Author: bharati

  • छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    नई दिल्ली ।शारदीय नवरात्रि के दौरान आम तौर पर मां दुर्गा की आराधना नौ दिनों तक की जाती है, लेकिन छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की पूजा परंपरा इससे अलग है। यहां बंगाली पंचांग के अनुसार मां दुर्गा की स्थापना पंचमी के दिन की जाती है और पांच दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जबकि बंगाली समाज 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना करेगा और 21 अक्टूबर को विसर्जन किया जाएगा।

    मोहन नगर में बंगाली समाज की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन पिछले करीब 40 वर्षों से किया जा रहा है। इस दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए दुर्गा पंडाल में एक साथ मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके अलावा महिषासुर की मूर्ति भी स्थापित की जाती है। बंगाली समाज में दुर्गा पूजा के लिए अलग विधि-विधान का पालन किया जाता है और इसी परंपरा के अनुसार पांच दिनों तक मां की आराधना की जाती है।

    इस बार बंगाली पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना होगी। पूजा का समापन 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा। इस तरह यहां नवरात्रि के पूरे नौ दिनों के बजाय पंचमी से शुरू होकर पांच दिनों तक दुर्गा पूजा की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। पूजा के दौरान अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और कई कार्यक्रम सुबह के समय आयोजित किए जाएंगे।

    बंगाली समाज की पूजा में अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। दोनों तिथियों को मिलाकर एक विशेष पूजा की जाती है, जिसे संधी पूजा कहा जाता है। बंगाली दुर्गा पूजा की परंपरा में इसका खास महत्व माना जाता है। पांच दिनों की इस पूजा व्यवस्था में धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन बंगाली पंचांग और परंपरागत विधि-विधान के अनुसार किया जाता है।

    दुर्गा पूजा के लिए मूर्तियां तैयार करने का काम भी कई महीने पहले शुरू हो जाता है। पश्चिम बंगाल से आने वाले मूर्तिकार छिंदवाड़ा में करीब चार महीने पहले पहुंचते हैं। यहां वे बंगाली समाज की ओर से दिए गए ऑर्डर के अनुसार दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। मूर्तियों को पूजा के लिए निर्धारित समय तक पूरी तरह तैयार करने के लिए यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलती है।

    मूर्तिकार अपने साथ पश्चिम बंगाल से मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष मिट्टी भी लेकर आते हैं। इसके अलावा मां दुर्गा की प्रतिमा के कपड़े और सजावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बंगाल से ही लाई जाती है। छिंदवाड़ा पहुंचने के बाद मूर्तिकार इन सामग्रियों के साथ चार महीने तक प्रतिमाओं को तैयार करने और उन्हें सजाने का काम करते हैं। पूजा के लिए प्रतिमाओं की तैयारी और सजावट की यह प्रक्रिया पिछले करीब 40 वर्षों से इसी तरह चल रही है।

    छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की यह दुर्गा पूजा स्थानीय स्तर पर अपनी अलग धार्मिक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां स्थापना का समय, पूजा की अवधि, प्रतिमाओं की संख्या और संधी पूजा जैसी परंपराएं बंगाली पंचांग के अनुसार तय होती हैं। इस वर्ष भी समाज इसी परंपरा के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना कर पांच दिनों तक पूजा-अर्चना करेगा और 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

  • मथुरा में गूंजा श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश, जन्मभूमि पर विशेष पूजन के बाद उडुपी पीठाधीश्वर का बड़ा बयान

    मथुरा में गूंजा श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश, जन्मभूमि पर विशेष पूजन के बाद उडुपी पीठाधीश्वर का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। मथुरा में बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। उडुपी के पेजावर अधोक्षज मठ के पीठाधीश्वर विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर में विशेष पूजा अर्चना की। द्वैत वेदांत परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रों के साथ हुए इस अनुष्ठान में उडुपी की उपासना परंपरा और ब्रज की भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। महाराजश्री अपने साथ करीब 800 वर्ष पुराने भगवान के चल विग्रह लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचे थे। गर्भगृह में तुलसी दल और पुष्पों से भगवान का पूजन किया गया तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए पुष्प अर्पित किए गए।

    पूजा अर्चना के बाद विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन किया। मृदंग झांझ और मजीरों की मंगल ध्वनि से पूरा परिसर भक्तिमय नजर आया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने उनका तुलसी माला पुष्पमाला और अंगवस्त्र से स्वागत किया। इसके बाद महाराजश्री ने श्रीभागवत भवन में भगवान श्रीकृष्ण भगवान श्रीराम और भगवान हयग्रीव के श्रीविग्रह के समक्ष भी पूजा की।

    इस धार्मिक आयोजन की खास बात यह रही कि विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज अपने साथ जगद्गुरु माध्वाचार्य द्वारा पूजित करीब 800 वर्ष पुराने चल विग्रह भी लेकर आए थे। गर्भगृह में उन्होंने वैदिक परंपरा के अनुसार विधिवत पूजा की। तुलसी और पुष्प अर्पित करने के साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा।

    पूजन के बाद विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण से जुड़े विषय पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सनातन के पवित्र स्थलों पर बने पुराने ढांचों से करोड़ों सनातनियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने अयोध्या और काशी का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या में रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं जबकि काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर अपने आध्यात्मिक स्वरूप को प्राप्त कर रहा है। उनके अनुसार अब मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला निश्चित करेंगे।

    विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने इसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनरोत्थान के दौर के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि अन्याय और अत्याचार के प्रतीक हटेंगे तथा न्याय की बांसुरी बजेगी। उनका यह बयान श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर चल रही धार्मिक चर्चाओं के बीच सामने आया है। हालांकि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विवाद का अंतिम स्वरूप कानूनी और संबंधित संस्थागत प्रक्रियाओं से तय होना है।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में महाराजश्री के आगमन के दौरान श्रद्धालुओं में भी खास उत्साह दिखाई दिया। हरिनाम संकीर्तन के बीच मृदंग झांझ और मजीरों की धुन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। द्वैत वेदांत परंपरा से जुड़े विशेष पूजन और ब्रज की भावमय भक्ति के इस संगम ने कार्यक्रम को खास बना दिया। मथुरा की धार्मिक पहचान और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की आस्था के बीच यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व वाला रहा।

  • यूपी के 5 शहर बाढ़ की चपेट में, लखनऊ में 40 हजार मकान जलमग्न, सड़कों पर नाव और कॉलोनी में मगरमच्छ

    यूपी के 5 शहर बाढ़ की चपेट में, लखनऊ में 40 हजार मकान जलमग्न, सड़कों पर नाव और कॉलोनी में मगरमच्छ


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रदेश के पांच जिले इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और छह प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार नौवें दिन बढ़ रहा है जिसके चलते शहर के कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। नीम करोली तपोस्थली में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है जबकि खाटू श्याम और चंद्रिका देवी मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार मकानों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई सरकारी और निजी स्कूल भी पानी में डूब गए हैं और गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

    फैजुल्लागंज में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों के सामने खाने पीने के पानी और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवार अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाने को मजबूर हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। कई जगह सामान्य आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है और लोगों को आने जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    शाहजहांपुर में बाढ़ के पानी के साथ एक विशाल मगरमच्छ आबादी वाले इलाके में पहुंच गया। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे करीब छह से सात फीट लंबा मगरमच्छ एक मकान के मुख्य दरवाजे तक पहुंच गया। दरवाजे पर ताला लगा होने के कारण वह घर के अंदर नहीं जा सका। मगरमच्छ को देखकर आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद उसे पकड़ने की कोशिश शुरू की गई। आबादी के बीच मगरमच्छ पहुंचने की घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

    सीतापुर में भी बाढ़ का असर कम नहीं हुआ है। सरायन और कठना नदियों का पानी अब भी रिहायशी इलाकों में बह रहा है। कई क्षेत्रों में लोगों के घरों और रास्तों तक पानी पहुंच गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। तरबगंज और कर्नलगंज तहसील के करीब 10 गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। ब्योन्दा माझा दत्तनगर और नकहरा समेत कई गांवों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। प्रशासन ने लोगों की आवाजाही के लिए 50 से अधिक नावें लगाई हैं। घाघरा और सरयू नदियों के कटान के कारण नवाबगंज क्षेत्र में बीते 24 घंटे के दौरान 20 बीघा से अधिक जमीन और फसल नदी में समा गई है।

    उन्नाव में गंगा का जलस्तर अब धीरे धीरे घटने लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नदी का पानी अभी भी चेतावनी बिंदु से ऊपर है। गोताखोर कर्बला हुसैन नगर तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड जैसे इलाकों में जलभराव बना हुआ है। सड़कों पर पानी होने के कारण मोहल्लों में नावों से आवागमन किया जा रहा है।

    यूपी में बाढ़ की यह स्थिति लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ कई इलाकों में कटान और जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। प्रशासन राहत और बचाव व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित रहने के साथ भोजन पीने का पानी और सामान्य आवागमन की व्यवस्था है।

  • त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    नई दिल्ली । गाजियाबाद में त्योहारों के मौसम को देखते हुए मिठाई और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से जिले के सभी मिठाई विक्रेताओं के लिए मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना अनिवार्य होगा। नए प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू करने से पहले दुकानदारों को इसकी जानकारी देने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।

    इस अभियान के लिए जिले में 18 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में 18 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रही हैं। व्यापारियों को नए नियम के बारे में जानकारी देने के साथ यह भी बताया जा रहा है कि मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना क्यों जरूरी है और नए प्रावधान का पालन किस तरह किया जाना है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग का जोर फिलहाल व्यापारियों को नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी देने पर है। अधिकारियों का मानना है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले दुकानदारों को नए प्रावधान की जानकारी मिलने से उन्हें अपनी व्यवस्था उसके अनुसार तैयार करने का समय मिल जाएगा। विभाग का उद्देश्य जागरूकता के जरिए नियमों के पालन को बढ़ावा देना है, ताकि बाद में नियमों के उल्लंघन की स्थिति कम से कम हो।

    विभाग के मुताबिक त्योहारों को लेकर विशेष अभियान 15 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले ही गठित 18 टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों को तैयार करने की प्रक्रिया और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई की स्थिति भी देखी जा रही है।

    जांच के दौरान खाद्य सामग्री को तैयार करने से लेकर उसके भंडारण तक निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति भी देखी जा रही है। विभाग की टीमें यह जांच कर रही हैं कि खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है या नहीं। इस दौरान खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जा रहे हैं।

    निरीक्षण के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी जा रही है। विभाग की ओर से व्यापारियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि नए प्रावधान लागू होने से पहले वे अपनी व्यवस्था में जरूरी बदलाव कर सकें।

    सहायक खाद्य आयुक्त सुरेश मिश्रा के मुताबिक फिलहाल खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और 18 टीमों के माध्यम से नियमित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उनके अनुसार शासन से आदेश मिलने के बाद त्योहारों को लेकर विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इस दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, खाद्य सामग्री की जांच और नियमों के पालन पर विभाग की कार्रवाई जारी रहेगी।

    15 अक्टूबर से लागू होने वाले ‘Use By Date’ के प्रावधान को लेकर विभाग ने व्यापारियों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। त्योहारों से पहले चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान के साथ नियमित निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की कार्रवाई भी जारी है। विभाग का प्रयास है कि मिठाई विक्रेता नए नियम को समझें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका पालन सुनिश्चित करें।

  • पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, 100 की रफ्तार में ट्रक में घुसी अर्टिगा, 3 टेनिस खिलाड़ियों की मौत

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, 100 की रफ्तार में ट्रक में घुसी अर्टिगा, 3 टेनिस खिलाड़ियों की मौत


    सुल्तानपुर । सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर बुधवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में तीन टेनिस खिलाड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा बल्दीराय थाना क्षेत्र में सुबह करीब 5 बजे हुआ जब लखनऊ से देवरिया जा रही अर्टिगा कार आगे चल रहे ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग अंदर फंस गए। शुरुआती जांच में पुलिस ने हादसे की वजह चालक को झपकी आना बताया है। कार की रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा होने की बात भी सामने आई है।

    हादसे के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर चीख पुकार मच गई। सड़क से गुजर रहे राहगीरों और यूपीडा के सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव का काम शुरू किया। कार के दरवाजे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे जिसके चलते अंदर फंसे लोगों को निकालना आसान नहीं था। सुरक्षाकर्मियों और राहगीरों ने काफी मशक्कत के बाद कार के गेट तोड़कर घायलों और अन्य यात्रियों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।

    अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान देवरिया निवासी नित्या प्रजापति उम्र 22 वर्ष इरफान अंसारी उम्र 20 वर्ष और भागलपुर निवासी अनिकेत उम्र 24 वर्ष के रूप में हुई है। तीन अन्य लोग घायल हुए हैं जिनमें देवरिया निवासी आनंद यादव उम्र 23 वर्ष राजू उम्र 22 वर्ष और पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रहने वाले जयंतो शर्मा उम्र 30 वर्ष शामिल हैं। सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए अयोध्या मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

    घटना के समय कार में सवार लोग सफर के दौरान सो रहे थे। घायल जयंतो शर्मा ने बताया कि टक्कर के बाद अचानक उनकी नींद खुली। उन्होंने देखा कि कार ट्रक के पिछले हिस्से में घुस चुकी थी। कुछ साथी गंभीर रूप से घायल अवस्था में फंसे हुए थे। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया था और यात्रियों को बाहर निकालने के लिए दरवाजे तोड़ने पड़े।

    प्रारंभिक जांच के मुताबिक कार की रफ्तार काफी तेज थी और चालक को संभवतः नींद या झपकी आने के कारण आगे चल रहे ट्रक का समय रहते अंदाजा नहीं हो सका। तेज रफ्तार में चल रही कार सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों को लेकर अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान नींद और तेज रफ्तार के खतरनाक मेल को सामने ला दिया है। खासकर देर रात और सुबह के समय वाहन चलाते वक्त चालक की थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। तीन युवा टेनिस खिलाड़ियों की अचानक हुई मौत से उनके परिवारों और परिचितों में शोक की लहर है। पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • आधार कार्ड में नाम बदलने के नियम बदले, छोटी स्पेलिंग गलती से लेकर शादी और पूरे नाम के बदलाव तक जानें नई प्रक्रिया

    आधार कार्ड में नाम बदलने के नियम बदले, छोटी स्पेलिंग गलती से लेकर शादी और पूरे नाम के बदलाव तक जानें नई प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।
    आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग ठीक कराने, शादी या तलाक के बाद सरनेम बदलने और पूरा नाम बदलने के लिए अब बदलाव की श्रेणी के अनुसार प्रक्रिया अपनानी होगी। UIDAI की नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP 18 सितंबर 2026 से लागू है। इसमें नाम में होने वाले अलग-अलग बदलावों के लिए अलग नियम और दस्तावेज तय किए गए हैं। इसलिए हर तरह के नाम सुधार के लिए एक जैसे कागजात लेकर आधार केंद्र जाना जरूरी नहीं है।

    नाम में मामूली गलती को माइनर नेम चेंज की श्रेणी में रखा गया है। इसमें नाम की छोटी स्पेलिंग गलती सुधारना, नाम के शुरुआती अक्षर या छोटे रूप को पूरा लिखना, बीच या आखिरी नाम जोड़ना अथवा हटाना और नाम के क्रम में बदलाव करना शामिल है। यदि नाम का उच्चारण लगभग समान है, लेकिन उसकी स्पेलिंग में मामूली अंतर है, तो उसे भी छोटे बदलाव के रूप में देखा जा सकता है। इसके अलावा नाम में गलत जगह लगाए गए डॉट और बड़े या छोटे अक्षरों से जुड़ी गड़बड़ी को भी ठीक कराया जा सकता है।

    शादी या तलाक के बाद सरनेम बदलने के लिए नई SOP में अलग व्यवस्था है। ऐसे मामलों में तय प्रारूप का Annexure-D शपथ पत्र और पहचान का प्रमाण देना होगा। शपथ पत्र में यह स्पष्ट किया जाता है कि नाम में बदलाव शादी या तलाक के कारण किया जा रहा है और इससे संबंधित व्यक्ति की पहचान नहीं बदल रही है।

    कुछ मामलों में आधार बनवाते समय ही नाम गलत दर्ज हो जाता है। ऐसा तब हो सकता है जब व्यक्ति द्वारा दिए गए दस्तावेज में नाम सही हो, लेकिन आधार में जानकारी दर्ज करते समय डेटा एंट्री की गलती हो जाए। UIDAI ऐसे मामलों को डेटा एंट्री की त्रुटि के रूप में मानता है। वयस्कों के मामले में Annexure-B के तहत शपथ पत्र के साथ पहचान या रिश्ते का प्रमाण मांगा जा सकता है। नाबालिगों के लिए Annexure-C और संबंधित दस्तावेज लागू होंगे। यदि आधार में अंग्रेजी में नाम सही है, लेकिन स्थानीय भाषा में गलत दर्ज है, तो उसे भी सुधरवाने की व्यवस्था है।

    पूरे नाम में बदलाव के लिए नियम अलग हैं। यदि कोई व्यक्ति अपना पूरा नाम बदलना चाहता है या बदलाव इतना बड़ा है कि उसकी पहचान में परिवर्तन माना जाए, तो इसे मेजर नेम चेंज की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में गजट नोटिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार पूरे नाम में बदलाव के लिए राज्य या केंद्र सरकार का गजट नोटिफिकेशन और पुराने नाम वाला पहचान प्रमाण जरूरी होता है।

    आधार में नाम अपडेट कराने के लिए सबसे पहले यह तय करना होगा कि बदलाव किस श्रेणी में आता है। इसके बाद संबंधित श्रेणी में जरूरी दस्तावेज जुटाने होंगे। जहां आवश्यक हो, वहां निर्धारित शपथ पत्र या घोषणा तैयार करनी होगी। इसके बाद आधार एनरोलमेंट या अपडेट सेंटर पर जाकर सहायक दस्तावेजों के साथ नाम अपडेट करने का अनुरोध जमा करना होगा।

    रिक्वेस्ट जमा करने के बाद जरूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी और उसका एक्नॉलेजमेंट लेना होगा। इसी एक्नॉलेजमेंट में उपलब्ध जानकारी के जरिए आधार अपडेट रिक्वेस्ट का स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है। इस तरह नाम में छोटे सुधार से लेकर बड़े बदलाव तक प्रक्रिया संबंधित श्रेणी और उसके लिए निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर पूरी होगी।

  • वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

    वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा


    वृंदावन । वृंदावन के एक गुरुकुल में मंगलवार रात दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुलम में पानी के टैंक की सफाई करने उतरे चार छात्रों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य छात्र भी बेहोश हो गया जिसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद पूरे गुरुकुल परिसर में अफरा तफरी मच गई और छात्रों तथा कर्मचारियों में दहशत फैल गई।

    जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब 10 बजे हुआ। गुरुकुल में मौजूद छात्र पानी के एक गहरे टैंक की सफाई कर रहे थे। बताया जा रहा है कि टैंक से पहले मोटर के जरिए पानी बाहर निकाला गया और इसके बाद बचा हुआ पानी बाल्टी से निकाला गया। पानी लगभग खत्म होने के बाद एक छात्र टैंक के अंदर सफाई के लिए उतरा लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश होकर गिर गया। ऊपर मौजूद छात्रों ने उसे आवाज लगाई लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उसे बचाने के लिए दूसरे छात्र भी एक के बाद एक टैंक में उतरते चले गए।

    बताया जा रहा है कि टैंक के भीतर जहरीली गैस मौजूद थी जिसकी चपेट में आने से सभी छात्र बेहोश हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी छात्रों को टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मनु कटारे उम्र 20 वर्ष देवांश उम्र 17 वर्ष विशु उम्र 18 वर्ष और आर्यन उम्र 18 वर्ष को मृत घोषित कर दिया। वहीं रुद्राक्ष उम्र 18 वर्ष की हालत गंभीर बताई गई।

    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।
    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।

    वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित इस गुरुकुल में करीब 120 छात्र पढ़ते हैं। तीन मंजिला इमारत में 43 कमरे हैं और यह संस्थान पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित बताया जा रहा है। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह भी मौके पर पहुंचे और गुरुकुल से जुड़े लोगों तथा छात्रों से घटना की जानकारी ली।

    डीएम ने बताया कि टैंक करीब 12 फीट गहरा था और उसमें बदबू आने के बाद उसकी सफाई की जा रही थी। प्रारंभिक तौर पर जहरीली गैस के कारण छात्रों के बेहोश होने और चार छात्रों की मौत की आशंका जताई गई है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि टैंक में जहरीली गैस कैसे बनी और सफाई के दौरान सुरक्षा के जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

    हादसे के बाद गुरुकुल के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने भी घटना का संज्ञान लिया है और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। हादसे ने एक बार फिर बंद टैंकों और गहरे जलाशयों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खतरनाक परिणाम सामने ला दिए हैं।

  • डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर, एक्सपेंस रेशियो और निवेशक की जरूरत से समझें सही प्लान

    डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर, एक्सपेंस रेशियो और निवेशक की जरूरत से समझें सही प्लान

    नई दिल्ली: म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय एक ही स्कीम के तहत डायरेक्ट और रेगुलर प्लान का विकल्प मिलता है। दोनों प्लान में फंड मैनेजर और निवेश का पोर्टफोलियो समान हो सकता है, लेकिन इनके खर्च और मिलने वाले रिटर्न में अंतर हो सकता है। इसका प्रमुख कारण एक्सपेंस रेशियो है। डायरेक्ट प्लान में निवेशक म्यूचुअल फंड कंपनी या डायरेक्ट प्लान की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे निवेश करता है और बीच में डिस्ट्रीब्यूटर नहीं होता। वहीं, रेगुलर प्लान में निवेश डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट के माध्यम से किया जाता है।

    डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के बीच सबसे बड़ा अंतर डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़े खर्च का है। डायरेक्ट प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल नहीं होता, इसलिए इसका एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर रेगुलर प्लान से कम रहता है। रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़ा खर्च शामिल होने के कारण उसका एक्सपेंस रेशियो अधिक हो सकता है। इसी वजह से दोनों प्लान की एनएवी अलग-अलग होती है। लंबे समय तक निवेश करने पर खर्च में छोटा अंतर भी कंपाउंडिंग के कारण कुल निवेश राशि पर असर डाल सकता है। हालांकि, हर स्कीम में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के खर्च का अंतर समान नहीं होता। इसलिए निवेश से पहले संबंधित स्कीम का वास्तविक टोटल एक्सपेंस रेशियो यानी TER देखना जरूरी है।

    रेगुलर प्लान को केवल इसलिए खराब विकल्प नहीं माना जा सकता कि इसमें खर्च अधिक होता है। पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले ऐसे लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकता है, जिन्हें खुद स्कीम चुनने, जोखिम समझने या पोर्टफोलियो संभालने में परेशानी होती है। ऐसे निवेशकों को डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट से निवेश संबंधी मदद और मार्गदर्शन मिल सकता है। इस सुविधा की लागत निवेशक को अधिक एक्सपेंस रेशियो के रूप में चुकानी पड़ती है। इसलिए रेगुलर प्लान चुनने का मतलब केवल अधिक खर्च करना नहीं है, बल्कि इसके साथ मिलने वाली निवेश संबंधी सहायता को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

    वहीं, डायरेक्ट प्लान उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है जो अलग-अलग म्यूचुअल फंड की तुलना कर सकते हैं, जोखिम को समझते हैं और अपने निवेश की नियमित निगरानी के लिए समय निकाल सकते हैं। इसमें निवेशक को स्कीम चुनने से लेकर निवेश करने और पोर्टफोलियो पर नजर रखने तक की जिम्मेदारी खुद निभानी होती है। केवल इस आधार पर डायरेक्ट प्लान चुनना सही नहीं होगा कि इसमें रिटर्न अधिक दिखाई देता है। कम खर्च इसका एक प्रमुख लाभ है, लेकिन निवेश से जुड़े फैसले और उनकी जिम्मेदारी भी निवेशक की ही होती है।

    इसलिए डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के बीच चुनाव केवल एक्सपेंस रेशियो देखकर नहीं करना चाहिए। निवेशक को अपनी जानकारी, जोखिम समझने की क्षमता और निवेश को संभालने के लिए उपलब्ध समय को भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर निवेशक खुद रिसर्च करके फंड चुन सकता है और पोर्टफोलियो की निगरानी कर सकता है तो डायरेक्ट प्लान पर विचार किया जा सकता है। वहीं, निवेश के फैसलों में लगातार सहायता और मार्गदर्शन की जरूरत होने पर रेगुलर प्लान उपयोगी हो सकता है। दोनों विकल्पों में चुनाव निवेशक की अपनी जरूरत और निवेश संभालने की क्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए।

  • घर में धन नहीं टिकता और बढ़ते रहते हैं विवाद, 7 अक्टूबर को वास्तु के इन उपायों से बदलें माहौल

    घर में धन नहीं टिकता और बढ़ते रहते हैं विवाद, 7 अक्टूबर को वास्तु के इन उपायों से बदलें माहौल


    नई दिल्ली। घर हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर में वास्तु से जुड़े नियमों की अनदेखी होने पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। इसका असर परिवार के सदस्यों के मानसिक तनाव आर्थिक स्थिति और आपसी संबंधों पर पड़ने की धार्मिक मान्यता है। अगर घर में बार बार बिना किसी स्पष्ट कारण के तनाव बना रहता है या धन संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं तो वास्तु के कुछ आसान उपाय किए जा सकते हैं। 7 अक्टूबर को भी घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए कुछ सामान्य वास्तु उपाय किए जा सकते हैं।

    वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि मुख्य द्वार से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसलिए घर के प्रवेश द्वार को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे के आसपास अनावश्यक सामान या कूड़ा जमा नहीं होने देना चाहिए। सुबह घर की साफ सफाई करने के बाद मुख्य द्वार पर पानी का छिड़काव करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे घर के वातावरण में सकारात्मकता बढ़ती है।

    घर में टूटे हुए सामान को लंबे समय तक रखने से भी बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में खराब घड़ी टूटे बर्तन बंद पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बेकार सामान को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे सामान को घर से हटाने से स्थान व्यवस्थित होता है और वातावरण भी बेहतर महसूस हो सकता है। विशेष रूप से घर के उत्तर पूर्व दिशा वाले हिस्से को साफ और हल्का रखने की सलाह वास्तु में दी जाती है। इस स्थान पर भारी सामान जमा करने से बचना चाहिए।

    रसोई को भी घर की ऊर्जा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। वास्तु के अनुसार रसोई में गैस चूल्हे और पानी के स्थान को व्यवस्थित रखना चाहिए। सिंक में लंबे समय तक गंदे बर्तन जमा करके नहीं रखने चाहिए। घर में भोजन बनाते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि साफ रसोई घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में मदद करती है। इसी तरह सोने के कमरे में अनावश्यक सामान और बहुत अधिक अव्यवस्था रखने से बचना चाहिए।

    वास्तु से जुड़े उपायों में पौधों का भी विशेष महत्व बताया गया है। घर में ऐसे पौधे लगाए जा सकते हैं जिन्हें वहां की रोशनी और मौसम के अनुसार आसानी से संभाला जा सके। सूखे या मुरझाए हुए पौधों को घर में लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। पूजा स्थान को भी साफ रखना जरूरी माना जाता है। रोजाना दीपक जलाना और प्रार्थना करना धार्मिक रूप से सकारात्मक माना जाता है। हालांकि वास्तु उपाय आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक उपचार या आर्थिक समस्या के निश्चित समाधान के रूप में नहीं देखना चाहिए। घर को स्वच्छ व्यवस्थित और शांतिपूर्ण रखना सबसे महत्वपूर्ण है। 7 अक्टूबर को इन छोटे उपायों के साथ अगर परिवार के लोग आपसी सहयोग और सकारात्मक सोच बनाए रखें तो घर का माहौल अधिक सुखद और शांत महसूस हो सकता है।

  • शेयर बाजार में आज बन सकती है तेजी की तस्वीर, इन सेक्टर्स और शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

    शेयर बाजार में आज बन सकती है तेजी की तस्वीर, इन सेक्टर्स और शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली। आज शेयर बाजार में कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ घरेलू बाजार की दिशा पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है ऐसे में आज भी सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है। बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक शेयर बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें रुपये की चाल और आर्थिक आंकड़ों की भूमिका अहम रह सकती है। निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे केवल बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार की मौजूदा स्थिति को समझकर फैसला लें।

    आज के कारोबार में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और मेटल जैसे प्रमुख सेक्टर चर्चा में रह सकते हैं। इन सेक्टरों में होने वाली खरीदारी या बिकवाली का सीधा असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दे सकता है। खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। अगर घरेलू बाजार को वैश्विक संकेतों से समर्थन मिलता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता है तो बाजार में खरीदारी लौट सकती है। दूसरी ओर कमजोर वैश्विक संकेत और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली बाजार में दबाव बढ़ा सकती है।

    निवेशकों की नजर आज विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों के रुख पर भी रहेगी। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है जबकि भारी बिकवाली से बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी आईटी और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों को प्रभावित कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था और कुछ प्रमुख कंपनियों पर पड़ सकता है इसलिए कमोडिटी बाजार के संकेत भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

    बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए आज सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर भी अहम रहेंगे। अगर निफ्टी अपने महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो खरीदारी का भरोसा बढ़ सकता है जबकि अहम सपोर्ट स्तर टूटने पर बिकवाली का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। सेंसेक्स में भी इसी तरह ऊपरी और निचले स्तरों पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों को बाजार में अचानक आने वाली तेजी या गिरावट के आधार पर भावनात्मक फैसला लेने से बचना चाहिए।

    शेयर बाजार में हमेशा जोखिम बना रहता है और किसी भी शेयर की पिछली तेजी इस बात की गारंटी नहीं होती कि आगे भी उसमें वैसा ही प्रदर्शन देखने को मिलेगा। इसलिए निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स कमाई कारोबार की स्थिति कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर निवेश का निर्णय लेना चाहिए। आज के कारोबार में बाजार की शुरुआत भले ही सकारात्मक या नकारात्मक संकेतों के साथ हो लेकिन पूरे दिन वैश्विक संकेतों और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों के कारण तस्वीर बदल सकती है। ऐसे में सतर्क रणनीति अपनाना और जोखिम के अनुसार निवेश करना ही बेहतर विकल्प माना जा सकता है।