Author: bharati

  • शक्ति कपूर का खुलासा: ऑनस्क्रीन सीन देखकर थिएटर से उठकर चले गए थे माता-पिता

    शक्ति कपूर का खुलासा: ऑनस्क्रीन सीन देखकर थिएटर से उठकर चले गए थे माता-पिता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के लीजेंडरी एक्टर शक्ति कपूर ने हाल ही में अपने करियर और परिवार के साथ जुड़ी एक दिलचस्प याद साझा की। शक्ति कपूर ने बताया कि उनके माता-पिता को उनके नेगेटिव किरदार और फिल्मों में महिलाओं के साथ निभाए गए सीन देखकर अक्सर शर्मिंदगी महसूस होती थी। एक बार तो ऐसा हुआ कि जब शक्ति कपूर के पहले ही सीन में उन्होंने एक लड़की का दुपट्टा खींचा, तो उनके माता-पिता थिएटर से उठकर बाहर चले गए।

    थिएटर में माता-पिता का रिएक्शन
    शक्ति कपूर ने अल्फा नियॉन स्टूडियोज के साथ बातचीत में बताया, मेरी दो बड़ी फिल्में रिलीज़ हो चुकी थीं और एक और फिल्म ‘इंसानियत के दुश्मन’ रिलीज़ हुई। मैंने अपने माता-पिता को फिल्म देखने के लिए बुलाया। लेकिन पहले ही सीन में मुझे एक लड़की का दुपट्टा खींचते देखा तो मेरे पापा ने तुरंत मेरी मां से कहा कि बाहर चले जाएं। उन्होंने कहा, ‘यह पहले बाहर ऐसा करता था और अब बड़े पर्दे पर भी कर रहा है। मैं यह फिल्म नहीं देखना चाहता।’”

    माता-पिता का सवाल: गुंडों के रोल क्यों?
    शक्ति कपूर ने आगे बताया कि उनके माता-पिता ने उनसे पूछा, “तुम गुंडों के रोल क्यों कर रहे हो? तुम्हें अच्छे इंसान के किरदार निभाने चाहिए। हेमा मालिनी और जीनत अमान जैसी एक्ट्रेस के साथ क्यों ऐसा काम कर रहे हो? लेकिन शक्ति कपूर ने अपनी राह चुनी। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि आपने मुझे जन्म दिया है और सिर्फ यही चेहरा दिया है। इस चेहरे को देखकर कोई मुझे अच्छे इंसान या हीरो का रोल नहीं देगा।

    मैं अपनी पहचान के अनुसार ही रोल चुनता हूँ।”

    बेटी श्रद्धा कपूर को भी होती थी शर्मिंदगी
    शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर, जो आज बॉलीवुड की सफल एक्ट्रेस हैं, भी बचपन में अपने पिता के निगेटिव रोल्स से शर्मिंदा हुआ करती थीं। श्रद्धा ने एक इंटरव्यू में कहा, “जब मैं छोटी थी, तो उनके विलेन रोल्स देखकर मैं नाराज हो जाती थी। मुझे यह पसंद नहीं आता था, लेकिन मेरी मां ने समझाया कि यह सिर्फ एक्टिंग है। अब मैं समझ गई हूँ कि पिता अपनी कला के प्रति कितने समर्पित हैं।”

    शक्ति कपूर के यादगार निगेटिव रोल
    1990 के दशक में शक्ति कपूर ने कई यादगार निगेटिव किरदार निभाए, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड में अलग पहचान दिलाई।

    भले ही उनके माता-पिता को शुरुआती दौर में ये रोल स्वीकार्य नहीं लगे, लेकिन शक्ति कपूर ने अपनी कला और अभिनय के दम पर नेगेटिव किरदारों में भी दर्शकों का दिल जीत लिया।

    शक्ति कपूर का यह खुलासा दर्शाता है कि बॉलीवुड में संघर्ष और परिवार की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। माता-पिता का विरोध, बेटी की नाराजगी और आलोचना के बावजूद शक्ति कपूर ने अपनी कला और पहचान बनाए रखी। यह कहानी दर्शकों को यह भी याद दिलाती है कि सच्ची प्रतिभा और आत्मविश्वास के सामने किसी भी आलोचना का असर कम होता है।

  • 5 जनवरी का पंचांग भद्राकाल रहेगाआडल योग नहीं लगेगाजानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

    5 जनवरी का पंचांग भद्राकाल रहेगाआडल योग नहीं लगेगाजानें शुभ-अशुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । 5 जनवरी2026 का पंचांग अनुसारइस दिन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी और यह दिन सोमवार को पड़ेगा। सोमवार को भद्राकाल का साया रहेगाजो रात 8 बजकर 53 मिनट से लेकर अगले दिन 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस समय किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिएक्योंकि भद्राकाल में किया गया शुभ काम भी अशुभ परिणाम दे सकता है। द्वितीया तिथि सुबह 9 बजकर 56 मिनट तक रहेगीइसके बाद तृतीया तिथि का आगमन होगा। आइए जानते हैं आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त के बारे में।
    शुभ मुहूर्त

    अभिजित मुहूर्त दोपहर 1206 से 1247 तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 536 से 603 तक, अमृत काल मुहूर्त शाम 729 से 858 तक, विजय मुहूर्त दोपहर 210 से 252 तक, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 526 से 620 तक।
    अशुभ मुहूर्त

    राहुकाल सुबह 833 से 951 तक, गुलिक काल दोपहर 145 से 302 तक, यमगण्ड काल सुबह 1109 से 1227 तक, दुर्मुहूर्त दोपहर 1247 से 129 तक।
    विशेष जानकारी
    5 जनवरी को आडल योग नहीं लगेगाजो कि एक शुभ योग माना जाता है। सूर्योदय और सूर्यास्त, सूर्योदय सुबह 715, सूर्यास्त शाम 538,।
    चन्द्रोदय

    चन्द्रोदय शाम 749 चन्द्रोदय की अवधि 6 जनवरी की सुबह 856 तक। 
    दिशाशूल

    रविवार के दिन दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा। इसका मतलब है कि सोमवार को यदि आप यात्रा पर जाने का सोच रहे हैं तो पूर्व दिशा की यात्रा से बचें। यह दिशा वर्जित मानी जाती है। यदि यात्रा जरूरी होतो दही-जीरा खाकर और दर्पण देखकर यात्रा पर निकलने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।इस दिन पंचांग में दी गई जानकारी को ध्यान में रखकर अपने कार्यों की योजना बनाना शुभ रहेगा।

  • नववर्ष के पहले रविवार को महाकाल मंदिर में भक्तों का उमड़ा सैलाबअद्भुत शृंगार में दर्शन

    नववर्ष के पहले रविवार को महाकाल मंदिर में भक्तों का उमड़ा सैलाबअद्भुत शृंगार में दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन नववर्ष के पहले रविवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा हुआ। साल के पहले रविवार पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचे। इस दिन को विशेष रूप से भस्म आरती और बाबा के अद्भुत शृंगार के लिए जाना जाता है।भक्तों का उत्साह सर्द मौसम में भी बरकरार रहा और देर रात से ही वे भस्म आरती में शामिल होने के लिए मंदिर परिसर में लाइनों में खड़े नजर आए। श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन से अभिभूत हो गएऔर हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा मंदिर गूंज उठा।

    महाकाल का अद्भुत शृंगार

    माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के रविवार को बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गयाजिसे देखकर भक्त भावविभोर हो उठे। इस शृंगार में बाबा के माथे पर बेलपत्र और चांदी का चांद चढ़ाया गयाजिससे उनके दिव्य स्वरूप की अनुभूति हुई। शृंगार के दौरान बाबा पर घीदूधदही और रस से जलाभिषेक किया गया। इसके बादभांग से बाबा का शृंगार किया गया। बाबा महाकाल का यह रूप भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षक था और उन्हें आंतरिक शांति का अनुभव हुआ।

    भस्म आरती का महत्व

    शृंगार के बाद भस्म आरती का आयोजन हुआजिसमें बाबा महाकाल को भस्म से नहलाया गया। भस्म आरती के दौरान माना जाता है कि बाबा निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैंलेकिन शृंगार के बाद वे साकार रूप में अपने भक्तों के कष्ट हरने आते हैं। इस दौरान बाबा महाकाल ने कमल और मखाने की माला पहने हुएअपने भक्तों को आलोकिक रूप में दर्शन दिए। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत अभूतपूर्व थाऔर मंदिर में जय श्री महाकाल की गूंज सुनाई दी।

    महाकाल के अलग-अलग रूप

    बाबा महाकाल का शृंगार हर दिन अलग तरीके से किया जाता है। प्रत्येक तिथि और शुभ दिन पर बाबा अपने भक्तों को नए रूप में दर्शन देते हैंयही कारण है कि भस्म आरती में हमेशा भक्तों की अधिकतम संख्या होती है। बाबा महाकाल की सेवा में सुबह से शाम तक छह अलग-अलग आरतियां होती हैंजो प्रत्येक में अपने आप में विशिष्ट होती हैं बाबा महाकाल के दर्शन और शृंगार से श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा और भक्ति से अभिभूत हो जाता है। इस नववर्ष के पहले रविवार ने भक्तों को बाबा महाकाल के नए रूप से साक्षात्कार करने का अवसर दियाऔर उनके हर कष्ट को हरने की शक्ति को महसूस किया।

  • सर्दियों में छाती में दर्द की समस्या आयुर्वेदिक उपायों से पाएं राहत

    सर्दियों में छाती में दर्द की समस्या आयुर्वेदिक उपायों से पाएं राहत


    नई दिल्ली । सर्दियों में वातावरण में बदलाव होने पर लोग अक्सर छाती में हल्का दर्दभारीपन या जकड़न की शिकायत करते हैं। यह केवल दिल से जुड़ी बीमारियों का संकेत नहीं होताबल्कि सर्दियों में होने वाली ठंडक और जकड़न का परिणाम है। ठंडी हवाओं से फेफड़ों में संकुचन बढ़ता हैजिससे छाती में कफ की अधिकता हो जाती है और सांस लेने में परेशानी होती है। इस समस्या से निपटने के लिए आयुर्वेद में कुछ प्रभावी उपाय बताए गए हैं।

    सीने में जकड़न का कारण

    सर्दियों में ठंडी हवा और वातावरण के बदलाव से शरीर की नसों में संकुचन आता है। यही वजह है कि सर्दी में छाती में भारीपन और दर्द की समस्या होती है। जब फेफड़ों में संकुचन बढ़ता हैतो कफ का निर्माण अधिक होने लगता हैजो सांस लेने और बोलने में कठिनाई उत्पन्न करता है। यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा होती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

    आयुर्वेदिक उपाय
    आयुर्वेद में इस समस्या से राहत पाने के लिए कई सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं।
    गुनगुने पानी में शहद
    गुनगुने पानी में शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से कफ ढीला होता है और गला नरम रहता है। यह उपाय छाती में जकड़न को कम करने में सहायक होता है।

    छाती की मालिश

    सरसों के तेल में लहसुनअजवाइन और लौंग को पका कर इस मिश्रण से छाती और कंधे की हल्की मालिश करें। रात को सोने से पहले यह मालिश करने से शरीर गर्म रहता है और दर्द में आराम मिलता है।

    भाप लेना

    दिन में दो बार भाप लें। भाप को मुंह से अंदर खींचने से कफ ढीला होता है और फेफड़ों की मांसपेशियों को आराम मिलता है। यह छाती की जकड़न से राहत दिलाने में मदद करता है।

    चूर्ण का सेवन

    आयुर्वेदिक चूर्ण जैसे सितोपलादि चूर्णतालीसागी चूर्ण या त्रिकुट चूर्ण का सेवन करने से शरीर गर्म रहता है और पाचन शक्ति मजबूत होती है। ये चूर्ण कफ को कम करने में सहायक होते हैं। सर्दी में छाती में जकड़न और दर्द की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिएक्योंकि यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आयुर्वेद के प्राकृतिक उपायों को अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। अगर समस्या बढ़ जाए तो डॉक्टर से संपर्क करना भी जरूरी है।

  • अटल आवासीय विद्यालय में कक्षा 6 और 9 के लिए प्रवेश शुरूऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 31 जनवरी तक

    अटल आवासीय विद्यालय में कक्षा 6 और 9 के लिए प्रवेश शुरूऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 31 जनवरी तक


    आगरा । आगरा के कोरई स्थित अटल आवासीय विद्यालय में आगामी सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6 और 9 में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह योजना प्रदेश सरकार की ओर से श्रमिक और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इच्छुक छात्र 31 जनवरी 2026 तक upbocw.in पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रवेश परीक्षा 22 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगीजिसके परिणाम पर चयन किया जाएगा।
    इस प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उप श्रमायुक्त आगराश्री सियाराम ने बताया कि अटल आवासीय विद्यालय एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य श्रमिक वर्ग के बच्चों को शिक्षा का बेहतर अवसर प्रदान करना है। इस विद्यालय में छात्रों को सुरक्षित और अनुशासित वातावरण में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा।
    इस योजना का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक समानता को प्रोत्साहित करना और बच्चों को सर्वश्रेष्ठ शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।आवेदन प्रक्रिया इच्छुक अभ्यर्थी को पहले upbocw.in पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन पत्र भरना होगा। आवेदन पत्र भरने के बादअभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि पर प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की सुविधा भी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
    पात्रता की शर्तें

    आवेदन करने वाले छात्रों का जन्म 2008 और 2010 के बीच होना चाहिए। अभ्यर्थी को प्रदेश के किसी भी क्षेत्र से होना चाहिए और वे श्रमिक या वंचित वर्ग से संबंधित होने चाहिए। कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले छात्रों का चयन प्रवेश परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।अटल आवासीय विद्यालय का उद्देश्य न केवल बच्चों को बेहतर शिक्षा देना हैबल्कि उन्हें एक सुरक्षितसंरचित और अनुशासित माहौल में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करना है। यह योजना खासतौर पर उन बच्चों के लिए है जो शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त नहीं कर पाते हैं।जो छात्र इस अवसर का लाभ उठाना चाहते हैंवे जल्द से जल्द ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करें और आगामी प्रवेश परीक्षा के लिए तैयार रहें।

  • एम्स भोपाल को मिलेंगी गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी हाईटेक सुविधाएं ट्रांसप्लांट के लिए नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू

    एम्स भोपाल को मिलेंगी गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी हाईटेक सुविधाएं ट्रांसप्लांट के लिए नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू

    भोपाल । नए साल 2026 में मध्य प्रदेश के मरीजों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उम्मीद सामने आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स भोपाल इस साल अपने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक विस्तार करने जा रहा है। इस विस्तार के तहत एम्स भोपाल में गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को स्थापित किया जाएगा जिससे गंभीर बीमारियों खासकर कैंसर और ट्यूमर के इलाज में बड़े सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    एम्स भोपाल इस वर्ष ‘ट्रांसप्लांट’ के लिए समर्पित एक नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इस ऑपरेशन थिएटर के शुरू होने से हृदय लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट अब एक ही छत के नीचे संक्रमण रहित वातावरण में किए जा सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वेटिंग लिस्ट कम हो सकेगी और अधिक मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा जिससे उनका जीवन बचाया जा सकेगा।

    इसके अलावा गामा नाइफ तकनीक का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर और मस्तिष्क के अन्य जटिल रोगों के इलाज में किया जाएगा। गामा नाइफ के माध्यम से बिना चीरा लगाए सटीक रेडिएशन के जरिए ट्यूमर का इलाज संभव हो सकेगा। यह तकनीक विशेषकर उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जिन्हें ब्रेन ट्यूमर के इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    एम्स भोपाल के इस नए कदम से अब मरीजों को दिल्ली मुंबई या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी क्योंकि यहां उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। संस्थान का पूरा फोकस इस वर्ष डायग्नोस्टिक सेवाओं को और बेहतर बनाने और क्रिटिकल केयर की क्षमता को बढ़ाने पररहेगा।यह पहल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के मरीजों केलिए भी राहत लेकर आएगी क्योंकि अब उन्हें उच्च गुणवत्ता वालेउपचार के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

  • भोपाल मेट्रो में पैसेंजर की कमी 14 दिन में ही ट्रिप घटाई नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू

    भोपाल मेट्रो में पैसेंजर की कमी 14 दिन में ही ट्रिप घटाई नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू


    भोपाल । भोपाल मेट्रो में कम पैसेंजर की संख्या को लेकर एक बड़ी समस्या सामने आई है। मेट्रो की शुरुआत के सिर्फ 14 दिन बाद ही मेट्रो कॉर्पोरेशन को यात्री कम होने की वजह से टाइमिंग और ट्रिप्स में बदलाव करना पड़ा है। अब मेट्रो का नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू होगा जिसमें ट्रिप्स की संख्या कम कर दी गई है और टाइमिंग में भी बदलाव किया गया है।

    पहले मेट्रो का संचालन सुबह 9 बजे से शुरू होता था लेकिन अब एम्स स्टेशन से मेट्रो दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। वहीं शाम का आखिरी ट्रिप अब साढ़े सात बजे होगा जबकि पहले यह समय देर रात तक था। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि मेट्रो को अपेक्षित संख्या में यात्री नहीं मिल रहे हैं। शुरुआत के दिनों में भी मेट्रो की सवारी में गिरावट देखी गई है और अब यह स्थिति इस हद तक पहुँच चुकी है कि मेट्रो को दिन में कम ट्रिप्स करने पड़ रहे हैं।

    भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को हुआ था जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल ने इसका उद्घाटन किया। इसके बाद 21 दिसंबर से मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ था। उद्घाटन के पहले दिन लोगों में मेट्रो को लेकर काफी उत्साह था और 6568 पैसेंजर ने मेट्रो में सफर किया था। हालांकि इसके बाद यात्रियों की संख्या में गिरावट आई और मेट्रो के संचालन के लिए आवश्यक पैसेंजर संख्या नहीं जुटाई जा सकी।

    भोपाल मेट्रो के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मेट्रो का संचालन काफी महंगा होता है और इसकी लागत को कवर करने के लिए पैसेंजर की संख्या जरूरी है। अब मेट्रो को यात्रा की स्थिति में सुधार लाने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार करना होगा।

  • ग्वालियर में एआई की मदद से महिला की लाश की पहचान पुलिस ने स्कैच से संदेही तक पहुंचा

    ग्वालियर में एआई की मदद से महिला की लाश की पहचान पुलिस ने स्कैच से संदेही तक पहुंचा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जहां पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की मदद से एक महिला की लाश की पहचान की। यह महिला गोला का मंदिर स्थित कटारे फार्म में झाड़ियों के बीच अर्द्धनग्न अवस्था में मृत पाई गई थी महिला का सिर पत्थर से कुचला गया था जिससे उसकी हत्या की आशंका जताई जा रही थी।

    पुलिस ने एआई तकनीक का उपयोग कर महिला का स्कैच तैयार कराया। इस स्कैच के आधार पर जब पुलिस ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया तो उन्होंने महिला की पहचान “कल्लो उर्फ कालीबाई” के रूप में की। वह अक्सर उस क्षेत्र में घूमती रहती थी और वहां के स्थानीय लोग उसे पहचानते थे।

    स्कैच के आधार पर पुलिस ने फिर से सीसीटीवी फुटेज की जांच की और देखा कि महिला एक युवक के साथ घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर सड़क पर चलती हुई दिखाई दी थी। पुलिस ने इस युवक को प्रमुख संदेही मानते हुए उसकी तलाश शुरू की। संदेही की जैकेट भी घटनास्थल से मिले महिला के कपड़ों के पास पाई गई जिससे पुलिस को और सबूत मिले हैं।

    इस खोज ने पुलिस को मामले की दिशा में महत्वपूर्ण मदद दी है और इस जघन्य हत्या के आरोपी तक पहुंचने के प्रयासों को तेज किया है। पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कोशिश करेंगे।यह घटना ग्वालियर के कटारे फार्म में सोमवार को हुई थी जब महिला की लाश झाड़ियों में पाई गई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी और अब एआई तकनीक के सहारे इस हत्याकांड के पीछे के रहस्यों को सुलझाने में मदद मिल रही है।

  • भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज

    भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज


    भोपाल । भोपाल के जेपी अस्पताल जिला चिकित्सालय में एक गंभीर घटना सामने आई है जहां शुक्रवार शाम एक मरीज को फफूंद लगी दवा दी गई। यह मामला दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। मरीज ने दवा लेने से पहले उसे देखा जिससे किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सका। यदि मरीज ने दवा की स्थिति का ध्यान नहीं किया होता तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकती थी।

    मरीज सतीष सेन ने बताया कि वे शुक्रवार शाम करीब पांच बजे पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते जेपी अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में पहुंचे थे। ओपीडी में उस वक्त कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और इंटर्न डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया। इसके बाद मरीज को एक्स-रे की सिफारिश की गई और दर्द की दवा लिखी गई जो बाद में फफूंद लगी हुई मिली।

    इस घटना ने अस्पताल में चिकित्सा गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज को अगर दवा की स्थिति का पता न चलता तो इसे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा माना जा सकता था। इसके अलावा सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने भी ओपीडी में इलाज के स्तर को प्रभावित किया।

    इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य संगठनों नेप्रशासन से कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जासके और मरीजों को बेहतर इलाज और दवाइयां मिल सकें। अस्पताल प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत कदम उठाने चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को गुणवत्ता वाली दवाइयां और इलाज मिले।

  • भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर

    भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास बसी 42 बस्तियों की एक बड़ी आबादी अब भी गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर है। यह पानी मल-मूत्र और घातक रसायनों से भरा हुआ है जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। नगर निगम ने 2017 में इन बस्तियों में पाइपलाइन के जरिए जलापूर्ति शुरू की थी लेकिन यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजरती है जिससे पानी की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

    गैस त्रासदी से पीड़ित इन इलाकों के लोग अब तक बेहतर पानी की सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति ने इन बस्तियों में स्थित हैंडपंप और कुओं के पानी की जांच की और उसमें भारी मात्रा में हैवी मेटल डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन पाए गए।

    इसके बाद समिति ने नगर निगम को पेयजल के लिए पाइपलाइन डालने का निर्देश दिया। हालांकि यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही थी जिसके कारण इसमें भारी मात्रा में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। ई. कोलाई बैक्टीरिया सामान्यतः मलजल में पाया जाता है और यह इंसान के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है।

    2018 में किए गए पानी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पाइपलाइन के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा बहुत अधिक थी जो लोगों के लिए गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और आज भी लोग इस गंदे पानी को पीने को मजबूर हैं।

    गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक है क्योंकि पहले ही वे जानलेवा गैसों से प्रभावित हुए थे और अब उन्हें दूषित पानी पीने के कारण नए स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ रहा है। इन बस्तियों के निवासी बार-बार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई सार्थक समाधान नहीं निकल सका है।

    इस संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए गैस पीड़ित संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन भी किया है लेकिन शासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। 2017 में नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र देकर जलापूर्ति में सुधार करने का वादा किया था लेकिन सात साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    यह संकट सिर्फ पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी खतरा बन चुका है। नागरिक समाज और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं ताकि इन 42 बस्तियों के लोगों को साफ पानी मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।