Author: bharati

  • फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, धमाके में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ा

    फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, धमाके में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ा


    पेरिस। फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की कथित खामियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। स्कूलों में बढ़ती छात्र संख्या, शिक्षकों की कमी, जर्जर इमारतों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद हालात हिंसक हो गए। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान करीब 1,000 लोग घायल हुए हैं।

    धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर घायल

    रिपोर्ट्स के अनुसार, लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान हुए एक धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। धमाके में उसका हाथ उड़ गया। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसके जबड़े की भी सर्जरी करनी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 5,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें करीब 90 प्रतिशत नाबालिग छात्र बताए जा रहे हैं।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मंगलवार को देशभर में आंदोलन के समर्थन में रैलियां आयोजित होने की उम्मीद है, जिनमें हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों की मांगों को बताया जायज

    फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने देशव्यापी छात्र विरोध-प्रदर्शनों को शांत करने की कोशिश के तहत हड़ताल कर रहे स्कूली छात्रों की शिकायतों को “जायज” बताया है। ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने मंत्रियों को छात्रों की पांच प्रमुख मांगों पर काम करने और अक्टूबर 2026 के अंत तक प्रस्ताव तैयार कर पेश करने का निर्देश दिया है।

    400 से 500 स्कूलों में कक्षाएं प्रभावित

    फ्रांस के शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण करीब 400 से 500 उच्च विद्यालयों में कक्षाएं पूर्ण या आंशिक रूप से निलंबित कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 विद्यालयों में आगजनी या तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। हिंसा में शिक्षा विभाग के 85 कर्मचारी घायल हुए हैं। मंत्री ने मौजूदा स्थिति को अभूतपूर्व बताया।

    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह पेरिस से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब मोंटपेलियर, नांत और मार्सिले सहित कई प्रमुख शहरों तक फैल चुका है। छात्र शिक्षा के गिरते स्तर में सुधार के साथ स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

    फ्रांस के न्याय मंत्री गेराल्ड डारमानिन के अनुसार, देश के करीब 3,700 विद्यालयों में से लगभग 735 विद्यालय इस उग्र आंदोलन से किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं।

    प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधाओं में सुधार पर जोर

    प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार छात्रों और शैक्षणिक कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए तेजी से कदम उठा रही है। इसमें कक्षाओं का सुचारू संचालन, स्कूलों में सुविधाओं का सुधार और विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं। सरकार विद्यालयों में तोड़फोड़ करने वालों से ही हुए नुकसान की भरपाई कराने संबंधी विधेयक को भी जल्द आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • हेलीकॉप्टर से उतरते समय गिरते-गिरते बचीं US सेकंड लेडी ऊषा वेंस, गोद में था 9 हफ्ते का बच्चा

    हेलीकॉप्टर से उतरते समय गिरते-गिरते बचीं US सेकंड लेडी ऊषा वेंस, गोद में था 9 हफ्ते का बच्चा


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका की सेकंड लेडी ऊषा वेंस सोमवार को मैरीलैंड स्थित ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर हेलीकॉप्टर से उतरते समय अचानक लड़खड़ा गईं। उस समय उनका नौ सप्ताह का बेटा एलेक नील वेंस बेबी कैरियर में उनकी गोद से बंधा हुआ था। ऊषा ने तुरंत रेलिंग पकड़कर खुद को संभाल लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

    सीढ़ियों से उतरते समय छूटा कदम

    वीडियो में ऊषा वेंस हेलीकॉप्टर की सीढ़ियों से नीचे उतरती दिखाई दे रही हैं। उनके साथ उनका नौ सप्ताह का बेटा एलेक भी था। सीढ़ियों के निचले हिस्से के पास अचानक उनका कदम चूक गया और वह कुछ क्षण के लिए अपना संतुलन खोती नजर आईं।

    ऊषा ने तुरंत रेलिंग पकड़ ली और खुद को संभाल लिया। इसके बाद उन्होंने अपने बच्चे को देखा और सामान्य रूप से आगे बढ़ गईं। घटना में ऊषा वेंस या उनके बच्चे के घायल होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

    पास खड़े सैन्यकर्मियों ने मदद क्यों नहीं की?

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि हेलीकॉप्टर के पास मौजूद कर्मचारियों या सैन्यकर्मियों ने ऊषा की मदद के लिए आगे कदम क्यों नहीं बढ़ाया। वीडियो में हेलीकॉप्टर के आसपास कई सैनिक नजर आ रहे हैं।

    हालांकि, फुटेज से यह स्पष्ट नहीं है कि सैन्यकर्मियों ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उस समय उनके लिए किसी विशेष सुरक्षा या औपचारिक प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी था या नहीं।

    क्या सैन्य प्रोटोकॉल के कारण नहीं बढ़े आगे?

    मीडिया रिपोर्टों और सैन्य प्रोटोकॉल से जुड़ी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या उनके परिवार के सदस्य के विमान या हेलीकॉप्टर से उतरने के दौरान तैनात सैन्यकर्मी अक्सर औपचारिक सलामी और ‘एटेंशन’ की स्थिति में रहते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई देने वाले सैन्यकर्मियों की प्रतिक्रिया को इसी प्रोटोकॉल के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बेटी को लेकर बाद में उतरे जेडी वेंस

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी ऊषा वेंस के बाद हेलीकॉप्टर से नीचे उतरे। वह अपनी चार वर्षीय बेटी मिराबेल के साथ थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने ऊषा के लड़खड़ाने की घटना को नहीं देखा।

    इसके बाद पूरा परिवार उस विमान की ओर बढ़ गया, जिससे उन्हें एंकोरेज के लिए रवाना होना था।

    नवजात बच्चे के साथ 7.5 घंटे की यात्रा

    यह यात्रा जेडी वेंस के अलास्का दौरे का हिस्सा थी। वह मध्यावधि चुनाव से पहले प्रचार अभियान के लिए अलास्का जा रहे थे। वहां उन्हें रिपब्लिकन नेशनल कमेटी की एक रैली को संबोधित करना था। रैली में रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन के दोबारा चुनाव लड़ने के प्रयास का समर्थन किया जाना था। सुलिवन का मुकाबला डेमोक्रेट मैरी पेल्टोला से है।

    एयर फोर्स टू में सवार होने से पहले वेंस ने बताया था कि ऊषा और उनके कुछ बच्चे भी उनके साथ यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा था कि यह अलास्का यात्रा ऊषा का 50वां अमेरिकी राज्य दौरा होगा।

    जेडी वेंस ने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा था कि परिवार अपने नौ सप्ताह के बच्चे को करीब 7.5 घंटे की यात्रा पर साथ ले जा रहा है। उन्होंने कहा था कि अगर बाद में भाषण के दौरान वह थके या तनाव में नजर आएं तो इसकी वजह नवजात बच्चे के साथ की गई लंबी यात्रा हो सकती है।

  • इंदौर में सड़क धंसने का सिलसिला जारी, परदेशीपुरा में फिर हुआ हादसा, ड्रेनेज लाइन और भराव की गुणवत्ता पर सवाल

    इंदौर में सड़क धंसने का सिलसिला जारी, परदेशीपुरा में फिर हुआ हादसा, ड्रेनेज लाइन और भराव की गुणवत्ता पर सवाल


    इंदौर । इंदौर में सड़क धंसने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में मंगलवार को चैंबर के पास सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क की ऊपरी कांक्रीट परत टूटने के बाद जब मौके की जांच की गई तो उसके नीचे जमीन का बड़ा हिस्सा खोखला मिला। सड़क का एक स्लैब भी हवा में लटका हुआ दिखाई दिया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम के जनकार्य विभाग ने इंजीनियर को मौके पर भेजा और सड़क धंसने के कारणों की जांच शुरू कराई। खास बात यह है कि इसी जगह करीब एक साल पहले भी सड़क धंस चुकी है। ऐसे में दोबारा उसी स्थान पर सड़क बैठने से निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

    परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में सड़क के नीचे बने चैंबर के आसपास जमीन खोखली होने की जानकारी सामने आने के बाद निगम अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। शुरुआती तौर पर अधिकारियों को आशंका है कि पुराना ड्रेनेज चैंबर कमजोर होकर ढह गया होगा जिसके कारण सड़क के नीचे खाली जगह बनी और ऊपर का हिस्सा दबाव नहीं झेल सका। यहां ड्रेनेज लाइन पुरानी बताई जा रही है जबकि चैंबर का ढक्कन अपेक्षाकृत नया दिखाई दे रहा है। हालांकि सड़क के नीचे इतना बड़ा खोखलापन किस वजह से बना यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    स्थानीय जानकारी के मुताबिक करीब एक साल पहले भी इसी स्थान पर सड़क धंस गई थी। उस समय चैंबर की मरम्मत कराने के बाद सड़क के नीचे मिट्टी का भराव किया गया था। अब एक बार फिर उसी जगह सड़क धंसने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पिछली मरम्मत के बाद समस्या पूरी तरह दूर क्यों नहीं हुई। क्या ड्रेनेज लाइन में लीकेज जारी रहा या फिर सड़क के नीचे मिट्टी का भराव पर्याप्त तरीके से नहीं किया गया था। इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।

    तकनीकी जानकारों के अनुसार पुरानी भूमिगत ड्रेनेज लाइन में लीकेज होने पर पानी आसपास की मिट्टी को धीरे धीरे बहा सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर सड़क के नीचे खाली जगह बनती जाती है। ऊपर से सड़क पर लगातार वाहनों का दबाव पड़ता रहता है। जब जमीन का सहारा कमजोर हो जाता है तो कांक्रीट की परत टूटकर नीचे बैठ सकती है। इसी तरह किसी मरम्मत या निर्माण के बाद यदि मिट्टी का भराव ठीक तरीके से नहीं किया जाए तो भी समय के साथ जमीन बैठने की समस्या सामने आ सकती है।

    परदेशीपुरा की घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इंदौर में पिछले कुछ महीनों के दौरान सड़क धंसने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। मेघदूत गार्डन गोराकुंड गाड़ी अड्डा नासिया रोड और पंढरीनाथ क्षेत्र में भी सड़क धंसने के मामले सामने आए हैं। शहर में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क चैंबर निर्माण कार्य और सड़क के नीचे किए जाने वाले भराव की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    फिलहाल नगर निगम की टीम मौके की स्थिति का परीक्षण कर रही है। सड़क के नीचे बने खोखले हिस्से की वजह स्पष्ट होने के बाद जरूरी सुधार कार्य किया जाएगा। लेकिन एक ही जगह पर एक साल के भीतर दूसरी बार सड़क धंसने की घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पिछली मरम्मत के दौरान समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय केवल सतही सुधार किया गया था।

  • बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और बुखार से बढ़ी परेशानी, बच्चों से बुजुर्गों तक इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और बुखार से बढ़ी परेशानी, बच्चों से बुजुर्गों तक इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    नई दिल्ली ।मौसम में बदलाव के साथ कई लोगों को सर्दी, खांसी, गले में दर्द, बुखार और वायरल संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जब दिन और रात के तापमान में तेजी से अंतर आता है, तो शरीर को बदलते मौसम के अनुसार ढलने में समय लग सकता है। इसी दौरान वायरस और बैक्टीरिया तेजी से फैल सकते हैं, जिससे अचानक बीमार पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

    बदलते मौसम में हर व्यक्ति को समान स्तर की परेशानी नहीं होती। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। इसके अलावा जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें भी अपने स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्क रहना चाहिए। पहले से अस्थमा, एलर्जी या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे लोगों को मौसम में बदलाव के दौरान अतिरिक्त सावधानी रखने की जरूरत हो सकती है।

    दिनभर अलग-अलग तापमान वाले वातावरण में रहने वाले लोगों को भी परेशानी हो सकती है। बाहर आने-जाने वाले लोगों, ऑफिस जाने वालों और नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को अचानक तापमान में बदलाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शरीर को बदलते वातावरण के अनुसार समायोजित होने में समय लग सकता है और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।

    बदलते मौसम में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कपड़ों का चयन मौसम के अनुसार करना जरूरी है। बहुत अधिक ठंडे या गर्म वातावरण में अचानक जाने से बचने की सलाह दी गई है। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना भी जरूरी है। इसके लिए पर्याप्त पानी पीना चाहिए और भोजन में ताजे तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

    पर्याप्त नींद लेना भी इस दौरान महत्वपूर्ण माना गया है। रोजाना हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। मौसम बदलने के दौरान साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है। बाहर से घर लौटने के बाद हाथ अच्छी तरह धोने की आदत संक्रमण से बचाव में मदद कर सकती है। व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ आसपास की साफ-सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए।

    स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि कई दिनों तक बुखार बना रहता है, लगातार खांसी बढ़ती जाती है, सांस लेने में परेशानी होती है या बहुत अधिक कमजोरी महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। यदि दवा लेने के बाद भी राहत नहीं मिलती है, तब भी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    बदलते मौसम में बार-बार खुद से दवा लेना उचित नहीं माना गया है। खासकर जब लक्षण लगातार बने रहें या उनकी गंभीरता बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मौसम के अनुसार कपड़े पहनना, पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक भोजन लेना, पूरी नींद लेना, हल्की शारीरिक गतिविधि करना और स्वच्छता का ध्यान रखना इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानी के प्रमुख उपाय हैं।

  • त्योहारों पर महंगाई का तड़का…. कीमतें बढ़ाने की जगह छोटे पैक… सामान की मात्रा भी घटी

    त्योहारों पर महंगाई का तड़का…. कीमतें बढ़ाने की जगह छोटे पैक… सामान की मात्रा भी घटी


    नई दिल्ली।
    दशहरा (Dussehra) और दिवाली (Diwali) से पहले रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) का असर अब अलग तरीके से दिखाई दे रहा है। कच्चे माल और उत्पादन से जुड़ी लागत बढ़ने के बीच कंपनियां हर पैकेट की कीमत सीधे बढ़ाने (Directly Increasing Price) से बच रही हैं। इसके बजाय छोटे पैक में सामान की मात्रा घटाई (Reduced Quantity Small packs) जा रही है। कई मामलों में मात्रा में 2 से 7 फीसदी तक की कमी की जा रही है। वहीं बड़े पैक की कीमत सीधे 5 से 6 फीसदी तक बढ़ाई जा रही है। इसका मतलब है कि ग्राहक को कई सामान पहले जितने ही रुपये में मिलेंगे, लेकिन पैकेट में सामान कुछ कम होगा।


    कंपनियां पैकेट में सामान कम क्यों कर रही हैं?

    एफएमसीजी कंपनियों के सामने इस समय लागत बढ़ने और ग्राहकों को कीमत का झटका देने से बचने की दोहरी चुनौती है। पाम ऑयल, पैकेजिंग, कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों और दूसरी जिंसों की कीमत बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ रही है। दूसरी ओर ग्राहक रोजमर्रा की चीजों की कीमत को लेकर काफी सतर्क हैं। ऐसे में कंपनियां ऐसी कीमत बनाए रखना चाहती हैं, जिससे बिक्री की मात्रा पर ज्यादा असर न पड़े। इसलिए छोटे पैक में कीमत बढ़ाने के बजाय सामान की मात्रा कम करना आसान विकल्प माना जा रहा है। ग्राहक को पैकेट की कीमत पहले जैसी दिखाई देती है, लेकिन उसमें मिलने वाला सामान कम हो जाता है।


    किन रोजमर्रा के सामान पर इसका असर दिख रहा है?

    यह बदलाव बिस्कुट, नमकीन, स्नैक्स, नूडल्स, हेयर ऑयल, साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, चीनी और चाय जैसी रोजमर्रा की चीजों में देखने को मिल रहा है। बिस्कुट, नमकीन और स्नैक्स बनाने वाली कई कंपनियों ने बढ़ी लागत से निपटने के लिए कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं। बीकाजी फूड्स के मनोज वर्मा के मुताबिक, पिछले छह-सात महीनों में औसत कच्चे माल की लागत करीब 7 फीसदी बढ़ी है। पाम ऑयल, पैकेजिंग और दूसरी जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण है। यानी कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है और उसका असर किसी न किसी रूप में ग्राहकों तक पहुंच रहा है।


    दूध और घी की कीमतों पर कितना दबाव है?

    त्योहारी सीजन में डेयरी उत्पादों की लागत पर भी दबाव बढ़ रहा है। पारस डेयरी के विपणन अधिकारी वीपीएस मलिक के मुताबिक, त्योहारी सीजन में दूध की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकती है। घी की कीमत पहले ही 25 से 30 रुपये प्रति किलो बढ़ चुकी है। इसके अलावा इतनी ही और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। इसका सीधा असर उन परिवारों के बजट पर पड़ सकता है, जिनके घर में दूध और घी की नियमित खपत होती है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दूसरे खाद्य पदार्थों में डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ने से भी कीमतों पर नजर बनी हुई है।


    10, 20 और 50 रुपये के पैक पर कंपनियों की नजर क्यों है?

    डाटा रिसर्च फर्म नीलसन इंडिया के प्रीतम भादुड़ी के मुताबिक, कंपनियों के लिए 10, 20 और 50 रुपये कीमत वाले छोटे पैक काफी महत्वपूर्ण हैं। इन पैकों की कीमत बढ़ने पर ग्राहक को सामान तुरंत महंगा महसूस हो सकता है। इसलिए इन पैकों में मात्रा घटाना कंपनियों के लिए आसान रास्ता बन जाता है। दूसरी तरफ बड़े पैक में कीमत बढ़ाने की गुंजाइश ज्यादा होती है। आधुनिक रिटेल और ई-कॉमर्स में बिकने वाले बड़े पैक पर कंपनियां बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा सीधे ग्राहक पर डाल सकती हैं। इस तरह कंपनियां छोटे पैक में कीमत को नियंत्रित रखने और बड़े पैक में दाम बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं। इसका असर ग्राहक की जेब पर सिर्फ कीमत बढ़ने से नहीं, बल्कि कम सामान मिलने के रूप में भी पड़ सकता है।

  • MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद

    MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में जनवरी 2027 में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) (Global Investors Summit – GIS) से पहले सरकार ने निवेशकों से सीधा संपर्क बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) 8 अक्तूबर को मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मुंबई के लोअर परेल स्थित द सेंट रेजिस होटल में होने वाले निवेश संवाद में मुख्यमंत्री उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। मुंबई देश के बड़े औद्योगिक और कारोबारी समूहों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री का उद्योगपतियों से सीधे संवाद का मकसद मध्य प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी देने के साथ ही कंपनियों की जरूरत और उनके निवेश प्रस्तावों को समझना भी है।


    उद्योगपतियों के सामने रखेंगे एमपी का रोडमैप

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के अवसर, औद्योगिक अधोसंरचना और अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी दी जाएगी। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण देंगे। सरकार की ओर से निवेशकों को प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़े फायदे भी बताए जाएंगे। मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण बड़े बाजारों तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के मुताबिक अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत करने की जानकारी भी साझा की जाएगी।


    वन-टू-वन बैठक में निवेशकों की जरूरत समझेंगे सीएम

    मुख्यमंत्री की उद्योगपतियों के साथ होने वाली व्यक्तिगत बैठकों को इस संवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों में कंपनियों के निवेश प्रस्ताव, उनकी व्यावसायिक जरूरतें और प्रदेश में निवेश को लेकर आने वाली संभावित दिक्कतों पर सीधे चर्चा होगी। सरकार निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने, जरूरी अनुमतियों को सुगम करने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के अपने प्रयासों की जानकारी भी निवेशकों को देगी। अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा होगी।

  • यूनीसेफ की चेतावनी…. 100 देशों के 34 करोड़ से अधिक बच्चों पर गंभीर संकट

    यूनीसेफ की चेतावनी…. 100 देशों के 34 करोड़ से अधिक बच्चों पर गंभीर संकट


    न्यूयार्क। सं
    युक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) (United Nations Children’s Fund – UNICEF) ने वैश्विक जलवायु संकट (Global Climate Crisis) को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। कहा है कि प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में तापमान बढ़ने से दुनिया भर का मौसम तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव से भारत समेत करीब 100 देशों के 34.7 करोड़ से अधिक बच्चों की जिंदगी, सेहत और पढ़ाई पर सीधा संकट गहरा गया है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि 2026-2027 का अल नीनो इतिहास के सबसे गंभीर दौर में से एक साबित हो सकता है।


    रिपोर्ट में यूनिसेफ ने क्या कहा है?

    यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के चलते अक्टूबर से दिसंबर के दौरान कई क्षेत्रों में भयंकर सूखा पड़ने, तो कई जगहों पर अप्रत्याशित बाढ़ आने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर कमजोर परिवारों और मासूम बच्चों पर पड़ेगा। सूखाग्रस्त इलाकों में फसलों के नष्ट होने से भुखमरी और गंभीर कुपोषण का खतरा बढ़ेगा, जबकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, हैजा और डेंगू जैसी जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका है। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं के कारण लाखों बच्चों की पढ़ाई ठप होने और स्कूलों के बंद होने का अंदेशा है।


    पहले से तैयारी की अपील

    यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल के अनुसार, बच्चों के लिए अल नीनो सिर्फ मौसम में बदलाव नहीं है। इसका सीधा मतलब भुखमरी, कुपोषण, साफ पानी की कमी और गंभीर बीमारियों का फैलना है। एजेंसी ने प्रभावित देशों से स्वच्छ पेयजल, जीवनरक्षक पोषण किट, स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन राहत तंत्र को तत्काल मजबूत करने की अपील की है, ताकि करोड़ों मासूमों के बचपन को इस मौसमी तबाही से सुरक्षित रखा जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्राथमिकता वाले देशों में 4.11 अरब डॉलर की जरूरत है, जिसमें से केवल 1.28 अरब डॉलर ही मिले हैं, यानी 69 फीसदी की कमी है।

    भारत समेत एशिया प्रशांत में 19 करोड़ बच्चे आ सकते हैं चपेट में
    रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज्यादा खतरा भारत समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र है, जहां सबसे अधिक लगभग 19 करोड़ बच्चे असामान्य सूखे या बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। पूर्वी व दक्षिणी अफ्रीका में 4.1 करोड़ और लातिन अमेरिका में करीब 4.1 करोड़ बच्चे इसके असर से जूझेंगे। फिलीपीन, कोलंबिया, फिजी और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों में गंभीर सूखे से खेती बर्बाद होने और पानी की भारी किल्लत होने का डर है। वहीं, सोमालिया और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने से नदियां उफान पर आ सकती हैं, जिससे पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ेगा।

  • MP: ₹450 करोड़ के स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसे इंतजाम, लेकिन प्लेटफॉर्म पर घूम रहीं भैंसें… उठे सवाल

    MP: ₹450 करोड़ के स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसे इंतजाम, लेकिन प्लेटफॉर्म पर घूम रहीं भैंसें… उठे सवाल


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (Rani Kamlapati Railway Station) को देश के वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशनों (World-class railway stations) में शुमार किया जाता है, जहां एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं का दावा किया जाता है, उसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर भैंसों के घूमने का वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. प्लेटफॉर्म पर दो भैंसें ट्रेन के बिल्कुल बगल से गुजरती हुई दिखाई दे रही हैं. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

    वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दो भैंसें प्लेटफॉर्म पर आराम से टहल रही हैं और यात्रियों के बीच से होते हुए ट्रेन के पास तक पहुंच गईं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर भैंसें प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचीं?


    450 करोड़ के स्टेशन पर सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल

    रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है. इसे देश के पहले विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशनों में शामिल किया गया है। स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं, एस्केलेटर, लिफ्ट, एसी लाउंज, फूड कोर्ट और आधुनिक यात्री सुविधाएं मौजूद हैं. लेकिन प्लेटफॉर्म पर आवारा पशुओं के पहुंचने का वीडियो सामने आने के बाद करोड़ों रुपये की लागत से तैयार स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।


    रेलवे बोला- मामले को दिखवा रहे हैं

    मामले को लेकर जनसंपर्क अधिकारी शिव शंकर शाह ने कहा कि वह पूरे मामले को दिखवाएंगे. उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे और बंसल के पास है. सुरक्षा में कहीं कोई चूक सामने आती है तो रेलवे, बंसल के साथ मिलकर उसे सुधारने का काम करता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि कई बार आउटर की तरफ का हिस्सा खुला रह जाता है, जिसकी वजह से जानवर स्टेशन परिसर में प्रवेश कर सकते हैं. इसके अलावा रेलवे पटरी के आसपास लोग खाने-पीने का सामान भी फेंक देते हैं. खाने की तलाश में जानवर रेलवे ट्रैक और स्टेशन की तरफ आ जाते हैं।


    यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

    हालांकि रेलवे का तर्क अपनी जगह है, लेकिन सवाल यह है कि अगर एक भैंस प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकती है तो सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है? प्लेटफॉर्म पर ट्रेनें लगातार आती-जाती हैं और बड़ी संख्या में यात्री मौजूद रहते हैं. ऐसे में किसी आवारा पशु के अचानक ट्रेन की चपेट में आने या यात्रियों से टकराने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।

    फिलहाल रेलवे ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराने की बात कही है. अब देखना होगा कि भैंसें स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचीं और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए रेलवे और स्टेशन प्रबंधन क्या कदम उठाता है।

  • NZ Tour: टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान… 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार की वापसी

    NZ Tour: टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान… 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार की वापसी


    नई दिल्ली।
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Cricket Control Board of India- BCCI) की पुरुष चयन समिति ने आगामी न्यूजीलैंड दौरे (New Zealand Tour) के लिए टीम इंडिया (Team India) और इंडिया ‘ए’ के स्क्वाड का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

    इस दौरे पर भारतीय टीम मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की रोमांचक टी20 सीरीज खेलेगी, जबकि इंडिया ‘ए’ की टीम न्यूजीलैंड ‘ए’ के खिलाफ तीन मल्टी-डे (चार दिवसीय) मैच खेलेगी. वनडे और टेस्ट सीरीज के लिए टीमों की घोषणा फिलहाल बाद में की जाएगी।

    इस स्क्वाड की सबसे बड़ी खबर अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी है, जिन्हें एक बार फिर नीली जर्सी में गेंदबाजी का जिम्मा सौंपा गया है. श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपी गई है, जबकि उपकप्तानी की जिम्मेदारी तिलक वर्मा को दी गई है।


    क्यों हुई भुवनेश्वर कुमार की वापसी?

    भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी टी20 मुकाबला नवंबर 2022 में एडिलेड ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला था. इसके बाद से वह टीम से बाहर चल रहे थे, लेकिन पिछले दो आईपीएल (IPL) सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए उनके शानदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    पिछले दो संस्करणों में शानदार गेंदबाजी करते हुए उन्होंने कुल 45 विकेट झटके और टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. नई गेंद से उनकी स्विंग और अनुभव को देखते हुए उन्हें एक बार फिर नेशनल टीम में मौका मिला है. हालांकि, इस चयन के चलते भुवनेश्वर कुमार को हांगकांग सिक्सेस से हटना होगा, जहां उन्हें हाल ही में कप्तान बनाया गया था।

    टी20 टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, नमन धीर, प्रिंस यादव, मयंक यादव, अर्शदीप सिंह, भुवनेश्वर कुमार, वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव.

    इंडिया ‘ए’ टीम: ध्रुव जुरेल (कप्तान/विकेटकीपर), यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, रविचंद्रन स्मरण, ऋषभ पंत* (विकेटकीपर – फिटनेस के अधीन), वाशिंगटन सुंदर, आकिब नबी, आकाश दीप, अंशुल कंबोज, मानव सुथार, मुकेश चौधरी, साई सुदर्शन, यश राठौड़ और मुकेश कुमार।

  • UP से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में, 2 निर्दलीयों ने भी भरे पर्चे

    UP से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में, 2 निर्दलीयों ने भी भरे पर्चे


    लखनऊ।
    यूपी (UP) से राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) में नामांकन (Enrollment) दाखिल करने का मंगलवार को आखिरी दिन था. इस दिन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ओंकारनाथ चौरसिया ने पर्चा भरा. इसके साथ ही बीजेपी के 8 और एक निर्दलीय समेत 9 लोगों ने नामांकन दाखिल किया।

    अब तक कुल 12 राज्यसभा प्रत्याशियों ने पर्चा भरा है. 12वें प्रत्याशी के रूप में इंडिपेंडेंट कांते सायन्ना ने नामांकन दाखिल किया. अब तक बीजेपी के 8, समाजवादी पार्टी के 2 और 2 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है।

    बीजेपी के राज्यसभा प्रत्याशी धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार ने मंगलवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इन सभी प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के नेतृत्व में नामांकन दाखिल किया. इस दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री, पार्टी पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।


    सपा के दो उम्मीदवार मैदान में

    समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवार हैं. इनमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह के वरिष्ठ अधिकारी धनराज परिमल नथवानी शामिल हैं. प्रो. रामगोपाल यादव छठी बार उच्च सदन जाने की तैयारी में हैं. दोनों उम्मीदवारों ने 30 सितंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया था।


    क्या है जीत-हार की स्थिति

    उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है. विधानसभा की वर्तमान प्रभावी संख्या 397 विधायक है. इसके आधार पर प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी. भाजपा के पास करीब 255 विधायक हैं. सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए की संख्या 285 से 290 के पार है. इस संख्या के आधार पर एनडीए सात सीटें आसानी से जीत सकता है. वहीं, आठवीं सीट जीतने के लिए उसे करीब 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. सपा के पास 100 से 101 विधायक हैं. चायल से विधायक पूजा पाल आधिकारिक रिकॉर्ड में सपा के खाते में हैं, हालांकि वे भाजपा के संपर्क में रही हैं. इसके अलावा सपा को कांग्रेस के 2 विधायकों का समर्थन हासिल है. इस संख्या के आधार पर सपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है।