Author: bharati

  • क्रिकेट इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय पूरा, वनडे फॉर्मेट ने हासिल किया 5000 मुकाबलों का ऐतिहासिक मुकाम।

    क्रिकेट इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय पूरा, वनडे फॉर्मेट ने हासिल किया 5000 मुकाबलों का ऐतिहासिक मुकाम।


    नई दिल्ली । 
    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे लोकप्रिय प्रारूपों में से एक वनडे क्रिकेट ने हाल ही में 5000 मुकाबलों का एक ऐतिहासिक और गौरवशाली पड़ाव पार कर लिया है। स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच खेला गया रोमांचक मैच इस फॉर्मेट के इतिहास का 5000वां मुकाबला बना, जिसमें स्कॉटलैंड ने 9 रन से जीत दर्ज की। टेस्ट क्रिकेट के बाद अस्तित्व में आए वनडे फॉर्मेट ने बीते दशकों में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है। हालांकि, मौजूदा दौर में टी20 फॉर्मेट के तेजी से बढ़ते प्रभाव और व्यस्त शेड्यूल के बीच वनडे के भविष्य और प्रासंगिकता को लेकर भी खेल जगत में नए सिरे से बहस छिड़ गई है।

    सांख्यिकीय आंकड़ों के लिहाज से देखें तो तीनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में अब तक सबसे अधिक मुकाबले वनडे क्रिकेट में ही खेले गए हैं। टेस्ट क्रिकेट में जहां 2600 से अधिक मैच हुए हैं, वहीं टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की संख्या भी 4000 के पार पहुंच चुकी है। जिस गति से टी20 मैचों का आयोजन हो रहा है, उसे देखते हुए खेल विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में टी20 सबसे ज्यादा खेले जाने वाला फॉर्मेट बन सकता है। इसके बावजूद वनडे क्रिकेट का इतिहास कई ऐसे व्यक्तिगत और टीम रिकॉर्ड्स से समृद्ध है, जिन्हें तोड़ना आज भी किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन चुनौती है।

    इस 5000वें ऐतिहासिक मैच के अवसर पर वनडे क्रिकेट के सबसे यादगार और लंबे समय तक कायम रहने वाले रिकॉर्ड्स को याद किया गया। इनमें सबसे शीर्ष पर भारतीय बल्लेबाजी के आधार स्तंभ रहे सचिन तेंदुलकर के 18426 रनों का महारिकॉर्ड है। सचिन ने वर्ष 2012 में अपना अंतिम वनडे मुकाबला खेला था, लेकिन उनके संन्यास के इतने वर्षों बाद भी दुनिया का कोई भी बल्लेबाज उनके इस विशाल स्कोर तक नहीं पहुंच पाया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सचिन का प्रभुत्व इस फॉर्मेट पर किस स्तर का रहा था।

    सचिन के इस सबसे बड़े रिकॉर्ड के सबसे करीब वर्तमान समय के महान बल्लेबाज विराट कोहली हैं, जिनके नाम 14900 से अधिक वनडे रन दर्ज हैं। हालांकि, सचिन और कोहली के बीच अभी भी 3400 से अधिक रनों का बड़ा फासला है। कोहली भले ही वनडे प्रारूप पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हों, लेकिन मैचों की घटती संख्या और करियर के इस पड़ाव को देखते हुए सचिन का रिकॉर्ड तोड़ पाना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि क्रिकेट विशेषज्ञ 18426 रनों के इस आंकड़े को खेल इतिहास के सबसे सुरक्षित रिकॉर्ड्स में से एक मानते हैं।

    इसके अलावा वनडे इतिहास में श्रीलंका का सबसे बड़ा टीम स्कोर, विव रिचर्ड्स की ऐतिहासिक पारियां, चमिंडा वास और मुथैया मुरलीधरन की घातक गेंदबाजी तथा सनथ जयसूर्या और शाहिद अफरीदी के सबसे तेज तूफानी शतक-अर्धशतक जैसे रिकॉर्ड्स ने भी दशकों तक प्रशंसकों को रोमांचित किया है। सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज सबसे ज्यादा शतकों और वकार यूनिस के सबसे ज्यादा पांच विकेट हॉल का रिकॉर्ड भी इस फॉर्मेट की शान रहा है। 5000 मैचों का यह सफर साबित करता है कि वनडे क्रिकेट का रोमांच और इसके ऐतिहासिक आंकड़े हमेशा खास बने रहेंगे।

  • FCRA बिल पर संसद में संग्राम के आसार, कांग्रेस ने 10-12 अगस्त के लिए जारी किया व्हिप

    FCRA बिल पर संसद में संग्राम के आसार, कांग्रेस ने 10-12 अगस्त के लिए जारी किया व्हिप


    नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम सप्ताह में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA बिल को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। कांग्रेस ने शुक्रवार दोपहर लोकसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि दूसरे विपक्षी दल भी इसी तरह के निर्देश जारी कर सकते हैं।

    10 अगस्त को बिल पेश होने की चर्चा

    संभावना जताई जा रही है कि FCRA संशोधन विधेयक 10 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जा सकता है। चूंकि यह विधेयक गृह मंत्रालय से संबंधित है, इसलिए विपक्ष की नजर गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी पर भी है।

    शुक्रवार सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में हुई बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने सहयोगी दलों से भी सोमवार से अपने सांसदों की सदन में पर्याप्त मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा है।

    विपक्ष पहले से ही 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर मॉनसून सत्र के दौरान कई बार सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है।

    कांग्रेस के लोकसभा व्हिप मणिकम टैगोर ने कहा कि पार्टी अगले सप्ताह परिसीमन और FCRA बिल के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह पिछले 12 दिनों से सदन में मौजूद नहीं हैं और सरकार छात्रों के विरोध प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश कर सकती है।

    SP और TMC भी विपक्ष के साथ

    FCRA बिल को लेकर इंडिया ब्लॉक के अन्य दल भी कांग्रेस के साथ नजर आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष के सामूहिक एजेंडे का समर्थन करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सपा भी व्हिप जारी कर सकती है।

    सपा नेता ने यह आशंका भी जताई कि सरकार FCRA बिल पर चर्चा के दौरान अमित शाह की जगह गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को सदन में भेज सकती है।

    वहीं, तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक, पार्टी ने भी अपने सभी सांसदों को सोमवार से सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सभी दलों की ओर से औपचारिक व्हिप जारी करना जरूरी नहीं है और कुछ पार्टियां अपने सांसदों को अनौपचारिक निर्देश भी देती हैं।

    FCRA बिल को लेकर क्या है विवाद?

    FCRA संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर पहले से विवाद है। खास तौर पर ईसाई संगठनों में उस प्रावधान को लेकर चिंता जताई जा रही है, जिसके तहत FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म होने वाले संगठनों की संपत्तियों पर सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण को पूर्वव्यापी अधिकार मिलने की आशंका है।

    कई चर्च और ईसाई संस्थानों का निर्माण विदेशी चंदे से हुआ है और वे FCRA के दायरे में आते हैं। ऐसे में इस विधेयक को भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है, खासकर केरल जैसे राज्यों में जहां पार्टी ईसाई समुदाय के बीच अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

    हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने बुधवार को संकेत दिया था कि विधेयक में कोई दंडात्मक पूर्वव्यापी प्रावधान नहीं होगा। इसके बाद गुरुवार को मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखीं और ज्ञापन सौंपा। लालदुहोमा ने बताया कि शाह ने उन्हें आश्वासन दिया है कि विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा में लाया जाएगा और इसमें कोई रेट्रोस्पेक्टिव क्लॉज नहीं होगा।

    13 अगस्त को खत्म होना है मॉनसून सत्र

    संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल सत्र की अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

    इस बीच राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को किरेन रिजिजू से विपक्ष की भावनाओं से अमित शाह को अवगत कराने और सदन में उनकी मौजूदगी की मांग पर विचार करने को कहा था। ऐसे में सत्र के अंतिम तीन दिन सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • भारत के खिलाफ श्रीलंका इलेवन का बड़ा स्कोर, 363 रन पर घोषित की पारी; अर्धशतकों से बढ़ा दबाव

    भारत के खिलाफ श्रीलंका इलेवन का बड़ा स्कोर, 363 रन पर घोषित की पारी; अर्धशतकों से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बीच नोंडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब मैदान पर खेला जा रहा तीन दिवसीय वॉर्मअप मुकाबला रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन ने पहली पारी में 8 विकेट के नुकसान पर 363 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। दूसरे दिन श्रीलंकाई टीम बल्लेबाजी के लिए मैदान पर नहीं उतरी और पहले दिन के स्कोर को ही अपनी पारी का अंतिम स्कोर मानते हुए घोषणा कर दी। मुकाबले के पहले दिन श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों का दबदबा देखने को मिला और उन्होंने भारतीय गेंदबाजों के सामने मजबूती से बल्लेबाजी की।

    श्रीलंकाई पारी की शुरुआत निशान मदुश्का और रविंदु रसंता ने शानदार अंदाज में की। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 110 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को मजबूत आधार दिया। निशान मदुश्का ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 65 गेंदों में 66 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा। दूसरी ओर रविंदु रसंता ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए 143 गेंदों में 71 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी के दौरान 6 चौके और एक छक्का लगाया।

    सलामी जोड़ी के बाद भी श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को लगातार परेशान किया। पसिंदु सोरियाबंदरा ने 35 रन बनाए जबकि पवन रत्नायके ने 47 गेंदों में 39 रन की उपयोगी पारी खेली। हालांकि वह अपनी पारी को बड़ी पारी में बदलने में कामयाब नहीं हो सके और गुरनूर बरार का शिकार बने। अहान विक्रमसिंघे ने भी 31 रनों का योगदान दिया।

    टीम के कप्तान सोनल दिनुशा ने जिम्मेदारी संभालते हुए अर्धशतक लगाया। उन्होंने 71 गेंदों में 52 रन बनाए और टीम के स्कोर को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद रमेश मेंडिस ने 32 रन बनाए। केशरा नुवंता 9 रन और दिलुम सुदीरा एक रन बनाकर नाबाद रहे। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन ने 8 विकेट खोकर 363 रन बनाए और इसके बाद पारी घोषित करने का फैसला किया।

    भारतीय गेंदबाजी की बात करें तो तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा पहले दिन श्रीलंका के किसी भी बल्लेबाज को आउट नहीं कर सके। गुरनूर बरार को सिर्फ एक विकेट मिला। भारतीय स्पिनरों ने हालांकि कुछ हद तक दबाव बनाने की कोशिश की। कुलदीप यादव ने 76 रन खर्च कर 2 विकेट हासिल किए जबकि मानव सुथार ने 33 रन देकर 2 विकेट चटकाए। रवींद्र जडेजा ने भी 64 रन देकर 2 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा।

    वॉर्मअप मैच के पहले दिन भारतीय टीम अपने नियमित कप्तान शुभमन गिल के बिना मैदान पर उतरी। गिल की उंगली में चोट है और एहतियात के तौर पर वह फील्डिंग के लिए मैदान पर नहीं आए। उनकी गैरमौजूदगी में केएल राहुल ने टीम की कप्तानी संभाली। अब श्रीलंका क्रिकेट इलेवन की पारी घोषित होने के बाद भारतीय बल्लेबाजों के सामने बड़ी चुनौती है। भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह मजबूत बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई टीम के 363 रनों के स्कोर का जवाब दे और मैच में अपनी स्थिति मजबूत करे।

  • फ्लिंटॉफ ने छोड़ा इंग्लैंड लायंस का हेड कोच पद, अब BBL में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी

    फ्लिंटॉफ ने छोड़ा इंग्लैंड लायंस का हेड कोच पद, अब BBL में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी


    नई दिल्ली। इंग्लैंड क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने इंग्लैंड लायंस के हेड कोच पद से इस्तीफा दे दिया है। सितंबर 2024 में इंग्लैंड लायंस की जिम्मेदारी संभालने वाले फ्लिंटॉफ ने करीब दो साल तक युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने के बाद अब अपने कोचिंग करियर में नई चुनौती स्वीकार करने का फैसला किया है। फ्लिंटॉफ इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया की मशहूर बिग बैश लीग में सिडनी थंडर के साथ जुड़ेंगे। यह उनकी पहली फुल टाइम कोचिंग भूमिका होगी और उनके करियर के लिहाज से इसे एक अहम कदम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड लायंस के साथ अपने कार्यकाल को लेकर फ्लिंटॉफ ने कहा कि उन्होंने इस पद से हटने का फैसला काफी सोच विचार के बाद लिया है। उन्होंने इंग्लैंड की अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों के साथ काम करने को बेहद खास अनुभव बताया। फ्लिंटॉफ के मुताबिक युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ते हुए देखना उनके लिए गर्व की बात रही है। उन्होंने लायंस के कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट टीम का भी आभार जताया और उनके जुनून तथा लगातार मेहनत की सराहना की।

    फ्लिंटॉफ ने खास तौर पर एड बार्नी और रॉब का जिक्र करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस भूमिका ने उन्हें न केवल युवा क्रिकेटरों के साथ काम करने का मौका दिया बल्कि एक कोच के तौर पर खुद को आगे बढ़ाने का अवसर भी दिया। अब वह सिडनी थंडर के साथ काम शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं और यह देखना चाहते हैं कि कोचिंग का उनका सफर आगे किस दिशा में जाता है।

    फ्लिंटॉफ के इंग्लैंड लायंस से अलग होने की घोषणा सिडनी थंडर द्वारा उन्हें आगामी बिग बैश लीग सीजन के लिए हेड कोच नियुक्त किए जाने के करीब दो महीने बाद हुई है। इंग्लैंड के लिए लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले फ्लिंटॉफ अब ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टी20 प्रतियोगिता में अपनी कोचिंग क्षमता का इस्तेमाल करते नजर आएंगे। उनके अनुभव और आक्रामक क्रिकेट की समझ को देखते हुए सिडनी थंडर के साथ उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के मेंस परफॉर्मेंस डायरेक्टर एड बार्नी ने भी फ्लिंटॉफ के कार्यकाल की जमकर तारीफ की है। बार्नी के अनुसार फ्लिंटॉफ ने इंग्लैंड लायंस के माहौल को एक ऐसे मजबूत कार्यक्रम में बदलने में अहम भूमिका निभाई जिसका युवा खिलाड़ियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। उन्होंने ऐसा वातावरण तैयार किया जहां खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करने के साथ अपनी क्षमता को भी लगातार विकसित कर सकें।

    बार्नी ने यह भी कहा कि फ्लिंटॉफ के साथ काम करते हुए युवा और अनुभवी दोनों तरह के कोचों को आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने टीम के कोचिंग ग्रुप में मौजूद विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल किया और इंग्लैंड की अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ईसीबी ने फ्लिंटॉफ को उनके कोचिंग करियर के अगले चरण के लिए शुभकामनाएं दी हैं और भविष्य में इंग्लिश क्रिकेट में उनकी वापसी की उम्मीद भी जताई है।

    फ्लिंटॉफ के जाने के बाद ईसीबी ने आगामी चार दिवसीय मुकाबले के लिए अंतरिम व्यवस्था भी कर दी है। 12 अगस्त से बेकनहैम में प्रोफेशनल काउंटी क्लब सिलेक्ट इलेवन और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले में माइक यार्डी इंग्लैंड लायंस की ओर से कोचिंग जिम्मेदारी संभालेंगे। फ्लिंटॉफ की विदाई के साथ इंग्लैंड लायंस में एक दौर का अंत हुआ है लेकिन उनके लिए कोचिंग करियर में एक नई और रोमांचक शुरुआत होने जा रही है।

  • टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा

    टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा


    भोपाल । भोपाल में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद अब बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था से नाराज टैक्सी चालकों ने शनिवार को दोपहर 12 बजे लिंक रोड नंबर-1 स्थित चेनार पार्क में महाबैठक बुलाई है। भोपाल टैक्सी चालक संघ भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में शहरभर के ड्राइवर शामिल होंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संघ का कहना है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों ने किराया व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो आंदोलन को पूरे मध्य प्रदेश में फैलाया जा सकता है और अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला भी लिया जा सकता है।

    टैक्सी चालक संघ के मुताबिक 23 से 25 जून तक एयरपोर्ट राइड के बहिष्कार के दौरान कंपनियों पर दबाव बना था और कुछ राइड के किराए में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक सुधार किया गया था। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बाद दोबारा पुराने किराए लागू कर दिए गए। ड्राइवरों का आरोप है कि अब कई छोटी राइड के लिए उन्हें महज 30 से 40 रुपये तक मिल रहे हैं जबकि पहले इसी तरह की बुकिंग पर 50 से 60 रुपये तक का भुगतान होता था। चालकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत वाहन की सर्विसिंग बीमा परमिट और दूसरे खर्चों के बीच इतनी कम कमाई में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले के अनुसार शनिवार की बैठक में सभी ड्राइवरों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह बैठक केवल किराया बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी किराया प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर है। संघ के मुताबिक सरकार को ऐसी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए जिसमें प्रत्येक राइड के लिए 50 से 60 रुपये का बेस फेयर तय हो। इसके साथ यात्रा के समय के आधार पर 1 से 1.50 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और वाहन की श्रेणी के अनुसार 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू की जानी चाहिए।

    ड्राइवरों का कहना है कि केवल प्रतिशत के आधार पर किराया बढ़ाने से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक वर्ष 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था में बेस फेयर टाइम चार्ज और दूरी के हिसाब से भुगतान शामिल था लेकिन अब कई मामलों में केवल तय दूरी के आधार पर किराया दिया जाता है। इससे ट्रैफिक में फंसने या यात्री का इंतजार करने के दौरान ड्राइवर को अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं मिलता।

    संघ के प्रस्तावित किराया मॉडल के अनुसार अरेरा हिल्स से राजा भोज एयरपोर्ट तक मौजूदा 246 से 282 रुपये का किराया बढ़कर करीब 416 से 552 रुपये तक हो सकता है। इसी तरह न्यू मार्केट से रेलवे स्टेशन का किराया 95 से 108 रुपये की जगह करीब 205 से 270 रुपये तक पहुंच सकता है। लालघाटी से एमपी नगर का किराया 152 से 167 रुपये से बढ़कर 302 से 401 रुपये और रातीबड़ थाना से भोपाल रेलवे स्टेशन का किराया 274 से 314 रुपये से बढ़कर 474 से 638 रुपये तक हो सकता है।

    टैक्सी चालकों की मांगों में निर्धारित किराया नीति लागू करने के अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर रोक निजी नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई अवैध बाइक टैक्सी संचालन पर रोक और ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था शामिल है। इससे पहले भी ड्राइवरों ने फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रदर्शन कर अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

    अब शनिवार की महाबैठक को आंदोलन की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। संघ का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो भोपाल से शुरू हुआ यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्सी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।

  • ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज

    ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज


    भोपाल भोपाल में अपने घर से कारोबार करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि किसी रिहाइशी मकान में ब्यूटी पार्लर सैलून किराना दुकान कोचिंग सेंटर बुटीक क्लिनिक या किसी अन्य तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है तो अब वह नगर निगम की जांच के दायरे में आ सकती है। भोपाल नगर निगम ने ऐसे भवनों की पहचान के लिए पूरे शहर में व्यापक सर्वे की तैयारी शुरू कर दी है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक राजधानी में करीब एक लाख ऐसी प्रॉपर्टी हो सकती हैं जहां आवासीय भवनों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। सर्वे के दौरान यदि भवन उपयोग और संबंधित नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संपत्ति मालिकों को नोटिस दिया जाएगा और नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में सीलिंग जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

    नगर निगम ने शहर को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें छोटे मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों और प्रमुख इलाकों तक रिहाइशी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी जुटाएंगी। जांच के दौरान संपत्ति कर रिकॉर्ड भवन के वास्तविक उपयोग सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी भवनों के इस्तेमाल की स्थिति देखी जाएगी। निगम का लक्ष्य करीब 10 से 15 दिनों में सर्वे पूरा करने का है और जहां नियमों का उल्लंघन सामने आएगा वहां मौके पर ही नोटिस देने की तैयारी है।

    नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे मकान बताए जा रहे हैं जहां कारोबार तो चल रहा है लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए जरूरी अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। यही वजह है कि निगम अब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को भी जांचने जा रहा है।

    इस पूरी कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी अहम हैं। 5 अगस्त की सुनवाई में अदालत ने अवैध निर्माण और रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। निगम को 15 सितंबर तक कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। ऐसे में सर्वे को समयसीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

    हालांकि व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई से छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। व्यापारियों का सुझाव है कि ब्यूटी पार्लर सैलून कोचिंग किराना जैसी छोटी गतिविधियों को राहत दी जाए और प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू की जाए। इसके तहत तय शर्तों के साथ एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। पार्किंग ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए चौड़ी सड़कों पर नियंत्रित व्यावसायिक उपयोग की व्यवस्था को भी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल में लंबे समय से मास्टर प्लान लागू नहीं होने को भी मौजूदा स्थिति की बड़ी वजह बताया जा रहा है। भोपाल की विकास योजना का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था और इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि शहर के विस्तार और बढ़ती कारोबारी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई लोगों ने आवासीय क्षेत्रों में ही कारोबार शुरू कर दिया।

    व्यापारियों का दावा है कि इन गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और कई कारोबारी व्यावसायिक दर से संपत्ति कर तथा अन्य शुल्क भी जमा करते हैं। अनुमान है कि व्यापक कार्रवाई होने पर करीब पांच लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब नगर निगम के सर्वे पर शहर के हजारों कारोबारियों और मकान मालिकों की नजर है। आने वाले दिनों में सर्वे के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से साफ होगा कि कितनी संपत्तियां नियमों के दायरे में आती हैं और कितनों पर कार्रवाई की स्थिति बनती है।

  • विजय-संगीता की कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट, 27 साल बाद तलाक की नौबत और फिर अचानक बदल गया फैसला

    विजय-संगीता की कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट, 27 साल बाद तलाक की नौबत और फिर अचानक बदल गया फैसला


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पत्नी संगीता सोर्नलिंगम की ओर से तलाक की याचिका दायर किए जाने और फिर अचानक उसे वापस लिए जाने की खबर ने फैंस के बीच चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। करीब 27 साल पुराने इस रिश्ते की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक समय विजय की फैन बनकर उनसे मिलने पहुंचीं संगीता धीरे धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बनीं और दोनों ने परिवार की सहमति से शादी कर ली। लेकिन कई साल बाद रिश्ते में आई दरार और तलाक की कानूनी प्रक्रिया ने सबको हैरान कर दिया। अब याचिका वापस लिए जाने के बाद इस कहानी में एक नया मोड़ आ गया है।

    संगीता सोर्नलिंगम श्रीलंका के एक तमिल कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और लंबे समय तक ब्रिटेन में रही हैं। बताया जाता है कि वह विजय की बड़ी प्रशंसक थीं। साल 1996 में विजय की फिल्म पूवे उनाक्कागा को जबरदस्त सफलता मिली तो संगीता उनसे मिलने भारत पहुंचीं। वह विजय की शूटिंग लोकेशन पर पहुंचीं और अभिनेता से मुलाकात कर उन्हें फिल्म की सफलता के लिए बधाई दी। विजय को संगीता का सहज स्वभाव और तमिल सिनेमा के प्रति उनका लगाव पसंद आया। इसके बाद विजय ने उन्हें अपने घर आने और परिवार से मिलने का न्योता दिया। यहीं से दोनों के रिश्ते की शुरुआत हुई और धीरे धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया।

    विजय के माता पिता निर्देशक एसए चंद्रशेखर और गायिका शोभा चंद्रशेखर को भी संगीता पसंद आईं। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत आगे बढ़ी और शादी का फैसला हुआ। रिपोर्टों के अनुसार दोनों ने 1998 में लंदन में अपनी शादी रजिस्टर कराई। इसके बाद 1999 में चेन्नई के राजाह मुथैया हॉल में पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ दोनों विवाह बंधन में बंधे। शादी के बाद दोनों ने परिवार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए रिसेप्शन भी आयोजित किया। विजय और संगीता के दो बच्चे हैं। उनके बेटे का नाम जेसन संजय और बेटी का नाम दिव्या साशा है।

    करीब ढाई दशक तक साथ रहने के बाद फरवरी 2026 में संगीता की ओर से विजय से तलाक लेने की याचिका दायर किए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि याचिका में विजय पर विवाहेतर संबंधों से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। बताया गया कि संगीता को कथित तौर पर अप्रैल 2021 में इस बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि इन निजी आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित रही है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों के बीच लंबे समय से दूरी बनी हुई थी और बाद में मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा।

    लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट 7 अगस्त 2026 को आया जब संगीता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होकर अपनी तलाक याचिका वापस ले ली। बताया गया कि अदालत में करीब 15 मिनट की कार्यवाही के बाद मामले को बंद कर दिया गया। तलाक की अर्जी वापस लेने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि दोनों की ओर से अपने रिश्ते की मौजूदा स्थिति को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    विजय और संगीता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी शुरुआत एक फैन और सुपरस्टार की मुलाकात से हुई थी। एक छोटी सी मुलाकात प्यार में बदली और फिर दोनों ने परिवार की सहमति से जिंदगी साथ बिताने का फैसला किया। 27 साल बाद तलाक की अर्जी ने इस रिश्ते को फिर सुर्खियों में ला दिया लेकिन याचिका वापस लिए जाने के बाद कहानी एक बार फिर अधूरी तस्वीर जैसी नजर आ रही है। अब फैंस की नजर इस बात पर है कि विजय और संगीता आने वाले समय में अपने रिश्ते को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

  • जब दंगल की शूटिंग में हो गई थी बड़ी गड़बड़, नितेश तिवारी ने VFX से ऐसा खेल रचा कि सब देखते रह गए

    जब दंगल की शूटिंग में हो गई थी बड़ी गड़बड़, नितेश तिवारी ने VFX से ऐसा खेल रचा कि सब देखते रह गए


    नई दिल्ली। रणबीर कपूर स्टारर रामायण का ट्रेलर रिलीज होने के बाद फिल्म के विजुअल्स और VFX को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी को लेकर ट्रेलर रिलीज से पहले सोशल मीडिया पर कई तरह के सवाल भी उठाए गए थे। कुछ लोगों का मानना था कि दंगल और छिछोरे जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके नितेश तिवारी इतने बड़े VFX प्रोजेक्ट के लिए सही चुनाव नहीं हैं। इसकी वजह यह बताई जा रही थी कि उनकी पिछली फिल्मों में बड़े स्तर पर VFX का इस्तेमाल देखने को नहीं मिला था। हालांकि दंगल से जुड़े उनके कुछ पुराने किस्से बताते हैं कि नितेश तिवारी शूटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन के स्तर पर तकनीक का बेहद समझदारी से इस्तेमाल कर चुके हैं।

    नितेश तिवारी की फिल्म दंगल साल 2016 में रिलीज हुई थी और आमिर खान स्टारर इस फिल्म ने दर्शकों के साथ साथ बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार सफलता हासिल की थी। फिल्म की कहानी और कलाकारों के अभिनय की जितनी चर्चा हुई उतनी ही दिलचस्प इसके निर्माण से जुड़ी कई बातें भी हैं। खास बात यह है कि फिल्म के कुछ ऐसे सीन भी थे जिनकी शूटिंग के दौरान खामियां सामने आने के बाद नितेश तिवारी ने VFX और क्रोमा तकनीक का सहारा लिया और दर्शकों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।

    दंगल के क्लाइमैक्स से जुड़ा एक सीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। फिल्म में महावीर सिंह फोगाट को एक कमरे में बंद कर दिया जाता है। इस पूरे सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान टीम ने महसूस किया कि दरवाजा तोड़ने वाले हिस्से को जितना प्रभावी होना चाहिए था उतना शूट नहीं किया जा सका। एडिटिंग के दौरान जब नितेश तिवारी और उनकी टीम ने फुटेज देखा तो उन्हें महसूस हुआ कि सीन में जरूरी प्रभाव की कमी है। समस्या यह थी कि जिस कमरे में शूटिंग हुई थी वह लोकेशन अब दोबारा उपलब्ध नहीं थी।

    ऐसे में नितेश तिवारी ने दोबारा पूरी शूटिंग करने के बजाय तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने एक अलग दरवाजा तैयार करवाया और आमिर खान को उसके सामने खड़ा करके पीछे क्रोमा लगाया। इसके बाद जरूरी शॉट्स शूट किए गए और पोस्ट प्रोडक्शन में उन्हें पहले से मौजूद फुटेज के साथ इस तरह जोड़ा गया कि पूरा सीन स्वाभाविक दिखाई देने लगा। दर्शकों को फिल्म देखते समय यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि सीन के एक हिस्से को बाद में VFX की मदद से तैयार किया गया है।

    दंगल में एक और सीन ऐसा था जहां कहानी के भीतर एक तरह का विरोधाभास दिखाई दे रहा था। यह वह हिस्सा था जब महावीर फोगाट अपनी बेटियों को लड़कों के दंगल में उतारने के लिए ले जाते हैं। वहां मौजूद एक व्यक्ति लड़कियों को लड़कों के साथ मुकाबला कराने का विरोध करता है लेकिन बाद में एक अन्य व्यक्ति यह बात कहता है कि अगर लड़कियां लड़कों के साथ दंगल करेंगी तो मुकाबला देखने के लिए भीड़ जुटेगी और दंगल हिट हो जाएगा।

    इस सीन को भी नितेश तिवारी ने साधारण तरीके से दोबारा शूट करने के बजाय VFX और क्रोमा की मदद से ठीक किया। दूसरे कलाकार की मदद से जरूरी हिस्सा शूट किया गया और फिर उसे मौजूदा सीन में इस तरह शामिल किया गया कि कहानी की निरंतरता बनी रहे। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि फिल्म देखने वाले ज्यादातर दर्शक इस बदलाव को पहचान भी नहीं पाए।

    यही वजह है कि रामायण के बड़े VFX प्रोजेक्ट को लेकर नितेश तिवारी की क्षमता पर सवाल उठाने से पहले उनके पुराने काम को देखना जरूरी है। दंगल में उन्होंने सीमित परिस्थितियों के बावजूद तकनीक और कहानी के बीच ऐसा संतुलन बनाया था कि VFX पर्दे पर अलग से नजर नहीं आया बल्कि कहानी का हिस्सा बन गया। अब रामायण में उन्हें इससे कहीं बड़े स्तर पर यही काम करना है। फिल्म के ट्रेलर ने जिस तरह के भव्य विजुअल्स दिखाए हैं उससे साफ है कि नितेश तिवारी के सामने इस बार चुनौती बड़ी है लेकिन दंगल का उनका अनुभव उनके लिए निश्चित तौर पर मजबूत आधार साबित हो सकता है।

  • रणबीर कपूर की रामायण की रिलीज डेट बदली! पहले विदेशों में दिखेगी फिल्म, भारत में इस दिन होगी रिलीज

    रणबीर कपूर की रामायण की रिलीज डेट बदली! पहले विदेशों में दिखेगी फिल्म, भारत में इस दिन होगी रिलीज


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल रणबीर कपूर स्टारर रामायण को लेकर दर्शकों का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसकी जबरदस्त चर्चा है। फिल्म के भव्य विजुअल्स और स्टारकास्ट ने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। अब रामायण की रिलीज डेट को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। पहले खबर थी कि फिल्म 6 नवंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी लेकिन अब सामने आया है कि भारत में दर्शकों को फिल्म देखने के लिए दो दिन और इंतजार करना होगा।

    रामायण के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने फिल्म की रिलीज को लेकर स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने बताया है कि फिल्म को अंतरराष्ट्रीय बाजार में 6 नवंबर को रिलीज किया जाएगा जबकि भारत में इसका थिएट्रिकल रिलीज 8 नवंबर को होगा। यानी विदेशी दर्शक रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर इस फिल्म को पहले देख पाएंगे जबकि भारतीय दर्शकों के लिए फिल्म की रिलीज दिवाली के मौके पर रखी गई है।

    नमित मल्होत्रा के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय डिस्ट्रीब्यूशन का सिस्टम शुक्रवार की रिलीज को ध्यान में रखकर काम करता है। यही वजह है कि विदेशों में फिल्म 6 नवंबर को रिलीज होगी। वहीं भारत में मेकर्स का लक्ष्य दिवाली के मौके पर फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करना है। इस फैसले के साथ रामायण को एक तरफ भारत में त्योहार की छुट्टियों का फायदा मिलेगा तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी फिल्म को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

    रामायण को लेकर मेकर्स की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा इसे सिर्फ भारतीय फिल्म तक सीमित रखने की नहीं बल्कि दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने की है। फिल्म के ट्रेलर को मिले शानदार रिस्पॉन्स ने भी मेकर्स का उत्साह बढ़ाया है। नमित मल्होत्रा पहले ही बता चुके हैं कि ट्रेलर को रिलीज के कुछ ही दिनों में जबरदस्त व्यूज मिले और दुनिया के अलग अलग हिस्सों से दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ऐसे में मेकर्स अब फिल्म को ग्लोबल स्तर पर पेश करने की तैयारी में जुटे हैं।

    रामायण की ग्लोबल रिलीज के लिए सोनी पिक्चर्स के साथ साझेदारी भी की गई है। अंतरराष्ट्रीय डिस्ट्रीब्यूशन के जरिए फिल्म को विदेशों में बड़े स्तर पर रिलीज करने की योजना है। मेकर्स का मानना है कि भारतीय संस्कृति और भगवान राम की कथा से जुड़ी यह कहानी दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंच सकती है। इसी उद्देश्य के साथ फिल्म को तकनीकी और विजुअल स्तर पर भी बेहद बड़े पैमाने पर तैयार किया गया है।

    फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी सीता के किरदार में नजर आएंगी। सनी देओल फिल्म में हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं और यश रावण के किरदार में दिखाई देंगे। इसके अलावा रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म में रकुल प्रीत सिंह लारा दत्ता काजल अग्रवाल अरुण गोविल विवेक ओबेरॉय और इंदिरा कृष्णन जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं।

    रामायण को दो हिस्सों में रिलीज करने की योजना है। इसका पहला पार्ट इस साल दिवाली के मौके पर सिनेमाघरों में आएगा जबकि दूसरा पार्ट अगले साल दिवाली पर रिलीज किया जाएगा। दोनों हिस्सों को मिलाकर फिल्म का बजट करीब 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ऐसे में यह भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।

    अब भारतीय दर्शकों की नजर 8 नवंबर पर है जब दिवाली के मौके पर रामायण का पहला अध्याय बड़े पर्दे पर खुलेगा। वहीं दुनिया के दूसरे हिस्सों में रहने वाले दर्शक इसे 6 नवंबर से देख सकेंगे। रिलीज की यह रणनीति फिल्म को भारत के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी एक साथ बड़े स्तर पर स्थापित करने की मेकर्स की कोशिश को दिखाती है।

  • जब किशोर कुमार ने अपनी मोरिस माइनर को जमीन में दफना दिया, वजह थी जिंदगी का सबसे भावुक दौर

    जब किशोर कुमार ने अपनी मोरिस माइनर को जमीन में दफना दिया, वजह थी जिंदगी का सबसे भावुक दौर


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार अपनी आवाज और अभिनय के लिए जितने मशहूर थे उतने ही अपने अनोखे और अलग मिजाज के लिए भी जाने जाते थे। उनकी जिंदगी से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों को हैरान करते हैं। किशोर कुमार कब क्या कर दें इसका अंदाजा उनके करीब रहने वाले लोग भी नहीं लगा पाते थे। उनकी जिंदगी का एक ऐसा ही किस्सा उनकी पहली कार से जुड़ा है जिसे उन्होंने किसी गैराज में खड़ा करने या बेचने के बजाय अपने ही बंगले के अंदर दफना दिया था। इस घटना के पीछे की वजह जानेंगे तो शायद किशोर कुमार के भावुक व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने आएगा।

    इस किस्से का खुलासा किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने किया था। अमित कुमार किशोर कुमार और उनकी पहली पत्नी रूमा गुहा ठाकुरता के बेटे हैं। रूमा खुद भी गायिका और अभिनेत्री थीं। किशोर कुमार और रूमा ने साल 1950 में शादी की थी। दोनों का रिश्ता करीब आठ साल चला और 1958 में उनका तलाक हो गया। इसी रिश्ते से जुड़ी एक भावुक याद किशोर कुमार की मोरिस माइनर कार थी।

    अमित कुमार के मुताबिक जब उनके माता पिता का तलाक हो रहा था उस समय किशोर कुमार ने अपनी मोरिस माइनर कार को अपने बंगले में ही दफन करवा दिया था। यह कोई साधारण कार नहीं थी बल्कि किशोर कुमार की जिंदगी के एक खास दौर की निशानी थी। उन्होंने यह गाड़ी अपनी पहली फिल्म आंदोलन के समय खरीदी थी। उस वक्त वह बतौर हीरो अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर रहे थे और इस कार का संबंध उनकी पत्नी रूमा से भी जुड़ा हुआ था।

    यही वजह थी कि तलाक के दौर में किशोर कुमार ने उस कार को अपने पास रखने के बजाय जमीन के अंदर दफन करवा दिया। यह फैसला उनके व्यक्तित्व और बीती यादों से खुद को अलग करने के उनके अनोखे तरीके को दिखाता है। जिस कार के साथ उनके जीवन के शुरुआती संघर्ष और परिवार की यादें जुड़ी थीं उसे उन्होंने अपने ही बंगले में हमेशा के लिए दफन कर दिया।

    किशोर कुमार की निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने चार शादियां की थीं। उनकी पहली शादी रूमा गुहा ठाकुरता से हुई थी। इसके बाद उनका नाम मधुबाला सहित कई चर्चित अभिनेत्रियों से जुड़ा। हालांकि उनके बेटे अमित कुमार ने हमेशा अपने पिता की निजी जिंदगी को उनका व्यक्तिगत मामला बताया। उन्होंने कहा था कि किशोर कुमार परिवार को बेहद महत्व देते थे और वह एक फैमिली मैन थे लेकिन लोगों ने उन्हें कई बार गलत समझा।

    रूमा गुहा ठाकुरता भी अपने दौर की जानी मानी कलाकार थीं। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया था। दोनों के रिश्ते में समय के साथ मतभेद बढ़ते गए और आखिरकार दोनों अलग हो गए। बताया जाता है कि किशोर कुमार चाहते थे कि रूमा अपना करियर छोड़कर परिवार पर ध्यान दें जबकि रूमा अपने अभिनय और गायन के करियर को जारी रखना चाहती थीं। यही मतभेद उनके रिश्ते में तनाव की एक वजह माना जाता है।

    किशोर कुमार और रूमा के रिश्ते से जुड़ा एक और चर्चित दावा फिल्म अभिमान को लेकर भी किया जाता है। कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की इस फिल्म की कहानी किशोर कुमार और रूमा के रिश्ते से प्रेरित थी। हालांकि इस तरह के दावों को लेकर अलग अलग बातें सामने आती रही हैं।

    रूमा ने किशोर कुमार से अलग होने के बाद दूसरी शादी की और उनके दो बच्चे हुए। साल 2019 में उनका निधन हो गया। वहीं किशोर कुमार की आवाज और उनकी जिंदगी से जुड़े अनगिनत किस्से आज भी उनके प्रशंसकों के बीच उन्हें एक बेहद अनोखा और यादगार कलाकार बनाए हुए हैं। अपनी पहली कार को दफन करने का यह किस्सा भी उनकी जिंदगी की उन घटनाओं में शामिल है जो बताते हैं कि किशोर कुमार सिर्फ एक महान कलाकार ही नहीं बल्कि बेहद भावुक और अपने ही अंदाज में जिंदगी जीने वाले इंसान भी थे।