Author: bharati

  • डिजिटल डिस्ट्रैक्शन का साइलेंट अटैक: नोटिफिकेशन और मल्टीटास्किंग ने छीना फोकस, छात्र और कर्मचारी मानसिक थकान के शिकार

    डिजिटल डिस्ट्रैक्शन का साइलेंट अटैक: नोटिफिकेशन और मल्टीटास्किंग ने छीना फोकस, छात्र और कर्मचारी मानसिक थकान के शिकार


    नई दिल्ली/भोपाल। वर्तमान दौर में तकनीक ने जहाँ जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसने मानवीय क्षमताओं, विशेषकर ‘एकाग्रता पर एक गहरा प्रहार किया है। देशभर के शिक्षण संस्थानों और कॉर्पोरेट जगत से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, छात्र और कामकाजी पेशेवर एक नई तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैंफोकस की कमी’। मोबाइल नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया की लत और एक साथ कई काम करनेकी होड़ ने उत्पादकता को निचले स्तर पर पहुँचा दिया है, जिससे अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।

    20 मिनट भी नहीं टिक रहा छात्रों का ध्यान विभिन्न शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए आंतरिक सर्वेक्षणों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह पाया गया है कि आज का औसत छात्र किसी एक विषय पर लगातार 20 से 25 मिनट से अधिक समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा है। पढ़ाई के दौरान हर कुछ मिनटों में मोबाइल स्क्रीन चेक करने की आदत ने उनकी सीखने की क्षमता को बाधित किया है। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक परिणामों में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है।

    मल्टीटास्किंग का बोझ और घटती कार्यक्षमता यही स्थिति कॉर्पोरेट कार्यालयों की भी है। दफ्तरों में कर्मचारियों पर एक साथ कई प्रोजेक्ट्स संभालने का दबाव होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘मल्टीटास्किंग’ दरअसल एक भ्रम है। जब मस्तिष्क बार-बार एक काम से दूसरे काम पर स्विच करता है, तो वह कॉग्निटिव लोड मानसिक भार बढ़ा देता है, जिससे काम की गुणवत्ता गिर जाती है और कर्मचारी जल्दी मानसिक थकान महसूस करने लगते हैं।

    क्या हैं इस समस्या के मुख्य कारण? मनोवैज्ञानिकों ने फोकस खोने के पीछे तीन प्रमुख कारणों को रेखांकित किया है अनियंत्रित स्क्रीन टाइम: सोशल मीडिया और ऐप्स के नोटिफिकेशन डोपामाइन रिलिज़ करते हैं, जो हमें बार-बार फोन देखने को मजबूर करते हैं। अनियमित दिनचर्या नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि का अभाव मानसिक स्पष्टता को खत्म कर देता है। डिजिटल शोर: हर वक्त सूचनाओं के अंबार के बीच मस्तिष्क को ‘विश्राम’ नहीं मिल पा रहा है।

    समाधान की ओर बढ़ते कदम डिजिटल डिटॉक्स और वर्कशॉप इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए अब संस्थानों ने सक्रिय कदम उठाना शुरू कर दिया है। कई स्कूल और कॉलेज अब ‘डिजिटल डिटॉक्स’ सत्र आयोजित कर रहे हैं, जहाँ छात्रों को बिना गैजेट्स के समय बिताने और एकाग्रता बढ़ाने के गुर सिखाए जा रहे हैं। वहीं, सरकारी स्तर पर भी छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक सहायता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह कैसे बढ़ाएं अपना फोकस करियर काउंसलरों ने इस समस्या से निपटने के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं मोनोटास्किंग’ अपनाएं: एक समय में केवल एक ही काम पर पूरा ध्यान दें।

    फोन को रखें दूर काम या पढ़ाई के समय मोबाइल को न केवल साइलेंट करें, बल्कि उसे अपनी नजरों से दूर रखें। ब्रेक का नियम काम को छोटे हिस्सों में बांटें और हर एक घंटे बाद 5-10 मिनट का ‘स्क्रीन-फ्री’ ब्रेक लें। समय रहते यदि इस ‘डिजिटल डिस्ट्रैक्शन’ पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह न केवल व्यक्तिगत करियर बल्कि देश की समग्र कार्यक्षमता के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाएगा।

  • सतना में मामूली विवाद में ऑटो चालक पर गोली, जिला अस्पताल में भर्ती

    सतना में मामूली विवाद में ऑटो चालक पर गोली, जिला अस्पताल में भर्ती

    सतना।मध्यप्रदेश के सतना जिले में शनिवार शाम को एक मामूली सड़क विवाद खूनी झगड़े में बदल गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह घटना लगवां थाना क्षेत्र के गहरा नाला के पास हुई। बताया गया है कि एक ऑटो विपरीत दिशा से आ रही बाइक से टकरा गया। इस मामूली टक्कर को लेकर ऑटो चालक और बाइक सवार युवकों के बीच विवाद हो गया।

    मौके पर हुई गोलीबारी
    विवाद इतना बढ़ गया कि बाइक सवारों में से किसी ने ऑटो चालक पर गोली चला दी। घटना में ऑटो चालक मामूली रूप से घायल हुआ। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बीच-बचाव किया और दोनों पक्षों को अलग किया।

    जिला अस्पताल में भर्ती
    घायल ऑटो चालक को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। पुलिस ने फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस की स्थिति
    स्थानीय पुलिस ने बताया कि यह मामूली विवाद अचानक बढ़ गया और गोली चलाने की घटना हुई। मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस CCTV फुटेज और गवाहों के बयान लेने में जुटी हुई है।यह घटना यह याद दिलाती है कि सड़क पर छोटी सी टक्कर भी कभी-कभी गंभीर हिंसक घटनाओं में बदल सकती है, इसलिए सावधानी और शांति बनाए रखना जरूरी है।

  • भोपाल में SC-ST-OBC महासम्मेलन: 20 मांगों का ज्ञापन, सरकार पर आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर हमला

    भोपाल में SC-ST-OBC महासम्मेलन: 20 मांगों का ज्ञापन, सरकार पर आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर हमला



    भोपाल । भोपाल के भेल दशहरा मैदान में रविवार को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (SC-ST-OBC) के संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों लोग शामिल हुए। सम्मेलन में नेताओं ने सामाजिक न्याय, आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और न्याय व्यवस्था में समान अधिकार की मांग को लेकर सरकार पर तीखा विरोध जताया। मंच से कहा गया कि ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग आज भी शिक्षा, नौकरी, प्रशासन और न्याय व्यवस्था में बराबरी का अधिकार नहीं पा रहे हैं और संविधान में दिए गए अधिकारों का लाभ इन्हें पूरी तरह नहीं मिल रहा है।

    संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री के नाम 20 मांगों का ज्ञापन देने की बात कही।

    इसमें मुख्य रूप से आरक्षण को जनसंख्या के अनुसार बढ़ाने, ओबीसी के 13% रोके गए पद तुरंत भरने, सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण, निजी और आउटसोर्स कामों में भी आरक्षण, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, सफाई कर्मचारियों को नियमित करने, न्याय व्यवस्था में ओबीसी-एससी-एसटी का उचित प्रतिनिधित्व, छात्रवृत्ति और छात्रावास बढ़ाने जैसी मांगें शामिल हैं। मोर्चा ने चेतावनी भी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन तेज किया जाएगा।

    महासम्मेलन के दौरान पूर्व विधायक और संपूर्ण बुंदेलखंड जन जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरडी प्रजापति ने कथावाचकों धीरेंद्र शास्त्री और अनिरुद्ध आचार्य के विवादित बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रजापति ने कहा कि महिलाओं के बारे में “25 साल की लड़कियां” और “100 बार बेचो” जैसे अपमानजनक बयान देना किसी भी धर्म या शास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।

    उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विधवा महिला का सिंदूर हटना उसे “खाली प्लॉट” बना देता है और समाज को अपनी बहन-बेटियों को जमीन की तरह ‘खरीदा-बेचा’ जाना चाहिए।

    प्रजापति ने यह भी कहा कि कुछ कथावाचक और धर्मगुरु करोड़ों लोगों की भीड़ जुटाकर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो और धर्म-शास्त्र का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कड़ी निगरानी होनी चाहिए।

    अपने संबोधन में प्रजापति ने प्रधानमंत्री और मौजूदा व्यवस्था पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि मेहनत करने वाला वर्ग हाशिए पर है, जबकि धर्म और चंदे के सहारे प्रभावशाली लोग लाभ ले रहे हैं।

    उन्होंने आदिवासी समाज के मुद्दों पर जंगल कटाई और संसाधनों के दोहन को आदिवासी समुदाय के अस्तित्व के लिए खतरा बताया।

    महासम्मेलन में उपस्थित नेताओं ने यह भी कहा कि आदिवासी सलाहकार परिषद को मजबूत किया जाए और PESA कानून पूरी तरह लागू किया जाए। साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाएं ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर हाईकोर्ट परिसर में स्थापित करने और बाबा साहब के अपमान से जुड़े मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई।

    इस तरह भोपाल में हुए इस महासम्मेलन ने सरकार पर आरक्षण, सामाजिक न्याय और संविधानिक अधिकारों के कार्यान्वयन को लेकर दबाव बढ़ा दिया है, साथ ही कथावाचकों के विवादित बयानों को लेकर सामाजिक स्तर पर भी नया राजनीतिक और सांस्कृतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

  • मृणाल ठाकुर-धनुष की वेलेंटाइन वेडिंग का सच: समंदर की लहरों के बीच एक्ट्रेस का मिस्टीरियस पोस्ट, क्या दे दिया बड़ा इशारा

    मृणाल ठाकुर-धनुष की वेलेंटाइन वेडिंग का सच: समंदर की लहरों के बीच एक्ट्रेस का मिस्टीरियस पोस्ट, क्या दे दिया बड़ा इशारा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की गलियों में इन दिनों एक ही नाम गूंज रहा हैमृणाल ठाकुर और धनुष। पिछले कुछ दिनों से यह अफवाह जोरों पर है कि दोनों सितारे जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। चर्चाएं यहाँ तक हैं कि 14 फरवरी 2026, यानी वेलेंटाइन डे के मौके पर दोनों सात फेरे लेंगे। जहां फैंस इस खबर से उत्साहित हैं, वहीं मृणाल ठाकुर के एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

    समंदर के बीच मृणाल का अनशेकन पोस्ट शादी की खबरों के बीच मृणाल ठाकुर ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह समंदर के बीच एक नाव पर सवार नजर आ रही हैं। सुनहरी धूप और लहरों के बीच मुस्कुराते हुए मृणाल ने इस पोस्ट को एक बहुत ही दिलचस्प कैप्शन दिया। उन्होंने लिखाजमीन से जुड़ी, चमकती हुई और अडिगमृणाल के इस अनशेकन यानी ‘अडिग’ शब्द को फैंस उनकी शादी की अफवाहों पर एक परोक्ष प्रतिक्रिया मान रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि एक्ट्रेस यह संदेश दे रही हैं कि वह इन बेसलेस अफवाहों से बिल्कुल भी विचलित नहीं हैं और अपने काम में मस्त हैं।

    क्या है ‘वैलेंटाइन वेडिंग’ की सच्चाई? रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृणाल और धनुष की शादी की खबरें पूरी तरह से निराधार और फेक हैं। मृणाल ठाकुर के करीबी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि एक्ट्रेस का फिलहाल शादी का कोई इरादा नहीं है।काम में व्यस्तता: फरवरी और मार्च 2026 में मृणाल की बैक-टू-बैक फिल्में रिलीज होने वाली हैं। फरवरी में उनकी फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ रिलीज हो रही है, जबकि मार्च में उनकी एक बड़ी तेलुगु फिल्म आने वाली है।करियर पर फोकस सूत्रों का कहना है कि इतने बिजी शेड्यूल के बीच शादी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। वहीं धनुष के करीबियों ने भी इन खबरों को पूरी तरह बकवास बताया है।

    कैसे शुरू हुईं ये अफवाहें? मृणाल और धनुष के बीच लिंक-अप की खबरें साल 2025 में तब शुरू हुईं, जब दोनों को कई बार एक साथ स्पॉट किया गया। अगस्त 2025 में फिल्म सन ऑफ सरदार 2 के प्रीमियर पर दोनों की बॉन्डिंग ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इसके बाद धनुष की फिल्म ‘तेरे इश्क में’ की रैप-अप पार्टी में भी मृणाल नजर आई थीं। हालांकि, मृणाल पहले ही एक इंटरव्यू में धनुष को अपना ‘अच्छा दोस्त’ बता चुकी हैं।फिलहाल, मृणाल के इस अनशेकन अवतार ने यह साफ कर दिया है कि वह अफवाहों के बजाय अपनी सफलता का जश्न मनाने में यकीन रखती हैं।

  • कंगना बनाम रहमान: 'इमरजेंसी' और 'छावा' को लेकर बढ़ा विवाद, कंगना बोलीं- रहमान पर तरस आता है, उन्होंने मेरी फिल्म ठुकराई

    कंगना बनाम रहमान: 'इमरजेंसी' और 'छावा' को लेकर बढ़ा विवाद, कंगना बोलीं- रहमान पर तरस आता है, उन्होंने मेरी फिल्म ठुकराई


    नई दिल्ली । ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान और फायरब्रांड अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच एक पुरानी रार अब खुलकर सामने आ गई है। विवाद की शुरुआत रहमान के एक पुराने इंटरव्यू से हुई, जिसमें उन्होंने विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ को लेकर टिप्पणी की थी। अब करीब एक साल बाद कंगना रनौत ने इस पर मोर्चा खोलते हुए रहमान को आड़े हाथों लिया है और उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।छावा को बताया था बांटने वाली फिल्मविवाद की जड़एआर रहमान का वह बयान है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘छावा’ छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म को समाज को बांटने वाली फिल्म बताया था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस फिल्म का संगीत खुद रहमान ने ही दिया है। इसी इंटरव्यू में रहमान ने यह दर्द भी साझा किया था कि ‘कम्युनल’सांप्रदायिक कारणों से उन्हें इंडस्ट्री में अब उतना काम नहीं मिल रहा है जितना पहले मिलता था।

    कंगना का पलटवार मुझ पर तरस खाइए, आप पर नहीं रहमान के इस विक्टिम कार्ड पर कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर अपनी भड़ास निकाली। कंगना ने खुलासा किया कि उन्होंने अपनी फिल्म इमरजेंसी के लिए एआर रहमान को संगीत देने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन रहमान ने इसे ठुकरा दिया। कंगना ने तंज कसते हुए लिखा, रहमान साहब कहते हैं कि उन्हें काम नहीं मिल रहा, जबकि सच्चाई यह है कि जब मैंने उन्हें ‘इमरजेंसी जैसी बड़ी फिल्म ऑफर की, तो उन्होंने मना कर दिया। मुझे उन पर तरस आता है। वे खुद अपनी विचारधारा के कारण काम चुनते हैं या छोड़ते हैं, और फिर समाज पर दोष मढ़ते हैं।

    राष्ट्रवाद बनाम विचारधारा की जंग कंगना ने अपने पोस्ट में आगे दावा किया कि रहमान जैसे कलाकार राष्ट्रवादी विषयों पर बनने वाली फिल्मों से दूरी बना लेते हैं। अभिनेत्री ने कहा कि ‘छावा’ जैसे वीर नायकों की कहानियों को ‘बांटने वाला’ कहना हमारे इतिहास और संस्कृति का अपमान है। कंगना के इस बयान के बाद सोशल मीडिया दो गुटों में बंट गया है। जहां एक तरफ लोग कंगना के साहस की सराहना कर रहे हैं, वहीं रहमान के प्रशंसक इसे उनकी व्यक्तिगत पसंद और कलात्मक स्वतंत्रता बता रहे हैं।फिलहाल, एआर रहमान की ओर से कंगना के इन ताजा आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन ‘छावा’ की रिलीज से पहले उठा यह विवाद फिल्म के बिजनेस और संगीत की साख पर क्या असर डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

  • बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति

    बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति


    नई दिल्ली । बसंत पंचमी का दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दिन कुछ विशेष वस्तुएं घर लाकर माँ सरस्वती को अर्पित की जाएं, तो साधक को ज्ञान, एकाग्रता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    बसंत पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 22 जनवरी को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026 को सुबह से। पूजा का शुभ समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक लगभग 5 घंटे 20 मिनट। शेष योग इस दिन रवि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो खरीदारी और नई शुरुआत के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है।

    इन वस्तुओं को घर लाना माना जाता है अत्यंत शुभ

    माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर यदि आप घर में नई ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं, तो इस दिन माँ सरस्वती की प्रतिमा घर लाएं। ध्यान रहे कि माँ सरस्वती शांत मुद्रा में हों और हंस या कमल पर विराजमान हों। इसे घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व में स्थापित करना करियर के लिए शुभ होता है।वीणा संगीत यंत्र वीणा माँ सरस्वती का सबसे प्रिय वाद्य यंत्र है। संगीत और कला से जुड़े लोगों के लिए बसंत पंचमी पर वीणा या कोई भी छोटा वाद्य यंत्र घर लाना सौभाग्य बढ़ाता है। इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और मानसिक शांति मिलती है।

    मोरपंख मोरपंख को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे बसंत पंचमी के दिन लाकर बच्चों के स्टडी रूम या उनकी किताबों में रखना चाहिए। माना जाता है कि इससे छात्रों की एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ाई में मन लगता है।नई किताबें और पेन कलम पेन को माँ सरस्वती का रूप माना जाता है। इस दिन नया पेन या नई किताबें खरीदकर उनकी पूजा करना और उन पर तिलक लगाना बहुत लाभकारी होता है। यह कार्य विशेष रूप से नई शिक्षा शुरू करने वाले बच्चों अक्षरारंभ के लिए श्रेष्ठ है। पीले वस्त्र या फूल पीला रंग माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय है क्योंकि यह शुद्धता और नई चेतना का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र खरीदना या गेंदे के पीले फूलों से घर को सजाना सुख-समृद्धि लेकर आता है।

    माँ सरस्वती की पूजा के लिए विशेष टिप

    पूजा के समय माँ सरस्वती को पीले रंग की मिठाई बेसन के लड्डू या केसरिया भात का भोग लगाएं और ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • साल की पहली मौनी अमावस्या: ग्वारीघाट-तिलवारा-लम्हेटा पर उमड़ी भीड़, नर्मदा में शुरू हुआ सुबह 4 बजे से स्नान

    साल की पहली मौनी अमावस्या: ग्वारीघाट-तिलवारा-लम्हेटा पर उमड़ी भीड़, नर्मदा में शुरू हुआ सुबह 4 बजे से स्नान


    नई दिल्ली। साल की पहली मौनी अमावस्या पर जबलपुर के ग्वारीघाट, तिलवारा घाट और लम्हेटा घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। रविवार सुबह से ही घाटों पर भक्तों का आगमन शुरू हो गया था और दिन के बढ़ने के साथ संख्या लगातार बढ़ती गई। जबलपुर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों लोग आस्था के साथ मां नर्मदा में डुबकी लगाने पहुंचे।

    श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या के महत्व को देखते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    कई भक्तों ने घाट पर दीपदान किया और जरूरतमंदों को दान-पुण्य भी किया, जिससे पूरे घाट क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा। पंडित कृष्णा दुबे ने बताया कि सुबह 4 बजे से ही नर्मदा स्नान शुरू हो गए थे और मान्यता है कि इस दिन नर्मदा में स्नान करने से पापों का नाश होता है और कई पीढ़ियां तर जाती हैं।

    भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए। पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। इस आस्था के चलते हर वर्ष मौनी अमावस्या पर ग्वारीघाट सहित अन्य नर्मदा घाटों पर भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है, जो इस दिन की धार्मिक महत्ता को दर्शाती है।

  • होली पर चंद्र ग्रहण का साया: 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण, सूतक के कारण 2 मार्च की मध्य रात्रि से पहले होगा होलिका दहन

    होली पर चंद्र ग्रहण का साया: 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण, सूतक के कारण 2 मार्च की मध्य रात्रि से पहले होगा होलिका दहन


     नई दिल्ली । वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण रंगों के पर्व धुलेंडी के दिन यानी 3 मार्च को लगने जा रहा है। यह एक खग्रास चंद्र ग्रहण होगा, जो उज्जैन सहित पूरे देश में ग्रस्तोदय रूप चंद्रमा के उदय होते समय ग्रहण लगा होना में दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण दृश्य होता है, उसका सूतक और प्रभाव दोनों मान्य होते हैं। इस विशेष स्थिति के कारण इस बार होली और धुलेंडी के त्यौहार पर ग्रहों का बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा।

    2 मार्च को समय से पहले होगा होलिका दहन ज्योतिषीय गणनाओं और महाकालेश्वर विद्वत परिषद के अनुसार, 3 मार्च की सुबह से ही ग्रहण का सूतक वेधकाल प्रभावी हो जाएगा। सूतक काल में मांगलिक कार्य और अग्नि प्रज्वलन वर्जित माना जाता है। इसी कारण होलिका दहन 2 मार्च को मध्य रात्रि 12 बजे से पहले करना अनिवार्य होगा। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि सूतक लगने के बाद होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत नहीं होगा, इसलिए श्रद्धालु समय का विशेष ध्यान रखें। सिंह राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में ग्रहण श्री महाकाल विद्वत परिषद उज्जैन के प्रमुख आचार्य पं. आशीष अग्निहोत्री ने बताया कि यह ग्रहण सिंह राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा। सूतक काल का प्रारंभ 3 मार्च 2026, सुबह 6 बजकर 20 मिनट से। प्रभाव सूतक काल शुरू होते ही मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे और मूर्ति स्पर्श निषेध रहेगा। इस दौरान भोजन, शयन और मनोरंजन जैसे कार्यों को वर्जित माना गया है।

    धुलेंडी पर सूतक का साया 3 मार्च को धुलेंडी रंग खेलने वाला दिन है। चूंकि सुबह से ही सूतक लग जाएगा, इसलिए धार्मिक दृष्टि से पूजा-पाठ और शुद्धता का विशेष महत्व रहेगा। ग्रहण की समाप्ति के बाद ही स्नान, दान और शुद्धि की जाएगी। इसके उपरांत ही लोग विधिवत पूजा और अन्य उत्सव मना सकेंगे।2026 खगोलीय घटनाओं का वर्ष आचार्य पं. आशीष अग्निहोत्री के अनुसार, वर्ष 2026 खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विलक्षण रहेगा। इस पूरे वर्ष में कुल चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल होंगे। 3 मार्च को होने वाला खग्रास चंद्र ग्रहण इस श्रृंखला की पहली प्रमुख घटना है, जिसका व्यापक प्रभाव सभी राशियों पर भी देखने को मिलेगा।

  • सस्ते कार लोन की दौड़: सरकारी बैंक दे रहे 7.50% से भी कम दर पर ऑफर!

    सस्ते कार लोन की दौड़: सरकारी बैंक दे रहे 7.50% से भी कम दर पर ऑफर!


    नई दिल्ली। अगर आप नई कार खरीदने के लिए ₹12 लाख का लोन लेने की सोच रहे हैं और सबसे कम ब्याज दर पर EMI चाहते हैं, तो कुछ सरकारी बैंक (Public Sector Banks) अभी भी सबसे बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं। जनवरी 2026 में कई प्रमुख सरकारी बैंकों ने कार लोन की ब्याज दरें 7.40% से शुरू रखी हैं, खासकर अच्छे CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों के लिए। हालांकि वास्तविक ब्याज दर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल, CIBIL स्कोर और बैंक संबंध पर निर्भर करेगी। सबसे सस्ती दर आम तौर पर उन्हीं ग्राहकों को मिलती है जिनका सिबिल स्कोर शानदार होता है।

    इन बैंकों की खास बात यह है कि वे प्री-पेमेंट पेनल्टी भी नहीं वसूल रहे हैं, यानी आप चाहें तो पहले भी लोन चुका सकते हैं बिना अतिरिक्त शुल्क के। कम ब्याज दर का फायदा यह होता है कि न सिर्फ मासिक EMI कम होगी, बल्कि कुल ब्याज भुगतान भी काफी बच जाएगा।

    सबसे पहले इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) का नाम आता है, जो नई कार के लिए 7.60% सालाना ब्याज दर पर लोन दे रहा है। बैंक की सुविधा के अनुसार यह लोन 84 महीने (7 साल) में चुकाया जा सकता है।

    इस लोन में पति/पत्नी, बेटा, बेटी, पिता, माता आदि की इनकम जोड़कर लोन की पात्रता बढ़ाई जा सकती है।

    दूसरा बैंक है केनरा बैंक, जो कार या व्हीकल लोन पर 7.95% सालाना दर पर लोन दे रहा है। यहां लोन की कोई ऊपरी सीमा नहीं है और नई गाड़ी के लिए 90% तक फाइनेंसिंग उपलब्ध है। इसके साथ ही, केनरा बैंक भी प्री-पेमेंट पेनल्टी नहीं वसूलता। इसके अलावा, इस बैंक से आप दूसरी और की गाड़ियों के लिए भी फाइनेंसिंग ले सकते हैं।

    तीसरा विकल्प है यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जहां कार लोन की शुरुआती दर 7.50% है। यदि आपका सिबिल स्कोर अच्छा है और बाकी पात्रता पूरी होती है, तो आपको इतनी सस्ती दर पर लोन मिल सकता है।

    नई चार पहिया गाड़ी खरीदने पर इस बैंक में ₹1000 + GST प्रोसेसिंग फीस देनी होती है।

    चौथा बैंक है बैंक ऑफ इंडिया (BOI), जो 7.60% की शुरुआती ब्याज दर पर नई कार लोन दे रहा है। इस बैंक में ब्याज Daily Reducing Balance के आधार पर लिया जाता है, यानी हर घटते बैलेंस पर ब्याज कम होता जाता है। प्रोसेसिंग चार्ज लोन अमाउंट का 0.25% तक हो सकता है, जो ₹2,500 से ₹10,000 के बीच तय होता है। अगर आप इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद रहे हैं, तो प्रोसेसिंग फीस में 50% की छूट भी मिलती है।

    अब अगर आप यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से ₹12 लाख का कार लोन 4 साल (48 महीने) के लिए लेते हैं, तो 7.50% की शुरुआती दर पर EMI की गणना के अनुसार आपकी मंथली EMI ₹29,014.68 बनेगी। इस लोन पर कुल ₹1,92,704.75 ब्याज देना होगा और आप बैंक को कुल ₹13,92,704.75 चुकाएंगे।

    इन सरकारी बैंकों के ऑफर खासकर उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद हैं जिनका CIBIL स्कोर अच्छा है और वे कम ब्याज दर पर EMI लेकर कार खरीदना चाहते हैं।

  • हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार

    हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार


    नई दिल्ली । हाई ब्लड प्रेशर को अब तक हम केवल ज्यादा नमक खाने, तला-भुना भोजन मोटापा और मानसिक तनाव के साथ जोड़कर देखते आए हैं। लेकिन ऑकलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक ताज़ा स्टडी ने चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि हाई बीपी के पीछे केवल हमारा खानपान ही नहीं, बल्कि हमारे दिमाग की वायरिंग और उससे निकलने वाले सिग्नल भी एक बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    क्या है दिमाग का वह हिस्सा जो बढ़ाता है बीपी

    वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग के निचले हिस्से में एक विशेष क्षेत्र होता है जिसे लैटरल पैराफेशियल रीजन कहा जाता है। आमतौर पर यह हिस्सा शरीर की उन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है जो अपने आप होती हैं, जैसे सांस लेना, दिल का धड़कना और पाचन क्रिया। स्टडी में खुलासा हुआ है कि इसी क्षेत्र में मौजूद कुछ विशेष नसें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। जब ये नसें जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, तो वे रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने के संकेत भेजती हैं। वाहिकाओं के सिकुड़ने से रक्त का प्रवाह बाधित होता है और दबाव बढ़ जाता है, जिसे हम मेडिकल भाषा में हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं।

    अब तक की थ्योरी से कैसे अलग है यह रिसर्च

    अब तक डॉक्टरों का मानना था कि बीपी बढ़ने का मुख्य कारण किडनी की कार्यक्षमता में कमी या आर्टरीज में फैट का जमना है। लेकिन यह नई रिसर्च बताती है कि दिमागी नियंत्रण यदि दिमाग का लैटरल पैराफेशियल रीजन गलत सिग्नल भेज रहा है, तो स्वस्थ खानपान के बावजूद व्यक्ति का बीपी बढ़ सकता है। ऑटोमैटिक रिस्पॉन्स: कई बार शरीर बिना किसी बाहरी कारण जैसे नमक या गुस्सा के भी आंतरिक दिमागी संकेतों की वजह से हाइपरटेंशन का शिकार हो जाता है।

    एक्सपर्ट की सलाह: खुद को कैसे रखें सुरक्षित

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई रिसर्च के बाद अब बीपी के इलाज के तरीकों में बदलाव आ सकता है। केवल दवाएं ही नहीं बल्कि ‘न्यूरोलॉजिकल कंट्रोल पर भी ध्यान देना होगा। वर्तमान में खुद को सुरक्षित रखने के लिए आप ये कदम उठा सकते हैं ब्रीदिंग एक्सरसाइज: चूंकि यह हिस्सा सांस लेने को भी नियंत्रित करता है, इसलिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम दिमाग को शांत कर बीपी कम करने में मदद कर सकते हैं। माइंडफुलनेस योग और ध्यान के जरिए दिमाग के निचले हिस्से को रिलैक्स रखा जा सकता है। नियमित चेकअप: यदि खानपान सही होने के बाद भी बीपी बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से न्यूरोलॉजिकल कारणों पर चर्चा करें।