Author: bharati

  • बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें

    बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें


    भोपाल।
    बागेश्वर धाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच साध्वी हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने एक नया वीडियो जारी कर लगातार धमकियां मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें गंदे कमेंट, मैसेज, ई-मेल और धमकियां भेजी जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह इन धमकियों से डरने वाली नहीं हैं और अपनी कही बात पर अब भी कायम हैं।

    साध्वी हर्षा ने कहा कि यदि उन्हें कुछ होता है तो इसकी आशंका उन लोगों पर जाएगी, जिनके श्रद्धालुओं की ओर से उन्हें धमकियां दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में उन्होंने किसी व्यक्ति, संत, आश्रम या संस्था का नाम नहीं लिया है। धमकी मिलने के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर उठाया था सवाल

    विवाद की शुरुआत साध्वी हर्षा के उस वीडियो से हुई थी, जिसमें उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयान पर सवाल उठाए थे।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यदि कोई महिला अकेले धाम आती है तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि धाम के मंदिर और हॉल की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली जा सकती है, लेकिन करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से लंबे समय तक धाम में नहीं रुकने तथा अपनी सुरक्षा और सामान का स्वयं ध्यान रखने की अपील भी की थी।

    हर्षा ने पूछा- फिर भरोसा किस पर करें?

    धीरेंद्र शास्त्री के इसी बयान पर साध्वी हर्षा ने सवाल उठाया था कि जब धाम के प्रमुख स्वयं अपने सेवादारों को लेकर श्रद्धालुओं को सावधान कर रहे हैं, तो परिवार अपने बच्चों और महिलाओं को वहां भेजते समय आखिर किस आधार पर भरोसा करें।

    उन्होंने लोगों से अपील की थी कि दर्शन के बाद ज्यादा समय तक धाम में न रुकें और वापस अपने घर लौट जाएं। नए वीडियो में हर्षा ने कहा कि वह अपनी इस सलाह से पीछे नहीं हटेंगी।

    कुंभ के दौरान भी धमकी मिलने का किया दावा

    साध्वी हर्षा ने नए वीडियो में कुंभ के दौरान भी धमकियां मिलने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने डरकर पीछे हटने के बजाय अपनी बात रखी थी। उनका कहना है कि अब भी धमकियों के बावजूद वह अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटेंगी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी के खिलाफ अपशब्द नहीं बोल रही हैं। किसी मुद्दे पर जो बात उन्हें सही या गलत लगती है, उस पर अपनी राय रखना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि धमकियों के जरिए उन्हें डराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

  • इस कार कंपनी में बड़ी छंटनी की तैयारी… 1 लाख कर्मियों को दिखाएगी बाहर का रास्ता!

    इस कार कंपनी में बड़ी छंटनी की तैयारी… 1 लाख कर्मियों को दिखाएगी बाहर का रास्ता!


    नई दिल्ली
    । लग्जरी स्पोर्ट्स कार (Luxury Sports Car Manufacturer) बनाने वाली कंपनी पोर्शे (Porsche) बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान की तैयारी कर रही है। कंपनी 2030 तक करीब 9,000 नौकरियों में कटौती कर सकती है। यह उसके कुल वर्कफोर्स का लगभग 25% है। कंपनी के मुताबिक, पहले से घोषित कटौती को शामिल करने पर कुल वर्कफोर्स रिडक्शन (Workforce reduction) करीब 30% तक पहुंच सकती है। चीन में बिक्री में गिरावट और ईवी स्ट्रेटजी में महंगे बदलावों ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके अलावा पोर्शे की मदर कंपनी फॉक्सवैगन ग्रुप में करीब 1 लाख जॉब कम करने पर काम कर रही है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

    पोर्शे के CEO माइकल लीटर्स ने 7 अक्टूबर को Stuttgart के पास कंपनी के Weissach डेवलपमेंट सेंटर में कैपिटल मार्केट डे के दौरान नई रणनीति पेश की। ‘Sportwagenschmiede ’35’ नाम की इस योजना का फोकस कम गाड़ियां बेचकर ज्यादा कमाई करने पर है, यानी कंपनी अब बिक्री की संख्या बढ़ाने के बजाय महंगे और ज्यादा प्राफिटेबल मॉडल्स पर ध्यान देगी।

    कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति पर नजर डालें तो पोर्शे का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पिछले साल घटकर सिर्फ 1.1% रह गया, जो 2023 में 18% था। अब कंपनी लंबे समय में इसे फिर से 10% से 15% के बीच लाने का लक्ष्य रख रही है। पोर्शे का कहना है कि रिकवरी में कई साल लग सकते हैं। खर्च घटाने के लिए उत्पादन कर्मियों की लागत में 30% तक और डेवलपमेंट कॉस्ट में 20% तक कटौती की योजना है। वहीं, मैनेजमेंट पोजिशन में करीब 40% की कमी की जा सकती है।

    पोर्शे (Porsche) की परेशानी में चीनी मार्केट की भूमिका भी बड़ी है। 2026 की पहली छमाही में चीन में कंपनी की बिक्री करीब एक-तिहाई घट गई। चीन कभी पोर्शे (Porsche) की कुल बिक्री का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा देता था, लेकिन 2030 तक कंपनी को उम्मीद है कि यह हिस्सा करीब 10% तक सिमट सकता है। CEO Leiters के मुताबिक, पुराने सेल्स लेवल पर किसी भी कीमत पर लौटने की कोशिश करना ब्रांड के लिए फायदेमंद नहीं होगा।

    महंगी होंगी Porsche की कारें
    अब पोर्शे (Porsche) अपनी स्ट्रेटजी में कम लेकिन महंगे व्हीकल बेचने पर जोर दे रही है। कंपनी खासतौर पर 911 जैसे हाई-एंड स्पोर्ट्स कार पर ध्यान बढ़ाएगी। टॉप मॉडल्स की एवरेज कीमत करीब 20% बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही मॉडल वैरिएंट की संख्या भी लगभग 20% कम की जा सकती है। कंपनी अब सालाना 2 लाख से कम व्हीकल बेचकर भी अपने खर्च और प्रॉफिटेबिलिटी को बेहतर करना चाहती है। पिछले साल पोर्शे ने दुनिया भर में 2,79,449 व्हीकल डिलीवर किए थे।

    प्रोडक्ट स्ट्रेटजी में भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। कंपनी 2028 में इलेक्ट्रिक 718 Boxster और Cayman मॉडल्स लाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा एक नया कंबस्टन-इंजन SUV और 911 से ऊपर पोजिशन किया जाने वाला सुपरकार प्लेटफॉर्म भी प्लांड है। पोर्शे (Porsche) का लक्ष्य ऐसे प्रीमियम मॉडल्स के जरिए डिमांड और मार्जिन को मजबूत करना है।

    पूरे ग्रुप में 1 लाख जॉब्स खत्म करने का प्लान
    पोर्शे (Porsche) की मुश्किलों का असर उसकी पैरेंट कंपनी फॉक्सवैगन पर भी पड़ रहा है। लाइव मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फॉक्सवैगन के पास पोर्शे की 75% हिस्सेदारी है और वह पूरे ग्रुप में करीब 1 लाख जॉब्स कम करने पर काम कर रही है।

  • नेशनल हाईवे को जाम फ्री बनाने की तैयारी…. फास्टैग और वाहन डेटाबेस की मदद से होगी एडवांस प्लानिंग

    नेशनल हाईवे को जाम फ्री बनाने की तैयारी…. फास्टैग और वाहन डेटाबेस की मदद से होगी एडवांस प्लानिंग


    नई दिल्ली।
    देश में नेशनल हाईवे (National Highway) के निर्माण और ट्रैफिक प्रबंधन की पुरानी परिपाटी बदलने जा रही है। अब हाईवे पर घंटों लंबे जाम और हादसों का इंतजार करने के बजाय सरकार (Government) फास्टैग (FASTag) और वाहन डेटाबेस (Vehicle Database) की मदद से एडवांस प्लानिंग करेगी। इसके तहत किसी हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से दो-तीन साल पहले ही उसके चौड़ीकरण या बाईपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फास्टैग अब सिर्फ टोल वसूली का जरिया नहीं रहेगा। इसके डेटा का उपयोग ट्रैफिक पैटर्न, गाड़ियों की रफ्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में किया जाएगा। वर्तमान में किसी हाईवे सेक्शन पर वाहनों की संख्या उसकी कुल क्षमता के 75 से 80 प्रतिशत तक पहुंचेगी तो डिजिटल सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से चौड़ीकरण, बाईपास या एलिवेटेड कॉरिडोर की जरूरत के लिए अलर्ट कर देगा। इससे गंभीर जाम की स्थिति पैदा होने से 2 से 3 साल पहले ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो सकेगा।


    दूसरे रास्तों की सलाह से सफर आसान होगा

    अधिकारी ने बताया कि त्योहारों, लंबे सप्ताहांत या छुट्टियों के दौरान टोल प्लाजा पर अचानक गाड़ियों का दबाव बढ़ जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एआई आधारित ट्रैफिक कंट्रोल रूम फास्टैग ट्रेंड्स का विश्लेषण कर पहले ही पहचान लेगा कि किस टोल पर कतारें लग सकती हैं। सिस्टम सड़क यात्रियों को राजमार्गयात्रा ऐप, गूगल मैप्स और हाईवे पर लगे वेरिएबल मैसेज साइनेज के जरिए टोल प्लाजा से 20-30 किलोमीटर पहले ही वैकल्पिक रास्तों की सटीक जानकारी दे दी जाएगी।


    मार्च 2027 तक बैरियर मुक्त होंगे टोल

    पीक आवर्स में टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के लिए मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएचएफएफ) और स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) आधारित बैरियर-मुक्त व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे वाहन 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बिना थमे टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई, अधिकारियों और गति शक्ति सेल की संयुक्त समीक्षा बैठक में इस डिजिटल रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया है।

  • नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के रिश्ते का सच, अग्नि साक्षी के राइटर ने बताया दोनों के बीच कैसी थी नजदीकी

    नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के रिश्ते का सच, अग्नि साक्षी के राइटर ने बताया दोनों के बीच कैसी थी नजदीकी


    नई दिल्ली। 90 के दशक में बॉलीवुड की कई जोड़ियां अपने काम के साथ साथ निजी रिश्तों को लेकर भी सुर्खियों में रही थीं। इन्हीं में अभिनेता नाना पाटेकर और अभिनेत्री मनीषा कोइराला का नाम भी अक्सर चर्चा में आता था। दोनों ने फिल्म अग्नि साक्षी में साथ काम किया था और इसी दौरान उनकी नजदीकियों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं सामने आने लगी थीं। लंबे समय तक दोनों के कथित अफेयर की खबरें फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। हालांकि इन चर्चाओं की कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। अब अग्नि साक्षी के लेखक रणबीर पुष्प के पुराने बयान ने एक बार फिर इस किस्से को चर्चा में ला दिया है।

    रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। सेट पर दोनों की आपसी समझ भी काफी मजबूत थी। वे अपने किरदारों और दृश्यों को लेकर आपस में चर्चा करते थे और उनकी यह समझ पर्दे पर भी दिखाई देती थी। रणबीर के मुताबिक उन्होंने दोनों को करीब जरूर देखा लेकिन उनके रिश्ते को उन्होंने कभी रोमांटिक नजरिए से नहीं देखा था।

    जब रणबीर से सीधे पूछा गया कि क्या नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच दोस्ती से आगे भी कोई रिश्ता था तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ। उन्होंने माना कि दोनों के बीच करीबी और गहरी समझ थी लेकिन इसे प्यार या रोमांस कहना उनके लिए सही नहीं था। रणबीर ने बताया कि दोनों कलाकार साथ काम करते समय अपने सीन को लेकर बातचीत करते थे और इसी वजह से उनकी स्क्रीन केमिस्ट्री भी काफी प्रभावी नजर आती थी।

    रणबीर ने यह भी बताया कि उस समय बाद में अखबारों और मीडिया में नाना और मनीषा के रिश्ते को लेकर कई तरह की बातें सामने आई थीं। उन्होंने उन खबरों को पढ़ा भी था लेकिन अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने कभी दोनों के रिश्ते को उस नजरिए से नहीं देखा। उनका कहना था कि सेट पर उनका मुख्य ध्यान अपने काम पर रहता था। वह काम से जुड़े मामलों पर ध्यान देते थे और कलाकारों के निजी रिश्तों को लेकर ज्यादा गौर नहीं करते थे।

    फिल्म अग्नि साक्षी साल 1996 में रिलीज हुई थी। पार्थो घोष के निर्देशन में बनी इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर में नाना पाटेकर मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में नाना और मनीषा की जोड़ी को दर्शकों ने देखा और इसी दौरान दोनों की ऑफस्क्रीन बॉन्डिंग को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई थीं। वर्षों बाद भी दोनों के कथित रिश्ते का किस्सा बॉलीवुड की चर्चित कहानियों में शामिल रहा है।

    हालांकि रणबीर पुष्प का बयान यह साफ करता है कि उन्होंने दोनों के बीच मजबूत दोस्ती और अच्छी अंडरस्टैंडिंग जरूर देखी थी लेकिन उनके सामने ऐसा कोई अनुभव नहीं आया जिससे वह इसे रोमांटिक रिश्ता मान सकें। ऐसे में नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच प्रेम संबंध की पुरानी चर्चाएं आज भी अफवाहों और अटकलों तक ही सीमित नजर आती हैं।

  • रसोई के नमक को सिर्फ खाने तक न रखें सीमित, सिंक से कटिंग बोर्ड तक इन कामों में आएगा उपयोग

    रसोई के नमक को सिर्फ खाने तक न रखें सीमित, सिंक से कटिंग बोर्ड तक इन कामों में आएगा उपयोग

    नई दिल्ली । रसोई में इस्तेमाल होने वाला नमक केवल खाने का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है। घर की सफाई से जुड़ी कुछ सामान्य परेशानियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। सिंक से आने वाली बदबू, कप या मग पर लगे हल्के दाग और लकड़ी के कटिंग बोर्ड पर रह जाने वाली गंध जैसी स्थितियों में नमक घरेलू सफाई के काम आ सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल हर सतह या हर समस्या के लिए सही नहीं माना जाता।

    नमक में हल्का घर्षण होता है, इसलिए कुछ बर्तनों की सतह से सामान्य गंदगी हटाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। कप या मग के अंदर चाय-कॉफी के हल्के दाग होने पर थोड़ी मात्रा में नमक पानी के साथ लगाकर नरम स्पंज से हल्के हाथ से रगड़ा जा सकता है। इसके बाद बर्तन को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। ज्यादा जोर लगाने से सतह को नुकसान पहुंच सकता है।

    किचन सिंक में खाने के छोटे टुकड़े या गंदगी फंसने से कई बार दुर्गंध आने लगती है। ऐसी स्थिति में थोड़े नमक को गर्म पानी के साथ सिंक में डालकर बहाया जा सकता है। यह सामान्य सफाई में मदद कर सकता है और सिंक की बदबू कम करने में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, अगर नाली जाम है या बदबू लगातार बनी हुई है तो केवल नमक पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

    लकड़ी के कटिंग बोर्ड पर प्याज, लहसुन और मसाले काटने के बाद उनकी गंध रह सकती है। ऐसे में बोर्ड पर थोड़ा नमक छिड़ककर नींबू के कटे हुए हिस्से से हल्के हाथ से रगड़ने का घरेलू तरीका अपनाया जा सकता है। सफाई के बाद बोर्ड को पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाना चाहिए। लकड़ी के कटिंग बोर्ड को बहुत ज्यादा पानी में भिगोना उचित नहीं माना जाता।

    कांच या स्टील की कुछ चीजों पर हल्की जमी गंदगी की सफाई में भी नमक का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे नाजुक सतह पर सीधे और जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। पानी या उपयुक्त सफाई सामग्री के साथ सावधानी से इस्तेमाल करना बेहतर है। कांच, पॉलिश वाली सतह और आसानी से खरोंच आने वाली चीजों पर विशेष सावधानी जरूरी है।

    कपड़ों के दाग हटाने के लिए भी कई घरेलू नुस्खों में नमक का इस्तेमाल बताया जाता है, लेकिन हर तरह के कपड़े और दाग पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। किसी कपड़े पर इसे आजमाने से पहले उसके देखभाल संबंधी निर्देश देखना चाहिए। जरूरत हो तो पहले कपड़े के किसी छिपे हिस्से पर थोड़ी मात्रा से परीक्षण किया जा सकता है।

    घर की सफाई में नमक का इस्तेमाल करते समय सतह की प्रकृति को ध्यान में रखना जरूरी है। मार्बल, प्राकृतिक पत्थर, नाजुक पॉलिश, कोटेड सतह या ऐसी चीजों पर नमक रगड़ने से बचना चाहिए जिन पर आसानी से खरोंच पड़ सकती है। सफाई पूरी होने के बाद संबंधित सतह को अच्छी तरह पोंछना भी जरूरी है।

    बागवानी में नमक का इस्तेमाल करते समय खास सावधानी रखनी चाहिए। पौधों की मिट्टी में ज्यादा नमक जमा होने से जड़ों और पौधों की बढ़त को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए पौधों को हरा-भरा रखने के लिए मिट्टी में नमक डालना सामान्य घरेलू उपाय नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी खास पौधे के लिए नमक के इस्तेमाल की सलाह दी गई हो तो उसकी किस्म और उचित मात्रा की जानकारी लेना जरूरी है।

  • शेयर बाजार में बढ़ी बेचैनी, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, अब 8 अक्टूबर के बाद किस ओर जाएगी बाजार की चाल

    शेयर बाजार में बढ़ी बेचैनी, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, अब 8 अक्टूबर के बाद किस ओर जाएगी बाजार की चाल


    नई दिल्ली। 8 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार के कारोबार पर निवेशकों की नजर टिकी हुई है। इससे पहले 7 अक्टूबर का कारोबारी सत्र बाजार के लिए काफी उतार चढ़ाव वाला रहा। RBI की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद बाजार में दबाव बढ़ा और सेंसेक्स 429 अंक की गिरावट के साथ 72638.70 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 173 अंक फिसलकर 22603.05 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और अब 8 अक्टूबर के कारोबार में बाजार किस दिशा में जाता है इस पर सबकी नजर रहेगी।

    दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बड़ी दर बढ़ोतरी है। इसके साथ ही RBI ने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया। बाजार के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों की उधारी लागत प्रभावित हो सकती है और ब्याज दर पर निर्भर सेक्टरों में दबाव बढ़ सकता है।

    7 अक्टूबर को बाजार में ज्यादातर प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। मेटल शेयरों पर खास दबाव रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2.3 फीसदी नीचे रहा। रियल एस्टेट और ऑटो जैसे ब्याज दर से प्रभावित होने वाले सेक्टर भी दबाव में रहे। दूसरी तरफ बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। RBI के फैसले के बाद बैंक निफ्टी ने दिन के निचले स्तर से करीब 600 अंक की रिकवरी भी दिखाई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में पूरी तरह से बिकवाली का माहौल नहीं है बल्कि अलग अलग सेक्टरों में निवेशकों की रणनीति अलग रह सकती है।

    शेयरों की बात करें तो टाइटन में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह निफ्टी के प्रमुख कमजोर शेयरों में रहा। अदाणी एंटरप्राइजेज और हिंदाल्को इंडस्ट्रीज में भी दबाव दिखाई दिया। इसके उलट कोटक महिंद्रा बैंक में करीब 1.9 फीसदी की तेजी रही। ऐसे में 8 अक्टूबर को निवेशकों की नजर उन शेयरों पर रह सकती है जिनमें मजबूत कारोबार और बेहतर तिमाही प्रदर्शन की उम्मीद है।

    बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत भी बड़ा संकेत बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल के साथ महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है। 7 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 2961 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5088 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

    कुल मिलाकर 8 अक्टूबर का कारोबार बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। RBI की सख्त नीति कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें कमजोर रुपया और वैश्विक बाजारों के संकेत मिलकर बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकते हैं। वहीं मजबूत आर्थिक विकास का अनुमान बाजार के लिए सकारात्मक पक्ष है। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया है। ऐसे में निवेशकों को बाजार की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय जोखिम और कंपनी के प्रदर्शन को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • एक जैसे दिखते हैं फिर भी शरीर पर अलग असर, कागान और सोआई की खोज ने समझाया अणुओं का अनोखा खेल

    एक जैसे दिखते हैं फिर भी शरीर पर अलग असर, कागान और सोआई की खोज ने समझाया अणुओं का अनोखा खेल


    नई दिल्ली। रसायन विज्ञान के क्षेत्र में 2026 का नोबेल पुरस्कार ऐसी वैज्ञानिक खोज के लिए दिया गया है जिसने एक बेहद पेचीदा सवाल को समझने की नई राह दिखाई है। सवाल यह है कि देखने में लगभग एक जैसे लगने वाले कुछ मॉलिक्यूल्स आखिर एक दूसरे से इतने अलग कैसे हो सकते हैं और शुरुआत में मौजूद बेहद छोटा अंतर समय के साथ इतना बड़ा कैसे बन सकता है। हेनरी बी कागान और केन्सो सोआई के काम ने इसी गुत्थी को समझने में अहम भूमिका निभाई है। उनके शोध का संबंध असिमेट्रिक ऑर्गेनिक सिंथेसिस में नॉन लीनियर इफेक्ट्स और ऑटोकैटेलिसिस से है।

    इस खोज को समझने के लिए सबसे आसान उदाहरण हमारे बाएं और दाएं हाथ का है। दोनों हाथ देखने में लगभग एक जैसे होते हैं लेकिन एक को दूसरे के ऊपर रखने पर वे पूरी तरह मेल नहीं खाते। रसायन विज्ञान में भी कुछ मॉलिक्यूल्स इसी तरह व्यवहार करते हैं। इन्हें काइरल मॉलिक्यूल कहा जाता है और इनके दो मिरर इमेज रूपों को एनैंटियोमर्स कहा जाता है। दोनों रूपों की बनावट एक दूसरे की आईने में दिखाई देने वाली तस्वीर जैसी होती है लेकिन उनका व्यवहार अलग हो सकता है।

    इस अंतर का महत्व दवाओं के निर्माण में बेहद ज्यादा है। शरीर इन दोनों रूपों को अलग अलग तरीके से पहचान सकता है। किसी दवा में एक मिरर इमेज शरीर के लिए जरूरी प्रभाव पैदा कर सकती है जबकि दूसरा रूप कम असरदार या कुछ परिस्थितियों में नुकसानदायक भी हो सकता है। इसी वजह से वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित करना चाहते हैं जिससे जरूरत वाले मॉलिक्यूल का सही रूप अधिक मात्रा में तैयार किया जा सके। थैलिडोमाइड का मामला इस विषय की गंभीरता को सामने ला चुका है।

    यह रहस्य केवल दवाओं तक सीमित नहीं है बल्कि जीवन की रसायन विज्ञान से भी जुड़ा है। जीवित दुनिया में कई मॉलिक्यूल्स के दो मिरर इमेज रूप संभव होते हैं लेकिन जीवन में अक्सर इनमें से केवल एक रूप का इस्तेमाल होता है। इसे होमोकाइरैलिटी कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर प्रोटीन बनाने वाले अमीनो एसिड्स के दो संभावित रूप हो सकते हैं लेकिन जीवित शरीर प्रोटीन निर्माण के लिए इनमें से केवल एक रूप का इस्तेमाल करता है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि ऐसा क्यों हुआ।

    इस कहानी में लुई पाश्चर का काम भी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने टार्टरिक एसिड के अध्ययन के दौरान ऐसे क्रिस्टल देखे जो दो अलग रूपों में मौजूद थे और एक दूसरे की मिरर इमेज थे। बाद में उन्होंने पाया कि बैक्टीरिया टार्टरिक एसिड के एक रूप को इस्तेमाल करते हैं लेकिन उसके मिरर इमेज रूप को नहीं। इससे यह संकेत मिला कि जीवित चीजें मॉलिक्यूल्स के इन दोनों रूपों में अंतर कर सकती हैं।

    इसके बाद विली मार्कवाल्ड ने ऐसी रासायनिक प्रक्रिया की दिशा में काम किया जिसमें दोनों मिरर इमेज बराबर मात्रा में बनने के बजाय एक रूप अधिक बन सकता था। 1953 में चार्ल्स फ्रैंक ने यह समझाने के लिए एक मॉडल दिया कि अगर किसी प्रतिक्रिया में एक मिरर इमेज को शुरुआत में थोड़ी सी बढ़त मिल जाए और वही प्रक्रिया उस बढ़त को आगे बढ़ाती रहे तो छोटा अंतर लगातार बड़ा हो सकता है। इसे ऑटोकैटेलिसिस के विचार से समझा जा सकता है।

    यहीं हेनरी कागान और केन्सो सोआई का काम खास बनता है। कागान ने दिखाया कि कैटेलिस्ट में बहुत छोटा बदलाव अंतिम उत्पाद में दोनों मिरर इमेज की मात्रा के बीच बहुत बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। इसे नॉन लीनियर इफेक्ट कहा गया। इसके बाद सोआई ने ऐसी प्रक्रिया पर काम किया जिसमें प्रतिक्रिया से बनने वाला पदार्थ खुद उसी प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करता है।

    इसका प्रभाव कितना बड़ा हो सकता है इसे 1995 और 2003 के प्रयोगों से समझा जा सकता है। एक प्रक्रिया में शुरुआत में केवल 2 प्रतिशत की बढ़त मिली लेकिन आगे चलकर वही रूप 87 प्रतिशत तक पहुंच गया। बाद में ऐसी प्रक्रिया भी दिखाई गई जिसमें बेहद छोटी शुरुआती बढ़त लगातार बढ़ती गई और एक मिरर इमेज 99.99 प्रतिशत तक प्रमुख रूप बन सकती थी। यानी शुरुआत का मामूली अंतर रासायनिक प्रक्रिया के दौरान असाधारण रूप से बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है।

    इस खोज ने जीवन की शुरुआत का रहस्य सीधे साबित नहीं किया है लेकिन इससे यह समझने का नया तरीका जरूर मिला है कि अगर शुरुआत में दोनों मिरर इमेज मौजूद हों तो उनमें से कोई एक रूप धीरे धीरे कैसे हावी हो सकता है। इसके अलावा ऐसी केमिस्ट्री दवाओं के साथ फ्लेवर खुशबू और खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों के निर्माण में भी उपयोगी हो सकती है।

  • गुरुवार के दिन ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, वैवाहिक जीवन से धन संपत्ति तक मिल सकते हैं शुभ फल, जानें व्रत की पूरी विधि

    गुरुवार के दिन ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, वैवाहिक जीवन से धन संपत्ति तक मिल सकते हैं शुभ फल, जानें व्रत की पूरी विधि


    नई दिल्ली। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि और शांति आती है। माना जाता है कि भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और गुरु ग्रह से जुड़े शुभ प्रभाव मजबूत होते हैं। खासतौर पर विवाह में आ रही परेशानियों को दूर करने और वैवाहिक जीवन में सुख पाने के लिए भी गुरुवार का व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

    गुरुवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए। पूजा के लिए भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके उनके सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें। पीले रंग की वस्तुओं को इस पूजा में विशेष महत्व दिया जाता है। भगवान को केले और पीले मिष्ठान का भोग लगाया जा सकता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करना और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति की पूजा करने से गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव प्राप्त हो सकते हैं। पूजा के दौरान बृहस्पति देव का ध्यान करके पीली वस्तुएं जैसे चने की दाल हल्दी केला या पीले वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना भी पुण्यकारी माना जाता है। कई लोग इस दिन केले के पेड़ की पूजा भी करते हैं। हालांकि पूजा की परंपराएं अलग अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती हैं।

    गुरुवार व्रत के दौरान खानपान को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। कई लोग नमक का सेवन नहीं करते और केवल सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत में भगवान विष्णु को समर्पित कथा सुनना या पढ़ना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा पूरी करने के बाद भगवान से परिवार की सुख शांति और समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए।

    गुरुवार के दिन कुछ कार्यों को धार्मिक मान्यताओं में शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन अनावश्यक रूप से क्रोध करने झूठ बोलने या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन मन को शांत रखकर भगवान का स्मरण करने से आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है।

    गुरुवार व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि संयम और अनुशासन का अभ्यास भी माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा के साथ व्रत करता है तो उसे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए ही उपवास करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की भक्ति के साथ अच्छे कर्म और जरूरतमंदों की मदद करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। यही वजह है कि गुरुवार का व्रत आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ रखते हैं।

  • गरबा में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर मुफ्ती की दो टूक, अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं पर रहें कायम

    गरबा में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर मुफ्ती की दो टूक, अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं पर रहें कायम


    नई दिल्ली। नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने को लेकर भोपाल में धार्मिक बयान सामने आया है। मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मुस्लिम युवाओं से गरबा में शामिल नहीं होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवाओं का दूसरी कौम के धार्मिक त्योहार या धार्मिक रस्म में शामिल होना जायज नहीं है। उनके मुताबिक दूसरी कौम की मुशाबहत यानी अनुकरण से भी बचना चाहिए। मुफ्ती ने खास तौर पर मुस्लिम युवाओं को दोस्तों के साथ गरबा में जाने से भी परहेज करने की सलाह दी है।

    अपने वीडियो में मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी के सवाल पर इसे हराम बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में होने वाले गरबा या हिंदू धार्मिक रस्म में मुस्लिम लड़कों का शामिल होना उचित नहीं है। उनका कहना है कि कुछ मुस्लिम युवक अपने दोस्तों के साथ गरबा में जाना सामान्य बात समझते हैं लेकिन उन्हें इससे बचना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज के युवाओं से अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं के प्रति जागरूक रहने की बात कही।

    मुफ्ती ने कहा कि मुस्लिम समाज की अपनी धार्मिक परंपराएं और रीति रिवाज हैं और युवाओं को इन्हीं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने दूसरी कौम की धार्मिक रस्मों के अनुकरण को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इस तरह का अनुकरण मुस्लिम समाज के लिए फितने का कारण बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों का अपना धर्म और उसकी परंपराएं उनके लिए पर्याप्त हैं और उन्हें दूसरे धर्मों के त्योहारों की ओर आकर्षित होने की जरूरत नहीं है।

    मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने अपने बयान में मस्जिद और नमाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले मस्जिद के गेट तक भी नहीं आते थे वे अब वहां तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को मुस्लिम धार्मिक परंपराओं के प्रति बढ़ती दिलचस्पी से जोड़ते हुए कहा कि अगर कोई मस्जिद के गेट तक आया है तो आगे चलकर अंदर भी आ सकता है। उन्होंने लोगों को नमाज और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया।

    गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर यह अपील केवल मुफ्ती की ओर से ही नहीं आई है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी भी मुस्लिम युवाओं और समाज के लोगों से गरबा में जाने से परहेज करने की अपील कर चुकी है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख इस्माइल खान ने 6 अक्टूबर को जारी अपील में कहा था कि इसका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और विवाद की स्थिति से बचना है।

    कमेटी की ओर से कहा गया है कि हाल के दिनों में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्तियां सामने आई हैं। इसी को देखते हुए कमेटी ने अपने पदाधिकारियों को प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर अभियान चलाने के लिए कहा है। इसके तहत स्थानीय उलेमा और सामाजिक संगठनों से संपर्क कर मुस्लिम युवाओं को गरबा आयोजनों से दूर रहने की अपील की जाएगी।

    कमेटी के मुताबिक जिला प्रशासन को भी इस पहल की जानकारी दी जाएगी। उसका कहना है कि किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना उद्देश्य नहीं है बल्कि विवाद से बचना और शांति बनाए रखना प्राथमिकता है। गरबा और मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर सामने आए इन बयानों के बीच अब यह मुद्दा धार्मिक पहचान सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

  • शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, हाथी पर मां दुर्गा का आगमन और 10 दिनों तक पूजा का कारण जानें

    शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, हाथी पर मां दुर्गा का आगमन और 10 दिनों तक पूजा का कारण जानें

    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पर्व इस साल 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगा। देशभर में इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त व्रत और साधना के साथ माता रानी से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। इस बार नवरात्रि को लेकर खास बात यह है कि पर्व सामान्य नौ दिनों के बजाय 10 दिनों तक चलेगा। तिथियों में वृद्धि होने के कारण नवरात्रि की अवधि एक दिन बढ़ गई है और इसका समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी तथा दशहरा के साथ होगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत जिस वार से होती है, उसके आधार पर मां दुर्गा के वाहन के आगमन की मान्यता जुड़ी होती है। इस बार नवरात्रि रविवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में हाथी को स्थिरता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। माता के हाथी पर आने को अच्छी वर्षा और धन-धान्य में वृद्धि का संकेत भी माना जाता है।

    नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाएगी। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी। घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है। भक्त इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापना कर नवरात्रि की पूजा की शुरुआत कर सकते हैं।

    इस बार 10 दिनों तक नवरात्रि चलने का कारण तिथियों में वृद्धि है। पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि दो दिन रहने के कारण पर्व की अवधि एक दिन बढ़ गई है। हालांकि नवरात्रि के धार्मिक आधार में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की ही पूजा की जाएगी। यानी पूजा के क्रम में नौ देवियों की आराधना ही रहेगी, लेकिन तिथियों की गणना के कारण नवरात्रि का पूरा पर्व 10 कैलेंडर दिनों में संपन्न होगा।

    11 अक्टूबर को प्रतिपदा के दिन मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना होगी। 12 अक्टूबर को द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को तृतीया पर मां चंद्रघंटा और 14 अक्टूबर को चतुर्थी पर मां कूष्मांडा की आराधना होगी। 15 अक्टूबर को पंचमी के दिन मां स्कंदमाता और 16 अक्टूबर को षष्ठी पर मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी।

    17 अक्टूबर को सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा होगी। 18 अक्टूबर को महानिशा पूजा और दुर्गा अष्टमी होगी, जबकि सप्तमी तिथि भी जारी रहेगी। 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग रहेगा तथा इस दिन कन्या पूजन किया जाएगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को नवमी तिथि के बाद विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा।

    शारदीय नवरात्रि को शक्ति की उपासना का प्रमुख पर्व माना जाता है। इन दिनों भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ व्रत और साधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी की आराधना से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्रि का समय आत्मसंयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना के लिए भी विशेष माना जाता है। इस बार 10 दिनों तक चलने वाला यह पर्व 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा।