Author: bharati

  • चेहरे की खूबसूरती के लिए नीम का ऐसे करें इस्तेमाल: दाग-धब्बे और पिंपल्स से राहत पाने में मिल सकती है मदद

    चेहरे की खूबसूरती के लिए नीम का ऐसे करें इस्तेमाल: दाग-धब्बे और पिंपल्स से राहत पाने में मिल सकती है मदद


    नई दिल्ली । नीम को भारतीय घरों में लंबे समय से त्वचा और बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। नीम की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जिन्हें त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है। खासतौर पर ऑयली स्किन और मुंहासों की समस्या से परेशान लोगों के बीच नीम का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय है। हालांकि त्वचा पर किसी भी प्राकृतिक चीज का इस्तेमाल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और किसी भी घरेलू उपाय का असर सभी पर एक जैसा नहीं होता।

    अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली है और चेहरे पर बार बार पिंपल्स निकलते हैं तो नीम का इस्तेमाल त्वचा की सफाई के लिए किया जा सकता है। नीम की कुछ साफ पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा करने के बाद चेहरे को धोने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे त्वचा की सफाई में मदद मिल सकती है। नीम में पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक यौगिकों में एंटीमाइक्रोबियल गुण बताए जाते हैं जो त्वचा पर मौजूद कुछ सूक्ष्मजीवों के खिलाफ काम कर सकते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक रूप से नीम को मुंहासे और त्वचा संबंधी परेशानियों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

    नीम की पत्तियों का पेस्ट भी त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए ताजी और साफ नीम की पत्तियों को पीसकर हल्का पेस्ट बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाने से पहले हाथ की त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर होता है। अगर जलन लालिमा खुजली या किसी तरह की एलर्जी दिखाई दे तो इसे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि प्राकृतिक चीजें भी कुछ लोगों की त्वचा पर प्रतिक्रिया पैदा कर सकती हैं।

    मुंहासों के अलावा नीम को अत्यधिक तैलीय त्वचा के लिए भी उपयोगी माना जाता है। कई बार त्वचा में अतिरिक्त तेल जमा होने के कारण चेहरे पर चिपचिपाहट और बंद रोमछिद्रों की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में त्वचा की नियमित सफाई के साथ हल्के और त्वचा के अनुकूल उत्पादों का इस्तेमाल ज्यादा जरूरी है। नीम को इसका विकल्प नहीं माना जाना चाहिए बल्कि जरूरत के अनुसार अतिरिक्त देखभाल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अगर चेहरे पर दाग धब्बे या पुराने मुंहासों के निशान हैं तो केवल नीम लगाने से इनके पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है। ऐसे मामलों में सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और त्वचा को बार बार छूने से बचना भी जरूरी है। पिंपल्स को दबाने या फोड़ने से बचना चाहिए क्योंकि इससे सूजन और दाग बढ़ सकते हैं।

    नीम का इस्तेमाल करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नीम का गाढ़ा पेस्ट या तेल हर किसी की त्वचा के लिए उपयुक्त नहीं होता। चेहरे पर नीम का तेल सीधे लगाने से कुछ लोगों को जलन या एलर्जी हो सकती है। अगर मुंहासे बहुत ज्यादा हैं दर्दनाक हैं बार बार हो रहे हैं या त्वचा पर लगातार लालिमा और खुजली बनी हुई है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर नीम त्वचा की देखभाल में एक पारंपरिक और उपयोगी प्राकृतिक विकल्प हो सकता है। खासकर त्वचा की सफाई और ऑयली स्किन से जुड़ी समस्याओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन बेहतर परिणाम के लिए इसे सावधानी से इस्तेमाल करना जरूरी है। साफ सफाई मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन के साथ संतुलित स्किन केयर रूटीन अपनाना त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में ज्यादा मददगार हो सकता है।

  • चीन के स्पेस मिशन को बड़ा झटका, लॉन्च के कुछ ही देर बाद रॉकेट में विस्फोट; संचार उपग्रह नष्ट

    चीन के स्पेस मिशन को बड़ा झटका, लॉन्च के कुछ ही देर बाद रॉकेट में विस्फोट; संचार उपग्रह नष्ट


    नई दिल्ली। चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को सोमवार रात बड़ा झटका लगा जब लॉन्ग मार्च 7A रॉकेट लॉन्च के कुछ ही समय बाद हवा में विस्फोट का शिकार हो गया। रॉकेट अपने साथ झोंगशिंग 4B यानी चाइनासैट 4B संचार उपग्रह लेकर उड़ान भर रहा था लेकिन मिशन के शुरुआती चरण में ही रॉकेट में गंभीर तकनीकी असामान्यता सामने आई और करीब 85 सेकंड बाद वह आसमान में टूटकर आग के विशाल गोले में बदल गया। इस दुर्घटना के साथ ही रॉकेट में मौजूद संचार उपग्रह भी नष्ट हो गया और चीन का यह अंतरिक्ष मिशन पूरी तरह विफल हो गया।

    यह प्रक्षेपण चीन के हैनान द्वीप स्थित वेनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से किया गया था। लॉन्च के बाद शुरुआती कुछ सेकंड तक रॉकेट सामान्य तरीके से आगे बढ़ता दिखाई दिया लेकिन करीब डेढ़ मिनट से भी कम समय बाद उसमें गड़बड़ी सामने आ गई। घटना से जुड़े वीडियो में रॉकेट को उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद बिखरते और तेज आग की लपटों के बीच नष्ट होते देखा जा सकता है। हादसे के बाद मिशन से जुड़े अधिकारियों के बीच भी हलचल बढ़ गई। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने घटना के करीब तीन घंटे बाद मिशन की विफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि उड़ान के दौरान रॉकेट में तकनीकी असामान्यता उत्पन्न हुई थी।

    इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा चाइनासैट 4B संचार उपग्रह था। इसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाना था और इसके जरिए रेडियो टेलीविजन तथा अन्य संचार सेवाओं को मजबूत करने की योजना थी। लेकिन रॉकेट के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण उपग्रह भी मिशन के साथ नष्ट हो गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रॉकेट में तकनीकी समस्या किस स्तर पर उत्पन्न हुई और आखिर ऐसी कौन सी गड़बड़ी थी जिसके कारण उड़ान के शुरुआती चरण में ही पूरा मिशन असफल हो गया।

    चीन ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी में तकनीकी असामान्यता को दुर्घटना की वजह बताया गया है लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि समस्या रॉकेट के इंजन ईंधन प्रणाली नियंत्रण प्रणाली या किसी अन्य महत्वपूर्ण हिस्से में थी। चीन के सरकारी मीडिया में हादसे को लेकर सीमित जानकारी सामने आई है। वहीं चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आए कुछ वीडियो की उपलब्धता भी सीमित दिखाई दी। ऐसे में हादसे की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर फिलहाल आधिकारिक जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

    लॉन्ग मार्च 7A को चीन के महत्वपूर्ण प्रक्षेपण वाहनों में गिना जाता है और इसे उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम का वर्कहॉर्स भी कहा जाता है। इसका विकास चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी ने किया है जो चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन की सहायक इकाई है। यह लॉन्ग मार्च 7A का 18वां मिशन था। इससे पहले वर्ष 2020 में अपनी पहली उड़ान के दौरान इसे असफलता का सामना करना पड़ा था लेकिन उसके बाद रॉकेट ने कई सफल मिशन पूरे किए थे। ऐसे में ताजा दुर्घटना चीन के लिए तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    चीन इस समय अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने में जुटा है। अमेरिका के साथ पुनः प्रयोज्य रॉकेट तकनीक उपग्रह प्रक्षेपण चंद्र मिशन और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वर्ष 2050 तक देश को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे समय में एक महत्वपूर्ण रॉकेट और संचार उपग्रह का एक साथ नष्ट होना उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बड़ा झटका है। अब जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी क्योंकि उनसे भविष्य के लॉन्ग मार्च मिशनों की सुरक्षा और विश्वसनीयता को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।

  • AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक

    AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक


    नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की वजह से बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को कहा कि AI क्रेडिट डिलीवरी को बदलने ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बैंकों से इस तकनीक को जिम्मेदारी और सोच समझकर अपनाने की अपील की। RBI गवर्नर के मुताबिक बैंकों को AI को केवल एक नई तकनीक या सीमित अवधि वाले प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे बैंकिंग के कामकाज और निर्णय लेने के नए तरीके के तौर पर अपनाना चाहिए।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित FIBAC 2026 कॉन्फ्रेंस में उद्घाटन भाषण देते हुए मल्होत्रा ने AI को भारतीय बैंकिंग के लिए निर्णायक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था की दिशा बदली थी और 2010 के दशक में डिजिटलाइजेशन ने वित्तीय सेवाओं का चेहरा बदल दिया था उसी तरह AI मौजूदा दशक में भारतीय बैंकिंग को नई दिशा दे सकता है। उनके मुताबिक AI का प्रभाव बैंकिंग के लगभग हर महत्वपूर्ण हिस्से पर पड़ने वाला है।

    RBI गवर्नर ने कहा कि AI को ऐसी तकनीक नहीं माना जाना चाहिए जिसे खरीदकर किसी एक परियोजना की तरह लागू कर दिया जाए और फिर काम खत्म समझ लिया जाए। इसके बजाय बैंकों को AI के इस्तेमाल की स्पष्ट रणनीति तैयार करनी होगी। जोखिम का आकलन करने से लेकर ग्राहकों को सेवाएं देने तक पूंजी की कीमत तय करने से लेकर संस्थानों के संचालन तक AI बैंकिंग के पारंपरिक तरीकों में बदलाव ला सकता है। यही वजह है कि बैंकों को इस तकनीक को अपनाने से पहले उसकी क्षमता और जोखिम दोनों को समझना होगा।

    AI का सबसे बड़ा असर क्रेडिट डिलीवरी के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। मौजूदा व्यवस्था में जिन ग्राहकों की औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती उनके लिए बैंक से कर्ज हासिल करना कई बार मुश्किल हो जाता है। AI विभिन्न प्रकार के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके ऐसे संभावित उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता का बेहतर आकलन करने में बैंकों की मदद कर सकता है। इससे उन लोगों तक भी औपचारिक बैंकिंग और ऋण सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है जो अब तक वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।

    ग्राहक अनुभव के स्तर पर भी AI बैंकिंग सेवाओं को तेज और अधिक व्यक्तिगत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ग्राहकों की जरूरतों को समझकर सेवाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने और बैंकिंग प्रक्रियाओं को आसान बनाने में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इससे बैंकिंग संस्थानों के लिए कामकाज की दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि RBI गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि AI को अपनाने की प्रक्रिया जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ानी होगी। बैंकों को यह तय करना होगा कि वे AI की दिशा खुद तय करते हैं या तकनीक को अपने हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था को बदलने देते हैं। उन्होंने कहा कि कई बैंक पहले से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि अन्य संस्थान इसकी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में AI को लेकर बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

    कुल मिलाकर RBI की ओर से दिया गया संदेश साफ है कि AI भारतीय बैंकिंग के भविष्य का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। यदि इसे पारदर्शिता सुरक्षा और जिम्मेदारी के साथ लागू किया जाता है तो यह कर्ज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने ग्राहक सेवाओं को बेहतर करने और देश में वित्तीय समावेशन को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • आयात पर निर्भरता घटाएगी सरकार की नई योजना, देश में बनेंगे कंटेनर और 53 हजार से ज्यादा नौकरियां

    आयात पर निर्भरता घटाएगी सरकार की नई योजना, देश में बनेंगे कंटेनर और 53 हजार से ज्यादा नौकरियां


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ी तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम यानी सीएमएएस के जरिए भारत में कंटेनर बनाने की क्षमता को मजबूत किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से देश में 53 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इनमें करीब 3000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल होंगे। इस योजना का असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इससे भारत के समुद्री परिवहन लॉजिस्टिक्स और निर्यात आयात से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के मुताबिक 10000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली सीएमएएस योजना कंटेनर निर्माण के क्षेत्र में निवेश तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगी। इसके तहत अलग अलग आकार के कंटेनर जहाजों के बेड़े के विकास और घरेलू स्तर पर कंटेनरों की खरीद को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 99149 करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। इससे देश में कंटेनर निर्माण के साथ साथ इससे जुड़े सहायक उद्योगों को भी फायदा होगा। कॉर्नर कास्टिंग लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पाद बनाने वाले उद्योगों में भी मांग बढ़ सकती है।

    भारत के लिए इस योजना की जरूरत इसलिए भी अहम है क्योंकि देश हर साल बड़ी संख्या में खाली कंटेनरों का आयात करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत अपनी जरूरतों और कंटेनरों की पुनःस्थिति के लिए हर साल करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से इस आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ साथ देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स की लागत तथा उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

    वैश्विक व्यापार में समुद्री परिवहन की भूमिका को देखते हुए कंटेनर किसी भी देश की सप्लाई चेन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन के अनुसार दुनिया के कुल माल व्यापार का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में कंटेनरों की पर्याप्त उपलब्धता वैश्विक व्यापार की गति बनाए रखने के लिए जरूरी है। हाल के वर्षों में भू राजनीतिक तनावों के कारण समुद्री मार्गों पर दबाव और माल ढुलाई की लागत में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे माहौल में भारत का घरेलू कंटेनर निर्माण पर जोर रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सरकार का कहना है कि सीएमएएस भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करेगी। यह योजना मेक इन इंडिया और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 जैसी पहलों के अनुरूप है। इसके जरिए देश की सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। सरकार पहले ही जहाज निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 70000 करोड़ रुपये के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की घोषणा कर चुकी है। अब कंटेनर निर्माण को प्रोत्साहन मिलने से भारत के समुद्री विनिर्माण क्षेत्र को और व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है। लंबे समय में यह कदम रोजगार बढ़ाने के साथ भारत को समुद्री निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला

    कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और बढ़ती महंगाई की चिंता के बीच दबाव में नजर आया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,154.25 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 112.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत फिसलकर 24,471.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा लेकिन कारोबारी सत्र के आखिरी हिस्से में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों के साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर रही। कच्चे तेल में तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है और यही चिंता बाजार के सेंटीमेंट पर हावी रही।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.17 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन के प्रमुख कमजोर सेक्टर रहे। इसके अलावा निफ्टी मेटल में 0.95 प्रतिशत निफ्टी इन्फ्रा में 0.86 प्रतिशत निफ्टी कमोडिटीज में 0.84 प्रतिशत निफ्टी कंजप्शन में 0.63 प्रतिशत निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स भी 0.44 प्रतिशत कमजोर रहा। इन सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की कुल कमजोरी को और बढ़ाया।

    हालांकि बाजार में कुछ ऐसे सेक्टर भी रहे जिन्होंने गिरावट को सीमित करने का काम किया। निफ्टी फार्मा 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख इंडेक्स में रहा। निफ्टी आईटी में 0.61 प्रतिशत निफ्टी हेल्थकेयर में 0.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने बाजार में जोखिम बढ़ने के बावजूद चुनिंदा रक्षात्मक और मजबूत कंपनियों में खरीदारी बनाए रखी।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कारोबार मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 11.85 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 63,843.85 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 43.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,857.15 पर पहुंच गया। सेंसेक्स में इटरनल इन्फोसिस टाइटन एचसीएल टेक और टीसीएस बढ़त के साथ बंद होने वाले प्रमुख शेयरों में रहे। इसके विपरीत अल्ट्राटेक सीमेंट एक्सिस बैंक इंडिगो भारती एयरटेल बजाज फाइनेंस पावर ग्रिड आईटीसी एमएंडएम टाटा स्टील एचयूएल एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व एलएंडटी सन फार्मा मारुति सुजुकी एसबीआई ट्रेंट एचडीएफसी बैंक टेक महिंद्रा एनटीपीसी आईसीआईसीआई बैंक कोटक महिंद्रा बैंक और बीईएल समेत कई दिग्गज शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को एक बार फिर महंगाई और ब्याज दरों के संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधान और अमेरिका ईरान बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। निवेशकों की नजर अब भारत और अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है क्योंकि इनके आधार पर आगे की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार नई दिशा तय कर सकता है। हालांकि विदेशी निवेश की मजबूत आवक और कंपनियों की बेहतर कमाई बाजार के लिए राहत देने वाले संकेत बने हुए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में वैश्विक घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • Fitch का भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम, BBB- रेटिंग बरकरार; FY27 में 6.4% GDP ग्रोथ का अनुमान

    Fitch का भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम, BBB- रेटिंग बरकरार; FY27 में 6.4% GDP ग्रोथ का अनुमान


    नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और ऊर्जा संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को BBB- पर स्थिर आउटलुक के साथ बरकरार रखा है। इसके साथ ही भारत की अल्पकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग F3 पर भी कायम रखी गई है। फिच का यह आकलन ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और भू राजनीतिक तनाव का असर कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर रेटिंग एजेंसी का भरोसा बना हुआ है।

    फिच के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत विकास क्षमता मौजूद है और पिछले कुछ वर्षों में देश ने अलग अलग आर्थिक झटकों का जिस तरह सामना किया है उससे इसकी लचीलापन क्षमता साबित हुई है। एजेंसी का मानना है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का भारत का रिकॉर्ड और नीतिगत विश्वसनीयता में सुधार आगे भी आर्थिक वृद्धि का आधार बनेगा। हालांकि ऊर्जा संकट के कारण निकट अवधि में कुछ चुनौतियां जरूर बनी हुई हैं लेकिन इनसे भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

    फिच ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष यानी FY27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह पिछले तीन वर्षों में दर्ज 7.4 प्रतिशत की औसत विकास दर से कम है लेकिन इसके बावजूद BBB रेटिंग वाले देशों की औसत विकास दर 2 प्रतिशत के मुकाबले भारत की अनुमानित वृद्धि तीन गुना से भी अधिक है। यही अंतर भारत की आर्थिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान देता है। एजेंसी का कहना है कि हाल के वर्षों में भारत ने कई तरह के आर्थिक और बाहरी झटकों के बावजूद अपनी मजबूती बनाए रखी है और आगे भी यही रुझान जारी रहने की उम्मीद है।

    हालांकि भारत के सामने कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। फिच ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितता को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। भारत दुनिया का एक बड़ा शुद्ध ऊर्जा आयातक है ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में तेजी का असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है। इसके बावजूद फिच को उम्मीद है कि ऊर्जा संकट से जुड़े जोखिम लंबे समय तक भारत की विकास संभावनाओं को प्रभावित नहीं करेंगे।

    महंगाई के मोर्चे पर भी फिच ने भारत को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक अनुमान दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में औसत महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रह सकती है जबकि FY26 में यह 2.1 प्रतिशत थी। ऊर्जा संकट के कारण महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका जरूर है लेकिन फिच के मुताबिक यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रहने की उम्मीद है। मुख्य महंगाई दर भी करीब 4 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी हुई है जिससे कीमतों के दबाव को लेकर फिलहाल बड़ी चिंता नहीं दिखाई दे रही है।
    महंगाई के मोर्चे पर भी फिच ने भारत को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक अनुमान दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में औसत महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रह सकती है जबकि FY26 में यह 2.1 प्रतिशत थी। ऊर्जा संकट के कारण महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका जरूर है लेकिन फिच के मुताबिक यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रहने की उम्मीद है। मुख्य महंगाई दर भी करीब 4 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी हुई है जिससे कीमतों के दबाव को लेकर फिलहाल बड़ी चिंता नहीं दिखाई दे रही है।

    फिच ने यह भी माना कि राजकोषीय नीति ने ऊर्जा संकट से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव को सीमित करने में मदद की है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक पर तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि एजेंसी का अनुमान है कि ऊर्जा संकट के दूसरे दौर के प्रभाव और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को देखते हुए आरबीआई साल के अंत में अपनी नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसी स्थिति में रेपो रेट 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    कुल मिलाकर फिच की ताजा रेटिंग भारत की आर्थिक मजबूती पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। विकास दर में कुछ कमी का अनुमान होने के बावजूद भारत की वृद्धि क्षमता अभी भी दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और समान रेटिंग वाले देशों से काफी बेहतर बनी हुई है। ऊर्जा कीमतों और वैश्विक तनाव जैसी चुनौतियों के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना आने वाले समय में भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

  • कागजी नोटों की जगह आएगी प्लास्टिक आधारित करेंसी? ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के ट्रायल को मिली मंजूरी

    कागजी नोटों की जगह आएगी प्लास्टिक आधारित करेंसी? ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के ट्रायल को मिली मंजूरी

    नई दिल्ली। भारत की करेंसी व्यवस्था में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। संसद में मंगलवार को दी गई जानकारी के मुताबिक दोनों मूल्यवर्गों में एक-एक अरब यानी कुल 2 अरब पॉलीमर नोटों को ट्रायल के लिए जारी करने की योजना को स्वीकृति मिली है। अगर यह परीक्षण सफल रहता है तो आने वाले समय में इन नोटों को नियमित रूप से प्रचलन में लाने का रास्ता साफ हो सकता है। इस कदम का उद्देश्य भारतीय मुद्रा को ज्यादा टिकाऊ बनाने के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना है।

    राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश के आधार पर आरबीआई ने आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 25 के तहत पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के मुताबिक ट्रायल के दौरान 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलीमर नोट तैयार किए जाएंगे। परीक्षण के नतीजे संतोषजनक रहने पर भविष्य में इन मूल्यवर्गों के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जा सकते हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पॉलीमर नोट आने के बाद पुराने कागजी नोटों को तत्काल बंद करने की योजना नहीं है। आरबीआई के अनुसार पॉलीमर बैंक नोटों को मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ समानांतर रूप से चलाने का प्रस्ताव है। यानी शुरुआती दौर में लोगों को कागजी और पॉलीमर दोनों तरह के 10 और 20 रुपये के नोट इस्तेमाल करने को मिल सकते हैं।

    पॉलीमर बैंक नोट खास तरह के प्लास्टिक आधारित पदार्थ से बनाए जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनका ज्यादा टिकाऊ होना है। सामान्य कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट नमी, धूल और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाली घिसावट को बेहतर तरीके से सहन कर सकते हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में पहले से पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में पॉलीमर बैंक नोट लंबे समय से प्रचलन में हैं।

    पॉलीमर नोटों की ज्यादा उम्र का सीधा फायदा करेंसी प्रबंधन पर भी पड़ सकता है। अगर नोट ज्यादा समय तक खराब हुए बिना चल सकें तो पुराने नोटों को बार-बार बदलने और नए नोट छापने की जरूरत कम हो सकती है। इसके अलावा पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल करना भी अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इससे नकली नोटों की समस्या पर नियंत्रण करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    हालांकि सरकार ने अभी पॉलीमर नोटों को आम जनता के बीच बड़े स्तर पर जारी करने की तारीख तय नहीं की है। वित्त मंत्री ने बताया कि आरबीआई की ओर से आवश्यक खरीद प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पॉलीमर नोट आम लोगों के हाथ में कब तक पहुंचेंगे और पूरी परियोजना पर कितना खर्च आएगा।

    आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि पॉलीमर नोटों को लेकर परीक्षण जारी है और बाजार में उतारने से पहले इनकी पूरी तरह जांच की जाएगी। केंद्रीय बैंक फील्ड ट्रायल के परिणामों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही बड़े स्तर पर पॉलीमर नोटों को जारी करने का अंतिम फैसला करेगा। आरबीआई का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाने का है।

    अगर फील्ड ट्रायल सफल रहता है और इसके बाद नियमित जारी करने की मंजूरी मिलती है तो भारत की मुद्रा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। फिलहाल 10 और 20 रुपये के 2 अरब पॉलीमर नोटों का परीक्षण इस दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में ट्रायल के परिणाम यह तय करेंगे कि भारत में प्लास्टिक आधारित करेंसी का इस्तेमाल कितने बड़े स्तर तक बढ़ाया जाएगा।

  • डीयू में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 74 पदों पर भर्ती, 20 अगस्त तक करें आवेदन

    डीयू में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 74 पदों पर भर्ती, 20 अगस्त तक करें आवेदन


    नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर नौकरी की तलाश कर रहे योग्य अभ्यर्थियों के लिए शानदार अवसर सामने आया है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने विभिन्न विभागों में कुल 74 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें एसोसिएट प्रोफेसर के 48 और प्रोफेसर के 26 पद शामिल हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 20 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    एसोसिएट प्रोफेसर के 48 पदों में रसायन विज्ञान के 4, पर्यावरण अध्ययन के 3, आनुवंशिकी के 2, भू-विज्ञान के 4, हिंदी के 4, भाषा-विज्ञान के 6, ऑपरेशनल रिसर्च के 3, दर्शनशास्त्र के 16 और प्राणी-विज्ञान के 6 पद शामिल हैं। वहीं प्रोफेसर के 26 पदों में रसायन विज्ञान के 6, पर्यावरण अध्ययन के 2, आनुवंशिकी का 1, भू-विज्ञान के 3, हिंदी के 3, भाषा-विज्ञान के 2, ऑपरेशनल रिसर्च का 1, दर्शनशास्त्र के 4 और प्राणी-विज्ञान के 4 पद हैं।

    एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री और संबंधित या प्रासंगिक विषय में पीएचडी होनी चाहिए। इसके साथ ही अच्छा शैक्षणिक रिकॉर्ड और विश्वविद्यालय, कॉलेज या मान्यता प्राप्त शोध संस्थान अथवा उद्योग में असिस्टेंट प्रोफेसर के समकक्ष पद पर कम से कम आठ वर्ष का शिक्षण या शोध अनुभव जरूरी है। उम्मीदवार के पास पीयर-रिव्यू या यूजीसी सूचीबद्ध जर्नल में कम से कम सात शोध प्रकाशन भी होने चाहिए।

    प्रोफेसर पद के लिए संबंधित या प्रासंगिक विषय में पीएचडी के साथ उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य का रिकॉर्ड जरूरी है। उम्मीदवार के पास पीयर-रिव्यू या यूजीसी सूचीबद्ध जर्नल में कम से कम 10 शोध प्रकाशन और विश्वविद्यालय या कॉलेज में शिक्षण अथवा राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में शोध का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। डॉक्टरेट विद्यार्थियों को सफलतापूर्वक गाइड करने का अनुभव भी पात्रता का हिस्सा है। निर्धारित योग्यता रखने वाले संबंधित क्षेत्र के उत्कृष्ट प्रोफेशनल भी शर्तों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

    इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन आवेदन की स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग के बाद इंटरव्यू सहित निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। प्रोफेसर पद पर चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के वेतन मैट्रिक्स के लेवल-14 के अनुसार वेतन मिलेगा, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर का वेतन लेवल-13ए के अनुसार निर्धारित होगा।

    आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार शुल्क भी जमा करना होगा। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 2,000 रुपये है। ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और महिला उम्मीदवारों के लिए 1,500 रुपये, एससी और एसटी अभ्यर्थियों के लिए 1,000 रुपये तथा पीडब्ल्यूबीडी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

    उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले संबंधित आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपनी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, विषयवार पद और अन्य पात्रता शर्तों को ध्यान से जांच लेना चाहिए। आवेदन की अंतिम तारीख 20 अगस्त 2026 है, इसलिए योग्य उम्मीदवार अंतिम समय की तकनीकी परेशानी से बचने के लिए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

  • क्रिकेट जगत में मचा हड़कंप, अभिषेक पोरेल रेप के आरोप में गिरफ्तार; शादी का झांसा देने का है मामला

    क्रिकेट जगत में मचा हड़कंप, अभिषेक पोरेल रेप के आरोप में गिरफ्तार; शादी का झांसा देने का है मामला


    नई दिल्ली। आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल को मंगलवार सुबह कर्नाटक के हुबली में पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप से जुड़े मामले में की गई है। पुलिस के अनुसार मामले की शिकायत एक युवती ने 23 जून को मोगरा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। युवती कर्नाटक में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अब क्रिकेटर की गिरफ्तारी की गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिकायतकर्ता और अभिषेक पोरेल के बीच तीन साल से ज्यादा समय तक संबंध रहे। आरोप है कि दोनों ने शादी करने की योजना भी बनाई थी और साथ में विदेश यात्रा भी की थी। हालांकि बाद में दोनों के रिश्ते में विवाद शुरू हो गया। बताया गया है कि करीब डेढ़ साल पहले दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था। उस समय कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। बाद में युवती ने पुलिस के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए हुगली ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कुंवर भूषण सिंह मोगरा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। इसके बाद डीएसपी क्राइम अभिजीत सिन्हा महापात्रा ने स्थानीय थाना प्रभारी से मामले की जानकारी ली और जांच को लेकर जरूरी निर्देश दिए। पुलिस ने जांच के दौरान अभिषेक पोरेल से पूछताछ और उनकी तलाश के लिए चंदननगर स्थित उनके घर पर कई बार पहुंचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के पहुंचने के समय क्रिकेटर वहां मौजूद नहीं मिले।

    इसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट की ओर से पुलिस को अभिषेक पोरेल की गिरफ्तारी का निर्देश दिया गया। इसके बाद मोगरा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए क्रिकेटर को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें चिनसुराह कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले में पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

    अभिषेक पोरेल भारतीय घरेलू क्रिकेट के साथ आईपीएल में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। वह वर्ष 2023 से दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के लिए अब तक 35 मैच खेले हैं और 25.63 की औसत से 769 रन बनाए हैं। उनके नाम चार अर्धशतक भी दर्ज हैं। घरेलू क्रिकेट में वह 32 फर्स्ट क्लास और 23 लिस्ट-ए मुकाबले भी खेल चुके हैं।

    फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही मामले के सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी। अभिषेक पोरेल को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

  • विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ रचा बड़ा रिकॉर्ड, 610 रन के साथ टॉप पर; जयसूर्या 571 और सहवाग 491 रन

    विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ रचा बड़ा रिकॉर्ड, 610 रन के साथ टॉप पर; जयसूर्या 571 और सहवाग 491 रन


    नई दिल्ली।  भारत और श्रीलंका के बीच 2 टेस्ट मैचों की आगामी सीरीज को लेकर क्रिकेट फैंस की नजरें दोनों टीमों के स्टार खिलाड़ियों पर टिकी हैं। भारतीय टीम श्रीलंका पहुंच चुकी है और सीरीज का पहला टेस्ट 15 अगस्त से खेला जाएगा, जबकि दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो में होने वाला है। भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट क्रिकेट में हमेशा बल्लेबाजों का खास दबदबा रहा है और दोनों देशों के बीच किसी एक टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भारतीय दिग्गज विराट कोहली के नाम दर्ज है। यही वजह है कि मौजूदा सीरीज शुरू होने से पहले एक बार फिर विराट के इस शानदार रिकॉर्ड की चर्चा तेज हो गई है।

    विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ भारत में खेली गई 2017-18 की तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में बल्ले से जबरदस्त प्रदर्शन किया था। उन्होंने सीरीज की पांच पारियों में तीन शतक और एक अर्धशतक की मदद से कुल 610 रन बनाए थे। इस दौरान विराट का बल्लेबाजी औसत 152.50 रहा था और उनका सर्वोच्च स्कोर 243 रन था। विराट की इस शानदार बल्लेबाजी के दम पर वह भारत और श्रीलंका के बीच किसी एक टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। 610 रन का यह आंकड़ा आज भी दोनों देशों के बीच एक टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक रन का रिकॉर्ड है।

    इस रिकॉर्ड लिस्ट में दूसरे नंबर पर श्रीलंका के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज सनथ जयसूर्या का नाम आता है। जयसूर्या ने 1997 में श्रीलंका की धरती पर भारत के खिलाफ खेली गई दो टेस्ट मैचों की सीरीज में तीन पारियों में कुल 571 रन बनाए थे। उन्होंने इस सीरीज में दो शानदार शतक लगाए थे और उनका बल्लेबाजी औसत 190.33 रहा था। जयसूर्या के प्रदर्शन की सबसे खास बात उनकी ऐतिहासिक 340 रन की पारी रही थी। यह उनके टेस्ट करियर का सर्वोच्च स्कोर भी रहा। इस पारी के दम पर जयसूर्या ने भारत के खिलाफ उस सीरीज में ऐसा प्रदर्शन किया था जिसे लंबे समय तक याद किया गया।

    वहीं इस सूची में तीसरे स्थाSanath Jayasuriya, Virender Sehwag, Shubman Gill, KL Rahul, Yashasvi Jaiswal, Cricket News, Test Cricketन पर भारत के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग हैं। सहवाग ने भारत में 2009-10 के दौरान श्रीलंका के खिलाफ खेली गई तीन टेस्ट मैचों की सीरीज की चार पारियों में 491 रन बनाए थे। सहवाग ने इस सीरीज में दो शतक और एक अर्धशतक लगाया था। उनका बल्लेबाजी औसत 122.75 रहा था। सहवाग के लिए इस सीरीज का सबसे यादगार पल उनका 293 रन का स्कोर रहा, हालांकि वह तिहरा शतक पूरा करने से सिर्फ सात रन दूर रह गए थे।
    वहीं इस सूची में तीसरे स्थाSanath Jayasuriya, Virender Sehwag, Shubman Gill, KL Rahul, Yashasvi Jaiswal, Cricket News, Test Cricketन पर भारत के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग हैं। सहवाग ने भारत में 2009-10 के दौरान श्रीलंका के खिलाफ खेली गई तीन टेस्ट मैचों की सीरीज की चार पारियों में 491 रन बनाए थे। सहवाग ने इस सीरीज में दो शतक और एक अर्धशतक लगाया था। उनका बल्लेबाजी औसत 122.75 रहा था। सहवाग के लिए इस सीरीज का सबसे यादगार पल उनका 293 रन का स्कोर रहा, हालांकि वह तिहरा शतक पूरा करने से सिर्फ सात रन दूर रह गए थे।

    अब भारत और श्रीलंका के बीच एक और टेस्ट सीरीज होने जा रही है और इस बार भी बल्लेबाजों पर खास नजर रहेगी। भारतीय टीम की तरफ से शुभमन गिल, केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल जैसे बल्लेबाज बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। वहीं श्रीलंका की ओर से लाहिरू उदारा, कामिंदु मेंडिस, कप्तान धनंजय डी सिल्वा और कुसल मेंडिस भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।

    भारत-श्रीलंका टेस्ट मुकाबलों में बल्लेबाजों का इतिहास शानदार रहा है। अब देखना होगा कि आगामी सीरीज में कौन सा बल्लेबाज अपनी बल्लेबाजी से नया रिकॉर्ड बनाता है और क्या कोई खिलाड़ी विराट कोहली के 610 रन के आंकड़े के करीब पहुंच पाता है।