Author: bharati
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अब बड़े पर्दे पर दिखेगा गुड्डू, मुन्ना और कालीन भैया का भौकाल, मिर्ज़ापुर द मूवी की रिलीज डेट आई सामने
नई दिल्ली । भारत की सबसे चर्चित वेब सीरीज़ मिर्ज़ापुर अब पहली बार फिल्म के रूप में सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। जिस क्राइमसत्ता और बदले की दुनिया ने ओटीटी पर तहलका मचाया थावही कहानी अब और बड़े स्केल के साथ बड़े पर्दे पर दिखाई देगी।जब से मिर्ज़ापुरद मूवी का ऐलान हुआ थाफैंस इसकी रिलीज़ डेट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। अब मेकर्स ने इस इंतज़ार को खत्म करते हुए आधिकारिक तौर पर फिल्म की रिलीज़ डेट का ऐलान कर दिया है।मिर्ज़ापुरद मूवी 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।फिल्म दर्शकों को उसी रॉबेरहम और सत्ता की लड़ाई से भरी दुनिया में ले जाएगीजिसे उन्होंने वेब सीरीज़ में पसंद किया था लेकिन इस बार कहानी का स्केल और भी बड़ा होगा।फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर कालीन भैयाअली फज़ल गुड्डू पंडित और दिव्येंदु त्रिपाठी मुन्ना भैया के आइकॉनिक किरदारों में वापसी कर रहे हैं। इनके अलावा फिल्म में कई पुराने और नए चेहरे भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।फिल्म की स्टार कास्ट में जितेंद्र कुमाररवि किशनअभिषेक बनर्जीरसिका दुग्गलश्वेता त्रिपाठीश्रिया पिलगांवकरहर्षिता गौरसुशांत सिंहमोहित मलिकशीबा चड्ढाराजेश तैलंगकुलभूषण खरबंदा और सोनल चौहान जैसे कलाकार शामिल हैं।मिर्ज़ापुरद मूवी का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया हैजबकि इसकी कहानी पुनीत कृष्णा ने लिखी है। फिल्म को एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर प्रोड्यूस कर रहे हैं।अब देखना दिलचस्प होगा कि सत्ताबदले और खून-खराबे की ये कहानी बड़े पर्दे पर दर्शकों को कितना पसंद आती है। -

प्रदेश में 900 करोड़ की लागत से बन रहे हैं धार्मिक और सांस्कृतिक लोक
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकास भी,विरासत भी‘ के कालजयी मंत्र को ध्येय वाक्य मानकर मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद उज्जैन में ‘श्री महाकाल लोक‘ के लोकार्पण के साथ किया था, वह यात्रा अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक विराट जन-अभियान का रूप ले चुकी है। प्रदेश की पावन धरा पर लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 ‘लोकों‘ का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी गौरवशाली परंपराओं का जीवंत साक्ष्य बनेंगे।धार्मिक एवं सांस्कृतिक वैभव की इस अविरल यात्रा में वर्तमान में 580 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 17 महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक पर तीव्र गति से कार्य संचालित है। सागर में ‘संत रविदास लोक‘ 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह हमारी सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सीहोर जिले के सलकनपुर में ‘देवी लोक‘ और ओरछा में ‘श्रीरामराजा लोक‘ जैसे भव्य प्रकल्प अपनी पूर्णता के करीब हैं। सरकार की संकल्प शक्ति का ही परिणाम है कि मंदसौर में ‘भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर‘ का कार्य पूर्ण कर उसे जनता को समर्पित किया जा चुका है। साथ ही भोपाल में ‘वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक‘, जानापाव में ‘भगवान परशुराम लोक‘ और महेश्वर में ‘देवी अहिल्या संग्रहालय‘ जैसे प्रकल्पों ने पूर्ण होकर प्रदेश के सांस्कृतिक मानचित्र को और अधिक समृद्ध किया है।
जन-आस्था का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने 315 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भविष्य में 3 नए लोक और 2 अन्य लोक के द्वितीय चरण को भी मूर्त रूप दिया जायेगा। ‘श्री महाकाल लोक‘ की भव्यता को प्रेरणा मानकर अब ओंकारेश्वर में ‘ममलेश्वर लोक‘ का निर्माण, बैतूल में ताप्ती उद्गम स्थल में ‘ताप्ती लोक’ और मैहर में ‘माँ शारदा लोक’ का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। महेश्वर में 110 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला ‘देवी अहिल्या लोक‘ और अमरकंटक में ‘माँ नर्मदा लोक‘ के द्वितीय चरण का निर्माण सनातन संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा का परिचायक है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निर्मित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक ‘लोक‘ केवल पत्थर और ईंटों के निर्माण मात्र नहीं हैं, अपितु ये मध्यप्रदेश के विकास के नए ‘ग्रोथ इंजन‘ सिद्ध होंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल‘ के विज़न को आत्मसात करते हुए ये स्थल पर्यटन के वैश्विक केंद्रों के रूप में उभरेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अभूतपूर्व अवसर सृजित होंगे। हस्त शिल्पियों से लेकर सेवा क्षेत्र तक, इन लोकों का विकास हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगा। आस्था का यह महायज्ञ जहाँ एक ओर हमारी जड़ों को सींच रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
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किसानों को सशक्त बनाने किया जा रहा है तकनीक का प्रभावी उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से राज्य में ग्रामीण डेटा प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की गई है। उन्नत तकनीक, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय से यह पहल किसानों के हित में मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रही है। इससे किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी सुरक्षित की जा रही है, जिससे फसल संबंधी डेटा पूरी तरह प्रमाणिक हो रहा है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थल पर ही किया जाए। सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन एआई/एमएल सिस्टम और पटवारी स्तर पर किया जा रहा है। अन्य विभागों द्वारा भी इस डेटा का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। डीसीएस डेटा के आधार पर उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट उपलब्ध न होने की स्थिति में भी सर्वे की विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे के दौरान ली गई फोटो की प्रामाणिकता और सही लोकेशन की पुष्टि प्रणाली द्वारा की जाती है। सर्वे केवल निर्धारित समयावधि में ही संभव है और समय सीमा के बाहर या मोबाइल समय में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वे स्वतः रुक जाता है। एआई या एमएल एल्गोरिदम के माध्यम से डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया गया है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा-ड्रिवन निर्णय लिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री को एकीकृत डिजिटल प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसमें किसानों की पहचान, भूमि विवरण और योजना संबंधी जानकारी का केंद्रीकृत पंजीकरण एवं सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटल एकीकरण, स्थान आधारित रिकॉर्ड और बहु-स्तरीय डेटा जांच शामिल हैं। प्रत्येक किसान को 11 अंकीय विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है, जिससे एक प्रमाणिक और सटीक किसान डेटाबेस (यूनिफाइड डिजिटल प्रोफाइल) तैयार हो रही है।
फार्मर रजिस्ट्री के निर्धारित मानकों का 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। एससीए योजना में भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए 713 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह डिजिटल व्यवस्था डुप्लीकेशन और फर्जी लाभार्थियों पर प्रभावी रोक लगाएगी और भविष्य की सभी डिजिटल कृषि योजनाओं की मजबूत नींव बनेगी। साथ ही, जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से किसानों को आसान कृषि ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
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Bihar Assembly Election: बिहार चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची PK की जन सुराज पार्टी
नई दिल्ली । बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी और कानूनी घमासान तेज हो गया है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज पार्टी ने राज्य में हुए विधानसभा चुनाव को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। पार्टी ने चुनाव के दौरान महिलाओं को सीधे ₹10,000 ट्रांसफर किए जाने को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए इसे अवैध करार दिया है और नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयारजन सुराज पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की शुक्रवार को सुनवाई करेगी। याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है।10 हजार रुपये ट्रांसफर पर उठे सवाल
याचिका में कहा गया है कि चुनाव से ठीक पहले और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने के दौरान राज्य सरकार की ओर से महिला मतदाताओं को ₹10,000 का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण किया गया, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम है। पार्टी का दावा है कि इससे 25 से 35 लाख महिला वोटर्स प्रभावित हुईं, जो सीधे तौर पर भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।संविधान के कई अनुच्छेदों के उल्लंघन का आरोप
जन सुराज पार्टी ने कोर्ट से यह घोषित करने की मांग की है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत चुनावी अवधि में नए लाभार्थियों को जोड़ना और उन्हें भुगतान करना संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का गंभीर उल्लंघन है। साथ ही, चुनाव आयोग को इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की भी अपील की गई है।जीविका दीदियों की तैनाती पर भी आपत्ति
याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि दो चरणों में कराई गई वोटिंग के दौरान जीविका स्वयं सहायता समूह की करीब 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथों पर तैनात किया गया, जो निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है। पार्टी ने इसे अवैध और अनुचित बताया है।दोबारा चुनाव की मांग
जन सुराज पार्टी ने चुनाव में कथित भ्रष्ट आचरणों का हवाला देते हुए बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है। साथ ही, पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु सरकार 2013 मामले में दिए गए निर्देशों को लागू कराए और मुफ्त योजनाओं व डीबीटी स्कीम्स पर स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश तय करे।बढ़ेगा सियासी तापमान
इस याचिका के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में बिहार की सियासत की दिशा तय कर सकता है। -

विरासत में मिला क्रिकेट छोड़ क्यों बॉलीवुड में आए अंगद बेदी, इन फिल्मों के लिए होती है चर्चा
नई दिल्ली । अभिनेता अंगद बेदी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनके जन्मदिन पर आइए आपको बताते हैं बॉलीवुड में उनकी शुरुआत से लेकर अब तक के सफर के बारे में।भारतीय क्रिकेट कप्तान रहे बिशन सिंह बेदी के बेटे अंगद बेदी का आज यानी 6 फरवरी को जन्मदिन है। अंगद बेदी को उनकी फिल्मों से फैंस पहचानते हैं। विरासत में मिला क्रिकेट छोड़ अंगद ने बॉलीवुड में अपना सिक्का आजमाने की कोशिश की है। आइए उनके जन्मदिन के खास दिन पर आपको बताते हैं उनकी निजी जिंदगी से लेकर बॉलीवुड तक के सफर के बारे में।खुद कही थी ये बातअंगद बेदी ने एक इंटरव्यू में खुद कहा था कि मुझे लगता है कि काम ही सबसे ज्यादा जरूरी है। हर इंसान की एक ऐसी पर्सनालिटी बननी चाहिए कि लोग आपके काम से कनेक्ट कर सकें। मैं लाइफ में बेचारा बनकर नहीं रहना चाहता। अंगद ने बताया कि 17 साल की उम्र में उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें अभिनेता बनना है इसके बाद उन्होंने चचेरे भाी की डिफेंस कॉलोनी में एक दुकान में जाकर अमिताभ बच्चन की फिल्में देखना शुरू किया। इन्हीं फिल्मों को देखकर एक्टिंग के प्रति अंगद का रुझान और बढ़ गया।
पिता हो गए थे नाराजएक इंटरव्यू के दौरान अंगद बेदी ने बताया कि उन्होंने बॉलीवुड में काम करने के लिए 18 साल की उम्र में बाल कटवा लिए थे इस बात से उनके पिता इतने नाराज हो गए थे कि 20 साल तक उनसे बात ही नहीं की थी। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने उन दोनों की सुलह करवाई थी।
ऐसे हुई नेहा से मुलाकात
अंगद बेदी ने साल 2018 में नेहा धूपिया से शादी कर ली थी। दोनों की शादी दिल्ली में हुई। खबरों की मानें तो अंगद से शादी से पहले ही नेहा प्रेग्नेंट हो गईं थीं। नेहा और अंगद ने अपने माता-पिता को शादी के बारे में बताने के बाद 72 घंटों में शादी कर ली थी। कपल के एक बेटा और एक बेटी है। अंगद से शादी के पांच महीने बाद ही नेहा धूपिया ने बेटी को जन्म दिया था। वहीं साल 2021 में उन्होंने अपने बेटे गुरिक सिंह धूपिया बेदी का स्वागत किया। इन फिल्मों में नजर आए अंगद बेदीअंगद बेदी को उनकी फिल्म डियर जिंदगीटाइगर जिंदा हैघूमरगुंजन सक्सेनासूरमा जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। अंगद बेदी ने बहुत सी फिल्मों में काम किया हालांकि वे अभी तक किसी फिल्म में मुख्य किरदार के रुप में काम नहीं कर पाए हैं। -

India vs Pakistan पर सस्पेंस गहराया: तूफान से पहले की खामोशी या T20 वर्ल्ड कप का महामुकाबला होगा रद्द?
नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 में होने वाले भारत-पाकिस्तान महामुकाबले को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। 15 फरवरी को प्रस्तावित इस हाई-वोल्टेज मैच से ठीक दस दिन पहले हालात ऐसे बन चुके हैं कि यह कहना मुश्किल हो गया है कि यह खामोशी तूफान से पहले की शांति है या फिर मैच के रद्द होने का साफ संकेत। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे मामले पर आईसीसी बीसीसीआई और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड तीनों की ओर से सार्वजनिक तौर पर चुप्पी साध ली गई है।इस विवाद की शुरुआत 1 फरवरी को हुई जब पाकिस्तान सरकार ने ऐलान किया कि पाकिस्तान की टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा तो लेगी लेकिन 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाले मुकाबले में मैदान पर नहीं उतरेगी। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी। इसके तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की ओर से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को चेतावनी दी गई कि मैच न खेलने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हालांकि इसके बाद से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एक बार फिर यह दोहराया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह मुकाबला नहीं होगा। इससे अटकलों को और हवा मिली है कि यह फैसला सिर्फ क्रिकेट बोर्ड का नहीं बल्कि सीधे सरकार का है। अगर ऐसा है तो आईसीसी के लिए भी स्थिति बेहद जटिल हो जाती है क्योंकि किसी सदस्य देश की टीम का सरकारी आदेश के तहत मैच से हटना एक गंभीर मामला माना जाता है।
हालांकि क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तान के फैसलों को लेकर अनिश्चितता कोई नई बात नहीं है। पिछले साल एशिया कप के दौरान भी ऐसा देखा गया था जब आखिरी वक्त पर पाकिस्तान अपने पहले के रुख से पलट गया था। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि मौजूदा बॉयकॉट का ऐलान अंतिम फैसला नहीं भी हो सकता। लेकिन अगर पाकिस्तान सरकार अपने फैसले पर अड़ी रहती है तो इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मुकाबले का रद्द होना लगभग तय माना जा रहा है।
क्रिकबज की एक रिपोर्ट के मुताबिक आईसीसी और उसके सदस्य किसी भी तरह की काम से गैरहाजिरी को हल्के में नहीं लेंगे। अगर पाकिस्तान टीम मैच नहीं खेलती है तो उस पर भारी जुर्माना अंक कटौती या भविष्य के टूर्नामेंट्स को लेकर सख्त कार्रवाई संभव है। हालांकि यह सजा बाद की प्रक्रिया है फिलहाल फोकस मैच के भविष्य पर टिका है।
कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि दोनों पक्षों के बीच बैक-चैनल बातचीत चल रही है और बीच-बचाव की कोशिशें जारी हैं लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर फैली कि आईसीसी चेयरमैन जय शाह और सीईओ संजोग गुप्ता मुंबई में जियोस्टार के मालिक मुकेश अंबानी से मिले हैं। चूंकि जियोस्टार टी20 वर्ल्ड कप का आधिकारिक ब्रॉडकास्टर है इसलिए इस मुलाकात को मैच को लेकर बड़े फैसले से जोड़कर देखा गया।
हालांकि इस दावे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि जय शाह और संजोग गुप्ता इस समय इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के निमंत्रण पर इटली के मिलान में मौजूद हैं जहां वे 145वें IOC सत्र में हिस्सा ले रहे हैं। आज तारीख 5 फरवरी है और मैच 15 फरवरी को होना है। ऐसे में सवाल अब भी वही है क्या यह खामोशी किसी बड़े समझौते की आहट है या फिर क्रिकेट के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक के रद्द होने की भूमिका? जवाब आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा।
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6 साल बाद बॉलीवुड में कदम रख रहीं प्रियंका चोपड़ा, क्या फिर दिखेंगी ऋतिक और शाहरुख की फ्रेंचाइजी फिल्मों में?
नई दिल्ली।बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी कामयाबी का परचम लहराने वाली प्रियंका चोपड़ा एक बार फिर भारतीय फिल्म गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। करीब 6 साल के लंबे इंतजार के बाद प्रियंका एसएस राजामौली की बहुप्रतीक्षित फिल्म वाराणसी के जरिए बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं लेकिन इस कमबैक से ज्यादा चर्चा अब उनकी पुरानी और सफल फ्रेंचाइजी फिल्मों डॉन 3 और कृष 4 को लेकर हो रही है। हाल ही में अपनी फिल्म वाराणसी के प्रचार के दौरान इंटरनेशनल मीडिया आउटलेट ScreenRant से बातचीत करते हुए प्रियंका से जब इन दोनों फिल्मों के बारे में सीधा सवाल किया गया तो उनके जवाब ने फैंस की धड़कनें तेज कर दीं। प्रियंका ने शरारती मुस्कान के साथ कहा कि वह फिलहाल इस बारे में बात करने के लिए अधिकृत हैं या नहीं उन्हें नहीं पता। उनकी इस रहस्यमयी चुप्पी पर पास ही मौजूद को-स्टार महेश बाबू ने चुटकी लेते हुए कहा कि इसका मतलब साफ है कि पर्दे के पीछे कुछ तो पक रहा है।हालांकि प्रियंका ने बड़ी ही समझदारी से बात को घुमाते हुए कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान वाराणसी पर है जो 6 साल बाद भारत में उनकी पहली फिल्म होने वाली है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि उन्होंने डॉन 3 और कृष 4 का हिस्सा होने की खबरों को सिरे से नकारा भी नहीं है। डॉन फ्रेंचाइजी की बात करें तो प्रियंका इसके शुरुआती दोनों भागों में शाहरुख खान के साथ अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा चुकी हैं। फरहान अख्तर की इस सीरीज में उनका ‘जंगली बिल्ली’ वाला अवतार आज भी फैंस के जेहन में ताजा है। हालांकि डॉन 3 को लेकर हाल के दिनों में कई बदलाव देखने को मिले हैं जहाँ पहले रणवीर सिंह और कियारा आडवाणी के नाम सामने आए थे लेकिन अब समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। ऐसे में प्रियंका की संभावित एंट्री ने फिल्म के प्रति उत्सुकता को दोगुना कर दिया है।
दूसरी तरफ कृष 4 को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है क्योंकि ऋतिक रोशन के साथ प्रियंका की केमिस्ट्री इस फ्रेंचाइजी की जान रही है। खबर है कि इस बार ऋतिक रोशन खुद निर्देशन की कमान संभाल सकते हैं और ऐसे में प्रियंका का पुराने किरदार में लौटना फैंस के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं होगा। फिलहाल प्रियंका की प्राथमिकता राजामौली की वाराणसी है जिसमें महेश बाबू ‘रुद्र’ के एक बेहद शक्तिशाली अवतार में नजर आने वाले हैं। फिल्म का फर्स्ट लुक पहले ही इंटरनेट पर वायरल हो चुका है जिसमें महेश बाबू हाथ में त्रिशूल लिए बैल पर सवार नजर आ रहे हैं। इस फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन भी अहम भूमिका में हैं। अब देखना यह है कि क्या प्रियंका वाकई अपने पुराने किलों यानी डॉन और कृष को फिर से फतह करने की तैयारी कर चुकी हैं।
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गंभीर का मास्टरमाइंड और सूर्या का 'स्काई' अवतार: टी20 विश्व कप में खिताब बचाने उतरेगी कोच-कप्तान की यह बेमिसाल जोड़ी
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में एक नई और आक्रामक युग की शुरुआत हो चुकी है। राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा की सफल विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी अब गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव के कंधों पर है। 72 घंटे से भी कम समय में भारतीय टीम टी20 विश्व कप में अपने खिताब को बचाने के अभियान का आगाज करेगी, और दुनिया भर की नजरें उस केमिस्ट्री पर टिकी हैं जो मैदान के बाहर गंभीर के दिमाग में पकती है और मैदान के अंदर सूर्या के बल्ले से आकार लेती है।आंकड़े दे रहे हैं गवाही नतीजों के लिहाज से देखें तो गंभीर और सूर्या की जोड़ी अब तक अपराजेय सी नजर आई है। 39 मैचों में 31 जीत और लगभग 80 प्रतिशत का जीत का रिकॉर्ड यह बताने के लिए काफी है कि इन दोनों की फ्रीक्वेंसी एक ही धुन पर बज रही है। भारतीय क्रिकेट में अक्सर कप्तान को जनरल माना जाता रहा है, जैसा रवि शास्त्री और विराट कोहली के दौर में था। लेकिन टी20 प्रारूप के बदलते मिजाज ने अब ‘फुटबॉल मैनेजर’ शैली की कोचिंग की मांग की है। यहाँ गंभीर एक रणनीतिकार की भूमिका में हैं और सूर्या उस योजना को शत-प्रतिशत मैदान पर उतारने वाले ‘एक्जीक्यूटर’ हैं।
पुराना रिश्ता, नई इबारत इन दोनों का रिश्ता आज का नहीं है। सूर्यकुमार यादव को पहली बार वैश्विक पहचान तब मिली थी जब वे गौतम गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए फिनिशर की भूमिका निभा रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि सूर्या का मशहूर नाम ‘स्काई’ (SKY) भी उन्हें गंभीर ने ही दिया था। यह भारतीय क्रिकेट का एक खुला राज है कि 2024 में हार्दिक पंड्या के ऊपर सूर्यकुमार को टी20 की कप्तानी दिलाने में गंभीर की अहम भूमिका रही थी। गंभीर को पता था कि सूर्या जैसा निडर खिलाड़ी ही उनकी आक्रामक रणनीति को अंजाम दे सकता है।
अलग मिजाज, एक लक्ष्य निजी तौर पर दोनों ध्रुवों की तरह अलग हैं। गंभीर दिल्ली के एक समृद्ध व्यावसायिक परिवार से आते हैं और स्वभाव से बेहद गंभीर और ‘नो-नॉनसेन्स’ खिलाड़ी रहे हैं। वहीं सूर्या मुंबई के मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और मैदान पर बेहद शांत और हंसमुख नजर आते हैं। लेकिन इस सामाजिक-आर्थिक अंतर के बावजूद दोनों का ‘क्रिकेटिंग डीएनए’ एक है। दोनों ही पक्के राष्ट्रवादी हैं और हार न मानने की जिद्द उनके चरित्र का मुख्य हिस्सा है। गंभीर जानते हैं कि उन्हें सहवाग जैसी नैसर्गिक प्रतिभा नहीं मिली थी, इसलिए उन्होंने कड़ी मेहनत से अपनी जगह बनाई। ठीक उसी तरह सूर्या ने भी लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट में संघर्ष किया और अपनी जगह छीनी।
अब विश्व कप के महामंच पर गंभीर का गेम प्लान तैयार है और सूर्या को बस अपनी उस आजादी के साथ खेलना है जिसके लिए वे जाने जाते हैं। अगर यह जुगलबंदी अपने पूरे शबाब पर रही, तो भारत को अपना विश्व कप खिताब बचाने से रोकना नामुमकिन होगा।
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दिशा पाटनी संग अफेयर की चर्चाओं पर पहली बार बोले सिंगर तलविंदर, क्या मिल गया बॉलीवुड को नया कपल?
नई दिल्ली।बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी और मशहूर सिंगर तलविंदर सिंह सिद्धू के बीच बढ़ती नजदीकियों ने इन दिनों हर तरफ सुर्खियां बटोर रखी हैं। काफी समय से दोनों को एक साथ देखे जाने के बाद अब आखिरकार तलविंदर सिंह ने इन चर्चाओं पर अपनी चुप्पी तोड़ी है जिससे फैंस के बीच उत्साह और असमंजस दोनों बढ़ गए हैं। एक हालिया इंटरव्यू के दौरान जब तलविंदर से दिशा के साथ उनके कथित अफेयर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बेहद ही दिलचस्प और सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। तलविंदर ने खुलासा किया कि उनकी और दिशा की पहली मुलाकात एक्ट्रेस नुपुर सेनन और सिंगर स्टेबिन बेन की शादी से ठीक पहले हुई थी और उस वक्त उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात इंटरनेट पर इस कदर तहलका मचा देगी।तलविंदर के मुताबिक जैसे ही उनकी साथ वाली तस्वीरें वायरल हुईं उन्हें एहसास हुआ कि लोग उन्हें एक कपल के तौर पर देख रहे हैं। रिश्ते की सच्चाई पर बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि वे फिलहाल एक-दूसरे को जानने और समझने की कोशिश कर रहे हैं यानी अभी चीजें शुरुआती दौर में हैं। उन्होंने न तो रिश्ते को पूरी तरह स्वीकार किया और न ही इसे अफवाह बताकर खारिज किया। दिलचस्प मोड़ तब आया जब तलविंदर से सीधे तौर पर उनके प्यार के बारे में पूछा गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्हें तो हर दिन प्यार होता है और वह इस वक्त भी प्यार की गिरफ्त में हैं। हालांकि उन्होंने यह रहस्य बरकरार रखा कि वह प्यार दिशा पाटनी ही हैं या कोई और।
गौरतलब है कि इन दोनों की बॉन्डिंग सबसे पहले नुपुर सेनन की शादी के फंक्शन में नजर आई थी जिसके बाद उन्हें एयरपोर्ट और मुंबई के विभिन्न कार्यक्रमों में साथ देखा गया। दिशा की बेस्ट फ्रेंड मौनी रॉय का तलविंदर के साथ मस्ती करना भी इस बात की गवाही देता है कि सिंगर अब दिशा के करीबी सर्कल का हिस्सा बन चुके हैं। तलविंदर जो हमेशा मास्क के पीछे अपना चेहरा छिपाकर रखते हैं और एक प्राइवेट इंसान माने जाते हैं उनका इस तरह खुलकर बोलना दिशा के फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं है।
वर्क फ्रंट की बात करें तो दिशा पाटनी अपनी प्रोफेशनल लाइफ में भी काफी व्यस्त हैं। हाल ही में फिल्म कंगुआ में नजर आने के बाद अब वह जल्द ही फिल्म ओ रोमियो में शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी के साथ दिखाई देंगी। इसके अलावा वह वेलकम टू द जंगल जैसी बड़ी फिल्मों का भी हिस्सा हैं। अब देखना यह होगा कि दिशा और तलविंदर का यह ‘डिस्कवरी फेज’ कब आधिकारिक रिश्ते में तब्दील होता है।
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कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अब CBSE अंकों को मिलेगी मान्यता: भारतीय छात्रों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का द्वार; रिसर्च के लिए बनेगा CAS सेंटर
नई दिल्ली/कैम्ब्रिज। विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना संजोए भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भारतीय शिक्षा प्रणाली, विशेषकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE के स्तर को वैश्विक मान्यता प्रदान की है। अब CBSE से 12वीं कक्षा पास करने वाले मेधावी छात्र अपने बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के चुनिंदा अंडरग्रेजुएट UG कोर्सेज में प्रवेश के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे। यह कदम न केवल भारतीय छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता पर मुहर भी लगाता है।वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा की पहचान इससे पहले कई विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए भारतीय छात्रों को जटिल प्रक्रियाओं और अतिरिक्त प्रवेश परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के इस फैसले ने उस बाधा को काफी हद तक कम कर दिया है। यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डेबोरा प्रेंटिस ने इस महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय छात्रों में अद्भुत प्रतिभा और जुनून है। कैम्ब्रिज इस मेधा को पहचानते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना चाहता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि केवल 12वीं के अंक ही प्रवेश का एकमात्र आधार नहीं होंगे; छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित अन्य मापदंडों और शर्तों को भी पूरा करना होगा, लेकिन बोर्ड अंकों को मान्यता मिलना प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना देगा।
शैक्षणिक संबंधों को नई दिशाCAS की स्थापना भारत और कैम्ब्रिज के बीच इन शैक्षणिक संबंधों को और गहरा बनाने के लिए यूनिवर्सिटी ने कैम्ब्रिज इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह केंद्र रिसर्च, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के संगम के रूप में कार्य करेगा। CAS का मुख्य उद्देश्य भारत की तेजी से उभरती ‘नॉलेज इकोनॉमी’ को वैश्विक शिक्षा नेटवर्क से जोड़ना है। इस सेंटर के माध्यम से न केवल छात्रों को, बल्कि भारतीय रिसर्च स्कॉलर्स और शिक्षकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध करने और दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ काम करने का बेहतरीन मंच मिलेगा।
भविष्य की राह हुई आसान कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का यह कदम भविष्य में अन्य वैश्विक संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा। इससे भारतीय छात्रों के लिए करियर के नए और रोमांचक रास्ते खुलेंगे। यह पहल उन हजारों परिवारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है जो अपने बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय स्कूली शिक्षा की साख दुनिया भर में बढ़ेगी और वैश्विक विश्वविद्यालयों में भारतीय चेहरों की मौजूदगी पहले से कहीं अधिक प्रभावी और सशक्त होगी।