Author: bharati

  • योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिससे प्रदेश आज कई स्वास्थ्य मानकों पर देश में अग्रणी बनकर उभरा है।

    सरकार ने इस दौरान केवल अस्पतालों के निर्माण तक ही ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि डिजिटल हेल्थ, आपातकालीन सेवाएं, मातृ और शिशु देखभाल जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सुधार किए हैं। डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में प्रदेश ने 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के जरिए रोगों की निगरानी और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया गया है

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड ई-वाउचर की सुविधा दी गई है, जबकि जननी सुरक्षा योजना और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लाखों लोगों को लाभ मिला है। दस्तक अभियान के माध्यम से एईएस और जेई जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ भी सघन अभियान चलाया गया है

    प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हजारों की संख्या में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है और लाखों परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को बड़ी राहत मिली है

    स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में भी राज्य ने तेजी से प्रगति की है। जन औषधि केंद्रों की संख्या में वृद्धि के साथ सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन और अस्पतालों के नेटवर्क के मामले में भी प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है

    आपातकालीन सेवाओं में सुधार करते हुए 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए करोड़ों लोगों को मदद पहुंचाई गई है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई गई है और उनकी पहुंच को दोगुना किया गया है। इसके अलावा मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए दूरदराज के इलाकों में भी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है

    योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में निशुल्क डायलिसिस और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ हुई हैं

    दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है। इसके साथ ही कई स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ है

    खाद्य सुरक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी राज्य ने कदम बढ़ाए हैं। मोबाइल लैब और माइक्रोबायोलॉजी लैब के जरिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। साथ ही फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई संस्थाओं की स्थापना की गई है

     उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर एक समग्र और आधुनिक सिस्टम विकसित किया है, जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार है

  • महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम तेज, 16 अवैध इमारतें ध्वस्त

    महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम तेज, 16 अवैध इमारतें ध्वस्त


    उज्जैन । उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के आसपास अवैध अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र के समीप स्थित 16 अवैध मकानों को जमींदोज कर दिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई। इससे पहले भी प्रशासन द्वारा 42 अवैध मकानों को हटाया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट है कि महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए अभियान लगातार जारी है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई उज्जैन विकास प्राधिकरण की भूमि पर किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ की गई। प्रशासन को लंबे समय से इन निर्माणों की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद जांच कर इन्हें अवैध घोषित किया गया। इसके पश्चात नियमानुसार नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय सीमा में पालन नहीं होने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया।

    सुबह से ही शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में आधा दर्जन से अधिक पोकलेन और बुलडोजर मशीनों की सहायता से एक-एक कर अवैध इमारतों को ढहाया गया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।

    प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल अवैध निर्माणों के खिलाफ है और इसे चरणबद्ध तरीके से आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले महाकाल क्षेत्र के आसपास किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस क्षेत्र की गरिमा और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां कुछ लोगों ने प्रशासन के इस कदम को उचित ठहराते हुए कहा कि इससे क्षेत्र की व्यवस्था सुधरेगी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी, वहीं प्रभावित लोगों ने इसे लेकर असंतोष भी जताया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही की गई है।

    महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के आसपास सुव्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त वातावरण बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल क्षेत्र का सौंदर्य बढ़ेगा बल्कि श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में महाकाल क्षेत्र में और भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस अभियान से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।

  • 20 लाख से अधिक की चोरी का पर्दाफाश, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

    20 लाख से अधिक की चोरी का पर्दाफाश, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार


    बैतूल । बैतूल जिले के आमला थाना क्षेत्र में पुलिस ने नकबजनी की एक बड़ी वारदात का सफल खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि चोरी की इस घटना को अंजाम देने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि फरियादी का करीबी रिश्तेदार ही निकला। इस घटना ने न केवल क्षेत्र में सनसनी फैला दी बल्कि लोगों के बीच भरोसे और रिश्तों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस के अनुसार कुछ समय पूर्व आमला क्षेत्र में एक घर में नकबजनी की घटना सामने आई थी, जिसमें अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर सोने-चांदी के आभूषण, नगदी और अन्य कीमती सामान पर हाथ साफ कर दिया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों तथा संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ना शुरू किया।

    जांच के दौरान पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर संदेह का दायरा घर के नजदीकी लोगों तक पहुंचा। जब संदिग्धों से गहन पूछताछ की गई तो एक रिश्तेदार की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसके बाद उसने चोरी की पूरी घटना को कबूल कर लिया।

    आरोपी ने स्वीकार किया कि उसे घर की पूरी जानकारी थी और इसी का फायदा उठाकर उसने वारदात को अंजाम दिया। उसे यह भी पता था कि घर में कहां कीमती सामान रखा है और कब घर में लोग मौजूद नहीं होंगे। इसी जानकारी के आधार पर उसने योजनाबद्ध तरीके से नकबजनी की घटना को अंजाम दिया और चोरी के सामान को छिपा दिया।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में मशरूका बरामद किया है, जिसमें सोने-चांदी के जेवर, नगदी और बैंक खाते में जमा राशि शामिल है। कुल मिलाकर 20 लाख 85 हजार 200 रुपये की संपत्ति बरामद की गई है, जो इस पूरे मामले को और गंभीर बनाती है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले का खुलासा टीम की सतर्कता और तकनीकी जांच के कारण संभव हो सका। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इस वारदात को अकेले अंजाम दिया या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी संलिप्तता है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कई बार अपराधी बाहरी नहीं बल्कि अपने ही बीच छिपे होते हैं। रिश्तों की आड़ में विश्वास हासिल कर अपराध को अंजाम देना समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और अपने घरों की सुरक्षा के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर बनाए रखें।

  • जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेगा 3 लाख करोड़ का बड़ा बाजार अब फोकस होगा सेवा और मेंटेनेंस पर

    जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेगा 3 लाख करोड़ का बड़ा बाजार अब फोकस होगा सेवा और मेंटेनेंस पर


    नई दिल्ली:देश में हर घर तक साफ पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सरकार केवल पाइपलाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अब फोकस पानी की निरंतर सप्लाई और उसके बेहतर रखरखाव पर किया जा रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव से ऑपरेशन और मेंटेनेंस यानी ओएंडएम सेक्टर में करीब 3 लाख करोड़ रुपये के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं

    रिपोर्ट में बताया गया है कि इस योजना का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही मिशन को अब सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी EPC सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अब सिर्फ प्रोजेक्ट बनाने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सेवाएं भी देनी होंगी

    इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण असर भुगतान व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। अभी कई राज्यों में कंपनियों को भुगतान मिलने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग जाता है, लेकिन सरकार ने इसे सुधारते हुए सितंबर 2026 तक भुगतान अवधि को घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य तय किया है। इससे सेक्टर में कैश फ्लो बेहतर होगा और कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी

    सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत नल कनेक्शन देने की समयसीमा को भी 2024 से बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय गुणवत्ता और स्थायित्व पर ज्यादा ध्यान दिया जाए

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन से पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली संगठित कंपनियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक, बेहतर सर्विस नेटवर्क और ऊर्जा दक्ष समाधान हैं, वे इस बदलाव का ज्यादा फायदा उठा पाएंगी

    हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2025-26 के बाद बजट आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि योजना के क्रियान्वयन में अभी भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं। इसी कारण अब सरकार टिकाऊ और प्रभावी सेवा देने वाले मॉडल पर जोर दे रही है

    गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंचाना था। अब तक इस योजना के तहत नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या में करीब पांच गुना वृद्धि हुई है और फरवरी 2026 तक ग्रामीण कवरेज 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है

    फिर भी कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता और नियमित सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब इस योजना को अपग्रेड कर सेवा आधारित मॉडल अपनाने का फैसला किया है

    जल जीवन मिशन 2.0 के तहत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म के जरिए पानी की सप्लाई और गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। साथ ही ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि जल आपूर्ति को एक स्थायी और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवा के रूप में विकसित किया जा सके

    यह बदलाव न केवल देश के जल प्रबंधन सिस्टम को मजबूत करेगा, बल्कि उद्योगों और कंपनियों के लिए भी एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में सामने आ रहा है
  • वृंदावन में जीवनदीप आश्रम लोकार्पित, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 के लिए संतों को किया आमंत्रित

    वृंदावन में जीवनदीप आश्रम लोकार्पित, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 के लिए संतों को किया आमंत्रित


    भोपाल । भोपाल से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने वृंदावन में जीवनदीप आश्रम के लोकार्पण अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश और मथुरा वृंदावन गोकुल क्षेत्र के बीच हजारों वर्षों से जीवंत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने बृज में अपने पराक्रम का परिचय देने के बाद उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी और इसी कारण उनके विराट व्यक्तित्व के निर्माण में उज्जयिनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार मथुरा और गोकुल सनातन परंपरा के केंद्र हैं उसी प्रकार मध्यप्रदेश भी सनातन विचारधारा के संरक्षण और विस्तार में निरंतर योगदान देता रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि जीवनदीप आश्रम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आशा करुणा और सेवा का प्रकाश स्तंभ बनेगा। यह आश्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा और मानवता की सेवा के लिए एक प्रेरणादायी केंद्र के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने इस अवसर पर सनातन धर्म और जीवन दर्शन पुस्तक का विमोचन भी किया और कहा कि यह ग्रंथ समाज को सही दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा।

    कार्यक्रम में देश के अनेक संत और आध्यात्मिक गुरु उपस्थित रहे जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्र आनंद गिरि अवधेशानंद गिरि और साध्वी ऋतंभरा प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसके साथ ही आरिफ मोहम्मद खान भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

    मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए सभी संतों को उज्जैन आने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का वैश्विक मंच है। संतों की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक भव्य और दिव्य बनाएगी।

    इस अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज विश्व के कई देशों की व्यवस्थाएं डगमगा रही हैं लेकिन सनातन धर्म और संस्कृति ने अनेक चुनौतियों के बावजूद अपनी गरिमा बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि इसमें संतों और आश्रमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है जो समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।

    साध्वी ऋतंभरा ने अपने संबोधन में कहा कि जीवनदीप आश्रम वृंदावन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी बाधा बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक होती है और यदि व्यक्ति मनसा वाचा कर्मणा पूर्ण समर्पण के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े तो कोई भी शक्ति उसे सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकती।

    आरिफ मोहम्मद खान ने भारतीय संस्कृति की ज्ञान परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि जीवनदीप आश्रम भविष्य में ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि हमारे संतजन सदैव जनकल्याण और समाज सेवा के लिए समर्पित रहे हैं और यह आश्रम भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश सरकार संत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। जीवनदीप आश्रम का लोकार्पण इसी प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो समाज में सेवा करुणा और आध्यात्मिकता के मूल्यों को सशक्त करेगा।

  • विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अधोसंरचना परियोजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश, उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अधोसंरचना परियोजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश, उप मुख्यमंत्री शुक्ल


    भोपाल । भोपाल में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में विंध्य क्षेत्र में चल रही सड़क फ्लाइओवर और पुल-पुलिया निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सुदृढ़ और प्रभावी अधोसंरचना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग नियमित और प्रभावी रूप से की जाए ताकि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण हो सके।

    बैठक में रीवा फ्लाइओवर संस्कृत विश्वविद्यालय लक्ष्मण बाग के समीप प्रस्तावित एप्रोच रोड मऊगंज बायपास और मऊगंज–पटेरा औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क सहित अन्य प्रमुख अधोसंरचना परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति प्रगति और शेष कार्य पर विस्तृत चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन कार्यों में अंतर्विभागीय समन्वय की आवश्यकता है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र हल किया जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक स्तर की स्वीकृतियों भूमि संबंधी मुद्दों तकनीकी अड़चनों और मैदानी समस्याओं की पहचान कर त्वरित और यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    उन्होंने क्षेत्र के औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत अधोसंरचना की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। बेहतर सड़क संपर्क और परिवहन सुविधाएं निवेश आकर्षित करने में सहायक होंगी जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रों में संतुलित और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उप मुख्यमंत्री ने अधोसंरचनात्मक विकास को शासन की प्राथमिकताओं में शामिल बताया और कहा कि सभी परियोजनाओं का समयबद्ध पूर्ण होना विंध्य क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की प्रगति नियमित रूप से रिपोर्ट की जाए और किसी भी बाधा को तुरंत दूर किया जाए।

    बैठक में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुखवीर सिंह सहित संबंधित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अधिकारियों से कहा कि अधोसंरचना विकास केवल सड़क और पुल निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता से न केवल जनता को लाभ मिलेगा बल्कि क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

    उप मुख्यमंत्री ने बैठक का समापन करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार विंध्य क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। अधोसंरचना परियोजनाओं को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करना इस प्रयास का अहम हिस्सा है और यह क्षेत्र की दीर्घकालीन प्रगति सुनिश्चित करेगा।

  • आंगनवाड़ी के माध्यम से शाला पूर्व शिक्षा को सशक्त बनाने की नई पहल

    आंगनवाड़ी के माध्यम से शाला पूर्व शिक्षा को सशक्त बनाने की नई पहल


    भोपाल । भोपाल में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने प्रदेश के आंगनवाड़ी केन्द्रों में आयोजित विद्यारंभ समारोह में बच्चों को प्रमाणपत्र प्रदान कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक पाठशाला हैं जहाँ पोषण और शिक्षा दोनों का समग्र ध्यान रखा जाता है। प्रदेश के 97 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों में एक साथ आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 10 लाख बच्चे आंगनवाड़ी से आगे बढ़कर औपचारिक स्कूल शिक्षा की ओर कदम रख रहे हैं।

    नेहरू नगर आंगनवाड़ी क्रं. 1061 में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मंत्री सुश्री भूरिया ने बच्चों और उनके अभिभावकों को शुभकामनाएँ दीं और बताया कि आंगनवाड़ी केन्द्र केवल बच्चों की देखभाल का स्थान नहीं बल्कि मातृ शिशु स्वास्थ्य पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का समन्वित केन्द्र हैं। उन्होंने कहा कि यहां गर्भवती महिलाओं के पंजीयन से लेकर बच्चों के जन्म और छह वर्ष की आयु तक पोषण स्वास्थ्य और समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में “पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है जिससे बच्चों को खेल खेल में प्रारंभिक शिक्षा प्रदान की जाती है।

    मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि 3 से 6 वर्ष की आयु में बच्चों का शारीरिक बौद्धिक सामाजिक और भावनात्मक विकास आंगनवाड़ी केन्द्रों में विशेष ध्यान का विषय होता है। इसके आधार पर बच्चे आगे विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार होते हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार अब आंगनवाड़ी में 3 वर्ष की प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने वाले बच्चों को विद्यारंभ प्रमाणपत्र प्रदान किया जा रहा है जिससे उनकी शाला पूर्व शिक्षा को औपचारिक मान्यता मिल सके।

    उपलब्धि के इस अवसर पर मंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे मातृ शिशु स्वास्थ्य पोषण और शिक्षा जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन समर्पण और लगन के साथ कर रही हैं। उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप हर वर्ष लाखों बच्चे गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर विद्यालय में प्रवेश के लिए तैयार हो रहे हैं।

    सचिव महिला बाल विकास श्रीमती जी. वी. रश्मि ने इस अवसर पर कहा कि विद्यारंभ प्रमाणपत्र केवल एक दस्तावेज़ नहीं है बल्कि बच्चों की शिक्षा यात्रा का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी की अनौपचारिक शिक्षा से प्राथमिक विद्यालय की औपचारिक शिक्षा में बच्चों का सहज और आनंदपूर्वक प्रवेश सुनिश्चित करना है। उन्होंने माता पिता विशेषकर पिता की भूमिका को बच्चों के समग्र विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

    सचिव श्रीमती रश्मि ने यह भी कहा कि यह पहल राष्ट्रीय ECCE नीति 2013 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल परिवार और समुदाय में शाला पूर्व शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ेगी बल्कि बच्चों के स्कूल में प्रवेश और उनकी शैक्षणिक निरंतरता को भी बल मिलेगा।

    कार्यक्रम में मंत्री सुश्री भूरिया ने बच्चों को प्रमाण पत्र वितरित किए और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर बच्चों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए जबकि उनके अभिभावकों ने आंगनवाड़ी में शिक्षा और पोषण से हुए बदलावों के अनुभव साझा किए। इस प्रकार विद्यारंभ उत्सव ने बच्चों परिवार और समाज में शाला पूर्व शिक्षा के महत्व को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।

  • लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश, स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन को बढ़ावा

    लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश, स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन को बढ़ावा


    भोपाल । भोपाल में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन की कमी को जल्द से जल्द दूर करना अत्यंत आवश्यक है। बैठक में उप मुख्यमंत्री ने विभागीय भर्ती प्रक्रियाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की और भर्ती में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों से समन्वय बनाए रखने को कहा।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कर्मचारी चयन बोर्ड ईएसबी और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग पीएससी के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को समय पर पूरा किया जाना चाहिए ताकि भर्ती प्रक्रिया में रुकावट न आए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती की प्रक्रिया में किसी प्रकार की ढील या विलंब स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

    बैठक में विशेष रूप से अस्पताल सहायक के रिक्त पदों की भर्ती पर ध्यान केंद्रित किया गया। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पताल सहायक के पदों के प्रस्ताव को शीघ्र ही कर्मचारी चयन बोर्ड को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल सहायक स्वास्थ्य संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन पदों की पूर्ति में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं है।

    इसके साथ ही, उप मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग टीचरों की नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षित और योग्य नर्सिंग स्टाफ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण योगदान देता है और इसकी भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती है।

    उप मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध और चरणबद्ध कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और मरीजों की सुविधा में सुधार लाने में सहायक होंगे।

    बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री धनराजू एस और अपर संचालक श्री मनोज कुमार सरियाम उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की कमी दूर करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं और भर्ती प्रक्रिया में बाधा डालने वाले किसी भी अड़चन को शीघ्र हल किया जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल के निर्देशों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी और सुधार लाने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। लंबित भर्तियों को शीघ्र पूर्ण करने और स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की कमी को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इस समीक्षा बैठक ने प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने और मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में एक नया संदेश दिया है।

  • ट्रंप पर दबाव बढ़ा, सीनेट में डेमोक्रेट नेताओं ने ईरान संघर्ष की आलोचना की

    ट्रंप पर दबाव बढ़ा, सीनेट में डेमोक्रेट नेताओं ने ईरान संघर्ष की आलोचना की


    वाशिंगटन । वाशिंगटन अमेरिका में ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाते हुए युद्ध की बढ़ती लागत, स्पष्ट रणनीति की कमी और लंबे संघर्ष के खतरे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि इस युद्ध का कोई स्पष्ट लक्ष्य या रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा, “ट्रंप का ईरान के साथ युद्ध चौथे हफ्ते में है और इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा।” शूमर ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति आगे की योजना को लेकर साफ जवाब देने में विफल हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस के बयान भी विरोधाभासी बताया और कहा, “यह क्या हो रहा है? कमांडर-इन-चीफ की लीडरशिप नहीं दिख रही। या तो भ्रमित हैं, या सच नहीं बोल रहे, या दोनों एक साथ हैं।”

    शूमर ने युद्ध को अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल कीमतों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक महीने पहले गैस की औसत कीमत लगभग 2.93 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 3.94 डॉलर हो गई है। यह वृद्धि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद देखी गई सबसे बड़ी मासिक उछालों में से एक है।

    सीनेटर ग्रेग लैंड्समैन ने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान में अभियान समाप्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि और गहराई से शामिल होने पर अमेरिका बिना रणनीति वाले लंबे युद्ध में फंस सकता है। उनके अनुसार अमेरिकी बलों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च क्षमता लगभग पूरी तरह नष्ट कर दी है और हथियारों के ढांचे को निशाना बनाने का उद्देश्य पूरा हो चुका है।

    सीनेटर पीटर वेल्च ने सरकार के रुख की आलोचना करते हुए 200 अरब डॉलर के युद्ध फंड का विरोध किया। उन्होंने आर्थिक असर पर चिंता जताई और बताया कि पेट्रोल की कीमतें कम से कम 1 डॉलर बढ़ गई हैं, जिससे आम अमेरिकी परिवार को सालाना लगभग 2,000 डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। इसके अलावा, उर्वरक और हीटिंग ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों पर लगभग 1,000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

    सीनेटर सारा जैकब्स ने इसे अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा सरकार के पास आगे की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और आम लोगों को यह तक नहीं बताया जा रहा कि यह युद्ध है क्या, इसका लक्ष्य क्या है और इसकी लागत कितनी होगी। इस तरह, डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप पर दबाव बढ़ाया है कि वह युद्ध की स्पष्ट रणनीति पेश करें, पारदर्शिता सुनिश्चित करें और अमेरिका के आर्थिक और सामाजिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करें।

  • भारतीय बाजार में रिकवरी के संकेत रुपया 91- तक मजबूत हो सकता है रिपोर्ट..

    भारतीय बाजार में रिकवरी के संकेत रुपया 91- तक मजबूत हो सकता है रिपोर्ट..

    नई दिल्ली:भारतीय शेयर बाजार में आने वाले महीनों में मजबूत वापसी के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और शेयरों के वैल्यूएशन में कमी के चलते बाजार में सुधार की संभावना बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मजबूती दिखाते हुए 91 के स्तर तक पहुंच सकता है।

    एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा 6.83 प्रतिशत से घटकर लगभग 6.65 प्रतिशत तक आ सकती है। यह बदलाव अगले दो से तीन महीनों में देखने को मिल सकता है, जब बाजार सामान्य स्थिति में लौटने लगेगा।

    हालांकि, पिछले कुछ समय में बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि निफ्टी पिछले तीन कारोबारी सत्रों में करीब 5 प्रतिशत तक गिरा, जिसकी मुख्य वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली रही। इसके बावजूद उम्मीद जताई गई है कि यह ट्रेंड जल्द बदल सकता है और भारत निवेश के लिए आकर्षक बाजार बनकर उभर सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत औसतन 80 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर लगभग 6.6 प्रतिशत रह सकती है। इसके साथ ही मुद्रास्फीति बढ़कर 4.3 प्रतिशत और चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    अगर वैश्विक परिस्थितियों के कारण तेल की कीमतें और बढ़ती हैं और ब्रेंट 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला जाता है, तो भारत के लिए आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में चालू खाता घाटा 2.5 प्रतिशत से अधिक हो सकता है और व्यापार घाटा 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मौजूदा तेल कीमतों के स्तर पर सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में लगभग 19.5 रुपए प्रति लीटर की कटौती करनी पड़ सकती है। साथ ही एलपीजी पर करीब 1 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी का भार भी सरकार को उठाना पड़ सकता है।