Author: bharati

  • बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं

    बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं


    नई दिल्ली । 
    बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी क्षेत्र में अवैध शराब की तस्करी को लेकर एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए पारंपरिक परिवहन साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस ने एक घोड़ागाड़ी को रोककर भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की है।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि तस्कर वाहनों की नियमित जांच से बचने के लिए घोड़े का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस आधार पर पुलिस टीम ने बेघर गांव के पास नाकाबंदी कर संदिग्ध घोड़ागाड़ी को रोका। तलाशी के दौरान उसमें विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों से विभिन्न ब्रांडों की लगभग दो सौ बोतलें विदेशी शराब बरामद की गईं।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तस्करी में संलिप्त एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि उसका एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों का पता लगाया जा सके।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद से तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आमतौर पर चार पहिया वाहनों, ट्रकों या यात्री बसों का उपयोग किया जाता था, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण अब ग्रामीण इलाकों के कच्चे रास्तों और जानवरों का सहारा लिया जा रहा है।

    प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह खेप पड़ोसी क्षेत्रों से लाकर स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों में खपाने की योजना थी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हैं और क्या पूर्व में भी इस माध्यम का उपयोग किया गया था।

    शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस प्रशासन ने सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। संदेह के आधार पर कृषि कार्यों या माल ढुलाई में लगे पारंपरिक साधनों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है ताकि तस्करी के किसी भी प्रयास को विफल किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि अवैध मादक पदार्थों और शराब की अंतरराज्यीय तस्करी की रोकथाम के लिए बिहार पुलिस के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी विशेष जांच अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिससे तस्करों के नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भागे हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जब्त शराब और वाहन को कानूनी प्रक्रिया के तहत सील कर दिया गया है तथा संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।

  • प्रभास का खून से सना अंदाज और सामने महात्मा गांधी, ‘फौजी’ के पोस्टर में दिखी आजादी की जंग की झलक

    प्रभास का खून से सना अंदाज और सामने महात्मा गांधी, ‘फौजी’ के पोस्टर में दिखी आजादी की जंग की झलक


    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के मौके पर साउथ सुपरस्टार प्रभास के फैंस को बड़ा सरप्राइज मिला है। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म फौजी का नया पोस्टर सामने आया है जिसने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। पोस्टर में प्रभास बेहद रफ और इंटेंस अंदाज में नजर आ रहे हैं। फिल्म का निर्देशन हनु राघवपुड़ी कर रहे हैं और इसे पीरियड एक्शन ड्रामा के तौर पर पेश किया जा रहा है। मेकर्स पहले ही फिल्म की रिलीज डेट 3 दिसंबर 2026 तय कर चुके हैं।

    फौजी की कहानी आजादी से पहले के भारत की पृष्ठभूमि में रखी गई है। फिल्म में प्रभास एक सैनिक की भूमिका में दिखाई देंगे। मेकर्स ने कहानी को इतिहास के एक कम चर्चित अध्याय से जोड़ते हुए पेश किया है। सामने आए पोस्टर और अब तक जारी जानकारी से साफ है कि फिल्म में देशभक्ति के साथ युद्ध और एक्शन का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिल सकता है। हालांकि फिल्म की पूरी कहानी और प्रभास के किरदार की विस्तृत जानकारी अभी मेकर्स ने सामने नहीं रखी है।

    फिल्म के पोस्टर में प्रभास का लुक खास तौर पर चर्चा में है। वह खून से सने शरीर और हाथ में हथियार के साथ बेहद आक्रामक अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर के साथ दी गई टैगलाइन A Battalion Who Fights Alone भी फिल्म के केंद्रीय किरदार की ओर इशारा करती है। इसमें एक ऐसे योद्धा की झलक मिलती है जो मुश्किल हालात में अकेले मोर्चा संभालता नजर आ सकता है। यही वजह है कि पोस्टर रिलीज होते ही प्रभास के फैंस के बीच फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    फौजी को लेकर एक और खास बात इसकी स्टारकास्ट है। प्रभास के साथ इमानवी मुख्य भूमिका में हैं। दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर भी फिल्म का हिस्सा हैं। उनके अलावा मिथुन चक्रवर्ती और जया प्रदा जैसे अनुभवी कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। अनुपम खेर ने स्वतंत्रता दिवस पर फिल्म के नए पोस्टर को लेकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने पर गर्व की बात बताया।

    फिल्म का निर्देशन हनु राघवपुड़ी कर रहे हैं जिन्हें सीता रामम जैसी पीरियड रोमांटिक ड्रामा के लिए जाना जाता है। फौजी में उनका फोकस इतिहास की पृष्ठभूमि में एक बड़े स्तर की कहानी पेश करने पर है। फिल्म को Mythri Movie Makers प्रोड्यूस कर रहा है जबकि T-Series Films इसे प्रस्तुत कर रहा है। यह सहयोग फिल्म के बड़े पैमाने और पैन इंडिया अपील की ओर भी इशारा करता है।

    फौजी की रिलीज को लेकर भी अब तस्वीर साफ है। फिल्म दुनियाभर के सिनेमाघरों में 3 दिसंबर 2026 को दस्तक देगी। रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा जुलाई में नए पोस्टर के साथ की गई थी। इसके बाद से फिल्म को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।

    प्रभास इससे पहले बाहुबली जैसी फिल्मों के जरिए पीरियड और भव्य सिनेमा में अपनी खास पहचान बना चुके हैं। ऐसे में फौजी में उनका सैनिक वाला अवतार दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन गया है। स्वतंत्रता दिवस पर जारी पोस्टर ने फिल्म के देशभक्ति और एक्शन से जुड़े पहलू को और मजबूत कर दिया है। अब दर्शकों की नजर फिल्म के अगले अपडेट और इसके टीजर पर है क्योंकि वही कहानी और प्रभास के किरदार को लेकर तस्वीर और साफ करेगा।

  • शरीर में बढ़ रही है पेट की चर्बी तो न करें नजरअंदाज, ब्लड शुगर बढ़ने के साथ बढ़ सकता है बीमारियों का जोखिम

    शरीर में बढ़ रही है पेट की चर्बी तो न करें नजरअंदाज, ब्लड शुगर बढ़ने के साथ बढ़ सकता है बीमारियों का जोखिम


    नई दिल्ली । आज की बदलती जीवनशैली में वजन बढ़ना और ब्लड शुगर का असंतुलन तेजी से चिंता का विषय बनता जा रहा है। लंबे समय तक बैठकर काम करना कम शारीरिक गतिविधि करना और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाला भोजन लेना शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने का कारण बन सकता है। खासतौर पर पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी को मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जाता है। शोधों में पेट की चर्बी और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध भी सामने आया है। इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सामान्य तरीके से प्रतिक्रिया नहीं करतीं जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

    जब शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा खर्च नहीं हो पाती है तो उसका कुछ हिस्सा फैट के रूप में जमा होने लगता है। लगातार वजन बढ़ना और खासकर कमर के आसपास चर्बी बढ़ना टाइप 2 डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिक समस्याओं के जोखिम से जुड़ा पाया गया है। भारत में हुए अध्ययनों की समीक्षा में भी अधिक वजन और मोटापे को मेटाबॉलिक सिंड्रोम के ज्यादा जोखिम से जोड़ा गया है। इसलिए केवल वजन मशीन पर दिखने वाले आंकड़े पर ध्यान देने के बजाय कमर के आसपास बढ़ती चर्बी और पूरी जीवनशैली पर नजर रखना भी जरूरी है।

    दूसरी ओर ब्लड शुगर शरीर के लिए ऊर्जा का जरूरी स्रोत है लेकिन इसका स्तर लंबे समय तक सामान्य सीमा से अधिक रहना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन का प्रभाव कम हो सकता है और समय के साथ शरीर के लिए ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। लगातार हाई ब्लड शुगर रहने पर रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। डायबिटीज का लंबे समय तक खराब नियंत्रण हृदय रोग स्ट्रोक किडनी की बीमारी और आंखों से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

    फैट और शुगर के इस संबंध को समझने के लिए इंसुलिन रेजिस्टेंस को समझना जरूरी है। जब शरीर में अतिरिक्त फैटी एसिड का बोझ बढ़ता है तो इसका असर मांसपेशियों लिवर और शरीर के दूसरे हिस्सों में ग्लूकोज के इस्तेमाल पर पड़ सकता है। इससे इंसुलिन सिग्नलिंग प्रभावित हो सकती है और ब्लड शुगर बढ़ने की स्थिति बन सकती है। हालांकि हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा नहीं होता और आनुवंशिकता उम्र नींद तनाव खानपान और शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारक भी मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

    इस जोखिम को कम करने के लिए सबसे पहले रोजमर्रा की गतिविधियों को बेहतर बनाना जरूरी है। नियमित तेज चाल से चलना साइकिल चलाना तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी शारीरिक गतिविधियां की जा सकती हैं। वयस्कों के लिए सामान्य स्वास्थ्य लाभ के लिहाज से हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि और सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधि की सलाह दी जाती है।

    खानपान में भी संतुलन जरूरी है। अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाले भोजन को सीमित करना और भोजन में सब्जियों दालों साबुत अनाज तथा पर्याप्त प्रोटीन जैसे पौष्टिक विकल्पों को शामिल करना मददगार हो सकता है। केवल किसी एक भोजन को छोड़ देने या लंबे समय तक भूखे रहने को हर व्यक्ति के लिए जरूरी उपाय नहीं माना जाना चाहिए। खासकर डायबिटीज गर्भावस्था या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे लोगों को डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।

    अगर वजन लगातार बढ़ रहा है कमर का घेरा बढ़ रहा है या बार बार ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा मिल रहा है तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है। समय रहते वजन खानपान शारीरिक गतिविधि और ब्लड शुगर पर ध्यान देने से मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि केवल सुबह खाली पेट 20 मिनट चलने या किसी एक खास डाइट से सभी लोगों में फैट और शुगर तेजी से कम होने की गारंटी नहीं होती। स्वास्थ्य संबंधी बदलाव व्यक्ति की स्थिति के अनुसार किए जाने चाहिए।

  • रक्तदान से पहले डॉक्टर की ये बातें जरूर जान लें, कौन दे सकता है ब्लड और किसे करना चाहिए परहेज

    रक्तदान से पहले डॉक्टर की ये बातें जरूर जान लें, कौन दे सकता है ब्लड और किसे करना चाहिए परहेज


    नई दिल्ली । रक्तदान को जीवन बचाने वाला सबसे बड़ा सामाजिक योगदान माना जाता है। एक यूनिट रक्त को अलग अलग घटकों में इस्तेमाल किया जाए तो इससे एक से अधिक मरीजों की मदद हो सकती है। यही वजह है कि अस्पतालों और ब्लड बैंकों की ओर से लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हालांकि रक्तदान करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हर व्यक्ति ब्लड डोनेट करने के लिए योग्य नहीं होता। शरीर की सामान्य स्थिति उम्र वजन और स्वास्थ्य से जुड़े कई मानकों की जांच के बाद ही रक्तदान की अनुमति दी जाती है। भारत सरकार के e-RaktKosh के अनुसार सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका वजन कम से कम 45 किलोग्राम होना चाहिए।

    रक्तदान से पहले ब्लड बैंक में व्यक्ति की सामान्य स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें मेडिकल हिस्ट्री के साथ ब्लड प्रेशर पल्स और शरीर का तापमान देखा जाता है। इसके अलावा उंगली से लिए गए रक्त के नमूने से हीमोग्लोबिन या आयरन की पर्याप्तता की जांच की जाती है। यदि जांच में कोई ऐसी स्थिति सामने आती है जिसमें रक्तदान करना सुरक्षित नहीं है तो व्यक्ति को उस समय रक्तदान से रोक दिया जाता है। इसलिए केवल उम्र और वजन सही होना ही पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।

    आम तौर पर स्वस्थ वयस्क रक्तदान कर सकते हैं लेकिन यदि किसी व्यक्ति को गंभीर एनीमिया है या वह किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो उसे रक्तदान से बचना चाहिए। हाल ही में हुई सर्जरी या कुछ चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के बाद भी कुछ समय तक रक्तदान टाला जा सकता है। इसी तरह कुछ संक्रमणों और स्वास्थ्य स्थितियों में डॉक्टर या ब्लड बैंक की मेडिकल टीम रक्तदान को अस्थायी या स्थायी रूप से रोक सकती है। इसलिए यदि आप किसी बीमारी का इलाज करा रहे हैं या नियमित दवाएं लेते हैं तो रक्तदान से पहले इसकी जानकारी ब्लड बैंक के चिकित्सकीय स्टाफ को देना जरूरी है।

    गर्भावस्था के दौरान रक्तदान नहीं किया जाता। डिलीवरी के बाद भी महिला को तुरंत रक्तदान नहीं करना चाहिए और उचित समय तथा स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार ही दोबारा रक्तदान किया जाना चाहिए। इसी तरह हाल में टीकाकरण या टैटू जैसी कुछ परिस्थितियों में भी रक्तदान कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। इन मामलों में प्रतीक्षा की अवधि हर स्थिति के लिए एक जैसी नहीं होती इसलिए अंतिम निर्णय संबंधित ब्लड सेंटर की मेडिकल स्क्रीनिंग के आधार पर लिया जाना चाहिए।

    रक्तदान से पहले कुछ सामान्य सावधानियां भी मददगार होती हैं। खाली पेट रक्तदान करने से बचना चाहिए और पर्याप्त पानी पीना चाहिए। अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। रक्तदान से पहले हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर माना जाता है। शराब का सेवन करके रक्तदान करने से बचना चाहिए। रक्तदान के बाद भी शरीर को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ देना चाहिए। e-RaktKosh के अनुसार रक्तदान के बाद अगले 24 से 48 घंटे तक तरल पदार्थ बढ़ाने और कुछ समय तक भारी शारीरिक मेहनत तथा वजन उठाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    रक्तदान के दौरान किसी तरह की कमजोरी या चक्कर महसूस हो तो तुरंत मेडिकल स्टाफ को बताना चाहिए। रक्तदान के बाद कुछ देर आराम करना और उपलब्ध कराए गए हल्के जलपान का सेवन करना उपयोगी होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रक्तदान नेक काम जरूर है लेकिन इसे केवल उत्साह में आकर नहीं करना चाहिए। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में सही जानकारी देकर ही रक्तदान करें। अंतिम पात्रता का निर्णय ब्लड बैंक की मेडिकल स्क्रीनिंग और लागू रक्तदान दिशानिर्देशों के अनुसार होता है।

  • ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान

    ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान


    नई दिल्ली । वनडे वर्ल्ड कप 2027 को लेकर क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की शुरुआत की तारीख में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC अब 2 अक्टूबर 2027 को टूर्नामेंट शुरू करने पर विचार कर रहा है। यह तारीख इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भारत में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। हालांकि अभी ICC की ओर से नई शुरुआत की तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है।

    शुरुआती कार्यक्रम के मुताबिक 2027 वनडे वर्ल्ड कप की शुरुआत अक्टूबर के पहले सप्ताह के बाद होनी थी। पहले 8 अक्टूबर को मुख्य टूर्नामेंट शुरू करने की योजना सामने आई थी और उससे पहले वार्म अप मुकाबले खेले जाने थे। अब अगर ICC की नई योजना पर सहमति बनती है तो मुख्य टूर्नामेंट 2 अक्टूबर से शुरू हो सकता है। फाइनल फिलहाल 21 नवंबर को होने की उम्मीद है। इस स्थिति में प्रतियोगिता करीब 50 दिनों तक चल सकती है।

    गांधी जयंती को टूर्नामेंट के आगाज से जोड़ने के पीछे महात्मा गांधी और दक्षिण अफ्रीका के बीच गहरा ऐतिहासिक संबंध भी एक अहम वजह माना जा रहा है। गांधी ने अपने जीवन के करीब 21 वर्ष दक्षिण अफ्रीका में बिताए थे। वहीं उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया था। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप की शुरुआत गांधी जयंती से करना एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    2027 का वर्ल्ड कप कई मायनों में खास होने वाला है। इस बार प्रतियोगिता में 14 टीमें हिस्सा लेंगी और मुकाबले दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे तथा नामीबिया में खेले जाएंगे। ICC ने टूर्नामेंट के लिए 12 वेन्यू की जानकारी भी साझा की है। दक्षिण अफ्रीका के आठ शहरों में मुकाबले होंगे जबकि जिम्बाब्वे के तीन और नामीबिया के एक वेन्यू को शामिल किया गया है।

    टूर्नामेंट के फॉर्मेट में भी बड़ा बदलाव किया गया है। ICC ने 2027 वर्ल्ड कप को 14 टीमों का करने के साथ क्वालिफिकेशन चरण में नई सुपर सीरीज व्यवस्था जोड़ी है। सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाइड टीमों को सुपर सीरीज में आपस में मुकाबले करने होंगे और इस चरण से एक टीम मुख्य प्रतियोगिता के लिए आगे बढ़ेगी। इसके बाद मुख्य टूर्नामेंट में 12 टीमों को दो ग्रुप में बांटकर मुकाबले कराए जाएंगे। ग्रुप चरण के बाद सुपर सिक्स चरण और फिर सेमीफाइनल तथा फाइनल का रास्ता होगा।

    वर्ल्ड कप के लिए भारत समेत कई बड़ी टीमों ने अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड पाकिस्तान इंग्लैंड श्रीलंका बांग्लादेश अफगानिस्तान और मेजबान दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे भी क्वालिफाई कर चुके हैं। वहीं नामीबिया समेत बाकी टीमों की स्थिति क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से तय होगी।

    फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा गांधी जयंती के दिन वर्ल्ड कप शुरू होने को लेकर है। अगर ICC इस प्रस्ताव पर मुहर लगाता है तो 2027 वनडे वर्ल्ड कप का आगाज सिर्फ क्रिकेट के लिहाज से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदेश के लिहाज से भी बेहद खास बन जाएगा। हालांकि अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि ICC के आधिकारिक ऐलान के बाद ही होगी।

  • जेठालाल और भिड़े पहुंचे न्यूयॉर्क, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग पर ‘तारक मेहता’ की टीम का दिखा खास अंदाज

    जेठालाल और भिड़े पहुंचे न्यूयॉर्क, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग पर ‘तारक मेहता’ की टीम का दिखा खास अंदाज


    नई दिल्ली । भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न इस बार न्यूयॉर्क में भी बेहद खास अंदाज में देखने को मिला। अमेरिका की प्रतिष्ठित एम्पायर स्टेट बिल्डिंग 15 अगस्त को भारतीय तिरंगे के रंगों में रोशन नजर आई। हरे सफेद और केसरिया रंगों से जगमगाती इस ऐतिहासिक इमारत ने न्यूयॉर्क के आसमान में भारत की संस्कृति और देशभक्ति की खास झलक पेश की। इस खास इंडिया डे सेलिब्रेशन में लोकप्रिय टीवी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा की स्टारकास्ट और मेकर्स भी शामिल हुए।

    इस खास समारोह में शो के निर्माता असित कुमार मोदी के साथ जेठालाल का किरदार निभाने वाले दिलीप जोशी मंदार चंदवाडकर और सोनालिका जोशी नजर आए। मंदार चंदवाडकर शो में आत्माराम तुकाराम भिड़े का किरदार निभाते हैं जबकि सोनालिका जोशी माधवी भिड़े के रोल में दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता अदिवि शेष भी इस विशेष कार्यक्रम का हिस्सा बने। समारोह के दौरान कलाकारों ने एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की खास लाइटिंग सेरेमनी में हिस्सा लिया और आइकॉनिक लाइट स्विच ऑन करने के यादगार पल का हिस्सा बने।

    इस साल न्यूयॉर्क में आयोजित इंडिया डे का थीम हार्मनी इन हेरिटेज यानी विरासत में सद्भाव रखा गया था। इस थीम के जरिए भारतीय अमेरिकी समुदाय की परंपराओं संस्कृति मूल्यों और अमेरिका में उसके योगदान को सामने रखा गया। फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशंस के सहयोग से आयोजित इस खास कार्यक्रम में भारत की विरासत और देशभक्ति का रंग साफ दिखाई दिया। एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की रोशनी ने इस पूरे आयोजन को और भी खास बना दिया।

    लाइटिंग सेरेमनी के बाद तारक मेहता का उल्टा चश्मा की टीम और अन्य मेहमानों ने एम्पायर स्टेट बिल्डिंग के मशहूर ऑब्जर्वेशन डेक का भी दौरा किया। कलाकारों ने यहां से न्यूयॉर्क शहर के शानदार नजारों का आनंद लिया और कई यादगार तस्वीरें खिंचवाईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक टीम 86वीं मंजिल के ऑब्जर्वेशन डेक पर भी नजर आई।

    तारक मेहता का उल्टा चश्मा लंबे समय से भारतीय टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय तक चलने वाले कॉमेडी शोज में शामिल रहा है। ऐसे में शो के कलाकारों का अमेरिका में भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनना उनके प्रशंसकों के लिए भी खास पल रहा। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कलाकारों का उत्साह साफ दिखाई दिया। खासकर दिलीप जोशी को जेठालाल के रूप में पसंद करने वाले दर्शकों के लिए न्यूयॉर्क से सामने आई ये झलक चर्चा का विषय बनी।

    इस पूरे आयोजन ने मनोरंजन और देशभक्ति को एक साथ जोड़ दिया। न्यूयॉर्क की पहचान बन चुकी एम्पायर स्टेट बिल्डिंग जब भारतीय रंगों में चमकी तो वहां मौजूद कलाकारों के साथ भारतीय समुदाय के लिए भी यह गर्व और भावनाओं से भरा पल बन गया। भारत से हजारों किलोमीटर दूर भी तिरंगे की रोशनी ने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को खास बना दिया।

  • कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल

    कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां देशभक्ति और तिरंगे के रंग में पूरा प्रदेश रंगा नजर आया वहीं अलग अलग जिलों से कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिन्होंने व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तौर तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए। रतलाम में कलेक्टर के भाषण के दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह के मैदान में कुत्तों के पहुंचने का मामला चर्चा में रहा तो नर्मदापुरम में बारिश के बाद कीचड़ से भरे मैदान में स्कूली बच्चों को प्रस्तुति देनी पड़ी। मंदसौर के गरोठ में महिला सरपंच का घूंघट में तिरंगा फहराने का वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। वहीं मंदसौर में भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में एक सब इंस्पेक्टर के गाना गाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी मामला सुर्खियों में रहा।

    रतलाम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब आयोजन स्थल पर कुत्ते खुलेआम घूमते दिखाई दिए। बताया गया कि यह घटना उस समय हुई जब कलेक्टर का भाषण चल रहा था। कुत्ते काफी देर तक मैदान में घूमते रहे और बाद में एक पुलिसकर्मी ने उन्हें बाहर निकाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग व्यवस्थाओं को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है तो कुत्ते भी आजादी के जश्न में शामिल होने पहुंच गए। हालांकि इस घटना ने नगर निगम और आयोजन स्थल की सुरक्षा तथा साफ सफाई व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।

    नर्मदापुरम से आई तस्वीर भी कम चौंकाने वाली नहीं रही। बारिश के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह का मैदान कीचड़ से भर गया था। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को उसी मैदान में अपनी प्रस्तुति देनी पड़ी। दूसरी ओर मैदान के एक हिस्से में गिट्टी की चूरी डालकर उसे पुलिस परेड के लिए तैयार किया गया था। इसी अंतर को लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मियों की परेड के लिए मैदान को व्यवस्थित किया जा सकता था तो बच्चों के कार्यक्रम के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बच्चों को कीचड़ में खड़े होकर प्रस्तुति देने की स्थिति को लेकर व्यवस्थापकों पर सवाल उठे।

    मंदसौर के गरोठ क्षेत्र से सामने आया घूंघट वाला मामला भी चर्चा में रहा। मेलखेड़ा पंचायत में महिला सरपंच ने घूंघट में तिरंगा फहराया। वीडियो में उनका चेहरा पूरी तरह घूंघट से ढका दिखाई दिया। समारोह में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के साथ पंचायत के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस तस्वीर को लेकर महिला सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि किसी महिला का घूंघट करना अपने आप में किसी नियम का उल्लंघन नहीं है लेकिन सार्वजनिक पद पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की सार्वजनिक भूमिका और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर बहस जरूर छिड़ गई।

    मंदसौर में ही भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में कचनारा पुलिस चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के पहुंचने और उनके लिए गाना गाने का वीडियो चर्चा में आया। वीडियो में एसआई भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में गाना गाते नजर आए। गाने के बोल भी दोस्ती को लेकर थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एसआई को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी कार्यक्रम में शामिल होने या गाना गाने से किसी राजनीतिक पक्षधरता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन पुलिसकर्मी और राजनीतिक दलों के नेताओं के सार्वजनिक मेलजोल को लेकर उठने वाले सवालों के कारण यह मामला चर्चा में जरूर आ गया।

    अंदर की बात पर भी सियासी नजर

    दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद भाजपा संगठन में समीक्षा और संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज रही। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिणामों की समीक्षा की बात कही थी। बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति को चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई। इससे साफ है कि दतिया के नतीजे को पार्टी ने गंभीरता से लिया है।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के बीच सामने आई ये तस्वीरें मध्य प्रदेश में व्यवस्था प्रशासन राजनीति और सामाजिक परंपराओं से जुड़े अलग अलग सवालों को सामने लाती हैं। कहीं लापरवाही पर सवाल है तो कहीं समान व्यवस्था की मांग उठ रही है और कहीं सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण को लेकर बहस छिड़ी है। यही वजह है कि आजादी के जश्न के साथ इन घटनाओं ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

  • Aaj Ka Rashifal 16 August 2026: धन लाभ से करियर तक चमकेगा भाग्य, कुछ राशियों को रहना होगा सावधान

    Aaj Ka Rashifal 16 August 2026: धन लाभ से करियर तक चमकेगा भाग्य, कुछ राशियों को रहना होगा सावधान


    नई दिल्ली 16 अगस्त 2026 रविवार का दिन ग्रहों की स्थिति के लिहाज से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज चंद्रमा कन्या राशि में रहने से कामकाज में व्यावहारिक सोच और बारीकियों पर ध्यान देने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। वहीं अलग-अलग ग्रहों की स्थिति का असर करियर धन परिवार प्रेम और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर देखने को मिल सकता है। कुछ राशियों के लिए आज रुके हुए काम आगे बढ़ने और आर्थिक अवसर मिलने के संकेत हैं जबकि कुछ लोगों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि वालों के लिए आज मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। पुराने काम में सफलता मिल सकती है और परिवार तथा मित्रों का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। हालांकि दांपत्य जीवन में छोटी बात को बड़ा बनाने से बचना बेहतर रहेगा। आर्थिक मामलों में सोच समझकर निर्णय लें और अनावश्यक खर्च से बचें।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए दिन रचनात्मकता और पारिवारिक सामंजस्य लेकर आ सकता है। कला और रचनात्मक काम से जुड़े लोगों को लाभ मिलने के संकेत हैं लेकिन धन से जुड़े फैसलों में सावधानी रखना जरूरी होगा। किसी बड़े निवेश में जल्दबाजी न करें। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा।

    मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में नई दिशा मिलने और किसी पुराने प्रयास का लाभ मिलने की संभावना है। कारोबार करने वालों को संपर्कों से फायदा हो सकता है। हालांकि खर्च और निवेश के मामले में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। संवाद करते समय शब्दों का चयन सोच समझकर करें।

    कर्क राशि के लिए आज धन कमाने के नए अवसर सामने आ सकते हैं। परिवार में प्रेम और सामंजस्य बढ़ेगा। कामकाज में मेहनत का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। नौकरीपेशा लोगों को जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    सिंह राशि वालों के लिए आज आत्ममंथन का दिन हो सकता है। पुरानी बातों को पीछे छोड़कर भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना लाभकारी रहेगा। नौकरी और कारोबार में काम को व्यवस्थित तरीके से पूरा करें। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

    कन्या राशि वालों के लिए चंद्रमा की स्थिति कौशल और दक्षता को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। हाथ के हुनर और रचनात्मक काम से तुरंत लाभ मिल सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि काम के दबाव के बीच आराम और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से दिन अच्छा रह सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। रुके हुए काम को गति मिलने के संकेत हैं। कारोबारियों को भी नए संपर्कों से लाभ हो सकता है लेकिन लापरवाही से बचना होगा।

    वृश्चिक राशि वालों की नेतृत्व क्षमता आज मजबूत हो सकती है। सामाजिक स्तर पर मान सम्मान मिलने के संकेत हैं और किसी महत्वपूर्ण काम के पूरा होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। व्यापार में लाभ मिल सकता है लेकिन निवेश के मामलों में सावधानी रखना जरूरी है।

    धनु राशि के लिए दिन उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला हो सकता है। करियर में प्रभावशाली प्रदर्शन का अवसर मिलेगा और परिवार में सहयोग बना रहेगा। कोई रुका हुआ काम आगे बढ़ सकता है। हालांकि स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।

    मकर राशि वालों के लिए आर्थिक और व्यावसायिक मामलों में सकारात्मक संकेत हैं। मेहनत का परिणाम मिल सकता है और अपेक्षा से बेहतर आर्थिक लाभ की संभावना बन सकती है। फिर भी किसी भी निर्णय से पहले दूसरे पक्ष की सलाह पर विचार करना उपयोगी रहेगा।

    कुंभ राशि के जातकों को आज नए अवसर मिल सकते हैं। कामकाज में तरक्की और आर्थिक लाभ के संकेत हैं। पुराने संपर्कों से फायदा हो सकता है। परिवार के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा और किसी विवाद को बढ़ाने से बचें।

    मीन राशि वालों के लिए साझेदारी और सहयोग का दिन है। जीवनसाथी या किसी करीबी व्यक्ति का पूरा साथ मिल सकता है। करियर में नए अवसर सामने आ सकते हैं और पढ़ाई तथा रचनात्मक काम में भी अच्छी ऊर्जा बनी रहेगी। हालांकि पैसों के मामले में सावधानी बरतना बेहतर होगा।

    ज्योतिषीय राशिफल आस्था और पारंपरिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होता है। इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लेना बेहतर है।

  • एमपी में दिव्यांग कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार! 12,213 UDID आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से अटके

    एमपी में दिव्यांग कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार! 12,213 UDID आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से अटके


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए बनाए जाने वाले UDID यानी विशिष्ट दिव्यांगता पहचान कार्ड की प्रक्रिया की धीमी रफ्तार चिंता का कारण बन गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में दिव्यांग व्यक्ति को UDID कार्ड या दिव्यांगता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए औसतन 253 दिन यानी करीब साढ़े आठ महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति उन लोगों के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर रही है जिन्हें पेंशन शिक्षा रोजगार या दूसरी सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए दिव्यांगता से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत होती है। केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े भी बताते हैं कि UDID कार्ड के प्रसंस्करण का समय राज्यों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध मानव संसाधन और दिव्यांग आबादी के आधार पर अलग-अलग रहता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 12 हजार 213 आवेदन ऐसे हैं जो छह महीने से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। वहीं तीन महीने से अधिक समय से लंबित आवेदनों की संख्या 14 हजार 288 बताई गई है। कुल मिलाकर पोर्टल पर 18 हजार 510 आवेदन अलग-अलग चरणों में लंबित बताए गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दिव्यांग हितों से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण पहचान व्यवस्था में आवेदन निपटाने की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है।

    वर्ष 2021 से 5 अगस्त 2026 तक मध्य प्रदेश से कुल 4 लाख 58 हजार 156 UDID कार्ड के आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। इनमें से 4 लाख 2 हजार 819 कार्ड बनाए जा चुके हैं जबकि 16 हजार 396 आवेदनों को खारिज किया गया। इसके बावजूद हजारों आवेदन लंबे समय से प्रक्रिया में अटके हुए हैं। UDID कार्ड का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को एक ऐसी डिजिटल पहचान उपलब्ध कराना है जिसका इस्तेमाल विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने के लिए किया जा सके।

    इस पूरी प्रक्रिया में जिला मेडिकल बोर्ड की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। दिव्यांगता का आकलन और प्रमाणन मेडिकल जांच के बाद किया जाता है। ऐसे में डॉक्टरों की उपलब्धता और मेडिकल बोर्ड की बैठकें सीधे तौर पर आवेदन के निपटारे की गति को प्रभावित कर सकती हैं। केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि जिला चिकित्सा बोर्ड की बैठकों का समय और उनकी आवृत्ति राज्यों तथा संबंधित अस्पतालों की स्थानीय जरूरतों और डॉक्टरों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। पूरे देश के लिए बोर्ड बैठकों की कोई एक समान अनिवार्य आवृत्ति तय नहीं की गई है।

    मध्य प्रदेश में यह समस्या इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि राज्य सरकार के अपने रिकॉर्ड में भी UDID व्यवस्था को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन और मैपिंग से जुड़ा काम सामने आया है। अगस्त 2025 के राज्य स्तरीय रिकॉर्ड में 9 लाख 56 हजार से अधिक दिव्यांगों की पहचान और 9 लाख 61 हजार से ज्यादा UDID जनरेशन दर्ज था जबकि UDID मैपिंग का आंकड़ा करीब 5 लाख 71 हजार था। इससे पता चलता है कि कार्ड बनने के बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड को पूरी तरह अपडेट और मैप करने की चुनौती बनी हुई है।

    केंद्र सरकार की ओर से UDID पोर्टल को अपग्रेड करने डेटाबेस को आधार से जोड़ने और मेडिकल बोर्ड में काम करने वाले डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देने जैसे कदमों की जानकारी दी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी लंबित आवेदनों की संख्या बड़ी है। आधिकारिक दस्तावेज में मार्च 2026 तक देश का औसत UDID प्रसंस्करण समय 214 दिन बताया गया था।

    दिव्यांगों के लिए UDID कार्ड सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं बल्कि कई सरकारी सुविधाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में मध्य प्रदेश में आवेदन निपटाने की गति बढ़ाना जरूरी है ताकि पात्र लोगों को महीनों तक अपनी पहचान और अधिकारों से जुड़े दस्तावेज के लिए इंतजार न करना पड़े। अब जरूरत इस बात की है कि लंबित आवेदनों की जिला स्तर पर समीक्षा हो और मेडिकल बोर्ड तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए।

  • भोपाल में TB मरीजों की सेवा करने वाले DOTS प्रोवाइडर्स खुद बेहाल, डेढ़ साल से मानदेय का इंतजार

    भोपाल में TB मरीजों की सेवा करने वाले DOTS प्रोवाइडर्स खुद बेहाल, डेढ़ साल से मानदेय का इंतजार


    भोपाल । भोपाल में टीबी मरीजों के इलाज और फॉलोअप की जिम्मेदारी निभाने वाले DOTS प्रोवाइडर्स इन दिनों खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मरीजों को समय पर दवा उपलब्ध कराने से लेकर उनके घर जाकर फॉलोअप करने और परिवार के सदस्यों की जांच कराने तक की जिम्मेदारी संभालने वाले इन प्रोवाइडर्स का लंबे समय से मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। कुछ प्रोवाइडर्स का कहना है कि उन्हें करीब 10 महीने से भुगतान नहीं मिला है जबकि कुछ मार्च 2025 से अपनी राशि का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार बार अधिकारियों से संपर्क करने पर बजट उपलब्ध नहीं होने का हवाला दिया जाता है और जल्द भुगतान का भरोसा दिया जाता है।

    DOTS प्रोवाइडर्स टीबी नियंत्रण व्यवस्था में जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मरीजों के घर पहुंचकर उन्हें निर्धारित समय पर दवा लेने में मदद करते हैं और इलाज के दौरान फॉलोअप बनाए रखते हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों की जांच से जुड़े नमूने भी अस्पताल या जांच केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं। इसके अलावा मरीज के परिवार के सदस्यों की जांच कराने और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जरूरी जानकारी अपडेट करने जैसे काम भी उनकी जिम्मेदारी में शामिल हैं। केंद्र सरकार के टीबी कार्यक्रम में भी DOTS प्रोवाइडर्स को उपचार के दौरान मरीजों को सहयोग देने के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान रहा है।

    कोलार सीएससी से जुड़ी पुष्पा सिंह बघेल के अनुसार वह वर्ष 2023 से DOTS प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने यह काम शुरू किया था लेकिन मार्च 2025 से उन्हें भुगतान नहीं मिला है। पुष्पा का कहना है कि जब भी लंबित भुगतान को लेकर जानकारी ली जाती है तो बजट की कमी बताकर जल्द राशि जारी होने की बात कही जाती है। लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण अब घरेलू खर्च संभालना मुश्किल हो गया है।

    एक अन्य महिला DOTS प्रोवाइडर ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि बच्चों की फीस भरने में भी परेशानी हो रही है। घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। उनका कहना है कि मरीजों की सेवा में किसी तरह की कमी नहीं की गई है लेकिन भुगतान नहीं मिलने से परिवार पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    अशोका गार्डन क्षेत्र की पंजाबी बाग डिस्पेंसरी से जुड़ी दिव्या भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। वह पढ़ाई के साथ DOTS प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही हैं। उनके मुताबिक करीब एक साल से भुगतान नहीं मिला है। भोपाल जैसे शहर में किराए का कमरा लेकर पढ़ाई करना और रोजमर्रा के खर्च संभालना पहले ही चुनौतीपूर्ण है। इसके साथ मरीजों के घर जाकर लगातार सेवा देने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से स्थिति और कठिन हो गई है।

    DOTS प्रोवाइडर्स का कहना है कि गर्मी हो या बारिश उन्होंने मरीजों की सेवा बंद नहीं की। वे घर घर जाकर दवाएं पहुंचाते रहे और मरीजों के इलाज का फॉलोअप करते रहे। उनका कहना है कि यदि कोई मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पाता है तो उसके घर से जरूरी नमूना लेकर जांच के लिए जमा कराने जैसे काम भी किए जाते हैं।

    लंबित भुगतान को लेकर DOTS प्रोवाइडर्स ने 3 अगस्त 2026 को राज्य क्षय अधिकारी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश को पत्र देकर प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग की है। पत्र में करीब 10 से 11 महीने की राशि लंबित होने का उल्लेख किया गया है। प्रोवाइडर्स का कहना है कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी अपनी समस्या पहुंचा चुके हैं।

    मध्यप्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और केंद्रीय टीबी डिवीजन के माध्यम से कार्यक्रम संचालित है। केंद्रीय टीबी डिवीजन की मध्यप्रदेश संबंधी आधिकारिक वेबसाइट पर भी राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े दिशा निर्देश और संसाधन उपलब्ध हैं। अब DOTS प्रोवाइडर्स को उम्मीद है कि सरकार उनकी लंबित राशि का जल्द भुगतान करेगी ताकि मरीजों की सेवा करने वाले इन जमीनी कार्यकर्ताओं को भी आर्थिक राहत मिल सके।