प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग वर्तमान 9,383 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 रुपए करना है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग विद्यार्थियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक आदेश कब तक जारी होता है।
Author: bharati
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MBBS छात्रों जितना स्टाइपेंड मांग रहे आयुष डॉक्टर, जबलपुर में 200 विद्यार्थियों ने निकाला कैंडल मार्च, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान फिलहाल 9,383 रुपए मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है जो मौजूदा समय में उनके खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वे इसे बढ़ाकर एमबीबीएस छात्रों के बराबर 21,500 रुपए करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांग को लेकर विद्यार्थियों ने शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से झंडा चौक तक कैंडल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में करीब 150 से 200 छात्र शामिल हुए। झंडा चौक पहुंचकर विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाई और स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाई।प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि आयुष और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई करने वाले छात्रों के स्टाइपेंड में अंतर नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक दोनों ही क्षेत्रों के विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान मेहनत करते हैं और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपना अनुभव बढ़ाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता में समानता होनी चाहिए। विद्यार्थियों ने समान काम के लिए समान आर्थिक लाभ की मांग उठाते हुए कहा कि मौजूदा स्टाइपेंड से पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है।छात्रों के मुताबिक महंगाई के कारण भोजन आवास और अन्य जरूरी जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में 9,383 रुपए की मासिक राशि में सभी आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। उनका मानना है कि स्टाइपेंड बढ़ने से उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। विद्यार्थियों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के दौरान आर्थिक दबाव कम होना जरूरी है ताकि वे अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकें।कैंडल मार्च के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी का सहयोग भी मिला है। विद्यार्थियों के अनुसार आयुष मंत्रालय के स्तर पर भी स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर बातचीत की गई है। इसके बावजूद अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं लेकिन निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है।विद्यार्थियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर जल्द निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता उनकी जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। विद्यार्थियों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द कोई सकारात्मक निर्णय सामने आएगा।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग वर्तमान 9,383 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 रुपए करना है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग विद्यार्थियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक आदेश कब तक जारी होता है। -

दुर्गा पंडाल लगाने पर सड़क पर संग्राम, कांग्रेस नेता की पुलिस को खुली चुनौती, TI बोले- यातायात रोकने की अनुमति नहीं
जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में दुर्गा पंडाल लगाने को लेकर पुलिस और युवा कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष जितिन राज के बीच विवाद सामने आया है। विजय नगर में शुक्रवार रात टेंट लगाने के दौरान शुरू हुई बहस कुछ ही देर में तीखी नोकझोंक में बदल गई। पुलिस का कहना था कि पंडाल का टेंट सड़क पर आ रहा है जिससे यातायात बाधित हो सकता है। इसलिए टेंट को पीछे करने के लिए कहा गया था। वहीं जितिन राज का तर्क था कि वह कई वर्षों से इसी स्थान पर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने जितिन राज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। घटना के बाद दुर्गा पंडाल लगाने और सड़क पर धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात जितिन राज अपने समर्थकों के साथ विजय नगर में दुर्गा पंडाल के लिए टेंट लगवा रहे थे। इसी दौरान थाना प्रभारी धीरज कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने टेंट की स्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह सड़क की ओर आ रहा है और इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। पुलिस ने टेंट को पीछे करने के लिए कहा। इसी बात को लेकर जितिन राज और टीआई के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ता और पुलिस आमने-सामने आ गए।विवाद के दौरान जितिन राज ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से उसी स्थान पर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं और पहले भी यहां आयोजन होते रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि टेंट तो इसी जगह लगेगा और जिसे कार्रवाई करनी है वह कर सकता है। उनके इस बयान के बाद विवाद और बढ़ गया। जितिन राज ने भाजपा विधायक के जन्मदिन पर हुए एक कार्यक्रम का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप था कि उस दौरान मुख्य मार्ग पर करीब ढाई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था लेकिन तब कार्रवाई को लेकर ऐसे सवाल नहीं उठाए गए।जितिन राज ने सवाल किया कि जबलपुर-अमरकंटक रोड पर भाजपा विधायक अशोक रोहाणी के जन्मदिन के आयोजन के दौरान यातायात बाधित होने पर क्या इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सड़क पर होने वाली गतिविधियों को लेकर नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए। हालांकि विधायक के जन्मदिन के आयोजन को लेकर लगाए गए उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।दूसरी ओर थाना प्रभारी धीरज कुमार ने पुलिस की कार्रवाई का पक्ष रखते हुए कहा कि सड़क पर टेंट लगाने से यातायात प्रभावित हो रहा था। उनके मुताबिक पुलिस ने इसी वजह से टेंट पीछे करने के लिए कहा था। टीआई का आरोप है कि जितिन राज ने पुलिस के साथ बहस की और कार्रवाई करने की चुनौती दी। उन्होंने विवाद के दौरान गाली गलौज होने की बात भी कही। पुलिस का कहना है कि सड़क पर यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और नियमों के अनुसार ही आयोजन की व्यवस्था होनी चाहिए।मौके पर काफी देर तक बहस चलने के बाद पुलिस ने जितिन राज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। कार्रवाई के पीछे सड़क पर टेंट लगाने से यातायात प्रभावित होने और पुलिस के साथ हुए विवाद को वजह बताया गया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों और पूरे घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब नवरात्र के दौरान शहर में कई स्थानों पर दुर्गा पंडाल और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के लिए अहम चुनौती होती है। अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और आयोजकों की आपत्तियों को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है इस पर नजर रहेगी -

ऑटो में बैठना पड़ा भारी, 20 रुपए की जगह 20 हजार मांगने लगे बदमाश, विरोध पर यात्री की कमर में घोंपा चाकू
जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में दूसरे जिले से आए एक यात्री के साथ लूट और चाकूबाजी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि ऑटो चालक और उसके साथी ने यात्री से तय किराए के 20 रुपए की जगह 20 हजार रुपए की मांग की। यात्री ने जब इतनी बड़ी रकम देने से इनकार किया तो दोनों ने उसके साथ गाली गलौज और मारपीट शुरू कर दी। विरोध करने पर एक आरोपी ने चाकू से हमला कर दिया और घायल यात्री की जेब से 500 रुपए निकाल लिए। घटना के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने मामले में एक नाबालिग सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घायल यात्री की हालत गंभीर बताई गई है और उसका अस्पताल में इलाज जारी है।जानकारी के मुताबिक सिंगरौली जिले के माडा गांव में रहने वाले 25 वर्षीय दिलकेश शाह 9 अक्टूबर की रात करीब डेढ़ बजे जबलपुर पहुंचे थे। उन्हें यहां से महाराष्ट्र के पुणे जाना था। बस स्टैंड से तीन पत्ती चौक पहुंचने के बाद वह रेलवे स्टेशन जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक ऑटो में सवार होकर दो युवक वहां पहुंचे। दिलकेश ने उनसे रेलवे स्टेशन जाने का किराया पूछा तो चालक ने 20 रुपए बताया। किराया तय होने के बाद दिलकेश ऑटो में बैठ गए।करीब 15 मिनट बाद ऑटो स्टेशन रोड पर पहुंचा। दिलकेश जब ऑटो से उतरे और चालक को तय किए गए 20 रुपए देने लगे तो दोनों युवकों ने उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने उनसे 20 हजार रुपए की मांग शुरू कर दी। दिलकेश ने जब कहा कि रेलवे स्टेशन तक जाने के लिए 20 रुपए किराया तय हुआ था तो इतनी बड़ी रकम क्यों दें। इस बात पर दोनों युवक भड़क गए और उनके साथ गाली गलौज करते हुए मारपीट करने लगे।विवाद बढ़ने पर एक आरोपी ने चाकू निकाल लिया और पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। अपनी जान बचाने के लिए दिलकेश वहां से भागने लगे लेकिन नाबालिग आरोपी ने उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद उन पर चाकू से हमला कर दिया गया। चाकू दिलकेश की कमर में लगा जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोप है कि हमलावरों ने घायल यात्री की जेब से 500 रुपए भी निकाल लिए। इसी बीच दिलकेश की आवाज सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा होने लगे। भीड़ जुटती देख दोनों आरोपी मौके से भाग गए।घटना की सूचना मिलने पर सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल दिलकेश को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी। घटना दूसरे जिले से आए यात्री के साथ होने के कारण पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों को जल्द पकड़ने के निर्देश दिए।सिविल लाइन थाना प्रभारी शशि धुर्वें के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में पूछताछ की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि संबंधित नंबर का ऑटो शुभम बेन चलाता है। इसके बाद पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी लेकिन वह वहां नहीं मिला। पुलिस लगातार उसकी तलाश करती रही और शनिवार सुबह एक पहाड़ी से शुभम बेन तथा उसके नाबालिग साथी को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के मुताबिक शुभम बेन की उम्र 26 वर्ष है और वह गोरखपुर क्षेत्र के मांडवा का निवासी है। संबंधित ऑटो नाबालिग की मां के नाम पर पंजीकृत बताया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चाकू और लूटे गए रुपए बरामद करने के साथ ऑटो भी जब्त कर लिया है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है। इस घटना ने शहर में यात्रियों की सुरक्षा और किराए के नाम पर होने वाली कथित जबरन वसूली को लेकर चिंता बढ़ा दी है। -

शिवपुरी के सुनाज गांव में दर्दनाक हादसा, मिट्टी से लदी ट्रॉली पर पलटा ट्रैक्टर, ड्राइवर की हालत गंभीर
शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मिट्टी से भरी ट्रॉली पर ट्रैक्टर पलटने से एक गंभीर हादसा हो गया। दुर्घटना में ट्रैक्टर चालक ट्रॉली के नीचे दब गया और उसे गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल मदद करते हुए चालक को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे शिवपुरी जिला अस्पताल से ग्वालियर रेफर कर दिया गया। वहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।जानकारी के मुताबिक हादसा शुक्रवार शाम शिवपुरी जिले के सुनाज गांव में हुआ। ढेंकुआ गांव का रहने वाला रामवीर यादव ट्रैक्टर के साथ मिट्टी से भरी ट्रॉली लेकर जा रहा था। इसी दौरान करमई सड़क पर मिट्टी भराव का काम चल रहा था। बताया गया है कि रामवीर ट्रैक्टर को ऊंचाई वाली सड़क पर चढ़ाने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान ट्रैक्टर का अगला हिस्सा अचानक ऊपर उठ गया और वाहन का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते ट्रैक्टर मिट्टी से भरी ट्रॉली पर पलट गया। इस हादसे में चालक रामवीर उसके नीचे दब गया।दुर्घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। लोगों ने बिना देर किए चालक को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। काफी प्रयास के बाद रामवीर को ट्रैक्टर और ट्रॉली के नीचे से निकाला गया। हादसे में उसे गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। समय पर मदद मिलने से उसे अस्पताल तक ले जाया जा सका।अस्पताल में डॉक्टरों ने घायल चालक का प्राथमिक उपचार किया। लेकिन उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए शिवपुरी जिला अस्पताल भेजा गया। वहां भी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर रेफर कर दिया। फिलहाल रामवीर का ग्वालियर में इलाज जारी है। उसकी हालत को लेकर आगे की जानकारी उपचार के दौरान सामने आ सकती है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर का अगला हिस्सा ऊंचाई पर चढ़ाते समय उठने के कारण यह हादसा हुआ। हालांकि दुर्घटना की परिस्थितियों और वाहन के पलटने के वास्तविक कारणों की पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने घटना की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि सड़क पर मिट्टी भराव के काम के दौरान वाहन किस स्थिति में था और ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ने की वजह क्या रही।इस घटना ने एक बार फिर मिट्टी और निर्माण सामग्री से भरे ट्रैक्टर ट्रॉलियों को ऊंचाई वाली सड़कों पर ले जाने के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने रखा है। ऐसे वाहनों को चढ़ाई पर ले जाते समय संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। खासकर जब ट्रॉली में भारी मिट्टी भरी हो तो चालक के लिए वाहन पर नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घायल चालक का ग्वालियर में उपचार जारी है। -

शिवपुरी में सफाई व्यवस्था की खुली पोल, नालियां जाम और सीवर चैंबर उफनाए, त्योहार से पहले बढ़ी लोगों की चिंता
शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में नवरात्र से पहले सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के कई इलाकों में नालियां जाम होने और सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने की शिकायतें सामने आई हैं। दुर्गा पंडालों और धार्मिक आयोजनों की तैयारियों के बीच साफ सफाई की स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका में शिकायत करने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में वार्ड 30 के लोगों को खुद ही सफाई की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। शनिवार को कॉलोनीवासियों ने झाड़ू उठाकर नालियों से कचरा निकालना शुरू कर दिया। इस घटना ने शहर की सफाई व्यवस्था और त्योहारों से पहले की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के मुताबिक कोलियों के मंदिर के पीछे स्थित नरिया क्षेत्र में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई थी। नालियों में जमा कचरे और कीचड़ के कारण आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका में शिकायत भी की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार परेशानी झेलने के बाद लोगों ने इंतजार करने के बजाय खुद ही सफाई शुरू कर दी। कॉलोनीवासियों ने नालियों से कचरा निकाला और आसपास के क्षेत्र को साफ करने का प्रयास किया। नवरात्र जैसे धार्मिक पर्व से पहले लोगों को इस तरह सफाई करनी पड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।शहर के माधव चौक के पास स्थित मां वैष्णो दरबार की झांकी के आसपास भी गंदगी की समस्या सामने आई है। यहां सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने के कारण स्थानीय लोगों और आयोजन समिति के सदस्यों की परेशानी बढ़ गई है। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में सीवर की गंदगी और आसपास फैला कचरा लोगों के लिए असुविधा पैदा कर सकता है। समिति के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी पीएचई से कई बार शिकायत की है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।आयोजन समिति के सदस्यों के मुताबिक उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर भी अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। वे अपर कलेक्टर से भी मिले थे ताकि सीवर चैंबर की समस्या का जल्द समाधान हो सके। हालांकि उनके अनुसार अब तक राहत नहीं मिली है। समिति के सदस्यों का कहना है कि सीवर चैंबर की सफाई सामान्य झाड़ू या घरेलू उपकरणों से करना संभव नहीं है। इसके लिए संबंधित विभाग की टीम और जरूरी संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वे चाहते हैं कि जिम्मेदार विभाग समय रहते मौके पर पहुंचकर सफाई कराए।यह स्थिति तब सामने आई है जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्योहारों से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शहर के कुछ इलाकों में नालियों और सीवर चैंबर की समस्या बने रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका और संबंधित विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही नहीं बल्कि नियमित रूप से भी सफाई व्यवस्था की निगरानी करें।नवरात्र के दौरान दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में साफ सफाई और सीवर व्यवस्था दुरुस्त रखना जरूरी है। शिवपुरी के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई कर जाम नालियों और सीवर चैंबर की समस्या दूर करेगा ताकि धार्मिक आयोजन स्वच्छ वातावरण में हो सकें। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और त्योहार से पहले लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं। -

गर्मी और उमस से चाहिए छुटकारा, मनाली की ठंडी वादियों में बिताएं यादगार छुट्टियां, घूमने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
नई दिल्ली। गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए पहाड़ों की सैर किसी सुकून भरे अनुभव से कम नहीं होती। अगर मैदानी इलाकों की तपिश से राहत पाने के लिए आप भी छुट्टियों की योजना बना रहे हैं तो हिमाचल प्रदेश का मनाली एक शानदार विकल्प हो सकता है। यहां ऊंचे पहाड़ देवदार के घने जंगल बहती ब्यास नदी और खूबसूरत घाटियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। मनाली की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने और रोमांचक गतिविधियों का आनंद लेने का अवसर भी मिलता है। हालांकि पहाड़ों का मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेना जरूरी है।मनाली की यात्रा शुरू करने के बाद सबसे पहले यहां के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को अपनी सूची में शामिल कर सकते हैं। सोलंग वैली अपनी खूबसूरत वादियों और एडवेंचर गतिविधियों के लिए मशहूर है। मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार यहां पैराग्लाइडिंग और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। सर्दियों में बर्फबारी होने पर इस क्षेत्र का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था और उम्र से संबंधित नियमों की जानकारी पहले ले लें।
प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक आस्था का अनुभव करना चाहते हैं तो हिडिंबा देवी मंदिर जरूर जा सकते हैं। देवदार के पेड़ों से घिरा यह प्राचीन मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। इसके बाद ओल्ड मनाली की गलियों में घूमना स्थानीय कैफे में समय बिताना और बाजारों में खरीदारी करना आपकी यात्रा को खास बना सकता है। ब्यास नदी के आसपास भी सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं लेकिन नदी के तेज बहाव से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
मनाली घूमने आने वाले कई पर्यटक रोहतांग पास जाने की योजना भी बनाते हैं। यह ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध पर्वतीय दर्रा बर्फीले नजारों और हिमालय की खूबसूरत चोटियों के लिए जाना जाता है। हालांकि यहां पहुंचना मौसम सड़क की स्थिति और प्रशासनिक अनुमति पर निर्भर करता है। यात्रा से पहले परमिट की जरूरत और मार्ग खुला होने की जानकारी जरूर जांच लें। खराब मौसम के दौरान अपनी योजना बदलने के लिए भी तैयार रहें।
मनाली पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। दिल्ली और चंडीगढ़ से बसों के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। हवाई यात्रा करने वाले पर्यटक भुंतर हवाई अड्डे तक पहुंचकर आगे टैक्सी या अन्य उपलब्ध परिवहन का सहारा ले सकते हैं। यात्रा का खर्च आपके शहर से दूरी होटल की श्रेणी और घूमने के साधनों पर निर्भर करेगा। कम बजट में यात्रा करना चाहते हैं तो बस से सफर करें होटल की बुकिंग पहले कर लें और स्थानीय परिवहन के विकल्पों की तुलना करें। छुट्टियों और व्यस्त पर्यटन सीजन में होटल तथा टैक्सी का किराया बढ़ सकता है।
मनाली की यात्रा पर जाते समय गर्म कपड़े हल्की जैकेट आरामदायक जूते और जरूरी दवाएं साथ रखें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान कम हो सकता है और मौसम अचानक बदल सकता है। बारिश के दौरान भूस्खलन या सड़क बंद होने की आशंका भी रहती है इसलिए स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें। यात्रा की योजना बनाते समय केवल तस्वीरों और सोशल मीडिया के नजारों पर भरोसा न करें बल्कि वास्तविक मौसम और सड़क की स्थिति को प्राथमिकता दें। सही तैयारी के साथ मनाली की यात्रा गर्मी से राहत पाने और प्रकृति के करीब कुछ यादगार पल बिताने का अच्छा अवसर बन सकती है।
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बालों का झड़ना नहीं हो रहा बंद, महंगे प्रोडक्ट्स से पहले अपनाएं ये 5 तरीके, सही तेल और डाइट से ऐसे करें बालों की देखभाल
नई दिल्ली। बालों का झड़ना आजकल एक आम समस्या बन गई है। महिला हो या पुरुष कई लोग बालों के पतले होने और लगातार गिरने से परेशान रहते हैं। मौसम में बदलाव तनाव खराब खानपान नींद की कमी और बालों की सही देखभाल न करने जैसी वजहों से बालों पर असर पड़ सकता है। सामान्य रूप से रोजाना कुछ बालों का झड़ना स्वाभाविक है लेकिन जब बाल असामान्य रूप से गिरने लगें या सिर में खाली जगह दिखाई देने लगे तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ आसान आदतों को अपनाकर बालों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।बालों की देखभाल के लिए सबसे पहले संतुलित खानपान पर ध्यान दें। बालों की मजबूती के लिए शरीर को पर्याप्त प्रोटीन आयरन जिंक और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसके लिए भोजन में दालें दूध दही अंडे पनीर हरी पत्तेदार सब्जियां फल और मेवे शामिल किए जा सकते हैं। यदि शरीर में आयरन या किसी अन्य पोषक तत्व की कमी है तो बालों का झड़ना बढ़ सकता है। इसलिए लगातार बाल गिरने पर बिना जांच के सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह से कमी का पता लगाना बेहतर होता है।
बालों को धोने और सुखाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। बालों को साफ रखने के लिए अपनी त्वचा और बालों के प्रकार के अनुसार हल्के शैंपू का इस्तेमाल करें। शैंपू करते समय सिर की त्वचा को नाखूनों से जोर से रगड़ने से बचें। गीले बाल अपेक्षाकृत नाजुक होते हैं इसलिए उन्हें जोर से तौलिए से रगड़ना या खींचकर कंघी करना नुकसान पहुंचा सकता है। बालों को धीरे से सुखाएं और उलझन दूर करने के लिए चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करें।
बालों पर बार बार हीट स्टाइलिंग करने से भी नुकसान हो सकता है। हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और कर्लर का अधिक इस्तेमाल बालों को कमजोर और टूटने वाला बना सकता है। इसी तरह बार बार केमिकल ट्रीटमेंट हेयर कलर और बहुत कसकर बांधे गए हेयरस्टाइल से भी बाल टूट सकते हैं। जहां तक संभव हो बालों को आराम दें और गर्म उपकरणों का इस्तेमाल सीमित रखें। बालों में तेल लगाने से सिर की त्वचा को नमी मिल सकती है और मालिश से आराम महसूस हो सकता है लेकिन तेल लगाना हर प्रकार के हेयर फॉल का इलाज नहीं है। तेल से बाल झड़ना निश्चित रूप से बंद हो जाएगा ऐसा मानना सही नहीं है।
तनाव और नींद की कमी भी बालों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। रोजाना पर्याप्त नींद लेने नियमित शारीरिक गतिविधि करने और तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान अपनाने से समग्र स्वास्थ्य को फायदा मिल सकता है। हालांकि यदि बाल झड़ने की वजह हार्मोन संबंधी समस्या आनुवंशिक कारण या कोई बीमारी है तो केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।
यदि बाल अचानक बहुत ज्यादा झड़ने लगें सिर में गोल खाली पैच बनें खुजली या पपड़ी के साथ समस्या हो या कई सप्ताह तक लगातार बाल गिरते रहें तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। तेज बुखार बीमारी प्रसव या अत्यधिक तनाव के कुछ समय बाद भी बाल झड़ सकते हैं। सही कारण की पहचान होने पर उचित उपचार चुना जा सकता है। बिना सलाह के दवाएं या महंगे हेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से बचें।
बालों को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका नियमित देखभाल पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद और सही उपचार है। घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं लेकिन हर व्यक्ति में उनका असर अलग हो सकता है। लगातार या असामान्य हेयर फॉल को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।
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शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026, इन 5 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, नौकरी कारोबार और आर्थिक स्थिति में आ सकता है बड़ा बदलाव
नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना जाता है। मान्यता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं और उनकी चाल में होने वाला बदलाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों पर प्रभाव डाल सकता है। वर्ष 2026 में शनि के नक्षत्र परिवर्तन को लेकर ज्योतिषीय चर्चाएं तेज हैं। इस परिवर्तन को कुछ राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि की स्थिति में बदलाव से नौकरी कारोबार आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में नए अवसर मिल सकते हैं। कुछ राशियों के जातकों को लंबे समय से अटके कामों में प्रगति की उम्मीद हो सकती है। हालांकि इन प्रभावों को निश्चित भविष्यवाणी के बजाय पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के रूप में देखना चाहिए।शनि का नक्षत्र परिवर्तन समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि ज्योतिष में शनि को अनुशासन मेहनत धैर्य और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि शनि की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को मेहनत का फल दिलाने और जीवन में स्थिरता लाने में सहायक हो सकती है। वहीं प्रतिकूल स्थिति के दौरान लोगों को अधिक सावधानी और धैर्य रखने की सलाह दी जाती है। शनि का प्रभाव अचानक मिलने वाली सफलता से ज्यादा लगातार प्रयास और जिम्मेदारियों को निभाने से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि शनि के गोचर और नक्षत्र परिवर्तन को ज्योतिष में खास महत्व दिया जाता है।ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मेष राशि के जातकों के लिए यह समय कामकाज में नई जिम्मेदारियां मिलने और अपनी क्षमता साबित करने का अवसर बन सकता है। जो लोग लंबे समय से नौकरी में बदलाव या पदोन्नति की उम्मीद कर रहे हैं उन्हें अपने प्रयास जारी रखने की सलाह दी जाती है। वृषभ राशि के जातकों के लिए आर्थिक मामलों में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना महत्वपूर्ण रह सकता है। बचत पर ध्यान देने और अनावश्यक खर्चों से बचने से भविष्य की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।मिथुन राशि के जातकों के लिए कार्यक्षेत्र में संपर्क बढ़ाने और नई योजनाओं पर काम करने का समय महत्वपूर्ण माना जा सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसरों पर विचार करने का मौका मिल सकता है। हालांकि किसी भी बड़े निवेश या व्यावसायिक फैसले से पहले पूरी जानकारी जुटाना जरूरी होगा। सिंह राशि के जातकों को अपने काम में अनुशासन बनाए रखने और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल पर ध्यान देने की सलाह दी जा सकती है। लगातार मेहनत और जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करना उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।कुंभ राशि के जातकों के लिए भी शनि का परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से चर्चा का विषय है। इस राशि के लोगों को योजनाओं की समीक्षा करने और लंबे समय के लक्ष्यों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। पारिवारिक जिम्मेदारियों और काम के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी हो सकता है। हालांकि किसी राशि के लिए शुभ या चुनौतीपूर्ण समय होने का आकलन केवल राशि के नाम से नहीं किया जा सकता। पारंपरिक ज्योतिष में जन्म कुंडली में शनि की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव को भी महत्व दिया जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव की कृपा पाने के लिए ईमानदारी से काम करना जरूरतमंदों की सहायता करना और अपने कर्तव्यों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। शनिवार को जरूरतमंद लोगों को भोजन या आवश्यक वस्तुएं दान करने की परंपरा भी प्रचलित है। कई लोग इस दिन शनिदेव की पूजा और मंत्र जाप करते हैं। इन उपायों को आस्था से जुड़ी परंपराओं के रूप में अपनाया जाता है।कुल मिलाकर शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026 को लेकर पांच राशियों के लिए सकारात्मक संभावनाओं की चर्चा की जा रही है। लेकिन किसी विशेष नक्षत्र परिवर्तन की सटीक तारीख और उससे जुड़ी पांच राशियों की पुष्टि के बिना इसे निश्चित ज्योतिषीय परिणाम मानना उचित नहीं होगा। जीवन में तरक्की के लिए मेहनत सही योजना आर्थिक अनुशासन और सोच-समझकर लिए गए फैसले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। -

अंटार्कटिका में पेंग्विन की आबादी में 63% की गिरावट, गर्म होता समुद्र और भोजन की कमी बढ़ा रही चिंता
नई दिल्ली । अंटार्कटिका की बर्फीली दुनिया से वन्यजीवों को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां स्थित जावोडोवस्की द्वीप पर रहने वाले चिनस्ट्रैप पेंग्विन की आबादी में पिछले 14 वर्षों के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई है। कभी दुनिया की सबसे बड़ी चिनस्ट्रैप पेंग्विन कॉलोनी के रूप में पहचाने जाने वाले इस द्वीप पर अब इनकी संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी के मुताबिक वर्ष 2011 से 2025 के बीच यहां पेंग्विन के घोंसलों की संख्या में करीब 63 प्रतिशत की कमी आई है। वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार इस दौरान इनकी प्रजनन करने वाली आबादी लगभग 10.9 लाख से घटकर 4.02 लाख रह गई। यानी करीब 6.8 लाख पेंग्विन के बराबर आबादी कम हो गई है। इस बदलाव ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है और समुद्र के बदलते पर्यावरण पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।करंट बायोलॉजी नामक वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते तापमान को पेंग्विन की आबादी में गिरावट से जुड़े संभावित कारणों के रूप में देखा गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक समुद्र का तापमान बदलने से वहां रहने वाले छोटे जीवों की उपलब्धता और उनके फैलाव पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव उन समुद्री पक्षियों पर पड़ता है जो भोजन के लिए इन्हीं जीवों पर निर्भर रहते हैं। चिनस्ट्रैप पेंग्विन के भोजन में अंटार्कटिक क्रिल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। क्रिल समुद्र में पाए जाने वाले छोटे जीव हैं जो झींगे जैसे दिखाई देते हैं और पेंग्विन समेत कई समुद्री जीवों के लिए भोजन का प्रमुख स्रोत हैं।ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों ने पेंग्विन की आबादी और उनकी गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके तहत ड्रोन से तस्वीरें ली गईं और हवाई तस्वीरों तथा सैटेलाइट रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। कुछ पेंग्विन पर ट्रैकिंग डिवाइस लगाकर यह समझने की कोशिश भी की गई कि वे भोजन की तलाश में किन इलाकों तक जाते हैं। अध्ययन में सामने आया कि ये पेंग्विन द्वीप के उत्तर-पश्चिम में मौजूद ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में भोजन तलाशना पसंद करते हैं। वहां क्रिल मिलने की संभावना रहती है। लेकिन समुद्र के गर्म होने से क्रिल की उपलब्धता और उनके रहने के क्षेत्रों में बदलाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में पेंग्विन को भोजन खोजने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है जिससे उनकी सेहत और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।शोधकर्ताओं ने वर्ष 2016 में जावोडोवस्की द्वीप पर हुए ज्वालामुखी विस्फोट को भी ध्यान में रखा। हालांकि पेंग्विन की आबादी में गिरावट इस घटना से पहले ही शुरू हो चुकी थी। इसलिए वैज्ञानिकों ने विस्फोट को इस लंबे समय से जारी गिरावट का मुख्य कारण नहीं माना है। अध्ययन में समुद्री परिस्थितियों में होने वाले बदलावों को अधिक गंभीरता से समझने की जरूरत पर जोर दिया गया है।पेंग्विन की संख्या में गिरावट के बाद जावोडोवस्की द्वीप अब दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी का दर्जा खो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक अंटार्कटिका के रॉस सागर में स्थित केप अडारे अब दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी के रूप में पहचाना जा रहा है जहां बड़ी संख्या में अडेली पेंग्विन रहते हैं। अध्ययन यह भी संकेत देता है कि पर्यावरण में बदलाव का असर सभी पेंग्विन प्रजातियों पर एक जैसा नहीं पड़ रहा है।वैज्ञानिकों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह समझना है कि जावोडोवस्की द्वीप पर पेंग्विन की आबादी में गिरावट कितनी तेजी से जारी रह सकती है। यदि समुद्र के तापमान और भोजन की उपलब्धता में बदलाव लंबे समय तक जारी रहते हैं तो इन पक्षियों के लिए अपने बच्चों का पालन-पोषण करना और जीवित रहना अधिक कठिन हो सकता है। यह अध्ययन बताता है कि जलवायु परिवर्तन का असर उन दूरस्थ इलाकों में भी दिखाई दे रहा है जहां मानवीय गतिविधियां बहुत सीमित हैं। पेंग्विन की घटती संख्या अंटार्कटिका के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलावों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बन गई है। -

भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा
नई दिल्ली । करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। 36 साल की उम्र में टीम इंडिया के पेस अटैक में दोबारा जगह बनाने वाले भुवनेश्वर के लिए यह वापसी उनके अनुभव और शानदार प्रदर्शन का इनाम मानी जा रही है। लेकिन इसके साथ ही भारतीय तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुने गए भुवनेश्वर की वापसी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जसप्रीत बुमराह के बाद भारतीय तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठाने के लिए भरोसेमंद विकल्प कौन है।भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। अब उसी टीम के विरुद्ध उनकी वापसी की कहानी दिलचस्प संयोग लेकर आई है। भुवनेश्वर ने अपने करियर में 21 टेस्ट 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 121 वनडे मुकाबले खेले हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। इसके अलावा वह सटीक यॉर्कर और नियंत्रित लाइन लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान करने में माहिर हैं। पिछले दो आईपीएल सीजन में उनके प्रदर्शन ने भी चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। करीब आठ की इकॉनमी से 45 विकेट लेने वाले भुवनेश्वर ने साबित किया है कि अनुभव और कौशल के दम पर वह अब भी प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।भुवनेश्वर की वापसी को समझने के लिए भारतीय क्रिकेट के पुराने उदाहरणों पर भी नजर डालना जरूरी है। पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी 2011 विश्व कप के बाद करीब पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद 2016 में टीम इंडिया में वापसी की थी। उस समय उनकी उम्र भी लगभग 36 साल थी। नेहरा ने इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित की और 2017 में संन्यास लिया। ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी को उम्र के लिहाज से असामान्य नहीं कहा जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या यह वापसी केवल उनके मौजूदा प्रदर्शन का परिणाम है या भारतीय टीम को अनुभवी तेज गेंदबाजों की कमी भी महसूस हो रही है।जसप्रीत बुमराह भारतीय गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में टीम को संतुलित रखने की चुनौती बनी रहती है। मोहम्मद शमी लंबे समय तक इस भूमिका को मजबूती से निभाते रहे हैं लेकिन उन्हें लगातार मौके मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मोहम्मद सिराज ने भी कई मुकाबलों में अपनी क्षमता दिखाई है लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी भूमिका और निरंतरता को लेकर चर्चा जारी है। दूसरी ओर अर्शदीप सिंह प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और मयंक यादव जैसे गेंदबाजों ने अलग-अलग मौकों पर उम्मीद जगाई है। इसके बावजूद किसी एक तेज गेंदबाज को तीनों प्रारूपों में लंबे समय तक भरोसेमंद विकल्प मानना अभी आसान नहीं है।भारतीय क्रिकेट के पास बड़ा घरेलू ढांचा आईपीएल जैसा प्रतिस्पर्धी मंच और खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। बल्लेबाजी में हर दौर के बाद नई पीढ़ी सामने आती रही है। सचिन तेंदुलकर सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आए। अब युवा बल्लेबाज भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। तेज गेंदबाजी में हालांकि ऐसी निरंतरता उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती। चोटें कार्यभार प्रबंधन और प्रदर्शन में उतार चढ़ाव तेज गेंदबाजों के करियर को प्रभावित करते रहे हैं।भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसलिए केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी है। बुमराह जैसा गेंदबाज हर पीढ़ी में नहीं मिलता और किसी दूसरे खिलाड़ी से हूबहू उनकी जगह लेने की उम्मीद करना भी सही नहीं होगा। लेकिन टीम के पास ऐसे विकल्प जरूर होने चाहिए जो उनकी अनुपस्थिति में गेंदबाजी को मजबूती दे सकें। न्यूजीलैंड सीरीज भुवनेश्वर के लिए खुद को दोबारा साबित करने का मौका होगी। साथ ही यह चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि वे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा तेज गेंदबाजों को किस तरह तैयार करते हैं। आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुवी के बाद कौन और भविष्य में बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम इंडिया की अगुवाई कौन करेगा।