Author: bharati

  • महाराष्ट्र ले जाते गौवंशों से भरी पिकअप पकड़ी गोरक्षकों की सतर्कता से बचे गौवंश

    महाराष्ट्र ले जाते गौवंशों से भरी पिकअप पकड़ी गोरक्षकों की सतर्कता से बचे गौवंश


    धार ।जानकारी के अनुसार बजरंग दल के गोरक्षक प्रमुख मोहन को यह सूचना मिली थी कि धार जिले की ओर से एक पिकअप वाहन क्रमांक MH-05 DK-0327 में गौवंशों को भरकर महाराष्ट्र ले जाया जा रहा है। जैसे ही यह सूचना गोरक्षकों के पास पहुंची मोहन ने तुरंत अपने साथियों प्रदीप मनीष और शुभम के साथ पिकअप वाहन को पकड़ने की योजना बनाई। वे रात करीब एक बजे धार फाटा स्थित नागौरी ढाबे के पास सिरसोदिया धामनोद पहुंचे और पिकअप वाहन को रुकवाया।

    गोरक्षकों ने वाहन की तलाशी ली और पाया कि उसमें कई गौवंशों को बुरी तरह से ठूस-ठूसकर भरा गया था। तस्करों ने गौवंशों को बिना किसी सुविधाजनक व्यवस्था के वाहन में लाकर उन्हें महाराष्ट्र ले जाने की कोशिश की थी। गोरक्षकों की सतर्कता से यह तस्करी नाकाम हो गई और गौवंशों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

    इस कार्रवाई से साबित होता है कि गोरक्षकों की सजगता और समाज की जागरूकता से ऐसी अवैध गतिविधियों पर काबू पाया जा सकता है। पुलिस और प्रशासन को सूचित कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है जबकि गौवंशों को सुरक्षित और उचित देखभाल के लिए एक गोशाला भेज दिया गया है।

    यह घटना यह भी दर्शाती है कि तस्करी के मामले में समाज के विभिन्न हिस्सों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। गोरक्षकों की सतर्कता से ना केवल गौवंशों की जान बची बल्कि तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मार्ग भी प्रशस्त हुआ।

  • Bank of India में जमा करें ₹2,00,000 और पाएं ₹77,945 का फिक्स ब्याज, गारंटी के साथ

    Bank of India में जमा करें ₹2,00,000 और पाएं ₹77,945 का फिक्स ब्याज, गारंटी के साथ

    नई दिल्ली। भारत में कुल सरकारी बैंकों की संख्या 12 है, जिन्हें केंद्र सरकार कंट्रोल करती है। बैंक ऑफ इंडिया भी देश के 12 सरकारी बैंकों की लिस्ट में शामिल है। ये सरकारी बैंक अपने ग्राहकों को एफडी खातों पर काफी अच्छा ब्याज दे रहा है। बताते चलें कि पिछले साल आरबीआई द्वारा रेपो रेट में की गई 1.25 प्रतिशत की कटौती के बाद तमाम बैंकों ने एफडी की ब्याज दरों में संशोधन कर दिया था। बैंक ऑफ इंडिया ने भी 1 दिसंबर, 2025 से अपनी एफडी स्कीम की ब्याज दरों में संशोधन किया था। यहां हम आपको बैंक ऑफ इंडिया की एक ऐसी एफडी स्कीम के बारे में बताएंगे, जिसमें 2 लाख रुपये जमा कर गारंटी के साथ 77,945 रुपये तक का फिक्स ब्याज पाया जा सकता है।
    एफडी खातों पर 7.35 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है बैंक ऑफ इंडिया
    बैंक ऑफ इंडिया में कम से कम 7 दिनों के लिए और ज्यादा से ज्यादा 10 साल के लिए एफडी खाता खुलवाया जा सकता है। ये सरकारी बैंक एफडी खातों पर 3.00 प्रतिशत से लेकर 7.35 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है। बैंक ऑफ इंडिया 450 दिनों की स्टार स्वर्णिम स्पेशल एफडी स्कीम पर सबसे ज्यादा ब्याज दे रहा है। बैंक इस स्कीम पर सामान्य नागरिकों को 6.70 प्रतिशत, वरिष्ठ नागरिकों को 7.20 प्रतिशत और अति वरिष्ठ नागरिकों को 7.35 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। पब्लिक सेक्टर का ये बैंक 3 साल से ज्यादा और 5 साल से कम अवधि वाली एफडी स्कीम पर सामान्य नागरिकों को 6.25 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 6.75 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है।

    2 लाख रुपये जमा करने पर मिलेगा 77,945 रुपये तक का ब्याज
    अगर आप एक सामान्य नागरिक हैं और बैंक ऑफ इंडिया में 59 महीने (5 साल से कम) की अवधि के लिए 2 लाख रुपये की एफडी कराते हैं तो 6.25% की ब्याज दर से आपको मैच्यॉरिटी पर कुल 2,71,302 रुपये मिलेंगे, जिसमें 71,302 रुपये का फिक्स ब्याज शामिल है। इसी तरह, अगर आप एक वरिष्ठ नागरिक हैं और बैंक ऑफ इंडिया में 59 महीने की अवधि के लिए 2 लाख रुपये की एफडी कराते हैं तो आपको 6.75 प्रतिशत की ब्याज दर से मैच्यॉरिटी पर कुल 2,77,945 रुपये मिलेंगे, जिसमें 77,945 रुपये का फिक्स ब्याज शामिल है।

  • हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    नई दिल्ली।आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में स्वस्थ रहना एक चुनौती जरूर है, लेकिन 2026 के हेल्दी ईटिंग और फूड ट्रेंड्स इसे पहले से कहीं आसान बना रहे हैं। अब हेल्दी खाना सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इम्यूनिटी बढ़ाने, दिनभर ऊर्जा बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने का अहम जरिया बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल के साथ लोग अब ऐसे फूड ऑप्शन्स की तलाश में हैं जो नैचुरल हों, कम प्रोसेस्ड हों और शरीर को संपूर्ण पोषण दें।2026 के फूड ट्रेंड्स में नैचुरल इंग्रीडिएंट्स, लो-कार्ब डाइट और प्लांट-बेस्ड फूड्स का दबदबा साफ नजर आ रहा है। लोग पैकेज्ड और जंक फूड से दूरी बनाकर घर के बने, ताज़े और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्विनोआ, ओट्स, मिलेट्स, मील शेक्स और वेजिटेबल-फ्रूट स्मूदीज़ तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये पचाने में आसान होने के साथ लंबे समय तक एनर्जी भी देते हैं।

    रेसिपी ट्रेंड्स की बात करें तो इस साल स्वाद और सेहत के बीच बेहतरीन संतुलन देखने को मिल रहा है। हल्दी, ग्रीन टी, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स जैसे सुपरफूड्स को रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करना अब आम हो गया है। ये न सिर्फ इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं, बल्कि हार्ट हेल्थ और पाचन के लिए भी फायदेमंद माने जा रहे हैं। डिनर में लो-कार्ब वेजिटेबल प्लेट्स और प्रोटीन रिच स्नैक्स का चलन भी बढ़ रहा है। बेक्ड स्वीट पोटैटो फ्राइज, पैन-ग्रिल्ड सब्जियां या हर्ब-ग्रिल्ड चिकन जैसे विकल्प स्वादिष्ट होने के साथ वजन कंट्रोल और मसल स्ट्रेंथ में मदद करते हैं।हेल्दी लाइफस्टाइल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर भोजन करना और छोटे-छोटे पोर्शन लेना भी उतना ही जरूरी है। दिन की शुरुआत गुनगुने पानी या नींबू पानी से करने, दिनभर पर्याप्त पानी पीने और हर 3-4 घंटे में हल्का व पौष्टिक स्नैक लेने से शरीर एक्टिव बना रहता है और थकान महसूस नहीं होती।

    फिट रहने के लिए अब लोग भारी-भरकम एक्सरसाइज की बजाय हल्की व नियमित गतिविधियों को अपनाने लगे हैं। योग, मॉर्निंग स्ट्रेचिंग और वर्क फ्रॉम होम के दौरान छोटे-छोटे वॉक ब्रेक्स शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही विटामिन और मिनरल्स के लिए सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है। धूप से विटामिन डी, खट्टे फलों से विटामिन सी और हरी सब्जियों व बीन्स से आयरन लेना अब लोगों की डेली रूटीन का हिस्सा बनता जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्दी रूटीन की सफलता किसी एक बड़े बदलाव में नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे-छोटे सुधारों में छिपी होती है। अचानक डाइट बदलना या एक्सट्रीम फास्टिंग करने की बजाय धीरे-धीरे हेल्दी आदतें अपनाना लंबे समय तक बेहतर परिणाम देता है। 2026 के ये हेल्दी ईटिंग ट्रेंड्स यही संदेश देते हैं कि सेहतमंद जीवन कोई मुश्किल लक्ष्य नहीं, बल्कि सही चुनावों से बना एक आसान सफर है।

  • डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी

    डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में साइबर अपराधियों ने एक नया ठगी का तरीका अपनाया, जिसे डिजिटल अरेस्ट का नाम दिया गया है। अपराधियों ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग से 23.50 लाख रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया। यह घटना बुजुर्ग व्यक्ति बसंत कुमार मैदमवार 80 के साथ हुई, जो एसबीआई बैंक से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, 27 नवंबर 2025 को फरियादी को एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई, जिसमें स्क्रीन पर “दिल्ली पुलिस” लिखा हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग करके दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है जिसे ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया गया है। ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट” किया जाएगा।

    डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी और बार-बार वीडियो कॉल्स से भयभीत हो गए बुजुर्ग बसंत कुमार से ठगों ने उनके बैंक खातों की “जांच” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लिए। फरियादी ने कई बार अपने बैंक खातों से रकम ट्रांसफर की, और इस प्रक्रिया में कुल 23.50 लाख रुपये की ठगी हो गई। जब दो दिसंबर को बसंत कुमार गोल्ड लोन लेने के लिए बैंक पहुंचे, तब बैंक प्रबंधक ने इस मामले को साइबर ठगी का मामला बताया। इसके बाद, उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिससे मामला पुलिस के संज्ञान में आया।

    यह ठगी का तरीका साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और तकनीकी ज्ञान को दर्शाता है। वीडियो कॉल और फर्जी पुलिस अधिकारियों के द्वारा बनाई गई डर की स्थिति का फायदा उठाकर बुजुर्गों और अन्य असुरक्षित लोगों को ठगना अब सामान्य होता जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है। यह घटना एक चेतावनी है, खासकर उन लोगों के लिए जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक सक्रिय नहीं होते। ऐसे अपराधियों से बचने के लिए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है और कभी भी किसी भी अज्ञात कॉल या मैसेज पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

  • शालीमार गार्डन हिंसा: पिंकी चौधरी और बेटे सहित 12 आरोपियों पर कार्रवाई तेज

    शालीमार गार्डन हिंसा: पिंकी चौधरी और बेटे सहित 12 आरोपियों पर कार्रवाई तेज


    गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां हिंदू रक्षा दल के लोगों द्वारा तलवारों का वितरण और शक्ति प्रदर्शन का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सख्त कदम उठाया। शालीमार गार्डन थाने की पुलिस ने इस मामले में हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके बेटे हर्ष चौधरी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों ने स्थानीय लोगों में तलवारें बांटी और कहा कि “
    जिहादियों से सुरक्षा के लिए इसे अपने घर में रखें और अगर कोई बहन या बेटी पर बुरी नजर डाले तो इसका प्रयोग करें।

    यह मामला पहले भी चर्चा में रहा था। पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू की और अब तक कुल 12 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हथियार वितरण और शक्ति प्रदर्शन की यह घटना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

    इस मामले पर विपक्ष भी सख्त है। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश सरकार को कानून व्यवस्था में चूक के लिए कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आज देश में क्या हो रहा है, तलवारें बांटी जा रही हैं, एक संप्रदाय के खिलाफ भावनात्मक नारे लगाकर हिंसा की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकार को दिखाई नहीं दे रहा।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना।

    पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि शालीमार गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि समाज में हथियारों का वितरण और युवा वर्ग को हिंसा के लिए उकसाना कितनी गंभीर समस्या बन सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घटनाक्रम न केवल समाज में भय और असुरक्षा पैदा करते हैं, बल्कि कानून व्यवस्था और सामुदायिक शांति पर भी गंभीर असर डालते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय थाने को दें और कानून का पालन सुनिश्चित करें।

    शालीमार गार्डन मामला यह भी दर्शाता है कि हथियारों का गलत तरीके से वितरण और सामूहिक शक्ति प्रदर्शन केवल राजनीतिक या सामाजिक तनाव ही नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इसलिए अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले ने राज्य में राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। विपक्षी दलों के आरोपों और पुलिस की सक्रिय कार्रवाई ने इसे अब तक के सबसे बड़े हथियार वितरण मामलों में शामिल कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि किसी भी व्यक्ति को हथियार लेकर सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा नहीं होने दिया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार गाजियाबाद की शालीमार गार्डन घटना ने यह संदेश दिया है कि हथियारों का वितरण और सामूहिक हिंसा किसी भी समाज के लिए गंभीर खतरा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल कार्रवाई अनिवार्य है।

  • ऑस्कर की दौड़ में भारत की 'होमबाउंड' से बढ़ी उम्‍मीदें, इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी के अगले राउंड में पहुंची फिल्म

    ऑस्कर की दौड़ में भारत की 'होमबाउंड' से बढ़ी उम्‍मीदें, इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी के अगले राउंड में पहुंची फिल्म

    नई दिल्‍ली । ऑस्कर में भारत की उम्मीदें अभी जिंदा हैं। भारत की ओर से आधिकारिक एंट्री के तौर पर भेजी गई फिल्म ‘होमबाउंड’ ने अकादमी अवॉर्ड्स की अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में अगले चरण के मतदान में जगह बना ली है। अकादमी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस कैटेगरी में दुनिया भर से चुनी गई 15 फिल्मों को अगले दौर के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। इस सूची में भारत की ‘होमबाउंड’ के साथ अर्जेंटीना, ब्राजील, फ्रांस, जर्मनी, इराक, जापान, जॉर्डन, नॉर्वे, फिलिस्तीन, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड, ताइवान और ट्यूनीशिया की फिल्में भी शामिल हैं।

    इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी में 15 फिल्मों की शॉर्टलिस्ट जारी
    भारत की ‘होमबाउंड’ के साथ इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में जिन अन्य फिल्मों ने अगले दौर में जगह बनाई है, उनमें अर्जेंटीना की ‘बेलेन’, ब्राजील की ‘द सीक्रेट एजेंट’, फ्रांस की ‘इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट’ और जर्मनी की ‘साउंड ऑफ फॉलिंग’ शामिल हैं।

    इसके अलावा इराक से ‘द प्रेसिडेंट्स केक’, जापान की ‘कोकुहो’, जॉर्डन की ‘ऑल दैट्स लेफ्ट ऑफ यू’, नॉर्वे की ‘सेंटीमेंटल वैल्यू’, फिलिस्तीन की ‘पैलेस्टाइन 36’, दक्षिण कोरिया की ‘नो अदर चॉइस’, स्पेन की ‘सिरात’, स्विट्जरलैंड की ‘लेट शिफ्ट’, ताइवान की ‘लेफ्ट-हैंडेड गर्ल’ और ट्यूनीशिया की ‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। अकादमी अवॉर्ड्स ने यह जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए साझा की है। अब ऑस्कर के लिए अंतिम नामांकन की घोषणा गुरुवार, 22 जनवरी को की जाएगी।

    ऑस्कर इतिहास में ‘होमबाउंड’ का नाम दर्ज
    ऑस्कर की शॉर्टलिस्ट में जगह बनाकर फिल्म ‘होमबाउंड’ ने भारतीय सिनेमा के लिए एक और अहम मुकाम हासिल कर लिया है। अकादमी अवॉर्ड्स के 98 साल के इतिहास में यह केवल पांचवीं भारतीय फिल्म है, जो सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी की शॉर्टलिस्ट तक पहुंची है। ईशान खट्टर और विशाल जेठवा अभिनीत यह फिल्म ऑस्कर 2026 के लिए इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी में अंतिम नामांकन की दौड़ में शामिल 15 फिल्मों में जगह बनाने में सफल रही है। इस उपलब्धि के साथ ‘होमबाउंड’ ने वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा की मौजूदगी को और मजबूत किया है।

    नीरज घेवान के निर्देशन में बनी है होमबाउंड
    फिल्म ‘होमबाउंड’ का निर्देशन नीरज घेवान ने किया है, जबकि इसका निर्माण करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले हुआ है। यह कहानी बचपन के दो दोस्तों शोएब (ईशान खट्टर) और चंदन (विशाल जेठवा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका पुलिस सेवा में जाने का सपना उनके भविष्य की दिशा तय करता है। कहानी दोस्ती, जिम्मेदारी और आज के युवा भारत पर पड़ने वाले सामाजिक दबावों को दर्शाती है। इस फिल्म में जाह्नवी कपूर भी एक अहम किरदार में नजर आती हैं।

  • दिल्ली त्रिलोकपुरी: इंस्टाग्राम विवाद में 11वीं के छात्र की नाबालिग साथियों ने की हत्या

    दिल्ली त्रिलोकपुरी: इंस्टाग्राम विवाद में 11वीं के छात्र की नाबालिग साथियों ने की हत्या


    नई दिल्ली।  दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें 11वीं कक्षा का 17 वर्षीय छात्र अपने नाबालिग साथियों द्वारा बेरहमी से पीट-पीट कर मारा गया। यह घटना सोशल मीडिया पर हुए मामूली विवाद के कारण घटी, जिसने पूरे इलाके में डर और हड़कंप मचा दिया। मृतक छात्र इंद्रा कैंप का निवासी था और अपने परिवार में सबसे छोटा था।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोमवार, 5 जनवरी की शाम को यह घटना हुई। छात्र ने एक नाबालिग आरोपी की इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर ‘तू तो मेरा छोटा भाई है’ कमेंट किया, जिसे आरोपी ने पसंद नहीं किया। इसी नाराज़गी में आरोपी ने अपने पांच अन्य नाबालिग साथियों के साथ मिलकर छात्र को घेर लिया और उसकी बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी।

    हिंसा इतनी गंभीर थी कि छात्र की हालत तुरंत बिगड़ गई। उसे जमीन पर गिराकर लात-घूंसों से मारा गया, जिससे शरीर पर गंभीर चोटें आईं। चश्मदीदों की मदद करने की कोशिश विफल रही क्योंकि आरोपी ने बीच-बचाव करने वालों पर भी हमला किया। छात्र को तत्काल लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर स्थिति के कारण उसे GTB अस्पताल रेफर किया गया। मंगलवार, 6 जनवरी की सुबह इलाज के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया।

    पुलिस ने छात्र के परिवार की शिकायत पर 6 नाबालिगों को हिरासत में लिया। ट्रिलोकपुरी पुलिस की क्राइम टीम और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज़ी से शुरू की जाएगी। इस घटना ने यह सवाल फिर से खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर छोटे विवाद भी नाबालिगों में जानलेवा हिंसा को जन्म दे सकते हैं।

    परिवार और पड़ोसियों ने बताया कि मृतक छात्र शांत और होशियार था, किसी से विवाद नहीं करता था।

    केवल एक साधारण इंस्टाग्राम कमेंट ने यह भयानक घटना जन्म दी, जो समाज और परिवार दोनों के लिए चेतावनी है। स्थानीय लोग घटना से स्तब्ध हैं और ऐसे हादसों की रोकथाम की मांग कर रहे हैं।

    दिल्ली पुलिस ने सभी छह नाबालिगों को बाल संरक्षण कानून और पॉक्सो एक्ट के तहत हिरासत में रखा है। उनकी मानसिक स्थिति, मामले में भूमिका और हिंसा के स्तर की पूरी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि बच्चों की उम्र और समझ को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय और राज्य बाल संरक्षण प्राधिकरण भी इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं ताकि नाबालिगों द्वारा अपराध के मामलों में सख्त और उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो।

    इस घटना ने सोशल मीडिया और युवा पीढ़ी के बीच साइबर एथिक्स और जिम्मेदारी पर गंभीर बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर छोटे विवाद भी युवा मनोविज्ञान पर भारी असर डाल सकते हैं। यह घटना साबित करती है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया और वास्तविक जीवन में संवेदनशीलता, सहिष्णुता और हिंसा से बचाव की शिक्षा देना बेहद जरूरी है।

    दिल्ली पुलिस ने आसपास के स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है। परिवार और समाज से अपील की गई है कि वे बच्चों के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके।

    त्रिलोकपुरी की यह घटना पूरे देश के लिए चेतावनी बन गई है। यह याद दिलाती है कि नाबालिगों के बीच छोटे विवाद भी जानलेवा साबित हो सकते हैं और बच्चों को मानसिक, नैतिक और डिजिटल सुरक्षा की शिक्षा देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

  • Delhi Winter Picnic Spots: सर्दियों में दिल्ली के वो पिकनिक स्पॉट्स जो शोर से दूर सुकून देते हैं

    Delhi Winter Picnic Spots: सर्दियों में दिल्ली के वो पिकनिक स्पॉट्स जो शोर से दूर सुकून देते हैं


    नई दिल्ली। सर्दी का मौसम है। इस मौसम में हवा और माहौल ठंडा होता है लेकिन दोपहर की हल्की सुनहरी धूप अच्छी लगती है। जो लोग नए साल पर कहीं घूमने या ट्रिप पर नहीं जा पाए, वह एक दिन का समय निकालकर इस मौसम में दिल्ली में पिकनिक मनाने जा सकते हैं। पिकनिक के लिए न तो बहुत अधिक समय की जरूरत है और ना ही बहुत ज्यादा खर्च करने की। दोस्तों, परिवार, पार्टनर या बच्चों के साथ पिकनिक पर जाना मजेदार एक्टिविटी हो सकती है। सर्दियों में दिल्ली के कुछ अंडररेटेड पिकनिक स्पाॅट्स पर्यटकों के लिए खुल जाते हैं, जो इंस्टाग्राम से दूर लेकिन दिल के बेहतर करीब हो सकते हैं।

    इन स्पाॅट पर शोर नहीं, सुकून मिलता है। इस सर्दी में दिल्ली के क्लब और कैफ़े तक भूलकर पार्क की ओर रुख करें। जहां आपको पास या टिकट नहीं, सिर्फ एक चादर, घर का बने व्यंजजन और एक दिन का समय चाहिए।

    हौज खास डिस्ट्रिक्ट पार्क, अफ्रीका एवेन्यू
    सर्दियों में हौज खास डिस्ट्रिक्ट पार्क में जाना मजेदार हो सकता है। चौड़े लॉन, पुराने पेड़ों से छनती सर्दियों की धूप और इतना सन्नाटा कि यकीन ही न हो कि आप साउथ दिल्ली में हैं। यह जगह लंच, किताब पढ़ने और गोल्डन आवर वॉक के लिए बनी है। यहां समय तेज नहीं चलता, ठहरकर बहता है।

    मिलेनियम पार्क, सराय काले खा
    खुले आसमान के नीचे फैले लॉन और सामने चमकता शांति स्तूप आपकी छुट्टी को यादगार बना देगा। सराय काले खां में स्थिति मिलेनियम पार्क यह पार्क सर्द शामों को शांत बना देता है। परिवार के साथ पिकनिक, बच्चों की हंसी और सनसेट स्प्रेड्स के लिए यह जगह परफेक्ट है।

    गार्डन ऑफ फाइव सेंसस, साकेत
    साकेत के गार्डन आफ फाइन सेंसस में पिकनिक के लिए जा सकते हैं। ठंडी हवा, फूलों से सजी पगडंडियां और ऐसे शांत कोने, जहां लंबी बातचीत अपने आप गहरी हो जाती है। चिल डेट्स, फोटोग्राफी वॉक और बिना जल्दबाज़ी वाली मुलाक़ातों के लिए आदर्श है।

    डियर पार्क, हौज खास विलेज
    डियर पार्क में खुले वॉकिंग ट्रैक्स, ऊंचे पेड़ और बिना भीड़ के पिकनिक मैट बिछाने की आजादी है। फैमिली पिकनिक, पेट वॉक और सर्द सुबह की सैर के लिए एक भरोसेमंद ठिकाना है।

    नेहरू पार्क, चाणक्यपुरी
    नेहरू पार्क में बड़ा गार्डन है जहां डिप्लोमैटिक इलाके की शांति और सर्दियों की धूप अच्छी मिलती है। आलसी दोपहरों के लिए बनी जगह बेस्ट है। बड़े पिकनिक ग्रुप्स और लेज़ी संडे के लिए क्लासिक चॉइस है।

    अहिंसा स्थल, किला राय पिथौरा, सैनीक फार्म
    शहर के दृश्य दिखाती एक शांत पहाड़ी जगह पर सर्द हवा अपने आप रफ्तार कम कर देती है। शांत सुबह, ध्यान और साइलेंट पिकनिक के लिए यह जगह बोलती नहीं, महसूस कराती है।

    महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क, अनुव्रत मार्ग
    महरौली आर्कियोलाॅजिकल पार्क में पत्थर के स्मारक, जंगलनुमा रास्ते और यहां की खामोशी सुकून भरा दिन बिताने के लिए बेस्ट है। हिस्ट्री लवर्स, लंबे वॉक और सोलो विंटर पिकनिक के लिए यह जगह किसी कविता से कम नहीं है।

    बांसरेरा पार्क, गंगा विहार, सराय काले खां
    सराय काले खां के बांससरेरा पार्क में पिकनिक मनाने जा सकते हैं। यहां बांस से घिरे रास्ते, ठंडी हवा और छायादार जगहें आपको खुश कर देंगी। मॉर्निंग पिकनिक और स्लो नेचर वॉक के लिए यह एक सॉफ्ट, हराभरा अनुभव देगा।

  • मेरे पिता का नाम नहीं मिटाया जा सकता, रितेश देशमुख ने रवींद्र चव्हाण की विवादित टिप्पणी पर किया करारा पलटवार

    मेरे पिता का नाम नहीं मिटाया जा सकता, रितेश देशमुख ने रवींद्र चव्हाण की विवादित टिप्पणी पर किया करारा पलटवार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के महाराष्ट्र इकाई अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बारे में विवादित टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में गर्माहट बढ़ा दी है। चव्हाण ने सोमवार को कहा था कि विलासराव देशमुख की यादें उनके गृह नगर लातूर से मिटा दी जाएंगी। इस बयान के बाद कांग्रेस और एनसीपी समेत कई दलों ने कड़ी आपत्ति जताई।

    इस विवाद पर रितेश देशमुख, जो कि विलासराव देशमुख के बेटे और बॉलीवुड अभिनेता हैं, ने मंगलवार को भावुक लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी करते हुए कहा, मैं हाथ जोड़कर कहना चाहता हूं कि जो लोग जनता के लिए जीते हैं, उनके नाम लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ जाते हैं। लिखे हुए को मिटाया जा सकता है, लेकिन दिलों पर पड़ी गहरी छाप को नहीं मिटाया जा सकता।

    रितेश का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और उनके समर्थन में लोग सामने आए।

    विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के कद्दावर नेताओं में से एक थे। उन्होंने लातूर से कई बार विधायक का चुनाव जीता, दो बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर कार्य किया और केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे। उनके योगदान को महाराष्ट्र के विकास और प्रशासनिक स्थिरता के लिए याद किया जाता है। ऐसे में उनके नाम और विरासत को लेकर की गई टिप्पणी ने स्वाभाविक रूप से लोगों की भावनाओं को आहत किया।

    कांग्रेस ने रवींद्र चव्हाण के बयान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह सत्ता के अहंकार और दिवंगत नेता के योगदान को कमतर आंकने का प्रयास है। पार्टी ने कहा कि इस तरह के बयान राजनीतिक मर्यादाओं और देशमुख की विरासत के प्रति अज्ञानता को दर्शाते हैं।

    इसी विवाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) भी कूद पड़ी। पार्टी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक ने कहा कि दिवंगत नेताओं को लेकर नैतिक मर्यादा का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, “विलासराव देशमुख लातूर से कई बार चुनाव जीत चुके हैं, महाराष्ट्र के कई बार मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में मंत्री भी। दिवंगत आत्माओं के बारे में बोलते समय मर्यादा बनाए रखना सभी के लिए जरूरी है।

    किसी के नाम या विरासत को मिटाने की बात करना उचित नहीं।

    इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग रितेश देशमुख के समर्थन में आए और दिवंगत नेता के योगदान की सराहना कर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना यह दर्शाती है कि नेता चाहे चले जाएं, लेकिन उनकी विरासत और कार्य आज भी लोगों के दिलों में जिंदा रहती है।

    रितेश देशमुख का यह बयान केवल एक बेटे की भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की भावना का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने विलासराव देशमुख के नेतृत्व और कार्यों को नज़दीक से देखा और अनुभव किया। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि राजनीति में बयान देते समय भाषा और मर्यादा का ध्यान रखना कितना आवश्यक है।

    फिलहाल, रवींद्र चव्हाण या बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई की तरफ से कोई औपचारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारे इस मामले पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का राजनीतिक नतीजा क्या होता है और मर्यादा के विषय में कोई पहल की जाती है या नहीं।
  • बांग्लादेश की मैच रिशेड्यूलिंग पर BCCI लगाएगा ब्रेक? भारत सरकार का रोल कितना अहम, 5 पॉइंट्स में समझिए

    बांग्लादेश की मैच रिशेड्यूलिंग पर BCCI लगाएगा ब्रेक? भारत सरकार का रोल कितना अहम, 5 पॉइंट्स में समझिए

    नई दिल्ली। मुस्ताफिजुर रहमान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ एक खिलाड़ी या एक टीम तक सीमित नहीं रहा है. यह मामला धीरे-धीरे इंटरनेशनल क्रिकेट और भारत-बांग्लादेश रिश्तों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने साफ शब्दों में कहा है कि वह भारत में सुरक्षित महसूस नहीं करता और इसलिए उसने ICC से मांग की है कि T20 वर्ल्ड कप 2026 में उसके मैच भारत की जगह श्रीलंका में कराए जाएं. इस मांग के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या BCCI इस रिशेड्यूलिंग को रोक सकता है और भारत सरकार की इसमें क्या भूमिका होगी.

    ICC की चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस

    अब तक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की तरफ से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ICC चेयरमैन जय शाह ने शेड्यूल पर दोबारा विचार करने के संकेत दिए हैं, लेकिन जब तक ICC की तरफ से लिखित या आधिकारिक फैसला सामने नहीं आता, तब तक यह साफ नहीं है कि बांग्लादेश की मांग मानी जाएगी या नहीं. अगले कुछ दिनों में ICC, BCCI और BCB के बीच बैठक हो सकती है, जिसके बाद तस्वीर साफ होने की उम्मीद है.

    BCCI के अधिकार कितने मजबूत हैं?

    T20 वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन भारत और श्रीलंका की मेजबानी में हो रहा है. ऐसे में भारत में होने वाले मैचों की ग्राउंड लेवल की जिम्मेदारी BCCI के पास है. स्टेडियम, सिक्योरिटी, टिकटिंग, होटल और ट्रैवल जैसे सारे इंतजाम BCCI देख रही है. अगर ऐन मौके पर मैच दूसरी जगह शिफ्ट होते हैं तो इससे लॉजिस्टिक्स और रेवेन्यू दोनों पर असर पड़ेगा. ऐसे में BCCI के पास यह कहने का पूरा अधिकार है कि अब शेड्यूल बदलना आसान नहीं है.

    भारत सरकार की एंट्री क्यों अहम है

    यह मामला अब सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा. बांग्लादेश सरकार पहले ही IPL 2026 के टेलीकास्ट पर रोक लगाने जैसा सख्त कदम उठा चुकी है. ऐसे में वर्ल्ड कप मैचों की रिशेड्यूलिंग का फैसला दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को भी प्रभावित कर सकता है. BCCI किसी भी बड़े फैसले से पहले भारत सरकार से सलाह ले सकती है. हाल ही में पूर्व बांग्लादेशी पीएम खालिदा जिया का निधन हो गया था. उसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर उनके अंतिम संस्कार पर बांग्लादेश पहुंचे थे. उस दौरान दोनों ही तरफ से एक पॉजिटिव मैसेज गया था. इसलिए विदेश नीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार का रुख बेहद अहम होगा.

    ICC बांग्लादेश पर एक्शन ले सकता है?

    क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं, जब किसी टीम ने सुरक्षा कारणों से मैच खेलने से इनकार किया और उसे नुकसान उठाना पड़ा. 1996 और 2003 वर्ल्ड कप में ऐसा हो चुका है, जहां मैच न खेलने वाली टीमों को अंक गंवाने पड़े थे. यहां तक कि 2016 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था. ऐसे में अगर बांग्लादेश मैच खेलने से इनकार करता है तो ICC कार्रवाई कर सकता है, हालांकि भारत-पाकिस्तान मैचों के उदाहरण के चलते फैसला आसान नहीं होगा.

    बाकी टीमों की परेशानी भी बनेगी मुद्दा

    अगर बांग्लादेश के मैच भारत से हटाकर श्रीलंका किए जाते हैं तो उसके ग्रुप की बाकी टीमों को भी दिक्कत होगी. उन्हें भारत और श्रीलंका के बीच बार-बार सफर करना पड़ेगा, जो टाइट शेड्यूल में मुश्किल है। ऐसे में दूसरी टीमें भी आपत्ति जता सकती हैं.

    कुल मिलाकर, बांग्लादेश की मांग को मानना ICC के लिए आसान फैसला नहीं है. इसमें BCCI, भारत सरकार, दूसरी टीमें और करोड़ों फैंस सभी के हित जुड़े हुए हैं.