Author: bharati

  • अनुशासनहीनता की हद: स्कूल प्रबंधन सोया रहा, 8 फीट की बाउंड्री फांदकर स्कूल से बंक मारती नजर आईं छात्राएं

    अनुशासनहीनता की हद: स्कूल प्रबंधन सोया रहा, 8 फीट की बाउंड्री फांदकर स्कूल से बंक मारती नजर आईं छात्राएं


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले के शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल नागौद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां की छात्राएं स्कूल की 8 फीट ऊंची बाउंड्री फांदकर बाहर जा रही थीं, लेकिन स्कूल प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब बाउंड्री फांदते हुए छात्राओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। विडंबना यह है कि विद्यालय के पीछे से बाउंड्री लांघकर छात्राएं मुख्य सड़क पर कूद रही थीं, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही होती रहती है। इस स्थिति में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता था। वीडियो में छात्राएं बाउंड्री फांदते समय गिरती भी नजर आ रही हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि अगर कोई गंभीर दुर्घटना हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती

    स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यह मामला छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, और स्कूल प्रशासन की लापरवाही बेहद चिंताजनक है। स्कूल समय के दौरान छात्राओं का इस तरह बाउंड्री फांदकर बाहर जाना न केवल अनुशासनहीनता का प्रतीक है, बल्कि उनकी जान को भी खतरे में डालने वाला है। जैसे ही यह वीडियो मीडिया में आया, जिला शिक्षा अधिकारी कंचन श्रीवास्तव ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमने इस घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की है। हम प्राचार्य से चर्चा करेंगे और इस मामले में उचित प्रबंध कराने के लिए निर्देश देंगे।

    स्कूल की प्राचार्य, विनीता श्रीवास्तव ने इस पर सफाई देते हुए कहा, मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था और अंदर प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं। अब हमें इस घटना की जानकारी मिली है और इसके लिए उचित प्रबंध किए जाएंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि जब गेट पर ताला लगा था, तो स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं के बाहर जाने पर नजर क्यों नहीं रखी। यह मामला विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करता है, जो छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन की जिम्मेदारी लेने में नाकाम रहा। अगर भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो यह बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो जाएगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।
     

  • गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और नवजातों में GBS रोग का खतरा

    गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और नवजातों में GBS रोग का खतरा

    ई दिल्ली एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक्स का उपयोग नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (GBS) रोग के विकास के जोखिम को बढ़ा सकता है।

    हालांकि ये बैक्टीरिया आमतौर पर आंत या जननांगों में हानिरहित रहते हैं, लेकिन ये नवजातों, बुजुर्गों और इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड व्यक्तियों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिससे सेप्सिस, मेनिनजाइटिस और निमोनिया हो सकता है।

    स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम के एंटवर्प विश्वविद्यालय के एक अंतरराष्ट्रीय दल द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क नवजात GBS रोग के बढ़ते जोखिम से जुड़ा था, जो जन्म के चार सप्ताह के भीतर होता है। तीसरे तिमाही में प्रारंभिक संपर्क का सबसे मजबूत संबंध देखा गया।

    शोधकर्ताओं ने कहा, “गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क नवजातों में GBS के जोखिम को चार सप्ताह के भीतर बढ़ा सकता है, विशेष रूप से उन नवजातों में जिन्हें जोखिम-आधारित अंतःप्रसूति प्रोफिलैक्सिस से कवर नहीं किया गया है।”

    इस अध्ययन में 2006 से 2016 के बीच स्वीडन में सभी एकल जीवित जन्मों का जनसंख्या-आधारित अध्ययन किया गया।

    1,095,644 जीवित जन्मों में से 24.5 प्रतिशत नवजातों को एंटीबायोटिक्स का संपर्क हुआ।

    GBS की घटनाएं संपर्क में आए नवजातों में बिना संपर्क वाले नवजातों की तुलना में अधिक पाई गईं (0.86 बनाम 0.66 प्रति 1,000 जीवित जन्म)।

    शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन नवजात GBS रोग के जोखिम से संबंधित गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क की जांच करने वाला पहला अध्ययन है। हालांकि, यह पिछले नॉर्डिक अध्ययनों के साथ मेल खाता है, जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क के बाद प्रारंभिक बचपन (1-5 वर्ष) में संक्रमण के 16-34 प्रतिशत बढ़ते जोखिम की रिपोर्ट की थी।

    अध्ययन में यह भी पाया गया कि जन्म के करीब (चार सप्ताह के भीतर) दिए गए GBS-गतिशील एंटीबायोटिक्स कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करते।

    गर्भावस्था के दौरान किसी भी एंटीबायोटिक के संपर्क का नवजात GBS रोग के साथ संबंध केवल उन गर्भधारणाओं में देखा गया जिनमें GBS जोखिम कारक नहीं थे।

    इससे यह संकेत मिलता है कि बिना स्थापित GBS जोखिम कारकों वाले नवजातों को गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क को सीमित करने से अधिक लाभ हो सकता है।

    अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर देते हुए, टीम ने उन नवजातों की निगरानी में बढ़ती सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया जो मौजूदा GBS रोकथाम दिशानिर्देशों के बाहर आते हैं, विशेष रूप से उन नवजातों के लिए जो प्रारंभिक तीसरी तिमाही में गर्भ में एंटीबायोटिक्स के संपर्क में आए।

  • दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील

    दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील


    खंडवा । मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से लगभग 18 लोगों की मौत हो गई जिसे लेकर शासन-प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं और अब भाजपा नेताओं के विवादास्पद बयानों ने इन उम्मीदों को और बिखेर दिया है। पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अब खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने जनता से अपील की कि वे सरकार के भरोसे न बैठें और अपनी जिम्मेदारी खुद निभाएं।

    सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल खंडवा में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। जब उनसे इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, चाहे खंडवा हो, नगर परिषद हो या ग्राम पंचायत हो, इंदौर की घटना से हम सभी को सबक लेना चाहिए। सिर्फ सरकार ही सब कुछ करे सरकार के भरोसे हम रहे, ये भी ठीक नहीं है। जनता की भी एक जिम्मेदारी बनती है। इस बयान से उन्होंने एक तरह से साफ कर दिया कि गंदगी और दूषित पानी की समस्या के लिए अब जिम्मेदारी सरकार के बजाय जनता पर डाल दी गई है।

    सांसद का यह बयान विवादों में घिर चुका है क्योंकि इसने सीधे तौर पर जनता पर सफाई का जिम्मा थोप दिया। सवाल यह उठता है कि क्या अब जनता खुद सड़कें खोदकर पाइपलाइन लगाएगी या फिर नगर निगम की टंकियों को साफ कर घर-घर पानी पहुंचाने का काम करेगी अगर यही जिम्मेदारी जनता की है, तो फिर सवाल यह भी है कि सांसद जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग क्या कर रहे हैं क्या उनके कर्तव्यों में ऐसी समस्याओं का समाधान करना नहीं आता ।

    यह पहली बार नहीं है जब भाजपा नेताओं के बयानों ने विवाद उठाया है। इससे पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकार से अभद्रता करते हुए ‘घंटा’ शब्द कहा था, जिसके बाद कांग्रेस ने इस बयान के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद विजयवर्गीय भी बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं। इंदौर में हुए हादसे के बाद से प्रशासन की नाकामी और नेताओं के विवादास्पद बयानों ने लोगों के विश्वास को तोड़ा है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे या फिर इस बार भी जनता को ही दोषी ठहराया जाएगा।

  • इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई

    इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक कॉल सेंटर में कार्यरत युवती पर लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी युवक का नाम अब्दुल कलाम है, जो कॉल सेंटर में एमओ मैनेजमेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। युवती ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी काम के दौरान उसे बार-बार धर्म परिवर्तन करने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। इस दबाव से परेशान होकर युवती ने कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ दी, लेकिन आरोपी का पीछा तब भी नहीं रुका।

    युवती ने बताया कि कंपनी के दो माह के नोटिस पीरियड के दौरान, जब वह रोजाना काम पर जा रही थी, तब भी आरोपी उसे रास्ते में रोककर परेशान करता रहा। लगातार उत्पीड़न से तंग आकर एक दिन युवती का गुस्सा फूट पड़ा। रास्ते में ही उसने आरोपी की जूतों से पिटाई कर दी। इसके बाद, पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत लसूड़िया थाना पुलिस में दर्ज कराई।

    पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी गंभीर सवालों को उजागर करती है। क्या हमारे कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित महसूस होता है क्या हम उनके धार्मिक विश्वासों और स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं? इन सवालों का जवाब अब समाज और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा ।

  • साढ़े 3 लाख शिक्षकों पर एस्मा लागू, छुट्टियों और धरना-प्रदर्शन पर रोक

    साढ़े 3 लाख शिक्षकों पर एस्मा लागू, छुट्टियों और धरना-प्रदर्शन पर रोक


    भोपाल । मध्य प्रदेश में साढ़े तीन लाख शिक्षकों पर एस्मा सार्वजनिक आपातकालीन सेवा संरक्षण अधिनियम लागू कर दिया गया है। यह आदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल माशिमं ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किया है, जिसके तहत शिक्षकों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगाई गई है और उनका धरना-प्रदर्शन करना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। एस्मा के तहत अगले दो महीनों तक शिक्षकों को कोई भी छुट्टी लेने की अनुमति नहीं होगी और वे अपनी ड्यूटी से इंकार नहीं कर सकेंगे। यह आदेश 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा।

    एस्मा के इस आदेश का मुख्य उद्देश्य आगामी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं केमद्देनजर परीक्षा ड्यूटी में किसी प्रकार की विघ्न नहीं आनी चाहिए। प्रदेश में 7 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं और इनमें करीब 17 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। इस दौरान शिक्षकों को अपनी ड्यूटी से न भागने और परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    यह आदेश सार्वजनिक सेवा में किसी भी प्रकार की बाधा डालने या ड्यूटी से मना करने को कानून के उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा। एस्मा लागू होने से शिक्षकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें, खासकर परीक्षा के दौरान।इस फैसले के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अगले दो महीनों तक कोई विशेष छुट्टी या अवकाश लेने की सुविधा नहीं होगी। इस दौरान अगर कोई शिक्षक या कर्मचारी ड्यूटी से इंकार करता है या प्रदर्शन करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

  • यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया

    यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यासीन अहमद उर्फ मछली की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यासीन के खिलाफ दर्ज आरोपों की गंभीरता और उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए यह फैसला लिया। यासीन मछली, जो एक पत्रकार के नाम पर जारी फर्जी विधानसभा पार्किंग पास का इस्तेमाल कर रहा था, को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने यासीन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

    यह घटना भोपाल में उस समय सामने आई थी जब यासीन मछली विधानसभा पार्किंग में एक फर्जी पास लगाकर अपनी कार पार्क कर रहा था। यह पास एक पत्रकार के नाम पर जारी हुआ था, जिसे दिसंबर 2024 के विधानसभा सत्र के लिए जारी किया गया था। पत्रकार ने इस मामले की शिकायत भोपाल अरेरा हिल्स पुलिस से की थी, जिसके बाद यासीन को गिरफ्तार कर लिया गया था।

    यासीन मछली के खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने यासीन और उसके चाचा शाहवर को ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। इसके अलावा, आरोपी के मोबाइल से अश्लील वीडियो भी बरामद हुए थे, जो जांच में एक और बड़ा मामला सामने लाए। यासीन और उसके साथियों के खिलाफ एक और गंभीर आरोप यह है कि वह स्कूल और कॉलेज की लड़कियों को पार्टियों के बहाने ड्रग्स की लत लगवाते थे, फिर उनका यौन शोषण करते और उन्हें ब्लैकमेल कर वीडियो बनाते थे। इसके अलावा, धर्मांतरण का दबाव भी इन अपराधों से जुड़ा हुआ था, जो पुलिस की जांच में उभरकर आया है।

    इस मामले के बाद से यासीन मछली की आपराधिक गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है, और पुलिस उसे सख्त सजा दिलाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर चुकी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देता है, कि कोर्ट गंभीर अपराधों में लिप्त आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं देगी। इस फैसले से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अपराधी चाहे कितनी भी ताकतवर स्थिति में क्यों न हो, कानून के सामने सभी समान होते हैं।

  • 'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शुक्रवार को उस वक्त भड़क गईं जब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति से मिलने पहुंचीं मगर उनसे कोई मिलना नहीं आया. अपर्णा यादव, रमीज और धर्मांतरण के मामले को लेकर केजीएमयू पहुंचीं थीं. इसके बाद एक प्रेस वार्ता में अपर्णा ने कहा कि महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है? मैं तो कुछ जानकारी करने के लिए आई थी लेकिन मुझसे मिलने वॉइस चांसलर नहीं आईं. उन्होंने कहा कि पीड़िता से मेरी बात हुई थी उसने बताया केजीएमयू के एचओडी के बताने के बाद में भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

    यादव ने दावा किया कि पीड़िता को केजीएमयू के सीनियर डॉक्टर के द्वारा कहा गया कि आप महिला आयोग क्यों गई? उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को बचाने के लिए व्यक्ति विशेष काम कर रहे हैं.यादव ने विशाखा कमेटी के द्वारा जारी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बयान दिया है उनके बयान बदलने के लिए दबाव दिया जा रहा है. अपर्णा ने दावा किया कि विशाखा कमेटी को अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर बताए गए.

    उन्होंने पूछा कि क्या महिला आयोग, संवैधानिक संस्था नहीं है?

    केजीएमयू वीसी से मुलाकात के संदर्भ में यादव ने कहा कि हमारी कुछ बात होती जिस पर हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचते. शायद तब मैं प्रेसवार्ता भी नहीं करती. मुझे लगता है कि प्रदेश सरकार विधि और न्याय सम्मत काम करेगी. सीएम योगी आदित्यनाथ इन मामलों में सचेत रहते हैं.

    महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा-केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रही है, यह सब क्या चल रहा है और यहां का प्रशासन मौन है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2 साल से बिना लाइसेंस के केजीएमयू में ब्लड बैंक चल रहा है.

    यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वो इस बात को जानेंगी तो वह भी इसे गंभीरतापूर्वक समझेंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जब रमीज मलिक यहां से भागा तब प्रोफेसर वाहिद अली और सुरेश बाबू के संपर्क में रहे. केजीएमयू प्रशासन ने उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

  • Bharat Coking Coal IPO 2026: ग्रे मार्केट 50% उछाल, लिस्टिंग पर बड़ा रिटर्न या निवेश का मौका?

    Bharat Coking Coal IPO 2026: ग्रे मार्केट 50% उछाल, लिस्टिंग पर बड़ा रिटर्न या निवेश का मौका?


    नई दिल्ली। साल 2026 का पहला मेनबोर्ड IPO Bharat Coking Coal Limited (BCCL) लेकर आया है, जो 9 से 13 जनवरी 2026 तक खुलेगा। IPO का लक्ष्य 1,071 करोड़ रुपये जुटाना है। BCCL, Coal India की सहायक कंपनी और देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी है। FY25 में BCCL का घरेलू उत्पादन में हिस्सा 58.5% रहा।

    IPO से पहले 8 जनवरी 2026 को एंकर निवेशकों से 273.13 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसमें LIC सबसे बड़ा निवेशक रही, जिसने 78 करोड़ रुपये के 3.39 करोड़ इक्विटी शेयर खरीदे। इसके अलावा निप्पॉन इंडिया और बंधन म्यूचुअल फंड ने 75-75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

    SBI Securities ने निवेशकों को कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब करने की सलाह दी, जबकि Anand Rathi ने इसे लिस्टिंग गेन के नजरिए से निवेश करने की सिफारिश की। IPO का ऊपरी प्राइस बैंड 23 रुपये है और वैल्यूएशन 6.4x EV/EBITDA के हिसाब से है। FY25 में EBITDA मार्जिन 12.7% और ROCE 18.2% रहा। FY23–FY25 के दौरान बिक्री और मुनाफा क्रमशः 5% और 37% CAGR से बढ़ा।

    IPO संरचना और डिटेल्स: यह IPO पूरी तरह OFS (Offer for Sale) है, जिसमें Coal India अपनी 10% हिस्सेदारी बेच रही है। कुल शेयर 46.57 करोड़ हैं और प्राइस बैंड 21–23 रुपये निर्धारित किया गया है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट 600 शेयर है, जिसके लिए ऊपरी प्राइस बैंड पर निवेश 13,800 रुपये होगा। अलॉटमेंट स्ट्रक्चर के अनुसार, रिटेल निवेशक को 35%, QIB को 50%, और NII को 10% शेयर मिलेंगे।

    इसके अलावा Coal India के शेयरधारकों के लिए 107 करोड़ रुपये के शेयर आरक्षित हैं, और कर्मचारियों को प्रति शेयर 1 रुपये की छूट भी दी जाएगी।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP): BCCL के शेयर ग्रे मार्केट में लगभग 50% प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, जो लिस्टिंग पर मजबूत रिटर्न का संकेत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि GMP केवल अनलिस्टेड मार्केट की धारणा को दर्शाता है और अस्थिर रह सकता है। पोस्ट-इश्यू मार्केट कैपिटलाइजेशन का अनुमान लगभग 10,711 करोड़ रुपये है। लिस्टिंग के बाद Coal India की हिस्सेदारी 90% रहेगी, जो न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम से काफी अधिक है।

    BCCL के फायदे और निवेश के कारण: देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी होने के साथ BCCL के पास 7.91 अरब टन अनुमानित कोल रिजर्व और 34 ऑपरेशनल माइंस हैं। FY23–FY25 के दौरान बिक्री और मुनाफा क्रमशः 5% और 37% CAGR से बढ़ा। FY25 में EBITDA मार्जिन 12.7% और ROCE 18.2% रहा। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

    जोखिम: लंबी अवधि में कोल रिजर्व में कमी, टॉप 10 ग्राहकों पर 80% से अधिक निर्भरता, और रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते उपयोग से कोल की मांग पर असर मुख्य जोखिम हैं।

    लिस्टिंग और अलॉटमेंट डेट: BCCL IPO का अलॉटमेंट 14 जनवरी 2026 को होने की संभावना है, जबकि लिस्टिंग 16 जनवरी 2026 को होने की उम्मीद है। बुक रनिंग लीड मैनेजर IDBI Capital और ICICI Securities हैं।

    निवेशक इस IPO में कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब कर सकते हैं, जबकि लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने वाले निवेशक इसे देख सकते हैं। ग्रे मार्केट प्रीमियम और कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स इसे शॉर्ट-टर्म और मिड-टर्म दोनों के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं।

  • उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट

    उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में बिजली विभाग की टीम पर हमला होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना ग्राम पिपलु में हुई, जहां एक किसान ने बिजली बिल का लंबा समय से भुगतान न करने के बाद जब बिजली विभाग की टीम ने उसका कनेक्शन काटा, तो किसान ने कर्मचारियों पर हमला कर दिया।

    घटना का विवरण

    बताया जा रहा है कि सुपरवाइजर जनार्दन द्विवेदी अपनी टीम के साथ बकाया बिजली बिल की वसूली के लिए किसान लोकेंद्र के घर पहुंचे थे। लोकेंद्र पर काफी समय से बिजली का बिल बकाया था, और जब विभागीय टीम ने कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू की, तो किसान लोकेंद्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने जनार्दन द्विवेदी और उनके साथियों से मारपीट करना शुरू कर दिया।

    मोबाइल में कैद हुई मारपीट की घटना

    किसान द्वारा की गई मारपीट की घटना को किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जिसके बाद इसका वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि किसान ने कनेक्शन काटने के दौरान कर्मचारियों से हाथापाई की। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद घटना ने काफी तूल पकड़ लिया।

    पुलिस में शिकायत और जांच

    मारपीट की इस घटना के बाद सभी कर्मचारी बड़नगर थाने पहुंचे और आरोपी किसान लोकेंद्र के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने की शिकायत की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी किसान के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    घटना का असर

    इस घटना ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जहां एक ओर बिजली विभाग की टीम कनेक्शन काटने के लिए जाती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की हिंसक घटनाएं विभाग के कार्यों में रुकावट डाल सकती हैं।अब देखना होगा कि पुलिस मामले की जांच के बाद क्या कार्रवाई करती है और क्या किसान लोकेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

  • भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक

    भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक


    भोपाल। भोपाल नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पानी में कैंसर, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया मौजूद हैं। नल से आने वाला पानी कुछ ही मिनटों में लाल हो जाता है और बदबू इतनी तीव्र होती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स), कैल्शियम, टोटल हार्डनेस, सल्फेट और कोलीफॉर्म भी उच्च मात्रा में पाए गए हैं।

    स्थानीय लोग अब पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।

    आदमपुर खंती और पड़रिया के इलाकों में लोग भूजल का पानी पीने के बजाय, केवल फसलों की सिंचाई और साफ-सफाई में इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ इलाकों में तो हैंडपंप से लाल और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिसे देखकर लोग पीने से डर रहे हैं।

    पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष पांडे के मुताबिक, जनवरी 2018 से भोपाल का कचरा आदमपुर खंती में डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास के 7 गांवों का भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है। डंपिंग साइट पर फिलहाल 14 लाख टन कचरा जमा है, जिससे लिक्विड रसायन (लीचेट) निकलकर पानी को और दूषित कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल का भूजल इंदौर से भी ज्यादा गंभीर स्थिति में है। आदमपुर खंती और आसपास के इलाकों में भूजल में आयरन और क्रोमियम भी मिले हैं, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। CPCB और MPPCB की रिपोर्ट्स में भी यह तथ्य सामने आया है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें से 800 टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए खंती भेजा जाता है। लेकिन यूनिट की क्षमता केवल 420 टन है, जिससे कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है और आसपास के गांवों का पानी दूषित होता जा रहा है।

    भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर का पानी फेल सैंपल्स दे चुका है। पानी में पाया गया ई-कोलाई बैक्टीरिया वही है, जो इंदौर के भागीरथपुरा में पाया गया था और जिसके कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
    भोपाल का ग्राउंड वाटर वर्तमान में पीने योग्य नहीं है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित पानी की तत्काल आवश्यकता है। प्रशासन और पर्यावरण एजेंसियों को मिलकर पानी की सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि जनता की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।