, 29 तारीख से पहले सरेंडर कर दो, नहीं तो बाद में जेल जाना पड़ेगा। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

    गौरव वल्लभ का दावा, भवानीपुर से हारेंगी ममता बनर्जी

    भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी सरकार ने मां, माटी और मानुष के साथ विश्वासघात किया है और राज्य में अराजकता का माहौल बना रहा।

    भाजपा नेताओं का डबल इंजन सरकार पर जोर
    भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता डबल इंजन सरकार बनाने का मन बना चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि 29 अप्रैल से पहले आरोपियों को सरेंडर कर देना चाहिए, अन्यथा 4 मई के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • पहाड़ों के बीच सुकून तलाशने वालों के लिए जन्नत से कम नहीं है शानगढ़!

    पहाड़ों के बीच सुकून तलाशने वालों के लिए जन्नत से कम नहीं है शानगढ़!


    नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की सैंज घाटी में स्थित शानगढ़ एक ऐसा शांत और प्राकृतिक गांव है जो अपनी अनछुई सुंदरता और सादगी के कारण विशेष पहचान रखता है। ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों और विशाल हरित मैदानों के बीच बसा यह स्थान शहरों की भागदौड़ से दूर एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराता है। यहां पहुंचते ही वातावरण की शांति और ठंडी हवा मन को सुकून देती है और ऐसा महसूस होता है जैसे जीवन की गति कुछ समय के लिए धीमी पड़ गई हो।

    शानगढ़ की सबसे बड़ी विशेषता इसके विस्तृत घास के मैदान हैं जो दूर तक फैले हुए हैं और चारों ओर हरियाली का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। देवदार के ऊंचे पेड़, लकड़ी से बने पारंपरिक घर और पहाड़ी जीवनशैली इस गांव की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाते हैं। यहां का जीवन आज भी सरल और प्रकृति के करीब है जहां लोग अपनी परंपराओं को संजोकर रखते हैं। आधुनिकता का प्रभाव सीमित होने के कारण यहां का वातावरण शुद्ध और प्राकृतिक बना हुआ है।

    यह स्थान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर स्थानीय आस्था का केंद्र है जहां लोगों की गहरी श्रद्धा जुड़ी हुई है। मंदिर के आसपास बने लकड़ी के छोटे ढांचे और पारंपरिक स्थापत्य शैली इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। शांत वातावरण में स्थित यह धार्मिक स्थल ध्यान और आत्मिक शांति के लिए उपयुक्त माना जाता है।

    शानगढ़ का मौसम पूरे वर्ष बदलता रहता है और हर मौसम इसकी सुंदरता को एक नया रूप देता है। वसंत और गर्मियों के दौरान यहां के घास के मैदान हरे और जीवंत हो जाते हैं तथा हल्की धूप वातावरण को और सुखद बना देती है। गर्मियों में भी यहां का तापमान अपेक्षाकृत ठंडा रहता है जिससे यह स्थान मैदानी इलाकों की गर्मी से राहत पाने के लिए उपयुक्त बन जाता है। शरद ऋतु में सेब और अखरोट के बागान इस क्षेत्र की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। सर्दियों में ठंडी हवाएं और हल्की बर्फ इसे एक शांत और आकर्षक रूप प्रदान करती हैं।

    मानसून के समय इस क्षेत्र में यात्रा सावधानी से करनी चाहिए क्योंकि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद अन्य मौसमों में यहां का सफर बेहद मनमोहक होता है और हर मोड़ पर प्राकृतिक दृश्य यात्रियों को आकर्षित करते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है जो यात्रा को रोमांचक और यादगार बना देता है।

    शानगढ़ में पर्यटकों के लिए होमस्टे की सुविधा उपलब्ध है जहां उन्हें स्थानीय जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर मिलता है। यहां का पारंपरिक भोजन और सरल आतिथ्य पर्यटकों के अनुभव को और भी खास बना देता है। यह गांव उन लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है जो प्रकृति के बीच शांति और सुकून के पल बिताना चाहते हैं और भीड़भाड़ से दूर एक सादगी भरा अनुभव तलाश रहे हैं।

  • खेल का महाकुंभ उज्जैन में सम्पन्न, फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल में CM की बड़ी घोषणाएं

    खेल का महाकुंभ उज्जैन में सम्पन्न, फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल में CM की बड़ी घोषणाएं


    उज्जैन । उज्जैन शहर में आयोजित फिरोजिया ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांच और उत्साह के बीच संपन्न हुआ। क्षीर सागर मैदान पर खेले गए इस फाइनल मैच में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और दर्शकों को अंत तक रोमांच से बांधे रखा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

    कार्यक्रम में देर रात तक भारी संख्या में खेल प्रेमी मैदान में मौजूद रहे, जिससे शहर में क्रिकेट और खेल के प्रति गहरा जुनून देखने को मिला। फाइनल मुकाबला 12 से 19 अप्रैल तक चली इस प्रतियोगिता का समापन था, जिसमें दोनों टीमों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर विजेता टीम के लिए 1 लाख रुपये और उपविजेता टीम के लिए 51 हजार रुपये की नगद राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करते हैं और उनमें अनुशासन तथा टीम भावना को मजबूत बनाते हैं।

    सीएम ने उज्जैन में खेल सुविधाओं के विस्तार की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि नानाखेड़ा स्टेडियम, माधव नगर मैदान और दशहरा मैदान का आधुनिकरण किया जाएगा। इसके साथ ही क्षीरसागर मैदान को भी एक आधुनिक खेल स्टेडियम के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    यह प्रतियोगिता पिछले 21 वर्षों से आयोजित की जा रही है और इसका आयोजन सांसद अनिल फिरोजिया द्वारा उनके स्वर्गीय पिता भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में किया जाता है। इस बार आयोजन में महिला क्रिकेट मैच और मातृशक्ति सम्मान समारोह भी आकर्षण का केंद्र रहे, जिससे कार्यक्रम को सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम भी मिला।

    फाइनल मुकाबले के बाद पूरे आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। खिलाड़ियों के प्रदर्शन और दर्शकों की भारी भागीदारी ने यह साबित किया कि उज्जैन में खेल संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।

  • अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ ने वीकेंड पर पकड़ी रफ्तार, कलेक्शन में उछाल

    अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ ने वीकेंड पर पकड़ी रफ्तार, कलेक्शन में उछाल


    नई दिल्ली। अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की फिल्म भूत बंगला (Bhooth Bangla) लगातार सुर्खियों में छाई हुई है। आपको बता दें, इस फिल्म में वीकेंड का फायदा उठाकर काफी अच्छा कलेक्शन कर लिया है। तो चलिए उसकी रिपोर्ट जानते हैं। फैंस भी ट्विटर पर इस फिल्म की तारीफ करते हुए नजर आ रहे हैं काफी अच्छा रिव्यु इस फिल्म को दे रहे हैं यह एक कॉमेडी हॉरर फिल्म हैं।

    फिल्म का कलेक्शन
    रिलीज के पहले दिन से ही फिल्म ने अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और पहले वीकेंड में इसकी कमाई में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया. दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर बढ़ते क्रेज ने यह साफ कर दिया है कि अक्षय और प्रियदर्शन की जोड़ी आज भी बॉक्स ऑफिस पर मचा सकती है।भूत बंगला’ के तीसरे दिन के कलेक्शन ने बॉक्स ऑफिस पर हलचल मचा दी है। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ने रविवार को अब तक 23 करोड़ की शानदार कमाई कर ली है।

    फिल्म का कुल कलेक्शन
    हॉरर-कॉमेडी ‘भूत बंगला’ के लिए पहला वीकेंड बेहद शानदार रहा। फिल्म ने महज तीन दिनों में 58 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।जबकि ग्रॉस कलेक्शन 69.37 करोड़ तक पहुंच चुका है। दर्शकों के बीच अक्षय और प्रियदर्शन का पुराना जादू फिर से सिर चढ़कर बोल रहा है, जिससे फिल्म की कमाई में हर दिन जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है।

    फिल्म के कास्ट
    इस फिल्म से प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी पूरे 14 साल बाद स्क्रीन पर वापस लौटी है।इससे पहले ये दोनों ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’, ‘भूल भुलैया’ और ‘खट्टा मीठा’ जैसी कई कल्ट फिल्में दे चुके हैं, यही वजह है कि फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। और अब जब फिल्म रिलीज हो गई है तो बस चढ़कर सिनेमाघर पहुंच रहे हैं। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ वामिका गब्बी, तब्बू, राजपाल यादव, असरानी और जीशु सेनगुप्ता जैसे बड़े हुए कलाकार भी अहम रोल में हैं।

  • सरकार की बड़ी स्कॉलरशिप योजना, विदेश में शिक्षा के लिए मिलेगा फंड

    सरकार की बड़ी स्कॉलरशिप योजना, विदेश में शिक्षा के लिए मिलेगा फंड


    नई दिल्ली। सरकार ने छात्रों के लिए एक बड़ा मौका दिया है। National Overseas Scholarship (NOS) के तहत इस साल 125 स्कॉलरशिप दी जा रही हैं, जिससे छात्र विदेश में मास्टर्स और पीएचडी कर सकते हैं। यह योजना खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए शुरू की गई है, ताकि वे विदेश की टॉप यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर सकें।

    इस स्कीम को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय चलाता है और इसका उद्देश्य छात्रों को ग्लोबल स्तर पर पढ़ाई का मौका देना है। इस स्कॉलरशिप के तहत ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, ट्रैवल, वीजा और हेल्थ इंश्योरेंस तक का खर्च सरकार उठाती है।

    कौन कर सकता है National Overseas Scholarship में आवेदन
    इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन वही छात्र कर सकते हैं जो SC, डिनोटिफाइड/नोमैडिक ट्राइब्स, लैंडलेस लेबर या ट्रेडिशनल आर्टिजन कैटेगरी से आते हैं।

    योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास कम से कम 60% अंक होना जरूरी है। मास्टर्स के लिए ग्रेजुएशन और पीएचडी के लिए पोस्टग्रेजुएशन जरूरी है। उम्र सीमा 35 साल से कम होनी चाहिए और परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

    सबसे जरूरी शर्त यह है कि छात्र के पास विदेश की टॉप 500 QS रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी से एडमिशन ऑफर होना चाहिए।

    कैसे होता है चयन और कितनी मिलती है स्कॉलरशिप
    इस योजना के तहत हर साल कुल 125 सीटें दी जाती हैं, जिसमें 30% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं।

    चयन प्रक्रिया दो चरणों में होती है। पहले चरण में यूनिवर्सिटी की रैंकिंग के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। अगर रैंकिंग समान होती है तो उम्मीदवार के अंकों को देखा जाता है।

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    इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को पूरी फाइनेंशियल मदद मिलती है। पीएचडी के लिए 4 साल और मास्टर्स के लिए 3 साल तक सहायता दी जाती है।

    कुल मिलाकर, यह स्कीम उन छात्रों के लिए सुनहरा मौका है जो विदेश में पढ़ाई का सपना देखते हैं लेकिन आर्थिक वजहों से पीछे रह जाते हैं।