Author: bharati

  • रक्षाबंधन 2026 पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    रक्षाबंधन 2026 पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। सावन मास की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस त्योहार में बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहन की सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों के बीच विशेष उत्सुकता बनी हुई है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उदयकाल में पूर्णिमा तिथि होने के कारण रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। ऐसे में बहनों को 28 अगस्त को ही भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए।

    रक्षाबंधन 2026 की सबसे खास बात यह है कि इस बार राखी बांधने के समय भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है और इसी वजह से रक्षाबंधन पर राखी बांधने के समय भद्रा की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस बार भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

    राखी बांधने के लिए इस वर्ष सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इस अवधि में बहनें भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांध सकती हैं। इस शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 3 घंटे 51 मिनट रहेगी। भद्रा समाप्त होने के कारण इस अवधि में राखी बांधने को लेकर कोई भद्रा बाधा नहीं बताई गई है।

    हालांकि, रक्षाबंधन के दिन राहुकाल का भी ध्यान रखना जरूरी होगा। 28 अगस्त को राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसलिए शुभ कार्य करने वाले परिवार इस अवधि में राखी बांधने से बच सकते हैं। राखी बांधने की योजना बनाते समय शुभ मुहूर्त और राहुकाल दोनों को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।

    रक्षाबंधन की पूजा के लिए राखी की थाली को भी विधि-विधान से तैयार किया जाता है। थाली में राखी के साथ रोली, अक्षत यानी चावल, दीपक और मिठाई रखी जाती है। सबसे पहले भाई को आसन पर बैठाकर उनके मस्तक पर रोली से तिलक लगाया जाता है और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।

    इसके बाद भाई की आरती उतारकर उनकी दाईं कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाई जाती है। बहन अपने भाई की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी का भाव प्रकट करता है।

    इस तरह वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का शुभ समय रहेगा और इस दौरान भद्रा का प्रभाव नहीं होगा। परिवार शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर भाई-बहन के इस खास पर्व को विधि-विधान और उल्लास के साथ मना सकते हैं।

  • भगवान शिव का दिन सोमवार घर की ऊर्जा सुधारने के लिए अपनाएं ये असरदार वास्तु टिप्स

    भगवान शिव का दिन सोमवार घर की ऊर्जा सुधारने के लिए अपनाएं ये असरदार वास्तु टिप्स


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ वास्तु शास्त्र में भी सोमवार को घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए कुछ आसान उपाय किए जाते हैं। माना जाता है कि घर में साफ सफाई सकारात्मक सोच और सही दिशा का ध्यान रखने से वातावरण बेहतर बनाया जा सकता है। सोमवार के दिन किए जाने वाले कुछ वास्तु उपाय घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बनाने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि इन उपायों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए।

    सोमवार के दिन सबसे पहले घर की साफ सफाई पर ध्यान देना चाहिए। खासतौर पर घर के मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान जमा नहीं होना चाहिए। वास्तु परंपरा में मुख्य द्वार को घर में ऊर्जा के प्रवेश का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसलिए सोमवार की सुबह मुख्य द्वार को साफ करके वहां स्वच्छ पानी का छिड़काव किया जा सकता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करें और भगवान शिव की पूजा करें। पूजा स्थल को व्यवस्थित और स्वच्छ रखना भी सकारात्मक वातावरण के लिए अच्छा माना जाता है।

    सोमवार को घर के पूजा स्थान में भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग की विधि अनुसार पूजा की जा सकती है। शिवलिंग पर जल अर्पित करना और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है तो उसकी पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार ही करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और घर परिवार की सुख शांति के लिए प्रार्थना करें।

    वास्तु से जुड़े पारंपरिक उपायों में सोमवार के दिन घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण को साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि यह स्थान पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त होता है। यहां बेकार सामान जूते चप्पल या गंदगी जमा करने से बचना चाहिए। अगर घर में पूजा का स्थान इसी दिशा में है तो उसे विशेष रूप से साफ रखना बेहतर माना जाता है।

    सोमवार को घर में सुगंधित वातावरण बनाए रखने के लिए धूप या दीपक जलाया जा सकता है। हालांकि धूप का इस्तेमाल करते समय कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखना जरूरी है। घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवेश भी वातावरण को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए दिन के समय पर्दे खोलकर घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी आने दें।

    धन और समृद्धि से जुड़े वास्तु उपायों में भी सोमवार को घर को अव्यवस्थित रखने से बचने की सलाह दी जाती है। घर में टूटे हुए सामान बेकार इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं या लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने वाली चीजों को जमा करके रखने के बजाय उन्हें व्यवस्थित करना बेहतर होता है। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित घर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है और इससे घर का वातावरण भी बेहतर महसूस होता है।

    सोमवार के दिन परिवार के सदस्यों के साथ शांत व्यवहार करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन क्रोध विवाद और नकारात्मक बातचीत से बचकर भगवान शिव का स्मरण करना शुभ होता है। जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी पुण्यदायक माना जाता है। इस तरह सोमवार को पूजा के साथ घर की साफ सफाई और सकारात्मक व्यवहार पर ध्यान देकर दिन को बेहतर बनाया जा सकता है। वास्तु उपायों को अंधविश्वास के बजाय पारंपरिक मान्यताओं के रूप में समझना चाहिए और किसी भी बड़े बदलाव से पहले व्यावहारिक जरूरतों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

  • आम के पत्ते फेंकने की गलती न करें, स्किन, बाल, गार्डन और घर के इन कामों में आ सकते हैं बेहद काम

    आम के पत्ते फेंकने की गलती न करें, स्किन, बाल, गार्डन और घर के इन कामों में आ सकते हैं बेहद काम

    नई दिल्ली । आम का फल गर्मियों में लगभग हर घर की पसंद होता है, लेकिन इसके साथ आने वाले आम के पत्तों को अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। भारतीय संस्कृति में आम के पत्तों का इस्तेमाल पूजा-पाठ, शुभ कार्यों, गृह प्रवेश और त्योहारों के दौरान तोरण बनाने के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि, इनका उपयोग केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है। घर में सजावट से लेकर बागवानी और कुछ पारंपरिक घरेलू इस्तेमाल तक आम के पत्ते कई तरह से उपयोगी हो सकते हैं।

    आम के पत्तों में पॉलीफेनॉल्स और टेरपेनॉइड्स जैसे पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुणों की मौजूदगी का अध्ययन किया गया है। यही वजह है कि आम की पत्तियों और उनके अर्क को लेकर त्वचा, ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म से जुड़े संभावित फायदों पर भी शोध हुआ है। हालांकि, इनमें से कई दावे शुरुआती या पशु-अध्ययनों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं होगा।

    त्वचा की देखभाल के लिए भी आम के पत्तों का पारंपरिक इस्तेमाल देखने को मिलता है। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक त्वचा को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। आम के पत्तों से बने पाउडर या अन्य घरेलू नुस्खों को त्वचा पर लगाने की सलाह कई जगह दी जाती है, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सीधे इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। जलन, खुजली या लालिमा होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    आम के पत्तों को ब्लड शुगर और पाचन के लिए भी पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। कुछ पशु अध्ययनों में आम की कोमल पत्तियों के अर्क में मौजूद यौगिकों के संभावित प्रभावों का अध्ययन किया गया है। इसी तरह आम के पत्तों के अर्क में मौजूद मैंगीफेरिन जैसे यौगिकों को मेटाबॉलिज्म और फैट से जुड़े प्रभावों के संदर्भ में भी शोधा गया है। लेकिन वजन घटाने या डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए आम के पत्तों की चाय या काढ़े पर निर्भर रहना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार का विकल्प नहीं है। खासकर डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को किसी भी हर्बल सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

    बालों के लिए भी आम के पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों को संभावित रूप से उपयोगी माना जाता है। हालांकि, बालों की ग्रोथ या झड़ना रोकने के संबंध में मजबूत मानव-आधारित प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतना बेहतर है।

    घर के कामों में आम के पत्तों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत आसान है। ताजे पत्तों को फूलों के साथ पानी से भरे बड़े कटोरे में सजाकर प्राकृतिक डेकोरेशन तैयार की जा सकती है। त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में इनसे बना तोरण घर को पारंपरिक लुक देता है। वहीं, सूखे आम के पत्तों को सीधे कूड़े में फेंकने के बजाय कंपोस्ट में शामिल किया जा सकता है। इनके धीरे-धीरे सड़ने से जैविक खाद तैयार होती है, जिसका इस्तेमाल पौधों और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में किया जा सकता है।

    आम के पत्तों को लेकर यह भी पारंपरिक धारणा है कि इन्हें जलाने से निकलने वाला धुआं मच्छरों और छोटे कीट-पतंगों को दूर रख सकता है। हालांकि, घर के अंदर पत्ते जलाने से धुआं और सूक्ष्म कण पैदा होते हैं, जो सांस के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए कीड़े भगाने के लिए धुआं करने के बजाय सुरक्षित और प्रमाणित उपायों को प्राथमिकता देना बेहतर है। इस तरह आम के पत्ते पूजा की सामग्री से आगे बढ़कर सजावट, बागवानी और कुछ पारंपरिक घरेलू उपयोगों में काम आ सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दावों को सावधानी और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ ही देखना चाहिए।

  • चेहरे की ड्राईनेस और बेजान त्वचा से परेशान हैं तो दही आएगा काम स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल

    चेहरे की ड्राईनेस और बेजान त्वचा से परेशान हैं तो दही आएगा काम स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली । खूबसूरत और निखरी त्वचा के लिए जरूरी नहीं कि हर बार महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का ही सहारा लिया जाए। घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों का सही तरीके से इस्तेमाल भी त्वचा की देखभाल में मदद कर सकता है। इन्हीं चीजों में दही का नाम भी शामिल है। दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है जो त्वचा की ऊपरी सतह पर मौजूद मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा दही त्वचा को मुलायम बनाए रखने और रूखेपन को कम करने में भी सहायक हो सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए चेहरे पर दही लगाने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

    अगर आपकी त्वचा सामान्य या रूखी है तो सादे और ताजे दही का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले चेहरे को हल्के फेस वॉश से साफ करें और फिर एक पतली परत में दही चेहरे पर लगाएं। इसे करीब दस से पंद्रह मिनट तक लगा रहने दें और इसके बाद सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। चेहरे को धोने के बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। इस तरह दही को स्किन केयर रूटीन में शामिल करने से त्वचा को मुलायम महसूस कराने में मदद मिल सकती है।
    अगर आपकी त्वचा सामान्य या रूखी है तो सादे और ताजे दही का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले चेहरे को हल्के फेस वॉश से साफ करें और फिर एक पतली परत में दही चेहरे पर लगाएं। इसे करीब दस से पंद्रह मिनट तक लगा रहने दें और इसके बाद सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। चेहरे को धोने के बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। इस तरह दही को स्किन केयर रूटीन में शामिल करने से त्वचा को मुलायम महसूस कराने में मदद मिल सकती है।

    दही को कई लोग बेसन के साथ मिलाकर भी चेहरे पर लगाते हैं। इसके लिए एक चम्मच सादा दही और थोड़ी मात्रा में बेसन लेकर पेस्ट बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें और सूखने के बाद बिना ज्यादा रगड़े पानी से धो लें। अगर त्वचा संवेदनशील है तो स्क्रब की तरह जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। ज्यादा रगड़ने से त्वचा में जलन या लालिमा हो सकती है।

    ऑयली स्किन वाले लोगों को दही का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी रखनी चाहिए। चेहरे पर बहुत ज्यादा मात्रा में दही लगाने या लंबे समय तक लगाए रखने से बचें। वहीं मुंहासों वाली त्वचा पर किसी भी घरेलू नुस्खे को आजमाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर होता है। अगर दही लगाने के बाद जलन खुजली लालिमा या सूजन जैसी समस्या दिखाई दे तो तुरंत चेहरा धो लें और इसका इस्तेमाल बंद कर दें।

    दही को नींबू जैसी चीजों के साथ मिलाकर लगाने से भी बचना चाहिए। नींबू का रस कुछ लोगों की त्वचा में जलन और संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। खासकर अगर त्वचा पहले से संवेदनशील है तो ऐसे प्रयोग नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी तरह चेहरे पर कोई भी घरेलू मिश्रण रोजाना लगाने की जरूरत नहीं होती। त्वचा की जरूरत के अनुसार सीमित इस्तेमाल करना बेहतर है।

    स्किन केयर में दही को किसी जादुई उपचार की तरह नहीं देखना चाहिए। संतुलित खानपान पर्याप्त पानी अच्छी नींद चेहरे की नियमित सफाई और धूप से बचाव भी त्वचा को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर त्वचा पर लगातार मुंहासे दाने खुजली अत्यधिक रूखापन या अन्य समस्या बनी रहती है तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। इस तरह सही सावधानी के साथ दही को अपनी स्किन केयर दिनचर्या का एक आसान हिस्सा बनाया जा सकता है।

  • सावन सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी

    सावन सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है और इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने तथा व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने सुख समृद्धि पारिवारिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना से भी यह व्रत करते हैं। हालांकि व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए केवल उपवास करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि पूजा पाठ के साथ कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है।

    सावन सोमवार के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में या शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करने के बाद दूध दही शहद और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा और पुष्प अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह साफ और साबुत हो। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

    सावन सोमवार व्रत में खानपान का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का तरीका चुनना उचित होता है। फल दूध दही मखाना कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और सेंधा नमक का सेवन व्रत के दौरान किया जा सकता है। सामान्य नमक अनाज और तामसिक भोजन से बचने की परंपरा है। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो लंबे समय तक भूखे या निर्जल रहने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन से जुड़े नियमों का ही नहीं बल्कि व्यवहार से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन क्रोध झूठ निंदा और किसी को अपशब्द कहने से बचना चाहिए। मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण करना और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना शुभ माना जाता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तु का दान भी किया जा सकता है।

    सावन सोमवार की शाम भगवान शिव की दोबारा पूजा और आरती करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान शिव को भोग अर्पित करें और फिर प्रसाद ग्रहण करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जा सकती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत की परंपराएं अलग हो सकती हैं इसलिए अपने परिवार की धार्मिक परंपरा का भी ध्यान रखना चाहिए। सावन सोमवार व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम श्रद्धा संयम और सात्विक विचारों के साथ भगवान शिव की आराधना करना माना जाता है।

  • ईरान पर ट्रंप का बदला रुख! सैन्य कार्रवाई से पीछे हटे अमेरिका, अब आर्थिक दबाव की रणनीति

    ईरान पर ट्रंप का बदला रुख! सैन्य कार्रवाई से पीछे हटे अमेरिका, अब आर्थिक दबाव की रणनीति


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ किसी नए बड़े सैन्य अभियान की संभावना से फिलहाल दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। अमेरिका अब तेहरान पर सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ता दिख रहा है। रविवार को ‘एक्सियोस’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान को लेकर अपेक्षाकृत संयमित रुख अपनाया।

    ट्रंप ने किसी नई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देने के बजाय कहा कि उनका प्रशासन फिलहाल कम आक्रामक रुख अपना रहा है। उन्होंने ईरान की खराब होती अर्थव्यवस्था और वहां बढ़ती महंगाई पर नजर रखने की बात कही।

    ट्रंप बोले- ईरान से आंशिक बातचीत जारी
    ट्रंप ने कहा कि ईरान में भारी महंगाई है और उसके पास पर्याप्त धन नहीं है। ऐसे में अमेरिका फिलहाल स्थिति को शांत रखते हुए तेहरान के साथ आंशिक बातचीत कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की आर्थिक हालत बेहद खराब है और उसके पास अपने सैनिकों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने भी ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।

    खाड़ी देशों ने सैन्य कार्रवाई से बचने की दी सलाह
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके खाड़ी सहयोगियों ने उन्हें बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की सलाह दी थी। इसके अलावा अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत करीब 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। इससे वाशिंगटन को तत्काल सैन्य कार्रवाई किए बिना ईरान पर दबाव बनाए रखने का अवसर मिल रहा है। ट्रंप ने पूरे घटनाक्रम की तुलना शतरंज के खेल से की और कहा कि मामला अंततः सुलझ ही जाता है।

    होर्मुज समझौते पर नई शर्तों से अटका मामला
    इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते पर भी पेच फंस गया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहम्मद बागेर जोलकद्र ने शनिवार को मांग रखी कि अमेरिका युद्ध को पूरी तरह समाप्त करे, नौसैनिक नाकेबंदी हटाए और अपनी सेना वापस बुलाए।

    उन्होंने प्रतिबंध हटाने, फ्रीज की गई संपत्तियां बहाल करने और युद्ध क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने और अमेरिकी धमकियों तथा ईरान के कथित अपमान को बंद करने की मांग रखी। वहीं, अमेरिका ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज किया है। इसमें वाणिज्यिक जहाजों से टोल वसूलने की किसी भी कोशिश का विरोध शामिल है।

    होर्मुज जलमार्ग खोलना बन सकता है ट्रंप की प्राथमिकता
    ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर देता है, तो ट्रंप नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हटने के लिए तैयार हो सकते हैं। ऐसा हुआ तो यह अमेरिकी रणनीति में बड़ा बदलाव होगा। परमाणु मुद्दा पिछले कई महीनों से वाशिंगटन की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत लगातार मुश्किल बनी हुई है।

    ट्रंप का मानना है कि ईरान के परमाणु ठिकानों के नष्ट होने के बाद उसके लिए परमाणु क्षमताओं को दोबारा खड़ा करना बेहद कठिन होगा। अमेरिका का यह भी मानना है कि उसकी खुफिया एजेंसियां ईरान की किसी गुप्त परमाणु गतिविधि का पता लगाने में सक्षम होंगी।

    ईरान के यूरेनियम भंडार पर ट्रंप ने चिंता को किया खारिज
    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के जमीन के नीचे मौजूद यूरेनियम भंडार को लेकर उठ रही चिंताओं को भी कमतर बताया। जुलाई में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा था कि परमाणु सामग्री जमीन के बहुत नीचे है और दूसरे देशों के लिए उसे हासिल करना संभव नहीं होगा। ऐसे में मौजूदा हालात में ट्रंप प्रशासन व्यापक परमाणु समझौते की तुलना में होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलने और ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकता है।

  • पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 9 लाख रुपये लगाने पर हर महीने 5,550 रुपये मिलेंगे, जानिए पूरा हिसाब और नियम

    पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 9 लाख रुपये लगाने पर हर महीने 5,550 रुपये मिलेंगे, जानिए पूरा हिसाब और नियम

    नई दिल्ली ।बचत की रकम को सुरक्षित जगह निवेश कर नियमित आय हासिल करने की योजना बना रहे लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम एक विकल्प है। इस योजना में एकमुश्त राशि जमा करने के बाद निवेश पर मिलने वाले ब्याज का भुगतान हर महीने किया जा सकता है। बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों की तुलना में यह योजना उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जो नियमित आय के साथ अपेक्षाकृत स्थिर निवेश व्यवस्था चाहते हैं।

    पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम यानी MIS छोटी बचत योजनाओं के तहत संचालित होती है। इन योजनाओं में निवेश को सरकारी समर्थन प्राप्त होता है। यही वजह है कि जोखिम को लेकर सतर्क रहने वाले निवेशकों, खासकर नियमित आय चाहने वाले लोगों के बीच ऐसी योजनाओं में रुचि बनी रहती है। हालांकि किसी भी निवेश से पहले लागू नियमों और ब्याज दरों की जानकारी देखना जरूरी है।

    इस योजना में फिलहाल 7.4 फीसदी सालाना ब्याज दर का उल्लेख किया गया है। इसमें मिलने वाला ब्याज मासिक आधार पर लिया जा सकता है। निवेशक को शुरुआत में कम से कम 1,000 रुपये से खाता खोलने की सुविधा मिलती है। योजना में व्यक्तिगत खाते के साथ संयुक्त खाता खोलने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    मंथली इनकम स्कीम में निवेश की अधिकतम सीमा भी निर्धारित है। व्यक्तिगत यानी सिंगल अकाउंट में निवेशक अधिकतम 9 लाख रुपये तक जमा कर सकता है। वहीं संयुक्त खाते में अधिकतम 15 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। निवेश की राशि के आधार पर हर महीने मिलने वाली ब्याज आय अलग-अलग होगी।

    अगर कोई निवेशक सिंगल अकाउंट में अधिकतम 9 लाख रुपये जमा करता है और 7.4 फीसदी की ब्याज दर लागू रहती है, तो सालाना ब्याज के आधार पर उसकी मासिक आय करीब 5,550 रुपये बनती है। इस तरह पांच साल की अवधि के दौरान ब्याज से नियमित मासिक भुगतान प्राप्त किया जा सकता है। वहीं संयुक्त खाते में 15 लाख रुपये निवेश करने पर इसी दर से मासिक ब्याज करीब 9,250 रुपये बैठता है।

    इस गणना में यह समझना जरूरी है कि 5,550 रुपये या 9,250 रुपये की रकम मूल निवेश पर मिलने वाला मासिक ब्याज है। मूलधन और ब्याज की वास्तविक प्राप्ति योजना के नियमों और चुने गए भुगतान विकल्प के अनुसार होगी। निवेशक अपनी जरूरत के मुताबिक ब्याज की राशि प्राप्त करने का तरीका चुन सकता है।

    MIS की परिपक्वता अवधि पांच साल निर्धारित है। इसका मतलब है कि योजना को तय अवधि तक जारी रखने पर निवेशक को निर्धारित नियमों के अनुसार निवेशित राशि से संबंधित लाभ मिलता है। यह व्यवस्था खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जिन्हें एकमुश्त बचत से नियमित नकदी प्रवाह की जरूरत होती है।

    हालांकि, निवेश करने से पहले समय से पहले खाता बंद कराने से जुड़े नियमों को समझना भी जरूरी है। उपलब्ध नियमों के अनुसार, खाता खुलने के एक से तीन साल के भीतर बंद कराने पर मूलधन का 2 फीसदी हिस्सा काटा जा सकता है। वहीं तीन साल पूरे होने के बाद और पांच साल से पहले खाता बंद कराने पर 1 फीसदी की कटौती का प्रावधान बताया गया है।

    योजना में ब्याज से मिलने वाली आय को मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर लेने का विकल्प भी बताया गया है। ऐसे में निवेशक अपनी वित्तीय जरूरत के अनुसार भुगतान का तरीका चुन सकता है। हालांकि निवेश से पहले मौजूदा ब्याज दर, निवेश सीमा, समयपूर्व निकासी और अन्य नियमों की ताजा जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

  • सोमवार व्रत से मिलेगा महादेव का आशीर्वाद, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा और इन जरूरी नियमों का रखें ध्यान

    सोमवार व्रत से मिलेगा महादेव का आशीर्वाद, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा और इन जरूरी नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि सोमवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। खासतौर पर सावन के सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। माना जाता है कि इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने और पूरे विधि विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। कई भक्त सुख समृद्धि पारिवारिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से सोमवार का व्रत रखते हैं। वहीं अविवाहित लोग मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति और विवाहित लोग दांपत्य जीवन में सुख शांति के लिए भी यह व्रत करते हैं।

    सोमवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में या किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ माना जाता है। सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद दूध दही शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है। हालांकि पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र धतूरा और पुष्प अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र बेहद प्रिय माना जाता है इसलिए बेलपत्र चढ़ाते समय श्रद्धा और भक्ति का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    पूजा के दौरान भगवान शिव के साथ माता पार्वती गणेश जी और भगवान कार्तिकेय का भी स्मरण किया जा सकता है। इसके बाद धूप दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। सोमवार व्रत में महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप कर सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और दिनभर भगवान शिव का ध्यान करते हुए सात्विक आहार का पालन करें।

    सोमवार व्रत में भोजन को लेकर अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाना कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और सेंधा नमक का सेवन कई व्रत रखने वाले लोग करते हैं। अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही व्रत का पालन करना उचित माना जाता है। व्रत के दौरान अनाज नमक की सामान्य किस्म और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है।

    शाम के समय दोबारा भगवान शिव की पूजा और आरती करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान शिव को भोग लगाएं और फिर प्रसाद ग्रहण करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन क्रोध झूठ निंदा और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है।

    ध्यान रखें कि सोमवार व्रत की विधि और नियम अलग अलग क्षेत्रों तथा परिवारों की परंपराओं के अनुसार कुछ अलग हो सकते हैं। इसलिए व्रत करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा संयम और सकारात्मक भावना के साथ भगवान शिव की आराधना करना है।

  • उच्च राशि में गुरु की ‘अमृत दृष्टि’, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर-कारोबार में मिल सकता है बड़ा लाभ

    उच्च राशि में गुरु की ‘अमृत दृष्टि’, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर-कारोबार में मिल सकता है बड़ा लाभ


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धन-संपत्ति, संतान, धर्म और भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है। जब बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होते हैं, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उनके शुभ प्रभाव और भी प्रबल हो जाते हैं। गुरु की पांचवीं, सातवीं और नौवीं दृष्टि को विशेष फलदायी माना गया है।

    मान्यता है कि गुरु जिस भाव में विराजमान होते हैं, उससे भी अधिक शुभ प्रभाव उनकी दृष्टि से मिलने वाले भावों पर पड़ सकता है। इस समय उच्च राशि में स्थित गुरु की तीन दिव्य दृष्टियां तीन राशियों के लिए विशेष लाभकारी मानी जा रही हैं। इससे करियर, कारोबार और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव के योग बन सकते हैं।

    वृश्चिक राशि
    गुरु कर्क राशि में रहते हुए वृश्चिक राशि के पंचम भाव पर अपनी पांचवीं दृष्टि डाल रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक यह समय विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अनुकूल हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी और सही रणनीति से आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। शेयर बाजार या रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने के योग हैं। संतान पक्ष से कोई अच्छी खबर मिल सकती है, जिससे परिवार में खुशी का माहौल बनेगा।

    मकर राशि
    मकर राशि के सप्तम भाव पर गुरु की सातवीं समसप्तक दृष्टि पड़ रही है। सप्तम भाव को व्यापार और साझेदारी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नए कारोबारी सौदे तय होने और साझेदारी में काम करने वालों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। कार्यस्थल पर आपकी स्थिति मजबूत हो सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से प्रमोशन के रास्ते खुल सकते हैं। निजी जीवन की बात करें तो वैवाहिक रिश्तों में चल रहा तनाव कम हो सकता है और आपसी तालमेल बेहतर होने की उम्मीद है।

    मीन राशि
    मीन राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। इस राशि के नवम भाव पर गुरु की नौवीं दृष्टि पड़ रही है। नवम भाव को भाग्य, धर्म और लंबी यात्राओं से संबंधित माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरु की यह दृष्टि लंबे समय से अटके कामों में गति ला सकती है। सरकारी और कानूनी मामलों में सफलता के रास्ते खुल सकते हैं। मनचाही जगह नौकरी ट्रांसफर या विदेश से संबंधित कोई अवसर भी मिल सकता है। कारोबारी नए प्रोजेक्ट शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। धार्मिक यात्राओं के योग बनने के साथ किसी बड़े गुरु या अनुभवी व्यक्ति का मार्गदर्शन भी मिल सकता है।

  • जंगल से ‘गुलेल’ की तरह मिसाइल-ड्रोन लॉन्च कर रहे हूती, सऊदी की तेल फैसिलिटी पर हमला

    जंगल से ‘गुलेल’ की तरह मिसाइल-ड्रोन लॉन्च कर रहे हूती, सऊदी की तेल फैसिलिटी पर हमला


    नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब और यमन के रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का वीडियो जारी किया है। फुटेज में हूती लड़ाके खुले मैदानों और जंगल जैसे इलाकों से एक के बाद एक मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करते दिखाई दे रहे हैं। लॉन्चिंग का तरीका ऐसा नजर आता है, मानो किसी गुलेल से निशाना साधकर प्रोजेक्टाइल छोड़ा जा रहा हो। हूतियों की ओर से यह वीडियो ऐसे समय जारी किया गया है, जब संगठन ने सऊदी अरब की एक अहम तेल सुविधा और यमन के मोखा बंदरगाह को निशाना बनाने का दावा किया है।

    जिजान में अरामको रिफाइनरी से जुड़ी सुविधा पर ड्रोन हमला
    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि हमलों में सऊदी सैनिकों की मौजूदगी वाले इलाकों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया। इसी दौरान सऊदी अरब के जिजान में स्थित अरामको रिफाइनरी से जुड़ी एक सुविधा पर ड्रोन हमला किए जाने का भी दावा किया गया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने एक सुविधा में आग लगने की पुष्टि की। हालांकि, आग पर बाद में काबू पा लिया गया। घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

    मोखा बंदरगाह पर हमले में 7 लोगों की मौत
    हूतियों के हमले का दूसरा बड़ा निशाना यमन का मोखा बंदरगाह बना। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के नियंत्रण में है और लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के करीब स्थित है। यमनी सरकार से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई। मृतकों में चार सैनिक और तीन नागरिक शामिल हैं। वहीं, 30 नागरिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमले में बंदरगाह की इमारतों, पियर्स और वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचा।

    मिसाइल और ड्रोन के साथ मानवरहित नाव का भी दावा
    हूतियों ने इन हमलों को सऊदी ड्रोन के यमन के हज्जाह और सादा प्रांतों में घुसने की कार्रवाई का जवाब बताया है। यमनी सेना के मुताबिक, हमले में मिसाइल और ड्रोन के अलावा विस्फोटकों से लदी एक मानवरहित नाव के इस्तेमाल की कोशिश भी की गई। जारी वीडियो में हूती लड़ाकों को अलग-अलग स्थानों से मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करते हुए दिखाया गया है। इससे संगठन की हमले करने की रणनीति और इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

    2022 के बाद फिर बढ़ सकती है क्षेत्रीय अशांति
    इन घटनाओं ने यमन में 2022 के बाद से बनी अपेक्षाकृत शांत स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोखा बंदरगाह बाब-अल-मंदेब के नजदीक है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ऐसे में यदि इलाके में हूती हमले और जवाबी सैन्य कार्रवाई बढ़ती है, तो इसका असर केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। लाल सागर के समुद्री व्यापार मार्गों के साथ-साथ क्षेत्र की शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ सकता है।