Author: bharati

  • क्रिकेट जगत में छिड़ी नई जंग! PSL को IPL से आगे बताकर मोहसिन नकवी का बड़ा बयान

    क्रिकेट जगत में छिड़ी नई जंग! PSL को IPL से आगे बताकर मोहसिन नकवी का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष Mohsin Naqvi ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि Pakistan Super League आने वाले समय में Indian Premier League को पीछे छोड़कर दुनिया की नंबर-1 टी20 लीग बन सकती है। उनका मानना है कि पीएसएल तेजी से ग्रोथ कर रही है और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी इसका संकेत है।

    “निवेश बढ़ा, भरोसा भी बढ़ा”

    पीसीबी की बोर्ड मीटिंग में नकवी ने कहा कि पीएसएल 2026 के लिए फ्रेंचाइजी प्रक्रिया में मजबूत भागीदारी देखने को मिली है, जो पाकिस्तान के क्रिकेट इकोसिस्टम में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। उनके अनुसार, पीएसएल अब निवेश के लिए एक आकर्षक बाजार बन चुका है और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

    जमीनी हकीकत कुछ और कहती है

    हालांकि, नकवी के इस बयान के बीच मौजूदा हालात कुछ अलग कहानी बयान करते हैं। इस समय पीएसएल का 11वां सीजन सीमित वेन्यू पर खेला जा रहा है, जबकि आईपीएल बिना किसी बाधा के तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित हो रहा है। इससे दोनों लीग्स के संचालन स्तर में फर्क साफ नजर आता है।

    कमाई और वैल्यू में बड़ा अंतर

    अगर आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो Indian Premier League और Pakistan Super League के बीच भारी अंतर है।

    आईपीएल के मीडिया राइट्स करीब 6 बिलियन डॉलर के हैं
    वहीं पीएसएल की वैल्यू करीब 93 मिलियन डॉलर के आसपास है

    इसके अलावा आईपीएल का सालाना राजस्व 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा है, जबकि पीएसएल का राजस्व लगभग 60 मिलियन डॉलर के आसपास ही है।

    खिलाड़ियों की पहली पसंद IPL

    इंटरनेशनल क्रिकेटर्स की प्राथमिकता भी इस अंतर को दिखाती है। कई खिलाड़ी पीएसएल कॉन्ट्रैक्ट छोड़कर आईपीएल खेलना पसंद करते हैं, क्योंकि यहां ज्यादा पैसा, बेहतर एक्सपोजर और हाई-लेवल प्रतिस्पर्धा मिलती है।

    रैंकिंग में भी पीछे PSL

    वर्ल्ड क्रिकेटर्स एसोसिएशन की हालिया रैंकिंग के मुताबिक:

    Pakistan Super League: 48 अंक (5वां स्थान)
    Indian Premier League: 62.2 अंक (3रा स्थान)
    जबकि The Hundred और SA20 जैसी लीग्स इससे ऊपर हैं।

    विशेषज्ञों की नजर में बयान अतिशयोक्ति

    क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल आईपीएल और पीएसएल के बीच “जमीन-आसमान” का अंतर है-चाहे वह ब्रॉडकास्टिंग क्वालिटी हो, फैन बेस, इंफ्रास्ट्रक्चर या ग्लोबल ब्रांड वैल्यू। ऐसे में नकवी का यह दावा काफी हद तक अतिशयोक्तिपूर्ण नजर आता है।

    पीएसएल भले ही धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हो, लेकिन आईपीएल को पीछे छोड़ने के लिए उसे अभी लंबा सफर तय करना होगा। मौजूदा हालात में दोनों लीग्स की तुलना करना जल्दबाजी होगी।

  • किसानों के लिए बड़ी खबर मध्यप्रदेश में 3627 केंद्रों पर गेहूं खरीदी शुरू तैयारी पूरी

    किसानों के लिए बड़ी खबर मध्यप्रदेश में 3627 केंद्रों पर गेहूं खरीदी शुरू तैयारी पूरी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। 10 अप्रैल से प्रदेश के इंदौर उज्जैन भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में गेहूं खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके साथ ही पंजीकृत किसान 7 अप्रैल से स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे ताकि वे तय समय पर अपने उपज को बेच सकें और अनावश्यक भीड़ से बचा जा सके।

    प्रदेश के अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू होगी जिससे पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से खरीदी सुनिश्चित की जा सके। इस बार गेहूं उपार्जन के लिए किसानों ने बड़े पैमाने पर पंजीयन कराया है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है जो इस बात का संकेत है कि इस बार खरीदी का दायरा और भी व्यापक रहने वाला है।

    राज्य सरकार ने भी इस बार व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे मध्यप्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं जहां किसानों से गेहूं की खरीदी की जाएगी। अनुमान है कि इस सीजन में करीब 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जाएगा। इसके लिए बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है और अतिरिक्त बारदाना खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है ताकि कहीं कोई कमी न रह जाए।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। बिजली पानी बैठने की व्यवस्था छाया प्रसाधन और पार्किंग जैसी सुविधाएं हर केंद्र पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को लंबी कतारों में न खड़ा रहना पड़े और उनकी उपज का तौल समय पर हो सके।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीदी शुरू होने से पहले सभी केंद्रों का गहन निरीक्षण किया जाए और तौल कांटों की सटीकता को लेकर किसी भी तरह की शिकायत की गुंजाइश न रहे। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसानों के खातों में भुगतान समय पर और पारदर्शी तरीके से किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने किसानों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि किसान पहले से ही कई समस्याओं का सामना कर रहा है ऐसे में सरकार को और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो मध्यप्रदेश में इस बार गेहूं खरीदी को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है और कोशिश की जा रही है कि किसानों को अधिकतम सुविधा और न्यूनतम परेशानी के साथ उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। यह खरीदी अभियान न केवल किसानों की आय को मजबूत करेगा बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था को भी नई दिशा देगा।

  • CSK की रणनीति पर सवाल! अंबाती रायुडू बोले- टीम ने नहीं किया कोई बदलाव

    CSK की रणनीति पर सवाल! अंबाती रायुडू बोले- टीम ने नहीं किया कोई बदलाव


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में Chennai Super Kings का खराब प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। रविवार को Royal Challengers Bengaluru के खिलाफ 43 रन से मिली हार के बाद टीम की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मैच में हार के साथ ही सीएसके ने अपने शुरुआती तीनों मुकाबले गंवा दिए, जिससे टीम अंकतालिका में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई।

    “गलत प्लान पर अड़ी रही टीम”

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर Ambati Rayudu ने सीएसके की रणनीति की जमकर आलोचना की। उनका कहना है कि टीम ने शुरुआत से ही गलत योजना अपनाई और पूरे मैच में उसे बदलने की कोशिश तक नहीं की। उन्होंने कहा कि मैच के दौरान हालात के अनुसार रणनीति में बदलाव करना बेहद जरूरी होता है, लेकिन सीएसके ऐसा करने में पूरी तरह नाकाम रही।

    कप्तानी  फैसलों पर भी सवाल

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान Aaron Finch ने भी टीम की कप्तानी पर सवाल उठाए। उन्होंने Ruturaj Gaikwad के फैसलों को निराशाजनक बताया और कहा कि समस्या सिर्फ योजना बनाने में नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से लागू करने में भी रही। उनके मुताबिक, जब प्लान और उसका execution दोनों फेल हो जाएं, तो टीम के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

    गेंदबाजी में दिखी बड़ी कमजोरी

    मैच के दौरान सीएसके की गेंदबाजी भी पूरी तरह बिखरी नजर आई। Jamie Overton लगातार एक ही एंगल से गेंदबाजी करते रहे, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने रणनीति बदलने की जरूरत महसूस नहीं की। इसके अलावा डेथ ओवर्स में गेंदबाजों ने वापसी करने की कोशिश भी नहीं की, जो एक अनुभवी टीम से उम्मीद की जाती है।

    आखिरी 5 ओवर पड़े भारी

    आरसीबी ने 15 ओवर में 153/3 का स्कोर बनाया था, लेकिन आखिरी 5 ओवरों में 97 रन जोड़कर मैच पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया। सीएसके के गेंदबाज-Khaleel Ahmed, Noor Ahmad, Anshul Kamboj और ओवरटन-इस दौरान काफी महंगे साबित हुए।

    बल्लेबाजी भी नहीं बचा पाई मैच

    250 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए सीएसके की टीम 19.4 ओवर में 207 रन पर सिमट गई। हालांकि बल्लेबाजों ने कोशिश की, लेकिन शुरुआत में विकेट गिरने और रन रेट के दबाव ने टीम को पीछे कर दिया।

    अंकतालिका में फिसली CSK

    लगातार तीन हार के बाद Chennai Super Kings की स्थिति बेहद खराब हो गई है। टीम फिलहाल अंकतालिका में 10वें स्थान पर है, जो उनके फैंस के लिए चिंता का विषय बन गया है।

    सीएसके की हार सिर्फ एक खराब दिन का नतीजा नहीं, बल्कि रणनीति और फैसलों की लगातार गलतियों का परिणाम है। अगर टीम को वापसी करनी है, तो उसे अपनी योजनाओं में लचीलापन और बेहतर execution दिखाना होगा।

  • आरबीआई की सख्ती से बैंक शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप; आगे और गिरावट की आशंका

    आरबीआई की सख्ती से बैंक शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप; आगे और गिरावट की आशंका


    मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया सख्त नीति और रुपये को संभालने के प्रयासों का असर बैंकिंग शेयरों पर दिखने लगा है। पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय बैंकों की मार्केट वैल्यू करीब 95 अरब डॉलर घट गई है, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह दबाव और बढ़ सकता है।

    रुपये को संभालने की कोशिश, बैंकों पर असर

    रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया।

    इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की निकासी

    आंकड़ों के मुताबिक मार्च के पहले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने वित्तीय कंपनियों के शेयरों से लगभग 327 अरब रुपये (करीब 3.5 अरब डॉलर) निकाल लिए। इसी दौरान बैंकिंग इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह बियर मार्केट की सीमा (20% गिरावट) के करीब पहुंच गया।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    क्रांति बथिनी का कहना है कि मौद्रिक नीति के सख्त बने रहने से बैंक स्टॉक्स पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि गिरावट के बाद इन शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक होने की बात भी उन्होंने कही।

    पूरे बाजार पर असर का खतरा

    रिपोर्ट्स के अनुसार बैंकिंग शेयर लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर के भारतीय शेयर बाजार का करीब एक-तिहाई हिस्सा हैं। ऐसे में बैंक शेयरों में कमजोरी बनी रहती है तो इसका असर व्यापक बाजार पर पड़ सकता है।

    उम्मीद की किरण भी
    कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत रहने से बैंकिंग सेक्टर संभल सकता है। फिलहाल बैंकिंग इंडेक्स करीब 1.5 गुना वन-ईयर फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक पर ट्रेड कर रहा है, जो 2020 के बाद निचले स्तरों में है। Citibank ने भी सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों को प्राथमिकता देना शुरू किया है।

    आगे का खतरा

    रिपोर्ट्स के मुताबिक Jefferies का अनुमान है कि करेंसी ट्रेड्स पर बैंकों को करीब 50 अरब रुपये तक का नुकसान हो सकता है। वहीं Fitch Ratings के अनुसार सख्त वित्तीय हालात से बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 20-30 बेसिस प्वाइंट तक घट सकता है।
    रजत अग्रवाल ने कहा कि हाल की तेज क्रेडिट ग्रोथ पर वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे कारकों का असर देखने लायक होगा।
    कुल मिलाकर, आरबीआई की सख्ती, विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते बैंकिंग सेक्टर पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है, हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है।

  • 5 किलो ‘छोटकू’ LPG सिलेंडरों की बढ़ी बिक्री, 14 दिन में 6.6 लाख बिके; बिना पते के भी खरीदने की सुविधा

    5 किलो ‘छोटकू’ LPG सिलेंडरों की बढ़ी बिक्री, 14 दिन में 6.6 लाख बिके; बिना पते के भी खरीदने की सुविधा

    क करीब 6.6 लाख छोटे सिलेंडर बाजार में बेचे जा चुके हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

    बिना पते के भी मिलेंगे छोटे सिलेंडर

    सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर से अलग, पांच किलोग्राम के छोटे सिलेंडर (एफटीएल) बाजार मूल्य पर उपलब्ध हैं। इन्हें लेने के लिए उपभोक्ताओं को पते का प्रमाण देना आवश्यक नहीं है। मंत्रालय ने बताया कि 4 अप्रैल को ही 90 हजार से अधिक छोटे सिलेंडरों की बिक्री दर्ज की गई।

    घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य

    मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। एक ही दिन में 51 लाख से अधिक घरेलू सिलेंडर वितरित किए गए, जबकि कुल मांग का लगभग 95 प्रतिशत ऑनलाइन बुकिंग के जरिए पूरा किया गया।

    कालाबाजारी पर सख्ती

    जमाखोरी और अवैध बिक्री रोकने के लिए कार्रवाई भी तेज की गई है। मार्च से अब तक

    50,000 से अधिक सिलेंडर जब्त
    1,400 से ज्यादा कारण बताओ नोटिस जारी
    36 डीलरशिप निलंबित
    कॉमर्शियल गैस और नेचुरल गैस की स्थिति

    कॉमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को संकट से पहले के स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक रखा गया है, जबकि छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। सरकार ने बताया कि घरेलू उपयोग और परिवहन के लिए नेचुरल गैस की आपूर्ति सामान्य है। उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आपूर्ति 6 अप्रैल से औसत खपत के करीब 90 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएगी, जिसे आने वाले एलएनजी कार्गो का समर्थन मिलेगा।

    घबराकर खरीदारी न करने की अपील

    मंत्रालय ने कहा कि सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है। लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
    छोटे सिलेंडरों की बढ़ती उपलब्धता से अस्थायी जरूरत वाले उपभोक्ताओं और कम खपत वाले परिवारों को खास राहत मिल सकती है।

  • सरमा की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट, कांग्रेस के आरोपों पर बिफरे असम के सीएम

    सरमा की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट, कांग्रेस के आरोपों पर बिफरे असम के सीएम

    गुआहाटी। असम में रविवार को तगड़ा सियासी विवाद शुरू हो गया। इसकी शुरुआत हुई कांग्रेस के आरोपों के साथ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। वहीं, सरमा ने पलटवार किया है।

    असम में रविवार को तगड़ा सियासी विवाद शुरू हो गया। इसकी शुरुआत हुई कांग्रेस के आरोपों के साथ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। इसके अलावा उनके नाम विदेश में संपत्ति होने की बात भी कही गई। इसके कुछ ही देर बाद असम के मुख्यमंत्री सरमा ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस के सभी आरोपों को नकारते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया।

    कांग्रेस की बेचैनी और घबराहट
    सरमा ने एक्स पर लिखा कि पवन खेड़ा की आज की प्रेस कांफ्रेंस, कांग्रेस के अंदर की बेचैनी और घबराहट को दिखाती है। असम इस चुनाव में एक ऐतिहासिक जनमत देने जा रहा है। ऐसे में इस तरह के बेबुनियाद आरोप और हमले, उनकी डूबती जमीन दिखाते हैं। खेड़ा के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, फैब्रिकेटेड और राजनीति से प्रेरित बताते हुए सरमा ने कहाकि वह और उनकी पत्नी 48 घंटे के भीतर उनके खिलाफ आपराधिक और मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे। खेड़ा को अपनी बातों की जिम्मेदारी लेने होगी।

    पवन खेड़ा ने क्या कहा था
    इससे पहले दिन में पवन खेड़ा ने कुछ कागजात दिखाए और दावा किया कि उन्हें विदेश से हासिल किया गया है।

    खेड़ा ने कहाकि असम के मुख्यमंत्री पवन खेड़ा की पत्नी रिनिकी के पास यूएई, इजिप्ट और एंटीगुआ व बरबूडा के पासपोर्ट हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिनिकी के पास दुबई में प्रॉपटी्र हैं। इसके अलावा अमेरिका के व्योमिंग में एक रजिस्टर्ड कंपनी है, जिसका बजट 34.67 बिलियन डॉलर है। साथ ही होटल इंडस्ट्री में एंट्री की भी योजना हैं।

    कानून के पालन पर सवाल
    खेड़ा ने आगे मुख्यमंत्री की भारतीय कानूनों के पालन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहाकि यह सारी संपत्तियां, सरमा के चुनावी हलफनामे में दर्ज नहीं थीं। साथ ही यह भी पूछा कि क्या भारत में दोहरी नागरिकता की इजाजत है।

    कांग्रेस प्रवक्ता ने आगामी चुनाव के लिए हिमंता सरमा को अयोग्य घोषित करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि अघोषित अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियां भ्रष्टाचार को दिखाती हैं। साथ ही यह भी आशंका है कि अगर चुनावी नतीजे इनके अनुकूल नहीं हुए तो यह लोग विदेश जा सकते हैं। खेड़ा ने मामले में केंद्रीय मंत्री अमित शाह से जांच करने और एसआईटी का गठन करने की मांग उठाई।
  • 83 की उम्र में Amitabh Bachchan ने जाहिर की चिंता, बोले- एंग्जायटी में जीना है हानिकारक

    83 की उम्र में Amitabh Bachchan ने जाहिर की चिंता, बोले- एंग्जायटी में जीना है हानिकारक


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक Amitabh Bachchan पिछले करीब 6 दशकों से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और अपनी जबरदस्त अनुशासन और समय की पाबंदी के लिए जाने जाते हैं। 83 साल की उम्र में भी उनका काम के प्रति समर्पण ऐसा है कि वे आज भी हर दिन काम करना चाहते हैं। हाल ही में अपने ब्लॉग में उन्होंने खुलासा किया कि उनके लिए बिना काम का दिन बिताना काफी असहज और परेशान करने वाला होता है।

    “खाली दिन लगता है अजीब”

    अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा कि जब कोई दिन बिना काम के गुजरता है, तो उन्हें अजीब महसूस होता है। उन्होंने कहा कि रोज़ाना एक तय रूटीन में काम करने की आदत बन जाती है, और जब वह अचानक टूटती है तो पूरा दिन एक “मिस्ट्री” जैसा लगने लगता है। उनके मुताबिक, यह बदलाव मन को अस्थिर कर देता है, क्योंकि वे हमेशा अपने समय का सही उपयोग करने में विश्वास रखते हैं।

    एंग्जायटी को बताया खतरनाक

    अपने ब्लॉग में बिग बी ने चिंता (एंग्जायटी) पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जब चीजें योजना के मुताबिक नहीं चलतीं, तो मन में बेचैनी बढ़ने लगती है। अगर इसे समझा न जाए तो यह मानसिक और शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने साफ कहा कि एंग्जायटी में जीना इंसान को कमजोर बना देता है और इससे बचना जरूरी है।

    हर उम्र में काम जरूरी

    यह पहला मौका नहीं है जब Amitabh Bachchan ने काम को लेकर अपनी भावनाएं जाहिर की हैं। इससे पहले भी वे कई बार कह चुके हैं कि उम्र चाहे जो भी हो, इंसान को सक्रिय रहना चाहिए। उनके लिए काम सिर्फ प्रोफेशन नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है।

    फिल्मों और टीवी में लगातार सक्रिय

    हाल ही में अमिताभ बच्चन को फिल्म Kalki 2898 AD में दमदार भूमिका में देखा गया था, जिसमें उनकी एक्टिंग की काफी तारीफ हुई। अब दर्शक इसके अगले पार्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने टीवी के लोकप्रिय शो Kaun Banega Crorepati के 17वें सीजन को हाल ही में अलविदा कहा है, लेकिन फैंस उन्हें फिर से स्क्रीन पर देखने के लिए उत्साहित हैं।


    क्यों हैं सबसे अलग?

    अमिताभ बच्चन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि उन्होंने अपने करियर में कभी भी लापरवाही नहीं दिखाई। समय की पाबंदी, काम के प्रति समर्पण और लगातार खुद को सक्रिय रखने की आदत ही उन्हें आज भी बाकी कलाकारों से अलग बनाती है।

    अमिताभ बच्चन सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि अनुशासन और मेहनत की मिसाल हैं। उनका मानना है कि काम से जुड़ा रहना ही जीवन को संतुलित और सार्थक बनाता है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच 45 दिन के युद्धविराम की चर्चा

    ईरान-अमेरिका तनाव के बीच 45 दिन के युद्धविराम की चर्चा

    वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच संभावित युद्धविराम की उम्मीद जगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान समेत कई देशों की मध्यस्थता से 45 दिनों के सीजफायर प्लान पर बातचीत शुरू हो गई है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बना हुआ है।
    45 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव

    रिपोर्ट के मुताबिक दो चरणों वाला प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है—

    पहला चरण: 45 दिन का अस्थायी युद्धविराम
    दूसरा चरण: स्थायी शांति समझौते पर बातचीत

    बताया गया है कि जरूरत पड़ने पर सीजफायर की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।

    किन देशों की मध्यस्थता?

    सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के अलावा तुर्किये और मिस्र भी दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से भी कहा गया है कि संघर्षविराम के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    ईरान की शर्तें

    सूत्रों के अनुसार ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए कुछ मांगें रखी हैं, जिनमें

    युद्ध का हर्जाना
    सुरक्षा की गारंटी
    कुछ प्रतिबंधों में राहत
    जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी बातचीत अहम मानी जा रही है।
    ट्रंप की चेतावनी

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जल्द समझौता होने की संभावना है, लेकिन अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो हमले तेज किए जा सकते हैं।

    उन्होंने जलमार्ग खुला रखने को लेकर भी सख्त रुख दिखाया।

    ईरान का पलटवार

    ईरान के संस्कृति मंत्री सैयद रजा सालिही-अमीरी ने ट्रंप के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी समाज उन्हें गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने कहा कि होर्मुज दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए नहीं।
    कुल मिलाकर, 45 दिन के संभावित युद्धविराम पर बातचीत ने तनाव के बीच उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन शर्तों और भरोसे की कमी के कारण स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

  • तमिलनाडु चुनाव में ब्राह्मण उम्मीदवारों की कमी, बड़ी पार्टियों की रणनीति ने खड़े किए सवाल

    तमिलनाडु चुनाव में ब्राह्मण उम्मीदवारों की कमी, बड़ी पार्टियों की रणनीति ने खड़े किए सवाल


    चेन्नई। तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की उम्मीदवार सूची में एक खास रुझान देखने को मिल रहा है—ब्राह्मण समुदाय के उम्मीदवार लगभग गायब हैं। राज्य की आबादी में करीब 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस समुदाय को टिकट देने से प्रमुख पार्टियां इस बार बचती नजर आईं, जिसे विश्लेषक नई चुनावी रणनीति से जोड़ रहे हैं।
    प्रमुख दलों ने नहीं दिए टिकट

    करीब 35 वर्षों में पहली बार अन्नाद्रमुक ने विधानसभा चुनाव में एक भी ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं उतारा। दिवंगत नेता जे. जयललिता के निधन के बाद पार्टी ने पिछले एक दशक में केवल एक ब्राह्मण उम्मीदवार को मौका दिया था। 2021 में पूर्व डीजीपी आर. नटराज को टिकट दिया गया था।

    इसी तरह भारतीय जनता पार्टी ने भी 27 सीटों में से किसी पर ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं उतारा।

    द्रमुक और कांग्रेस ने भी इस समुदाय को प्रतिनिधित्व नहीं दिया।

    छोटे दलों ने दिए सीमित टिकट

    हालांकि तमिलगा वेत्रि कझगम (अभिनेता विजय की पार्टी) ने दो ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि नाम तमिलर कच्ची ने छह उम्मीदवार मैदान में उतारे। इन दलों ने मायिलापुर और श्रीरंगम जैसे क्षेत्रों को चुना, जहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है।

    रणनीति के पीछे क्या वजह?
    विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक ब्राह्मण मतदाता अन्नाद्रमुक के साथ रहे, लेकिन हाल के वर्षों में उनका झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा है। इसी कारण अन्नाद्रमुक को ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने में चुनावी लाभ नहीं दिख रहा। राजनीतिक टिप्पणीकार रवींद्रन दुरईसामी के अनुसार, पहले एम.जी. रामचंद्रन और जयललिता ब्राह्मण उम्मीदवारों को नियमित तौर पर मौका देते थे।

    वहीं विश्लेषक अरुण कुमार का कहना है कि जयललिता के निधन के बाद ब्राह्मण मतदाता भाजपा की ओर गए, जिससे अन्य दलों ने इस वर्ग पर कम ध्यान देना शुरू कर दिया।

    अलग-अलग दलों की अलग रणनीति
    TVK ब्राह्मण उम्मीदवार देकर खुद को गैर-ब्राह्मण राजनीति तक सीमित नहीं दिखाना चाहती
    DMK की राजनीति पारंपरिक रूप से गैर-ब्राह्मण सशक्तिकरण पर केंद्रित रही है
    NTK प्रमुख सीमन पहचान आधारित राजनीति पर जोर देते रहे हैं
    कुल मिलाकर, चुनावी समीकरणों और सामाजिक समीकरणों के बदलते रुझान के कारण तमिलनाडु की राजनीति में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व घटता नजर आ रहा है, जिसे विश्लेषक राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत मान रहे हैं।
  • 11 अप्रैल से गुरु की राशि में बनेगा मंगल-बुध-शनि का त्रिग्रही योग, 4 राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा


    नई दिल्ली। अप्रैल की शुरुआत मीन राशि में मंगल, शनि और सूर्य के त्रिग्रही योग के साथ हुई, और यह योग 14 अप्रैल 2026 तक सक्रिय रहेगा, जब सूर्य मीन से मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 10 और 11 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि 01:20 बजे बुध मीन राशि में गोचर करेंगे, जिससे मीन राशि में बुध, मंगल, शनि और सूर्य मिलकर चतुर्ग्रही योग बनाएंगे।

    21 दिन तक त्रिग्रही योग का असर

    सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के बाद भी मीन राशि में मंगल, बुध और शनि रहेंगे और यह त्रिग्रही योग 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगा। 30 अप्रैल को बुध के मेष राशि में गोचर करने के बाद यह योग समाप्त होगा। इस अवधि में 4 राशियों को धन लाभ, करियर तरक्की और निवेश में फायदा मिलेगा, जबकि मेष, सिंह और कुंभ राशि वालों को सतर्क रहने की जरूरत है।

    वृषभ राशि – नए धन स्रोत मिलेंगे

    11 अप्रैल से वृषभ राशि वालों के लिए धन लाभ के योग बन रहे हैं। नए स्रोतों से आमदनी बढ़ेगी। बिजनेस करने वालों के लिए बड़ी डील फाइनल होने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या बोनस मिलने के योग हैं।

    मिथुन राशि – करियर में उछाल

    मिथुन राशि के स्वामी बुध के त्रिग्रही योग में शामिल होने से करियर में बड़ा उछाल आएगा। नौकरी में पदोन्नति और सैलरी बढ़ोतरी के मौके मिल सकते हैं। कारोबारियों के लिए समय बहुत फायदेमंद रहेगा और पैसों की आवक बढ़ेगी।

    वृश्चिक राशि – निवेश से लाभ

    त्रिग्रही योग वृश्चिक राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ाएगा। साहसिक निवेश और फैसलों से बड़ा रिटर्न मिलने के योग हैं। कुछ जातक अचानक मालामाल हो सकते हैं, लेकिन फैसले सोच-समझकर लें।

    धनु राशि – विदेश यात्रा और संपत्ति लाभ

    धनु राशि के स्वामी गुरु हैं और यह योग धनु राशि वालों को पैतृक संपत्ति या फंसे हुए पैसे की वापसी का अवसर देगा। कुछ जातकों के लिए विदेश यात्रा के भी योग बन रहे हैं।