Author: bharati

  • हज यात्रियों को बड़ी राहत, अग्रिम राशि जमा करने की तारीख बढ़ी; अब 17 अगस्त तक जमा होंगे ₹1.52 लाख

    हज यात्रियों को बड़ी राहत, अग्रिम राशि जमा करने की तारीख बढ़ी; अब 17 अगस्त तक जमा होंगे ₹1.52 लाख


    भोपाल  भोपाल सहित मध्य प्रदेश के हज यात्रियों के लिए अहम खबर सामने आई है। हज-2027 के लिए प्रोविजनल रूप से चयनित यात्रियों को अग्रिम हज राशि जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। हज कमेटी ऑफ इंडिया ने राशि जमा करने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर अब 17 अगस्त 2026 कर दिया है। इससे उन यात्रियों को राहत मिली है जो निर्धारित समय तक भुगतान नहीं कर पाए थे। पहले अग्रिम हज राशि जमा करने की अंतिम तारीख 10 अगस्त 2026 तय की गई थी, जिसे अब एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। मध्य प्रदेश राज्य हज कमेटी ने सभी चयनित यात्रियों से अपील की है कि वे नई समय सीमा का ध्यान रखते हुए निर्धारित राशि समय पर जमा कर दें, ताकि उनकी हज यात्रा की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

    हज कमेटी ऑफ इंडिया के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से प्राप्त पत्र के अनुसार हज-2027 के लिए प्रोविजनल रूप से चयनित प्रत्येक हज यात्री को अग्रिम हज राशि के रूप में 1 लाख 52 हजार 300 रुपये जमा करने होंगे। यात्रियों के लिए भुगतान की कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। चयनित यात्री क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से हज कमेटी की वेबसाइट अथवा हज सुविधा ऐप पर जाकर राशि जमा कर सकते हैं। इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की किसी भी शाखा में निर्धारित पे-इन-स्लिप के जरिए भी भुगतान किया जा सकता है।

    बैंक के माध्यम से भुगतान करने वाले यात्रियों को एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया का ध्यान रखना होगा। राशि जमा करने के बाद बैंक रेफरेंस नंबर दर्ज करना जरूरी होगा। यात्रियों को सलाह दी गई है कि भुगतान के बाद मिलने वाली रसीद और संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखें, क्योंकि आगे की हज प्रक्रिया में इनकी जरूरत पड़ सकती है।

    राज्य हज कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन यात्रियों ने शॉर्ट हज पैकेज का विकल्प चुना है, उन्हें भी अग्रिम हज राशि जमा करने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। यानी शॉर्ट पैकेज चुनने वाले चयनित यात्रियों को भी 17 अगस्त 2026 तक 1 लाख 52 हजार 300 रुपये की राशि जमा करनी होगी। किसी भी श्रेणी के चयनित यात्री को भुगतान की अंतिम तारीख को लेकर भ्रम में नहीं रहना चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं करने वाले यात्रियों की प्रोविजनल हज सीट रद्द की जा सकती है। हज कमेटी ने स्पष्ट किया है कि 17 अगस्त 2026 तक अग्रिम हज राशि जमा नहीं करने पर चयनित यात्री की सीट बिना किसी अतिरिक्त सूचना के रद्द की जा सकती है। ऐसे में चयनित यात्रियों को आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते भुगतान पूरा करने की सलाह दी गई है।

    मध्य प्रदेश राज्य हज कमेटी के अनुसार राशि जमा करने और आगे की प्रक्रिया से संबंधित जरूरी दिशा-निर्देश समय-समय पर जारी किए जाएंगे। चयनित यात्री हज कमेटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट और हज सुविधा ऐप के माध्यम से भुगतान तथा हज यात्रा से जुड़ी नवीनतम जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हज-2027 के लिए चयनित यात्रियों के लिए यह तारीख बढ़ना राहत की खबर जरूर है, लेकिन अब 17 अगस्त की समय सीमा का पालन करना बेहद जरूरी होगा।

  • भोपाल के होटल में पुलिसकर्मी बनकर घुसे चार लोग, युवक-युवती को केस में फंसाने की धमकी देकर ऐंठे 70 हजार

    भोपाल के होटल में पुलिसकर्मी बनकर घुसे चार लोग, युवक-युवती को केस में फंसाने की धमकी देकर ऐंठे 70 हजार


    नई दिल्ली। भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र में एक होटल के कमरे में युवक और युवती से कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर पैसे वसूलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि चार लोग सामान्य कपड़ों में होटल के कमरे में पहुंचे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर युवक-युवती से पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद दोनों को केस में फंसाने और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया गया। इसी दबाव के बीच आरोपियों ने युवक से करीब 60 से 70 हजार रुपये ऐंठ लिए। घटना की शिकायत मिलने के बाद पिपलानी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस के मुताबिक घटना 3 अगस्त की शाम करीब 6 बजे की है। बरखेड़ी खुर्द निवासी युवक पिपलानी इलाके के एक होटल में युवती के साथ कमरे में मौजूद था। इसी दौरान चार लोग कमरे में पहुंचे। आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और युवक-युवती से पूछताछ करने लगे। अचानक कमरे में इस तरह पहुंचने और खुद को पुलिसकर्मी बताने के कारण दोनों घबरा गए। आरोपियों ने उन्हें कथित तौर पर कार्रवाई और केस में फंसाने की धमकी दी।

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने युवक पर दबाव बनाया। इसी दौरान उनमें से एक व्यक्ति ने खुद को मदद करने वाला बताते हुए मामले को खत्म कराने और युवक-युवती को कार्रवाई से बचाने की बात कही। आरोप है कि इसी बहाने युवक से करीब 60 से 70 हजार रुपये वसूल लिए गए। घटना के बाद युवक ने पिपलानी थाने पहुंचकर पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। हालांकि शिकायत घटना के करीब चार से पांच दिन बाद दर्ज कराई गई।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अबूजर, रघुवीर और करुणा शाही के रूप में हुई है। वहीं चौथा आरोपी यावर अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया था और मंगलवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया जाना है।

    इस मामले में पुलिस को केवल फर्जी पुलिसकर्मी बनकर वसूली किए जाने का शक ही नहीं है बल्कि पूरे घटनाक्रम के पीछे पहले से बनाई गई किसी साजिश की आशंका भी जांच के दायरे में है। प्रारंभिक जांच में पुलिस हनीट्रैप जैसी साजिश के एंगल से भी मामले को देख रही है। हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि युवक को होटल तक बुलाने या फिर आरोपियों के कमरे में पहुंचने के पीछे कोई सुनियोजित योजना थी।

    पुलिस उस युवती की भूमिका की भी जांच कर रही है जिसके साथ युवक होटल के कमरे में था। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि युवती की आरोपियों से पहले से कोई पहचान या संपर्क था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या युवती को पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी या वह भी इस कथित साजिश का हिस्सा थी। फिलहाल उसकी भूमिका को लेकर पुलिस ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है।

    जांच के दौरान पुलिस होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन और उनके आपसी संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी अचानक होटल पहुंचे थे या पहले से युवक-युवती पर नजर रखी जा रही थी। आरोपियों ने सामान्य कपड़े पहन रखे थे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर कार्रवाई का भय पैदा किया था।

    फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी है। साथ ही युवती की भूमिका और कथित हनीट्रैप एंगल की भी जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

  • MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी

    MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी


    भोपाल मध्य प्रदेश में पिछले करीब 60 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में बारिश अब राहत के साथ आफत भी बनती दिखाई दे रही है। प्रदेश की नर्मदा काली सिंध और बेतवा समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। कई जगह नदी नालों का जलस्तर बढ़ने से रास्ते प्रभावित हुए हैं तो कुछ इलाकों में पुल और सड़कें पानी में डूब गई हैं। दूसरी ओर लंबे समय से पानी की कमी और सूखे जैसे हालात से जूझ रहे बांधों में तेजी से पानी पहुंचने लगा है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्रोतों में नई उम्मीद जगी है।

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 498.3 मिलीमीटर यानी करीब 19.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। हालांकि यह सामान्य बारिश के आंकड़े 579.7 मिलीमीटर यानी करीब 22.8 इंच से अभी 3.2 इंच कम है। प्रदेश में अब तक करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। इसके बावजूद पिछले दो दिनों से सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम ने प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को जमकर भिगो दिया है।

    भोपाल में रुक रुककर हो रही बारिश से शहर का मौसम पूरी तरह बदल गया है। सुबह से बारिश और बादलों के कारण कई इलाकों में धुंध जैसा नजारा देखने को मिला। राजधानी की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब में भी लगातार पानी की आवक बनी हुई है। पिछले दो दिनों में बड़े तालाब का जलस्तर करीब तीन फीट बढ़ा है और यह 1663 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल भराव क्षमता 1666.80 फीट बताई जा रही है। यानी तालाब को अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में अब करीब चार फीट पानी की जरूरत रह गई है। बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़े तालाब के जल्द लबालब होने की उम्मीद बढ़ गई है।

    भोपाल के कोलार केरवा और कलियासोत डैम में भी पानी का स्तर बढ़ा है। कोलार डैम का अधिकतम जलस्तर 1516.40 फीट है और मंगलवार दोपहर तक यहां 1496.65 फीट पानी दर्ज किया गया। केरवा डैम में जलस्तर 1652.52 फीट पहुंच चुका है जबकि इसकी क्षमता 1673 फीट है। दो दिनों में केरवा में करीब तीन फीट पानी बढ़ा है। वहीं कलियासोत डैम का जलस्तर 1650.09 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल क्षमता 1659 फीट है। आने वाले समय में कैचमेंट एरिया में तेज बारिश होने पर इन बांधों में पानी की आवक और बढ़ सकती है।

    बारिश का असर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी साफ नजर आया। रायसेन के सेमरा स्थित सरकारी स्कूल में कमर तक पानी भर गया। सांची रोड और भोपाल रोड पर बेतवा नदी के छोटे पुल पानी में डूब गए। शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक बारिश का पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। इसी जिले में बारिश के पानी से भरे गड्ढे में स्कूल वैन फंस गई और बच्चों ने पत्थर डालकर उसे निकालने की कोशिश की।

    सीहोर में मूसलाधार बारिश के कारण एक मकान पानी से घिर गया और परिवार के फंसने की सूचना पर पुलिस तथा ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में मंदिर और दुकानों में पानी भर गया। वहीं इच्छावर में श्मशान घाट तक पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को शव को कंधे पर लेकर नदी पार करनी पड़ी।

    नर्मदा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदी उफान पर है और नर्मदा से जुड़े बांधों में पानी की आवक बढ़ी है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर डैम में भी जलस्तर बढ़ने की खबर है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। मऊगंज में सेलार नदी के बढ़े जलप्रवाह के कारण करीब 650 फीट की ऊंचाई से गिरती दूधिया जलधारा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    कुल मिलाकर दो दिन पहले तक सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे मध्य प्रदेश में बारिश ने तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। नदियों और बांधों में बढ़ता पानी जहां किसानों और जलस्रोतों के लिए राहत की खबर है वहीं निचले इलाकों में जलभराव और नदी नालों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि प्रदेश में जल संकट की चिंता कितनी कम होती है और किन इलाकों में भारी बारिश नई चुनौती बनती है।

  • मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं बदलता मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान तापमान में उतार चढ़ाव नमी बढ़ने और जगह जगह पानी जमा होने के कारण संक्रमण फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाती हैं। यही वजह है कि इन दिनों वायरल बुखार सर्दी जुकाम खांसी गले में खराश सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। खासतौर पर बच्चे बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर को तापमान के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी हो सकती है और संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।

    वायरल बुखार होने पर आमतौर पर शरीर का तापमान बढ़ना थकान कमजोरी सिरदर्द बदन दर्द ठंड लगना भूख कम लगना और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में खांसी और नाक बहने की समस्या भी हो सकती है। हालांकि हर बुखार वायरल ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। डेंगू मलेरिया टाइफाइड और अन्य संक्रमणों में भी बुखार हो सकता है इसलिए लगातार तेज बुखार रहने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए क्योंकि संक्रमण फैलाने वाले वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर में किसी व्यक्ति को सर्दी खांसी या बुखार हो तो उसके साथ बहुत नजदीकी संपर्क से बचना और जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना भी संक्रमण के प्रसार को कम कर सकता है।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से बचना चाहिए। गीले कपड़े तुरंत बदलकर शरीर को अच्छी तरह सुखाना बेहतर होता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। कूलर गमले छत और आसपास की खाली जगहों में जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। इससे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

    अगर बुखार हो जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि हर बुखार का कारण बैक्टीरियल संक्रमण नहीं होता। यदि बुखार कई दिनों तक बना रहे बहुत तेज हो जाए या उसके साथ सांस लेने में परेशानी लगातार उल्टी अत्यधिक कमजोरी बेहोशी त्वचा पर दाने या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर बारिश और बदलते मौसम में वायरल बुखार से बचाव के लिए साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद सुरक्षित पानी और आसपास की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मानसून का मौसम स्वस्थ रहते हुए बिताया जा सकता है।

  • वास्तु के ये आसान उपाय घर में ला सकते हैं सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा जानें किन बातों का रखें ध्यान

    वास्तु के ये आसान उपाय घर में ला सकते हैं सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा जानें किन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर में मौजूद सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का असर परिवार के सदस्यों के जीवन पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि लोग घर बनवाने से लेकर सामान रखने तक वास्तु के नियमों का ध्यान रखते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिर भी कई लोग मानसिक शांति और घर के वातावरण को बेहतर बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करते हैं।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है। मुख्य दरवाजे के आसपास साफ सफाई रखना शुभ माना जाता है। दरवाजे के सामने कूड़ा कबाड़ या अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है। सुबह के समय मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को साफ रखना भी अच्छा माना जाता है।

    घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण को वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता के अनुसार इस दिशा को पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। यदि घर में पूजा स्थान बनाया जा रहा है तो उसे साफ और शांत जगह पर रखना बेहतर माना जाता है। पूजा घर के आसपास भारी सामान जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    वास्तु में रसोई की दिशा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार दक्षिण पूर्व दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। रसोई में साफ सफाई रखने और गैस चूल्हे के आसपास अनावश्यक सामान नहीं रखने की सलाह दी जाती है। भोजन बनाने और रखने की जगह व्यवस्थित होने से घर का वातावरण भी साफ सुथरा बना रहता है।

    सोने के कमरे को लेकर भी कई वास्तु नियम बताए जाते हैं। मान्यता है कि सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना बेहतर होता है। वहीं कमरे में बहुत ज्यादा सामान रखने से बचना चाहिए। बिस्तर के आसपास अव्यवस्था रहने से मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है। इसलिए कमरे को साफ और व्यवस्थित रखना अच्छी आदत मानी जाती है।

    घर में टूटे हुए सामान को लंबे समय तक संभालकर रखना भी वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता। बंद घड़ी टूटे शीशे खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान और बेकार वस्तुओं को घर से हटाने की सलाह दी जाती है। इससे घर व्यवस्थित रहता है और अनावश्यक सामान के कारण होने वाली अव्यवस्था भी कम होती है।

    वास्तु में पौधों को भी सकारात्मक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। घर में हरे पौधे लगाने से वातावरण सुंदर और ताजा दिखाई देता है। हालांकि पौधों को रखने की जगह का चुनाव करते समय उनकी धूप और पानी की जरूरत का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    घर में पर्याप्त रोशनी और हवा का आना भी बेहद जरूरी है। खिड़कियां बंद रखने और घर में अंधेरा बनाए रखने के बजाय दिन के समय प्राकृतिक रोशनी और हवा को अंदर आने देना चाहिए। इससे घर का वातावरण अधिक आरामदायक और खुशनुमा बना रह सकता है।

    कुल मिलाकर वास्तु के नियमों का मुख्य उद्देश्य घर को व्यवस्थित शांत और सकारात्मक बनाए रखना माना जाता है। साफ सफाई सही दिशा में सामान की व्यवस्था पर्याप्त रोशनी और प्राकृतिक हवा जैसी अच्छी आदतें किसी भी घर के वातावरण को बेहतर बना सकती हैं। वास्तु उपायों को अपनाते समय अपनी सुविधा और व्यावहारिक जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है।

  • पुतिन के बड़े सैन्य प्लान से मचा हड़कंप, 5 लाख सैनिकों की तैयारी के बीच यूक्रेन युद्ध में परमाणु हमले का खतरा?

    पुतिन के बड़े सैन्य प्लान से मचा हड़कंप, 5 लाख सैनिकों की तैयारी के बीच यूक्रेन युद्ध में परमाणु हमले का खतरा?


    नई दिल्ली। यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध अब एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने खुफिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया है कि रूस बड़े पैमाने पर नए लड़ाकों को जुटाने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में करीब पांच लाख लोगों को सैन्य अभियान में शामिल करने की योजना बनाई जा सकती है। अगर यह दावा सही साबित होता है तो युद्ध की दिशा और उसकी तीव्रता दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    जेलेंस्की के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध रोकने की तैयारी में नहीं हैं बल्कि संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर मोबिलाइजेशन की योजना बना रहे हैं। यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रक्रिया सितंबर में होने वाले रूसी संसदीय चुनावों के बाद शुरू की जा सकती है। जेलेंस्की का दावा है कि रूस इस बार खुले तौर पर बड़ी संख्या में लोगों की भर्ती करने से बच सकता है क्योंकि इससे रूसी समाज में असंतोष बढ़ने का खतरा है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को कम समय में पर्याप्त सैन्य प्रशिक्षण देना मुश्किल होगा। ऐसे में बड़ी संख्या में कम प्रशिक्षित सैनिकों को युद्ध के मैदान में भेजे जाने की आशंका है। इससे संघर्ष और ज्यादा खूनी हो सकता है और दोनों पक्षों में जनहानि बढ़ सकती है। जेलेंस्की के अनुसार रूस की ऐसी तैयारी इस बात का संकेत है कि मॉस्को फिलहाल युद्ध को समाप्त करने के बजाय सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    इसी बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भी यूक्रेन युद्ध को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर यूक्रेन रूसी क्षेत्र के भीतर लंबी दूरी के हमलों को और प्रभावी बनाता है और युद्ध की पारंपरिक सीमाएं लगातार टूटती जाती हैं तो रूस अपने सबसे खतरनाक विकल्पों पर विचार कर सकता है। फिदान ने परमाणु हथियारों की आशंका का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।

    रूस और यूक्रेन के बीच हाल के दिनों में लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमलों में भी तेजी देखी गई है। रूस के तातारस्तान क्षेत्र में हुए एक यूक्रेनी ड्रोन हमले में कई लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। इसे रूस के भीतर हुए गंभीर हमलों में से एक माना जा रहा है। दूसरी ओर यूक्रेन के खार्किव क्षेत्र में रूसी हमले में भी लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

    रूस और यूक्रेन दोनों ही एक दूसरे के इलाकों में लगातार ड्रोन हमले कर रहे हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है जबकि यूक्रेन ने भी रूस की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन दागे जाने की बात कही है। दोनों पक्षों के इन दावों के बीच जमीन से लेकर आसमान तक संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है।

    अगर रूस वास्तव में पांच लाख नए लड़ाकों को जुटाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और पश्चिमी देशों की सैन्य रणनीति में भी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि युद्ध और ज्यादा गहरा हुआ तो परमाणु हथियारों की आशंका भी अंतरराष्ट्रीय तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकती है। फिलहाल पांच लाख सैनिकों की संभावित लामबंदी का दावा यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है लेकिन इस खबर ने रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर पूरी दुनिया की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • मोजतबा खामेनेई को लेकर अटकलों के बीच बड़ा अपडेट, पेजेशकियन से मुलाकात में बनी आगे की रणनीति

    मोजतबा खामेनेई को लेकर अटकलों के बीच बड़ा अपडेट, पेजेशकियन से मुलाकात में बनी आगे की रणनीति


    नई दिल्ली। ईरान में जारी गंभीर संकट और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ लंबी बैठक की है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब मोजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने को लेकर लगातार कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। राष्ट्रपति पेजेशकियन के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच करीब सात घंटे तक बातचीत हुई और इस दौरान देश की आंतरिक स्थिति से लेकर आर्थिक चुनौतियों और अमेरिका के दबाव तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।

    पेजेशकियन ने एक इंटरव्यू में बताया कि बैठक में सबसे ज्यादा जोर ईरान के भीतर एकता बनाए रखने पर रहा। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल बाहरी दबाव नहीं बल्कि आंतरिक मतभेद भी हैं। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि विरोधी ताकतें देश में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर सकती हैं और ऐसे समय में राजनीतिक नेतृत्व तथा जनता के बीच सहयोग बेहद जरूरी है।

    मोजतबा खामेनेई को मार्च में ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था। उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल से जुड़े हमले में मौत के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी मिली थी। पद संभालने के बाद से मोजतबा की सार्वजनिक मौजूदगी बेहद सीमित रही है। इसी वजह से उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कई तरह की अटकलें भी सामने आती रही हैं। राष्ट्रपति के साथ उनकी यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान अमेरिका के साथ बेहद तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है।

    बैठक में आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों पर भी चर्चा हुई। पेजेशकियन के अनुसार बाजार की स्थिति रोजगार आवास और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पैदा हो रही आर्थिक दिक्कतें प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं। ईरानी नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि बाहरी दबाव के बीच देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की जरूरतों को किस तरह संभाला जाए।

    अमेरिका के साथ विवाद में ईरान ने अपना रुख भी काफी सख्त रखा है। ईरान चाहता है कि उसके बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी खत्म की जाए। इसके अलावा युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा आर्थिक प्रतिबंध हटाने और विदेशों में जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने की मांग भी की गई है। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इन मुद्दों पर समाधान के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से खोलने का फैसला आसान नहीं होगा।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में जारी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ईरान ओमान के साथ भी जलमार्ग से जुड़ी आवाजाही को लेकर बातचीत कर रहा है।

    इसी बीच ईरान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहसेन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का प्रमुख बनाया गया है। लंबे समय तक रिवोल्यूशनरी गार्ड का नेतृत्व कर चुके रेजाई को सख्त रुख के लिए जाना जाता है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि यदि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रही तो अमेरिकी सैनिकों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान फिलहाल आंतरिक एकता आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना बनी हुई है लेकिन ईरान अपनी शर्तों पर समझौते की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में मोजतबा खामेनेई की रणनीति और होर्मुज को लेकर ईरान का फैसला पूरे क्षेत्र की राजनीति और वैश्विक बाजार के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

  • अमेरिका ईरान से क्यों मांग रहा मुआवजा? ट्रंप ने रखी लंबी सूची, शांति वार्ता पर भी डाला नया दबाव

    अमेरिका ईरान से क्यों मांग रहा मुआवजा? ट्रंप ने रखी लंबी सूची, शांति वार्ता पर भी डाला नया दबाव


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब मुआवजे का मुद्दा उठाकर विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर सकता है तो अमेरिका भी उससे मुआवजा मांग सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साफ संकेत दिया कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनके इस रुख से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें यह विचार दिलचस्प लगा कि ईरान हालिया संघर्ष में हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। इसी आधार पर उन्होंने अमेरिका की ओर से भी ईरान से मुआवजा मांगने की बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान से जुड़े संघर्षों में कई अमेरिकी नागरिकों और सैन्यकर्मियों की जान गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि ऐसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए।

    अपने बयान में ट्रंप ने पुराने हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यमन के बंदरगाह पर अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए घातक हमले का हवाला दिया। अक्टूबर 2000 में हुए इस हमले में 17 अमेरिकी नाविकों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी अलकायदा पर डाली गई थी। ट्रंप ने इसके अलावा जनरल कासिम सुलेमानी से जुड़े घटनाक्रम और दूसरे संघर्षों में मारे गए लोगों का भी जिक्र किया।

    ट्रंप ने कहा कि पिछले कई दशकों के दौरान विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न संघर्षों में मारे गए लोगों के परिवारों को भी मुआवजे की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने पिछले पांच महीनों में मारे गए हजारों लोगों के परिजनों के लिए भी नुकसान की भरपाई की बात कही। हालांकि इन दावों और मुआवजे की संभावित प्रक्रिया को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को इस मुद्दे को भविष्य की बातचीत में शामिल करने के निर्देश दे दिए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और संभावित समझौते को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं। ट्रंप ने इससे पहले संकेत दिया था कि वह सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकते हैं।

    दूसरी ओर ईरान भी अमेरिका के सामने अपनी कई शर्तें रख रहा है। ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में जारी नाकाबंदी हटाने के साथ युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फंसी संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें उठाई गई हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट रखा है और अमेरिका से क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप कम करने की मांग की है।

    ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ने का इंतजार कर रहा है। उनका मानना है कि महंगाई और कमजोर होती आर्थिक स्थिति ईरानी नेतृत्व को समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर सकती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत भले ही जारी रहने के संकेत दे रही हो लेकिन मुआवजे युद्ध के नुकसान और होर्मुज जैसे मुद्दों ने समझौते की राह को और मुश्किल बना दिया है। आने वाले दिनों में ट्रंप का यह नया रुख अमेरिका ईरान संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है।

  • चश्मे का नंबर बदलने पर बार-बार सिरदर्द और धुंधला दिखना नजरअंदाज न करें, रात में दिखने वाली परेशानी भी हो सकती है संकेत

    चश्मे का नंबर बदलने पर बार-बार सिरदर्द और धुंधला दिखना नजरअंदाज न करें, रात में दिखने वाली परेशानी भी हो सकती है संकेत


    नई दिल्ली ।
    कई लोग वर्षों तक एक ही चश्मे का इस्तेमाल करते रहते हैं और जब तक सामान्य रूप से दिखाई देता है, तब तक आंखों की दोबारा जांच कराने की जरूरत महसूस नहीं करते। हालांकि, समय के साथ आंखों की दृष्टि और चश्मे का नंबर बदल सकता है। ऐसी स्थिति में पुराने नंबर का चश्मा पहनने पर सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, आंखों में थकान और पढ़ने या स्क्रीन देखने के दौरान असहजता जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

    चश्मे का नंबर बदलने का एक आम संकेत यह हो सकता है कि पहले की तुलना में दूर या पास की चीजें साफ दिखाई न दें। किताब के अक्षर पढ़ने, मोबाइल देखने, कंप्यूटर पर काम करने या दूर लगे बोर्ड को देखने में अतिरिक्त प्रयास करना पड़े तो आंखों की जांच कराना उचित रहता है। हालांकि धुंधली नजर का कारण केवल चश्मे का नंबर बदलना नहीं होता। ड्राई आई, मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी समस्याएं भी दृष्टि को प्रभावित कर सकती हैं।

    लगातार सिरदर्द भी नजर से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है, खासकर तब जब यह पढ़ने या लंबे समय तक पास की चीजों पर ध्यान केंद्रित करने के बाद बढ़ता हो। आंखों पर लगातार जोर पड़ने से थकान और असहजता महसूस हो सकती है। लेकिन सिरदर्द के कई दूसरे कारण भी होते हैं, इसलिए इसे केवल चश्मे के नंबर से जोड़कर देखना सही नहीं है।

    कुछ लोगों को साफ देखने के लिए आंखें सिकोड़ने की आदत हो जाती है। टीवी देखते समय, सड़क के संकेत पढ़ते हुए या मोबाइल स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करते समय बार-बार आंखें सिकोड़ना दृष्टि में बदलाव का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में आंखों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि समस्या अपवर्तन संबंधी है या किसी अन्य कारण से।

    स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने के बाद आंखों में दर्द, भारीपन, जलन, सूखापन या थकान भी हो सकती है। डिजिटल स्क्रीन का लगातार इस्तेमाल आंखों पर दबाव बढ़ा सकता है और इससे सिरदर्द या अस्थायी धुंधलापन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गलत या अधूरा चश्मा नंबर भी ऐसे लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसलिए लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए बीच-बीच में आंखों को आराम देना महत्वपूर्ण है।

    रात में वाहन चलाते समय सामने से आने वाली रोशनी बहुत तेज लगना, सड़क के संकेत स्पष्ट न दिखना या सामान्य परिस्थितियों की तुलना में नजर कमजोर महसूस होना भी जांच कराने का कारण हो सकता है। हालांकि रात में देखने में परेशानी के पीछे सिर्फ चश्मे का नंबर जिम्मेदार नहीं होता। आंखों की दूसरी स्थितियां भी इसका कारण बन सकती हैं।

    आंखों की जांच केवल चश्मे का सही नंबर पता करने तक सीमित नहीं है। नियमित परीक्षण के दौरान आंखों से जुड़ी कई समस्याओं का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद मिल सकती है। उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और पहले से मौजूद आंखों की बीमारी के आधार पर जांच की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। इसलिए जांच का अंतराल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार नेत्र विशेषज्ञ से तय करना बेहतर है।

    यदि चश्मा पहनने के बावजूद लगातार धुंधला दिखाई दे रहा है, सिरदर्द बना रहता है, आंखों में दर्द या असामान्य थकान महसूस होती है या नजर में अचानक बदलाव आता है, तो खुद से नया नंबर अनुमान लगाने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। अचानक नजर कम होना, तेज आंख दर्द या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। सही समय पर आंखों की जांच से समस्या का वास्तविक कारण समझने और उचित उपचार या चश्मे का नंबर निर्धारित करने में मदद मिल सकती है।

  • पेट फूलने को सिर्फ गैस समझना पड़ सकता है भारी, जानिए कब ब्लोटिंग बन सकती है गंभीर बीमारी का संकेत

    पेट फूलने को सिर्फ गैस समझना पड़ सकता है भारी, जानिए कब ब्लोटिंग बन सकती है गंभीर बीमारी का संकेत


    नई दिल्ली। अगर खाना खाने के बाद आपका पेट अचानक गुब्बारे की तरह फूल जाता है और यह समस्या बार बार परेशान करती है तो इसे हर बार सामान्य गैस मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कभी कभार पेट फूलना ज्यादा खाना खाने कब्ज गैस या भोजन के दौरान ज्यादा हवा निगलने की वजह से हो सकता है लेकिन अगर ब्लोटिंग लगातार बनी रहती है और इसके साथ पेट दर्द कब्ज दस्त वजन कम होना या भूख में बदलाव जैसे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं तो इसके पीछे कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक पेट फूलना अपने आप में कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर में चल रही किसी प्रक्रिया का संकेत हो सकता है। इसलिए लंबे समय तक बनी रहने वाली इस परेशानी के वास्तविक कारण को समझना जरूरी है।

    पेट फूलने की सबसे आम वजह पाचन तंत्र में गैस का बढ़ना मानी जाती है। कुछ खाद्य पदार्थ आंतों में ज्यादा गैस पैदा कर सकते हैं जबकि खाना खाते समय बहुत तेजी से खाने या बातचीत करते हुए ज्यादा हवा निगलने से भी पेट में फुलाव महसूस हो सकता है। इसके अलावा कब्ज की समस्या में आंतों में मल जमा रहने के कारण पेट भारी और फूला हुआ लग सकता है। कुछ लोगों को दूध या अन्य खाद्य पदार्थों को पचाने में परेशानी होती है जिसकी वजह से भी ब्लोटिंग बढ़ सकती है।

    गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के मुताबिक इरिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी IBS भी बार बार पेट फूलने की एक महत्वपूर्ण वजह हो सकती है। इस स्थिति में पेट फूलने के साथ पेट दर्द और शौच की आदतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ लोगों को लगातार कब्ज की परेशानी रहती है जबकि कुछ लोगों को बार बार दस्त हो सकते हैं। तनाव खानपान में गड़बड़ी और पाचन तंत्र से जुड़ी दूसरी परेशानियां भी इसके लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। अगर लंबे समय से पेट दर्द के साथ शौच के तरीके में बदलाव हो रहा है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    पेट फूलने की समस्या सीलिएक डिजीज से भी जुड़ी हो सकती है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें ग्लूटेन के सेवन के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली छोटी आंत को नुकसान पहुंचाने लगती है। ग्लूटेन गेहूं जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाने वाला प्रोटीन है। इस स्थिति में पेट फूलने के साथ दस्त पेट की परेशानी और वजन कम होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और आहार में जरूरी बदलाव किए जाते हैं।

    कुछ मामलों में लगातार बढ़ता हुआ पेट लिवर से जुड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। लिवर की गंभीर समस्या में पेट के भीतर तरल पदार्थ जमा हो सकता है जिसे जलोदर कहा जाता है। इसकी वजह से पेट धीरे धीरे बढ़ा हुआ दिखाई दे सकता है और पेट भारी या तना हुआ महसूस हो सकता है। इसके साथ पैरों में सूजन त्वचा या आंखों में पीलापन कमजोरी और भूख कम लगने जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

    इसलिए अगर पेट फूलने की समस्या कभी कभार होती है और सामान्य खानपान में बदलाव से ठीक हो जाती है तो बहुत ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर ब्लोटिंग लगातार बनी हुई है या इसके साथ तेजी से वजन कम होना मल में खून आना बार बार उल्टी होना तेज पेट दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। केवल घरेलू नुस्खों के सहारे समस्या को दबाने के बजाय उसके वास्तविक कारण की जांच कराना ज्यादा जरूरी है। सही समय पर कारण की पहचान और उपचार से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।