Author: bharati

  • बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: बीएमसी में कांटे की टक्कर, शुरुआती रुझानों में बीजेपी आगे, उद्धव गुट से सीधी लड़ाई

    बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: बीएमसी में कांटे की टक्कर, शुरुआती रुझानों में बीजेपी आगे, उद्धव गुट से सीधी लड़ाई


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे बीएमसी समेत 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव नतीजे सामने आने लगे हैं। सुबह 10 बजे से मतगणना शुरू होते ही शुरुआती रुझानों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प नजर आ रहा है। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी  और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है। ताजा रुझानों के मुताबिक बीजेपी 90 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना गठबंधन 71 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस फिलहाल 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि एनसीपी अजित पवार गुट का खाता अभी नहीं खुल पाया है। इन आंकड़ों से साफ है कि बीएमसी में सत्ता की राह अभी आसान नहीं है और अंतिम नतीजों तक समीकरण बदल सकते हैं।

    दक्षिण मुंबई के दो अहम वार्डों में बीजेपी की मजबूत स्थिति सामने आई है। वार्ड 214 से बीजेपी उम्मीदवार अजय पाटिल बढ़त बनाए हुए हैं, जहां उन्हें 2519 वोट मिले हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वियों को काफी कम मत हासिल हुए हैं। वहीं वार्ड 215 से बीजेपी के संतोष ढाले आगे चल रहे हैं और उन्हें 2246 वोट मिले हैं। इन दोनों वार्डों में बीजेपी की बढ़त ने पार्टी के हौसले और मजबूत कर दिए हैं।बीएमसी जनरल इलेक्शन 2025-26 के तहत कुल 227 चुनावी वार्डों के लिए 23 इलेक्शन डिसीजन ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। मतगणना के लिए सभी स्ट्रॉन्ग रूम और काउंटिंग सेंटर्स को PWD और पुलिस विभाग से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है, जिससे पूरी प्रक्रिया कड़ी निगरानी में चल रही है।

    मुंबई के अलावा राज्य की अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी बीजेपी गठबंधन बढ़त बनाए हुए है। नागपुर में बीजेपी 20 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 6 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। पुणे नगर निगम में 165 सीटों में से बीजेपी 52 सीटों पर आगे है। पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम में भी मुकाबला बेहद रोचक बना हुआ है, जहां पवार परिवार के गढ़ में बीजेपी और पवार गुट दोनों 12-12 सीटों पर आगे चल रहे हैं।कुल मिलाकर शुरुआती रुझान संकेत दे रहे हैं कि इस बार महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति में बीजेपी की स्थिति मजबूत है, लेकिन बीएमसी में अंतिम नतीजे आने से पहले सियासी समीकरण पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है।

  • दिल्ली की सेहत पर खतरा: 2024 में सांस की बीमारियों से 9,211 मौतें

    दिल्ली की सेहत पर खतरा: 2024 में सांस की बीमारियों से 9,211 मौतें


    नई दिल्ली । दिल्ली सरकार द्वारा जारी 2024 की ताजा हेल्थ रिपोर्ट राजधानी की सेहत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में जहरीली हवा और बिगड़ते पर्यावरण का सीधा असर नागरिकों के फेफड़ों पर पड़ रहा है। साल 2024 में सांस संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़कर 9,211 तक पहुंच गया है, जो कि 2023 में 8,801 था। विशेषज्ञों ने इस वृद्धि को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक ‘रेड सिग्नल’ माना है और वायु गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में मौतों का सबसे बड़ा कारण दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां बनकर उभरी हैं। साल 2024 में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और धमनियों में रुकावट जैसी समस्याओं के कारण 21,262 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि पिछले साल यह संख्या 15,714 थी। एक ही साल में हृदय रोगों से होने वाली मौतों में आई यह भारी उछाल बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय तनाव की ओर इशारा करती है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि संक्रामक और परजीवी रोगों से होने वाली मौतों में कमी आई है। 2023 में जहां इन बीमारियों से 20,781 मौतें हुई थीं, वहीं 2024 में यह घटकर 16,060 रह गईं, जो सार्वजनिक स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए सुधारों का परिणाम माना जा रहा है।

    शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर दिल्ली ने मामूली लेकिन सकारात्मक प्रगति की है। राजधानी में शिशु मृत्यु दर 2023 के 23.61 से घटकर 2024 में 22.4 प्रति हजार रह गई है। यह गिरावट प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और टीकाकरण की सफलता को दर्शाती है। इसके साथ ही, एक और उत्साहजनक आंकड़ा यह सामने आया कि दिल्ली में 5 वर्ष से कम उम्र के 99.1 प्रतिशत बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र मौजूद है, जो नागरिक पंजीकरण प्रणाली की मजबूती का प्रतीक है।

    आबादी के मोर्चे पर रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली का विस्तार तेजी से हो रहा है और अनुमान है कि 2036 तक राजधानी की जनसंख्या 2.65 करोड़ तक पहुंच जाएगी। साल 2024 में कुल 3,06,459 जन्म दर्ज किए गए, जबकि कुल मौतों की संख्या 1,39,480 रही। मृत्यु दर में 6.16 से 6.37 की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि बढ़ती आबादी और प्रदूषण के दोहरे दबाव के बीच दिल्ली को अपने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा।

  • Rahul Gandhi 2026: 17 जनवरी को भागीरथपुरा पीड़ितों से मुलाकात, जल संकट पर जमीनी हकीकत जानने का पूरा प्लान

    Rahul Gandhi 2026: 17 जनवरी को भागीरथपुरा पीड़ितों से मुलाकात, जल संकट पर जमीनी हकीकत जानने का पूरा प्लान


    इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 17 जनवरी को इंदौर एक दिवसीय दौरे पर आएंगे। उनका दौरा पूरी तरह से भागीरथपुरा जल प्रदूषण त्रासदी से प्रभावित लोगों को समर्पित रहेगा। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी सीधे मौके पर जाकर हालात समझना चाहते हैं और पीड़ित परिवारों की समस्याएं खुद सुनेंगे।राहुल गांधी का यह दौरा न केवल जल प्रदूषण पीड़ितों की मदद के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि कांग्रेस के लिए भी आगामी राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक मजबूती का अवसर माना जा रहा है।
    राहुल गांधी सुबह 9:30 बजे दिल्ली से विशेष विमान से रवाना होंगे और करीब 11 बजे इंदौर एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे। एयरपोर्ट से वे सीधे बॉम्बे हॉस्पिटल जाएंगे, जहां 11:45 से 12:15 तक जल प्रदूषण पीड़ितों से मुलाकात की जाएगी। इसके बाद वे भागीरथपुरा क्षेत्र में जाकर प्रभावित परिवारों से 12:45 से 1:45 तक बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं को समझेंगे। दोपहर 2:30 बजे वे इंदौर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

    दौरे के मद्देनजर सीआरपीएफ और स्थानीय प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता कर चुके हैं। इसके साथ ही राहुल गांधी स्थानीय निकाय चुनाव लड़ चुके कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक करेंगे और जमीनी हालात व संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही रणनीति तय कर ली है। कांग्रेस का उद्देश्य इस दौरे के माध्यम से सरकार पर जल संकट और पीने के पानी के मुद्दे को उजागर करना है। भागीरथपुरा के लोग लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं और राहुल गांधी के दौरे से उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज केवल इंदौर तक नहीं, बल्कि दिल्ली तक पहुंचेगी।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह घटना सिस्टम की नाकामी है और राहुल गांधी जमीनी हकीकत खुद जाकर समझना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी आम जनता का संवैधानिक अधिकार है और इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर काम होना चाहिए।

    राहुल गांधी का यह दौरा न केवल जल प्रदूषण पीड़ितों की मदद के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि कांग्रेस के लिए भी आगामी राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक मजबूती का अवसर माना जा रहा है।
  • ठंड का मज़ा दोगुना: सर्दियों में घूमने लायक भारत की ये खूबसूरत जगहें

    ठंड का मज़ा दोगुना: सर्दियों में घूमने लायक भारत की ये खूबसूरत जगहें

    नई दिल्ली  भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जहां जनवरी के महीने में घूमने का मजा ही कुछ और होता है। आज हम आपको भारत की उन जगहों के बारे में बताएंगे, जिन्हें आपको सर्दियों में जरूर विजिट करना चाहिए। आइए इन जगहों के बारे में विस्तार से जानें, ताकि आपको सही जानकारी हो सकें।
    सर्दियों की शुरुआत
    सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही लोगों की लाइफस्टाइल में भी बदलाव आ जाता है। लोग शरीर को गर्म रखने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए अपनी डाइट में गर्म और हेल्दी चीजें शामिल करने लगते हैं। इस मौसम में सेहत का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।

    सर्दियों में घूमना
    अक्सर लोग सर्दियों में घर पर रहना पसंद करते हैं, लेकिन भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जहां जनवरी के महीने में घूमने का मजा ही कुछ और होता है। इन जगहों पर आप ठंड के साथ-साथ सुहावनी धूप का भी आनंद ले सकते हैं। ये डेस्टिनेशन आपकी ट्रिप को यादगार बनाने के लिए एकदम परफेक्ट हैं।

    ठंड में घूमें ये जगहें
    अगर आप सर्दियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो भारत की इन खूबसूरत जगहों को अपनी वेकेशन लिस्ट में जरूर शामिल करें। आइए जानते हैं उन डेस्टिनेशन्स के बारे में, जहां सर्दियों में घूमना सबसे ज्यादा खास होता है।

    रन ऑफ कच्छ जाएं
    गुजरात में स्थित रन ऑफ कच्छ सर्दियों में घूमने के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां आपको ठंड के मौसम में भी हल्की गर्माहट और भरपूर धूप का एहसास होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती। यहां आप काला डूंगर, इंडिया ब्रिज और धोरडो गांव घूम सकते हैं। साथ ही कच्छ की लोक संस्कृति, फोक डांस और संगीत कार्यक्रमों का आनंद भी ले सकते हैं।

    गोवा जरूर जाएं
    सर्दियों के मौसम में गोवा घूमने का अलग ही मजा होता है। यहां के खूबसूरत बीच, चटक धूप और ठंडी हवाएं आपकी ट्रिप को यादगार बना देती हैं। आप ओल्ड गोवा के चर्च, दूधसागर वॉटरफॉल, फोर्ट अगुआड़ा, अंजुना बीच और स्थानीय मार्केट्स की सैर कर सकते हैं।

    राजस्थान विजिट करें
    आपको सर्दियों में एक बार राजस्थान विजिट करना चाहिए। इसे पिंक सिटी के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान में आप हवा महल, नाहरगढ़ किला, आमेर किला, जंतर-मंतर जैसी जगहों पर घूमने के लिए जा सकते हैं।

    मुंबई घूमने जाएं
    सर्दियों के मौसम में मुंबई भी घूमने के लिए एक शानदार विकल्प है। यहां समुद्र किनारे ठंडी हवाओं और धूप का मजा लिया जा सकता है। इसके अलावा आप लोनावला, अलीबाग, नासिक और महाबलेश्वर जैसी नजदीकी जगहों की सैर कर सकते हैं। मुंबई में एलीफेंटा गुफाएं, गेटवे ऑफ इंडिया और गिरगांव चौपाटी भी जरूर देखें।

    अलप्पुझा विजिट करें
    अगर आप सर्दियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार अलप्पुझा जरूर विजिट करें। यह खूबसूरत जगह केरल में स्थित है। हालांकि केरल में घूमने के लिए कई शानदार डेस्टिनेशन हैं, लेकिन अलप्पुझा अपनी शांत वादियों और बैकवाटर्स के लिए खास तौर पर जाना जाता है। सर्दियों में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है। यहां आप बैकवाटर, वेम्बनाड झील और कुट्टनाड जैसी जगहों की सैर कर सकते हैं।

    सुंदरवन है बेस्ट
    सर्दियों के मौसम में सुंदरवन का वातावरण बेहद सुहावना होता है। यहां आप रॉयल बंगाल टाइगर सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों को देखने का रोमांचक अनुभव ले सकते हैं। सुंदरवन का प्राकृतिक सौंदर्य और शांत माहौल किसी का भी मन मोह लेता है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यहां सजनेखली पक्षी अभयारण्य, हॉलिडे आइलैंड और कपिलमुनि मंदिर जैसे प्रमुख आकर्षण मौजूद हैं।

    मनाली शहर देखें
    सर्दियों में हिमाचल प्रदेश का मनाली शहर किसी जन्नत से कम नहीं लगता। बर्फ से ढकी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं यहां की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती हैं। यहां आप स्कीइंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और रिवर राफ्टिंग जैसे रोमांचक खेलों का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा हिडिम्बा देवी मंदिर और वशिष्ठ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल मनाली की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

  • राजनीति अपडेट: BJP अध्यक्ष चुनाव की घोषणा, नितिन नवीन संभालेंगे कमान इस दिन

    राजनीति अपडेट: BJP अध्यक्ष चुनाव की घोषणा, नितिन नवीन संभालेंगे कमान इस दिन

    नई दिल्ली  बीजेपी अध्यक्ष चुनाव की आ गई तारीख, नितिन नवीन की इस दिन होगी ताजपोशी
    भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का निर्विरोध चुना जाना करीब तय माना जा रहा है.

    भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू होगी. बीजेपी के केंद्रीय चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, 19 जनवरी को नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे, जबकि 20 जनवरी को नए अध्यक्ष के नाम की औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा.

    मौजूदा वक्त में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन इस पद के लिए मुख्य दावेदार हैं और उनके निर्विरोध चुने जाने की पूरी उम्मीद है. नामांकन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा प्रस्तावक के रूप में मौजूद रह सकते हैं.

    बीजेपी चीफ चुनाव प्रक्रिया के लिए बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों को दिल्ली बुलाया गया है. 46 वर्षीय नितिन नबीन अगर अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो वह बीजेपी के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. यह चुनाव जेपी नड्डा के लंबे कार्यकाल के बाद संगठन में बड़े बदलाव का संकेत है.

    तीन साल का कार्यकाल…

    दिसंबर 2025 में कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से ही नबीन ने संगठन को मजबूत करने पर जोर देना शुरू कर दिया था. खास तौर से बूथ स्तर उन्होंने काफी मेहनत की. अब राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी, जो पार्टी की रणनीति, चुनावी प्रदर्शन और भविष्य को प्रभावित करेंगी. नितिन नबीन का कार्यकाल तीन साल का होगा. राज्य चुनावों के बाद उनका असली परीक्षण 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारी के वक्त होगा.

  • मौसम विज्ञान के 151 साल: दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों को मिलेंगे 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन,

    मौसम विज्ञान के 151 साल: दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों को मिलेंगे 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन,


    नई दिल्ली । भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपने स्थापना के 151वें वर्ष में प्रवेश करते ही देश की मौसम सेवाओं को ‘हाई-टेक’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को घोषणा की कि सरकार देश के चार प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे में कुल 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित करेगी। प्रत्येक शहर में 50-50 स्टेशन लगाए जाएंगे, जिससे अब हर गली-मोहल्ले के स्तर पर यानी ‘हाइपर-लोकल’ मौसम पूर्वानुमान संभव हो सकेगा।लोधी रोड स्थित मौसम भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 40 से 50 प्रतिशत तक का सुधार हुआ है।
    उन्होंने कहा कि मिशन मौसम के तहत सरकार अब डेटा-आधारित भविष्यवाणियों पर जोर दे रही है। इन नए स्टेशनों के नेटवर्क से अचानक होने वाली भारी बारिश, भीषण गर्मी और चक्रवातों जैसी प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी अधिक सटीकता से मिल सकेगी। विशेष रूप से मासिक और मौसमी पूर्वानुमानों में त्रुटि की दर जो पहले 7.5% थी, वह अब घटकर मात्र 2.5% रह गई है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए, डॉ. सिंह ने बताया कि भारत की तकनीक का लाभ अब पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को भी मिल रहा है। भारत इन देशों को आपदा संबंधी मौसम जानकारी और उपग्रह डेटा प्रदान कर रहा है।
    इसके साथ ही, देश में डॉप्लर रडार नेटवर्क का विस्तार पिछले 10 वर्षों में तीन गुना बढ़ा है, जो अब देश के 87 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है।इस ऐतिहासिक अवसर पर आधुनिक ‘3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन’ और ‘एग्रो-ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन’ का भी उद्घाटन किया गया। ये तकनीकें न केवल शहरी नागरिकों को तीन घंटे पहले सटीक जानकारी अल्ट्रा-शॉर्ट-रेंज पूर्वानुमान प्रदान करेंगी, बल्कि कृषि, विमानन और शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी। कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

  • सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू

    सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू


    नई दिल्ली । श्रीनगर/जम्मू: गणतंत्र दिवस से पूर्व जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोनों की बढ़ती सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। पिछले पांच दिनों के भीतर संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की यह तीसरी बड़ी घटना है, जिसके बाद सांबा और पुंछ जिलों में सेना ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सीमा पार से होने वाली इन संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।

    ताजा घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार शाम सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर और पुंछ के देगवार व मनकोट इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए। रामगढ़ के चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7:15 बजे एक संदिग्ध वस्तु कुछ मिनटों तक उड़ती दिखी, जबकि पुंछ में शाम 6:25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी वस्तु जाती नजर आई। इन गतिविधियों के तुरंत बाद सेना ने अपने एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम को सक्रिय कर दिया और संबंधित इलाकों की घेराबंदी कर दी।

    इससे पहले 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे, जिन पर जवानों ने फायरिंग की, जिसके बाद वे पाक अधिकृत कश्मीर की ओर लौट गए। वहीं, 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर में जवानों ने मशीन गन से फायरिंग कर ड्रोन की घुसपैठ को नाकाम किया था। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि पाकिस्तान इन ड्रोनों का उपयोग भारतीय सेना की चौकियों की टोह लेने या फिर आतंकियों के लिए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप गिराने के लिए कर रहा है। उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी को सांबा के पालूरा गांव में ड्रोन द्वारा गिराई गई एक खेप बरामद हुई थी, जिसमें पिस्तौल, मैगजीन और ग्रेनेड शामिल थे।

    इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय सेना किसी भी आतंकी या सैन्य दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि सीमा पार अब भी 8 आतंकी कैंप सक्रिय हैं और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सेना हर हरकत पर नजर रख रही है। इसके अतिरिक्त, राजौरी के काकोरा गांव में सेना ने समय रहते 3 किलो वजन का एक संदिग्ध  बरामद कर उसे नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ी आतंकी साजिश विफल हो गई। गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरी घाटी और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

  • रिश्तों का कत्ल: नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्रकैद

    रिश्तों का कत्ल: नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्रकैद


    नई दिल्ली । दिल्ली की एक अदालत ने मानवीय रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रोहिणी स्थित पॉक्सो कोर्ट ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ बार-बार दुष्कर्म करने वाले एक कलयुगी पिता को ‘प्राकृतिक जीवन के अंत’ यानी आखिरी सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने इस अपराध को समाज की अंतरात्मा पर आघात बताते हुए दोषी पिता पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता-पुत्री का रिश्ता सबसे पवित्र होता है, लेकिन दोषी ने अपनी क्रूरता से इस भरोसे को पूरी तरह खत्म कर दिया।

    यह मामला तब शुरू हुआ जब पीड़िता की मां ने घर छोड़ दिया और दूसरा विवाह कर लिया। इसके बाद सुरक्षा देने के बजाय पिता ही भक्षक बन गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 फरवरी 2021 की रात पिता ने पहली बार अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद यह सिलसिला लगातार चलता रहा। डरी-सहमी पीड़िता ने जब अपनी सगी बुआ को इस आपबीती के बारे में बताया, तो वहां से भी उसे कोई मदद नहीं मिली। बुआ ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मामले को दबाने और छिपाने का प्रयास किया। अंततः मई 2021 में जब पीड़िता ने अपनी ताई को पूरी घटना बताई, तब जाकर पुलिस में मामला दर्ज हुआ और इस भयावह सच्चाई का खुलासा हुआ।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता की बुआ के व्यवहार पर भी सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने माना कि बुआ ने अपराध की जानकारी होने के बावजूद उसे छिपाया, जो पॉक्सो एक्ट की धारा 21 ,1 के तहत गंभीर अपराध है। हालांकि, बुआ के दो छोटे बच्चों और उसकी पारिवारिक स्थिति को देखते हुए अदालत ने उसे जेल भेजने के बजाय 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे 10.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

    अदालत में विशेष लोक अभियोजक आदित्य कुमार ने दलील दी कि ऐसे अपराधी किसी भी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सजा ऐसी होनी चाहिए जो समाज में नजीर पेश करे। बचाव पक्ष ने आरोपी के पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने और जेल में अच्छे आचरण का हवाला देकर रियायत की मांग की थी, जिसे न्यायाधीश ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 42 का संदर्भ देते हुए दोषी को धारा 6 के तहत अधिकतम दंड यानी ताउम्र कैद की सजा से दंडित किया। यह फैसला संदेश देता है कि मासूमों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों पर न्याय प्रणाली का रुख बेहद कड़ा और समझौताविहीन रहेगा।

  • ताजमहल में तीन दिन फ्री एंट्री, शाहजहां–मुमताज की असली कब्र देखने का दुर्लभ मौका

    ताजमहल में तीन दिन फ्री एंट्री, शाहजहां–मुमताज की असली कब्र देखने का दुर्लभ मौका

    नई दिल्ली  आगरा स्थित विश्व धरोहर ताजमहल में बादशाह शाहजहां का तीन दिवसीय सालाना उर्स गुरुवार से शुरू हो गया। उर्स के पहले ही दिन ताजमहल में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली। नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा मिलने के कारण करीब 60 हजार देशी-विदेशी सैलानी ताजमहल पहुंचे और शाहजहां व मुमताज की असली कब्रों के दीदार किए। भीड़ को संभालने के लिए ताज सुरक्षा पुलिस, सीआईएसएफ और एएसआई अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

    गुस्ल की रस्म से हुई शुरुआत

    शाहजहां के 371वें उर्स के पहले दिन परंपरा के अनुसार गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और उर्स कमेटी के सदस्यों ने फलों की चादर चढ़ाई। उर्स का आयोजन 17 जनवरी तक चलेगा।

    16 जनवरी को संदल की रस्म और कव्वाली का आयोजन होगा।

    17 जनवरी को चारदपोशी की रस्म अदा की जाएगी, जिसमें लगभग 1,720 मीटर लंबी चादर चढ़ाई जाएगी। इस दिन लंगर का भी वितरण होगा।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, फिर भी दिखीं अव्यवस्थाएं

    नि:शुल्क प्रवेश के चलते दिनभर लंबी कतारें लगी रहीं। सुरक्षा बलों ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए, लेकिन पर्यटकों की संख्या अधिक होने से कई जगह अव्यवस्थाएं भी नजर आईं।
    मुख्य गुंबद के बाहर बड़ी संख्या में पर्यटकों ने जूते-चप्पल उतार दिए, जबकि नियमों के अनुसार जूते ऊपर ले जाने की अनुमति नहीं है। कुछ लोग उद्यान में घूमते भी दिखाई दिए, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने समझाकर रोका।

    भीड़ में बिछड़े लोग, पुलिस ने मिलवाया

    भारी भीड़ के बीच करीब तीन दर्जन बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपने परिजनों से बिछड़ गए। ताज सुरक्षा पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को खोजकर सुरक्षित उनके परिजनों से मिलवाया।

    उर्स का विरोध, पुतला दहन

    उर्स के आयोजन को लेकर अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने विरोध जताया। महासभा के पदाधिकारियों ने एएसआई कार्यालय के बाहर पुतला दहन कर नारेबाजी की। इस दौरान प्रांतीय अध्यक्ष मीना दिवाकर सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    आज दोपहर दो बजे के बाद फ्री एंट्री

    शुक्रवार होने के कारण ताजमहल सुबह से दोपहर दो बजे तक आम पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। इसके बाद पर्यटकों को नि:शुल्क प्रवेश मिलेगा और असली कब्रों के दर्शन भी कराए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय नमाजियों के लिए प्रवेश की व्यवस्था पहले की तरह ही रहेगी।

    उर्स के दौरान ताजमहल में उमड़ रही भीड़ यह साबित कर रही है कि इतिहास, आस्था और विरासत का यह संगम आज भी लोगों को उतनी ही शिद्दत से अपनी ओर खींचता है।

  • Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये दान, पितरों के साथ सूर्य देव भी हो सकते हैं नाराज

    Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये दान, पितरों के साथ सूर्य देव भी हो सकते हैं नाराज

    नई दिल्ली हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन साल की पहली अमावस्या यानी मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। पंचांग के अनुसार हर वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 18 जनवरी, रविवार को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत, पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और पितरों की शांति के लिए किए गए कर्म विशेष फलदायी होते हैं।

    रविवार और सूर्य देव का संयोग
    इस बार मौनी अमावस्या रविवार को पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है। ऐसे में इस दिन किए गए गलत दान या अशुभ कर्म न सिर्फ पितरों को नाराज कर सकते हैं, बल्कि कुंडली में सूर्य की स्थिति को भी कमजोर कर सकते हैं। इसलिए शास्त्रों में इस दिन दान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मौनी अमावस्या पर किन चीजों का दान न करें
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन कुछ वस्तुओं का दान वर्जित होता है। इनमें तामसिक वस्तुएं, टूटी-फूटी चीजें, बासी या झूठा भोजन, कांच का सामान, काले रंग की वस्तुएं, चमड़े से बनी चीजें शामिल हैं।
    इसके अलावा नमक, सरसों का तेल, तिल, खट्टे फल और दही का दान भी इस दिन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन वस्तुओं का दान करने से पितृ दोष बढ़ता है, जीवन में बाधाएं आती हैं और दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है।

    मौनी अमावस्या पर क्या करें दान
    यदि आप इस दिन दान करना चाहते हैं तो शुभ वस्तुओं का ही चयन करें। शास्त्रों के अनुसार अन्न, गुड़, वस्त्र, आंवला, कंबल, धन, जूते, झाड़ू, चांदी और तांबे से बनी वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।

    इसके साथ ही गौ सेवा करना, गायों को चारा खिलाना और पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी विशेष पुण्यदायी माना गया है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

    स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
    मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। द्रिक पंचांग के अनुसार 18 जनवरी 2026 को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 08 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस समय पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

    धार्मिक नियमों का पालन है जरूरी
    मौनी अमावस्या पर श्रद्धा और नियमों के साथ किए गए दान-पुण्य से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। वहीं, शास्त्र-विरुद्ध दान करने से लाभ की जगह नुकसान भी हो सकता है। इसलिए इस दिन दान से पहले सही जानकारी जरूर रखें और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें।