Author: bharati

  • कांतारा 1 में निगेटिव रोल ने घबराहट में डाला था रुक्मिणी वसंत कोअब यश संग टॉक्सिक

    कांतारा 1 में निगेटिव रोल ने घबराहट में डाला था रुक्मिणी वसंत कोअब यश संग टॉक्सिक


    नई दिल्ली । कांतारा चैप्टर 1 में रानी कनकवती के खलनायिका किरदार से दर्शकों का दिल जीतने वाली रुक्मिणी वसंत इन दिनों खूब चर्चा में हैं। शुरुआती करियर में निगेटिव रोल चुनना उनके लिए एक बड़ा और साहसिक फैसला थाजो अब उनके अभिनय के लिए लाभदायक साबित हुआ। फिल्म की सफलता और उनके किरदार की तारीफ ने यह साबित कर दिया कि समय पर लिया गया जोखिम कलाकार के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है रुक्मिणी ने बताया कि कांतारा जैसी बड़ी फिल्म का ऑफर मिलना उनके लिए रोमांचक अनुभव था। जब ऋषभ शेट्टी ने उन्हें फोन कर फिल्म का प्रस्ताव दियातो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। लेकिन जैसे ही पता चला कि उन्हें खलनायिका रानी कनकवती का रोल निभाना हैथोड़ी घबराहट भी हुई। शुरुआती वर्षों में नकारात्मक भूमिका निभाना आसान नहीं होताखासकर तब जब इंडस्ट्री में कलाकारों को खास तरह के रोल करने की सलाह या दबाव महसूस होता है।

    इंडस्ट्री की धारणाओं पर बात करते हुए रुक्मिणी ने कहा कि पहले से बनी धारणाएं कलाकारों को प्रभावित करती हैं। कोई सीधे तौर पर यह नहीं कहता कि आपको निगेटिव रोल नहीं करना चाहिएलेकिन माहौल ऐसा बन जाता है कि कलाकार खुद ही तनाव महसूस करने लगता है। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाई और कनकवती के किरदार को निभायाजो दर्शकों और समीक्षकों दोनों से सराहा गया। उनका अभिनय इतनी प्रभावशाली रहा कि किरदार लंबे समय तक लोगों की यादों में बना रहेगा। कांतारा में निभाए गए इस चुनौतीपूर्ण रोल के बाद रुक्मिणी अब अपने अगले प्रोजेक्ट्स को लेकर भी सुर्खियों में हैं। वह जल्द ही सुपरस्टार यश के साथ फिल्म टॉक्सिकमें नजर आएंगी। फिल्म का टीजर रिलीज होते ही दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर चुका है। टॉक्सिक19 मार्च 2026 को रिलीज होने वाली है और बॉक्स ऑफिस पर इसका मुकाबला धुरंधर 2से होगा।

    रुक्मिणी वसंत लगातार चुनौतीपूर्ण और दमदार किरदारों के लिए जानी जा रही हैं। उनके अभिनय का यह सफर यह दिखाता है कि जोखिम उठाना और अपनी क्षमता पर भरोसा रखना ही किसी कलाकार के करियर की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। कांतारा में निगेटिव रोल निभाने की उनकी हिम्मत और टॉक्सिकजैसी बड़ी फिल्मों में दिखने की तैयारी उन्हें इंडस्ट्री की अलग पहचान देती है। कुल मिलाकररुक्मिणी वसंत का सफर यह साबित करता है कि शुरुआती घबराहट और चुनौतियों के बावजूद सही रोल चुनना और उसमें खुद को साबित करना ही सफलता की कुंजी है। दर्शक उनके आगामी प्रोजेक्ट्स और दमदार प्रदर्शन के लिए बेताब हैं।

  • रिश्ते में 'स्पेस' जरूरी: घंटों बातें करने से बढ़ती है बोरियत, थोड़ी दूरी लाती है ताजगी

    रिश्ते में 'स्पेस' जरूरी: घंटों बातें करने से बढ़ती है बोरियत, थोड़ी दूरी लाती है ताजगी


    नई दिल्ली । रिश्तों में प्यार और नजदीकी की शुरुआत अक्सर रोमांचक होती है। नए प्यार में लोग सुबह की गुड मॉर्निंगसे लेकर रात की गुड नाइटतक हर पल एक-दूसरे के साथ साझा करना चाहते हैं। घंटों फोन पर बातें करनाहर छोटी-छोटी बात साझा करना शुरू में सुखद अनुभव लगता है। लेकिन समय के साथ यही आदत रिश्ते में बोझ बन सकती है। लगातार संपर्क में रहने से बातचीत की गुणवत्ता गिरती हैरोमांच खत्म होता है और रिश्ते में बोरियत और चिड़चिड़ापन आने लगता है। सोचिए अगर आपको गुलाब जामुन बेहद पसंद हैलेकिन दिन में बार-बार वही परोसा जाएतो कुछ ही दिनों में उसका स्वाद फीका लगने लगेगा। रिश्तों का गणित भी कुछ ऐसा ही है। जरूरत से ज्यादा जुड़े रहने से रिश्ते में भावनात्मक दूरी बन सकती है। जब बातचीत केवल और बताओ या तुम बताओ? जैसे सवालों तक सीमित रह जाएतो समझ लेना चाहिए कि अब रिश्ते में रोमांच नहींबल्कि आदत रह गई है।

    घंटों बात करने के कई नुकसान हैं। लगातार हर छोटी बात साझा करने से मिलने पर कुछ खास बचता ही नहीं। हर समय रिप्लाई देने का दबाव मानसिक थकान और झुंझलाहट पैदा करता है। साथ ही अगर आप अपने शौकदोस्तों और परिवार को छोड़कर पूरी तरह पार्टनर में खो जाएंतो यह स्वस्थ रिश्ते का संकेत नहीं है। रिश्ते में स्पेस देना जरूरी है। स्पेस का मतलब यह नहीं कि प्यार कम हैबल्कि इसका अर्थ है कि दोनों को अपने लिए थोड़ा समय चाहिए। अपनी हॉबीरुचियों और दोस्तों के लिए समय निकालने से व्यक्ति बेहतर बनता है और रिश्ते में लौटने पर बातचीत और मिलन और खास महसूस होता है।

    थोड़ी दूरी पार्टनर की कमी का एहसास कराती है। यही दूरी रिश्ते में ताजगी और गहराई बनाए रखती है। कहावत है दूरी से चाहत बढ़ती है। जब आप अपने लिए समय लेते हैंतो पार्टनर भी आपकी कमी महसूस करता है और मिलने पर बातचीत अधिक रोमांचक और दिलचस्प होती है। रिश्तों में संतुलन बनाए रखना इसलिए जरूरी है। प्यार और नजदीकी होनी चाहिएलेकिन लगातार संपर्क में रहने से बचना चाहिए। थोड़ी दूरी रिश्ते को नया उत्साह देती हैबोरियत कम करती है और मानसिक तनाव से राहत दिलाती है। रिश्ते की लंबी उम्र और खुशी के लिए स्पेसएक आवश्यक तत्व है। कुल मिलाकररिश्ते में ताजगी बनाए रखने के लिए जरूरत से ज्यादा बात करने से बचें। पार्टनर को थोड़ा स्पेस देंअपने लिए समय निकालें और बातचीत को खास बनाकर लौटें। यही तरीका रिश्ते को मजबूतस्वस्थ और रोमांचक बनाता है।

  • फाल्गुन 2026: फाल्गुन मास कब से कब तक, जानें शुभ-अशुभ नियम और पूजा का महत्व

    फाल्गुन 2026: फाल्गुन मास कब से कब तक, जानें शुभ-अशुभ नियम और पूजा का महत्व


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में फाल्गुन मास को अत्यंत पावन माना गया है। यह महीना भगवान श्रीकृष्ण को विशेष प्रिय है और ब्रज क्षेत्र में इस दौरान होली का उत्सव बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। फाल्गुन मास के साथ ही महाशिवरात्रि का पर्व भी आता है, जब श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान शिव की उपासना करते हैं। यही नहीं, इस माह को चंद्र देव से भी जोड़कर देखा गया है, इसलिए उनकी आराधना से मानसिक शांति और सुख की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास 02 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 03 मार्च 2026 तक रहेगा। इसके अगले दिन 04 मार्च से चैत्र मास का आरंभ होगा। इस महीने में किए जाने वाले धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं।

    फाल्गुन मास में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव की पूजा-अर्चना अत्यंत शुभ मानी जाती है। प्रतिदिन शिवलिंग का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करने से कष्टों में कमी आती है और जीवन में सुख-शांति बढ़ती है। साथ ही अन्न, धन और वस्त्रों का दान करने से आर्थिक समृद्धि और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है। पितरों की कृपा पाने के लिए तर्पण और दान करना भी लाभकारी माना गया है, जिससे परिवार में सुख-शांति और सौहार्द्र का वातावरण बनता है। हालांकि, फाल्गुन मास में कुछ वर्जित कर्म भी बताए गए हैं। होलाष्टक के दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य टालने चाहिए। इसके अलावा मांस-मदिरा और नशीले पदार्थों का सेवन न करना, बुजुर्गों और महिलाओं का अपमान न करना और कटु भाषा से दूर रहना अनिवार्य है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और पौधों में जल अर्पित करने से बचें।

    इस माह की विशेषता यह है कि यह न केवल भगवान श्रीकृष्ण और शिव की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, बल्कि पितृ तर्पण, दान और सामाजिक सदाचार के लिए भी महत्वपूर्ण है। फाल्गुन मास का पालन नियमपूर्वक करने से जीवन में शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है। कुल मिलाकर फाल्गुन 2026 का यह पावन माह धार्मिक क्रियाओं, पूजा-अर्चना और सामाजिक दायित्वों का समन्वय है। इस मास में किए गए शुभ कार्यों से व्यक्ति और परिवार दोनों का कल्याण होता है, जबकि वर्जित कर्मों से बचकर जीवन में नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

  • ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    नई दिल्ली। भारत में दामाद का पहली बार ससुराल आना हमेशा एक उत्सव जैसा माना जाता है। पूरे परिवार को जमाई के स्वागत की तैयारी में जुटा देखा जा सकता है। लेकिन आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के एक गांव में हाल ही में हुई तैयारियां अपनी हदें पार कर गईं। यहां एक परिवार ने अपनी बेटी कीर्तिश्री और दामाद बोड्डू साई शरथ के पहले ससुराल आगमन पर 1374 व्यंजन तैयार किए। यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार था बल्कि सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।परिवार ने मकर संक्रांति के अवसर पर इस आयोजन की योजना बनाई। पूरे कार्यक्रम को पारंपरिक और भव्य तरीके से सजाया गया। स्वागत स्थल पर सजे बोर्ड और संदेशों ने इसे और व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप दिया। यह आयोजन गोदावरी डेल्टा की समृद्ध भोजन संस्कृति को भी दर्शाता है जो अपने उदार भोजन और त्योहारों की रसोई के लिए मशहूर है।

    सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में नवविवाहित जोड़े को भोजन के बीच बैठे हुए देखा जा सकता है। कैमरा धीरे-धीरे टेबलों पर सजी व्यंजन कतारों पर घूमता है। इस विशाल भोज में बिरयानी बर्गर तले हुए स्नैक्स छाछ ताजे जूस मिठाइयां फल और घर के बने नाश्ते शामिल थे। कुछ खास डिशेज आसपास के अलग-अलग इलाकों से मंगाई गई थीं।भोजन के अलावा परिवार ने 12 तोहफे भी दिए जो साल के 12 महीनों का प्रतीक थे। इन तोहफों के जरिए नवदंपति के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। इस भव्य आयोजन ने दामाद और बेटी को खास महसूस कराना सुनिश्चित किया।

    जैसे ही वीडियो वायरल हुआ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। एक यूजर ने लिखा इसका क्या फायदा… कम से कम कुछ मिठाइयां गरीब बच्चों में बांट देते। दूसरे ने टिप्पणी की मैं देखना चाहता हूं कि वो इतना सब कैसे खत्म करेगा। कुछ ने इसे दहेज और दिखावे से जोड़कर भी देखा। एक यूजर ने लिखा गोदावरी जिलों में हर साल ऐसा दिखावा आम है। समझ नहीं आता समाज को क्या संदेश देते हैं। वहीं एक अन्य ने कहा काश बहुओं को भी कभी ऐसा सम्मान मिले।यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार रहा बल्कि सोशल मीडिया पर इसे देखकर लोग इसकी भव्यता और अलग अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। 1374 व्यंजन और 12 प्रतीकात्मक तोहफों के साथ इस स्वागत का वीडियो आने वाले समय में और भी चर्चा में रहेगा।

  • गुप्त नवरात्र 2026: घटस्थापना पर विशेष मंत्र जप से दूर होंगे दुख, घर में आएगी सुख-समृद्धि

    गुप्त नवरात्र 2026: घटस्थापना पर विशेष मंत्र जप से दूर होंगे दुख, घर में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । गुप्त नवरात्र 2026 का पावन पर्व इस वर्ष 19 जनवरी से आरंभ होकर 27 जनवरी तक श्रद्धा और साधना के साथ मनाया जाएगा। माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक चलने वाले गुप्त नवरात्र को शक्ति उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण काल माना गया है। इस दौरान दस महाविद्याओं और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की गुप्त साधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कालखंड में की गई उपासना साधक को शीघ्र फल प्रदान करती है और जीवन से नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है। गुप्त नवरात्र की शुरुआत घटस्थापना से होती है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि घटस्थापना के समय यदि विशेष मंत्रों का जप किया जाए तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। घटस्थापना के दौरान मां दुर्गा का आवाहन कर उनके बीज मंत्रों का जप करने से मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस समय श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई साधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

    गुप्त नवरात्र को अन्य नवरात्रों से अलग इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें साधना को गोपनीय रखा जाता है। विशेष रूप से तांत्रिक साधक, सिद्धि प्राप्त करने वाले उपासक और शक्ति आराधक इस समय मंत्र, तंत्र और यंत्र साधना करते हैं। माना जाता है कि इन नौ दिनों में दस महाविद्याएंकाली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला अपने साधकों पर विशेष कृपा करती हैं। धार्मिक विश्वास है कि गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना करने से न केवल मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, बल्कि जीवन में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं। जो भक्त श्रद्धा से व्रत रखते हैं और नियमपूर्वक पूजा करते हैं, उन्हें आत्मिक शांति के साथ-साथ भौतिक सुखों की भी प्राप्ति होती है। विशेषकर जिन लोगों के जीवन में लंबे समय से कष्ट, रोग या आर्थिक समस्याएं बनी हुई हैं, उनके लिए यह साधना काल अत्यंत फलदायी माना गया है।

    माघ माह में सूर्य उत्तरायण रहता है, जिसे शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है। इसी कारण माघी गुप्त नवरात्र का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दौरान देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और मंत्र जप किए जाते हैं। कई श्रद्धालु इन नौ दिनों तक संयम, सात्विक आहार और नियमित पूजा के माध्यम से मां शक्ति की आराधना करते हैं। कुल मिलाकर गुप्त नवरात्र 2026 साधना, तप और श्रद्धा का ऐसा पावन अवसर है, जिसमें घटस्थापना से लेकर नवमी तक मां दुर्गा और दस महाविद्याओं की उपासना कर भक्त अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर सकते हैं।

  • 55 साल की उम्र में सुनीता आहूजा कर रही हैं धमाल बोलीं– भूल गई हूं गोविंदा की पत्नी हूं

    55 साल की उम्र में सुनीता आहूजा कर रही हैं धमाल बोलीं– भूल गई हूं गोविंदा की पत्नी हूं


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा हमेशा अपने बेबाक और खुले अंदाज के लिए जानी जाती हैं। पिछले कुछ सालों से वह मीडिया और इंटरव्यूज में चर्चा में हैंलेकिन हाल ही में उन्होंने अपने जीवन और पहचान को लेकर एक खास खुलासा किया। सुनीता ने कहा कि अब वह 55 साल की उम्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैंऔर लोग उन्हें सिर्फ गोविंदा की पत्नी नहीं बल्कि सुनीता आहूजा के नाम से जानने लगे हैं।मिस मालिनी के साथ बातचीत में सुनीता ने बतायाआज मेरे नसीब ने 55 साल में नामइज्जत और शोहरत देने का मौका दिया है। लोग मुझे अब सुनीता आहूजा के नाम से जानते हैं। गोविंदा की पत्नी तो हूंयह सबको पता है। लेकिन मैंने अपनी भी तो पहचान बनानी है। यहां तक कि अब मैं भूल गई हूं कि मैं गोविंदा की पत्नी हूं! पति हैं लेकिन अपनी भी तो पहचान होनी चाहिए ना।

    सुनीता ने अपने उदाहरण में जया बच्चन को भी बताया। उन्होंने कहाजैसे जया जी को संसद में एक बार जया अमिताभ बच्चन कहकर बुलाया गया था। लेकिन वह जया भादुड़ी हैं! प्लीज सभी को यह समझना चाहिए कि उनके पास अमिताभ हैंलेकिन अपनी भी तो पहचान होनी चाहिए। दरअसलयह वह घटना थी जब जया बच्चन को उनके पति अमिताभ बच्चन के नाम से जोड़ा गया था और उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह अपने नाम और पहचान की वजह से अलग हैं।सुनीता आहूजा अब इसी रास्ते पर चल रही हैं। वह खुद को एक स्वतंत्र और पहचान बनाने वाली महिला के रूप में स्थापित करना चाहती हैं। उन्होंने अपने इंटरव्यूज में पति गोविंदा के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर भी बात की थीजिसके बारे में गोविंदा ने सफाई दी कि उनकी पत्नी किसी साजिश का शिकार हुई हैं।

    इस बीच सुनीता को उनके फैंस और मीडिया द्वारा मिली पहचान ने उन्हें और भी प्रेरित किया है। वह कहती हैं कि अब लोग उन्हें सिर्फ गोविंदा की पत्नी के रूप में नहीं देखतेबल्कि उनके अपने व्यक्तित्व और उपलब्धियों की वजह से जानते हैं। सुनीता का यह बेबाक अंदाज और अपने नाम के लिए जुझारूपन उन्हें और भी लोकप्रिय बनाता है।55 साल की उम्र में अपनी पहचान बनाने की यह कहानी बताती है कि उम्र कभी भी किसी की पहचान या महत्व को कम नहीं कर सकती। सुनीता आहूजा का यह उदाहरण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकता हैजो अपने जीवन में व्यक्तिगत पहचान बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

  • सर्वार्थसिद्धि योग में माघी गुप्त नवरात्र आरंभ, नौ दिनों में बनेंगे छह शुभ योग

    सर्वार्थसिद्धि योग में माघी गुप्त नवरात्र आरंभ, नौ दिनों में बनेंगे छह शुभ योग


    उज्जैन । साधना, तंत्र और मंत्र आराधना के लिए विशेष माने जाने वाले माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ इस वर्ष सर्वार्थसिद्धि योग में हुआ है। सोमवार से प्रारंभ हुए इन गुप्त नवरात्रों में पूरे नौ दिनों तक देवी उपासना का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत शुभ मानी जा रही है, जिसके कारण साधकों को मनवांछित फल मिलने की प्रबल संभावना है।

    माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलने वाले इन गुप्त नवरात्रों का उल्लेख श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार वर्षभर में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें चैत्र और अश्विन मास के नवरात्र प्राकट्य नवरात्र कहलाते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र माने गए हैं। गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मंत्र-सिद्धि और यंत्र आराधना के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जिन्हें साधक सामान्य जन से गुप्त रूप से करते हैं।

    इस बार पंचांग की गणना के अनुसार 19 जनवरी, सोमवार को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग और मकर राशि में चंद्रमा की साक्षी में माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हुआ। नवरात्र के दौरान कुल छह शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो साधना को और अधिक प्रभावशाली बना रहा है। साथ ही सूर्य का उत्तरायण काल भी इसी समय चल रहा है, जिसे शास्त्रों में शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

    शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर सहित उज्जैन के अन्य देवी मंदिरों में प्रतिदिन माता का नित्य नए स्वरूप में श्रृंगार किया जाएगा। हरसिद्धि मंदिर में संध्या आरती के समय दीपमालिका प्रज्वलन का विशेष आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर परिसर में पूरे नौ दिनों तक भक्तिमय वातावरण बना रहेगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र के दौरान की गई साधना अत्यंत शीघ्र फल देने वाली होती है। साधक इस अवधि में शक्ति उपासना के साथ-साथ अपने आत्मिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी विशेष अनुष्ठान करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों मां दुर्गा अपने साधकों की गुप्त तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें सिद्धि, सफलता और बाधाओं से मुक्ति का वरदान देती हैं। इस प्रकार सर्वार्थसिद्धि योग और अनेक शुभ ग्रह संयोगों के बीच प्रारंभ हुए माघी गुप्त नवरात्र श्रद्धालुओं और साधकों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर लेकर आए हैं।

  • शाहरुख खान की ‘किंग’ 25 दिसंबर 2026 को होगी रिलीज, रामायण से बनाई दूरी

    शाहरुख खान की ‘किंग’ 25 दिसंबर 2026 को होगी रिलीज, रामायण से बनाई दूरी

    नई दिल्ली। शाहरुख खान पिछले ढाई सालों से बड़े पर्दे से गायब थे, लेकिन अब उनके फैंस के लिए बड़ी खुशखबरी है। साल 2023 में आई उनकी फिल्मों पठान और जवान ने बॉक्स ऑफिस पर धमाका किया, और अब दर्शक शाहरुख को किंग में देखने के लिए उत्साहित हैं। इस फिल्म की कास्ट और कहानी के बारे में चर्चा लंबे समय से जारी है। शाहरुख के साथ फिल्म को निर्देशित कर रहे हैं सिद्धार्थ आनंद, जिन्होंने इससे पहले पठान और रॉवर जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है।

    किंग की रिलीज डेट
    हाल ही में सामने आई जानकारी के मुताबिक, शाहरुख और सिद्धार्थ आनंद ने फिल्म की रिलीज डेट तय करने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया। शुरुआती तौर पर फिल्म 4 और 25 दिसंबर 2026 को रिलीज हो सकती थी। सभी पहलुओं पर चर्चा करने के बाद दोनों ने 25 दिसंबर 2026 को फाइनल डेट तय की।

    रामायण से क्यों बनाई दूरी
    रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहरुख ने अपनी फिल्म को 4 दिसंबर को रिलीज नहीं किया क्योंकि उसी समय रणबीर कपूर की रामायण रिलीज होने वाली है। रणबीर की यह फिल्म दिवाली के समय रिलीज होगी और ऐतिहासिक कमाई करने की उम्मीद जताई जा रही है। शाहरुख और मेकर्स ने यह खास ख्याल रखा कि दोनों फिल्मों के बीच लगभग 45 दिनों का अंतर रहे, ताकि दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपना बिजनेस कमाल कर सकें और किसी तरह का नुकसान न हो।

    किंग की जबरदस्त कास्ट
    शाहरुख खान की यह फिल्म कई मायनों में खास होने वाली है। इसमें शाहरुख एक ग्रे शेड किरदार निभाते नजर आएंगे। हाल ही में उनके बर्थडे पर फिल्म का पहला लुक भी जारी किया गया था, जिसे फैंस ने खूब पसंद किया।फिल्म में शाहरुख के अलावा दीपिका पादुकोण, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन, अरशद वारसी, जयदीप अहलावत समेत कई बड़े स्टार्स की मौजूदगी होगी। खास बात यह है कि शाहरुख की बेटी सुहाना खान भी इस फिल्म का हिस्सा होंगी।

    निर्देशक सिद्धार्थ आनंद का कहना है कि किंग में दर्शकों को एक्शन, ड्रामा और इमोशन का बेमिसाल मिश्रण देखने को मिलेगा। फिल्म की कहानी शाहरुख के किरदार और उनके आसपास के जटिल रिश्तों पर केंद्रित होगी, जो दर्शकों के लिए रोमांचक अनुभव साबित होगी।इस रिलीज डेट के फैसले से यह भी साफ हो गया है कि बॉलीवुड में बड़े स्टार्स और मेकर्स अब बॉक्स ऑफिस टकराव से बचने के लिए पहले से रणनीति बना रहे हैं। शाहरुख खान के फैंस के लिए 25 दिसंबर 2026 एक सुपरहिट और धमाकेदार क्रिसमस लेकर आने वाला है।

  • पॉल्यूशन पर आमिर खान का चुटीला जवाब हुआ वायरल, बोले– “हां तो अभी क्या करें”

    पॉल्यूशन पर आमिर खान का चुटीला जवाब हुआ वायरल, बोले– “हां तो अभी क्या करें”


    नई दिल्ली। बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान और उनकी पत्नी किरण राव हाल ही में मुंबई में आयोजित एक मैराथन में शामिल हुए। इस इवेंट में उनके तीनों बच्चे-जुनैद आइरा और आजाद भी उनके साथ मौजूद थे। मैराथन में हिस्सा लेने के बाद जब मीडिया ने आमिर खान से मुंबई की लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी पर सवाल किया तो आमिर का जवाब वायरल हो गया। उन्होंने कहा हां अभी क्या करें।

    मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे कहा गया कि मुंबईवाले इस तरह के हालातों के आदी नहीं हैं तो आमिर ने सहजता से जवाब दिया मुझे पता है। वहीं किरण राव ने पॉल्यूशन पर थोड़ा विस्तार से अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा हम सभी को अपनी आवाज उठानी होगी। इसमें शामिल होना होगा और कारणों को समझना होगा। शहर के नागरिक होने के नाते हमें अपना योगदान देना चाहिए।आमिर खान ने अपनी पत्नी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि हर किसी को पॉजिटिव तरीके से अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी आइरा ने उन्हें इस साल की मैराथन में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। परिवार के साथ मैराथन में भाग लेने का अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा।

    मैराथन इवेंट के दौरान आमिर ने अपनी मोटिवेशन और अनुभव के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा हमने स्पेशली एबल्ड लोगों और सीनियर सिटीजन्स की दौड़ में जो उत्साह देखा वह बहुत प्रेरणादायक था। मुझे लगा कि हर साल इस इवेंट का हिस्सा बनना चाहिए। मुंबई का जज्बा वाकई कमाल का है।वर्क फ्रंट की बात करें तो आमिर खान इन दिनों अपनी प्रोडक्शन फिल्म हैप्पी पटेल – खतरनाक जासूस को लेकर सुर्खियों में हैं। इस फिल्म में वीर दास ने लीड रोल निभाया है। वहीं आमिर खान और उनके भांजे इमरान खान ने फिल्म में कैमियो रोल किया है। फिल्म की रिलीज़ को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बढ़ रही है।

    इस मैराथन इवेंट में आमिर और उनके परिवार ने न केवल खेल और फिटनेस को प्रमोट किया बल्कि पर्यावरण और पॉल्यूशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी जागरूकता फैलाने की कोशिश की। आमिर के सहज और चुटीले अंदाज वाले जवाब ने सोशल मीडिया पर भी ध्यान खींचा। लोग उनके सीधे और सरल तरीके से पॉल्यूशन पर प्रतिक्रिया देने की तारीफ कर रहे हैं।इस पूरे इवेंट ने यह दिखा दिया कि आमिर खान न केवल फिल्म इंडस्ट्री में बल्कि समाज और पर्यावरण के मुद्दों पर भी सक्रिय और संवेदनशील हैं। उनके साथ उनके परिवार का होना इस संदेश को और मजबूत बनाता है कि छोटी-छोटी पहलें भी बड़े बदलाव ला सकती हैं।

  • अक्षय खन्ना RACE 4 में नहीं करेंगे कमबैक, प्रोड्यूसर तौरानी ने दिया स्पष्ट जवाब

    अक्षय खन्ना RACE 4 में नहीं करेंगे कमबैक, प्रोड्यूसर तौरानी ने दिया स्पष्ट जवाब


    नई दिल्ली। अक्षय खन्ना की अपकमिंग फिल्मों को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्सुकता है। धुरंधर-2की ब्लॉकबस्टर हिट के बाद उनके अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। गॉसिप गलियारों में खबरें थीं कि वह फ्रैंचाइज़ी के चौथे पार्ट में बतौर लीड विलेन नजर आ सकते हैं। लेकिन क्या वाकई ऐसा होने वाला है?

    जानकारी के मुताबिकअक्षय खन्ना ने अपनी अगली फिल्मों के चुनाव में काफी सोच-समझकर कदम रखा है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी ‘धुरंधरने उन्हें खूब हाइप दी है। क्रिएटिव कारणों के चलते उन्होंने ‘दृश्यम 3() से अपना नाम वापस लियाहालांकि इस पर मेकर्स की राय अलग है।फिल्म 4 में अक्षय खन्ना की वापसी को लेकर चल रही अफवाहों पर प्रोड्यूसर रमेश तौरानी ने पूरी तरह से विराम लगा दिया। उन्होंने साफ कहा कि अक्षय खन्ना इस फ्रैंचाइज़ी के अगले पार्ट का हिस्सा नहीं होंगे। तौरानी ने एक इंटरव्यू में कहानहींहमने अक्षय से संपर्क नहीं किया है। इसकी कोई गुंजाइश ही नहीं थी।

    कुछ अफवाहें यह भी थीं कि फिल्म के कहानी में बदलाव करके अक्षय के किरदार को वापस लाया जा सकता है। लेकिन रमेश तौरानी ने इसे भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहाउन्हें वापस लाने के बारे में सोचा ही नहीं गया। पहली फिल्म में उनके किरदार का एक्सीडेंट हो जाता है। उनकी कहानी वहीं खत्म हो गई थी और वहीं रहेगी।RACE 4 की स्टार कास्ट को लेकर भी प्रोड्यूसर ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी एक्टर को फाइनल नहीं किया गया है और स्क्रिप्ट पर काम जारी है। यह बयान फैंस और मीडिया में चल रही कयासबाजी को रोकने के लिए आया है।

    अक्षय खन्ना के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। धुरंधर-2 की सफलता ने उनके करियर को नया मुकाम दिया है और अब वह अपनी अगली फिल्मों का चुनाव बहुत सोच-समझकर कर रहे हैं। RACE फ्रैंचाइज़ी में उनके ना होने के बावजूद फैंस उन्हें बड़े पर्दे पर देखने के लिए उत्साहित हैं।फिल्म इंडस्ट्री में अक्षय खन्ना की छवि अब भी मजबूत है। चाहे वह एक्शन रोल हो या ड्रामेटिक किरदारउनके फैंस उनकी हर फिल्म का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस समय यह साफ है कि RACE 4 में उनका नाम शामिल नहीं होगालेकिन अक्षय खन्ना अपनी आने वाली फिल्मों से फैंस को जरूर रोमांचित करने वाले हैं।