Author: bharati

  • 40 घंटे तक थमी रही दिल की धड़कन, आधुनिक इलाज और डॉक्टरों की कोशिशों ने मरीज को दी नई जिंदगी

    40 घंटे तक थमी रही दिल की धड़कन, आधुनिक इलाज और डॉक्टरों की कोशिशों ने मरीज को दी नई जिंदगी

    नई दिल्ली । पूर्वी चीन में सामने आया एक दुर्लभ चिकित्सा मामला आधुनिक मेडिकल साइंस की क्षमताओं और समय पर मिले उपचार के महत्व को रेखांकित करता है। लगभग 40 वर्षीय एक व्यक्ति, जिसे सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई की शिकायत थी, अस्पताल पहुंचने के कुछ ही समय बाद अचानक गंभीर स्थिति में चला गया। इलाज के दौरान उसका दिल और सांस दोनों एक साथ बंद हो गए। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति को अत्यंत गंभीर माना जाता है और लंबे समय तक हृदय की धड़कन बंद रहने पर बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है। इसके बावजूद चिकित्सकों ने लगातार प्रयास जारी रखे और अंततः मरीज को सुरक्षित जीवन वापस दिलाने में सफलता हासिल की।

    अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के साथ ही मरीज का उपचार शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई। चिकित्सकों ने कार्डियक अरेस्ट के बाद हृदय को दोबारा सक्रिय करने के लिए आवश्यक सभी मानक प्रक्रियाएं अपनाईं। कई बार इलेक्ट्रिक शॉक देने सहित अन्य आपातकालीन उपाय किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। इसके बाद विशेषज्ञों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्नत लाइफ सपोर्ट तकनीकों का सहारा लेने का निर्णय लिया।

    मरीज को ऐसी मशीन से जोड़ा गया जिसने अस्थायी रूप से उसके दिल और फेफड़ों का कार्य संभाल लिया। यह प्रणाली शरीर से रक्त निकालकर उसमें ऑक्सीजन मिलाती है और फिर उसे वापस शरीर में पहुंचाती है, जिससे आवश्यक अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनी रहती है। इसके साथ एक अन्य सहायक उपकरण का उपयोग भी किया गया, जिससे हृदय पर दबाव कम रखने और रक्त संचार को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिली। इन आधुनिक तकनीकों के कारण मरीज के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को लगातार ऑक्सीजन मिलती रही।

    करीब 40 घंटे तक मरीज का शरीर पूरी तरह इन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। इस दौरान डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखती रही और आवश्यक चिकित्सकीय बदलाव करती रही। लंबे समय तक हृदय की सामान्य धड़कन वापस न आने के बावजूद इलाज जारी रखा गया। आखिरकार लगभग दो दिन बाद मरीज के हृदय ने स्वयं दोबारा काम करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसकी धड़कन सामान्य होने लगी और शरीर ने उपचार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया।

    आगे की जांच में चिकित्सकों ने पाया कि मरीज गंभीर मायोकार्डाइटिस यानी हृदय की मांसपेशियों में सूजन से पीड़ित था। यह बीमारी कई मामलों में तेजी से हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है और समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मामलों में शीघ्र पहचान, लगातार निगरानी और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    लगातार इलाज और निगरानी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार होता गया। लगभग तीन सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों की त्वरित निर्णय क्षमता और समय पर मिले उपचार ने इस चुनौतीपूर्ण मामले को सफल परिणाम तक पहुंचाया। यह घटना बताती है कि गंभीर कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति में भी उचित चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक उपकरण और निरंतर चिकित्सकीय प्रयास कई बार असंभव लगने वाली परिस्थितियों को भी सकारात्मक परिणाम में बदल सकते हैं। ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी प्रगति और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था के महत्व को भी स्पष्ट रूप से सामने लाती हैं।

  • स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद आंदोलन में सक्रिय अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर को लेकर समर्थकों से की भावुक अपील

    स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद आंदोलन में सक्रिय अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर को लेकर समर्थकों से की भावुक अपील


    नई दिल्ली ।
    जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों से एक भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह तेज बुखार और शरीर में दर्द से जूझ रहे हैं। इसी कारण उन्होंने कहा कि यदि वह निर्धारित समय पर प्रदर्शन स्थल पर दिखाई न दें तो इसे उनकी मजबूरी समझा जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि कुछ घंटे आराम करने के बाद वह फिर से आंदोलन में शामिल होंगे।

    अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में बताया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के बावजूद वह लगातार पेनकिलर की मदद से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार चल रहे बुखार और बॉडी पेन के कारण चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कुछ समय आराम करना जरूरी हो गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि यदि वह कुछ समय के लिए जंतर-मंतर पर मौजूद न रहें तो इसे आंदोलन से दूरी के रूप में न देखा जाए।

    उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि स्वास्थ्य में सुधार होते ही वह शाम तक दोबारा प्रदर्शन स्थल पर लौटने का प्रयास करेंगे। उनके इस संदेश के बाद समर्थकों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और आंदोलन जारी रखने का भरोसा भी जताया। पार्टी के नेताओं का कहना है कि आंदोलन अपनी निर्धारित रणनीति के अनुसार चलता रहेगा और कार्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित किए जाने का आरोप भी लगाया है। पार्टी का दावा है कि प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं, जिससे आंदोलन से जुड़े लोगों को संवाद और समन्वय में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि कहीं प्रशासन किसी नई कार्रवाई की तैयारी तो नहीं कर रहा। हालांकि इस संबंध में प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।

    जानकारी के अनुसार अभिजीत दीपके पिछले कई सप्ताह से लगातार जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आंदोलन की तैयारियों, समर्थकों से मुलाकात, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा और लगातार व्यस्त कार्यक्रम के कारण उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल सका। पार्टी का कहना है कि लगातार व्यस्त रहने और शारीरिक थकान के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी है।

    इससे पहले भी अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर तैनात पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों से शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से चलाया जा रहा है तथा किसी भी प्रकार के टकराव से बचना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सुरक्षा बलों से प्रदर्शनकारियों के प्रति संयम बरतने का अनुरोध भी किया था।

    राजधानी में जारी इस आंदोलन पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार नजर बनी हुई है। विभिन्न संगठनों और समर्थकों की मौजूदगी के बीच प्रदर्शन जारी है, जबकि प्रशासन भी स्थिति पर निगरानी रखे हुए है। अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य संबंधी संदेश के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि उनकी अस्थायी अनुपस्थिति केवल चिकित्सकीय कारणों से हो सकती है और स्वास्थ्य में सुधार होने पर वह फिर से आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

  • जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात

    जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात


    नई दिल्ली । जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। लंबे समय तक आंदोलन को सीमित मानकर चल रही केंद्र सरकार ने अब अपना रुख बदलते हुए सक्रिय पहल शुरू कर दी है। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और सरकार ने न केवल अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से संपर्क किया बल्कि आंदोलन में घायल छात्रों से मिलने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल भी भेजा। इसके साथ ही संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को भी सरकार ने स्वीकार कर लिया।

    नीट पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन शुरुआती दिनों में सीमित दायरे में दिखाई दे रहा था। जंतर मंतर पर कम संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को देखते हुए माना जा रहा था कि यह आंदोलन ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा। लेकिन जैसे जैसे छात्रों का समर्थन बढ़ा और संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया स्वरूप लिया वैसे वैसे राजनीतिक माहौल भी बदलने लगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के धरने ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। इसके बाद सरकार ने तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव किया। कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पहुंचे और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। इससे पहले आंदोलन के प्रतिनिधियों को सरकार से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था लेकिन बाद में परिस्थितियां तेजी से बदल गईं।

    सरकार ने संसद में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए भी सहमति जताई। हालांकि विपक्ष ने इस पर नई शर्त रखते हुए कहा कि चर्चा तभी सार्थक होगी जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

    इस बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा कि सभी ने उन्हें याद दिलाया है कि देश और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अभी बाकी है। वांगचुक ने कहा कि वह भी जीना चाहते हैं और अपने छात्रों तथा शिक्षा से जुड़े कार्यों में जल्द लौटना चाहते हैं लेकिन आंदोलन के उद्देश्यों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर युवाओं में पहले से ही असंतोष था। यही कारण है कि आंदोलन धीरे धीरे व्यापक समर्थन हासिल करता गया और सरकार को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संसद में होने वाली चर्चा और सरकार के अगले कदम इस पूरे विवाद का क्या समाधान निकालते हैं।

  • शूटिंग के दौरान चोटिल हुए नंदमुरी बालकृष्ण, अस्पताल बोला हालत स्थिर लेकिन डॉक्टरों की निगरानी जारी

    शूटिंग के दौरान चोटिल हुए नंदमुरी बालकृष्ण, अस्पताल बोला हालत स्थिर लेकिन डॉक्टरों की निगरानी जारी


    नई दिल्ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता नंदमुरी बालकृष्ण की सेहत को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। हाल ही में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके पैर में गंभीर चोट लग गई थी जिसके बाद उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद के एआईजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल अपडेट के अनुसार अभिनेता की हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है और वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में हैं।

    जानकारी के मुताबिक 66 वर्षीय नंदमुरी बालकृष्ण को 21 जुलाई को आंध्र प्रदेश के राजामहेंद्रवरम में एक एक्शन सीन की शूटिंग के दौरान चोट लगी। शुरुआत में मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने उनका प्राथमिक उपचार किया लेकिन चोट की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तुरंत हैदराबाद रेफर किया गया ताकि विस्तृत जांच और बेहतर इलाज किया जा सके।

    एआईजी अस्पताल द्वारा जारी हेल्थ बुलेटिन में बताया गया है कि शुरुआती जांच में अभिनेता के बाएं घुटने के आसपास के ऊतकों में रक्त जमा होने और सूजन के संकेत मिले हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति मांसपेशियों में खिंचाव और मांसपेशी के फटने की ओर इशारा करती है। फिलहाल आर्थोपेडिक सर्जनों की एक विशेषज्ञ टीम उनकी लगातार जांच कर रही है और चोट की गंभीरता का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।

    अस्पताल ने यह भी बताया कि नंदमुरी बालकृष्ण के पूर्व स्वास्थ्य रिकॉर्ड और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ मिलकर उनकी संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। सभी जांच रिपोर्ट आने के बाद उनके लिए अंतिम उपचार योजना तैयार की जाएगी ताकि जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से उन्हें स्वस्थ किया जा सके।

    डॉक्टरों के अनुसार अभिनेता की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और चिंता की कोई तत्काल वजह नहीं है। हालांकि उन्हें लगातार मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है ताकि स्वास्थ्य में होने वाले हर बदलाव पर नजर रखी जा सके। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इलाज और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की मेडिकल योजना और रिकवरी टाइमलाइन तय की जाएगी।

    नंदमुरी बालकृष्ण तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के सबसे लोकप्रिय सितारों में गिने जाते हैं। वह दिवंगत अभिनेता और अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन टी रामाराव के पुत्र हैं। फिल्मों के साथ साथ राजनीति में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है और उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है। उनकी चोट की खबर सामने आने के बाद प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

    फिलहाल अभिनेता की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में जारी है। फैंस को उम्मीद है कि वह जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग दोबारा शुरू करेंगे।

  • ICC वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, टॉप-5 में भारत के तीन बल्लेबाज बरकरार

    ICC वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, टॉप-5 में भारत के तीन बल्लेबाज बरकरार

    नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई वनडे सीरीज के बाद जारी ताजा ICC ODI बल्लेबाजी रैंकिंग में भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा कायम है। कप्तान शुभमन गिल नंबर-1 बल्लेबाज बनने से सिर्फ एक रेटिंग अंक दूर हैं, जबकि विराट कोहली और रोहित शर्मा टॉप-5 में बने हुए हैं।

    बल्लेबाजी रैंकिंग: मुख्य बातें
    शुभमन गिल: इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में 188 रन बनाने के बाद गिल के खाते में 801 रेटिंग अंक हो गए हैं। वह शीर्ष पर मौजूद न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल (802 अंक) से सिर्फ एक अंक पीछे हैं।

    विराट कोहली: 767 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर बने हुए हैं।

    रोहित शर्मा: 758 अंकों के साथ चौथे स्थान पर काबिज हैं।

    श्रेयस अय्यर: दो स्थान की छलांग लगाकर 13वें नंबर पर पहुंच गए हैं।

    इंग्लैंड के खिलाड़ियों को फायदा

    जो रूट: भारत के खिलाफ सीरीज में 249 रन बनाकर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुने गए जो रूट ने चार स्थान की छलांग लगाई है और अब आठवें नंबर पर पहुंच गए हैं।

    बेन डकेट: 11 पायदान चढ़कर संयुक्त रूप से 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    जैकब बेथेल: पांच स्थान के सुधार के साथ 64वें नंबर पर आ गए हैं।

    गेंदबाजी रैंकिंग का हाल
    कुलदीप यादव: भारत के स्टार स्पिनर को नुकसान हुआ है और वह टॉप-10 से बाहर होकर 11वें स्थान पर खिसक गए हैं।

    राशिद खान: अफगानिस्तान के राशिद खान गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं।

    जोफ्रा आर्चर: भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में 5 विकेट लेने के बाद इंग्लैंड के जोफ्रा आर्चर एक स्थान ऊपर चढ़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के अबरार अहमद उनसे ऊपर दूसरे स्थान पर हैं।

  • टीवी इंडस्ट्री में फिर मचा बवाल, सान्वी तलवार बोलीं करण कुंद्रा ने किया किस फिर सबके सामने मारा थप्पड़

    टीवी इंडस्ट्री में फिर मचा बवाल, सान्वी तलवार बोलीं करण कुंद्रा ने किया किस फिर सबके सामने मारा थप्पड़


    नई दिल्ली । टीवी अभिनेत्री सान्वी तलवार ने एक हालिया इंटरव्यू में अभिनेता करण कुंद्रा को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि साल 2015 में टीवी शो ये कहां आ गए हम की शूटिंग के दौरान उनके साथ ऐसा व्यवहार हुआ जिसने उन्हें मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित किया। सान्वी के अनुसार उस दौर में वह लगातार तनाव और अवसाद जैसी स्थिति से गुजर रही थीं और कई बार उन्होंने अभिनय की दुनिया छोड़ने तक का मन बना लिया था।

    सान्वी ने बताया कि शो की शूटिंग के दौरान वह रोज अपनी वैनिटी वैन में जाकर रोती थीं। उनका कहना है कि सेट का माहौल उनके लिए बेहद असहज हो गया था। अभिनेत्री के मुताबिक वह स्वभाव से कम बोलने वाली हैं और जल्दी किसी से घुलती मिलती नहीं हैं। इसी वजह से वह सेट पर केवल औपचारिक तरीके से सभी का अभिवादन करती थीं। उनका दावा है कि उनके इस व्यवहार को गलत तरीके से लिया गया और उन्हें घमंडी समझा जाने लगा।

    अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि करण कुंद्रा उनमें व्यक्तिगत रुचि रखते थे लेकिन उन्होंने कभी उस तरह की दिलचस्पी नहीं दिखाई। सान्वी का कहना है कि इसी वजह से उनके प्रति व्यवहार बदल गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय करण कुंद्रा अभिनेत्री अनुषा दांडेकर के साथ रिश्ते में थे और उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी अनुषा तक भी पहुंचाई थी।

    सान्वी ने आगे कहा कि समय के साथ सेट पर स्थिति और खराब होती गई। उनका आरोप है कि निर्देशक भी उन्हें लगातार हतोत्साहित करते थे और कहते थे कि उन्हें अभिनय नहीं आता। यहां तक कि उनके किरदार के लिए दूसरे कलाकारों के ऑडिशन लिए जाने की बातें भी उन्हें सुनने को मिलीं। इन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से काफी कमजोर कर दिया और वह लंबे समय तक डिप्रेशन जैसी स्थिति में रहीं।

    सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए सान्वी ने एक किसिंग सीन का जिक्र किया। उनके अनुसार शूटिंग के दौरान निर्देशक के संकेत से पहले ही करण कुंद्रा ने उन्हें किस कर लिया। इस पर उन्होंने गुस्से में करण को थप्पड़ मार दिया। अभिनेत्री का दावा है कि कुछ देर बाद करण वापस आए और पूरी यूनिट के सामने उन्हें जोरदार थप्पड़ मारा जिससे वह नीचे गिर गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस दौरान उन्हें और उनके परिवार को अपशब्द कहे गए तथा मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने उनका साथ नहीं दिया।

    सान्वी ने बताया कि इस घटना के बाद वह शूटिंग छोड़कर घर चली गईं। उनके अनुसार बाद में निर्माता एकता कपूर ने उनसे बातचीत की माफी मांगी और उनका समर्थन किया। अभिनेत्री का दावा है कि इसके बाद शो के निर्देशक को बदल दिया गया और करण कुंद्रा के शूटिंग दिनों में भी कमी की गई।

    हालांकि इन सभी आरोपों पर अब तक करण कुंद्रा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामला पूरी तरह अभिनेत्री के हालिया इंटरव्यू में लगाए गए आरोपों पर आधारित है और दूसरी ओर का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

  • 250 असली कुत्तों के साथ बनी 'ओह माय डॉग', पंकज त्रिपाठी ने बिना फीस निभाया अहम किरदार, उठेगा डॉग ट्रैफिकिंग का मुद्दा

    250 असली कुत्तों के साथ बनी 'ओह माय डॉग', पंकज त्रिपाठी ने बिना फीस निभाया अहम किरदार, उठेगा डॉग ट्रैफिकिंग का मुद्दा

    नई दिल्ली । 31 जुलाई को रिलीज हो रही ‘ओह माय डॉग’ डॉग ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर मुद्दे पर बनी फिल्म है। इसमें 250 असली कुत्तों के साथ शूटिंग की गई है। पंकज त्रिपाठी ने कहानी से प्रभावित होकर बिना फीस फिल्म में काम किया, जबकि ब्रूनो और ऑस्कर नाम के दो डॉगी इस फिल्म के असली हीरो हैं।

    यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि उन बेजुबान कुत्तों की आवाज बनती है जिनका दर्द अक्सर दुनिया तक नहीं पहुंच पाता। इसकी कहानी एक बच्चे और उसके पालतू डॉगी के बीच के अनमोल रिश्ते के जरिए जानवरों के खिलाफ होने वाले अपराधों की सच्चाई सामने लाती है।

    फिल्म से जुड़ी मुख्य बातें
    250 असली कुत्तों के साथ शूटिंग: फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसके 250 असली कुत्ते हैं। फिल्म के सबसे अहम किरदार ब्रूनो और ऑस्कर नाम के दो डॉगी निभा रहे हैं, जिन्हें देशभर में हजारों कुत्तों के ऑडिशन लेने के बाद चुना गया।

    पंकज त्रिपाठी ने नहीं ली फीस: पंकज त्रिपाठी का रोल भले ही छोटा है, लेकिन जानवरों के प्रति प्यार और फिल्म का संदेश उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने इसके लिए कोई फीस नहीं ली। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक बच्चे और डॉगी की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत, प्यार और दया का संदेश है।

    डॉग ट्रैफिकिंग का काला सच: फिल्म उस अंधेरी दुनिया को उजागर करती है जहाँ मासूम पालतू जानवरों की तस्करी कर उन्हें गलत हाथों में बेच दिया जाता है। कहानी में एक बच्चे का अपने डॉगी के लिए प्यार इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करता है।

    निर्देशक और संदेश
    फिल्म का निर्देशन अमित राय ने किया है, जिन्होंने इससे पहले ‘ओह माय गॉड 2’ जैसी चर्चित फिल्म बनाई थी। बड़े एक्शन और वीएफएक्स के दौर में यह फिल्म दिल को छू लेने वाली कहानी और सामाजिक संवेदना के दम पर बनाई गई है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन: महिला प्रदर्शनकारी से कथित अभद्रता पर एडीसीपी संदीप लांबा हटाए गए, पुलिस ने RAF जवानों पर हमले का मामला दर्ज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन: महिला प्रदर्शनकारी से कथित अभद्रता पर एडीसीपी संदीप लांबा हटाए गए, पुलिस ने RAF जवानों पर हमले का मामला दर्ज


    नई दिल्ली।
    दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर थप्पड़ मारने के आरोप में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) संदीप लांबा को प्रदर्शन स्थल की ड्यूटी से हटा दिया गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। दूसरी ओर, प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के दो जवानों पर कथित हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANIPS) के अधिकारी एवं उत्तर-पूर्वी जिले में अतिरिक्त डीसीपी के पद पर तैनात संदीप लांबा को जंतर-मंतर पर चल रही ड्यूटी से हटाकर उनकी मूल तैनाती पर वापस भेज दिया गया है।

    बताया गया कि संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसी दौरान वायरल हुए एक वीडियो में संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद इस घटना को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत से कहा कि वीडियो में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बिना किसी उकसावे के महिला प्रदर्शनकारी के साथ अभद्र व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारी से जवाब तलब करने की मांग भी की।

    उधर, दिल्ली पुलिस ने मंगलवार रात टॉल्स्टॉय मार्ग और संसद मार्ग चौराहे पर दो आरएएफ जवानों पर कथित हमले के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच सड़क पार कर रहे आरएएफ जवानों पर भीड़ ने कथित रूप से हमला कर दिया, जिससे दोनों जवान घायल हो गए।

    घायल जवानों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोनों घटनाओं की जांच जारी है।

  • अश्नीर ग्रोवर की बायोपिक में बड़ा बदलाव! आमिर खान के बाहर होने की चर्चा तेज, श्रद्धा कपूर संभालेंगी जिम्मेदारी

    अश्नीर ग्रोवर की बायोपिक में बड़ा बदलाव! आमिर खान के बाहर होने की चर्चा तेज, श्रद्धा कपूर संभालेंगी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान को लेकर एक बड़ी चर्चा सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने बिजनेसमैन और भारतपे के पूर्व सह संस्थापक अश्नीर ग्रोवर के जीवन पर बनने वाली प्रस्तावित बायोपिक से कथित तौर पर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। हालांकि इस पूरे मामले पर अब तक आमिर खान फिल्म के निर्देशक राहुल मोदी या फिल्म की टीम की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन खबरों ने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

    इस साल की शुरुआत में खबरें आई थीं कि अश्नीर ग्रोवर के जीवन पर आधारित फिल्म बनाई जाएगी जिसमें मुख्य भूमिका के लिए आमिर खान का नाम सामने आया था। वहीं फिल्म का निर्देशन राहुल मोदी करने वाले थे और अभिनेत्री श्रद्धा कपूर को फीमेल लीड के तौर पर चुना गया था। इस खबर के सामने आने के बाद दर्शकों में इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्सुकता देखी गई थी क्योंकि आमिर खान लंबे समय से चुनिंदा और अलग विषयों वाली फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।

    अब नई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आमिर खान और निर्देशक राहुल मोदी के बीच स्क्रिप्ट और फिल्म के क्रिएटिव विजन को लेकर मतभेद पैदा हो गए। बताया जा रहा है कि आमिर खान स्टार्टअप और उद्यमिता की दुनिया पर आधारित इस कहानी को अपने नजरिए से और अधिक प्रभावशाली बनाना चाहते थे। उन्होंने स्क्रिप्ट पर कई सुझाव भी दिए लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी जिसके बाद उन्होंने कथित तौर पर इस फिल्म से अलग होने का फैसला किया।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक आमिर खान के प्रोजेक्ट से बाहर होने के बावजूद श्रद्धा कपूर फिल्म से पूरी तरह जुड़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि वह फिल्म में अश्नीर ग्रोवर की पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर का किरदार निभा सकती हैं। इतना ही नहीं खबरों के अनुसार श्रद्धा कपूर एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस के साथ मिलकर इस फिल्म के निर्माण की जिम्मेदारी भी संभाल सकती हैं।

    फिल्म की कास्टिंग को लेकर भी नए सिरे से काम शुरू होने की चर्चा है। रिपोर्ट्स का दावा है कि अब मेकर्स अश्नीर ग्रोवर की भूमिका के लिए किसी युवा अभिनेता की तलाश कर रहे हैं और जल्द ही मुख्य कलाकारों के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। हालांकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार अभी भी बना हुआ है।

    गौरतलब है कि अश्नीर ग्रोवर भारतीय स्टार्टअप जगत की चर्चित हस्तियों में शामिल रहे हैं। भारतपे से जुड़े विवादों और शार्क टैंक इंडिया में उनकी लोकप्रियता के बाद उनका नाम लगातार सुर्खियों में रहा है। वहीं उनकी पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर भी हाल के समय में अपने बयानों और सार्वजनिक उपस्थिति को लेकर चर्चा में रही हैं।

    फिलहाल आमिर खान के फिल्म छोड़ने और नई कास्टिंग से जुड़ी सभी बातें मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। जब तक निर्माता निर्देशक या कलाकारों की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती तब तक इन खबरों की पुष्टि नहीं मानी जा सकती। इसके बावजूद इस प्रस्तावित बायोपिक को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है।

  • वास्तु में कोई दिशा नहीं होती अशुभ, जमीन खरीदते समय इन जरूरी बातों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

    वास्तु में कोई दिशा नहीं होती अशुभ, जमीन खरीदते समय इन जरूरी बातों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी


    नई दिल्ली । अपना घर बनाना हर व्यक्ति का सपना होता है और इस सपने की पहली सीढ़ी सही प्लॉट या जमीन का चुनाव है। अधिकांश लोग भूखंड खरीदते समय सबसे पहले यह देखते हैं कि वह उत्तरमुखी है या पूर्वमुखी। वहीं दक्षिणमुखी प्लॉट को लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी समाज में प्रचलित हैं। हालांकि वास्तु शास्त्र के जानकारों का कहना है कि केवल दिशा के आधार पर किसी प्लॉट को शुभ या अशुभ नहीं माना जा सकता। वास्तु के अनुसार कोई भी दिशा अपने आप में खराब नहीं होती बल्कि उस दिशा के अनुरूप सही योजना और निर्माण अधिक महत्वपूर्ण होता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक प्लॉट खरीदते समय सबसे पहले उसके आकार पर ध्यान देना चाहिए। वर्गाकार या आयताकार भूखंड को वास्तु की दृष्टि से सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि ऐसे प्लॉट में ऊर्जा का संतुलित प्रवाह बना रहता है। इसके विपरीत बहुत अधिक टेढ़े मेढ़े त्रिकोण या अनियमित आकार वाले प्लॉट कई बार वास्तु दोष का कारण बन सकते हैं और निर्माण की योजना भी प्रभावित होती है।

    जमीन की ऊंचाई और ढलान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा प्लॉट बेहतर माना जाता है जिसकी दक्षिण और पश्चिम दिशा अपेक्षाकृत ऊंची हो तथा उत्तर और पूर्व दिशा थोड़ी नीची रहे। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और आर्थिक उन्नति के अवसर बढ़ते हैं। वहीं गलत ढलान वाले प्लॉट में जलभराव जैसी व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

    प्लॉट के आसपास का वातावरण भी उतना ही जरूरी है जितनी उसकी दिशा। यदि भूखंड के आसपास स्वच्छता हरियाली और खुला वातावरण हो तो उसे अधिक शुभ माना जाता है। इसके विपरीत कूड़े के ढेर गंदे नाले या अत्यधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में स्थित जमीन भविष्य में कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकती है। इसलिए केवल कम कीमत देखकर निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    जमीन खरीदने से पहले यह भी देखना चाहिए कि वहां तक सड़क की पहुंच कैसी है और आसपास बिजली पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। अच्छी कनेक्टिविटी और विकसित क्षेत्र में स्थित प्लॉट भविष्य में बेहतर निवेश भी साबित होता है और रहने के लिहाज से भी सुविधाजनक रहता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि प्लॉट का चयन करते समय प्राकृतिक रोशनी और हवा का पर्याप्त प्रवाह भी ध्यान में रखना चाहिए। ऐसा भूखंड जहां सूरज की रोशनी आसानी से पहुंचे और वेंटिलेशन अच्छा हो वहां स्वास्थ्य और सकारात्मकता दोनों बनी रहती हैं। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र प्राकृतिक तत्वों के संतुलन पर विशेष जोर देता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी दिशा को अशुभ मानकर केवल उसी आधार पर प्लॉट को नकार देना सही नहीं है। वास्तु शास्त्र दिशा से अधिक संतुलित निर्माण उचित योजना और प्राकृतिक ऊर्जा के सही उपयोग पर बल देता है। यदि भूखंड का चयन सोच समझकर किया जाए और निर्माण के दौरान वास्तु सिद्धांतों का पालन किया जाए तो किसी भी दिशा में सुख समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है। इसलिए जमीन खरीदने से पहले केवल दिशा नहीं बल्कि आकार ढलान वातावरण सुविधाएं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।